Category Archives: आचार्य श्रीराम आर्य जी

कुरान समीक्षा : ईसा के बाद अहमद आवेगा

ईसा के बाद अहमद आवेगा

खुदा ने ऐसी गलत बात क्यों कही जो ईसा ने कभी भी इन्जील में नहीं कही थी कि जिसे खुदा ने अपना पैगम्बर बताया था, इससे कुरान में झूठी बात लिखी होने का ऐब भी है। यह आयत कुरान पारा १५ सूरे कहफ रूकू १ आयत १ को गलत साबित कर देती है।

देखिये कुरान में कहा गया है कि-

व इज् का- ल अीसब्नु मर्-य……………।।

(कुरान मजीद पारा २८ सूरा सफ्फ रूकू १ आयत ६)

ईसा ने कहा….. एक पैगाम्बर की खुशखबरी देता हूँ जो मेरे बाद आवेगा उसका नाम ‘‘अहमद’’ होगा।

समीक्षा

ईसा ने इन्जील में यह भविष्यवाणी कभी नहीं की थी कि मेरे बाद ‘‘अहमद’’आवेगा, कुरान की यह बात बिल्कुल गलत है।

कुरान समीक्षा : औरतों को चेली बनाने की स्वीकृति

औरतों को चेली बनाने की स्वीकृति

बतावें कि यदि चेलियों से जिना किया गया है तो वह गुनाह तो नहीं माना जावेगा। चेली और प्रेमिका में इस्लाम की निगाह में अन्तर क्या है?

देखिये कुरान में कहा गया है कि-

या अय्युहन्नबिय्यु इजा जा-…………।।

(कुरान मजीद पारा २८ सूरा मुम्तहिना रूकू २ आयत १२)

ऐ पैगम्बर! जब तेरे पास मुसलमान औरतें आवें और इस पर तेरी चेली बनाना चाहें…..तो तुम उनको चेली बना लिया करो…………।

समीक्षा

खुदा मुहम्मद साहब के हर शौक को पूरा किया करता था और उनको औरतें भी भेज देता था बांदियां व चेलियाँ रखने की भी इजाजत थी।

बुआओं, मौसियों आदि की बेटियों को भी निकाह में लेने की आज्ञा केवल उन्हीं को दे रखी थी

कुरान समीक्षा : खुदा को कर्ज दो बदले में दूना मिलेगा

खुदा को कर्ज दो बदले में दूना मिलेगा

कुरान पारा ६ सूरे मायदा रूकू २ आयत १२ में खुदा को कर्ज देने से गुनाह माफ का कुरान ने वायदा किया था और यहां खुदा कर्ज लेने पर उसे दूना, मयसूद के वापस देने का वायदा करता है। बतावें कि सूद देना व लेना इस्लाम में गुनाह कैसे हो सकता है।

देखिये कुरान में कहा गया है कि-

मन् जल्लजी युक्रिजुल्ला-ह कर्…………।।

(कुरान मजीद पारा २७ सूरा हदीद रूकू २ आयत ११)

ऐसा कौन है जो अल्लाह को खुश दिली से उधार दे फिर वह उसके लिए दूना कर दे और उसके लिए इज्जत का फल जन्नत है।

समीक्षा

उधार के लिए कर्ज देना मुनासिब होगा। आश्चर्य है कि खुदा को भी कर्ज मांगना पड़ा है और पाप माफ करने का लालच देना पड़ा है।

कुरान समीक्षा : सूरज के निकलने और डूबने की जगह है

सूरज के निकलने और डूबने की जगह है

सूरज निकलने और डूबने की जगह कहां पर है बताने का कष्ट करें। क्या इससे यह जाहिर नहीं है कि खुदा की इल्मी लियाकत बहुत ही कम थी जो वह सूरज निकलने व डूबने की जगह भी जानता था।

देखिये कुरान में कहा गया है कि-

रब्बुल-मश्रिकैनि व रब्बुल-मग्रिबैनि………..।।

(कुरान मजीद पारा २७ सूरा रहमान रूकू १ आयत १७)

और वहीं सूरज निकलने और डूबने की जगहों का मालिक है।

समीक्षा

अरब में यह जगह कहाँ पर है? यह बात कुरान को और खोल देनी चाहिए थी तो खुदा के सही इल्म का सभी को ज्ञान हो जाता। कुरान की बातें ऐसी ही हैं जिन पर पढ़े लिखे लोग हँसे बिना न रह सकेंगे।

कुरान समीक्षा : खुदा जन्नत अर्थात् स्वर्ग में रहता है

खुदा जन्नत अर्थात् स्वर्ग में रहता है

खुदा का महल जन्नत अर्थात् स्वर्ग में है जहां वह रहता है, उसके पास ही प्यारी-प्यारी करोड़ों हूरें अर्थात् सुन्दर स्त्रियां भी रहती हैं, शराब की नहरें भी खुदा ही के पास हैं। तो बतावें कि खुदा की जन्नत अर्थात् स्वर्ग हमारी पृथ्वी से कितनी दूर व किस दिशा में है ? क्या आप जन्नत की मौजूदगी साबित कर सकते हैं?

देखिये कुरान में कहा गया है कि-

इन्नल्-मुत्तक-न फी जन्नातिंव……….।।

(कुरान मजीद पारा २७ सूरा कमर रूकू ३ आयत ५५)

परहेजगार बैकुण्ड के बागों ओर नहरो में होंगे।

फी मक्-अदि सिद्किन् अिन-द…….।।

(कुरान मजीद पारा २७ सूरा कमर रूकू ३ आयत ५५)

सच्ची बैठक में बादशाह के पास जिसका सब पर कब्जा है बैठेंगे।

समीक्षा

खुदा जन्नत अर्थात् बहिश्त में रहता हैं। वहीं पर असंख्य खूबसूरत औरतें तथा सुन्दर-सुन्दर लोंडे भी रहते हैं। वहीं पर हूरों के हुस्न अर्थात् सौन्दर्य की बिक्री का बाजार भी लगता है

(देखो मुकदमाये तफसीरूल्कुरान पृष्ठ ८३ व कुरान परिचय पृष्ठ ११७)

ऐसे ऐशो आराम के बहिश्त में अरबी खुदा की तबियत खूब लगी रहती होगी। वह बढ़ा भाग्यशाली है। तौरेत के अनुसार खुदा के मकान दरवाजे तथा फाटक भी लगे हुए हैं। उनकी रक्षा को बहुत से पहरेदार भी नियत्त रहते हैं। इन्जील के अनुसार-

‘‘खुदा की रक्षा को बीस करोड़ घुड़सवार फौज भी वहां रहती है।’’

(देखो बाइबिल प्रकाशित नाम का अध्याय ९ वाक्य १६)

अरबी खुदा बड़े ठाट-बाट का था जो किसी बड़े जमींदार से किसी बात में भी कम नहीं था। नौकर-चाकर फौजें-महल-हूरें-गिलमें सभी उसके पास बेशुमार थे।

कुरान समीक्षा : खुदा जमीन पर उतर कर आया

खुदा जमीन पर उतर कर आया

खुदा पहले शायद पलंग पर लेटा होगा, फिर उठकर बैठ गया फिर ऊपर से उतर कर नीचे जमीन पर आया।

इससे क्या यह स्पष्ट नहीं है कि वह खुदा हाजिर नाजिर अर्थात् सर्वव्यापक नहीं है। वह आसमान में रहता है और सैर करने कभी-कभी जमीन पर चला आता है और फिर वापस चला जाता है?

ज् मिर्रतिन फस्तवा………।।

(कुरान मजीद पारा २७ सूरा नज्म रूकू १ आयत ६)

(खुदा) जो जोरावर है। फिर सीधा बैठा।

व हु-व बिल्-उफुकिल्-अअ्……….।।

(कुरान मजीद पारा २७ सूरा नज्म रूकू १ आयत ७)

और वह आसमान ऊँचे किनारे पर था।

सुम्-म दना फ-त-दल्ला……….।।

(कुरान मजीद पारा २७ सूरा नज्म रूकू १ आयत ८)

फिर वह नजदीक हुआ और करीब आ गया।

फका-न का-ब कौसैनि औ…………।।

(कुरान मजीद पारा २७ सूरा नज्म रूकू १ आयत ९)

फिर दो कमान के बराबर या उससे भी कम फर्क रह गया।

फऔहा इला अब्दिही मा औहा……..।।

(कुरान मजीद पारा २७ सूरा नज्म रूकू १ आयत १०)

उस वक्त खुदा ने फिर अपने बन्दे ( मुहम्मद) पर हुक्म भेजा।

समीक्षा

खुदा को हाजिर नाजिर (सर्वव्यापक) इस्लाम साबित नहीं कर सकता है।

उसका अरबी खुदा आसमान पर रहता है, वहीं से आता जाता है यह ऊपर के प्रमाण से स्पष्ट है सर्वव्यापक का आना जाना बन ही नहीं सकता है।

कुरान समीक्षा : खुदा अपनी पूजा का भूखा है

खुदा अपनी पूजा का भूखा है

अपनी पूजा का शौक खुदा को पैदा हुआ तो उसने सभी को अपना चेला क्यों नहीं बनाया और क्यों लोगों को स्वयं गुमराह किया? व क्यों लोगों के पीछे शैतान लगाये ताकि वे गुमराह होवें । अपनी पूजा के शौक से खुदा को क्या लाभ पहुंचता था यह बताया जावे?

देखिये कुरान में कहा गया है कि-

व माख-लक्तुल्जि-न वल्इन………।।

(कुरान मजीद पारा २७ सूरा जारियात रूकू ३ आयत ५६)

और मैंने जिन्नों और आदमियों को इसी मतलब से पैदा किया है कि वे हमारी पूजा करें।

समीक्षा

खुदा को अपनी पूजा कराने का शौक प्रत्यक्ष है। इन्सान को उसकी तरक्की व फायदे तथा पुरूषार्थ के लिये पैदा न करके खुदगरजी से खुदा ने पैदा किया है। यदि ऐसी ही बात थी तो दोजख भरने के लिए गुनाहगारों को पैदा करने की क्या जरूरत थी? सभी को खुदापरस्त बना देना चाहिए था।