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चर्च में रविवार को प्रार्थना व्यर्थ

चर्च में रविवार को प्रार्थना व्यर्थ

स्वामी सत्यप्रकाशजी ने देश व विदेश में ईसाई मित्रों से कई बार यह कहा है कि सबथ के दिन (रविवार) चर्च में ईश्वर की प्रार्थना व्यर्थ है। कारण यह कि उस दिन ईसाइयों का प्रभु विश्राम

करता है। ‘‘विश्राम के दिन तो उसको परेशान न किया करो।’’

नोट-ईसाइयों का एक सज़्प्रदाय यह मानता है कि सबथ का दिन रविवार नहीं शनिवार है।

300 लोगों का करवा रहे थे धर्म परिवर्तन. तभी अचानक वहां पहुँच गया “विश्व हिन्दू परिषद्”

300 लोगों का करवा रहे थे धर्म परिवर्तन. तभी अचानक वहां पहुँच गया “विश्व हिन्दू परिषद्”

सिर्फ अपना नाम बदल लेने से , सिर्फ अपना आराध्य बदल लेने से कोई कुछ भी करे वो पाप और बीमारी से कैसे बच सकता है ये थ्योरी फिलहाल समझ के बाहर की बात है पर ऐसा कर के भोले भले ग्रामीणों को धर्म त्यागने पर मजबूर किया जा रहा है . वो भी बिना किसी डर के व् बिना किसी दबाव में उस शासक योगी आदित्यनाथ के शासित राज्य में जिसे भारत में हिंदुत्व का सबसे बड़ा चेहरा माना जाता है.. मामला है उत्तर प्रदेश के मऊ जिले का जहाँ दक्षिण टोला थाने के गाँव सलेम पुर में अचानक ही सूचना मिली कि ईसाई मिशनरी से जुड़े कुछ लोग लगभग लगभग 300 लोगों को विभिन्न प्रलोभन आदि दे कर धर्म त्याग कर अपना मत अपनाने के लिए पहुंचे हैं . विश्व हिन्दू परिषद् के लिए ये खबर बहुत अप्रत्याशित थी और वो सीधे वहां पहुंच गए जहाँ ये कृत्य करवाया जा रहा था . मौके पर भीड़ लगी मिली और धर्मांतरण के प्रमाण भी थे . वहां लोगों को बताया जा रहा था कि ईसा मसीह की शरण में आने से सारे दुःख दूर होते हैं और हर बीमारी खत्म हो जाती है और भी उसके अलावा बहुत कुछ समझाया जा रहा था . विश्व हिन्दू परिषद् के वहां पहुंचने की सूचना पुलिस को मिली तो हड़कंप मच गया. तत्काल किसी अनहोनी की घटना को रोकने के लिए मौके पर पुलिस बल पंहुचा और धर्मांतरण करा रहे 6 मिशनरी प्रतिनिधियों को गिरफ्तार कर के थाने ले आये जहाँ उन से गहन पूछताछ चल रही है. विश्व हिन्दू परिषद् आक्रोशित हो उठी थी जिसके बाद पुलिस ने उनसे तहरीर देने की बात कहीं . तत्पश्चात विश्व हिन्दू परिषद् के शैलेन्द्र सिंह की दी गयी तहरीर पर मुकदमा पंजीकृत कर के कार्यवाही शुरू कर दी गयी है . मामले की गंभीरता बढ़ते देख कर जिलाधिकारी ने भी विषय का संज्ञान लिया और अधीनस्थ SDM को तत्काल कार्यवाही के निर्देश जारी किये . SDM ने पूरे प्रकरण की बारीकी देखना शुरू कर दिया है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने का आश्वाशन दिया है . धर्म त्यागने के लिए उन्हें भी लाइन में बैठाया गया था जिनकी उम्र अभी इतनी कम है है कि वो अपना नाम भी ठीक से बता नहीं पा रहे थे .

source : http://www.sudarshannews.com/category/state/categorystatevhp-stop-religious-conversion-in-up–2100

छात्र ने कहा – बाइबिल नहीं वन्देमातरम गाऊँगा .. बस , उसकी जिंदगी और कैरियर दोनों हो गए तबाह

छात्र ने कहा – बाइबिल नहीं वन्देमातरम गाऊँगा .. बस , उसकी जिंदगी और कैरियर दोनों हो गए तबाह

ये कृत्य बहुत पहले से चल रहा था . उसे सब जानते थे . क़ानून मंत्रालय भी , शिक्षा मंत्रालय भी .. पर सब आँख मूँद कर देख रहे थे .. और इसका विरोध करने की हिम्मत जब एक ने की तो उसकी जिंदगी और कैरियर कर डाला बर्बाद .  मामला इलाहाबद के नैनी क्षेत्र स्थित शियाट्स कालेज का है . वहां बहुत पुराना नियम है कि वहां प्रार्थना हमेशा बाइबिल की करवाई जाती है. काफी लम्बे समय से ये सब वहां चलता रहा , कभी किसी ने इसके खिलाफ आवाज नहीं उठाई और सब भले ही वो किसी धर्म , पंथ या मज़हब से रहे हो , वो चुपचाप बाइबिल गाते रहे .  अचानक कुछ लोगों को बदले परिवेश और माहौल में ये कार्य थोड़ा उचित नहीं लगा . उन्होंने सोचा कि एक वर्ग भर को सम्बोधित करने वाली बाइबिल के बजाय यहाँ सम्पूर्ण भारत को सम्बोधित करता हुआ वन्देमातरम का गान होना चाहिए और इसी आशा और उम्मीद के साथ एक PHD छात्र अभय ने कालेज प्रबंधन को प्रार्थना पत्र दे दिया . उसमे निवेदन था कि कृपया भारत की सीमा के अंदर आने वाले इस विश्व विद्द्यालय में बाइबिल के बजाय वन्देमातरम करवाई जाय . कालेज प्रबंधन उस प्रार्थना पत्र को पाते ही आग बबूला हो गया और सीधे उस छात्र को बुलाते हुए कहा कि ये सब यहाँ नहीं चल सकता और अगर तुम्हारे ऊपर ज्यादा ही देश्बक्ति सवार है तो उसका इलाज हम कर देते हैं . अगले दिन उस छात्र के हाथ में निलंबन का लेटर पकड़ा कर कहा गया कि आगे की पढ़ाई वहां से जाओ करो जहाँ तुम्हारा वन्देमातरम चलता हो .. अभय अपना कैरियर और जीवन तबाह होता देख कर एक बार तो चकरा गया पर उसकी एक भी दलील सुनने को शियाट्स कालेज प्रबंधन तैयार नहीं था .  हार कर ये बात उसने अपने अन्य साथियों को बताई तो काफी दिन से दबा कुचला छात्र वर्ग आंदोलित हो उठा और अपने मित्र अभय की बहाली की मांग करने लगा . पर कालेज प्रशाशन जरा सा भी झुकने को तैयार नहीं हुआ . अंत में वो छात्र अपने मित्र छात्रों के साथ इलाहाबाद के जिलाधिकारी से मिला और अपने लिए न्याय माँगा .. छात्र अभय का कहना है कि अभी तक कालेज या इलाहाबाद प्रशासन ये नहीं बता पाया कि उसे किस बात की सज़ा मिली है . ये घटना राष्ट्र के अंदर चल रही एक बहुत बड़ी आतंरिक षड्यंत्र को चिन्हित करती है जिसका सीधा सम्बन्ध उन छात्रों से है जिन्हे डाक्टर , इंजीनियर या कुछ और बनने से पहले अपने धर्म या मजहब के लिए समर्पण करवाया जा रहा है वो भी जबरदस्ती …

source: http://www.sudarshannews.com/category/national/student-dismiss-due-to-demand-of-vandematarm-1057

Hindus were being converted by the missionaries, who lured them with money to change their religion

In Uttar Pradesh, cops halt church prayer after Hindu group alleges conversion

Yogi Adityanath

People inside the church on Friday. Eleven US nationals were also present in the church. (HT Photo)

Police stopped a prayer attended by more than 150 people, including 11 American tourists, at an Uttar Pradesh church on Friday after the right-wing Hindu Yuva Vahini complained that the event was a cover for religious conversion.

The youth group, set up by chief minister Yogi Adityanath in 2002, filed a complaint against Yohannan Adam, the pastor of the church at Dathauli of Maharajganj district.

The organisation accused him of converting Hindus to Christianity, a charge the pastor denied.

“No prior permission was taken before the meeting. We stopped the meet after a complaint was registered. A probe is underway and appropriate action will be taken if the charges are correct,” said police officer Anand Kumar Gupta.

The US tourists were let off after police checked their visas and relevant documents.

“The presence of US nationals indicates that innocent and illiterate Hindus were being converted by the missionaries, who lured them with money to change their religion,” said Krishna Nandan, a Hindu Yuva Vahini leader who surrounded the church with his supporters in the afternoon.

They dispersed after police promised a probe and adequate action, though Nandan was not happy that the Americans were cleared.

The church authorities dismissed the conversion allegations.

“The charges are absolutely baseless. The people were attending a prayer meeting voluntarily. We prayed. Nothing else was done,” pastor Adam said.

The Hindu right wing has been at loggerheads with Christian missionaries, accusing them of converting people through coercion and allurement to their faith.

Several Hindu organisations have conducted ghar wapsi or homecoming of such people, which minority groups say is a couched term for re-conversion.

Earlier this year, Hindu Yuva Vahini activists attacked the Full Gospel Church in Gorakhpur, accusing it of religious conversion.

 source:http://www.hindustantimes.com/india-news/in-gorakhpur-cops-halt-church-prayer-after-hindu-group-alleges-conversion/story-EBbeOl71ckLuIPyQzx3ksL.html

१ जनवरी विशेष : खतना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

जैसे की आप सब लोगो को विदित है कि नया साल अर्थात ईसाई नववर्ष आने वाला है और ईसाई इसे बड़ी धूमधाम से अपने अपने देशों में मनाते हैं। लेकिन भारत देश में ईसाइयों की आबादी लगभग २.५% है, फिर भी यहाँ इस देश में इस नववर्ष को ईसाई तो मनाते हैं लेकिन अधिकतर हिन्दू भी इस नववर्ष को बड़ी ही धूम धाम से मनाते हैं। भले ये वो हिन्दू हैं जिन्हें दीपावली, होली आदि में आतिशबाजी और रंग बिरंगे गुलालों से परहेज हो, मगर ईसाइयों के नववर्ष में ऐसे जोश में होते हैं कि आतिशबाजी भी करते हैं और मद्य आदि पेय तथा मांसाहार से परहेज नहीं करते। इन लोगों को क्या कहें ज्यादातर समस्या तथाकथित स्वघोषित धार्मिक गुरुओं ने ही प्रारम्भ की है। सांता के सफ़ेद दाढ़ी मूछ में कृष्ण को रंगना और धर्म की शिक्षा न देकर ईसाइयों के नये साल के बारे में न समझाकर मौन रहना, इन्हीं कारणों से हिन्दू समाज ईसाई और मुस्लिम त्योहारों में झूलता रहता है और अपने धार्मिक, ऐतिहासिक तथा वैज्ञानिक त्योहारों के प्रति उदासीन रवैया धारण करता है।
खैर आज हम चर्चा कर रहे हैं कि ये नया साल जो प्रत्येक १ जनवरी को मनाया जाता है वह क्या है? आइये देखे :

नया साल अर्थात् प्रत्येक १ जनवरी को ख़ुशी और जोश से मनाया जाने वाल दिन नया साल है क्योंकि क्रिसमस के दिन ईसा साहब पैदा हुए और इस क्रिसमस के आठवें दिन जो ईसा साहब का “खतना” (लिंग की रक्षार्थ चमड़ा ‘खिलड़ी’ काटना) हुआ था। ये खतना मुस्लिम समुदाय में भी किया जाता है। अतः ये तो सिद्ध हुआ कि ये दोनों संस्कृति कुछ भेद से एक हैं। अतः ईसा साहब के पैदा होने से आठवें दिन जो “लिंगचर्म छेदन संस्कार” अर्थात् खतना हुआ वह नया साल है

On the eighth day, when it was time to circumcise the child, he was named Jesus, the name the angel had given him before he was conceived.

[ Luke 2:21 ]

और जब बालक के खतने का आठवाँ दिन आया तो उसका नाम यीशु रखा गया। उसे यह नाम उसके गर्भ में आने से पूर्व भी पहले स्वर्गदूत द्वारा दे दिया गया था।

[ लूका २ | २१ ]

अब ये खतना तो हुआ ईसा साहब का और मनाते हिन्दू समाज के लोग हैं। वो भी पुरे जोशो खरोश से, ये बात समझ से बाहर है।

तो जो भी हिन्दू ये नया साल मनाते हैं, उन्हें जान लेना चाहिए कि खतना की परंपरा मूसा का नियम है। मूसा ईसाइयों और मुस्लिमो के बड़े पैगम्बर हुए हैं। खैर ये जान लीजिये की इसी मूसा के नियमानुसार ईसा का “लिंगचर्म छेदन संस्कार” खतना हुआ था।

And every male among you who is eight days old shall be circumcised throughout your generations, a servant who is born in the house or who is bought with money from any foreigner, who is not of your descendants.

[ Genesis 17:12 ]

जब बच्चा आठ दिन का हो जाए, तब उसका खतना करना। हर एक लड़का जो तुम्हारे लोगों में पैदा हो या कोई लड़का जो तुम्हारे लोगों का दास हो, उसका खतना अवश्य होगा।

[ उत्पत्ति १७ | १२ ]

On the eighth day the flesh of his foreskin shall be circumcised.

[ Leviticus 12:3 ]

आठवें दिन बच्चे का खतना होना चाहिए।

[ लैव्यव्यवस्था १२ | ३ ]

इसपर यदि कोई ईसाई कहे कि ये तो पुराना नियम है और इसे नहीं मानता। तो ये देखें यीशु ने स्वयं कहा:

Think not that I am come to destroy the law, or the prophets: I am not come to destroy, but to fulfil.

For verily I say unto you, Till heaven and earth pass, one jot or one tittle shall in no wise pass from the law, till all be fulfilled.

[ Matthew 5:17-18 ]

यह न समझो, कि मैं मूसा के धर्म नियम और भविष्यद्वक्ताओं की पुस्तकों को लोप करने आया हूँ।लोप करने नहीं, परन्तु पूरा करने आया हूँ।

मैं तुम से सच कहता हूँ कि जब तक आकाश और पृथ्वी समाप्त नो जाएँ, तब तक मूसा की व्यवस्था का एक एक शब्द और एक एक अक्षर बना रहेगा। वह तब तक बना रहेगा जब तक वह पूरा नहीं हो लेता।

[ मत्ती ५ | १७-१८ ]

उपरोक्त प्रमाणों से सिद्ध होता है कि ईसा का खतना  यानी “लिंगचर्म छेदन संस्कार” जन्म के आठवें दिन हुआ था जो ग्रैगोरियन कैलेंडर के अनुसार १ जनवरी होता है। यीशु के इसी “लिंगचर्म छेदन संस्कार” की खुशी में हर वर्ष नया साल के रूप में मनाया जाता है। वास्तव में तो ये खतना दिवस ही है, भले ही कोई इसे नया साल के रूप में मनाये।
आज तो कोई ईसाई शायद ही खतना कराता है। जबकि यीशु ने तो स्वयं खतना कराया। साथ ही साथ सभी को मूसा के नियमानुसार खतना कराने का आदेश भी दिया। क्या ये ईसाइयों द्वारा बाइबिल और यीशु के आदेश का उल्लंघन नहीं?

ग्रीक आॅर्थोडाॅक्स चर्च तो आज भी १ जनवरी को नया साल नहीं बल्कि खतना दिवस के रूप में ही मनाते हैं।
प्रमाण स्वरूप उनके 2017 के कैलेंडर को नीचे क्लिक करके देख सकते हैं –

On Sunday, January 1, 2017 we celebrate

खैर जो भी है। सबसे बड़ी बात है कि खतना करना, करवाना, ईसाई और मुस्लिम संस्कार है। हिन्दू समुदाय में ये घृणित कार्य माना जाता है क्योंकि यदि ईश्वर की रचना में कोई कमी होती तो ये खाल नहीं होती। लेकिन ईश्वर अपनी रचना में कभी कोई कमी नहीं करता, न ही किसी को इस शरीर में कांट छांट करने का अधिकार ही प्रदान करता है। अतः आप सबसे हाथ जोड़कर विनती है कि अपने अपने संस्कार सबको मानने चाहिए।

मगर हिन्दू समाज यदि १ जनवरी को “लिंगचर्म छेदन संस्कार” अर्थात खतना दिवस को सामूहिक रूप से अपने परिवार सहित मनाना ही चाहता है तो कृपया ईसा, मूसा और यहोवा की आज्ञा पालन करते हुए अपना भी खतना अर्थात “लिंगचर्म छेदन संस्कार” स्वयं करवा लेवे तभी इस संस्कार को ख़ुशी से मनाये।

हालाँकि वो हिन्दू जो इस “लिंगचर्म छेदन संस्कार” खतना दिवस को जोशो खरोश से मनाते हैं उनके लिए :

“बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना”

थोड़ा विचार कीजिए कि किसी आठ दिवसीय बालक के लिंगचर्म छेदन संस्कार के अवसर पर हर वर्ष पटाखे फोड़ेना, शायरियाँ भेजना, तरह तरह के पकवान खाना, मौज मस्ती करना क्या ये सब काम भले मानव के हो सकते हैं भला?
जो बोले हाँ! तो उनसे अनुरोध है कि अपने भी बच्चों के खतना दिवस पर हर वर्ष पार्टी का आयोजन करें, पटाखे जलाएँ, लोगों को ग्रिटिंग्स कार्ड बाँटेंऔर मौज मस्ती करें। साथ में अपने खतने किये हुए पुत्र को अवश्य बताएँ कि सुन आज ही के दिन तेरा खतना हुआ था। सो इस खुशी में हर वर्ष पार्टी चलती है। तू भी अपने आगे के बाल बच्चों का ऐसे ही करीयो।

अपने धर्म से प्रेम करने वाले हिन्दुओं से अनुरोध है कि अब से सेक्युलर हिन्दुओं को १ जनवरी पर “Happy Circumcision Day‘ या ‘खतना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ‘ अवश्य भेजें।

बहरहाल इतने सब प्रमाणों के बाद भी यदि कोई हिन्दू १ जनवरी को मनाना चाहता है। तो पंडित लेखराम वैदिक मिशन की ओर से उन सभी हिन्दुओं को Happy Circumcision Day। खतना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

हाँ अपने परिवार वालों, विशेषकर बच्चों को भी अवश्य बताएँ कि आप १ जनवरी क्यों मनाते हैं।

नमस्ते।

[रजनीश बंसल की भूमिका को मेरे द्वारा संपादित किया गया है।]

कितने ईश्वर बाइबिल में??

बाइबिल में कितने ईश्वर हैं? एक या तीन? क्या पवित्र आत्मा, ईश्वर और यीशु एक है वा अलग अलग सत्ता है? आएँ देखें।

5 क्योंकि परमेश्वर एक ही है: और परमेश्वर और मनुष्यों के बीच में भी एक ही बिचवई है, अर्थात मसीह यीशु जो मनुष्य है।

(1 तीमुथियुस, अध्याय २)

1 फिर उस से कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं कि तुम स्वर्ग को खुला हुआ, और परमेश्वर के स्वर्गदूतों को ऊपर जाते और मनुष्य के पुत्रा के ऊपर उतरते देखोगे।।

(यूहन्ना, अध्याय २)

1 परमेश्वर के पुत्र यीशु मसीह के सुसमाचार का आरम्भ।

(मरकुस, अध्याय १)

19 निदान प्रभु यीशु उन से बातें करने के बाद स्वर्ग पर उठा लिया गया, और परमेश्वर की दाहिनी ओर बैठ गया।

(मरकुस, अध्याय १६)

19 तुझे विश्वास है कि एक ही परमेश्वर है: तू अच्छा करता है: दुष्टात्मा भी विश्वास रखते, और थरथराते हैं।

(याकूब, अध्याय २)

उपरोक्त आयतो को पढ़ने से ज्ञात होता है, बाइबिल का कोई परमेश्वर है, और उसका पुत्र ईसा, अलग अलग हैं, यानी दो अलग अलग चरित्र हैं, यह भी ज्ञात होता है की ईसा, परमेश्वर और मनुष्यों के बीच एक बिचौलिया है और स्वर्ग में परमेश्वर के दाहिनी और बैठता है। इसी प्रकार की अनेक आयते बाइबिल के नए नियम में मौजूद हैं।

अब आगे :

14 प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह और परमेश्वर का प्रेम और पवित्र आत्मा की सहभागिता तुम सब के साथ होती रहे॥

(2 कुरिन्थियों, अध्याय १३)

19 इसलिये तुम जाकर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो।

(मत्ती, अध्याय २८)

2 और परमेश्वर पिता के भविष्य ज्ञान के अनुसार, आत्मा के पवित्र करने के द्वारा आज्ञा मानने, और यीशु मसीह के लोहू के छिड़के जाने के लिये चुने गए हैं। तुम्हें अत्यन्त अनुग्रह और शान्ति मिलती रहे॥

(1 पतरस, अध्याय १)

उपरोक्त आयतों से एक ईश्वर के स्थान पर तीन भिन्न भिन्न प्रकार की सत्ताओ का ज्ञान होता है वह है, एक परमेश्वर, दूसरा पुत्र ईसा और तीसरा पवित्र आत्मा। इसी प्रकार की अनेक आयते बाइबिल के नए नियम में मौजूद हैं।

अब और आगे :

30 मैं और पिता एक हैं।

(यूहन्ना, अध्याय १०)

15 वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्टि में पहिलौठा है।

(कुलुस्सियों, अध्याय १)

12 तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा।

(यूहन्ना, अध्याय ८)

58 यीशु ने उन से कहा; मैं तुम से सच सच कहता हूं; कि पहिले इसके कि इब्राहीम उत्पन्न हुआ मैं हूँ।

(यूहन्ना, अध्याय ८)

6 यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।
7 यदि तुम ने मुझे जाना होता, तो मेरे पिता को भी जानते, और अब उसे जानते हो, और उसे देखा भी है।

(यूहन्ना, अध्याय १४)

यहाँ उपरोक्त वर्णित आयतो से ज्ञात होता है, की ईश्वर और ईसा एक हैं, यानी ईसा से बड़ी सत्ता कोई नहीं, ईसा ही ईश्वर है, ऐसा ईसा का कथन है।

लेकिन आगे ईसा क्या कहता है देखिये :

28 तुम ने सुना, कि मैं ने तुम से कहा, कि मैं जाता हूं, और तुम्हारे पास फिर आता हूं: यदि तुम मुझ से प्रेम रखते, तो इस बात से आनन्दित होते, कि मैं पिता के पास जाता हूं क्योंकि पिता मुझ से बड़ा है।

(यूहन्ना, अध्याय १४)

अब समझ ये नहीं आता कि आखिर बाइबिल में ईश्वर है कौन ?
ईसा ?
परमेश्वर ?
पवित्र आत्मा ?
इससे भी बड़ी बात, कभी ईश्वर को बड़ा बनाया, कभी खुद को ईश्वर कहा, कभी पवित्र आत्मा के द्वारा पवित्र होना बताया, कभी खुद को ईश्वर के साथ होना बताया।
ईसाइयो, बाइबिल का ईश्वर आखिर है कौन ? और है तो कितने हैं?

रजनीश बंसल

क्रिसमस मनाना बाइबिल अनुसार अनुचित और अधार्मिक कार्य!

बाइबिल के नए नियम और पुराने नियम, में कहीं भी क्रिसमस (ईसा का जन्म दिवस त्यौहार) हर्षोल्लास से मनाना नहीं लिखा।

पूरी बाइबिल, नए नियम और पुराने नियम में कहीं भी क्रिसमस के लिए कोई “नकली पेड़” या “क्रूस” जैसी किसी भी छवि अथवा प्रतीक को अपनाया जाना कहीं नहीं लिखा, बल्कि यह ईश्वर की नजर में पाप है, अपराध है।
(1 कुरिन्थियों, १०-१४:१५)

पूरी पूरी बाइबिल, नए नियम और पुराने नियम में कहीं भी, क्रिसमस को मनाये, हर्षोल्लास दर्शाये, कहीं नहीं लिखा, कोई लिखी प्रमाण हैं तो कोई भी ईसाई बंधु प्रस्तुत करें।

पूरी बाइबिल, नए नियम और पुराने नियम में कहीं भी, किसी भी प्रकार के (सांटा क्लोज-क्रिश्मस का पिता) जैसा कोई ऐतिहासिक व्यक्ति वा चरित्र नहीं मिलता, यदि है, तो कोई भी ईसाई व नव-ईसाई (मसीह) बाइबिल से प्रमाण प्रस्तुत करें।

मेरे ईसाई भाइयों, नव-ईसाई (मसीह) भाइयों और प्यारे हिन्दू भाइयों! सच्चाई यह है कि क्रिसमस का त्यौहार, क्रिसमस का पेड़, और क्रॉस आदि प्रतीक, यह पगन लोगों (अरब के मूल निवासियों) का त्यौहार था। यह पगन लोग, योगेश्वर कृष्ण के पौत्र के वंशज थे जो वैदिक धर्मी थे। मगर समय के अनुसार, अनार्य स्थान पर रहने से वेदधर्म से चूककर, पौराणिक पद्धतिया धारण कर चुके थे। जैसा जिसका मत चला उस मत को अपनाते गए और वैसी ही पूजा पद्धति अपनाते गए।

क्रिसमस का पेड़ और दिसम्बर मास में ईसा का जन्मकाल मानकर, हर्षोल्लास से मनाना, ईसाइयों और नवईसाईयों(मसीहों) के लिए वर्जित है, क्योंकि ईसा का जन्म दिसम्बर में हुआ ही नहीं था, तो क्रिसमस दिसंबर में कैसे मनाते हैं ?

क्रिसमस के पेड़ को प्रतीक मानना, पूजना मूर्खता है :

2 अन्यजातियों को चाल मत सीखो, न उनकी नाईं आकाश के चिन्हों से विस्मित हो, इसलिये कि अन्यजाति लोग उन से विस्मित होते हैं।
3 क्योंकि देशों के लोगों की रीतियां तो निकम्मी हैं। मूरत तो वन में से किसी का काटा हुआ काठ है जिसे कारीगर ने बसूले से बनाया है।
4 लोग उसको सोने-चान्दी से सजाते और हयैड़े से कील ठोंक ठोंककर दृढ़ करते हैं कि वह हिल-डुल न सके।
5 वे खरादकर ताड़ के पेड़ के समान गोल बनाईं जाती हैं, पर बोल नहीं सकतीं; उन्हें उठाए फिरना पड़ता है, क्योंकि वे चल नहीं सकतीं। उन से मत डरो, क्योंकि, न तो वे कुछ बुरा कर सकती हैं और न कुछ भला।

(यिर्मयाह, अध्याय १०:२-५)

14 वह देवदार को काटता वा वन के वृक्षों में से जाति जाति के बांजवृक्ष चुनकर सेवता है, वह एक तूस का वृक्ष लगाता है जो वर्षा का जल पाकर बढ़ता है।
15 तब वह मनुष्य के ईंधन के काम में आता है; वह उस में से कुछ सुलगाकर तापता है, वह उसको जलाकर रोटी बनाता है; उसी से वह देवता भी बनाकर उसको दण्डवत करता है; वह मूरत खुदवाकर उसके साम्हने प्रणाम करता है।

(यशायाह, अध्याय ४४:१४-१५)

किसी भी त्यौहार का फैसला सिवाय ईसा व उसके पिता के अतिरिक्त कोई न करे : यहाँ इस आयत में स्पष्ट बताया है। आने वाले भविष्य, यानी ईसा की मृत्युपरांत, ईसाई समुदाय, ईसा के जन्मदिवस को विशेषतः हर्षोल्लास से मनाएंगे, मगर यहाँ चेतावनी उन्ही लोगो के लिए है, की वे पर्व (त्यौहार) के लिए कोई फैसला नहीं करे।

16 इसलिये खाने पीने या पर्व या नए चान्द, या सब्तों के विषय में तुम्हारा कोई फैसला न करे।
17 क्योंकि ये सब आने वाली बातों की छाया हैं, पर मूल वस्तुएं मसीह की हैं।

(कुलुस्सियों, अध्याय २:१६-१७)

बाइबिल के इन सभी स्थलों पर, ईसा के जन्म की शुभकानाए दी जाती हैं, मगर इस दिन को त्यौहार के रूप में मनाये, ऐसा कोई विधान प्रकट नहीं किया जाता :

लूका (अध्याय २:१०-१२) (अध्याय २:१३-१४) (अध्याय २:१५-२०)
मत्ती (अध्याय २:१-१२)

इन सभी स्थलों पर, ईसा के जन्म का हर्षोल्लास मना लिया गया, लेकिन आगे भी मनाते रहे, ऐसा कोई विधान पूरी बाइबिल में कहीं नहीं पाया जाता है।

क्रिसमस पगनों का त्यौहार :

19 मूरत! कारीगर ढालता है, सोनार उसको सोने से मढ़ता और उसके लिये चान्दी की सांकलें ढाल कर बनाता है।
20 जो कंगाल इतना अर्पण नहीं कर सकता, वह ऐसा वृक्ष चुन लेता है जो न घुने; तब एक निपुण कारीगर ढूंढकर मूरत खुदवाता और उसे ऐसा स्थिर कराता है कि वह हिल न सके॥

(यशायाह, अध्याय ४०:१९-२०)

14 वह देवदार को काटता वा वन के वृक्षों में से जाति जाति के बांजवृक्ष चुनकर सेवता है, वह एक तूस का वृक्ष लगाता है जो वर्षा का जल पाकर बढ़ता है।
15 तब वह मनुष्य के ईंधन के काम में आता है; वह उस में से कुछ सुलगाकर तापता है, वह उसको जलाकर रोटी बनाता है; उसी से वह देवता भी बनाकर उसको दण्डवत करता है; वह मूरत खुदवाकर उसके साम्हने प्रणाम करता है।
16 उसका एक भाग तो वह आग में जलाता और दूसरे भाग से मांस पकाकर खाता है, वह मांस भूनकर तृप्त होता; फिर तपाकर कहता है, अहा, मैं गर्म हो गया, मैं ने आग देखी है!
17 उसके बचे हुए भाग को लेकर वह एक देवता अर्थात एक मूरत खोदकर बनाता है; तब वह उसके साम्हने प्रणाम और दण्डवत करता और उस से प्रार्थना कर के कहता है, मुझे बचा ले, क्योंकि तू मेरा देवता है। वे कुछ नहीं जानते, न कुछ समझ रखते हैं।

(यशायाह, अध्याय ४४:१४-१७)

अतिरिक्त पढ़े (यिर्मयाह, अध्याय १०:२-५)

उपरोक्त तथ्यों से सिद्ध है, न तो, ईसा के जन्म का हर्षोल्लास मनाने के लिए कोई त्यौहार, पर्व मनाना चाहिए, ऐसा वर्णन, पूरी बाइबिल में कहीं नहीं मिलता, क्रिसमस जैसे त्यौहार के लिए कोई प्रतीक यथा, पेड़, क्रूस होना चाहिए, ऐसा विधान भी नहीं मिलता, हाँ बाइबिल में यह अवश्य लिखा है की जो कोई मनुष्य किसी पेड़, क्रूस आदि प्रतीक को माने या पूजे तो पापी होगा, और इसी सिद्धान्त को, पगन मानते थे, इसलिए बाइबिल ने उन्हें मुर्ख और विधर्मी कहा।

इसीलिए बाइबिल में क्रिसमस को मनाना, और ईसा के जन्म की खुशियां बांटना या त्यौहार मनाना बाइबिल अनुसार ही अनुचित है, अतः ईसाई भाइयो और नव ईसाइयो (मसीह) भाइयो से अनुरोध है वे न तो इस अनुचित और अधार्मिक कार्य को करे, न ही हिन्दू भाइयो में इस अधर्म का प्रचार करे।

अगली पोस्ट पर विस्तार से बताएँगे, ईसा का जन्म, दिसम्बर माह में नहीं हुआ था, जब दिसंबर में जन्म ही नहीं हुआ, तो क्रिसमस का औचित्य दिसंबर में कैसे ?

रजनीश बंसल