Category Archives: Islam

HADEES : EMANCIPATING A SLAVE

EMANCIPATING A SLAVE

For some unexplained reason, a few chapters at the end of the book dealing with marriage and divorce are on slaves.  This may be due to a faulty method of classification, or it may be that emancipating a slave was considered a form of talAq, which literally means �freeing� or �undoing the knot�; or it may be that the subject really belongs to the next book, which is on business transactions-a slave, after all, was no more than a chattel.

Modern Muslim writers trying to boost Islam as a humane ideology make much of the sayings of Muhammad on the emancipation (�itq) of slaves.  But the fact remains that Muhammad, by introducing the concept of religious war and by denying human rights to non-Muslims, sanctioned slavery on an unprecedented scale.  Pre-Islamic Arabs, even in their wildest dreams, never imagined that the institution of slavery could take on such massive proportions.  Zubair, a close companion of the Prophet, owned one thousand slaves when he died.  The Prophet himself possessed at least fifty-nine slaves at one stage or another, besides thirty-eight servants, both male and female.  Mirkhond, the Prophet�s fifteenth-century biographer, names them all in his Rauzat-us-Safa.  The fact is that slavery, tribute, and booty became the main props of the new Arab aristocracy.  Slaves continued to suffer under the same old disabilities.  They were the property of their master (saiyid), who could dispose of them as he liked, selling them, gifting them away, hiring them out, lending them, mortgaging them.  Slaves had no property rights.  Whatever they acquired became the property of their masters.  The master had the right to live in concubinage with his female slaves if they confessed Islam or belonged to the �People of the Book.� The QurAn (SUra 4:3, 4:24, 4:25, 23:6) permitted this.  Slavery was interwoven with the Islamic laws of sale, inheritance, and marriage.  And though the slaves fought for their Muslim masters, they were not entitled to the spoils of war according to Muslim religious law.

author : ram swarup

लव जिहाद पर सबसे बड़ा खुलासा: एक हिंदू लड़की, मुसलमान लड़का और बड़ी साजिश…

लव जिहाद पर सबसे बड़ा खुलासा: एक हिंदू लड़की, मुसलमान लड़का और बड़ी साजिश…

सुप्रीम कोर्ट में लव जिहाद का एक ऐसा केस आया है जिसमें लड़की के पिता का कहना है कि उसकी बेटी का ब्रेनबॉश करके और मुसलमान बनाकर उससे निकाह करके ISIS में भर्ती करने के लिए सीरिया भेजा जा रहा था। आज सुप्रीम…

लव जिहाद पर सबसे बड़ा खुलासा: एक हिंदू लड़की, मुसलमान लड़का और बड़ी साजिश...

नई दिल्ली:लव जिहाद का एक ऐसा केस सुप्रीम कोर्ट में आया है जिसमें लड़की के पिता का कहना है कि उसकी बेटी का ब्रेनबॉश करके और मुसलमान बनाकर उससे निकाह करके ISIS में भर्ती करने के लिए सीरिया भेजा जा रहा था। आज सुप्रीम कोर्ट ने इसकी जांच NIA को सौंप दी लेकिन ऐसा ये अकेला केस नहीं हैं। केरल में पिछले दस साल के दौरान करीब दस हजार लड़कियों ने धर्म परिवर्तन किया। इस्लाम कुबूल करके मुस्लिम लड़कों से निकाह किया लेकिन आज जो केस सामने आया है उसमें पिता की बात हाईकोर्ट ने भी मानी।

केरल हाईकोर्ट ने जताई थी ‘लव जिहाद’ की आशंका

केरल हाईकोर्ट ने भी आशंका जताई है कि ISIS के इशारे पर लव जिहाद के जरिए लड़कियों को फंसा कर उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। उनका ब्रेनबॉश करके उन्हें आतंकवाद के रास्ते पर भेजा जा रहा है। हाईकोर्ट ने इस आधार पर एक मैरिज कैंसिल कर दी और लड़की को उसके माता पिता की कस्टडी में भेज दिया।

‘लव जिहाद’ केस की जांच करेगी NIA

केरल लव जिहाद का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच NIA से कराने का फैसला किया। जांच को सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस रविन्द्रन सुपरवाइज करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की देखरेख में NIA ये पता लगाएगा कि क्या दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकी संगठन ISIS भारत में लव जेहाद की साजिश रच रहा है। NIA ये भी जांच करेगा कि क्या ISIS हिंदुस्तान की हिंदू और ईसाई लड़कियों को मुसलमान बनाने के बाद सीरिया बुलवाकर आतंकवादी बना रहा है।

केरल में लव जिहाद के नाम से मशहूर केस की अहमियत का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि जब ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो चीफ जस्टिस की बेंच ने इस मामले को सुना और फिर केस देखने के बाद जांच एनआईए से करवाने का निर्देश दिया।

मामला क्या है पूरा मामला?

केरल के कोट्टयम जिले के वाइकॉम में रहने वाली 24 साल की हिंदू लड़की अखिला का निकाह मुस्लिम युवक शफीन जहान के साथ हुआ। अखिला के पिता केएम केशवन ने इस निकाह का विरोध करते हुए केरल हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की। केएम केशवन ने आरोप लगाया कि शफीन जहान ने उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर पहले धर्म परिवर्तन कराया और फिर शादी करने के बाद ISIS में शामिल होने के लिए प्रेशर डाला।

लड़की के पिता केशवन ने कोर्ट से शादी तोड़ने की मांग की। मामले की सुनवाई करने के बाद केरल हाईकोर्ट के जस्टिस सुरेंद्र मोहन और जस्टिस अब्राहम मैथ्यू की बेंच ने एक अहम फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने कहा कि शादी अखिला की जिंदगी का सबसे अहम फैसला है इसलिए उसे अपने माता-पिता की सलाह लेनी चाहिए थी। कोर्ट ने कहा कि कथित तौर पर हुई शादी बकवास है और कानून की नजर में इसकी कोई अहमियत नहीं है। हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि शफीन को हिंदू लड़की अखिला का पति बनने का कोई अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट ने अखिला की सुरक्षा देने के लिए कोट्टयम डिस्ट्रिक पुलिस को निर्देश दिया। हाईकोर्ट के आदेश पर अखिला अब अपने पिता के पास रह रही हैं।

अदालत ने पुलिस को मामले की जांच के भी आदेश दिए थे। हालांकि अखिला ने कोर्ट के सामने कहा था कि उसने अपनी मर्जी से मुस्लिम धर्म कबूल किया है।

source : http://www.khabarindiatv.com/india/national-kerala-love-jihad-case-supreme-court-asks-nia-to-investigate-the-matter-526927

हदीस : मुहम्मद की शादियां

मुहम्मद की शादियां

सफ़िय्या (3325-3329) और जैनब विनत जहश के साथ (3330-3331) पैगम्बर की शादियों में घटी कुछ घटनाओं का उल्लेख मिलता है।

 

रेहाना और जुवैरीया

सफीय्या अपवाद नहीं थी। दूसरी औरतें भी युद्ध में लूटे गए माल के रूप में इसी तरह लाई गयी थी और उनसे भी ऐसा ही व्यवहार किया गया था। उन औरतों में रेहाना और जुवैरीया भी शामिल थी। रेहाना, वनू कुरैजा की एक यहूदी लड़की थी। मदीना में किए गए नरमेध में उसके पति का सिर उसके कबीले के आठ-सौ अन्य मर्दों के सिरों के साथ बहुत ही बेदर्दी से काट दिया गया तो मुहम्मद ने रेहाना को अपनी रखैल बना लिया। इस नरमेध पर हम जिहाद की चर्चा करते समय आगे चलकर प्रकाश डालेंगे।

 

ऐसी अभागी लड़कियों में से ही एक अन्य थी जुबैरीया। यह बनू मुस्तलिक के मुखिया की बेटी थी। वह हिजरी सन के पांचवे या छठे साल में दो-सौ अन्य औरतों के साथ बंदी बना ली गयी थी। ”रसूल-अल्लाह ने वनू मुस्तलिक पर उस वक्त हमला किया, जब वे लोग बेखबर थे और जब उनके पशु पानी पी रहे थे। उनमें से जो लोग लड़े पैगम्बर ने मार डाला और दूसरों को कैद कर लिया। उसी दिन उन्होंने जुवैरीया बिन्त अल-हारिस को कब्जे में ले लिया“ (4292)।

 

लूट के बंटवारे में वह साबित इब्न कैश के हिस्से में आई। उसने उसकी छुड़ाई का मूल्य नौ औंस सोना रखा, जोकि उस लड़की के रिश्तेदार दे नहीं सकते थे। आयशा ने जब देखा कि वह खूबसूरत लड़की मुहम्मद के पास ले जायी जा रही है, तो उसकी प्रतिक्रिया इस प्रकार बयान की जाती है-”जैसे ही मैंने उसे अपने कमरे के दरवाजे पर देखा, मुझे उससे नफरत हो गयी, क्योंकि मैं जानती थी कि वे (मुहम्मद) उसे उसी तरह देखेंगे, जैसे मैने देखा।“ और दरअसल मुहम्मद ने जब जुवैरिया को देखा तो उन्होंने उसकी छुड़ाई का मूल्य चुकता कर दिया तथा उसे अपनी बीवी बना लिया। उन दिनों जुबैरिया लगभग बीस बरस की थी और वह पैगम्बर की सातवी बीवी बनीं। पूरी कहानी पैगम्बर के जीवनीकार इब्न इसहाक ने बयान की है।1

 

एक और यहूदी लड़की थी जैनब। उसने अपने पिता, पति और चाचा का कत्ल होते देखा था। उसे मुहम्मद के लिए खाना पकाने को कहा गया, तो उसने भुने हुए मेमने में जहर मिला दिया। मुहम्मद को शक हुआ कि कुछ गड़बड़ है और उन्होंने पहला ही निवाला उगल दिया। वे बच गये। और कई एक बयानों के मुताबिक जैनब को तुरन्त ही मार डाला गया (तवकात, जिल्द 2 किताब 2, पृ0 252-255)।

author : ram swarup

 

HADEES : LI�AN (INVOKING CURSE)

LI�AN (INVOKING CURSE)

If a man finds his wife in adultery, he cannot kill the adulterous man, for that is forbidden; nor can he make an accusation against his wife, for unless he has four witnesses, he receives eighty stripes for making a false accusation against the chastity of a woman.  But if the witnesses are not always forthcoming, which is most likely in such a case, what should he do?  This was the dilemma confronting the believers.  An ansAr posed the problem to Muhammad: �If a person finds his woman along with a man, and if he speaks about it, you would lash him; and if he kills, you will kill him, and if he keeps quiet, he shall have to consume anger.� Muhammad supplicated God: �Allah, solve this problem� (3564).  And a verse descended on him (QurAn 24:6) which gives us the practice of li�An.  The word literally means �oath,� but technically it stands for that particular form of oath which brings about separation between husband and wife with the help of four oaths and one curse.  A husband�s solitary evidence can be accepted if he bears witness four times with an oath by Allah that he is solemnly telling the truth and then invokes the curse of Allah upon himself if he is lying.  Similarly, the wife can solemnly deny the accusation four times and then invoke the wrath of Allah on herself if her accuser is telling the truth.  One of them must be lying, but this closes the chapter, and they are wife and husband no more (3553-3577).

author : ram swarup

सुप्रीम कोर्ट ने केरल लव जिहाद मामले की जांच NIA को सौंपी

सुप्रीम कोर्ट ने केरल लव जिहाद मामले की जांच NIA को सौंपी

सुप्रीम कोर्ट ने केरल लव जिहाद मामले की जांच NIA को सौंपी
हिंदू महिला से मुस्लिम पुरुष की शादी को हाईकोर्ट पहले ही कर चुका है रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए जांच के लिए कहा (फाइल फोटो)

नई दिल्लीः केरल के चर्चित लव जिहाद मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर एनआईए अब इस मामले की गंभीरता से जांच करेगी. बताया जा रहा है कि रिटायर्ड जज आरवी रवींद्रन की देखरेख में ये जांच होगी, क्योंकि घटना के पीछे चरमपंथी हाथ होने की बात कही जा रही है. इससे पहले कोर्ट ने केरल पुलिस को आदेश दिए थे कि वो इस केस से जुड़ी सभी जानकारी एनआईए को सौंप दे. कोर्ट ने पुलिस को मामले की सख्त जांच के लिए कहा था. बता दें कि ये मामला केरल का है, जिसमें हिंदू लड़की को बहला-फुसलाकर शादी करने का आरोप है.

Kerala ‘Love jihad’ case: Supreme Court asks National Investigating Agency to investigate the matter

इससे पहले 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) व केरल सरकार से एक मुस्लिम व्यक्ति की याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. मुस्लिम व्यक्ति की शादी हिन्‍दू महिला से हुई थी, जिसे केरल उच्च न्यायालय द्वारा लव जिहाद कह कर रद्द कर दिया. प्रधान न्यायाधीश न्यामूर्ति जे.एस. खेहर और न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने देश की प्रमुख आतंकवाद रोधी जांच एजेंसी से और महिला के पिता से मामले से जुड़े सभी दस्तावेज एक हफ्ते के भीतर प्रस्तुत करने के लिए कहा था और केरल सरकार से अपना जवाब दाखिल करने को कहा था.

VIDEO देखेंः ज़ी मीडिया स्पेशल रिपोर्ट: लव जिहाद और पॉलिटिक्स

अदालत ने एनआईए और पिता से कहा है, “यह बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है. यह एक गंभीर मामला है… आप अपने पास से सभी सामग्री दीजिए.” और अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए बुधवार 16 अगस्त को तय कर दी.

आपको बता दें कि केरल उच्च न्यायालय ने 25 मई को 24 साल की हिंदू महिला हादिया की शादी को रद्द कर दिया था. महिला ने मुस्लिम व्यक्ति से दिसंबर 2016 में शादी की थी. महिला ने शादी के लिए इस्लाम स्वीकार किया था. अदालत ने महिला हादिया को माता-पिता के पास रखने का निर्देश दिया था. महिला के पति शफीन जहां (27) ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, इसी पर सुनवाई करते हुए बुधवार (16 अगस्त) को कोर्ट ने इस मामले की एनआईए जांच के आदेश दिए है. महिला के पति ने अपनी याचिका में जहां ने आदेश को ‘भारत में महिला की आजादी का अपमान बताया है.’ जबकि पीड़ित महिला के पिता को कोर्ट में पेश होने का सुप्रीम कोर्ट से आदेश देने का आग्रह करते हुए शफीन के वकील ने दावा किया कि महिला ने अपनी शादी से दो साल पहले ही खुद से इस्लाम कबूल कर लिया था.

पीड़ित महिला के पिता की तरफ से वकील माधवी दीवान ने कहा कि हादिया एक असहाय पीड़ित है, जो बुरी तरह गिरोह में फंस गई, जो मनोवैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को इस्लाम अपनाने को प्रेरित करता है. वकील ने कहा कि जहां एक अपराधी है और उनकी बेटी पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया व आईएस से संबंध वाले एक नेटवर्क में फंस गई है.

source : http://zeenews.india.com/hindi/india/kerala-love-jihad-case-supreme-court-asks-national-investigating-agency-to-investigate-the-matter/337235

HADEES : MOURNING

MOURNING

A woman whose husband dies must abstain from all adornment during the �idda period, but mourning for other relatives should not last for more than three days (3539-3552).  AbU SufyAn, the father of Umm HabIba, one of Muhammad�s wives, died.  She sent for some perfume and rubbed it on her cheeks, observing: �By Allah, I need no perfume but for the fact that I heard Allah�s Messenger say, �It is not permissible for a woman believing in Allah and the Hereafter to mourn for the dead beyond three days, but in the case of the death of the husband it is permissible for four months and ten days� � (3539).

author : ram swarup