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स्वामी अग्निवेश आर्य नहीं अनार्य है

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नमस्ते मित्रों

कुछ लोग कहते है की यदि वास्तव में भारत का और सनातन वैदिक धर्म का कोई बड़ा शत्रु है तो वह है मुस्लिम ! नहीं !!! वास्तविक कट्टर शत्रु तो कम्युनिस्ट है !!!

जी हाँ !! कम्युनिस्ट कोई संगठन मात्र नहीं यह एक विचारधारा भी है और इस विचारधारा से ग्रसित लोग हमारे इर्दगिर्द भी है, जिन्हें पहचानना थोड़ा सा कठिन अवश्य है परन्तु नामुमकिन नहीं, बस जरूरत है थोड़ी सी सतर्कता की |

कम्युनिस्ट विचारधारा किस तरह की होती है इसे आसान शब्दों में यु समझिये आपके यहाँ एक नौकर काम करता है और कोई व्यक्ति उससे कहता है की तुम्हारा मालिक तुमसे ज्यादा कैसे कमा रहा है, तुम उसके यहाँ काम मत करों, उसके खिलाफ आवाज बुलंद करो और लोगों को साथ लेकर आन्दोलन शुरू करो, अगर तब भी तुम्हारा काम नहीं बनता है तो उसके खिलाफ हथियार उठा लो, अगर तुम्हारे पास हथियार के भी पैसे नहीं है तो में दूंगा, ऐसी सलाह देने वाले लोग कम्युनिस्ट होते है

आज ऐसे ही एक कम्युनिस्ट विचारधारा वाले व्यक्ति के बारे में आपको जानकारी देंगे

 

अग्निवेश (आर्य), उर्फ़ वेपा श्याम राव,

आर्य मात्र इसलिए लगाया है की लोग इसे इस नाम के साथ ही जानते है, अन्यथा इस व्यक्ति में आर्य जैसा कोई गुण नहीं है

कहते है यदि जल्द बुलंदियों पर पहुंचकर अपने आप को विख्यात करना हो तो किसी बड़े संगठन के साथ अपना नाम जोड़ लो

कुछ ऐसा ही अग्निवेश ने किया

आंध्रप्रदेश के श्रीकाकुलम में जन्मे श्याम राव ने वकालात की पढाई पूरी कर क्रिस्चियन स्कुल में व्याख्याता के रूप में कुछ वर्ष कार्य किया (स्वाभाविक है एक तो देश के सेक्युलर संविधान का प्रभाव था ही फिर क्रिश्चिनीटी ने भी थोड़ा प्रभावित किया तो यह झोल कम्युनिस्ट बनाने में आग में घी का काम कर गया)

व्याख्याता के रूप में स्वयं को विख्यात ना होता देख राजनीति में अपना प्रभुत्व स्थापित करने की मंशा से ये कलकता छोड़कर हरियाणा चले आये यहाँ आकर स्वामी इन्द्रवेश के साथ मिलकर “आर्य सभा” का निर्माण किया |

 

आर्य समाजी बन्धु उस समय इस व्यक्ति के सनातन धर्म के कार्यों से प्रभावित होकर इसके समर्थक बन गये और इसे नेता बनाने में जोश के साथ प्रचार करने लगे

अग्निवेश ने कहाँ था की यदि हरियाणा को आर्य राज्य (अर्थात राजनितिक गंदगी को साफ़ करना) न बना दिया तो अपने आप को जिन्दा जमीन में गड़वा देंगे

हरियाणा की राजनितिक गंदगी को तो साफ़ न कर पाए अपितु स्वयं राजनीति से साफ़ हो गये उसके बाद से जो इनके प्रचारक थे वे इन्हें “ज़िंदा लाश” कहकर भी सम्बोधित करते है आप भी कभी मिल जाए तो उपयोग में लेकर देख लीजियेगा

आर्य समाज और राजनीति से अपने आपको प्रसिद्ध करने के बाद जब इन्हें लगा की अब अपने पैर और पसारने चाहिए तो

कुछ सालों बाद यह माओवादियों और सरकार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने लगा नाम तो शान्ति वार्ता का था परन्तु वास्तविकता यह थी की यह स्वयम कम्युनिस्ट विचारधारा से ग्रसित माओवादी संगठन से सांठगाँठ कर चुका था

जब माओवादियों नक्सलियों से इसके मिले होने के प्रमाण मिलने लगे तो इसकी छवि थोड़ी सी धूमिल होने लगी तो जिस प्रकार का यह मौकापरस्ती है ही इसने अपनी छवि को पुनः बनाने के उद्देश्य से “अन्ना हजारे” पर परजीवी बनने की ठान ली और “जन लोकपाल विधेयक” आन्दोलन की टीम से जुड़ गया

और इसने उस आन्दोलन को भी दो फाड़ कर दिया (जिसे दिल्ली वाले अभी तक भुगत रहे है) और तत्कालीन सरकार की चापलूसी करते हुए यह एक भेदिया बन गया

उसके बाद यह व्यक्ति अल्पसंख्यकों का वकील (शुभचिंतक) बना
मुस्लिम और ईसाईयों की सुरक्षा को लेकर सरकार के खिलाफ यह व्यक्ति आज भी कार्यरत है जिससे आर्य समाज कोई सरोकार नहीं रखता

निःसंदेह आर्य समाज हिन्दुओं के कुछ पाखंडों का विरोधी रहा है परन्तु शत्रु नही, यह स्वाभाविक है की हम कभी कभी कडवा सच सहन करने की क्षमता नहीं रखते है और सच कहने वाले को अपना शत्रु समझ बैठते है कुछ ऐसा ही कुछ हिन्दुओं का व्यवहार आर्य समाज के प्रति रहा हो परन्तु लोग यह जानते है की आर्य समाज सनातन वैदिक धर्म का सबसे बड़ा रक्षक है, आर्य समाज कभी भी मुसलमानों, ईसाईयों या किसी भी गैर सनातनी के तुष्टिकरण का कोई कार्य नहीं करता, आर्य समाज समाज में जागृति लाने का, लोगों को सनातन धर्म में पुनः लाने का प्रयास अवश्य करता है परन्तु कभी भी देशद्रोहियों का समर्थक नहीं रहा अपितु समय आने पर ऐसे देशद्रोहियों का सर्वनाश अवश्य करता है

 

अग्निवेश ने आजकल हिन्दुओं पर, देश पर और देश की संस्कृति पर प्रहार करना आरम्भ कर दिया है

हाल ही में राम मन्दिर पर कुछ विरोधाभासी टिप्पणियाँ भी की है

गौ रक्षा आन्दोलन पर भी प्रहार किया है

गौ भक्षकों का समर्थक बनकर वैदिक धर्म को हानि पहुंचा रहा है

छत्तीसगढ़ में हुए एनकाउंटर को लेकर भी अभी यह व्यक्ति सरकार का विरोधी बना हुआ है

इस व्यक्ति का दोगलापन देखिये जब नक्सली पुलिस को मारती है तो इसके मुह से आवाज नहीं निकलती परन्तु जब पुलिस नक्सलियों का सफाया करती है तो यह कहते है की इससे शांतिवार्ता विफल हो रही है सरकार गलत कर रही है
अग्निवेश मुस्लिमों के संगठन, आतंकवादियों से सम्पर्क को लेकर काफी विवादित रहा है (जिसके छाया चित्र इन्टरनेट पर मिल जाते है) और इसके बाद राम मन्दिर, वन्दे मातरम, गौ रक्षा, आदि बातों को लेकर विरोधाभासी ब्यान देकर इसने स्वयं के दुष्ट और देशद्रोही होने के भरपूर प्रमाण दे दिए है

आर्य समाज का इस व्यक्ति से अभी से नहीं अपितु काफी समय पहले से विवाद रहा है, आर्य समाज की एक सार्वदेशिक प्रतिनिधि सभा पर इसने कब्जा भी कर रखा है और अपने आप को आर्य समाज के वक्ता और मुखिया के रूप में प्रदर्शित करता रहा है

आर्य समाज इस व्यक्ति से किसी प्रकार का कोई सम्बन्ध नही रखता ना ही इससे जुड़े लोगों से,

आर्य समाज हमेशा अपने सिधान्तों को लेकर अडिग रहा है इसलिए किसी भी ऐसे व्यक्ति का आर्य समाज कभी समर्थक नही हो सकता जो देश को तोड़ने की गतिविधियों में संलिप्त हो !

यहाँ तक की हम तो वर्तमान सरकार से निवेदन करते है की इस व्यक्ति की जांच की जाए यह व्यक्ति हार्दिक पटेल, वृंदा करात जेसे कम्युनिस्टों के गुट का ही व्यक्ति है और इस पर पाबंदियां लगाई जाए

और हम सूचित करना चाहते है समस्त सनातनियों को की अग्निवेश ढोंगी किसी प्रकार से आर्य समाज से कोई सम्बन्ध नही रखता, यह हर कार्यक्रम में स्वामी दयानन्द जी की फोटो अपने साथ लगाकर स्वयं को समाज सुधारक के रूप में प्रदर्शित करता है परन्तु सच इससे बिलकुल विपरीत है, यह व्यक्ति इस देश को बांटने, सनातन धर्म को नष्ट करने, वर्तमान सरकार को बदनाम करने जैसे कार्यों में संलिप्त है

सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा पर ये जबरदस्ती काबिज है और उसी के सम्बन्ध को लेकर यह स्वयं को आर्य समाज के प्रतिनिधि के रूप में प्रदर्शित करता है

जिसका आर्य समाज किसी प्रकार का कोई समर्थन नहीं रखता

आगे से इसे मात्र देशद्रोही के रूप में देखा जाए इससे अधिक कुछ नहीं

अग्निवेश को लेकर आर्य समाज से वैर पालने से पूर्व किसी भी नजदीकी आर्य समाज से इसकी जानकारी प्राप्त अवश्य करे

धन्यवाद

जब मुंशीरामजी ने प्रतिज्ञा की

जब मुंशीरामजी ने प्रतिज्ञा की

जब गुरुकुल की स्थापना का आर्यसमाज में विचार बना तो आर्यसमाज लाहौर के उत्सव पर बड़ी कठिनाई से इस कार्य के लिए दो सहस्र रुपये दान इकट्ठा हुआ। इस कठिनाई को दूर करने

के लिए मुंशीरामजी (स्वामी श्रद्धानन्दजी) ने यह प्रतिज्ञा की कि जब तक गुरुकुल के लिए तीस सहस्र रुपये इकट्ठे नहीं कर लूँगा तब तक मैं अपने घर में पग नहीं धरूँगा। सब जानते हैं कि आपने यह प्रतिज्ञा पूरी करके दिखाई।

आपने इस प्रतिज्ञा को किस शान से निभाया, इसका पता इस बात से चलता है कि उन दिनों जब कभी आप जालन्धर से निकलकर कहीं जाते तो आपके बच्चे आपको जालन्धर स्टेशन पर ही आकर मिला करते थे। आप अपने घर पर पग नहीं धरते थे। और जब प्रतिज्ञा पूरी करके आप लाहौर आये तो वहाँ एक बड़ी विशाल सभा का आयोजन हुआ। तब आपके गले में लाला काशीराम वैद्यजी द्वारा तैयार की गई कपूर की माला डाली गई।

क्या है इंस्टैंट ट्रिपल तलाक, जानिए क्या कहता है शरीयत

क्या है इंस्टैंट ट्रिपल तलाक, जानिए क्या कहता है शरीयत

Triple, 3 Talaq Judgement Hindi: तलाक-ए-बिद्दत को कोर्ट में चुनौती दी गई थी। जिस पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार दे दिया गया।

मुस्लिम लॉ के मुताबिक शादी को एक संस्कार के रूप में नहीं देखा जाता है बल्कि एक नागरिक अनुबंध के रूप में देखा जाता है। (Illustration by C R Sasikumar)

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तीन तलाक के मामले पर फैसला सुनाते हुए उसे असंवैधानिक करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को रद्द कर दिया है। साथ ही कहा है कि यह कानून मनमाना है और यह संवैधानिक अधिकारों का हनन करता है। 5 जजों की संविधान पीठ ने बहुमत के साथ यह फैसला दिया है। बता दें, इस्लाम धर्म में शादी के लिए ईसाई और हिंदू धर्म से अलग परंपराएं हैं। मुस्लिम लॉ के मुताबिक शादी को एक संस्कार के रूप में नहीं देखा जाता है बल्कि एक नागरिक अनुबंध के रूप में देखा जाता है। युवक और युवती के कबूल करने के बाद आपसी सहमति के आधार पर दोनों पार्टियों के बीच अनुबंध स्वीकार किया जाता है। ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि इंस्टैंट ट्रिपल तलाक क्या है और इसका शरीयत में क्या जिक्र है।

क्या है इंस्टैंट ट्रिपल तलाक-

तलाक-ए-बिद्दत को कोर्ट में चुनौती दी गई थी। यह तलाक-ए-सुन्नत से बिल्कुल अलग है। ‘तलाक-ए-सुन्नत’ को शादी खत्म करने के सबसे आदर्श तरीका माना जाता है। ‘तलाक-ए-सुन्नत’ के तहत जब पति अपनी पत्नी से एक बार तीन तलाक बोलता है तो उसके बाद भी उसे अपनी तीन महावारी चक्र तक पति के घर में ही रहना होता है। इसे इद्दत का काल कहा जाता है। इन तीन महीने के दौरान पति-पत्नी दोबारा से साथ में आ सकते हैं। अगर वे दोनों साथ आ जाते हैं तो तलाक निरस्त हो जाता है। हालांकि, जब इद्दत का समय निकल जाता है या पति तलाक को निरस्त नहीं करता है तो आखिरी फैसला तलाक ही होगा।

तलाक ए बिद्दत के तहत जब एक व्यक्ति अपनी पत्नी को एक बार में तीन तलाक बोल देता है या फोन, मेल, मैसेज या पत्र के जरिए तील तालक दे देता है तो इसके बाद तुरंत तलाक हो जाता है। इसे निरस्त नहीं किया जा सकता। इसके बाद अगर पति और पत्नी वापस आना चाहते हैं तो उनके लिए एक तरीका बचता है वह है निकाह हलाला। इसके लिए महिला को किसी दूसरे शख्स से शादी करनी होगी और उससे शारीरिक संबंध बनाने होंगे। इसके बाद दूसरे व्यक्ति से भी तलाक ले लेंगी और फिर इद्दत काल की अवधि को गुजारेंगी। इसके बाद वह अपने पहले पति के सात वापस लौट सकती हैं।

 

इस्लाम के जानकार ब्रदर इमरान का कहना है कि जिस तरह से आज के समय तीन तलाक दिए जा रहे हैं, वैसा कुरान में कहीं जिक्र नहीं है। इमरान का वीडियो नीचे दिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति एक ही बार में तीन तलाक बोल देता है तो वह कुरान के खिलाफ है। कुरान में तलाक का जिक्र चेप्टर नंबर दो में आयत नंबर 228 से 242 तक है। इस चेप्टर का नाम है सूरा-ए-तलाक। इसमें अल्लाह कहते हैं कि अगर तुम अपनी पत्नी को तलाक देना चाहते हैं तो जिस पत्नी को आपने तलाक बोला है उसे अपने घर में तीन पीरिएड आने तक रखना होगा। पत्नी तीन महावारी चक्र तक इंतजार करेगी। अगर महिला के पेट में बच्चा है तो वह तब तक अपने पति के घर में रहेगी, जब तक वह बच्चा पैदा ना हो जाए। इस दौरान पत्नी की मर्जी है कि वह अपने पति के आदेश माने या नहीं। लेकिन पति को अपनी पत्नी के सारे खर्चें उठाने होते हैं। इसमें हर एक तरह का खर्च शामिल है। साथ ही इमरान कहा कि पैगंबर कहते हैं कि इन तीन महीनों के दौरान पति और पत्नी दोनों को एक ही बेड पर सोना चाहिए। अगर इस दौरान दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन जाते हैं तो तलाक निरस्त हो जाएगी |

source : http://www.jansatta.com/national/triple-teen-talaq-supreme-court-faisla-3-talaq-judgement-news-in-hindi-what-is-instant-triple-talaq/409306/

तीन तलाक: कुरान कहता है- पति-पत्‍नी अलग सोए, पर र‍िश्‍ता बचाने की हर संभव कोशिश करे

तीन तलाक: कुरान कहता है- पति-पत्‍नी अलग सोए, पर र‍िश्‍ता बचाने की हर संभव कोशिश करे

Triple Talaq, 3 Talaq Hindi: वैसे तो वे खुद ही इसे स्थाई नहीं करना चाहते थे लेकिन उन्होंने इसे पहले वाली प्रथा से थोड़ा सहीं माना था लेकिन तीन तलाक कुरान में भी नहीं है।

उन्‍हें तलाकशुदा जोड़े का उदाहरण देकर तलाक की दुश्‍वारियों का अहसास द‍िलाने की कोश‍िश करें।

सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को खत्‍म कर द‍िया है। इससे जहां मुस्लिम मह‍िलाएं खुश हैं, वहीं ऑल इंड‍िया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और कई मौलव‍ियों को यह फैसला पसंद नहीं आ रहा है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि जिस तरह अयोध्या राम मंदिर केस आस्था का विषय है उसी तरह तीन तलाक का मुद्दा भी आस्था से जुड़ा हुआ है। बोर्ड का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले से दूर रहना चाहिए। राम का जन्म अयोध्या में हुआ था जो कि एक आस्था का विषय है, न कि संवैधानिक नेतिकता और ऐसा ही तीन तलाक के मुद्दे में भी लागू होता है। लेक‍िन, सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंंवैधान‍िक बताते हुए इसे खत्‍म कर द‍िया है और कहा है क‍ि छह महीने में केंद्र सरकार इस बारे में कानून बना ले।

कुरान भी तीन तलाक के ख‍िलाफ है। पूर्व सांसद आर‍िफ मोहम्‍मद खान ने अपने एक लेख में कुरान के हवाले से ल‍िखा है क‍ि इसमें तीन तलाक को ब‍िल्‍कुल प्रश्रय नहीं द‍िया गया है। इसमें कहा गया है क‍ि अगर लगता है पति-पत्‍नी में बन नहीं रही है और र‍िश्‍ता टूटने की कगार पर है तो पत्‍नी को समझाएं। बात नहीं बने तो पत्‍नी से अलग सोएं। उन्‍हें तलाकशुदा जोड़े का उदाहरण देकर तलाक की दुश्‍वारियों का अहसास द‍िलाने की कोश‍िश करें। यह जताने की कोश‍िश करें क‍ि कैसे तलाक से पर‍िवार और बच्‍चों पर असर पड़ेगा। अगर तब भी बात नहीं बनते तो पत‍ि-पत्‍नी के पर‍िवार से एक-एक व्‍यक्‍त‍ि के जर‍िए मध्‍यस्‍थता की व्‍यवस्‍था भी कुरान में बताई गई है (4.34-35)।

तीन तलाक फैसला: पीड़ित की आपबीती- आधी रात पति ने किया था बेघर, किसी मुस्लिम ने नहीं दिया साथ

तीन तलाक फैसला: पीड़ित की आपबीती- आधी रात पति ने किया था बेघर, किसी मुस्लिम ने नहीं दिया साथ

Triple Talaq Judgement Hindi: शहनाज शेख ने 1983 में सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी।

Triple Talaq Judgement Hindi: शहनाज शेख ने 1983 में सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। (Represantional Image)

सुप्रीम कोर्ट ने आज (22 अगस्त, 2017) से तीन तलाक को असंवैधानिक करार देते हुए खत्म कर दिया है। शहनाज शेख ने 1983 में सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। उन्‍हें उनके पति ने आधी रात में तीन तलाक बोल कर बेघर कर दिया था। वह 600 रुपए महीने की नौकरी करती थीं। जीवन काफी मुश्किल भरा था। मुश्किलें और बढ़ गई थीं। लेकिन उन्‍होंने लड़ने का फैसला किया, ताकि उनकी जैसी लाखों मुस्लिम महिलाओं की जिंदगी आसान बन सके। इस लड़ाई में उन्‍हें किसी मुसलमान का साथ नहीं म‍िला। उन्‍होंने ”इंड‍ियन एक्‍सप्रेस” में एक लेख के ज‍र‍िए अपनी आपबीती बयां की थी और बताया था क‍ि वह तीन तलाक के ख‍िलाफ क्‍यों खड़ी हुईं। उन्‍होंने ल‍िखा था-

1983 में मैंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की महिलाओं के साथ भेदभाव के खिलाफ यह याचिका दायर की थी। आधी रात को मेरे पति ने मुझे तलाक देकर घर से बाहर निकाल दिया था। मेरे लिए जीना मुश्किल होता जा रहा था। मैंने एक दफ्तर में बतौर ऑफिस असिस्टेंट काम करना शुरू कर दिया। मेरी तनख्वाह 600 रुपये प्रति महीना थी और मैं किराए पर रह रही थी। मेरे तलाकशुदा पति ने मेरा पता लगा लिया और मुझे धमकाया। मैंने उससे कहा, “तुमने मुझे तलाक दे दिया है, मैं अब कहीं भी रह सकती हूं और अपनी मर्जी से काम कर सकती हूं।” इस बात पर उसने(तलाकशुदा पति) कहा, “तुम मेरी बीवी हो, मैं वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए एक मुकदमा दायर करूंगा” यह बात मेरी मर्जी के खिलाफ थी। मैंने 5 काजी से सलाह-मश्विराह किया लेकिन हर एक ने मुझे अलग-अलग बातें बताईं।

मुझे मालूम ही नहीं था कि कानूनी तौर मैं क्या थी? शादीशुदा या फिर तलाकशुदा? इसके बाद ही मैंने तलाक देने के इस तरीके के खिलाफ और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के खिलाफ याचिका दायर की थी। ऐसा कोर्ट में पहला मामला था। मेरी याचिका से न सिर्फ कट्टरपंथियों को तकलीफ हुई बल्कि उन्हें भी इससे परेशानी हुई जिनसे मैंने सहारे की उम्मीद की थी- वे थे लिबरल्स, उदार लोग! कुछ लोगों ने कहा कि मुझे इस्लाम की जानकारी ही नहीं है और मैं उसके कानून को चुनौती नहीं दे सकती।कई लोगों को लगा कि मैं अपनी नीजि जिंदगी में सिर्फ एक कुंठित महिला बन चुकी थी।

मुंबई स्थित महिलाधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले संस्थान फॉरम अगेंस्ट ओप्रेशन ऑफ विमेन और इंदिरा जयसिंह के वकील मेरी मदद के लिए आगे आए। इन्होंने मेरा केस मुफ्त में लड़ा। जिन्होंने मुझे सहारा दिया, वे गैर मुस्लिम थे। कई मुस्लिम उदारवादियों को लगता है कि बदलाव समाज के अंदर से ही आना चाहिए लेकिन इस बात से पर्सनल लॉ बोर्ड से जुड़े लोगों को परेशानी होती है।

source : http://www.jansatta.com/national/triple-talaq-supreme-court-faisla-teen-3-talaq-judgement-in-hindi/409276/

तीन तलाक फैसला: ट्रिपल तलाक असंवैधानिक करार, छह महीने में केंद्र सरकार को कानून बनाने का आदेश

तीन तलाक फैसला: ट्रिपल तलाक असंवैधानिक करार, छह महीने में केंद्र सरकार को कानून बनाने का आदेश

Triple Talaq Supreme Court Judgement: जस्टिस खेहर ने तीन तलाक पर छह महीने के लिए रोक लगा दी है।

Triple Talaq Supreme Court Judgement: जस्टिस खेहर ने अपना फैसला सुनाया।

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। 3-2 से सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया। साथ ही संसद को छह महीने के अंदर इसपर कानून बनाना होगा। प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने र्गिमयों की छुट्टियों के दौरान छह दिन सुनवाई के बाद 18 मई को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। प्रधान न्यायाधीश खेहर के अलावा, पीठ में न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति यू यू ललित और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। सुनवाई के दौरान, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि वह संभवत: बहुविवाह के मुद्दे पर विचार नहीं करेगी और कहा कि वह केवल इस विषय पर गौर करेगी कि तीन तलाक मुस्लिमों द्वारा ‘‘लागू किये जाने लायक’’ धर्म के मौलिक अधिकार का हिस्सा है या नहीं। पीठ ने तीन तलाक की परंपरा को चुनौती देने वाली मुस्लिम महिलाओं की अलग अलग पांच याचिकाओं सहित सात याचिकाओं पर सुनवाई की थी। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि तीन तलाक की परंपरा असंवैधानिक है।

केंद्र सरकार तीन तलाक के खिलाफ थी। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा भी था कि अगर कोर्ट इस व्यवस्था को खत्म करेगा तो सरकार इसके लिए कोई नई व्यवस्था लाएगी। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद इस केस में अदालत के मददगार की भूमिका में हैं। तीन तलाक का समर्थन कर रहे संगठनों का कहना था कि जैसे राम का अयोध्या में जन्म आस्था का विषय है वैसे ही तीन तलाक भी आस्था का विषय है।

पिछले दिनों तीन तलाक देने के अलग-अलग मामले सामने आए। एक ने बच्चे पर चाय गिरने पर पत्नी को तलाक दे दिया था। एक ने चिठ्ठी लिखकर तलाक दे दिया था। वहीं एक ने फोन पर तलाक दे दिया था। मुसलमानों की तरफ से कहा जाता रहा है कि यह प्रथा 1400 साल पुरानी है और उसको खत्म नहीं किया जाना चाहिए।

source :  http://www.jansatta.com/national/triple-talaq-faisla-teen-3-talaq-supreme-court-judgement-in-hindi-justice-js-khehar-upholds-government-to-make-law/409222/

तीन तलाक पर सुषमा स्वराज के पति ने किया ऐसा ट्वीट, लोग बोले- दिल की गहराइयों में उतर गए आपके शब्द

तीन तलाक पर सुषमा स्वराज के पति ने किया ऐसा ट्वीट, लोग बोले- दिल की गहराइयों में उतर गए आपके शब्द

Triple Talaq Supreme Court Judgement: न्यायमूर्ति खेहर ने अपने फैसले में संसद से इस मामले में कानून बनाने की अपील की। उन्होंने अगले छह माह के लिए तीन तलाक पर रोक लगा दी।

न्यायमूर्ति खेहर ने अपने फैसले में संसद से इस मामले में कानून बनाने की अपील की। उन्होंने अगले छह माह के लिए तीन तलाक पर रोक लगा दी। (Photo: Twitter)

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को ऐतिहासिक फैसला देते हुए तीन तलाक को ‘असंवैधानिक’ व ‘मनमाना’ करार देते हुए कहा कि यह ‘इस्लाम का हिस्सा नहीं’ है। पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने दो के मुकाबले तीन मतों से दिए अपने फैसले में कहा कि तीन तलाक को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त नहीं है। कोर्ट के फैसले के बाद कई मुस्लिमों महिलाओं और नेताओं ने खुशी जाताई है। केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पति ने भी तीन तलाक के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्वीटर के माध्यम से शायराना अंदाज में अपनी बात कही। उनके ट्वीट को पढ़कर कई लोग भावुक भी हो गए। कुछ लोगों ने उनके ट्वीट को दिल को छू जाने वाला भी बताया।

सुषमा स्वराज के पति गवर्नर स्वराज ने लिखा है- ”तलाक तो दे रहे हो नज़र-ए-क़हर के साथ, जवानी भी मेरी लौटा दो मेहर के साथ।” खास बात ये है कि उन्होंने ट्वीट में बॉलीवुड अभिनेत्री मीना कुमारी के तलाक के जिक्र करते हुए ट्वीट किया। कुछ लोगों ने उनके ट्वीट पर अपना रिएक्शन देते हुए मीना कुमारी और उनके शौहर कमाल अमरोही की एडिटिंग फोटो पोस्ट किया है।

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HMP Zindabad @IronyHumour
Replying to @governorswaraj @doubtinggaurav

The real story behind this dialogue

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#SurgicalStrike 👣 @SurgicalWay
Replying to @governorswaraj @Gajodhar_007

दिल की गहराइयों में उतर गए आपके शब्द, स्वराज जी.

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unknown @_littel_boy
Replying to @governorswaraj

हलाला की दुकान के अब बंद होने का समय आगया

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आज तीन तलाक पर पांच जजों की बेंच ने सुनवाई की। दो जज तीन तलाक के पक्ष में थे वहीं तीन इसके खिलाफ। बहुमत के हिसाब से तीन जजों के फैसले को बेंच का फैसला माना गया। सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित ने कहा कि तीन तलाक इस्लाम का मौलिक रूप से हिस्सा नहीं है, यह कानूनी रूप से प्रतिबंधित और इसे शरियत से भी मंजूरी नहीं है। वहीं, प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे.एस. खेहर और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर ने कहा कि तीन तलाक इस्लामिक रीति-रिवाजों का अभिन्न हिस्सा है और इसे संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है।

न्यायमूर्ति खेहर ने अपने फैसले में संसद से इस मामले में कानून बनाने की अपील की। उन्होंने अगले छह माह के लिए तीन तलाक पर रोक लगा दी। साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों से अपील की कि वे अपने मतभेदों को भूलकर इससे संबंधित कानून बनाएं।

इससे पहले ही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि यह एक विचार करने का मुद्दा है कि मुसलमानों में ट्रिपल तलाक जानबूझकर किया जाने वाला मौलिक अधिकार का अभ्यास है, न कि बहुविवाह बनाए जाने वाले अभ्यास का।

source : http://www.jansatta.com/national/sushma-swarajs-husband-tweeted-on-triple-talaq-people-say-your-words-have-fallen-into-the-depths-of-the-heart/409440/