ईसा (यीशु) एक झूठा मसीहा है – पार्ट 1

सभी आर्य व ईसाई मित्रो को नमस्ते।

प्रिय मित्रो, जैसे की हम सब जानते हैं – हमारे ईसाई मित्र – ईसा मसीह को परम उद्धारक और पापो का नाशक मानते हैं – इसी आधार पर वो अपने पापो के नाश के लिए ईसा को मसीह – यानी उद्धारक – खुदा का बेटा – मनुष्य का पुत्र – स्वर्ग का दाता – शांति दूत – अमन का राजकुमार – आदि आदि अनेक नामो से पुकारते हैं –

इसी आधार ईसा को पापो से मुक्त करने वाला और – स्वर्ग देने हारा – समझकर – अनेक हिन्दुओ का धर्म परिवर्तन करवाकर – उन्हें स्वर्ग की भेड़े बनने पर विवश करते हैं – ईसा का पिछलग्गू बना देते हैं – नतीजा – हिन्दू समाज धर्म को त्याग कर – मात्र स्वर्ग के झूठे लालच में ईसा के पीछे भटकता रहता है –

सोचने वाली बात है – ईसाई जो ऐसा षड्यंत्र रच रहे की ईसा से पाप मुक्ति होगी और ईसा को मानने वाला स्वर्ग में प्रवेश करेगा – क्या ये वास्तव में होगा ? क्या ये षड्यंत्र है अथवा सत्य ? क्या कभी धर्म को त्याग कर मनुष्य केवल एक भेड़ बन जाने से स्वर्ग पा सकता है ?

क्या कहती है बाइबिल ?

बाइबिल के अनुसार – सच्चे मसीह को पहिचानने के लिए बाइबिल में कुछ भविष्यवाणियां की गयी थी – जो उन भविष्यवाणियों पर खरा उतरेगा वो ही मसीह कहलायेगा – और जो भविष्यवाणियों पर खरा नहीं उतरेगा वो झूठा मसीह होगा – ऐसे मसीह अनेक आएंगे – जो खुद को ईसा और पाप का नाशक कहेंगे – मगर लोगो को सावधान रहकर – सच्चे मसीह पर विश्वास करना होगा – जो झूठे मसीह पर विश्वास करेगा – वो पापी ही कहलायेगा – वो कभी स्वर्ग नहीं जा सकता – ये बाइबिल का कहना है।

आइये एक नजर डाले – जिस ईसा पर विश्वास करके हमारे ईसाई भाई – हिन्दुओ को बहका कर उनका धर्म परिवर्तन कर रहे – वो ईसा क्या सचमुच बाइबिल के आधार पर – मुक्तिदाता है ? क्या वाकई ये ईसा – कोई मसीह है ? क्या वाकई ईसा पर विश्वास करने से मनुष्य स्वर्ग जाएगा ? कहीं ये कोई ढकोसला, अन्धविश्वास या षड्यंत्र तो नहीं ?

आइये एक नजर इसपर भी की क्या ये ईसा वही मसीह है जो खुदा का बेटा है – ये वही मसीह है जो मनुष्यो को पाप मुक्त करके स्वर्ग और सुख शांति देगा ?

मुख्यरूप से तीन भविष्यवाणियां हैं – जिनके द्वारा सच्चे मसीह को पहिचाना जा सकता है – लेकिन “ईसा” इन मुख्य तीन भविष्यवाणियों पर खरा नहीं उतरता – आइये देखे –

पहली भविष्यवाणी –

23 कि, देखो एक कुंवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा जिस का अर्थ यह है “ परमेश्वर हमारे साथ”। (मत्ती अध्याय १)

इस भविष्यवाणी में कहा गया की एक कुंवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी – उसका नाम “इम्मानुएल” रखा जाएगा – लेकिन सच्चाई ये है की “ईसा” को पूरी बाइबिल में – कहीं भी – किसी ने भी – यहाँ तक की ईसा के माता पिता ने भी ईसा को “इम्मानुएल” नाम से नहीं पुकारा – न ही इस बच्चे का नाम “इम्मानुएल” रखा – देखिये –

25 और जब तक वह पुत्र न जनी तब तक वह उसके पास न गया: और उस ने उसका नाम यीशु रखा॥

जब भविष्यवाणी ही “इम्मानुएल” नाम की हुई तो क्यों “ईसा” नाम रखा गया ?

दूसरी भविष्यवाणी –

3 अपने पुत्र हमारे प्रभु यीशु मसीह के विषय में प्रतिज्ञा की थी, जो शरीर के भाव से तो दाउद के वंश से उत्पन्न हुआ। (रोमियो अध्याय १)

29 हे भाइयो, मैं उस कुलपति दाऊद के विषय में तुम से साहस के साथ कह सकता हूं कि वह तो मर गया और गाड़ा भी गया और उस की कब्र आज तक हमारे यहां वर्तमान है।
30 सो भविष्यद्वक्ता होकर और यह जानकर कि परमेश्वर ने मुझ से शपथ खाई है, कि मैं तेरे वंश में से एक व्यक्ति को तेरे सिंहासन पर बैठाऊंगा। (प्रेरितों के काम, अध्याय २)

यहाँ से साफ़ है – भविष्यवाणी हुई थी की दाऊद के वंश से – खासकर “शारीरिक वंशज” – यानी दाऊद के वंश में संतानोत्पत्ति (सेक्स) करके उत्पन्न होगा – वो मसीह होगा – लेकिन हमारे ईसाई मित्र तो कहते हैं की – मरियम – कुंवारी ही गर्भवती हुई ?

इसका मतलब – मरियम के साथ – सेक्स नहीं हुआ – फिर दाऊद का वंशज जो सिंघासन पर बैठना था – वो ईसा कैसे ?

तीसरी भविष्यवाणी –

16 क्योंकि उस से पहिले कि वह लड़का बुरे को त्यागना और भले को ग्रहण करना जाने, वह देश जिसके दोनों राजाओं से तू घबरा रहा है निर्जन हो जाएगा। (यशायाह, अध्याय 7)

यहाँ भविष्यवाणी में बताया जा रहा है – जब वो मसीह परिपक्वता, सिद्धि – प्राप्त कर लेगा – उससे पहली ही यहूदियों के दोनों देश तबाह और बर्बाद हो जाएंगे – बाइबिल के नए नियम में – इस भविष्यवाणी के बारे में कोई खबर नहीं है – यानी ईसा को जब सिद्धि हुई – तब यहूदियों के दोनों देश बर्बाद हुए – इस बारे में – नया नियम खामोश है –

इन सभी मुख्य तीन भविष्यवाणियों से सिद्ध होता है – की ईसाई समाज जिस ईसा को – खुदा का बेटा – पाप नाशक – और स्वर्ग का दाता – कहते और मानते हैं – वो ईसा तो बाइबिल के आधार पर ही – मसीह सिद्ध नहीं होता – फिर क्यों – हिन्दुओ को मुर्ख बनाकर – उनको धर्मभ्रष्ट कर के – स्वर्ग का लालच देते हैं ?

मेरे ईसाई मित्रो – ये इस कड़ी का पहला भाग है – इसका दूसरा भाग जल्दी ही मिलेगा – जिसमे – खंडन होगा ईसाइयो के उस षड्यंत्र का जिसमे जबरदस्ती ईसा को मसीह सिद्ध करने की चाल ईसाई मिशनरी – चल रही – और मनुष्य को ईश्वर की जगह शैतान की राह पर चलाने का षड्यंत्र कर रही हैं।

अभी भी समय है – मनुष्य जीवन का लाभ उठाओ – धर्म की और आओ – हिन्दुओ भेड़ बनने से अच्छा है – मनुष्य ही बने रहो – वेद की और लौटो – अपने आप ही ये धरती स्वर्ग बन जायेगी –

लौटो वेदो की और

नमस्ते

 

289 thoughts on “ईसा (यीशु) एक झूठा मसीहा है – पार्ट 1”

  1. Itna to taya hai ki Uprokt mantavya likhnewale ko Parmeshwar ke Jivit Vachan, Shabd, Jiske dwara usne sara sansar aur sari vastuven rachi.
    Doosra, Vedon ki aur lotne se kya hoga, kyunki vedon me puran gyan nahi hai aur na hi vedon ya kisi bhi dharam granth ko padhne se manushya ko mukti nahi mil jayegi.

    1. achca to kaise milegi?

      Achcha waise jo aap mukti ki bat kar rahe ho ye siddhant kahan se liya gaya hai ?
      jara batayenge kis dharm granth se aapne ye siddhant uthyaya hai

      1. Multi ki matlb MOX h or aap bhi mantle h Marne me baad atma. Nahi Marti h . ham 7 janm me nahi mantle h . ham or aap ye mantle h ki ek din hame swarg ya nark jaata h . mere Bhai mukti MOX ya anant jivan ek hi baat h . ESA ne Bible me bataya h ki Jo mot se pahle ishwar ko pa lega . isa ki baate man lega wahi anant jivan payega. Yaani mukti h par sirf unki Jo is shareer me rahne tak ishwar yeshu ke gyan ko pa lege unhi ko yeshu anant jivan MOX mukti dega

        1. मुक्ति पर कुछ दिन में लेख आएगा उसे पढ़ लेना जी | ये स्वर्ग नरक क्या होता है ? स्वर्ग भी यही है और नरक भी यही है |

          1. सर जी जीस यीशु के बारे मे इतना जानकारी है।तो ये क्यूं नही पढ़े की परमेश्वर ने उसकी गवाही दी।वेदो को तो आप मानते हैं।मगर एक श्लोक बताएं जीससे लोग चंगे हो गये हों।सबुत मुख्य है।आपने पुरी जानकारी पढ़ी है किन्तु आजमाया नही।कृपया यीशु नाम को आजमाईये उत्तर आ जाएगा।

            1. Bhai ma samjh sakta. Hu apko.jesus christ par bharosa hoga ma bhi unki respect karta hu magar yeh kah dena ki vedo ma kuch nahi ha ya vedo sa changai mili ha ya jesus ka naam sa yeh galat hoga mera liye.kyuki Hindu dharm tabse sa jab christian ka pata hi nahi tha.aur shayad apne wo kahawat suni hogi.Iran. Misra roma sab mat gaya jaha sa kuch khas ha ki hasti mitati nahi hamari sadiyo sa raha ha duahman jaha hamara

              1. gensis chapter first ka first vachan padhna mere dost…..tb tumhe pta chalega ki dunia kisnr bnai…ek bar pdh lo….man na nhi manna tumhare hath me he

                  1. Jai Masih ki
                    aap kaun ho mujhe nahi pata lekin aap ne kaha Jo Khud ki Raksha nahi kar sakta Uska Kya Bharosa kare ek baat main aap ko batao Hamara Prabhu Yeshu Masih soyam Parmeshwar hai Wohi Khuda Hai Aur ohi Mukti data hai Chahe aap mano ya mat Mano Agar Prabhu Yeshu Masih apne aap ko Cruise par Balidan nahi karte to aap Aaj Zinda nahi Rehte Bible padho Phir baat karo Khuda Ko majak mat le….
                    Agr mere se bat krna hai to mo.no.deta hu call krna.
                    7999235713

                    1. बाइबिल क्या पढ़े ??? येशु जो खुद को राजा मानता था और जो उसे राजा ना माने तो उसे कत्ल करने का आदेश देता था वह खुद अपनी जीवन को राजा होने के कारण क्यों नहीं बचा पाया ??? दूसरी बात बाइबिल यह बतलाती है की अपनी बाप से सेक्स करो अपने बहन से अपने ससुर से सेक्स करो | क्या बात है जी ? बाइबिल बोलती है सप्ताह में एक दिन खाना मत खाओ तो क्या आप खाना नहीं खाते ? एक दिन कुछ काम मत करो तो क्या आप कुछ काम नहीं करते ? भाई साहब उसे समझाना जो बाइबिल नहीं पढ़ा हो | हमें ना सिखाए बाइबिल की बारे में |सत्य सनातन मार्ग पर आओ | धन्यवाद |

                    1. साईं को हम तो सम्माननीय ही नहीं मानते
                      ऐसा कुछ उसने जीवन में किया ही नहीं कि उसे याद किया जाये
                      ये तो आप उनसे पूछिए जो मानते हैं हमसे नहीं

                1. bhaiya aap hume jarur dikhana ki kaha likha h bible me apne papa se sex kare 9990861779my contact number aapne ye dikha diya jo mera h sab kuch aapka

        2. vibhansh you are a yeshu bhakt but do you know that yeshu is fictitious character and not a real person so your yeshu bhakti is a total waste ap nahi mante ki 7 janma hote hain lekin us se 7 janma ke astitva ko koi pharak nahi padta bible me jo jo likha hai wo sab jhut hain uska tyag kar do jis anant jivan ki ap bat karte ho vaisa kuch bhi nahi hain jivan anant nahi hota jivan bahut sare phases me chalta hai yeshu astitva me tha hi nahin to wo ishwar kase bana ? koi bhi yeshu ya koi bhi prophet anant jivan ko moksha nahi de sakta ap ki buddhi missionary logo ne puri tarah bhrashta ki hain ap satya sanatan vedic dharma jo arya samaj batata hain us me vapas aao

      2. Yeshu k bare me to Objection kr diye aap….
        लूका 12:10 padh lo..or Sambhal jao Other cast..
        जो कोई मनुष्य के पुत्र के विरोध में कोई बात कहे, उसका वह अपराध क्षमा किया जाएगा , परन्तु जो पवित्र आत्मा की निन्दा करे उसका अपराध क्षमा न किया जायेगा ।..
        isliye Christian Bhai log…
        Faltu k dibets pe dhyan mt do..
        kyuki vachan me likha hai… faltu ki Wad-Wiwad me na padna..
        2 तीमुथियुस 3:8
        और जैसे यन्नेस और यम्ब्रेस ने मूसा का विरोध किया था वैसे ही ये भी सत्य(Yeshu) का विरोध करते हैं:
        ये तो ऐसे मनुष्य हैं, जिन की बुद्धि भ्रष्ट हो गई है और वे विश्वास के विषय में निकम्मे हैं।
        ….
        Hmlog ko inlogon k liye prayer krna hai…kyuki ye sb kaam ,.
        God Bless you..

        1. पवित्र आत्मा कौन है जी | इसका क्या प्रमाण है यह बतलाना जी | और यह बतलाना जी येशु का जनम कैसे हुयी ? थोडा हमें जानकारी देना इस सम्बन्ध में |

          1. Bhai insaan Bible nahi pata hai bible insaan ko padti hai such kya hai ye koi nahi janta,aur Jo such jaan gaya woh yakeen nahi dila sakta hai….. pavitra aata nahi dikhti hai aur jab tumhe milegi toh kaise yakeen dilaoge…pehle ye janlo Jesus Christ Cross par kyu latke ?

            1. भाई जब इंसान बाइबल को नही पढ़ता तो इंसान को बाइबिल रखने की जरूरत ही क्या। है ? और जब बाइबल इंसान को पढ़ता है तो यहोवा और येशु की क्या जरूरत ? येशु ने क्यों शूली पर चढ़ा जब वह खुद को राजा बोलता था ??

          1. क्या सही है दोस्त ? बाइबिल की अश्लीलता सही है ? अच्छी बात है यह अश्लीलता आपको मुबारक |

      3. Dear brother Reswa Arya
        I thank full to God that you are seeking God in knowing Christ…
        Your heart is empty and only Jesus can fill it by his love and campassion.
        1)मेरा एक सवाल की आज तक जितने भी ईसवर है वो राजा बन के कु पैदा लिए कोई गरीब क्यो नही पैदा हुआ
        2)सभी अवतार पापी लोगो को मौत के घाट उतारने कुयु आये।
        3 )वेद मैं रिग वेद ओर यजुर्वेद मैं अश्वमेघ यग मैं घोड़े का बलिदान खून बहाया जाता था।
        मोक्षय प्राप्ति क लिए।अब कु बंद हो गया जानवरो का बलिदान।
        4)बलि पुरुष कोन है वेद मैं
        उत्तर चाहिए तो
        ये लो
        यही तो सब लोगो का सवाल है की आखिर क्या है येशु मसीह
        वो जो गरीब क घर पैदा हुआ दुनिया के सबसे छोटे शहर मैं पैदा हुआ महल मैं नही गौ साला मैं पैदा हुआ।
        जिसने कभी भी पाप नही किया 2017 साल पहले उसे क्रूस पर निर्मम हत्या हुई ओर जो उसकी हत्या कर रहे थे उन्ही लोगो के लिए यह क्षमा की प्रार्थना कर रहा था।
        क्रूस ही वह यज्ञ स्थल है क्रूस ही वो यज्ञ है जिसका वर्णन वेदों मैं लिखा है येसु मसीह ही यज्ञ पशु है जिसका बलिदान उस यज्ञ मैं हुआ।
        सबने पापीयो को मारा।पर येशु मसीह पापीयौ के बदले
        उनकी सजा खुद अपने ऊपर ले लि ओर उनके लिए बलिदान हो गया ओर जो यग वेदों मैं अधूरा रेह गया था वो येशु मसीह ने क्रूस पर मर कर ओर तीसरे दिन जी उठ कर पूरा कर दिया कोंन केहता है की ये बाइबल भविष्यवाणी की किताब है येशु तो वेदों की भविष्य वाणी पूरा करने आये थे।
        जो कोई येशु मशीह को प्रभु स्वीकार करेगा वह अपने पापो से मुक्ति पायेगा।
        आखरी सवाल क्या आप के पास ऐसे लोग है जो पहले डाकू थे हत्यारे थे drugist थे शराबी थे वहभीचरी (having immortal sexual relationship with other) थे जिनको वेदों की शिक्षा ने बदल कर एक नया ओर सच्चा इंसान ईमानदार इंसान बना दिया हो।
        मेरे पास लाखो लोगो की लिस्ट है जो अति पपि थे पर येशु ने उन्हें बदल कर सच्चा इंसान बना दिया ।
        ओर उन मैं से एक पपि मैं भी था जो अब सच्चा इंसान बन गया।
        reswa arya
        येशु मसीह आप से बेहद प्यार करते है ओर उन सभी से जो उसको बुरा भला कहते है।

        यूहन्ना 3: 16
        क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्रा (येशु मशीह) दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।

        John 3: 16
        For God so loved the world, that he gave his only begotten Son, that whosoever believeth in him should not perish, but have everlasting life.

        1. बलि प्रथा वेद में नहीं है वेद का मंत्र कहता है पशुन पाहि अर्थात पशुओं की रक्षा करो

      4. वेद मे राम शिव कृष्ण नही
        अग्नि वायु सूर्य देवता ही थे
        मूर्ति पूजा नरक लेगा
        एक बार वेद अध्ययन करो दोसतो

    2. Yes right me isa (p. b. a. h)ko ache or sache nbi manta hu or ye jo ye widwan likte he isa ke bare be ye sab glat he o khte he isa thawod ke wanshj me se nhi he are bhi isa bina bap ke peda huye but ma mariyam dawod ke washjmese he or uska putra dawod ki washj mese hua we believe jesus is a good massanger of god . or onke bare me galat kha jaye ham isai or muslim bhi chup nhi bete ge tum hiduo to pather, insan, earth , or etc po pujteho ham to isa nhi karte ham to believed one god

      1. जी केवल आप सही बोलते हैं और सब मुर्ख हैं भाई जान | हमें यह बताना की येशु का जनम कैसे हुवा… इशा का बिच का जीवन का उल्लेख क्यों नहीं मिलता | यहाँ पर जो लेख डाली जाती है वह खोजबीन करने के बाद ही डाली जाती है | बिना मुहमद को माने हम अल्लाह को क्यों नहीं प्राप्त कर सकते | अरे आप जैसे कई लोग गड़े मूर्ति की पूजा करते हैं वैसे वे खड़े मूर्ति की पूजा करते हैं | गड़े मूर्ति की पूजा से अच्छा खड़े मूर्ति की पूजा करना अच्छा होता है | वैसे हमारा मानना है गड़े मूर्ति और खड़े मूर्ति की पूजा करना दोनों ही गलत है

        1. भाई यीशु किताबी भगवान नही है।किताब से आप यीशु से परिचीत हो सकते है।किन्तु ईश्वर वो है जो आपसे बात करे और जवाब दे।वेद जीना सिखा सकती है।मगर मेरे भाई यीशु से सवाल करो जवाब वो खुद देंगे ।क्युंकि जिसने बनाया है अगर वो कहे मै सच्चा तो उसी की सुनना।सब से पहले आप अपने जितने भी ईश्वर है उनसे बात करो अगर वे बात किये तो वो सही नही तो फिर यीशु के पास जाना ।बइबल तो पढ़े हो अब ये तो सिखाने की जरूरत नही होगी कि कैसे जाऊं?जीवन एक बार का है।सत्य की खोज करो ।सवाल कभी खत्म नही होते,इससे पहले की समय गुजर जाए आज ही से प्रयास कर लो।

          1. Jab tumhar yeeshu ye sab karm karta hai to aatankwadi aap logon ko marte hein to wah bachata kyon naheen hai

            1. अपने पूरे नीति मत्वा से उस जीवित खुदा को ढूंढो तो वो तुम्हें मिलजायेगा bible ye kheti he.

    3. mai sirf itana hi likugi little learing is very danderious thing pahle jao aur gyan prapt karo , mariyam aur Yusuf dono hi daud(david) ke gharane ke the isliye yesu ko daud ke gharane ka kehte hai.
      immanual nam isliye bible mai nahi kyo ki her prakar ke log hote hai jaise father ko kai papa, dad, abba, bolte hai use tarah se imanual ko yesu bole jan laga.

      mai kud ek hindu brahman pariwar se hoo isliye mujhe her shstra ka gyan hai. lekin maine prabhu ko jana aur apnaya hai, methology aur theology ka ferk jano aur apni ache kholo. prabhu tumhe ashish deve Amen.

  2. केवल शब्दों के कह देने से सचाई बदल नहीं सकती,
    बाइबिल को कुछ शब्दों में जोड़कर नहीं मान सकते,

    बाइबिल संपूर्ण है और इसमें जूठ कुछ भी नहीं है
    एक मात्र यही ग्रन्थ है जो भुत भविष्य और वर्तमान को सही से बताता है

      1. Sawaal agar me karne lagu to aap jawaab de nahi payege. Aapke Jo sawaal h what’s aap kare . ek satyarth praksah jese granth Parke aap SB ne pure Bible pe sawaal utha liye . what’s app karo sawaal mujhe .

        1. जनाब हम यदि बाइबिल पर सवाल करने लगे तो जवाब नहीं दे पाओगे | मजबूर ना करे की बाइबिल की समीक्षा करने को | वरना शुरू से अंत तक पोल खोल कर देंगे हम

          1. क्यूकि बाइबल सच छुपाती नही।
            स भाई यीशु किताबी भगवान नही है।किताब से आप यीशु से परिचीत हो सकते है।किन्तु ईश्वर वो है जो आपसे बात करे और जवाब दे।वेद जीना सिखा सकती है।मगर मेरे भाई यीशु से सवाल करो जवाब वो खुद देंगे ।क्युंकि जिसने बनाया है अगर वो कहे मै सच्चा तो उसी की सुनना।सब से पहले आप अपने जितने भी ईश्वर है उनसे बात करो अगर वे बात किये तो वो सही नही तो फिर यीशु के पास जाना ।बइबल तो पढ़े हो अब ये तो सिखाने की जरूरत नही होगी कि कैसे जाऊं?जीवन एक बार का है।सत्य की खोज करो ।सवाल कभी खत्म नही होते,इससे पहले की समय गुजर जाए आज ही से प्रयास कर लो।

          2. Amit bhai aap ne bible sirf ek akhbaar ke tarah padi hai context ke baare main kabhi nahi socha . aap se request hai kee aap aapna WhatsApp no . send karo main aap ko bible or aapke ved grantho main se har sawal ka jawab dunga hum log kasam nahi khate par aap log kasam par bahut viswaas karte ho to aap ka jo sabse priya hai aapko uski kasam ke aap apna WhatsApp no mujhe send kare mera no 8979927477 hai. aapko apke har sawal ka jawab jaroor milega .

            1. hamne akhbaar ki tarah nahi parhaa hai ji bible ko… aapko chalo watsapp ke ek samuh me add karwaane ki koshish karta hu…. waha par charchaa karnaa…. kuch momin hain aur aap ek isai honge…. aur kuch aary bandhu…

    1. OM..
      RAJAN BHAI, NAMASTE…
      Here Are some inconsistencies from your (so called complete) bible…can you solve?
      1-) God creates light and separates light from darkness, and day from night, on the first day. Yet he didn’t make the light producing objects (the sun and the stars) until the fourth day.
      2-) God spends one-sixth of his entire creative effort (the second day) working on a solid firmament. This strange structure, which God calls heaven, is intended to separate the higher waters from the lower waters. This firmament, if it existed, would have been quite an obstacle to our space program.
      3-) Plants are made on the third day before there was a sun to drive their photosynthetic processes
      4-) Cain is worried after killing Abel and says, “Every one who finds me shall slay me.” This is a strange concern since there were only two other humans alive at the time — his parents!
      5-) And Cain went out from the presence of the LORD. And Cain knew his wife.” That’s nice, but where the hell did she come from?
      6-) God was angry because “the earth was filled with violence.” But didn’t God create the whole bloody system in the first place? Predator and prey, parasite and host — weren’t they all designed by God? Oh, it’s true that according to Genesis – 1:30, God originally intended the animals to be vegetarian. But later (Genesis- 3:18) he changed all that. Still, the violence that angered God was of his own making. So what was he upset about? And how would killing everything help to make the world less violent? Did he think the animals would behave better after “destroys them with the earth”? I guess God works in mysterious ways.
      There are over Thousands of inconsistencies in the Bible,
      so please leave this wrong path and come to the Vedic highway…
      thanks..

    2. अपेक्षित मसीहा का मुख्य कारनामा यहूदियों का उद्धार और उनके राजकीय स्वतंत्रता को स्थापित करना था। इस से तो दूर, ईसाई भीड़ ने यहूदियों पर इनी क्रूरता और अत्याचार से व्यवहार किया है – इतिहास इसका साक्षी है। ये मतांध ईसाई इस नहस को ईसा पर ईमान न लाने का नतीजा बताते हैं। इस मनघड़त मानसिकता को धर्म का नाम मत दिजिये।

    3. Yes kya aap bhi vishwasi h apne sawaal mujhe what’s app kr sakte h .

    4. हाँ सही कहा अपने |
      पिता परमेश्वर येशु मशी के नाम से हम मांगते है इन्हें छमा करे और समय रहते इन लोगो को सही रास्ता दिखए !

      1. यहोवा परभू हैं या फिर इशा | जानकारी देना हमें थोड़ा |

    5. rajan bible is the biggest fraud on earth it is not complete bible me sab jhut hi likha hain us me kuch bhi padhne layak nahi hain aur bible jaisa fraud book bhut, vartaman aur bhavishya ko jan nahi sakta kyon ki bible mein gyan nahi hain jag jao keval ved hi satya gyan hain apni logic ko badhao

  3. Bartiya shastar garnth..bhavishya puran prtisrg varg khand 6. Hindu granth.
    ..me likha hai.

    Shwet vastram ish putram kunvari sarmamnam isa masih eknama rishthanam.
    Is slok ka mammtal ye hai mere bhai…
    Jab ..manav roop me udharkarta janam lega tou vo nishpap hoga vo parmeshwar ka putra hoga..kunwari kanya se janam lega…uska naam isa masih hoga ..vohi muktidata hoga..or vohi ek naam hoga jo sare sansar me pratishtha ke saman hoga..bina uske mukti nhi milegi.
    …bhai ye hindu garnth me vevayas jo ne likha .h or bhaviyavani ki he…tou kya hinu granath bhi jhute h…grugarnt panjabiyo ka he ..usme bhi isa masih ko ..mukti data bataya hai ..or kuran me bhi…mere bha behno…marg jeevan or satya ek h..vo yeshu masih hai…tarik date bhi isa ki gavai deti …ac bc..after christ bifor christ…..pehle sare granth sahi se pado bhai fir nirnay lo…kanhi aisa na ho ..apka sundar darwaza jo swarg me jata he isamasih ke naam se vo band ho jaye..god bls you..amen

    1. “apka sundar darwaza jo swarg me jata he isamasih ke naam se vo band ho jaye..”

      ye gap kaheen aur sunana bandhuwar

      apka sundar darwaza jo swarg me jata he isamasih ke naam se vo band ho jaye..

      kya kunwari ke putra ho sakta hai bina sambhog ke

      kya yah sambhav hai ?

      1. Jab bhi koi granth padhe to argument ke liye na padhe or na hi formality ke liye kioyoki ishse knowledge hi milta hai or deh ko thaka deta hai .mind ko corrupt kar deta hai.Hume padna hi hai to wisdom ke liye padho kiyoki ishe body or mind ko control kar sakte hai .The fear of the lord is beginning of knowledge but fools despise wisdom and discipline.

      2. Jab bhi koi granth padhe to argument ke liye na padhe or na hi formality ke liye kioyoki ishse knowledge hi milta hai or deh ko thaka deta hai .mind ko corrupt kar deta hai.Hume padna hi hai to wisdom ke liye padho kiyoki ishe body or mind ko control kar sakte hai .The fear of the lord is beginning of knowledge but fools despise wisdom and discipline. Or ha yeshu mashi koun hai ye to aap nahi jaante lekin kiya nahi hona chahiye vohi jaante hai ? Asani se aap kah diya ki yeshu mashiha jhutha hai lekin aap me via masih ka sawbhaw chuppa huwa . lekin aap chuppa ke rakha hai . kuwari se janam hona sambaw hai .what is impossible with man is possible with God .

          1. Surya putra karn. Apne Hindu dharm me hi dekho bina sex ke sirf karn hi peda nahi hua . yeshu ki bhavishvaniya Hindu dharm me bhi h . par aap sirf ek satyarth prakash ke alawa kuchh parte hi nahi . ek isahi Galt ho sakta h masiha or Bible nahi

            1. भाई इतिहास में बहुत मिलावट कर दी गयी है … कोई भी बिना स्पर्म और ओवुम के मिले जनम नहीं लेता ?? यह मिलावट की गयी है ? और यदि ऐसा होता है तो आज ऐसा क्यों नहीं हो रहा ? अंधभक्ति और अंधविश्वास से ऊपर उठो

            2. vibhanshu yeshu astitva me tha hi nahi to uski bhavishyavani hindu dharma me kaisi ayi ? either you have not studied anything or you are distorting facts aur keval satyartha prakash hi satya granth hai aur koi bhi granth ya book satya nahi ho sakta isliye uska nam satyartha prakash hain tumhara yeshu aur sab masiha aur bible sab ke sab 100% galat hain main is ko prove bhi kar sakta huin ap mujhe 09011350747 par call jarur karna

      3. मनुष्य के लिए नहीं पर परमेश्वर के लिए सब संभव है।
        आप हमें ये बताएं कि 7 दिन कैसे बने?
        आम का पेड़ किसने बनाया?
        पृथ्वी कितनी बार नष्ट हो चुकी है?
        अब कैसे नष्ट होगी?
        भूकंप क्यों आते है?
        बाढ़ क्यों आती है?
        आसमान में बिजली के खमकने का क्या अर्थ है?
        सुनामी क्यों आती है?
        और ऐसे ही करोड़ों सवाल है पर पहले इनका जवाब सभी धर्मग्रंथो में ढूंढ कर बताना अगर कही मिल जाएँ तो और हाँ बाइबल के अलावा क्योंकि हर सवाल का जवाब पवित्रग्रंथ बाइबल ही है।
        जब जवाब मिल जाए तो इस नंबर पर बता दीजियेगा।
        7398556337

        1. OM..
          AJEET BANDHU, NAMASTE…
          AGAR YEH BAAT (“मनुष्य के लिए नहीं पर परमेश्वर के लिए सब संभव है।”) SATYA HAI TO KYAA AAP KAA परमेश्वर APNE AAP KO MAAR KE DUSRAA परमेश्वर BANAA SAKTAA HAI? AAP KAA परमेश्वर TO MAR HI GAYAA SAAYAD, SHARIR DHAARI THAA NA..!
          “हमें ये बताएं कि 7 दिन कैसे बने?
          आम का पेड़ किसने बनाया?
          पृथ्वी कितनी बार नष्ट हो चुकी है?
          अब कैसे नष्ट होगी?
          भूकंप क्यों आते है?
          बाढ़ क्यों आती है?
          आसमान में बिजली के खमकने का क्या अर्थ है?
          सुनामी क्यों आती है?”
          YEH SABHI PRASHNON KAA UTTAR VED ME HAI,
          KHOJTE KHOJTE SHIR KE BAAL SAFED HOJAAENGE, JUNI BIT JAAEGI LEKIN
          AAP KI BIBLA ME TO KADAAPI NAHIN MILEGI
          AAP EK PRASHN KA UTTAR DESAKTE HO? PRASHN YEH HAI: – AAP KAA परमेश्वर NE YEH DINIYAA KIS PADAARTH SE KAB AUR KYUN BANAAYAA?
          PRASHN TO HUM BHI BAHUT KAR SAKTE HAIN LEKIN UTTAR BHI HAMAARE SANG HOTAA HAI, AAP SIRF PRASHN KAR SAKTE HO UTTAR AAP KE PAAS NAHIN HOTAA…
          ISI LIYE DANGAL KARNI HO TO AJBOOT JAMEEN PE KHADAA HOIEGAA JI, DAL-DAL ME KHADAA HOKE DANGAL NAHIN KARSAKTE…LAUTIYE VAIDIK MARG KI OR..
          DHANYAWAAD..

  4. App dusra kadi ane se phehele bible aur sachai se padie dost …satya kuan hai nahi appko malum hoga..agar pasand nahi to badnaam mat kijie..God gives you wisdom

    1. दूसरे परंपराओं को बिन समझे बदनाम करना तो ईसाई मिशनरियों और प्रचारकों का खास शोक है, मित्र।

    2. john sharma ji pahle to ap ka nam john hain aur surname sharma hain ye kaise iska javab do bible ek fraud book hain us me sacchai dekhne ka saval hi nahi ata to malum karne ka bhi saval paida nahi hota bible pahle se hi fraud aur badnaam hain to us ko badnaam karne ka saval kaha ata hai ? Not Arya Samaj but people like you need God’s wisdom and that is also by God whose true knowledge is there in Ved only and not anywhere else

  5. Ye bhaya likh tahe hai ki Yeshu masih ha sabko bhed bna karahe hai ye dristant tha yadiy aap phir se (John 9:35-41,10:1-21) tak dhayan se padhe to jrur samj jaoge
    Jesus Christ ne to sirph bhed khkr dristant btaye hai.
    Per jhonthe baptis ne he sap ke bacho kyo kha hai .(Matt.1:7)
    Jra btaeye aap sab log

    1. ashish paul sahab
      filhaal is par research nahi kiya hai maine.. is kaaran is par abhi nahi bolunga… filhaal aap yah bataye lut ki beti ke prakaran ke baare me…. aur ek bahu kaise apane sasur se sambandh bana leta hai?? aur shayad ek bhai apane bahan se rape karta hai ??? ye sabhi bible me hai??? is par prakash daalna ji… aur raha baat iski jo refernce diya hai us par khoj karne ke baad jaankaari dene kaa koshish karunga.. bina praman ke aur khoj ke jawab dena galat hota hai is kaaran abhi kuch jawab nahi de raha… aapke jawab ki intjaar me…

      1. भाई जिन बातो की आप बात कर रहे हैं। वे सब बाते वह हुई और उस जगह का इतिहास है । वो वहां लिखा है और उन बातो को BIBLE ने सही नहीं बताया जो हुआ उसको बताया गया, छुपाया नहीं गया। BIBLE में जो बाते जिसने भी गलत की उन बातो को छुपाया नहीं गया। इसलिए BIBLE को सही ग्रन्थ मना गया और उसकी भविष्यवाणी भी आज पूरी होती है। मै आपको गलत नहीं कहता । बस यही की जब अब कभी आप BIBLE पड़े तो सिर्फ उसको समझे और उसका उस जगह लिखने का उद्देश्य समझे।
        मेरी यही प्रार्थना है येशु मसीह से की वे आपसे बाते करें । आमीन…

        1. बाइबिल में कहा लिखा है वे बाते गलत हैं | लुट प्रकरण सब गलत है ? ये बतलाना ? शराब क्यों आज भी पीते हैं ? बहुत सी बात है | आप अछे इंसान लग रहे हो जो यह स्वीकार किया की जो मैंने बतलाया वह सही जानकारी दी | धन्यवाद आपका |

        2. johnson subhash ji bible pahle hi galat book hain to chupane ka saval kidhar ata hain aur dusri bat bible sahi granth nahi hain us me sabhi bate aisi hain jis per aaj ke science age me vishvas karna ek pagal pan hain bible ki sabhi bhavishyavaniya jhut siddha ho chuki hain aur ek bat yeshu masiha astitva me nahi tha to wo hamse bat kyon aur kaise karenge ?? ap andhavishvas se upar uth jao aur kisi bhi masiha ko manna chod do aur keval veda ke upar bharavasa rakho aur satya ke marg par chalo jo keval veda hi hain aur koi nahi

          1. aap jo bol rahe ho yeh bhi sabse bada paap hai ….jo bhi yeshu mashih k baare me galat bolega yaa uske saamne galat karega woh paapi hai….mere bhai ek baat batavo bible main jo bhavishya vaniya ki gai hai ,.. woh abhi sabit ho rahi hai ya nahi ?…….mujhe to lagta hai aapke bheje me bhooot ghush gaya hai ishliye aapko sachhai kya hai pata nahi chal raha ….god aapko maaf kare Amen…

            1. बाइबिल कौनसी यीसु ने लिखी है वो तो उनकी मृत्यु के काफी बाद लोगों ने लिखी

      2. Filhaal vo chodo filhaal filhaal ye barood ki aap ek asa vekti ka naam bato do jo mar ke ji utha ho …. Me apke liye prathna karta hu ki aap ki yeshu mahsi ko jaan sako..

        1. jab yeshu mashih yeh duniya main laut ke aayega tab jitne bhi log mar chhuke hai …woh waapis jii uthenge or sabka nyaay hoga jisne paap kiya hai usko narak me bheja jayega or jishne paap kiya hai phir bhi yeshu masih ke pass binti ki hai kii mere paapo ko kshama kar yeshu …..or itna hi nahi yeshu mashih ke 10 niyamo ko jo log pure man se manenge us logo ko swarg me le jaya jayega

          1. लोगों का तो पुनर्जन्म होता है बंधु
            वो कोई कब्रो में थोड़े ही सड़ते हैं

    2. Sap ke bachho ka malb ye h ki apne ishwar ko nahi shetaan ka rasta apna kiya is liye aap ishwar ke bachhe kehlaane ke haqdaar nahi h. Utpatti ki kitaab me dhyan kijiye WO kon tha jiske bahkaaweme aake Adam or habba ne WO frout khaya jiski mana ki gayi thi WO sarp tha . or sarp pe hi setaan aya tha . is liye yahunna ne bhi logo ko sarp ke bachhe bola . yeshu ne game bhed bola kyo ko Jo yeshu ko manega WO charwaahe ko tarah apne bhedo ko khayal rakhega kisi ko bhatkane nahi dega .me bhi naya vishwasi hu koi janm se isahi nahi bana hu. Apke sawaal bebuniyaad h jawaab dunga

      1. शैतान हमें नजर क्यों नहीं आता | जब नजर नहीं आता तो हम कैसे उसकी बात को अपना लिए है ? थोडा जानकारी देना जी |

        1. kyu ki shaitan ko andhera pasand hai …ap jo bol rahe ho mere bhai yeh aapko thoda soch k bolna chahiye tha…..

          yeh paapi duniya main shaitan nahi hai toh yaha pe mara mari keise hoti hai?,chhori karne ke khayal kaun lata hai ?, yeh duniya main bhrashta char keise badh gaya? , balatkaar keise badh gaya ?………..yeh sab vichar shaitan ka hai………..agar yeh sab vichar yeshu masih ke hote to bible main kyu likha ? ki chhori na karo ,vyabhichar na karo,tu khun na kar, tu apne padosi ke khilaf jhuthi gavahi na de extra…….<~ kya aap mujhe inka javab de sakte ho…..shaitan usko dikhta hai jo shaitan k haath bandha hai jis aadmi ya aurat koo shaitan ne pakda hai us aadmi ya aurat ki har harkat ekdum bhoot ki tarah hogi…..agar aap use lambi ya moti chain se bandho ge phir bhi woh tod degi ( ya tod dega)… yeh sab shaitan ki taakat hai ….lekin mare yeshu masih ke saamne shaitan kabhi bhi teek nahi sakta kyu ki mera yeshu masih pavitra aatma (Holy Spirit ) hai…or shaitan pura paap se bhara hai ………

          1. यदि शैतान है तो आपके खुदा से बड़ा हो गया जो उसकी बात जी नहीं मानता

  6. अगर ये झूठा मसीहा है तो फिर सच्चा मसीह कौन है ये बताओ अौर जो काम यीसू के एक नाम लेने से हो रहे है तो वो कोई और करके दिखाये आज बड़ी बड़ी मुश्किल बीमारी भी यीसू के नाम से जा रही है कोई अौर करके दिखाये तो माने और जो शिछाए येशू ने दी किसी ने नहीं दी खासकर (अपने पड़ोसी को अपने समान पृेम कर) और अपने दुश्मनो से प्यार करो! और अपने सताने वाले के लिए दुआ करो तुम क्या जानो मेंरे भाई

    1. @ prem sinh

      यदि आपका ईसू बीमारियाँ ठीक कर देता है तो फिर इतने हॉस्पिटल क्यों खोल रखे हैं ?
      इन सबको बंद कर दो
      🙂

      ईसू ही ठीक कर देगा

        1. kya andhvishwaas hai…. chalo mere ek dost hain unhe polio bachha me maar diya bolo unhe yeshu thik kar de… are paakhand mat karo ji… maine kai baba ko bhi dekhaa hai ki wah mare ko jinda kar dete hain magar jab koi jaata thaa to thik nahi kar paata thaa… aapki baato par hasi aati hai ji….

        2. मार्शल जी,

          ये मैंने भी देखा है ख्रिस्ती पादरी प्रार्थना के नाम पर सब को ठीक करते है. पर ये कोई इशू का चमत्कार नहीं है. ये संगीत साधना(म्यूजिक थेरेपी) का असर है, जो कोई चमत्कार नहीं है पर विज्ञान का असर है. आप अगर १५-३० मिनट रोज गायत्री मंत्र बोलते हो तो भी अनेको प्रकार के रोग दूर होते है. और ए.पी.जे अब्दुल कलम सर ने एक बात कही थी की अगर १०० करोड़ भारतीय एक साथ गायत्री मंत्र बोले तो किसी नुक्लेअर बम का भी असर नहीं होगा भारत को. कई प्रकार के संगीत से दिल की बीमारी से लेकर कैंसर तक के रोग भी दूर होते है.

          इसके अलावा आप रोज योगासन और प्राणायाम करते हो तो भी बहोत सारी बीमारिया आप से दूर रहेगी.

          मैंने दी हुई चीज़े आप सर्च कर सकते हो और सत्य का निश्चय कर सकते हो.

          और हां, ख्रिस्ती पादरी लोगो की बीमारिया दूर कर के अच्छा काम करते है इसमें कोई शंका नहीं है. पर इशू को भगवान बता कर गलत रास्ता भी दिखा रहे है.

          और एक बात भी देखना, ये ख्रिस्ती मिशनरी ने कितने मुसलमानो को कन्वर्ट किया है. इतनी सारी मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक़ से पीड़ित है. कितनी महिलाएं इनमे से ख्रिस्ती बनी है.

          – धन्यवाद्

        3. agar ap ka yesu wakey hi thik karta hain to aap ap ke kisi bhi rishtedar se ye karva lijiye aur batayi ye ki uska natija kya hua andhavishvas se upar utho koi bhi masiha chahe wo yeshu ho aur koi kalpanik vyakti ap ke jivan mein koi badlav nahi la sakta ap ko ap ke jivan mein badlav la ne ke liye keval veda jo keval satya gyan hain us ko hi apnana padega

      1. Yeshu changa karta h ye sach h. Kahte h jiska koi nahi hota h uska bhagvaan hota h . Bible me ek jagah likha h ek amir ja swarg ke rajya me Jana vesa hi h jese ek unt ka sui se nikalna mere . ishwar sunta h pray ko . hospital bhi zaruri h warna ilaaj wahi hoga . thik khuda ki marzi se hoge . Jo sachhe masih bhakt h unhe hospital ki zarurat nahi hoti h. Or mujhe nahi lagta sachhe log jyada h.

        1. ये स्वर्ग कहा है जी ? विज्ञान ने खोज निकाला क्या ? जैसे मंगल है बुध है शुक्र है स्वर्ग कहा है जी ? चलो मेरे पड़ोस में एक विकलांग हैं बोलो येसु को उसे ठीक कर दे मैं अभी इसाई मत को अपना लूँगा | अरे झूठ बोलने की भी एक हद होती है जनाब

          1. bhai main tujse bolta hu ja uss viklaang k paas ,thoda tel (kitchan main use hone wala oil) lekar or uss viklaang ko uske sar pe uss tel se cross ka niashan kar or apni aankhe band karke pure vishwash ke saaath prarthna kar , ke hai yeshu masih maine jo paap kiya hai usse tu maaf kar or main abhi aapke paas jo binti lekar ke aaya hu woh yeh hai ki mere saamne jo ek viklaang vyakti hai usse prabhu yeshu masih ke name main changai de ………………agar tu prarthna karega mere bhai god sware bata raha hu woh vyakti jarur changai payega……….lekin tum jab bhi pray karte ho pura bharosa hona chahiye jesus pe na ki pray karte samay manme koi dushra vichar aa raha ho………..or meri ek baat sunle bhai jesus se pure man se pray karni hai toh sabse pehle bharosa rakhho………..aur woh chheez tum me nahi hai to kaha se theek hoga koi

            1. यदि ऐसा है तो सभी अस्पताल बंद कर देने चहियर ☺️

        1. Kya Hindu dhram itna hi sachcha hai to puri duniya me kyom nahi fela par sachchai choop nahi sakati Jesus ko or pure isai dharam ko pura universal manta hai or duniya ki maha shakti hi Jesus udaharn Great Britten, American, Russy, koi ham sent jeet Santa hi Jesus hi isliye buddhi hi Jesus nahi to buddhi bhi nahi sirf patthar

        2. Esa kon sa avishkar kar diya jis se ghamand karte ho mobile yahoodi ka avishkar Jesus buddhii dete hai milatry me hatiyar ya to Christian ya to yahioodi Indian ke pass 0 hi bhai chinta mat karo pura duniya Jesus ko jaanta hi par pura duniya Hindu ko nahi janta

          1. sam there is a limit for false talking tumhara yeshu astitva me tha hi nahin aur ap us ko mante hain yahi sab se bada ghamand hain mobile aur baki sare avishkar jaise buddhi ye to sab science ki den hain tumhare so called jesus ka use se koi sambandh nahi kalpanik jesus military aur hathiyar kuch nahi de sakta aaj puri duniya hindu dharma ki or akarshit hoti hain apni andhavishwas se upar utho

      2. yeshu masih kehta hai bhai sahab ki….jo mere uppar bharosa rakhega uske saath sada sarvada rahunga or use har musibato se bachaunga……..ab mere bhai mujhe ek baat batavo ki jo log hospital me pade hai kitne log yeshu masih ke uppar pura bharosa karte hai ………yeh pehle jaano or mujhe batavo

        or yeshu masih ne ye bhi kaha hai ki jab tak tum ye duniya me ho tabtak tumhe har paresani se gujarna hoga,,,mere jeise kai log aayenge magar usme se tumhe bachna hoga …..mere aane tak jo log teeke rahenge woh anant jeevan (swarg)ki raah paayega

        or yeshu masih ye bhi kehta hai ki me apne logo ko mere paas bula raha hu magar koi muje samaj nahi sakta ( jeise ki aap ) …..bhai abhi bhi time hai soch le varna nark main jaoge

        1. बंधु यीशु तो अपना बचाव न कर सके हमारा क्या करेंगे

    2. पड़ोसी से प्यार, इनसानियत के लिये बलिदान और द्वेष रखने वालों के प्रति कृपा – यह तो सभी भारतीय शास्त्रों का उपदेश है मेरे भाई। कहां से यह गप मिला कि यह सिर्फ़ ईसा जी के दिये हुए मोतियां हैं?

    3. प्रेम सिंह जी,

      सच्चा मसीहा कोई नहीं है. सम्बन्ध ईश्वर और आत्मा का होता है, उसमे कोई मध्यस्थी की आवश्यकता नहीं है. कोई राम, कृष्ण, बुद्ध, मुहम्मद, इशू या मूसा नाम के मसीहा नहीं है. ये सब समाज के उद्धार के लिए काम करते थे जिनको लोगो ने भगवन या मसीहा बनाया.

      और ये मैंने भी देखा है ख्रिस्ती पादरी प्रार्थना के नाम पर सब को ठीक करते है. पर ये कोई इशू का चमत्कार नहीं है. ये संगीत साधना(म्यूजिक थेरेपी) का असर है, जो कोई चमत्कार नहीं है पर विज्ञान का असर है. आप अगर १५-३० मिनट रोज गायत्री मंत्र बोलते हो तो भी अनेको प्रकार के रोग दूर होते है. और ए.पी.जे अब्दुल कलम सर ने एक बात कही थी की अगर १०० करोड़ भारतीय एक साथ गायत्री मंत्र बोले तो किसी नुक्लेअर बम का भी असर नहीं होगा भारत को. कई प्रकार के संगीत से दिल की बीमारी से लेकर कैंसर तक के रोग भी दूर होते है.

      इसके अलावा आप रोज योगासन और प्राणायाम करते हो तो भी बहोत सारी बीमारिया आप से दूर रहेगी.

      मैंने दी हुई चीज़े आप सर्च कर सकते हो और सत्य का निश्चय कर सकते हो.

      और हां, ख्रिस्ती पादरी लोगो की बीमारिया दूर कर के अच्छा काम करते है इसमें कोई शंका नहीं है. पर इशू को भगवान बता कर गलत रास्ता भी दिखा रहे है.

      और एक बात भी देखना, ये ख्रिस्ती मिशनरी ने कितने मुसलमानो को कन्वर्ट किया है. इतनी सारी मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक़ से पीड़ित है. कितनी महिलाएं इनमे से ख्रिस्ती बनी है.

      – धन्यवाद्

      1. toh bhai mujhe ek baat batao koi bhi yeshu k e name se pray karta hai to kyu changaai milti hai …..yeshu name koi sadhna to nahi hai,koi sangeet nahi hai,or yah name sirf 1 word ka hai na ki 1000 ya 10000 aadmi ka name hai…

        or ek baat puch sakta hu aapko…..ki aap mar ne se darte ho ………..aap thoda example ke liye socho aapke paas 100 log daud ke aa rahe hai aapko maar ne ke liye toh aap kya karenge? bataiye……

        1. aise tark kai logo se sune hai. maine ye bhi suna hai ki krishna yaa shiv ke naam se mukti milti hai. kisi naam ko bar bar japte rehne se vo mann mein ruk jati hai, isliye acchi lagti hai. isme koi chamatkar nahi hai. Aap aankh band kar ke aumkar karoge to bhi aapko accha lagega. Aur changai acche karmo se milti hai. Kisi ke naam se changai milti to har koi galat kaam kar ke kisi ka naam japna shuru karta tha.

          Mumbai ka ek padri tha Sabestian Martin jo Arshivad trust chalata tha. Vo daavaa karta tha ki vo koi bhi bimaree issa ke naam se theek kar sakta hai. Vo kuch saalo pehle apne ghar mein mara hua mila tha. Aur usko marte vakt tak diabetes tha.

          Agar issa itna hi shakti-shalee hai to uska koi bhi bhakt gareeb yaa duhki nahi hona chahiye. Mujhe batao ki kya saare issa bhakt sukhi aur dukh mukt hai. Koi bhee vastu ko manane se pehle pur sacchai dekh lo.

          Aur aapka sawal tha, haa agar hazaro log marne aate hai to koi bhi bhagne ka prayas hi karega. aap aur mein us zamane mein nahi gaye the isliye hamko pata nahi hoga kya hua tha tab.

  7. Hindu granth abhi take Sanskrit me he ,usko kusine anuvad nahi kiya ,ore koi use samzata nahi ,Sab vedo me asliyat he ,bure kamo ka lekha jokha he. Na Jane kitne Devi devta huve ,sab pap karte rahe ,yahan take ki Jo sivling ki tum puja larte ho WO bhi aapko samaz na chahiye WO shivling yani shiv ka Ling he.

    Bible ko dekho WO duniya me kone kone me apni matru bhasha me dekhoge ore padhoge.sabako samaz me aata he.ap logo ki tarah nahi.

    God bless you.

    1. kiran gamit ji….
      bible ko kis bhashaa me diyaa gaya yah batlana ji…. dusari baat aapne apne man se nishkarsh nikaal diya ved me shiv ki puja karne shivling ki pujaa karo aisa bola hai yah kaha likhaa hai hame jaankari dena…
      aapne bola ki bible sabhi matribhashaa me hai to kya yah maithili me hai ??? bhojpuri me hai ??? angikaa me hai ??? urdu me hai??? maghi me hai ??? kudukh me hai ??? ye to bas aise thoda bahut jaankaari di hai…
      ved ko sanskrit me kyu diya gaya is par kabhi ham aur aap charchaa kar sakte hain…
      aaye aap hamare facebook page par charchaa kare aapko puri jaankaari di jaayegi…
      aage aapke comment me kuch bible ki jaankaari dene ki koshish karenge …
      aapke jawab ki pratikshaa me….

        1. are janab hame kya tension lena… maine to bas jawab diya thaa unki jhuth ko prakash me laaya thaa jaise aapne bola ki yesu kuch bhi kar sakte hain…

        2. marshal kaise ho jayega jesus ek fictitious character hain us ki prarthana kaise karenge ? wo to unscientific hain us se tension aur badhega

      1. Amit Roy ji mujhe aapka commit achchha laga…bhaiya ji in logo ke Jo isaai Dharm hai uske baare me samajh nhi aa rha ki Jesus hindu the yaa bauddh….yaa koi aur….? Ekdum ajeeb story and Kya bhavisya puran me ishu Masih ki bhavisyavani ki Gyi hai?

        1. waise main puraan kaa bahut si baato kaa khandan karta hu magar yah baat sahi hai ki bhavishy puraan me mahamud jise ye muhmad paigambar bolte hain muslim kaa varnan hai … iske alawa isa masih sab kaa bhi varnan hai… dhanywaad ji aapko mera comment achha laga uske liye…

  8. Bible me sabhi bhavisya vani he Jo pruthvi pe ho rahi he ore hone valid he.
    Yahan take ki vigyan bhi usi tarah kehta he. Bible ko nahi manta firbhi . WO bhi chakit rah gaya he.

    1. kiran gamit ji
      bible me kya sahi bhavishywaani hai ji yah batlana ji…
      sabse pahle aadam aur eve ko bolaa ki is fal ko mat khana … yah fal sahi nahi… fir adam aur eve ko kyu khaane diya jab wah sab kuch jaanta thaa. kya aurat kaa sharir ek hi haddi se banaa hai ???? kya bina sex kiye koi aurat maa ban sakti hai ??? yadi haa to kaise ??? jab tak sperm aur ovum naa mile tab tak koi maa nahi ban sakti??? fir maryam kaise maa ban gayi ??? yahovaa ne fal kaa ped kyu banaye jab jaanta thaa yah sristi ke liye haanikark hai… sawal to abhi shuru bhi nahi kiya hai puchna… ye to bas jhalak hai…
      aapke jawab ki pratikshaa me… fir sawal karenge bible se …
      sorry yadi kuch galat bola ho to…
      dhanywaad

  9. Dosto Duniyan ki zanzat me mat pado .
    Bible padho ore prabhu me Marg me chalo .
    Achhe kam karo, sabka bhala karo ,ore ek Duje se prem karo .
    Aapki jobhi bhash he usi bhasha me tumko Bible aasani se mil jayegi .
    Prbhu aapko a as his de AMEN.

    1. kiran gamit ji
      duniya ki zanzat me ham nahi padte ji…
      bible me aisa kya hai ji thoda hame jaankaari dena ji…
      ye lut kaa kaand kya hai ji…
      bahu se jismani sambandh banane ka kya prakarn hai ji…
      aur kuch bhashaa bola hai usme nahi hai ji bible… ye to bas udaharn kiye hain ji …
      thoda purvagrah se hatkar ved parhe
      fir aap satya sanatan dharam ki aor aur ved ki aor laut jaaoge…
      aapke jawab ki pratikshaa me…
      dhanywaad….

        1. जनाब जो सत्य है वही बोला है जो बाइबिल में लिखा है |

    1. jesus is god or yahova is god ?? bible teach us you can rape ur sister. u can do sex with ur daughter. daughter in law do sex with father in law… very good education give us bible… yes ofcourse ” Bible is only true book in the all of religious book. Praise the Lord

    2. marshal you are totally wrong jesus was not in existence at all not proven by any history or science bible is the biggest fraud on earth and not a true book it does not contain a single word which can be called truth it is not religious but society dividing book praising your Lord will not solve any problem of humanity so abandon all these things and return to Vedic Dharma of Arya Samaj which is the only way of Truth and Knowledge based on only true books of knowledge Vedas call me on 09011350747

  10. Christians ke bare me bolne wale brother. .kya aap bata sakte hh kya? Jis krisna Ko aap iswar mante ho. .wo ladkio Ko ched Chad kyun krte the

    1. marshal oreya
      bhai sahab yogishwar krishn aise nahi kar sakte yah milawat kar di gayi hai… mahabhaart me maatra 10000 shlok the jo aaj 100000 shlok kar diye gaye hain geeta 70 shlok ki hai jise 700 shlok kar diya gaya hai.. puran me bhi milawat kar di gayi hai ashlilta ho gaya hai usme jaise bible me hai.. ek baat yah bhi jaan jao ji ramayan mahabhart puran ye sabhi itihaas hain… aur itihaas me milawat ki jaa sakti hai… ham to swikaar karte hain ki milawat huyi hai kya aap swikaar karoge ki bible me milawat ki gayi hai milawat ho sakti hai…. aapke jawab ki pratiksha me

  11. 1 कुरिन्थियों 1:18
    [18]क्योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है, परन्तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है।

    1. बाइबिल ईसा मसीह का कथन (लुका १९ चैप्टर २७ ) : मेरे जो दुश्मन नहीं चाहते थे की मैं उनका राजा बनू , उन्हें यहाँ लाओ और मेरे सामने उन्हें कतल करो |

  12. 2 कुरिन्थियों 4:4
    [4]और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश

    1. बाइबिल ईसा मसीह का कथन (लुका १९ चैप्टर २७ ) : मेरे जो दुश्मन नहीं चाहते थे की मैं उनका राजा बनू , उन्हें यहाँ लाओ और मेरे सामने उन्हें कतल करो |

  13. 2 कुरिन्थियों 4:4
    [4]और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके।

  14. 1 कुरिन्थियों 2:14
    [14]परन्तु शारीरिक मनुष्य परमेश्वर के आत्मा की बातें ग्रहण नहीं करता, क्योंकि वे उस की दृष्टि में मूर्खता की बातें हैं, और न वह उन्हें जान सकता है क्योंकि उन की जांच आत्मिक रीति से होती है।

  15. मरकुस 12:28-33
    [28]और शास्त्रियों में से एक ने आकर उन्हें विवाद करते सुना, और यह जानकर कि उस ने उन्हें अच्छी रीति से उत्तर दिया; उस से पूछा, सब से मुख्य आज्ञा कौन सी है?
    [29]यीशु ने उसे उत्तर दिया, सब आज्ञाओं में से यह मुख्य है; हे इस्राएल सुन; प्रभु हमारा परमेश्वर एक ही प्रभु है।
    [30]और तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन से और अपने सारे प्राण से, और अपनी सारी बुद्धि से, और अपनी सारी शक्ति से प्रेम रखना।
    [31]और दूसरी यह है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना: इस से बड़ी और कोई आज्ञा नहीं।
    [32]शास्त्री ने उस से कहा; हे गुरू, बहुत ठीक! तू ने सच कहा, कि वह एक ही है, और उसे छोड़ और कोई नहीं।
    [33]और उस से सारे मन और सारी बुद्धि और सारे प्राण और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना और पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना, सारे होमों और बलिदानों से बढ़कर है।

  16. 2 पतरस 3:16
    [16]वैसे ही उस ने अपनी सब पत्रियों में भी इन बातों की चर्चा की है जिन में कितनी बातें ऐसी है, जिनका समझना कठिन है, और अनपढ़ और चंचल लोग उन के अर्थों को भी पवित्र शास्त्र की और बातों की नाईं खींच तान कर अपने ही नाश का कारण बनाते हैं।

    1. जी क्या समझ में आएगा जी | क्या यह समझ में आना चाहिए अपने भाई बहन में सेक्स करो ? बाप बेटी सेक्स करो | ससुर बहु सेक्स करे ? औरत का शारीर एक हड्डी से बना है तो आदम का शारीर से तो फिर २०८ हड्डी कैसे | क्या क्या समझ में आएगा | यह बात समझ से बाहर है |

        1. bravo भाई मैं इस तरह की जानकारी देना कभी नहीं चाहता मगर जो लोग बाइबिल कुरान हदीस सब की बाते करते हैं तब हमें मजबूर होकर करना पड़ता है हम यह भी जानते हैं की साईट पर केवल पुरुष ही नहीं महिला भी आते हैं और हमारे आर्टिकल और कमेंट पढ़ते हैं मगर जो यह महिमाँ मंडन करते है बाइबिल सही से पढ़ो तो यह जानकारी देनी परती है | एक उदाहरन देता हु कलवानी तमिल मूवी आया थी २०१० में जिसे देखकर एक बच्ची गर्भवती हो गयी प्रेरणा मात्र से | ठीक इसी प्रकार बाइबिल कुरान हदीस पढ़कर और भी भटक सकते हैं जैसे एक लड़की मूवी देखकर भटक गयी थी हमारा मकसद है यहाँ सत्य की जानकारी करवाए जिससे की मार्ग से ना भटके | कोई २+२=5 बोले तो उसे २+२=४ बताये और उसके बात भी कोई उस बात को स्वीकार ना करे तो यह हमारी गलती नहीं होगी हमने अपनी तरफ से जानकारी देने की पूरी कोशिश की | धन्यवाद |

          1. अमित जी,

            बाइबिल से कई सारे अनुचित उदहारण आप दे सकते हो. जो बाते पारस्परिक विरोधी है, उसको आप प्रदर्शित करे. उसके आलावा आप स्वयं ही जानते हो की पुराणों में कैसे उदहारण आते है. आप ऐसे सेक्स वाले उदहारण तब प्रदर्शित कर सकते हो जब ऐसी कोई चर्चा होती है.

            – धन्यवाद

            1. bravo जी
              हम ऐसे उदाहरन नहीं देते हैं मगर जब कोई मजबूर करे तब हम उद्धरण देते हैं | जब बोला गया बाइबिल पढ़ो तो बताया की क्या क्या लिखा है उसमे

    2. OM..
      DINO BANDHU, NAMASTE..
      You advise that -“बईबल को ठीक से पढ लीजए आप को समझ आ जयेगा”
      I think, you don’t have better understanding about bible. you should read carefully like a human being not like a parrot.
      I am giving little inconsistencies from bible; please give me correct answer:

      Genesis:
      (1:14-19/ 1:3-5): –
      God creates light and separates light from darkness, and day from night, on the first day. Yet he didn’t make the light producing objects (the sun and the stars) until the fourth day?!!
      (1:14-19). 1:11): –
      Plants are made on the third day before there was a sun to drive their photosynthetic processes.

      God’s clever, talking serpent.!! 3:1

      (4:14):-
      Cain is worried after killing Abel and says, “Every one who finds me shall slay me.” This is a strange concern since there were only two other humans alive at the time — his parents!
      (4:16): –
      “And Cain went out from the presence of the LORD.”
      (4:17): –
      “And Cain knew his wife.” That’s nice, but where the hell did she come from?
      Dino brother, leave this silly way as soon as possible and come to Vedic way and this is only the way of salvation..
      thanks..

  17. bhaiyo aise to jitne v dharma he sab ko sab swarg ka sapna dekhate he ….pap ki bate batate he to me ye janna chahata hu ki akhir koun sach he our koun jhut he…..no -1 koun he….our jo swarg he wo swarg alaga alag jagah me he ya ek he ….our aj tak koun waha gaya he kya proove he kya wo ja ke wapas yaha aya he dharti per aap ko bataya he kya….ki haa me swarg dkh ke a gaya hu..aap v chalo….meri mano to sirf insan bano….dharma jaat pat uchh nich paap punya ye kori bakbas he……

    1. वेद तो इंसान बनना सिखाता है | मनुर्भव | मनुष्य बनो |सनातन वैदिक धरम ही है जो यह बोलता है मनुष्य बनो और सब बोलता है इसाई बनो मुस्लिम बनो हिन्दू बनो इत्यादि |

  18. Agar aapse pucha jaye ki…
    “जो तेरे एक गाल पर थप्पड़ मारे उस की ओर दूसरा भी फेर दे”
    aisa kisne kaha tha ??..
    ..to aaplog kahoge ki Ye to Mahatma Gandhi ne kaha tha… ek minute Mahatma Gandhi ne nai kaha tha…. ..Gandhi ji ne to bs hume yaad dilaya tha ………or aap btaiye Gandhi ji kis Religion k the. .??
    but yaha par iss baat ko gaur kijiye ki..
    ye wachan Bahot phle Yeshu Masih ne kaha tha …aap Bible me check kr skte hai..
    लूका 6:29
    जो तेरे एक गाल पर थप्पड़ मारे उस की ओर दूसरा भी फेर दे; और जो तेरी दोहर छीन ले, उस को कुरता लेने से भी न रोक।

    Gandhi ji ko koi Bola tha kya Bible padhne??
    But usne Bible padha …or Sachhai ko jaan liya.. uss par Vishwas kiya…

    Gandhi ji khud Sachhai or Ahinsa k Marg pr chalte the….lekin kyu?? Kyuki Yeshu Masih v usi marg par chalte the……or isliye Gandi ji ,.. hmlg ko v usi marg par chalne k liye khte hai….

    1. जनाब कई बाते हैं यहोवा को आप लोग इश्वर मानते हो ना कानन या देश का नाम नहीं याद आ रहा बाइबिल के आधार पर जिसमे यहोवा ने बहुत लोगो को बहुत तंग किया | उत्पति से गिनती के बिच में पढ़ो सब जानकारी मिल जायेगी | सही कहा गांधी जी बाइबिल के मार्ग पर चले तभी तो उन्होंने कई महिला के साथ जीवन वयतित किये | ये लिंक है http://www.dainikbharat.org/2017/04/15-79.html
      बाइबिल में भी सम्बन्ध बनाने को बोला है पिता पुत्री में भाई बहन में ससुर बहु में | यह भी महात्मा गाँधी को बाइबिल ने ही सिखाया | किसी को जलन हुयी तो क्षमा प्रार्थी हु | सत्य हमेशा कड़वा होता है

  19. अनिरुद्ध जी! केवल लूका की ही आयत क्यों पेश करते हो?
    कभी ये सब आयतें क्यों नहीं सुनाते?

    १. “यदि कोई प्रभु क्रीस्ट को प्यार न करे तो श्रापित हो।”
    [ १ कुरिन्थियों (पौलुस के पत्र की समाप्ति) १६ | २२ ]

    २. “अगर तुम्हारे पास कोई आवे यह शिक्षा ( ईसाई शिक्षा ) न लावे तो घर में न आने दो, और उसको प्रणाम न करो।”
    [ २ युहन्ना १ | १० ]

    ३. “लोगों से ऐसा बर्ताव करना कि उनकी वेदियों को ढा देना, उनकी लातों को तोड़ देना, उनकी अशोरा नामक मूर्तियों को काट-काट कर गिरा देना और उनकी खुदू हुई मूर्तियों को आग में डाल देना।”
    [ व्यवस्था विवरण ७ | ५ ]

    ४. “तुम क्या सोचते हो मैं इस धरती पर शांति स्थापित करने आया हूँ? नहीं! मैं तुम्हें बताता हूँ, मैं विभाजन कराने आया हूँ।
    क्योंकि अब से आगे एक घर के पाँच आदमी एक दूसरे के विरुद्ध बँट जाएँगे। तीन दो के विरोध में और दो तीन के विरोध में हो जाएँगे।
    पिता पुत्र के विरोध में और पुत्र पिता के विरोध में, माँ बेटी के विरोध में और बेटी माँ के विरोध में, सास बहू के विरोध में और बहू सास के विरोध में हो जाएगी।”
    [ लूका १२ | ५१-५३ ]

    ५. “रविवार के दिन काम करने वाला मार डाला जाए क्योंकि सातवें दिन पवित्र और यहोवा के लिए विश्राम का दिन है, उसमें कोई काम करे तो मार डाला जाए।”
    [ निर्गमन ३५ | २ ]

    ६. “जाओ और दाख की बोरियों में घात में रहो और हर पुरुष सेना की बेटियों में से अपनी पत्नि चुन लो और बिन यमीन के देश को जाओ।”
    [ न्यायियों २१ |२१ ]

    ७. “परस्त्रियाँ, बाल बच्चे और पशु आदि जितनी लूट उस नगर में से हो उसे अपने लिए रख लेना और तेरे शत्रुओं की जो लूट जो तेरा परमेश्वर यहोवा तेरेे लिए दे उसे काम में लाना।”
    [ व्यवस्था विवरण २० |१४ ]

    कभी ये सब भी सुनाया करो।

  20. 21 मुझ पौलुस का अपने हाथ का लिखा हुआ नमस्कार: यदि कोई प्रभु से प्रेम न रखे तो वह स्त्रापित हो।
    22 हमारा प्रभु आनेवाला है।
    23 प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम पर होता रहे।
    24 मेरा प्रेम मसीह यीशु में तुम सब से रहे। आमीन 1कुिरूिन्थीयों 16 : 21, 22, 23, 24 लो पढ भाई

    1. आपका प्रभु बाइबिल के आधार पर यहोवा या येशु मशीह | थोडा जानकारी देना जी ?

  21. नमस्ते महोदय जी , मै आपको बता दु की मैं आज से अठारह महीने पहले यीशु को नही जानता था, मै भी काफी पूजा-पाठ करता था, परंतु जीवन बर्बाद सा था, शराब पीना, जुआ खेलना, लड़की बाजी करना आदि नाना प्रकार की बुराईया थी, परंतु जब से मैंने यीशु को जाना है, जीवन पुरी तरह से बदल गया है, और ये कोई मानवीय प्रयासो से नही हुआ, परंतु प्रभु यीशु मसीह के असीम अनुग्रह से हुआ है, और यही सत्य है, मै विश्वास करता हुं, God bless you

    1. लगे रहो जी अंधविश्वास में | और झूठ बोलते रहो जिससे लोगो को मुर्ख बनाते रहे

    2. pavan ap 18 mahine pahle yeshu ko nahi jante the wo hi achha tha ap puja path karte the lekin ap ka jivan barbad tha kyon ki ap ki burayi yon ka sambandh ap ke bure karmo se tha tumhara yeshu astitva me nahi hain ye satya ap pahle jan lo to ap ne kalpanik yeshu ko kaise jan liya ??? kalpanik yeshu ap ke jivan ko nahi badal sakta to uska anugraha kaise hua ?? ap jo mante ho wo satya nahi hain ap ka vishvwas ek andhavishwas hain ap turant yeshu ko chod ke Arya Samaj ke Satya Sanatan Vedic Dharma ki aur loto aur apne jivan ko bachao

  22. Aisa nai hai ki ..sambandh bnana Unhone Bible se sikha hai..
    Bible me saaf saaf likha hai ki..
    तू व्यभिचार न करना॥ निर्गमन 20:14
    ..
    तू किसी के घर का लालच न करना; न तो किसी की स्त्री का लालच करना, और न किसी के दास-दासी, वा बैल गदहे का, न किसी की किसी वस्तु का लालच करना॥
    निर्गमन 20:17

    अपनी सौतेली माता का भी तन न उघाड़ना; वह तो तुम्हारे पिता ही का तन है। फिर अपने भाई बन्धु की स्त्री से कुकर्म करके अशुद्ध न हो जाना। लैव्यवस्था 18:8, 20

    फिर यदि कोई पराई स्त्री के साथ व्यभिचार करे, तो जिसने किसी दूसरे की स्त्री के साथ व्यभिचार किया हो तो वह व्यभिचारी और वह व्यभिचारिणी दोनों निश्चय मार डाले जाएं। और यदि कोई जिस रीति स्त्री से उसी रीति पुरूष से प्रसंग करे, तो वे दोनों घिनौना काम करने वाले ठहरेंगे; इस कारण वे निश्चय मार डाले जाएं, उनका खून उन्हीं के सिर पर पड़ेगा।
    लैव्यवस्था 20:10, 13

    वे वेश्या वा भ्रष्टा को ब्याह न लें; और न त्यागी हुई को ब्याह लें; क्योंकि याजक अपने परमेश्वर के लिये पवित्र होता है। लैव्यवस्था 21:7
    और वह कुंवारी ही स्त्री को ब्याहे। जो विधवा, वा त्यागी हुई, वा भ्रष्ट, वा वेश्या हो, ऐसी किसी को वह न ब्याहे, वह अपने ही लोगों के बीच में की किसी कुंवारी कन्या को ब्याहे;
    लैव्यवस्था 21:13-14
    Pta nai kon se dharm me likha hua hai ki 10-15 logo se Sambandh bnaya ja skta hai…

    1. क्या बात है जनाब अच्छी बात बाइबिल से और बुरी बात कहीं और से | ऐसा दोहरा पंथी क्यों जी ? यह भी उन्होंने बाइबिल से सिखा होगा जैसे अपने बहन से सम्बन्ध बनाओ अपनी बहु से सम्बन्ध बनाओ अपनी बेटी से सम्बन्ध बनाओ | जब यह सब बाइबिल में है तो उससे सिख क्यों नही ली होगी ? आँखे क्यों बंद कर लेते हो इन बातो से ? बाइबिल में परस्पर विरोधी बाते क्यों ? इश्वर का दिया गया बात परस्पर विरोधी कैसे हो सकता है मगर बाइबिल में ऐसा है जिससे यह मालुम होता है की यह ईश्वरीय ग्रन्थ नहीं है | आओ सत्य सनातन वैदिक धरम की ओर |

      1. ek baat puche ??
        jaise hum sb Jaante hai..ki Jitna v dharm hai… *usme se koi ek hi Sachha dharm hoga* …Aap kon se Dharm ko maante ho …Or.. apke hisab se… kon sb dharm Sachha or Pavitra hai.. or kyu ??

        1. मेरे भाई पहले यह बताये धर्म किसे बोलते हैं कितने लक्षण होते हैं ? पहले इसे बताये | फिर आगे चर्चा की जायेगी

  23. Are Bhai log Jitne v tmlog christans nhi ho —- tmlog ko Kuch Jada hi bhudhi de diya gya haiii…. Tmlog sb Bible ka burai kr rhe ho god ka burai kr rhe ho…or trh trh k questions kr rhe ho Bible k baare …. Or bolte ho can u explain it …………….—∆ toh suno vosdk agr Bible k baaton ko smjhna or Jesus ki baaton ko smjhna agr itna hi easy hota toh. … Or isse explain hi Krna itna hi easy hota toh ….. Toh bciyo….. Inssaan or god m fark hi Kya rhe jata…. Hmara Bible kvi kisi ka burai krne ko nhii kehta… Or na hi hm kisi ko burai krte haii…..ek baat khopdi m ghussa lo Puri duniya m ek hi god hai ….usss god ko mannne k liye bohot shaare tarike haii…. Jaese Hindu/Muslim/Christian/shikh/etc…..ab aap kon se religion m paida huwe ho hm nhi keh skte bt itna keh skte haii apne apne dharm…k ache se Mano and respect it. . . Or koi v god ho chahe wo Hindu/Muslim/Christian etc… Ye nhi kehta ki main hi real god hun mujhe Mano … agle dharm k bhagwaan jhutho haii…..so …. Kisi dusre dhrm k baare bolne se pahle ye soch lo ki tmahre god ne tmshe Kya shikhaya haiii……

    1. इश्वर अल्लाह यहोवा ईसा इत्यादि सभी एक नहीं है | इश्वर कभी अन्याय नहीं करता जबकि अल्लाह यहोवा अन्याय करता है | थोडा बाइबिल कुरान अच्छा से पढ़े भाई जान | पूर्वाग्रह और अन्धविश्वास छोड़कर आप वेद कुरान बाइबिल पढ़े सत्य मालुम हो जाएगा कौन पक्षपाती है कौन नहीं है | कृपया अंधविश्वास और पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर ना पढ़े सत्य सनातन वैदिक धरम को अपना लोगे तब आप भाई जान | धन्यवाद

  24. Mr.roy

    हम और आप हिंदुस्तानी है और हिंदुस्तान एक ऐसा देश है जहा अनेक धर्मो को मैंने वाले है | आप और हम दोनों अपने धर्मक का पालन करने वाले है उनकी इज़्ज़त करते है | और भारत के नागरिको को बचपन से हे एक दुशरे के धर्मो के इज़्ज़ाद करना भी सिखाया जाता है ( and you don’t seems to be illiterate ) तो कृप्या अपनी सीमाओ को ना लांघे “इज़्ज़त दोगे तो बदले में इज़्ज़त मिलेगा भी”
    एसे लोगो को भड़क कर आपको कुछ नही मिलने वाला |

    और जहा तक बाइबिल की बात की जाये तो बाइबिल कुछ गलत नही केहता वो हमें येशु मशी के जिविनि के बारे बताता है और उनसे सिखने को केहता है की :-
    पापो से दुर रहना |
    एकदूसरे से प्यार करना |

    ये जो 2 “basic knowledge” जो हमें बाइबिल से मिलती है हमें कटटर पंथी या शैतान नहीं बना देता ये हमे सही रास्ता दिखता है जो गलत नहीं है |

    and further i think u got that basic knowledge or slight idea that what bible says. If not please read the whole bible .
    Using incomplete verses and misslead people doesn’t suits your literacy.
    ( if you’r not willing to give respect to our relegion it’s ok please dont spread rumors about it )
    “Although i know you’ll have answers to my words”

    No offence ! Peace _/\_

    1. जनाब उत्पत्ति से गिनती तक देखो कितनी अश्लिस्लता मिल जाएगा | यहोवा (परमेश्वर ) भी लोगो को बहुत तंग किया है कई जगह पर | आप देखो भाई जान फिर बात करना आगे | हमें शिक्षा देने की जरूरत नहीं भाई जान आप अपने पूर्वाग्रह और अन्धविश्वास से ऊपर उठे जिससे आपको सत्य की मार्ग मिले |

  25. मोक्षद्वार

    कहते हैं कि महाभारत धर्म युद्ध के बाद राजसूर्य यज्ञ सम्पन्न करके पांचों पांडव भाई महानिर्वाण प्राप्त करने को अपनी जीवन यात्रा पूरी करते हुए मोक्ष के लिये हरिद्वार तीर्थ आये। गंगा जी के तट पर ‘हर की पैड़ी‘ के ब्रह्राकुण्ड मे स्नान के पश्चात् वे पर्वतराज हिमालय की सुरम्य कन्दराओं में चढ़ गये ताकि मानव जीवन की एकमात्र चिरप्रतीक्षित अभिलाषा पूरी हो और उन्हे किसी प्रकार मोक्ष मिल जाये।

    हरिद्वार तीर्थ के ब्रह्राकुण्ड पर मोक्ष-प्राप्ती का स्नान वीर पांडवों का अनन्त जीवन के कैवल्य मार्ग तक पहुंचा पाया अथवा नहीं इसके भेद तो मुक्तीदाता परमेश्वर ही जानता है-तो भी श्रीमद् भागवत का यह कथन चेतावनी सहित कितना सत्य कहता है; ‘‘मानुषं लोकं मुक्तीद्वारम्‘‘ अर्थात यही मनुष्य योनी हमारे मोक्ष का द्वार है।

    मोक्षः कितना आवष्यक, कैसा दुर्लभ !

    मोक्ष की वास्तविक प्राप्ती, मानव जीवन की सबसे बड़ी समस्या तथा एकमात्र आवश्यकता है। विवके चूड़ामणि में इस विषय पर प्रकाष डालते हुए कहा गया है कि,‘‘सर्वजीवों में मानव जन्म दुर्लभ है, उस पर भी पुरुष का जन्म। ब्राम्हाण योनी का जन्म तो दुश्प्राय है तथा इसमें दुर्लभ उसका जो वैदिक धर्म में संलग्न हो। इन सबसे भी दुर्लभ वह जन्म है जिसको ब्रम्हा परमंेश्वर तथा पाप तथा तमोगुण के भेद पहिचान कर मोक्ष-प्राप्ती का मार्ग मिल गया हो।’’ मोक्ष-प्राप्ती की दुर्लभता के विषय मे एक बड़ी रोचक कथा है। कोई एक जन मुक्ती का सहज मार्ग खोजते हुए आदि शंकराचार्य के पास गया। गुरु ने कहा ‘‘जिसे मोक्ष के लिये परमेश्वर मे एकत्व प्राप्त करना है; वह निश्चय ही एक ऐसे मनुष्य के समान धीरजवन्त हो जो महासमुद्र तट पर बैठकर भूमी में एक गड्ढ़ा खोदे। फिर कुशा के एक तिनके द्वारा समुद्र के जल की बंूदों को उठा कर अपने खोदे हुए गड्ढे मे टपकाता रहे। शनैः शनैः जब वह मनुष्य सागर की सम्पूर्ण जलराषी इस भांति उस गड्ढे में भर लेगा, तभी उसे मोक्ष मिल जायेगा।’’

    मोक्ष की खोज यात्रा और प्राप्ती

    आर्य ऋषियों-सन्तों-तपस्वियों की सारी पीढ़ियां मोक्ष की खोजी बनी रहीं। वेदों से आरम्भ करके वे उपनिषदों तथा अरण्यकों से होते हुऐ पुराणों और सगुण-निर्गुण भक्ती-मार्ग तक मोक्ष-प्राप्ती की निश्चल और सच्ची आत्मिक प्यास को लिये बढ़ते रहे। क्या कहीं वास्तविक मोक्ष की सुलभता दृष्टिगोचर होती है ? पाप-बन्ध मे जकड़ी मानवता से सनातन परमेश्वर का साक्षात्कार जैसे आंख-मिचौली कर रहा है;

    खोजयात्रा निरन्तर चल रही। लेकिन कब तक ? कब तक ?……… ?

    ऐसी तिमिरग्रस्त स्थिति में भी युगान्तर पूर्व विस्तीर्ण आकाष के पूर्वीय क्षितिज पर एक रजत रेखा का दर्शन होता है। विष्व इतिहास साक्षी देता है कि लगभग दो हजार वर्ष पूर्व, ऐसे समय जब कि सभी प्रमुख धार्मिक दर्षन अपने षिखर पर पहंुच चुके थे, यूनानी, सांख्य वेदान्त योग, यहूदी, जैन, बौद्ध, फारसी तथा अन्य सभी दर्शन और उनका सूर्य ढलने भी लगा था, मानवता आत्मिक क्षितिज पर बुझी जा रही थी, तब परमेश्वर पिता ने स्वंय को प्रभु यीशू ख्रीष्ट में देहधारी करके ‘पूर्णावतार’ लिया। वह इस लिये प्रकट हुआ ताकि मानव जाति के कर्मदण्ड तथा मृत्युबन्ध को उठा कर क्रूस की यज्ञस्थली पर अपने बलिदान के द्वारा स्वंय भोग ले। उसने ऋग्वेद के ‘त्राता’ तथा ‘पितृतमः पितृगा’-सारे पिताओं से भी श्रेष्ठ त्राणदाता परमपिता के सम्बोधन को स्वंयं मानव देह मे अवतरण लेकर हमारे लिये नियुक्त पापजन्य मृत्यू को सहते हुए पूरा किया।

    मोक्षदाता प्रभु यीशू ख््राीष्टः निष्कलंक पूर्णावतार:-

    हमारे भारत देष आर्यावृत का जन-जन और कण-कण अपने सृजनहार जीवित परमेश्वर का भूखा -प्यासा है। वैदिक प्रार्थनायें तथा उपनिषदों की ऋचाएं उसी पुरषोत्तम पतित-पावन को पुकारती रही है। पृथ्वी पर छाये संकटो को मिटाने हेतु बहुतेरे महापुरुष, भविष्यद्वक्ता, सन्त-महन्त या राजा-महाराजा जन्मे लेकिन पाप के अमिट मृत्यूदंश से छुटकारा दिलाकर पूरा पूरा उद्धार देने वाले निष्कलंक पूर्णावतार प्रेमी परमेश्वर की इस धरती के हर कोने में प्रतीक्षा थी।

    तब अन्धकार मे डूबी एक रात के आंचल से भोर का सितारा उदय हुआ। स्वयं अनादि और अनन्त परमेश्वर ने प्रथम और अन्तिम बार पाप मे जकड़ी असहाय मानवता के प्रति प्रेम में विवश होकर पूर्णावतार लिया, जिसकी प्रतीक्षा प्रकृति एंव प्राणीमात्र को थी। वैदिक ग्रन्थों का उपास्य ‘वाग् वै ब्रम्हा’ अर्थात् वचन ही परमेश्वर है (बृहदोरण्यक उपनिषद् 1:3,29, 4:1,2 ), ‘शब्दाक्षरं परमब्रम्हा’ अर्थात् शब्द ही अविनाशी परमब्रम्हा है (ब्रम्हाबिन्दु उपनिषद 16), समस्त ब्रम्हांड की रचना करने तथा संचालित करने वाला परमप्रधान नायक (ऋगवेद 10:125)पापग्रस्त मानव मात्र को त्राण देने निष्पाप देह मे धरा पर आ गया।

    ईशमूर्तिः ईश पुत्र यीशु ख्रीष्ट:-

    प्रमुख हिन्दू पुराणों में से एक संस्कृत-लिखित भविष्यपुराण (सम्भावित रचनाकाल 7वीं शाताब्दी ईस्वी)के प्रतिसर्ग पर्व, भरत खंड में इस निश्कलंक देहधारी का स्पष्ट दर्शन वर्णित है, जिसका संक्षिप्तिकरण इस प्रकार है:-

    ईशमूर्तिह्न ‘दि प्राप्ता नित्यषुद्धा शिवकारी।
    ईशा मसीह इतिच मम नाम प्रतिष्ठतम्।। 31 पद

    अर्थात ‘जिस परमेश्वर का दर्शन सनातन,पवित्र, कल्याणकारी एवं मोक्षदायी है, जो ह्रदय मे निवास करता है, उसी का नाम ईसामसीह अर्थात् अभिषिक्त मुक्तीदाता प्रतिष्ठित किया गया।’

    पुराण ने इस उद्धारकर्ता पूर्णावतार का वर्णन करते हुए उसे ‘पुरुश शुभम्’ (निश्पाप एवं परम पवित्र पुरुष )बलवान राजा गौरांग श्वेतवस्त्रम’(प्रभुता से युक्त राजा, निर्मल देहवाला, श्वेत परिधान धारण किये हुए )
    ईश पुत्र (परमेश्वर का पुत्र ), ‘कुमारी गर्भ सम्भवम्’ (कुमारी के गर्भ से जन्मा )और ‘सत्यव्रत परायणम्’ (सत्य-मार्ग का प्रतिपालक ) बताया है।

    मुक्तीदाता प्रभु यीशू खीष्ट के देहधारी परमेश्वरत्व की उद्घोषणा केवल भारत के आर्यग्रन्थ ही नही करते ! अतिप्राचीन यहूदी ग्रन्थ ‘पुराना नियम’ प्रभु खीष्ट के देहधारण से 700 वर्ष पूर्व साक्षी देता है-‘जिसमे कोई पाप नहीं था’ (यशायाह 53:9),‘जो कुमारी से जन्मेगा तथा उसका नाम इम्मानुएल अर्थात् ‘परमेश्वर हमारे साथ में रखा जायेगा (यशायाह 7:14)।

    इस्लाम भी अपने प्रमुख ग्रन्थ ‘कुरान शरीफ’ के सूरा-ए-मरियम खण्ड में प्रभू यीशू खीष्ट को ‘रुह अल्लाह‘ (आत्मरुप परमेश्वर का देहधारण)तथा उसकी कुमारी माता मरियम को मनुष्यों के बीच सब नारियों मे परम पवित्र घोषित करतें हैं।

    क्या शाश्वत और अद्वैत परमेश्वर देहधारी हुआ, उसके प्रकट प्रमाण और चिन्ह क्या होंगें, शास्त्र उसे पहिचान की कुछ विशेषतायें इस प्रकार बताते हैं:-

    स्नातन शब्द-ब्रम्हा तथा सृष्टीकर्ता, सर्वज्ञ, निष्पापदेही, सच्चिदानन्द त्रिएक पिता, महान कर्मयोगी, सिद्ध ब्रम्हचारी, अलौकिक सन्यासी, जगत का पाप वाही, यज्ञ पुरुष, अद्वैत तथा अनुपम प्रीति करने वाला। परमेश्वर के पवित्र वचन बाइबल के ‘नया नियम’ में देहधारी परमेश्वर की ये सभी तथा अन्य अनेक विशेषतायें प्रभू यीशू ख््राीष्ट के पतित-पावन व्यक्तित्व में सम्पूर्णता सहित उपस्थित तथा विस्तृत प्रमाणों द्वारा स्वयं सिद्ध है।

    मोक्षः केवल यीशू ख््राीष्ट में:-

    परमेश्वर का पवित्र वचन प्रभु खीष्ट द्वारा प्रदत्त मोक्ष के विषय में इस प्रकार कहता है, ‘‘पूर्वयुग में परमेश्वर ने बाप दादो से थोड़ा-थोड़ा करके और भांति-भांति से भविष्यद्वकताओं द्वारा बातें करके इन दिनों के अन्त में हमसे पुत्र (त्रिएक परमेश्वर का देहधारी स्वरुप प्रभु ख््राीष्ट)के द्वारा बातें कीं, जिसे उसने (परमेश्वर ) ने सारी वस्तुओं का वारिस ठहराया और उसी के द्वारा उसने सारी सृष्टि रची है। वह उसकी महिमा का प्रकाश और उसके तत्व की छाप है…‘‘मार्ग और सच्चाई और जीवन मै ही हूं बिना मेरे द्वारा कोई पिता (परमेश्वर )के पास अर्थात स्वर्ग में नही पहुंच सकता।’’….‘‘अब जो खीष्ट यीशु मे है, उन पर दण्ड की (पाप से उत्पन्न मृत्यू की ) आज्ञा नही है।’’…‘‘क्योंकि पाप की मजदूरी मृत्यू है परन्तू परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभू खीष्ट यीशु में अनन्त जीवन है।’’ इब्रानियो 1:1-3, यहुन्ना 14:6, रोमियो 8:1, 6:23 )।

    आपका निर्णय क्या है ?

    प्रिय मित्र! क्या आप मोक्ष मार्ग के राही हैं ? क्या आपका प्राण सदा से जीविते परमेश्वर का प्यासा रहा है ? केवल प्रभू खीष्ट में आपके पापों से मुक्ती तथा परम शांति है। देहधारी परमेश्वर आपको इसी क्षण बुला रहा है; ‘‘ हे पृथ्वी के दूर-दूर के देश के रहने वालो, तुम मेरी ओर फिरो और उद्धार मोक्ष पाओ! क्योंकि मै ही ईश्वर हंू और दूसरा कोई और नही है।…. जो कोई उस प्रभू यीषु खीष्ट पर विश्वास करे, वह नाश न होगा, परन्तु अनन्त जीवन पायेगा’’ यशायाह 45:22 तथा यहुन्ना 3:16।
    मुक्ती कहीं और नही -केवल प्रभू खीष्ट में है। मुक्ती पाने के लिये आप कमरे में जांयें घुटने टेक कर यीषु मसीह से प्रार्थना करें ह्रदय की गहराइयों से पुकार कर कहें कि यीशु मेरे पापों को क्षमा कर आज से मै तुझे अपना जीवन समर्पित करता हूं आप आज से मेरे प्रभू और उद्धारकर्ता हैं। आज से मै आपके बताये रास्ते पर चलूंगां आप मुझे अपना दर्शन दें मै आपको देखना चाहता हूं। यीशु मसीह को पाना बहुत सरल है यीशु आपके पास आयेंगें आपको गले से लगा लेंगें। तब आपको एक बिलकुल नया अनुभव होगा आपको एसी अलौकिक शांति मिलेगी जिसका अनुभव बता पाना कठिन है उसको वर्णन नही कर सकते हैं। और आपकी सारी बिमारियां भाग जायेंगीं। सारी शैतानी शक्ती आपसे दूर चली जायेंगी। आप नये जन्मे बच्चे सा अनुभव करेंगें। अभी तक आपने पढ़ा या सुना होगा या किसी ने अपने ढ़ग से बताया होगा जो कि मात्र कपोल कल्पना है । मगर यीशू मसीह को आप जानने के लिये ऊपर बताये गये नियम के द्वारा प्रेक्टिकल कर सकते है। और अनन्त जीवन जो कि इसी मनुष्य योनि मे है प्राप्त कर सकते है। ‘‘मानुशं लोकं मुक्तीद्वारम्‘‘ अर्थात यही मनुष्य योनी हमारे मोक्ष का द्वार है।
    हमारी प्रार्थना है कि परमेश्वर आपको इस विश्वास में स्थिर और सिद्ध करे।

    अश्रद्धा परम पापं श्रद्धा पापमोचिनी महाभारत शांतिपर्व 264:15-19 अर्थात ‘अविश्वासी होना महापाप है, लेकिन विश्वास पापों को मिटा देता है।’

    http://www.youtube.com/results?search_query=pandit+dharm+prakesh+sharma&aq=f

    1. “विश्वास पापों को मिटा देता है।’”

      ye bible men hota hoga
      vaidik dharm men nahene

  26. भारत दर्शन शास्त्र में मोक्ष असंम्भव

    अनिक जतन नहीं होत छुटकारा
    (पन्ना 178, आदि ग्रन्थ साहिब)

    अर्थात अनेक प्रकार के प्रयत्न करके भी
    मुक्ति पाना सम्भव नहीं है।

    यह जान लेने के बाद कि प्रत्येक मनुष्य में अपने अच्छे – अच्छे कार्यों के द्वारा उद्धार पाने के लिये स्वभाविक प्रवत्ति बनी रहती है; हमें हमारी मातृभूमि के प्राचीन ऋषि – महर्षियों की प्रषंसा करनी पड़ेगी जिन्होने स्पष्टता से घोषित किया कि किसी भी भाँति की कार्य योग्यता से मोक्ष की प्राप्ति सर्वथा असंम्भव है। यदि हम यहाँ थोड़े समय उन ऋषियों एवं व्याख्याकारों के निष्कर्षों पर ध्यान दें तो इससे हमारे विचार सुस्पष्ट होंगे;

    श्रवण तथा शिक्षण से मोक्ष नहीं मिल सकता,

    यथा नायमात्मा प्रवचनेन लभ्यो
    न मेधया न बहुना श्रुतेन।
    यमेवैष वृणुते तेन लभ्य
    स्तस्यैष आत्मा विवृणुते तनुं स्वाम्।।
    (मुण्डकोपनिषद् 3:2:3; कठोपनिषद् 1:2:23)

    यह परमात्मा न तो प्रवचन में, न बुद्धि से और न बहुत सुनने से ही प्राप्त हो सकता है। यह जिनको स्वीकार कर लेता है, उसके द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है, क्योंकि यह परमात्मा उसके लिये अपने यथार्थ स्वरुप को प्रकट कर देता है।

    और न ही दर्शन, वाणी, तप, या कर्म के द्वाराः

    न चक्षुषा गृहयते नापि वाचा
    नान्यैर्देवैस्तपसा कर्मणा वा।
    ज्ञानप्रसादेन विशुद्धसत्व
    स्ततस्तु तं पश्यते निष्कलं ध्यायमानः।
    (मुण्डकोपनिषद् 3:1:8)

    वह परमात्मा न तो नेत्रों से, न वाणी से और न दूसरी इन्द्रियों से ही ग्रहण करने में आता है। तप से वा कर्मों से भी वह ग्रहण नहीं किया जा सकता। उस (परमात्मा) को श्रेष्ठ अन्तःकरण वाले ज्ञानी ही ज्ञान के प्रसाद से ध्यान के द्वारा देख सकते हैं।

    नास्त्रैर्न शस्त्रैरनिलेन वहिनना
    छेत्तुं न शक्यो न च कर्मकोटिभिः।
    विवेकविज्ञानमहासिना विना
    धातुः प्रसादेन शितेन मण्जुना।।
    (विवेक चूड़ामणी 147)

    यह कर्मबन्धन न तो किसी हथियार से, न वायु, न अग्नी, न सहस्त्रों कर्मो के द्वारा छेदा या तोड़ा जा सकता है। केवल विवके ज्ञान की तलवार से जो प्रभु के प्रसाद से तेज की गई हो, उसे काटा जा सकता है।

    मस्तिष्क की बौद्धिक शक्ति के द्वारा भी नहीं:

    न तत्र चक्षुर्गच्छति न वाग्गच्छति
    नो मनो न विद्मो न विजानीमो यथैतदनुषिष्या
    दन्यदेव तद्विदितादथो अविदितादधि
    इति शुश्रुम पूर्वेषां ये नस्तत् व्याचचक्षिरे।।
    (केन उपनिषद् 1:3)

    उस ब्रम्ह तक न तो आँख पहुँच सकती है, न वाणी और न मन ही। जिस प्रकार भी उसके रुप को बतलाया जाय, उसे न तो हम स्वयं जानते हैं, न दूसरों से सुन कर ही जान सकते हैं, क्योंकि वह विदित पदार्थों से भिन्न है और न जाने हुए पदार्थों से भी परे है। ये बातें, हम अपने पूर्वजों से सुनते आये हैं, जिन्होने यह तत्व हमें भली प्रकार समझाया था।(मैत्रेयी उपनिषद् 1:13 भी देखें)।

    और न ही धर्म शास्त्रों से ज्ञान प्राप्ति के द्वाराः

    पिंगल उपनिषद् 4:22:25 का सुझाव है कि यदि कोई एक हजार वर्षों तक भी धर्म पुस्तकों का अध्ययन करे तौभी उनका अन्त नही। इसलिये उसे शास्त्रजालानि अर्थात शास्त्र मनन के जाल से छूट कर सत्य एवं ब्रम्ह प्राप्ति में जुट जाना चाहिये।

    वदन्तु शास्त्राणि यजन्तु देवान्
    कुर्वन्तु कर्माणि भजन्तु देवताः।
    आत्मैक्यबोधेन विनापि भक्ति
    र्न सिध्यति ब्रम्हषतान्तरेऽपि।।
    (विवेक चूड़ामणी 6)

    लोग शास्त्र बाचें, देवों को यज्ञ अर्पित करें, कर्म इत्यादि करते रहें और देवताओं का भजन भी करें, परन्तु ब्रम्हाजी के शतान्तर दिनों तक भी मुक्ति प्राप्त नहीं होगी जब तक कि परमात्मा के साथ एकत्व का ज्ञान न हो जाये।
    कर्मबद्ध मनुष्य परमेश्वर को जानने के लिये चाहे अपने ज्ञान से अभ्यास और प्रयास करे, लेकिन वह कितनी दूरी पार कर सकेगा ? भगवद्गीता 5:15 कहती है, अज्ञानेन आवृतम् ज्ञानं अर्थात ज्ञान तो अज्ञान से ढका हुआ है (इसी को माया कहा जाता है)।

    मोक्ष – स्नान, या दान से भी सम्भवत नहीं:

    अर्थस्य निश्चयो दृष्टो विचारेण हितोक्तितः।
    न स्नानेन न दानेन प्रणायाम शतेन वा।।
    (विवके चूड़ामणी 13)
    सत्य की दृढ़ धारणा, न तो स्नान वा दान वा सैंकड़ों प्रणायाम से, परन्तु विद्वानों के हितकर परामर्श पर विचार करने से प्राप्त होती है।
    और इसकी तुलना भी करें किः

    न शरीर मल त्यागात् नरो भवति निर्मलः।
    मानसु तु मले त्यक्ते भवत्यन्तः सुनिर्मलः।।
    (स्कन्ध पुराण, काशी खंड 6)

    शरीर के मल को त्यागने से मनुष्य निर्मल नहीं बन जाता। परन्तु जब मन का मल दूर हो जाये तब उसका अन्तःकरण शुद्ध ठहरता है।

    बलिदान, होम आदि की रीतियों से भी नहीं:

    निश्चय ही ये यज्ञरुपी अठारह नौकाएं ( जिनमें उपासना रहित सकाम कर्म पाये जाते हैं) मोक्ष के हेतु अदृढ़ या अस्थिर हैं। मूर्खजन इनको ही कल्याण मार्ग मानकर इनकी प्रषंसा करते हैं, परन्तु निःसन्देह वे बुढ़ापे और मृत्यु को प्राप्त होते रहते हैं।
    (मुण्डकोपनिषद् 1:2:7)

    तन्त्र और तीर्थलाभ से भी नहीं:

    उत्तमा तत्वचिन्तैव मध्यर्म शास्त्रचिन्तनम्।
    अधमा तन्त्रचिन्ता त तीर्थ भ्रान्त्यधमाधमा।।
    (मैत्रायणी उपनिषद 2:21)

    तत्व चिन्तन सर्वोत्तम है, शास्त्रचिन्तन मघ्यम, तन्त्र चिन्ता अधर्म अर्थात निकृष्ट और तीर्थों में भ्रमण करना अधमाधम अर्थात निकृष्ट है।

    न ही ध्यान साधना के द्वाराः

    दुःसार्ध्य च दुराध्यं दुष्प्रक्ष्यं च दुराश्रयम्।
    दुर्लक्षं दुस्तरं ध्यानं मुनियां च मनीषिणाम्।।
    (तेज बिन्दु उपनिषद् 2)

    मुनियों और मनीषियों का ध्यान ऐसा होता है जो साधने में कठिन, प्राप्त करने में दुर्लभ, देखने में दुर्दश, आश्रयता में दुर्गम, लक्ष्य में दुर्बोध तथा पार करने में विघट है। (इस कथन मिलान अवधूत गीता 21 से करें।)

    योग तथा साँख्य (तत्चज्ञान) से भी सुलभ नहीं:

    न योगेन न साँख्येन कर्मणा नो न विधया।
    ब्रह्मात्मैकत्व बोधेन मोक्षः सिध्यते नान्यथा।।
    (विवेक चूड़ामणी 56)

    मोक्ष न तो योग से या साँख्य अर्थात ब्रह्म के तत्व चिन्तन और न ही कर्म तथा विद्यया लाभ से, परन्तु केवल परमात्मा और जीवात्मा के एकत्व-बोध से सिद्ध होता है किसी भी अन्य प्रकार से नहीं।

    और यह वेदाध्ययन, तप दान एवं यज्ञों से भी नही मिलताः

    नाहं वेदैर्न तपसा दादेन न चेज्यया।
    शक्यं एवंविधो द्रष्टुं दुष्टवानसि मां यथा।।
    (गीता 11:53)

    जैसा तूने मुझे देखा है, वैसा मुझे वेदों से, तप से, दान से अथवा यज्ञ से भी कोई देख नहीं सकता।

    साधना से भी नहीं प्राप्त होताः

    उपाय जालं न शिवं प्रकाशवेद
    (अभिनवगुप्त तंत्रसार)

    न ही नक्षत्र ज्ञान इसे पाने में सहायक होता हैः
    नक्षत्रं इति पृच्छन्तं बालमर्थोऽतिवर्तते।
    अर्थो हि अर्थस्य नक्षत्रं कि करिष्यति तारकाः।।
    (कौटिल्य अर्थषास्त्रम्)

    नक्षत्र ज्ञान पर भरोसा रखने वाले, बाल – स्वरुप मूर्ख जनों के लिये लक्ष्य प्राप्ति दुर्लभ होती है। अपेक्षित वस्तु ही उस अपेक्षा का नक्षत्र है, इसमें तारे सितारे क्या करेंगें ?

  27. PART 2

    भारत दर्शन शास्त्र में मोक्ष असंम्भव

    अनिक जतन नहीं होत छुटकारा
    (पन्ना 178, आदि ग्रन्थ साहिब)

    अर्थात अनेक प्रकार के प्रयत्न करके भी
    मुक्ति पाना सम्भव नहीं है।

    धर्म पालन के द्वारा भी सम्भव नहीं:

    धार्मिक क्रिया – कलापों को पूरा करते रहने के तदन्तर भी धर्म के द्वारा मोक्ष को प्राप्त कर लेना संम्भव नहीं।
    हिन्दुओं के अपने प्रमुख धर्म शास्त्रों ने प्रतिमाओं एवं देवों के अर्चन – पूजन के प्रति अपनी अप्रसन्नता प्रकट की है। श्रुति के नाम से विख्यात हिन्दू – मत के प्रमुख प्रमाणिक धर्मशास्त्र ने दृढ़ता सहित निम्न उद्बोधन किया है। यजुर्वेद 40:9 तथा ईषोपनिषद् 12, दोनो ने कहा है किः

    अन्धन्तमः प्रविशन्ति येऽसम्भूतिमुपासते।

    जो मनुष्य नाशमान देव – पितर – मनुष्य आदि की उपासना करते हैं, वे अज्ञानयुक्त घोर अन्धकार में प्रवेश करते हैं।

    गीता प्रेस, गोरखपुर ने अपने ‘ईशादि नौ उपनिषद्’ नामक प्रकाशन में असम्भूति शब्द का अनुवाद ‘विनाशशील देव, पितर, मनुष्य आदि’ किया है।

    यजुर्वेद 32:3 (अ) ने घोषणा कीः

    न तस्य प्रतिमा अस्ति यस्य नाम महद्यश:।
    उस परमात्मा की (जिसका नाम महत् – यश है) कोई प्रतिमा नही।

    एक दूसरे प्रतिवेष में इसी मंन्त्र के शब्दों का उल्लेख करते हुए, श्वेताश्वतर उपनिषद् 4:20 निम्न मन्त्रांश जोड़ देता हैः

    न सदृशे तिष्ठति रुपमस्य
    न चक्षुषा पश्यति कश्चनैनम।
    हृदा हृदिस्थं मनसा य एन
    मेवं विदुरमृतास्ते भवन्ति।।

    इस परमात्मा का स्वरुप दृष्टि के सामने नहीं ठहरता और इस परमात्मा को कोई आँखों से नहीं देख सकता। जो लोग इस हृदय में स्थित अन्तर्यामी को हृदय और मन द्वारा जान लेते हैं, वे अमर हो जाते हैं।

    ‘‘काम – वासनाओं से पागल हुए लोग विभिन्न उपासनाओं को पाल कर दूसरे देवताओं को भेजते रहते हैं, (परमेश्वर को नहीं)। परन्तु ऐसे भक्त अल्पबुद्धि अल्पमेघसाम् हैं। (गीता 7:20, 23)

    ‘‘ऐसों का भक्ति पूजन अविधिंपूर्वकम् है, जो अज्ञानता है। वे तत्वत: मुझे (परमेश्वर को) नहीं जानते।’’ (गीता 9:23-25)।

    ‘‘उनकी भक्ति पूजा कर्माणांसिद्धिं कर्म बन्धन अर्थात् (मोक्ष हीनता) के नाश को नहीं, कर्मफल की इच्छा मोक्ष प्राप्ति को असाध्य बना देती है।’’ गीता 4:12।

    उपनिषदें् सन्यासियों को ‘देवताओं’ से ‘प्रसाद’ (उपासना का प्रतिफल) प्राप्त नहीं करने के सन्दर्भ में चेतावनियाँ देती है। देखिये, सन्यास उपनिषद् 59; नारद परिव्राजक उपनिषद् 7:1।

    बृहदारण्यक उपनिषद् 1:4:10 बहुत ही स्पष्ट करती है, कि देवतागण नहीं चाहते कि उनके भक्त (पाप, कर्म तथा पुनर्जन्म) बन्धनों से स्वतन्त्र हो जायें।

    1. “देवतागण नहीं चाहते कि उनके भक्त (पाप, कर्म तथा पुनर्जन्म) बन्धनों से स्वतन्त्र हो जायें।”

      dewata kise kahte hein ye pata hai ?

  28. PART 3

    भारत दर्शन शास्त्र में मोक्ष असंम्भव

    अनिक जतन नहीं होत छुटकारा
    (पन्ना 178, आदि ग्रन्थ साहिब)

    अर्थात अनेक प्रकार के प्रयत्न करके भी
    मुक्ति पाना सम्भव नहीं है।

    जन्मना जायते शूद्र संस्करात् द्विज उच्यते।

    जन्म – भाव से तो प्रत्येक जन शूद्र ही है; संस्कार के द्वारा ही वह ( द्वि + ज) दुबारा जन्म पाता है।

    परमेश्वर से होने वाला यह जन्म यूहन्ना रचित सुसमाचार 3:3,5 तथा 7 पदों में नया जन्म अथवा ऊपर से जन्मना उल्लेखित किया गया है। हिन्दु मत में इसे ब्रह्मजन्म अर्थात् परमात्मा से उत्पन्न होना कहा जाता है, क्योंकि

    अपस्तंव धर्मसूत्र 1:1:15:13 के तदनुरुप, यह गुरु ही होता है जो बालक को सर्वश्रेष्ठ जन्म देता है, माता पिता तो केवल दैहिक जन्म देने वाले हैं।

    गुरु भी दो प्रकार के हो सकते हैं: एक शिक्षागुरु जो केवल लौकिक सत्य अपराविद्या सिखाता है और दूसरा दीक्षा गुरु जो अलौकिक दर्शन अर्थात पराविद्या का द्वार खोल देता है।

    परमेश्वर ही एकमात्र सद्गुरु

    अद्वैतारक उपनिषद् मंत्र 16 में व्याख्या है कि गुरु शब्द की रचना दो व्युत्पत्तियों – गु अर्थात् अंधकार, और रु अर्थात् मिटा देने वाला से मिल कर हुई है। जीवात्मा को घेरे अपरिमित तिमिर को नाश कर देने वाला ही गुरु है।

    परन्तु, कौन दूसरा ऐसा है सिवाय परमात्मा के, जो इस गुरु पद के सार्थक हो ? यह बहुत स्पष्ट है कि मनुष्यों में से किसी की भी यह सामर्थ्य नहीं कि पापों के अन्धकार का नाश कर सकें। वेदान्तो ने इसे कितना सही स्वीकारा है, जब वह कहता है, जब वह कहता हैः

    गुरुदेव हरिः साक्षान्नान्य इत्यब्रवीच्छुतिः
    ( ब्रम्हविद्या उपनिषद् 31)

    ‘‘गुरु ही साक्षात् परमेश्वर है ( न कोई अन्य है वह )। वेद – श्रुति का ऐसा ही कथन है।’’

    अद्वैतारक उपनिषद् 17 घोषित करता है कि परमब्रम्ह अथवा सनातन परमेष्वर स्वयं ही गुरु है।

    वर्तमानकाल में श्रीरामकृष्ण परमहंस ने भी इस धारणा की पुष्टि की है, कि ‘‘सच्चिदानन्द’ के अतिरिक्त कोई और गुरु नहीं। स्वयं परमात्मा ही गुरु हैं।‘‘ (दॅस् स्पेक ( रामकृष्ण वचनामृत) उपदेशमाला)।

    (वेदान्तदर्शन का त्रिएक परमेश्वर (सत् + चित्त + आनन्द)ही वह ‘सच्चिदानन्द’ है।

    उपनिषदों एवं अन्य हिन्दुशास्त्रों ने निम्न प्रकार गुरु की योग्यताओं पर विस्तृत प्रकाश डाला है। गुरु वह है, जो किः

    ‘‘परमात्मा है; (और वह दासत्व में नही है) ब्रम्हविद्या उपनिषद् 31;

    ‘श्रोतियम्’ श्रुतिग्रन्थों का ज्ञाता है मुण्कोपनिषद् 1:2:12;
    ‘ब्रम्हनिष्ठम्’ परमेश्वर में एकाकार है अर्थवेद 11:15:17;
    ‘ब्रम्हचारी’ परमब्रम्ह का अनुगामी है अर्थवेद 11:15:17;
    ‘निष्पापदेही’ पावन प्रकृति का है पाणिनी 4:4:98
    ‘निर्मल, निर्द्वन्द, त्रिकालज्ञ और अनासक्त’ है कुलर्नवातन्त्र 13:38-50;
    और जो ‘उद्वारकर्ता’ एवं ‘शरणस्थल’ भी है विवेक चूड़ामणि 34 – 36

    हमारे अपने देश के सन्तो ने हमें बताया थाः

    शिष्य ऐसा चाहिये जो अपना सर्वस् दे।
    गुरु ऐसा चाहिये जो किसे से कुछ न ले।।

    आदर्श शिष्य अपना सर्वस्व अर्पण कर देता है, आदर्श गुरु किसी से कुछ नहीं लेता।

    पानी पीजै छान के।
    गुरु कीजे जान के।।

    अवष्य ही जैसे पीने से पहले जल को छानना चाहिये, वैसे ही ग्रहण करने से पहले गुरु को भी जाँच लेना चाहिये।
    लोभी गुरु लालची चेला।
    दोनों नरक में ठेलम ठेला।।

    यदि कोई गुरु स्वार्थी है तो उसका शिष्य भी लालची होगा। ये दोनों ही नरक – जीवन में धक्कम – धक्का के सिवाय क्या करेंगें ?

    गुरु तो ऐसा चाहिये जस सकलीगर होय।
    सकल दिनन का मोर्चा पल में डारे खोय।।

    जैसे चाकू पर धार लगाने वाला, गुरु वैसा ही होगा चाहिये। जीवन भर से लगी जंक की मैली परत को क्षण भर में वह हटा देता है।

    हमारे विद्वान वैदिक मित्रों का यह भी सविवेक निर्णय रहा है कि धर्म – शास्त्रों में उल्लेखित गुणों को धारण करने वाला सच्चा सद्गुरु प्राप्त करना इस जगत में दुर्लभ था (कुलर्नवा तन्त्र 13:99:131 इत्यादि; विवके चूड़ामणि 3)

    इन प्रत्यक्ष तथ्यों को दृष्टिगत रख कर, जब मैं प्रभु यीषु मसीह के ऐतिहासिक स्वरुप की ओर अपलक निहारता हूँ तो मेरा हृदय उसके व्यक्तित्व में सद्गुरु के चिन्हो का दर्शन पाकर गद्गद् हो उठता है।

    प्रभु यीशु ‘शुभ’ तथा ‘निर्मल’ स्वभाव और उत्तम चरित्र जिसमें पाप की कोई छुअन (दाग) तक नहीं; जो सर्वज्ञ त्रिकालदर्शी है; वह ऐसा कर्मयोगी है जिसने अपने हितार्थ कुछ नहीं किया; जो प्रेम और अहिंसा का उद्गम (निर्झर) है; सिद्ध ब्रम्हचारी एवं सच्चा बैरागी है; चंगा करने में सर्वसामर्थी है, जो क्रूस पर सम्पन्न क्रूस यज्ञ में अपने स्वयं बलिदान से पापी को क्षमा एवं उद्धार (मोक्ष) देता है; और एक ऐसा सिद्ध आदर्श है जिसके अनुगमी कभी ठोकर नहीं खाते।

  29. पाप मोचक जगदीश हरे

    भारत वर्ष में हजारों वर्षों से अद्वितीय परमधन्य निष्कलंक सृष्टीकर्ता परमात्मा की खोज में लाखों ऋषिमुनियों ने जप, तप, योग कर – करके अपने आप को मिट्टी के ढेर में तब्दील कर दिया।

    इसके बावजूद भी खोज चालू हैं। हम निरन्तर जिस परमात्मा का जप कर रहे हैं उसका नाम नही जानते हैं, उन मंत्रो च्चारण में ओम शब्द का उच्चारण मंत्र को सफल बनाने पहले कर रहे हैं।

    वेद की किसी भी ऋचाओं में ओम् शब्द पहले नही पाया जाता जैसे गायत्री मंत्र –

    ‘‘भूः भूर्वः स्वः तत्स् वितुर्वरेण्य भर्गो देवस्य धिमहि धियो योनः प्रचोदयात्।’’

    यह मंत्र हम किस परमे श्वर से कर रहे हैं? यह मंत्र सच्चे परमे श्वर के नाम लिये बगैर व्यर्थ है इसलिये ओम् शब्द को जोड़ कर अब हम इसे उच्चारित करते हैं।

    ऊँ भूः भूर्वः स्वः तत्स् वितुर्वरेण्य।
    भर्गो देवस्य धिमहि धियो योनः प्रचोदयात्।

    गायत्री मंत्र – यथार्थ में यह मंत्र नही परंतु स्वयंभू, अगम्य ज्योति में रहने वाले, एक मात्र पाप नाशक मोक्षदाता से प्रार्थना है। वेदों के मूल प्रति में ओम् शब्द वर्णित नहीं है। कालांतर एवं पाठांतर में ओम् अर्थात् स्वयंभू परमईश्वर के वचन/वाक/ अक्षरम्/शब्द को जोड़ दिया गया है। यह प्रार्थना याह या याहवेह / या यहोवा (धियो यो (यः = याह ) नः प्रचोदयात् ) जो नाम बाईबल धर्मशास्त्र में 6823 बार वर्णित है। याह या याहवेह कोई नाम नही है। परतुं इसका अर्थ स्वयंभू या स्वयंभव होता है जिसे किसी चीज की आवश्यकता नहीं है। गायत्री मंत्र मंय सारे वर्णित गुण जैसे अनंत जीवन प्रदान करने वाला, दुख नाशक, सुख समृद्धि देने वाला, तेजस्वी, सर्वश्रेष्ठ, पाप नाशक, प्रेरणा का स्रोत, अगम्य प्रकाश से प्रकाशित इत्यादि केवल ‘‘याह’’ में तथा उनके एक मात्र निष्कलंक, निष्पाप, ब्रम्हचारी, मृत्युंजय अवतार यीशू जिनका मूल नाम यःशुआ अर्थात याह का उद्धार या मोक्ष है, में सारे गुण पाये जाते हैं। इस कारण से गायत्री मंत्र यर्थाथ में याह की तथा उसके पुत्र रुपी अवतार यःशुआ की स्तुति एंव प्रार्थना है। जैसे पहिले कहा जा चुका है गायत्री मंत्र यथार्थ में स्वयंभव/स्वयंभू ; (Self Exitent) परमेश्वर की स्तुति एवं प्रार्थना इस निवेदन को सही अधिकारी को संबोधित करने से ही सही उत्तर की अपेक्षा की जा सकती है।

    वे देवी देवता जो स्वयं भू नहीं है और स्वयं जिन्होने काम, कोध, हत्या, व्यभिचार, ब्रम्हचर्य का उल्लधंन किया एवं मृत्यू पर मृत्यूंजय नही हैं उनके नाम से मंत्रोच्चारण व्यर्थ होगा। यह तो प्रायः सभी का अनुभव है कि इतने श्रद्धा तथा निष्ठा से पुजापाठ, संस्कारों तथा दान दक्षिणा से भक्ति के बाद भी हमारी प्रार्थनाएं अनसुन रह जाती हैं। यह इस लिये हो रहा है क्योंकि हम उनसे प्रार्थना निवेदन कर रहे हैं जो हमारे प्रार्थनाओं का उत्तर देने में असमर्थ हैं।

    आप सृष्टीकर्ता स्वयंभू याह के हाथ से बनाये गये संतान हैं परंतु आप उसकी प्रतिमा का निर्माण नही कर सकते हैं क्योंकि किसी ने उसे देखा नहीं। यथार्थ में आपका ह्रदय परमेश्वर का निवास स्थान या मंदिर हैं और उसकी भक्ति करने के लिये किसी पंडित, पुरोहित या धर्म के ठेकेदार की आवश्यकता नही है।

    आइये हम ओम शब्द को समझें कि यह क्या है ?

    स्वामी दयानंद सरस्वती की सत्यार्थ प्रकाश के अनुसार ( ओऽम् ) जो ओंकार शब्द है वह परमें श्वर का सर्वोत्तम नाम है, क्योंकि इसमें जो अ, उ और म् तीन अक्षर हैं वे मिलकर ओऽम समुदाय हुआ है। और इस नाम से परमेश्वर के बहुत नाम आते है, जैसे ओंकार से विराट् अग्नि और विश्वादि। उकार से हिरण्यगर्भ, वायू और तैजस आदि। मकार से ईश्वर आदित्य और प्रज्ञादि नामों का वाचक और ग्राहक है। उसका ऐसा ही वेदादि सत्यशास्त्रों में स्पष्ट व्याख्यान किया है कि प्रकरणनुकूल ये सब नाम परमेश्वर ही के हैं। इस तथ्य से पता चलता है कि आ का मतलब विष्व/पिता उ का मतलब तेज/पुत्रम का मतलब प्रज्ञम्/पवित्रआत्मा है।

    ऊँ वास्तव में शब्द है जो परमेश्वर की ओर इशारा करता है जिसे कुरान मे कलाम, (ईसा को रुहअल्लाह, कलीमतुल्लाह कहा जाता है ); गुरुग्रंथ साहब में शबद् और वेदों में वाक्, अक्षरम् कहा जाता है। और इसे बाईबल में वचन कहा जाता है। इस का और अधिक स्पष्टीकरण संत योहन ने इस प्रकार किया। आदि में वचन था ( आदि =सृष्टी के बनने से पहले ); वचन परम ईश्वर के साथ था और वचन ही परम् ईश्वर था, वचन देह धारी हुआ जो शब्द देहधारी हुआ यीशू मसीह है जो परम् ईश्वर का अवतार है और, सारी सृष्टी वचन के द्वारा उत्पन्न हुई। (युहन्ना 1:13,14) परमेश्वर ने कहा (वचन) उजियाला हो और उजियाला हो गया (उत्पत्ती13)परमेश्वर के वचन से ही सृष्टी समस्त देखी अनदेखी वस्तुएं बनी और शब्द ही विश्वकर्मा और शब्द ही मनुष्य को बनाने वाला प्रजापति है और शब्द ही जिसके द्वारा जगत बना शब्द ही जगदीश तथा जगन्नाथ है।

  30. (1) दोहा – शब्द कहां से आया कहो शब्द को विचार।
    नही तो तिलक माला धरो उतार।
    ( गुरु गोरखनाथ )

    अर्थ – नाथपंथ के स्वामी गुरु गोरखनाथ महाराज जी कहते हैं, कि शब्द (वाग्वै बम्ह )कहां से आया इस वाग्वै बम्ह को जानिये नही तो तिलक माला जो दिखावटी आडम्बर है उसे उतारिये।

    (2) दोहा –शब्दै धरती भाब्दै आकाश शब्दै पांच तत्व के बाश।
    कहे कबीर हम शब्दै सनेही, शब्द न बीनसै देही।।
    (संत कबीर दास )

    अर्थ – संत कबीर दास जी कहते हैं कि शब्द (वाग्वै ब्रम्ह )के द्वारा आकाश और धरती बनी है और पांच तत्व (मिट्टी, पानी, अग्नि, वायू और आकाश )में शब्द का वास है। संत कबीर कहते हैं हम शब्द के आश्रय में हैं शब्द के बिना हम निष्प्राण हैं।

    (3) दोहा – शब्द बराबर धन नही, जो जाने सो बोल।
    हीरा तो दामों मिले, शब्द का मोल न तोल।।

    अर्थ – कबीर दास जी कहते है, शब्द बराबर कोई धन नही है। जो जानता है वही बोल देता है। सबसे बहुमूल्य हीरा भी दामों में से मिल जाता है परंतु शब्द का कोई कीमत लगा नही सकता।

    (4) दोहा – ‘‘शब्द् धरती शबद् आकाश शबद् से भई परकाष’’ गुरुनानक

    अर्थ – शब्द के द्वारा आकाश और पृथ्वी का निर्माण हुआ और शब्द के द्वारा प्रकाश हुआ।

    (5) दोहा – पंज तत्वां तो मै बना, ….. नानक मेरा नाम……..
    मै उस शब्द दा चेला …..जेड़ा जिन्दा गया आसमान। (गुरुनानक)

    अर्थ – पांच तत्वों से मिलकर मैं बना … नानक मेरा नाम ….
    मै उस शब्द का चेला… जो जिन्दा गया आसमान।

    वो शब्द यीशु मसीह ही है … यीशु मसीह ही जिन्दा आसमान गया और आज भी जीवित है।

    अब देखिये (वाग्वै ब्रम्ह )या ’’शब्द’’ या वचन के विषय में बाइबल में :-

    ‘‘आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।’’

    ‘‘यही आदि में परमेश्वर के साथ था।’’

    ‘‘सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई।’’

    ‘‘उस में जीवन था; और वह जीवन मनुष्यों की ज्योति थी।’’

    ‘‘और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया।’’ युहन्ना 1:1…5

    ‘‘वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना।’’ युहन्ना 1:10

    ‘‘वह अपने घर में आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया।’’ युहन्ना 1:11

    ‘‘परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उस ने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात् उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं।’’ युहन्ना 1:12

    ‘‘और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।’’ युहन्ना 1:1

    इसका अर्थ यह हुआ कि यह वचन है, वही सृष्टिकर्ता है, और यदि हम इस सृष्टि कर्ता को जानते हैं और इसे मानतें है तो निश्चित ही हम उस अद्वितीय सर्वकालिक परमात्मा को पा जायेंगें जिसे हमारे पूर्वज खोजते – खोजते जीवन यात्रा पूरी कर चुके फिर भी उसे न पा सके।

    आप इस संसार के सबसे ज्यादा भाग्यशाली व्यक्ति बनेंगें, क्योंकि आज इन शब्दों वचनों के द्वारा अनादि, अनंत त्रिकाल सर्वज्ञ परमेश्वर को जानकर माने और मान कर मोक्ष पाएं। आपके दैनिक मनन और चिंतन की धार्मिक सामग्री जिसके उपयोग के बाद आप ऐसा सोचते हैं, कि इसके द्वारा वह (परम, ईश्वर, सृष्टिकर्ता ) प्रार्थनाओं को सुन रहा है, तो हमें यह समझने की आवश्यकता है कि क्या वह सचमुच सुन रहा है? यदि हम उसे जान कर (नाम को जानकर) पुकारेंगें तो वह सुनेगा, अन्यथा वह आपके द्वारा गलत नाम से उच्चारित मंत्र का मोहताज नही है।

    इसलिये हम आज उन आरतियों, वैदिक मंत्रो, वैदिक प्रार्थनाओं के द्वारा समझने की कोशिश करते हैं कि वह कौन है ? जिसने हमें बनाया और जिसके द्वारा हमारा मोक्ष संम्भव है।

    वदन्तु शास्त्राणि यजन्तु देवान, कुर्वन्तु कर्माणि भजन्तु देवताः।
    आत्मैक्यबोधेन विनापि मुक्ति – न सिध्यति ब्रह्याशतान्तरेऽपि।।
    (विवेक चूड़ामणी 6)
    अर्थात – उन्हे ईश्वर को मंत्र सुनाने दो और दक्षिणा चढ़ाने दो, उन्हे संस्कारों को मानने दो और देवताओं की पूजा करने दो, परंतु कोई छुटकारा नही है, यहां तक की ब्रम्ह्या के सहस्त्र जीवन काल में भी यह संभव नहीं हैं जब तक कि आत्मा परमात्मा के आधीन न हो जाए।

    नोट – ‘‘ब्रह्याशतान्तर’’ – उस मान का नाम है कि जिसके अनुसार सृष्टिकर्ता ब्रह्याजी की केवल एक दिन मानव आयू गणना के 43,20,00,000 वर्षों के बराबर होता है।

  31. परिवर्तन की एक प्रार्थना, जो बचपन से मैंने सीखी थी वो इस प्रकार है –

    असतो मा सदगमया,
    तमसो मा ज्योतिर्गमया,
    मृत्योर्मां अमृतं गमया।।

    ये प्रार्थना मैंने बचपन में अपने स्कूल की डायरी में कई बार पढ़ी थी जिसका अर्थ इस प्रकार लिखा था –

    हे ईश्वर, मुझे असत्य (झूठ) से सत्य की ओर,

    तमस (अंधेरे) से प्रकाश की ओर तथा

    मृत्यु से जीवन की ओर लेकर जाएँ।

    इस अर्थ को मैंने कई बार पढ़ा था परंतु फ़िर भी इसका उत्तर मेरे पास नहीं था।

    इस प्रार्थना का उत्तर मुझे तब ही मिला जब मैंने यीशु मसीह को जाना।

    प्रभु यीशु को जानने के बाद मुझे पता चला कि उनके नाम में की गई हमारी हरेक प्रार्थना परमेश्वर जरूर सुनता है और उनका उत्तर भी देता है – उसकी अपरम्पार दया में ‘हाँ’, या उसकी असीमित बुद्धि और ज्ञान में हमारे भले-बुरे को जानते हुए ‘नहीं’। सच्चे परमेश्वर के नाम से की गई कोई भी हमारी प्रार्थना व्यर्थ नहीं जाती।

    यदि उपरोक्त प्रार्थना सच्चे मन से, सच्चे परमेश्वर से की गई हो तो इस प्रार्थना का उत्तर मिलना आवश्यक है । परमेश्वर मानवजाति से प्रेम करता है इसलिए उपनिषद की इस प्रार्थना का जवाब, परमेश्वर के वचन, बाइबल में मिलता है-

    “…मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई परमेश्वर तक नहीं पहुँच सकता” [युहन्ना 14:6]

    “मैं तुमसे सच सच कहता हूँ, जो मेरा वचन सुनकर मेरे भेजने वाले पर विश्वास करता है, अनन्त जीवन उसका है; और उस पर दण्ड की आज्ञा नहीं होती परन्तु वह मृत्यु से पार होकर जीवन में प्रवेश कर चुका है।” [ युहन्ना 5:24]

    “यीशु ने फिर लोगों से कहा, “जगत की ज्योति मैं हूँ; जो मेरे पीछे हो लेगा वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा।” [युहन्ना 8:12]

  32. एक और प्रार्थना के विषय में मैं आपको बताता हूँ – गायत्री मंत्र

    ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं
    भर्गो देवस्य धीमहि धियो योनः प्रचोदयात्।

    जिसका मतलब (भावार्थ) होता है –

    ओ बृहमांड के सृष्टिकर्ता परमेश्वर, हम आपकी असीम महिमा पर ध्यान धरते हैं। ऐसा होने दे कि आपकी वैभवमयी सामर्थ्य हमारी बुद्धि को प्रकाशित करे, हमारे पापों को क्षमा करे तथा सही मार्ग में हमारा पथ प्रदर्शन करें।

    सदियों से मानव सत्य, शांति तथा सार्थक जीवन की खोज करता रहा है। यही खोज इस प्रार्थना के रूप में इस मंत्र में निकलती है, परंतु साथ ही ये बात समझने की भी ज़रूरत है कि यह प्रार्थना सृष्टिकर्ता परमेश्वर से की गई है, इसलिये इसका उत्तर सिर्फ़ जीवित अमूर्त प्रेमी सृष्टिकर्ता परमेश्वर की ओर से ही आ सकता है।

    यदि इस प्रार्थना को ही हम गौर से देखें तो हम समझ सकते हैं कि बाइबल में इस प्रार्थना का भी उत्तर है –

    यह प्रार्थना सृष्टिकर्ता परमेश्वर से है –

    और सच में हमें हमारे रचनाकार परमेश्वर से ही दुआ करनी चाहिए। बाइबल बताती है कि सच्चा सृष्टिकर्ता ईश्वर कौन है – यीशु मसीह (युहन्ना 1:1, 1:3, 1:14)

    यह प्रार्थना बुद्धि प्राप्ति, सत्य प्रकाशन, पाप क्षमा तथा सत्य मार्ग दिखाने के लिये है –

    य़ीशु मसीह ने कहा कि सत्य, मार्ग और जीवन वो खुद हैं (युहन्ना 14:6)

    जो परमेश्वर के पुत्र हैं, खुद ज्योति हैं (युहन्ना 8:12)

    जो कि मानव रूप में धरती पर आए ताकि हमें स्वयं अपना प्रकाश दें, हमारे पापों की क्षमा करें और हमारे लिए शांति तथा उद्धार का मार्ग प्रशस्त करें (युहन्ना 3:16,17)।

  33. मोक्ष क्या है | उद्धार कैसे होता है

    आप यदि आध्यात्मिक बातों में रूचि रखते हैं और हिन्दू शास्त्रों तथा रीतिरिवाजों के बारे में जानते हैं तो आपने यह बात ज़रूर ही सुनी होगी –

    “इस संसार में प्रत्येक व्यक्ति मुक्ति के लिए संघर्षरत रहता है । भूख से मुक्ति के लिए वह भोजन का प्रबन्ध करता है । सर्दी-गर्मी से मुक्ति के लिए वह मकान, वस्त्र आदि का प्रबन्ध करता है; तनाव से मुक्ति के लिए मनोरंजन के साधनों को खोजता है; रोग से मुक्ति के लिए औषधियों और शल्य-चिकित्सा का सहारा लेता है; अज्ञान से मुक्ति के लिए शिक्षा ग्रहण करता है, असुरक्षा से मुक्ति के लिए राजनीतिक व्यवस्था तथा निर्धनता से मुक्ति के लिए अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाता है । फिर भी उसका मन अनन्त इच्छाओं का जाल फैलाता है और उनसे उनकी पूर्ति न हो पाने पर दु:ख का अनुभव करता है । यही मन प्रिय जनों में राग उत्पन्न करता है और उनसे वियोग होने पर शोकाकुल हो जाता है । यह मन भविष्य की चिन्ताओं को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर वर्तमान के सुख को छीन लेता है । प्राणों का मोह मन में मृत्यु-भय उत्पन्न करता है । उन सबसे मुक्ति भौतिक पदार्थों या भौतिक सुख-सुविधा के साधनों से नहीं मिल सकती । अध्यात्म के माध्यम से ही दु:ख, शोक और मृत्यु-भय से मुक्ति मिल सकती है जिसे मोक्ष कहते हैं । मोक्ष का पहला मूलमंत्र है इच्छाओं की पूर्ति से परितृप्त होकर भौतिक सुखों के लिए इच्छाओं की निस्सारता को समझ कर इच्छाओं का त्याग करना-

    यदा सर्वे प्रमुच्यन्ते कामाये स्य हृदिश्रिता: ।
    अथ मर्त्यो मृतो भवत्यत्र ब्रह्म समश्नुते ।

    (जब हृदय की समस्त इच्छाएँ समाप्त हो जाती हैं तब मर्त्य अमर हो जाता है और इस जीवन में ब्रह्म की प्राप्ति कर लेता है।)

    यदा सर्वे प्रभिद्यन्ते हृदयस्येह ग्रन्थय: ।
    अथ मर्त्यो मृतो भवत्येतावद्धरनुशासनम् ।

    (जब हृदय की समस्त सांसारिक ग्रन्थियाँ अलग हो जाती हैं तो मर्त्य अमर हो जाता है । यहीं समस्त शिक्षा का अन्त होता है।)

    परंतु क्या बात सच में आपके गले उतरती है। क्या वास्तव में हमने कभी भी किसी ऐसे व्यक्ति को देखा है जो सांसारिक ग्रंथियों से अर्थात दुनियावी इच्छाओं से अलग हो गया हो। असल में देखा जाये तो संसार से अलग होकर आत्मिक ज्ञान की इच्छा भी तो शरीर में ही पैदा होती है और इसी स्वार्थी शरीर में रहते हुए ही हम इस इच्छा को पूरा करने के लिये जप-तप आदि अन्य अन्य तरीकों से ईश्वर प्राप्ति की कोशिश करते रहते हैं। संसार में चारों और दुख है, निराशा है, लूटपाट है, घोर अंधकार है, विनाश है, अशांति है। हम सब इन बातों के बीच में ही रहते हैं। परंतु क्या हमने कभी सोचा है कि इसका कारण क्या है? इस सबका मुख्य और एकमात्र कारण हमारे और हमारे सृष्टिकर्ता ईश्वर के बीच में अलगाव है जो कि इसलिये आ गया क्योंकि हमारे स्वभाव में पाप है। अब नया सवाल उठता है कि ईश्वर ने हमें पापी बनाया ही क्यों, और अगर ईश्वर ने हमें पापी नहीं बनाया तो हम पाप क्यों करते हैं। इसके बारे में हम कभी और ही विष्लेषण करेंगे परंतु आज हम (अपने अंतर्मन में झांकते हुए अपने आपको ईमानदारी से जाँच लेते हैं, और) मान लेते हैं कि हमने मन, वचन अथवा कर्म से कभी न कभी पाप किया है और हम पापी हैं। छोटे बच्चे को कोई नहीं सिखाता कि तुम बड़े होकर पाप करना, झूठ बोलना, अत्याचार करना, घमण्ड करना आदि, परंतु जैसे जैसे बच्चा बड़ा होता जाता है, वो स्वतः ही पाप करने लगता है, इसका मतलब है कि यह पाप एक बीज के समान है जो हममें रहता है और समय के साथ साथ बढ़ने लगता है और इस पर अन्य अन्य प्रकार के फल लगते हैं जो कि उस असल पाप के फल हैं जो हममें है।

    बाइबल इस के बारे में कहती है कि सबने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। हम उस परम पवित्र ईश्वर के सामने इतने छोटे हैं कि कितने भी भले और पवित्र काम हम कर लें, तौभी वो हमें अपने सृष्टिकर्ता परमेश्वर के तुल्य पवित्र नहीं कर सकते। और न ही हमारे भले काम हमारे बुरे कर्मों के बदले कुछ मदद कर सकते हैं। भले कामों को देखकर बुरे कामों की सजा माफ नहीं की जा सकती जिस प्रकार एक व्यक्ति जो जिन्दगी भर भले काम करता रहा हो, अपने किसी दुष्कर्म (जैसे हत्या अथवा बलात्कार) के लिये यूँ ही माफ नहीं किया जा सकता। एक ईमानदार और निष्पक्ष न्यायाधीश उसे सजा जरूर देगा। ठीक ऐसे ही हम सभी अपने उस परमन्यायी ईश्वर के सामने सजा के ही हकदार हैं। हम न तो अपने ही पाप क्षमा कर सकते हैं और न ही एक दूसरे के पाप ही क्षमा करा सकते हैं, इसलिये हमें ऐसे ईश्वर (अवतार) की आवश्यकता है जो हमारे पापों के कारण हमारा नाश न करे अपितु हमें समझे, हमारी कमज़ोरियों को जाने और अपने प्रेम और दया के कारण हमसे ऐसा बर्ताव करे ताकि हम नाश न हों बल्कि हमारे पापों का मोचन हो जाये और हम स्वर्ग में जाने के योग्य जन बन जायें। यीशु मसीह वो ही ईश्वर-अवतार हैं, जो स्वयं परमेश्वर (पुत्र-स्वरूप) होते हुए भी हमारे पापों की क्षमा कराने के लिये हमारे बीच आ गये, हमारे पापों का दण्ड अपने ऊपर लिया। आज हमें उन पर विश्वास करने, अपने पापों से पश्चाताप करने, प्रभु यीशु के बलिदान को अपनाने और उनके बताये मार्ग पर चलने की आवश्यकता है – कर्मों के द्वारा नहीं अपितु विश्वास ही से परमेश्वर की कृपा द्वारा उद्धार हो सकता है।

    दूसरे तरीके से सोचिये – उद्धार होता कैसे है?

    क्या आप भूखे हैं? शारिरिक रूप से भूखे नहीं, परन्तु आपको जीवन में किसी और वस्तु की भूख है? आत्मिक भूख। क्या आपमें गहराई तक कोई ऐसी चीज है जो कि कभी भी संतुष्ट होती प्रतीत नहीं होती? अगर ऐसा है, यीशु एक रास्ता है ! यीशु ने कहा, “जीवन की रोटी मैं हूँ : जो मेरे पास आयेगा वह कभी भूखा ना होगा, और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा ना होगा” (यूहन्ना 6:35) ।

    क्या आप भ्रमित हैं? क्या आप जीवन में कोई मार्ग या उद्देश्य नहीं ढूंढ पाये? क्या ऐसा प्रतीत होता है जैसे किसी ने बिजली गुल कर दी है तथा आप उसको जलाने के लिए बटन ढूंढ पाने में असर्मथ हैं? अगर ऐसा है, तो यीशु एक मार्ग है ! यीशु ने दावा किया था, “जगत की ज्योति मैं हूँ; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में ना चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पायेगा” (यूहन्ना 8:12) ।

    क्या आप कभी ऐसा महसूस करते हैं कि आपके प्रति जीवन के द्वार बन्द हो गए हैं? क्या आपने बहुत सारे द्वार खटखटाये हैं, केवल यह जानने के लिए कि उनके पीछे केवल खालीपन तथा अर्थहीनता है? क्या आप एक पूर्णता के जीवन में प्रवेश करने की ओर देख रहे हैं? अगर ऐसा है, तो यीशु एक मार्ग है ! यीशु ने द्घोषणा करी थी, “द्वार में हूँ; यदि कोई मेरे द्वारा प्रवेश करेगा तो उद्धार पायेगा, और भीतर-बहर आया-जाया करेगा, और चारा पायेगा” (यूहन्ना 10:9)

    क्या अन्य लोग सदा आपको नीचा दिखाते हैं? क्या आपके संबंध उथले और खोखले हैं? क्या ऐसा प्रतीत होता है कि हर एक आपका लाभ उठाने का प्रयास कर रहा है? अगर ऐसा है, तो यीशु एक मार्ग है ! यीशु ने कहा था, “अच्छा चरवाहा मैं हूँ अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिए अपना प्राण देता है — मैं अपनी भेड़ों को जानता हूँ और मेरी भेड़े मुझे जानती है” (यूहन्ना 10:11, 14) ।
    क्या आप आश्चर्य करते हैं कि इस जीवन के पश्चात क्या होता है? क्या आप उन वस्तुओं के लिए अपने जीवन को जीते हुए थक गए हैं, जो केवल सड़ती हैं या जंक़ खाती हैं? क्या आप को जीवन के अर्थ के प्रति का संदेह होता है? क्या आप मरणोपरान्त जीना चाहते हैं? अगर ऐसा है, तो यीशु एक मार्ग है! यीशु ने द्घोषणा करी थी, “पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूँ; जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए तो भी जीएगा । और जो कोई जीवत है और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्तकाल तक ना मरेगा” (यूहन्ना 11:25-26) ।

    मार्ग क्या है? सत्य क्या है? यीशु ने उत्तर दिया, “मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता” (यूहन्ना 14:6) जो भूख आप महसूस करते हैं वो एक आत्मिक भूख है, तथा केवल यीशु के द्वारा ही पूरी की जा सकती है । एकमात्र यीशु ही है जो अंधेरे को समाप्त कर सकता है । यीशु एक संतुष्ट जीवन का फाटक है । यीशु एक मित्र तथा चरवाहा है जिसकी आप तलाश कर रहे थे । यीशु जीवन है-इस संसार में तथा अगले में । यीशु उद्धार का मार्ग है !
    आपकी भूख का कारण, आपको अंधेरे में खो जाने के प्रतीत होने का कारण, आपका जीवन में कोई अर्थ ना पाने का कारण, यह है कि आप परमेश्वर से पृथक हो गए हैं । बाइबल हमें बताती है कि हम सबने पाप किया है, तथा इसलिए हम परमेश्वर से पृथक हो गए हैं (सभोपदेशक 7:20; रोमियो 3:23) जो खालीपन आप अपने हृदय में महसूस कर रहे हैं वह परमेश्वर का आपके जीवन में ना होने का कारण है । हमारी रचना परमेश्वर के साथ संबंध रखने के लिए की गई थी । परन्तु अपने पाप के कारण, हम उस संबंध से अलग कर दिये गए । इससे भी बदतर यह है कि हमारा पाप सारी अनन्तता में, इस जीवन तथा अगले में, हमारी परमेश्वर से पृथकता का कारण बनेगा (रोमियो 6:23; यूहन्ना 3:36)

    इस समस्या का समाधान किस प्रकार हो सकता है?

    यीशु एकमात्र मार्ग है ! यीशु ने हमारा पाप अपने ऊपर ले लिया (2कुरिन्थियों 5:21) । यीशु हमारी जगह मरा (रोमियो 5:8), वो दण्ड लेते हुए जिसके उत्तराधिकारी हम हैं । तीन दिनों पश्चात, यीशु मुर्दों में से जी उठा, पाप तथा मृत्यु के ऊपर अपनी प्रभुता प्रमाणित करते हुए (रोमियो 6:4-5) । उसने ऐसा क्यों किया? यीशु ने स्वयं उसका उत्तर दिया, “इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे” (यूहन्ना 15:16) यीशु मरा जिससे कि हम जी सकें । अगर हम यीशु में अपना विश्वास रखते हैं- उसकी मृत्यु को अपने पापों की कीमत मानकर-हमारे सारे पाप क्षमा किए तथा धो दिए जाते हैं । तब हम अपनी आत्मिक भूख की संतुष्टि पा सकेंगे । फिर से प्रकाश हो जायेगा । हम पूर्णता के जीवन में प्रवेश करेंगे । हम अपने सच्चे श्रेष्ठ मित्र तथा अच्छे चरवाहे को जानेंगे । हम यह जानेंगे कि मरने के पश्चात भी हमारे पास जीवन होगा-यीशु के साथ अनन्तकाल के लिए स्वर्ग में एक पुर्नजीवित जीवन ! “क्योंकि परमेश्वर ने जगत में ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश ना हो, परन्तु अनन्त जीवन पायें” (यूहन्ना 3:16) ।

    क्या आप विश्वास करते हैं? क्या आप विश्वास करना चाहते हैं? परमेश्वर आपसे प्रेम करता है। वो आवाज दे देकर हमको बुलाता है। भले ही इस दुनिया की भीड़ में हम एक चेहरा मात्र हैं, पर सारे बृहमांड का रचने वाला परमेश्वर आपमें रूचि रखता है और आज आपको बुलाता है। विश्वास करें। प्रभु आपको आशीष दें।

    1. ” वो आवाज दे देकर हमको बुलाता है।”
      itne logon ko sunane ke lye to usane mike ki vyavastha bhee ki hogi

      hamen to usaki aawajj aaj tak sunai naheen di

  34. मूर्ति-पूजा क्यों – क्या इससे ही ईश्वर को पाया जा सकता है?

    मेरे विचार में, यह एक धारणा मात्र है, और इसमें कहीं कोई तथ्य नहीं है – कि बिना देखे हम किसी बात में विश्वास नहीं कर सकते। मैं ऐसा नहीं मानता। ऐसा नहीं है कि मैं जिद्दी हूँ, बल्कि इसलिये क्योंकि इस बात पर मैंने विचार करके देखा है।

    यजुर्वेद के 32 अध्याय में इस प्रकार की बात लिखी है

    कि परम ईश्वर या परमात्मा की न तो कोई प्रतिमा है और न ही कोई दुनियावी स्वरूप (सांसारिक रूप जिसे देखा जा सके)। उसे कोई भी अपनी शारीरिक आँखों से नहीं देख सकता। उसका नाम ही इतना ऊँचा तथा शक्तिशाली है उसे पुकारना भर ही काफी है, तौभी हममें से कितने ही उसे देखने की लालसा रखते हैं, और जब नहीं देख पाते तो अपनी कल्पना से उसके सांसारिक रूप की एक रचना कर लेते हैं। वो तो सब जगह विद्यमान है।

    मैं इस बात को नहीं मानता कि हमें किसी भी बात में विश्वास करने के लिये उसे देखना ज़रूरी है। मेरी उम्र 32 वर्ष है, और मैं पूछना चाहता हूँ (जो मेरी उम्र के हैं – या बड़े भी), हम में से कितनों ने महात्मा गांधी और अब्राहम लिंकन के अस्तित्व पर अविश्वास किया है। मेरे ख्याल से किसी ने भी नहीं। हमने उनमें से किसी को नहीं देखा, परंतु हम बड़ी आसानी से मानते हैं कि वे मौजूद थे। हम हवा को नहीं देखते पर मान लेते हैं कि हवा है। हमने तार में बहती बिजली को कभी नहीं देखा परंतु नंगे तार पर हम हाथ नहीं रखते, क्योंकि हमने उसके प्रभाव को देखा है – हम जानते हैं कि पंखा चलता है, टीवी चलता है, बल्ब जलता है इसका मतलब बिजली है। तो जब ऋतुएं बदलती है, सूरज और समस्त ग्रह अपने नियत समय में अपने नियत मार्गों में चलते हैं, जब एक औरत के गर्भ में बच्चा बढ़ता जाता है, जब समुद्र की सीमायें बंधी रहती हैं और उसका पानी शहर की सीमाओं में नहीं घुसता, हम सांस लेते हैं, हमारे दिल की धड़कनें निरंतर चलती रहती हैं, क्या ये काम हमें यह बताने के लिये काफी नहीं है कि इस सबके पीछे एक शक्तिशाली तथा बुद्धीमान ईश्वर है। हमें और क्या देखने की ज़रूरत है?

    हम जो भी करते हैं, विश्वास के द्वारा ही करते है। हम बहुत से (या ज्यादातर) काम विश्वास से ही करते हैं। हम कुर्सी पर पूरा वज़न डाल के बेठते हैं तब यह विश्वास हमारे मन में होता है कि यह कुर्सी हमारा वज़न संभाल सकती है, टूटेगी नहीं। यदि ऐसा न होता (जिस कुर्सी पर आपको भरोसा नहीं होता) तो आप कैसे उस कुर्सी पर बेठते? जब हम गाड़ी चलाते हैं तो वो भी हम विश्वास से करते हैं। ट्रैफिक सिग्नल पर हरी बत्ती होते ही हम चल पड़ते हैं क्योंकि हमें विश्वास होता है कि दूसरी तरफ लाल बत्ती है और वहाँ से कोई नहीं आयेगा। यदि ऐसा न होता तो क्या हम गाड़ी चला पाते?

    मेरे कहने का तात्पर्य बस इतना ही है कि जब हम जीवन की सभी बातें जैसे बैंक में पैसा जमा करना, गैस जलाकर खाना बनाना, लिफ्ट में बैठकर ऊपर जाना, ट्रेन में बैठकर नियत जगह के लिये यात्रा करना, फोन पर बात करना इत्यादि सभी बातें विश्वास से ही करते हैं। यदि हम विश्वास न करें तो यह सब संभव नहीं है, इसी प्रकार ईश्वर में विश्वास करने के लिये विश्वास ही ज़रूरी है, देखना नहीं।

    कुछ लोग ईश्वर को नहीं मानते और कहते हैं कि किसने ईश्वर को देखा है, ऐसा कोई परमसत्य नहीं है, हम जो सही करते हैं वो ही सही है, उसी से ईश्वर को पाया जा सकता है, इत्यादि। ऐसे कई सवालों के जवाब मैं भविष्य में देने की कोशिश करूँगा, परंतु यहाँ छोटे शब्दों में मैं इतना कहना चाहता हूँ, कि यदि ट्रेफिक सिग्नल पर खड़े हुए हम वो ही करने लगें जो हमें ठीक लगता है तो सोचिये यातायात का क्या हाल होगा। जिसे जल्दी है वो जल्दी जायेगा और हमें कुछ पता नहीं चलेगा कि कब हमें चलना चाहिये ताकि कोई हमें टक्कर न मार दे। इस बात के लिये तो हम एक ऐसे नियम को चाहते हैं जिसे सभी पालन करें ताकि सब कुछ सुचारू रूप से चले, तो फिर ईश्वर के बारे में ऐसा करने के लिये हिचक क्यों?

    हमें परमात्मा के एक ही नियम की आवश्यकता है। उसका प्रेम का नियम, जिसके कारण उसने मानव रूप में अवतार लिया ताकि हमें हमारे पापों से छुड़ा ले। पवित्र शास्त्र में लिखा है कि परमेश्वर ने सारे जगत से (किसी जाति अथवा धर्म विशेष से नहीं)ऐसा प्रेम रखा कि अपना इकलौता पुत्र (यीशु मसीह) दे दिया ताकि जो कोई (फिर से कोई बंधन नहीं है)उस पर विश्वास करे वो नाश (नर्क) न हो परंतु अनंत जीवन (स्वर्ग) पाये। जैसा मैंने बचपन से सीखा था और हममें से कई अब भी विश्वास करते हैं कि यदि ईश्वर धर्मियों को बचाने और पापियों का नाश करने आता है तो हमारा तो नाश ही हो जाता क्योंकि कोई भी धर्मी नहीं है (सबने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं), इसलिये परमेश्वर ने धर्मियों को बचाने के लिये नहीं अपितु उनसे प्रेम कर उन्हें बचाने के लिये अपने पुत्र को इस दुनिया में भेजा ताकि वो हमारे पापों का निवारण करे। ऐसा करने के लिये प्रभु यीशु ने हमें मिलने वाली सारी कोड़ो की सज़ा को अपने ऊपर ले लिया और अपना जीवन तक न्योछावर कर दिया। परंतु फिर वो तीसरे दिन जी उठे (क्योंकि ईश्वर को कोई नहीं मार सकता – मृत्यु उन पर बंधन नहीं रख सकती)और जीवित स्वर्ग में उठा लिये गये और अब वो जीवित ईश्वर हमारी सुधि लेता है और हमारी प्रार्थनाओं को सुनता है।

    उस निराकार ईश्वर के प्रेम व उसके (अपने पुत्र-स्वरूप) बलिदान पर विश्वास करें, ताकि हमारा मानवीय जीवन (जैसा अस्तव्यस्त है) बदल जाये और हमारी आत्मिक ज़रूरतें पूरी हों और हमारा जीवन सुचारू रूप से चले। यह जीवन कोई 60-80 या 100 साल का नहीं है अपितु शाश्वत जीवन है क्योंकि आत्मा नहीं मरती और वो या तो नर्क में रहती है जहाँ तड़पन है, अशांति है आदि अथवा मोक्ष प्राप्ति कर स्वर्ग में निवास करती है। यह जीवन यहीं से शुरू होता है और इसका निर्णय आपके हाथों में है। अपने पापों का निवारण स्वयं आपके हाथों में है। पापों से मुक्ति मिलने के बाद ही सुख, शांति, पाप-क्षमा, आनंद, सफलता, आशा, प्रेम, तथा ईश्वर-कृपा से भरा आपका हो सकता है।

    जल्द ही इस बारे में मैं और लिखूंगा, कि उद्धार (मोक्ष) क्या होता है और कैसे मिल सकता है। बस अभी इतना ही, कि अपने देखने और विश्वास करने के मोह से निकलकर उस निराकार ईश्वर को पुकारना शुरू करें, उसको अपने जीवन में आमंत्रित करें, वो ज़रूर ही आपके पास आयेगा। परम-ईश्वर आपसे प्रेम करता है।

  35. So everything that is in Vedas are true???
    And king David was Israeli the God’s children and holy Spirit came upon mother Mary… and father son and holy Spirit is one… holy Spirit came in womb of mother Mary… because son had to come in flesh… according to law of nature(God created nature)… and according to prophecy he had to fulfill the prophecy… so lift the burden of our sins by dying on the cross…

    1. ved me kuch galat nahi hai jabki bible me hai…. kai baat aisi hai jo paraspar virodhi hai bible me

    1. बाइबिल में सही क्या है यह बताना ? अपनी बेटी से सम्भोग करना ? बहु से सम्भोग करना ? बहन से बलात्कार करना ?कई बात है जी | यहाँ प्रकट करना सही नहीं है | करने लगा तो क्या मालुम आपको और बुरा लग जाए |

  36. भाई आप बाईबल मे लिखा यूहन्रा 21:25
    सभी बाते लिखी जाती तो पुस्तके संसार मे न समाती

    1. विस्तार से जानकारी दीजिये आपकी बात समझ नहीं पाया | जानकारी दें जिसके बाद चर्चा करने की कोशिश की जायेगी | धन्यवाद

  37. अमित रॉय
    येशू धर्मपरिवर्तन करणे नाही आये थे
    जीवन देने आये थे।।।
    प्यार सिखाने।। और लोगोको राह btane।।
    आप इसाई मत बनिये येशू के बनिये।।
    परमेश्वर आप क साथ होगा। krus को ठुकरणा परमेशवर के प्यार को और बलिदान को नजर अंदाज कारण है।।

    जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा (रोमियों 10:12)
    ध्यान दें यह प्रतिज्ञा ‘हर किसी’ के लिए है, न कि किसी विशेष धर्म, जाति या देश के लिए । क्योंकि वह मृतकों में जी उठा है इसलिए यीशु यहाँ तक कि अब भी जीवित है और वह ‘प्रभु’ है। इसलिए यदि आप उसको पुकारेंगे तो वह सुनेगा आपको अपने जीवन का उपहार देगा। आपको उसे – उसके साथ वार्तालाप करते हुए – पुकारना चाहिए और उससे माँगना चाहिए । कदाचित् आपने यह कभी नहीं किया होगा। यहाँ पर दिशानिर्देश दिया गया है जो कि आपको उसके साथ वार्तालाप करने और उससे प्रार्थना करने में सहायता प्रदान कर सकता है । यह कोई जादू से भरा हुआ मंत्र नहीं है। ये कोई विशेष शब्द नहीं हैं जो कि सामर्थ्य देते हैं। यह उसकी योग्यता और उसके द्वारा हमें उपहार देने की इच्छा के ऊपर भरोसा करना है। जब हम उस पर भरोसा करते हैं तो वह हमारी सुनता है और उत्तर देता है । इसलिए इस दिशानिर्देश का अनुसरण करने के लिए स्वतंत्रता को महसूस करें जब आप ऊँची आवाज में या अपनी आत्मा में यीशु से बात करते हैं और उसके उपहार को प्राप्त करते हैं ।

    हे प्यारे प्रभु यीशु, मैं समझता हूँ कि मेरे जीवन के पापों के साथ मैं परमेश्‍वर से अलग हूँ। यद्यपि मैंने अपनी सर्वोत्तम कोशिशें की हैं, तौभी मेरा कोई प्रयास और बलिदान इस सम्बन्ध विच्छेद को पाट नहीं सकता है । परन्तु मैं समझता हूँ कि आपकी मृत्यु एक ऐसा बलिदान है जो हमारे सारे पापों को धो डालता है – यहाँ तक कि मेरे पापों को भी । मैं विश्‍वास करता हूँ कि आप अपने बलिदान के पश्चात मृतकों में जी उठे इस तरह से मैं जानता हूँ कि आपका बलिदान पर्याप्त है। मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि मुझे मेरे पापों से शुद्ध करें और मुझे परमेश्‍वर के पास ले आएँ ताकि मैं अनन्त जीवन को प्राप्त कर सकूँ । मैं ऐसे जीवन को नहीं चाहता हूँ जो पाप का गुलाम हो इसलिए कृप्या करके मुझे इन पापों से शुद्ध करें जिन्होंने मुझे कर्म बन्धन में जकड़ा हुआ है। हे प्रभु यीशु, मेरे लिए यह सब कुछ करने के लिए और अब निरन्तर मुझे मेरे जीवन में मेरे प्रभु के रूप में मार्गदर्शन देते रहने के लिए आपका धन्यवाद।

    18 क्योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है, परन्तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है। (1 kuranthian1:18)

    1. kaun se ved me aisa jaankaari di gayi hai ji thoda batlana reference dekar fir ham praman pesh karenge aapko … yaha youtube kaa link naa dein janab…. praman dete fir doodh kaa doodh aur paani kaa paani aapke saamne karne ki koshish ki jaayegi…

        1. janab hamare paas itnaa samay nahi video dekhein…. are aap reference do ved me kahan isha sab kaa naam aaya hai…fir uske baad aage charcha ki jaayegi… are iljaam to jakir naik ityaadi bhi lagata hai paigambar muhmad … itydi kaa naam vedo me hai … aur ye sab kewal logo ko galat jaankaari dete hain…. is kaaran praman dein …aise galat jaankaari dene se koi sahi nahi hota

      1. Mujeh reference dene mai dikkat nahi h but mai chahta hun ke aap ek bar video dekhe or reference ka matlab nhi samjhe bus baki agar ase hi bhes krte rahoge to koi solution nhi milega

        1. reference hi diya karo janab… video koi bhi banakar youtube par daal sakta hai aur us video me kuch bhi banakar daala jaa sakta hai… is kaaran praman batao refernce do fir aage charcha karenge… aap video dekhe ho naa to ussse reference de do… fir aage charcha ki jaayegi… aur kisi bhi baat kaa solution bahas tarak karne se hi hota hai… jisse saty ki jaankaari milti hai… aaye apana paksh rakhe fir aage charchaa ki jaayegi…

            1. जनाब हमारे पास इतना समय नहीं होता की इस तरह का विडियो देखे | अरे हमारे पास समय का आभाव रहता है | कृपया प्रमाण रिफरेन्स दिया करे उसके बाद उस बारे में जानकारी आपको दी जायेगी की वैसा वेद में लिखा है या नहीं | रिफरेन्स दिया करो उसके बाद आपको उसका शंका समाधान करने की कोशिश की जायेगी | धन्यवाद

  38. Yrr had h yee to his jisne bhii God ke bare m esa kuch bola h woo sch m negative h bt it itna ye to glt h agr ap yeshu masih ko nii mante wo alg baat h bt oro ko to Mt bhtkao
    Or Haa rhii apke uss vachan kii baat ki daud ke wansh see hoga to yeshu masih ak kuwari ke dwara jnm lene prr bhii daud ke wansh ke hii thhrte h Kyoki mariym wo bhii to daud ke wansh see hii thii or

    Rhii adhipati hone kii baat wo to yahudiyo
    Ke raja hii the or raja hone ke wo sare kam kiye the unhone jo ak raja ko krne chahiye bt hmm logo ne hii usko swikara nhii orr un prr dosh lgaya jis wjh see usne mere Apr apradho ke liye krush pr apnii jaan dii

    1. kuwari aurat se bina sex kiye koi maa ban sakti hai kya ?? yaa bina sperm ovum mile ? yadi aisa hota hai to batao batao mohtarma…

      1. He baat apne bhole baba se puch, kitne varsho tak Parvati se alag raha kisse sex karke Ganesh ko pida ki, isiliye to hindu dharm se boudh aur Jain dharm alag hai. Hindu dharm hinshawadi dharm hai bina kisi ka khun kiye Hindu dharm ki sthapna nahi ki gayi, jabki Jain, boudh aur esai dharm ahinshawadi dharm hai jisme logo ko chhama v prem se rahna sikhata hai, Hindu dharm ashlil dharm hai Ajanta v alora me inke devi devta ka sambhog karte huye chitra banaye Gaye hai, hame in ashalil phailane wale dharm se dur rahna chahiye aur hatyaro ko bhawan mat mano. Vedo se dur raho jo 4 vardo me vibhajit hai vedo ko Jain aur bhudh nahi mante jisme ek jaati dusre jaati ke logo ka shosan karti hai.

        1. Roshan
          जनाब जो भी मत मजहब के हो आप चाहे आप इसाई मत के हो या जैन या बौध मत के अम्बेडकरवादी हो चलो आपको इन सब मत मजहब की कुछ जानकारी आपको दे देता हु | आये आपको पौराणिक हिसाब से जानकारी दे देता हु यदि आप जैन को मानते हैं तो शिव आपके तीर्थंकर रिश्भव देव के अवतार के रूप में लिए हैं इस कारण आप हिन्दू के शिव का विरोध नहीं कर सकते और ना हिन्दू का | यदि आप बौध हो तो पौराणिक हिसाब से गौतम बुद्ध विष्णु के अवतार है इस कारण आप हिन्दू का विरोध नहीं कर सकते यदि करते हैं तो आप खुद को ही विरोध कर रहे हो | आप खुद कमेंट करके खुद फस चुके हो जनाब | यदि इसाई हैं तो हमें बोलने की क्या जरूरत जनाब बाइबिल बोलती है बेटी से सम्भोग कर सकते हो बहु से सम्भोग कर सकते हो बहन से सम्भोग कर सकते हो जब बहु से सम्भोग कर सकते हो तो एक हिसाब से माँ से बेटा सम्भोग कर सकता है इस कारण कितनी अश्लीलता है बाइबिल में हमें ना सिखाने की कोशिश करे | वेद में क्या अश्लीलता है थोडा हमें बतलाना | कोई प्रमाण हो तो देना वेद की अश्लीलता को जिसे हम स्वीकार करेंगे हमें प्रमाण दो | एक बात हम पुराण को नहीं मानते | आपके जवाब की प्रतीक्षा में |

  39. Nhii to wo apradh jobs hmne kiye h uske liyee dukh utha rhe hote
    Lekin prbhuu mhana h jo unhone hme bcha rkha h so plz unkii kurbani ke liye unhe thnxx bolo naa koi dosh lagooo

      1. Hindu dharm ashlil dharm hai, aaj jo rup is dharm la dikhata hai wo vibhin sanskritiyo ke samaves hai prachin kaal me yah kukarmiyo ka dharm tha is dharm ki istri panch- panch purusho se sex karti thi, pati ke warsho se dur rahne par jaanwaro se sex karti thi, purush bhi 100-100 Rani aur rakhel rakhte the, kisi par daya naa karna, ek raza dusre raza ko maar kar khud ko bhagwan manne ke liye praja ko mazbur karta tha ye hai maano to baudh, Jain ya esai dharm mano jo satya ka raah dikhata hai, ginka palan kar har vaykti nirwan prapt kar sakta hai, ye Hindu to nark wasi hai nark ki rachna inhi ke liye kiya gaga hai.

        1. Roshan
          जनाब जो भी मत मजहब के हो आप चाहे आप इसाई मत के हो या जैन या बौध मत के अम्बेडकरवादी हो चलो आपको इन सब मत मजहब की कुछ जानकारी आपको दे देता हु | आये आपको पौराणिक हिसाब से जानकारी दे देता हु यदि आप जैन को मानते हैं तो शिव आपके तीर्थंकर रिश्भव देव के अवतार के रूप में लिए हैं इस कारण आप हिन्दू के शिव का विरोध नहीं कर सकते और ना हिन्दू का | यदि आप बौध हो तो पौराणिक हिसाब से गौतम बुद्ध विष्णु के अवतार है इस कारण आप हिन्दू का विरोध नहीं कर सकते यदि करते हैं तो आप खुद को ही विरोध कर रहे हो | आप खुद कमेंट करके खुद फस चुके हो जनाब | यदि इसाई हैं तो हमें बोलने की क्या जरूरत जनाब बाइबिल बोलती है बेटी से सम्भोग कर सकते हो बहु से सम्भोग कर सकते हो बहन से सम्भोग कर सकते हो जब बहु से सम्भोग कर सकते हो तो एक हिसाब से माँ से बेटा सम्भोग कर सकता है इस कारण कितनी अश्लीलता है बाइबिल में हमें ना सिखाने की कोशिश करे | अब आपके सवाल का जवाब | prachin kaal me yah kukarmiyo ka dharm tha is dharm ki istri panch- panch purusho se sex karti thi, pati ke warsho se dur rahne par jaanwaro se sex karti thi,| जनाब महाभारत में मिलावट कर दी गयी है और यह एक इतिहास है जिसमे मिलावट की जा सकती है | हमारे साईट पर आप द्रौपदी के बारे में बोल रहे हो आर्टिकल मिल जायेगे जिससे यह बात मालुम हो जाएगा ५ से सम्भोग नहीं करती थी औरत |purush bhi 100-100 Rani aur rakhel rakhte the, kisi par daya naa karna, ek raza dusre raza ko maar kar khud ko bhagwan manne ke liye praja ko mazbur karta tha ye | जनाब कितनी राजा के १०० रखैल थी थोड़ा जानकारी देना केवल झूठ बोलते हो कम से कम २० २५ राजा का जानकारी देना इतिहास से जिससे अपने बात को सही कर सको | कितने राजा खुद को भगवान् मानते थे २० २५ राजा का कम से कम नाम बतलाना जिससे अपने बोले गए शब्द को झूठ होने से बचा सको | केवल झूठ बोलते रहो | आप जैसे हाज़ारो झूठे इल्जाम लगते हैं उससे सत्य असत्य नहीं हो सकता और ना हमें आपके इल्जाम लगा देने से कोई फर्क ही पड़ता है | आपसे जो सवाल पूछा है उसका जवाब की प्रतीक्षा में |

  40. Jo khud hi pakhand ka dong karte hai vo hi bata rahe hai ki sach aur jhuth ka fark kya hai, hindu dharm asuro ka dharm hai, jo ling aur yoni ki puja karte hai, khud ki maa, beti se sex karte hai boudh dharm vedo ki sarwochta ka khandan karta hai aur baat bhagvaan budh ki Vishnu hone ka ye logo ko bhatkane ka hai taki log saty se dur rahe taki brahmano ka pakhand bana rahe.

    1. जनाब हमने प्रमाण माँगा अब तक कोई जवाब नहीं दिया और फिर आ गए झूठ बोलने को | सबसे पहले अब तक यह नहीं बोल रहे हो किस मत मजहब के हो यह बतलाने में क्या जाता है जनाब फिर उस हिसाब से चर्चा की जायेगी | हमने इतिहास से कुछ सवाल मांगा था जिसका अब तक जवाब नहीं दे पाए जो आपने कमेंट किया था थोडा याद दिला रहा हु और क्या जवाब दिया था उनका जवाब देना बंधु | केवल झूठ बोलते हो जवाब मानगो तो जवाब देने समय बोलती बंद हो जाती है जवाब क्यों नहीं देते | आपका बोलना था जिस पर हमने प्रमाण माँगा था अब तक प्रमाण नहीं दे पाए :-

      prachin kaal me yah kukarmiyo ka dharm tha is dharm ki istri panch- panch purusho se sex karti thi, pati ke warsho se dur rahne par jaanwaro se sex karti thi,| जनाब महाभारत में मिलावट कर दी गयी है और यह एक इतिहास है जिसमे मिलावट की जा सकती है | हमारे साईट पर आप द्रौपदी के बारे में बोल रहे हो आर्टिकल मिल जायेगे जिससे यह बात मालुम हो जाएगा ५ से सम्भोग नहीं करती थी औरत |purush bhi 100-100 Rani aur rakhel rakhte the, kisi par daya naa karna, ek raza dusre raza ko maar kar khud ko bhagwan manne ke liye praja ko mazbur karta tha ye | जनाब कितनी राजा के १०० रखैल थी थोड़ा जानकारी देना केवल झूठ बोलते हो कम से कम २० २५ राजा का जानकारी देना इतिहास से जिससे अपने बात को सही कर सको | कितने राजा खुद को भगवान् मानते थे २० २५ राजा का कम से कम नाम बतलाना जिससे अपने बोले गए शब्द को झूठ होने से बचा सको | केवल झूठ बोलते रहो | आप जैसे हाज़ारो झूठे इल्जाम लगते हैं उससे सत्य असत्य नहीं हो सकता और ना हमें आपके इल्जाम लगा देने से कोई फर्क ही पड़ता है | आपसे जो सवाल पूछा है उसका जवाब की प्रतीक्षा में |

      पहले के सवाल का जवाब अब तक नहीं दे पाए जनाब और फिर आ गए झूठ बोलने को प्रमाण दो दिया करो | यहाँ की जनता जानती हैं कौन पाखण्ड कर रहा है इसे समझाने की जरुरत नहीं जनाब पहले का जवाब देना फिर आपके इनके ऊपर जो सवाल किया है उसकी जानकारी आपको दी जायेगी | जवाब के इन्तजार में |

  41. Bhai tumhe kisne Christian ban diya? I’m a Hindu. But I am very lucky because Lord Jesus loves me. Jesus dharam badlne nhi zindgi badlne aaya hai. Jis din tu bimar ho jaaye aur saare world ke Dr tuje jwab de de toh vishwas se ghutno pe aakar prabhu se pray Karna tab voh tuje theek karega. I respect all religions. I Love My Hindu religion.
    But Lord Jesus jeevat khuda hai. JAI MASIH KI

    1. अरे जनाब अंधविश्वास की तो हद हो गयी | पूर्वाग्रह से ग्रसित हो भाई आप | पूर्वाग्रह से ग्रसित है आप | जीसस यदि जीवत खुदा है तो वह नजर क्यों नहीं आता ??? क्या आपके बहन चाची इत्यादि परिवार के सदस्य बिना सम्भोग के क्या माँ बन सकती है या फिर बिना स्पर्म ओवुम मिले कोई माँ बन जाए यदि ऐसा आपके जीसस कर दे तो मान लू की जीसस जीवत खुदा है आपका ? कोई उदाहरन देना यदि वैसा हुवा हो तो | जवाब की इन्तजार में | या जीसस किसी मरे हुए को जिन्दा कर दिया हो | अंधविश्वास से बाहर आओ भाई

  42. Toh Sachha masiha kon hai uska hi name bta doh.
    Reply vohi kare jisne ya jiske ancestors ne Lord Jesus ke bina koi aur dekha ho.
    Films ki example mat Dena bhai please kyuki tv mere paas bhi hai.
    Jai Masih ki

    1. अरे जनाब पूर्वाग्रह से बाहर निकलो | एक बात बताओ आपके जीसस ने किसी मरे हुए को जिन्दा किया है क्या ? क्या कोई औरत बिना सम्भोग किये माँ बन सकती है या फिर स्पर्म ओवुम मिले ? यदि ऐसा कुछ उदाहरन हो तो जवाब देना आपका इन्तजार रहेगा | लोगो को मुर्ख बनाना छोडो भाई जान

  43. Awtar Ki ninda karoge narak me joyoge ..bhai sahab religious granths Mai bhoot kuj secret hota hai or wo aam lok samaj nhi pate puran brahamgyani mahapurkhan hi smja sakte hai.. puran mahapurkhan ne to inhi Ko Jesus Christ kaha hai

    1. ji bilkul sahi bola bhai jaan aapne..ab sahi baat bolunga to aapko mirchi lagegi is kaaran aap lemon chus lena (waise yah ek serial ki actor ki dailouge hai ) jisse aapko mirchi kaa teekhaapan kam kar degaa…… sab se pahle yah jaane ved me kahin bhi avtaarvaad nahi hai aur ise hindu log sabse bada granth maante hain pauranik ke aadhaar par bhi…. ab aaye bible ki jaankaari lo thoda jaise aapne Jesus Christ ki baat ki hai… bible me apane baap beti se sambandh banata hai jismaani… aap bhi sambandh banaao ..kya fark padta hai janab aap bible kaa anusaran karo…..bahu apane sasur se sex karti hai aapki bahu ko bhi bolo bible kaa anusaran karne …. isi tarah bhai apane bahan kaa balatkaar karti hai…. bolo bible kaa anusaran karne ko…. kisane roka hai aisa karne se…aap karte raho ……yadi bible ki pol khol karna shuru kar diya to aap us tarah kaa anusaran nahi kar paaoge…kisi aur jagah gyaan bantana bhai jaan…yaha hame jaankaari doge to aapki galatfahmi ko pol khul jaayegi… dhanywaad

      1. Bible sachhi Hai mere dost bible mai jinho ne ye galat kaam kiya wo hum jaise aam insan the ,Jo paap Mai gir Gaye or unke papo ko bible ne nahi chupaya balki ujagar kiya hai . jara un logo ka hasar dekhna bible mai, parmeshwar ne unke sath kya hasar kiya…paap ki pehchan bible hi karati hai…
        Or rahi baat sex ki to jara khajraho ja k apne devtaon ki harkat dekh lena agar unka ek bhi pose jisme ek prush or kai mahilaye kya kar rahi hai agar galti se aap ke koi priye log isse apna le to muh dikhane k layak nahi rahoge…..

        1. यदि पापियों की हालत बाइबिल के ईश्वर ने ऐसी की तो ईसा मसीह को किस चीज की सजा मिली?

  44. Dear brother Reswa Arya
    I thank full to God that you are seeking God in knowing Christ…
    Your heart is empty and only Jesus can fill it by his love and campassion.
    1)मेरा एक सवाल की आज तक जितने भी ईसवर है वो राजा बन के कु पैदा लिए कोई गरीब क्यो नही पैदा हुआ
    2)सभी अवतार पापी लोगो को मौत के घाट उतारने कुयु आये।
    3 )वेद मैं रिग वेद ओर यजुर्वेद मैं अश्वमेघ यग मैं घोड़े का बलिदान खून बहाया जाता था।
    मोक्षय प्राप्ति क लिए।अब कु बंद हो गया जानवरो का बलिदान।
    4)बलि पुरुष कोन है वेद मैं
    उत्तर चाहिए तो
    ये लो
    यही तो सब लोगो का सवाल है की आखिर क्या है येशु मसीह
    वो जो गरीब क घर पैदा हुआ दुनिया के सबसे छोटे शहर मैं पैदा हुआ महल मैं नही गौ साला मैं पैदा हुआ।
    जिसने कभी भी पाप नही किया 2017 साल पहले उसे क्रूस पर निर्मम हत्या हुई ओर जो उसकी हत्या कर रहे थे उन्ही लोगो के लिए यह क्षमा की प्रार्थना कर रहा था।
    क्रूस ही वह यज्ञ स्थल है क्रूस ही वो यज्ञ है जिसका वर्णन वेदों मैं लिखा है येसु मसीह ही यज्ञ पशु है जिसका बलिदान उस यज्ञ मैं हुआ।
    सबने पापीयो को मारा।पर येशु मसीह पापीयौ के बदले
    उनकी सजा खुद अपने ऊपर ले लि ओर उनके लिए बलिदान हो गया ओर जो यग वेदों मैं अधूरा रेह गया था वो येशु मसीह ने क्रूस पर मर कर ओर तीसरे दिन जी उठ कर पूरा कर दिया कोंन केहता है की ये बाइबल भविष्यवाणी की किताब है येशु तो वेदों की भविष्य वाणी पूरा करने आये थे।
    जो कोई येशु मशीह को प्रभु स्वीकार करेगा वह अपने पापो से मुक्ति पायेगा।
    आखरी सवाल क्या आप के पास ऐसे लोग है जो पहले डाकू थे हत्यारे थे drugist थे शराबी थे वहभीचरी (having immortal sexual relationship with other) थे जिनको वेदों की शिक्षा ने बदल कर एक नया ओर सच्चा इंसान ईमानदार इंसान बना दिया हो।
    मेरे पास लाखो लोगो की लिस्ट है जो अति पपि थे पर येशु ने उन्हें बदल कर सच्चा इंसान बना दिया ।
    ओर उन मैं से एक पपि मैं भी था जो अब सच्चा इंसान बन गया।
    reswa arya
    येशु मसीह आप से बेहद प्यार करते है ओर उन सभी से जो उसको बुरा भला कहते है।

    यूहन्ना 3: 16
    क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्रा (येशु मशीह) दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु

    1. मित्र ईश्वर कभी जन्म नहीं लेता वह अजन्मा है इसलिए गरीब या अमीर के घर किसने जन्म लिया वह आत्मा है न कि ईश्वर किसी को मारने के लिए ईश्वर को आने की क्या आवश्यकता है

  45. Konse duniya me ji rhe ho bhai bibil ke wachno ko tod marod k mt rakh thik h or adhura gyan hmesa le dubta h or jara thik se pdo bibil or jo aaj ho rha h wo sb bible me phle se hi likh diya gya h ki esha esha hoga ant k samy me sari ghtnaye mach kr k dekho fir pta chalega

    1. Accha kya bible men ye bhee likha tha ki musalman world trade tower ko gira denge?
      Yadi likha tha to aapke padariyon ne bataya kyon naheen hajaron jane chalee gayeen usmen

  46. “ईश्वरीय वाणी ” मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूँ, इधर – उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूँ, मैं तुझे दृढ़ करूँगा, और तेरी सहायता करूँगा, अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे संभाले रहूँगा |”

  47. Jo tu bol rha hai na ye mat bhul ki eahwar ne tujhe bnaya hai tune ishwar ko nhi bnaya tu inshan hai or tujhe bhi eshwar ke pass hi jana hai. Mandir ke bahar garib bhik mangta hai or church ke bahar garib candil bechta hai.its a different. Inshaeyat ke bich Me agar dhram ko itna hi mante Ho to ishaeyo ke school me apne bachho ko padhane ke liye kyu bhejte ho.

    1. Jab Yeshee sare Kashon ko dur kar deta hai to fir hospital kyon kholte ho

      yeshee se hee bola karo ki wo theek kar dega

      Terrorists ne USA men attack kiya to Yeeshu ne kyon naheen roka

  48. मैं भी यीशु मसीह को नहीं मानता था । मैं एक बहुत अच्छा हिन्दू जन था। मगर जब मेरे कमर में एक भयानक दर्द हुआ और इस दर्द से मैं 3 सालो तक पीड़ित रहा तब तक मैं और मेरे माता पिता बहुत पूजा पाठ करते चढ़ावा चढ़ाते और यहाँ तक की यात्रा भी करते। जब कुछ नहीं हुआ तब जादू टोने का भी सहारा लिया मगर तब भी कुछ नहीं हुआ। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ बहुत इलाज़ भी किया और जो कोई जैसा बोलता था मैं और मेरा परिवार वैसा ही करता था। मगर सब कुछ व्यर्थ था। मेरे दिन आसुंयों में बीत रहे थे। तब मेरे अंदर एक प्रश्न आया की सच्चा परमेश्वर कोन है या परमेश्वर है भी की नहीं? तब मैंने एक सवाल किया वो भी हवा में की सच्चा भगवान् या परमेश्वर कोन है। तब एक रात में सो रहा था और अचानक मुझे किसी ने जगाया और मेरे अंदर की आत्मा से एक आवाज़ आयी की घुटनो पर आजा जब मैं ने इस आवाज़ को सुना तो तुरंत मैं घुटनो पर आ गया। तब मेरे साथ कुछ हुआ रात के 3 बज रहे थे घडी में।मुझे समझ नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है। उसके बाद मेरे सामने की दिवार पर मुझे कुछ चित्र दिखाये दिए मुझे लगा जैसे मैं कोई सपना देख रहा हूँ। मगर सब कुछ वास्तविक था। उन चित्रों में मैंने अपने आप को और अपने जीवन के सब पापों को जो मैंने किये और मैं करता था देखा। जब में यह सब देख रहा था तब मैं यह सोच रहा था की कौन मुझे इतने अच्छे से जानता है, जो मेरी उन बातों और उन कार्यों को जिन्हें मुझे छोड़ और कोई नहीं जानता था । मेरे उन पापों को देखकर मैंने पहली बार अपने आपसे घृणा की। और मैं बहोत रोया और में रो रोकर यह कह रहा था कि मैं पापी हूँ मैं अशुद्ध हूँ। तब एक आवाज़ मेरे अंदर से फिर आयी ‘क्योंकि तू पापी है इसलिए तू बीमार है क्योंकि तू पापी है इसलिए जीवन में असफल है। यह सब सुनने के बाद मैं बहुत रोया और अपने पापों की माफ़ी मांगने लगा। पुरे चार दिन तक रोज़ ऐसा ही होता था। 5वे दिन को मैं सुबह 8 बजे उठा और मैंने क्या देखा की मेरे कमर में बिलकुल भी दर्द नहीं था। मेरी दवाई छूट गयी और जो पीतल की बेल्ट मैं अपनी कमर को सपोर्ट देने के लिए पहनता था वह भी उत्तर गयी। मेरा परिवार मुझे देखकर बहुत खुश था क्योंकि मैं बिलकुल नार्मल हो चूका था। वो आनंद मैं कभीनहीं भूल सकता । पूरा दिन आनंद के साथ बिताने के बाद मेरे अंदर विचार आया की यह सब कुछ कैसे हुआ पिछले चार दिन जो कुछ मेरे साथ हुआ था, वह मैंने किसी को भी नहीं बताया था। अपने अंदर एक महाँन शांति और अच्छे स्वास्थ्य को देखकर मैंने अपने अंदर एक सवाल किया कि किसने मेरे साथ यह सब भलाई की? तब मेरे अंदर वही आवाज़ जो पीछे चार दिनों से आ रही थी। उसने कहा मैं यीशु हूँ जो तेरे साथ यह भलाई कर रहा हूँ। तब यह जानकार मैंने प्रभु यीशु को जानने की इच्छा जागृत की और एक व्यक्ति की मदद से में चर्च गया । चर्च मैं जाने के बाद प्रभु यीशु का विरोध मेरे अंदर से समाप्त हो गया। हलाकि मेरे परिवार में मुझे लेकर बड़ी परेशानी हुई लेकिन मुझे स्वस्थ देखकर और स्वाभाव को बदलते देखकर सब ने मुझे ग्रहण किया। मैं बहुत पापी और वासना से भरा हुआ मनुष्य था मगर प्रभु यीशु ने मुझे एक नया इंसान बना दिया। आज मेरे अंदर मुझे पाप का कोई बोझ नहीं है। प्रिय भाई और बहनों मैंने प्रभु यीशु को अपना मुक्तिदाता स्वीकार कर उन्ही के लिए जीना आरम्भ कर दिया है। मुझे किसी ने मसीह के बारे में प्रचार नहीं किया मुझे स्वमं सच्चा ईश्वर मिल गया जो मेरे लिए क्रूस पर मरा और जी भी उठा। मैंने अपनी गवाही इसलिए नहीं दी की आप लोग भी मसीह बन जाए पर इसलिए दी की एक बार इस संसार को छोड़ने से पहले सच्चाई की खोज जरूर करे।
    मैं यह जरूर कहना चाहता हूँ अगर आप गलत इरादे से किसी को झूठा ठहराने की कोशिश करेंगे तो आप किसी भी तरीके से उसे झूठा बना देंगे। मगर किसी की भी बात का न्याय करने से पहले गलत इरादा न रखकर उसकी खोज करे तो सच्चाई जरूर सामने आएगी। कहीं ऐसा न हो हम अपने अहंकार और नफरत की वजह से स्वमं का नाश करले। कोई किसी को नहीं बदल सकता सब के पास ईश्वर की दी हुई बुद्धि है। कोई किसी को पैसा देकर मसीह नहीं बनाता क्योंकि अगर ऐसा होता तो आज में और मेरा परिवार किराये के कमरे में नहीं रहता। मित्रों प्रभु यीशु ने कहा मेरा राज्य इस संसार का नहीं है । मित्रों प्रभु यीशु का राज्य इस नाश होने वाले संसार का नहीं। मगर वह अविनाशी आत्मिक संसार है जो हमारे इस संसार के छोड़ने के बाद शुरू होता है। हम इस संसार में कुछ भी permanent नहीं रख सकते। चाहे वह किसी भी धर्म को बचा कर रखने की सोच हो। एक दिन सब खत्म हो जायेगा। अगर कुछ बचाने की कोशिश करनी है तो अपने अंदर धर्मिकता को बचाओ और अपनी पवित्रता की रक्षा करो। धर्म आपसे से है, आप धर्म से नहीं । जब आपके अंदर और आपके स्वाभाव में धर्म नज़र नहीं आएगा तो लोग तो फिर आपको छोड़ेंगे ही। लड़ाई, झगड़ा, हत्या, बुराई करने वाला कैसे धर्म के लिए लड़ सकता है। भाइयों के बीच में बैर उत्पन्न करने वाला कैसे धर्म की रक्षा कर सकता है। प्रियों इस संसार में आज लोग पवित्र प्यार के प्यासे है और वह नफरत करके या करवारकर नहीं प्राप्त होता। सच्चा प्रेम आने अंदर की बुराई का बलिदान मांगता है । बुराई संसार में नहीं बुराई हम लोगो में है। किसी को ठीक करने के बदले हमे खुद धर्मिकता के पास आना चाहिए।

    जब लोग आपसे मिलकर अपने पापों से शर्मिंदा होंने लगें, और आपके अंदर ईश्वरीय स्वाभाव को देखकर अपनी बुराई से घृणा करने लगे। और बदलने का परिश्रम करने लगे और सबसे प्रेम करने लगे। तब समझ लेना की आप वाकई धर्म की रक्षा कर रहे हैं। स्वर्ग और नरक इस धरती पर हो नहीं सकता। आप स्वमं कल्पना कीजिये स्वर्ग क्या है।
    क्योंकि स्वर्ग अमरता और सदा निरोग रहने की आशिष है ।मगर हम सब इस धरती पर मरते और बीमारियों में तड़पते रहते हैं। पर एक बात तो है नरक इस धरती पर एक परछाई जरूर है क्योंकि इस धरती पर दुःख बीमारी क्लेश एक सीख जरूर है। यदि हम अपने पापों से मन नहीं फिराएगे तो इस धरती पर उसका ट्रेलर तो हम देख ही रहे हैं। प्राण छोड़ने के बाद नरक की पूरी कहानी जरूर देखने को मिलेगी। मित्रों आपस में मत लड़ो अगर किसी का धर्म किसी को पवित्र करता है उसे ईश्वरीय स्वाभाव प्रदान करता है और सबके साथ प्रेम बाटने का ही आचरण देता है तो तब यह वाकई धार्मिकता है। और अगर ऐसा नहीं तो एक बार प्रभु यीशु को अपने जीवन में मौका देकर देखो। जिंदिगी हमेशा के लिए बदल जायेगी। मगर ज़ोर ज़बरदस्ती से नहीं खुद की मर्ज़ी से। आप सबसे बात करके अच्छा लगा बस यही आशा है कि आप में कोई भी नरक न जाये। इसलिए प्रभु यीशु ने कहा है सब को जाकर मेरे विषय में बातओ। क्योंकि वह आपको प्यार करते हैं इसलिए प्रभु के खातिर और आपको बचाने के खातिर मसीह लोग भी प्रभु यीशु की तरह अपनी जान देने से भी नहीं डरते। क्योंकि अब तक बहोत से अवतार इस धरती पर सब दुष्टों का नाश करने आये हैं। मगर प्रभु यीशु सब अच्छओं और दुष्टों को माफ़ करके स्वर्ग ले जाना चाहते हैं। अब आप ही बताए कोन धार्मिक है और धर्म की रक्षा कर रहा है। वह जो धर्म के लिए मार रहा है ? या वह जो धर्म के लिए मर रहा है। बाकी आपकी मर्ज़ी प्रभु यीशु आपसे प्रेम करते हैं।

    1. यदि यीशु सभी बीमारियों को ठीक कर देता है तो इसाई देशो में इतने अस्पताल क्यों हिएँ ?
      वो आतंकवादियों के हाथों ईसाईयों को क्यों मरने देता है ?

  49. असतो मा सदगमय ॥ तमसो मा ज्योतिर्गमय ॥ मृत्योर्मामृतम् गमय ॥

    (हमको) असत्य से सत्य की ओर ले चलो । अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो ।। मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो ॥।

    यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्‍चाई और जीवन मैं ही हूं
    यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा.

    चुनाव आपका | आपको धर्म नहीं परमेश्वर की जरुरत है | आप उस एक सचे इश्वर की आराधना करियें |
    क्यों की बिनले में लिखा है की परमेश्वर आत्मा से उप्पसना करने वाले को धुनता है |

    1. lukaa 19 27 dekho khud maalum ho jaayega mere bandhu….. kisi aur jagah murkh banana jaha par log aapki baato ko saty maan le …bible naa parhaa ho…. yahan aapki daal nahi chalni waali. aur naa koi murkh banane waala…..

  50. पभु येशु हि जिवन है | पहले मै भि नहि जानता था |
    सच मे मेरे पयरे भैयो परभु येशु हि जिवन है |

    1. प्रभु येशु ही जीवन है तो अब तक येशु खुद ज़िंदा क्यों नहीं ? जो यह बोले की जो मुझे राजा ना माने उसे कत्ल कर दो वह प्रभु कहलाने के लायक कैसे है ??? थोड़ा जानकारी देना | आपके जवाब की प्रतीक्षा में |

      1. एक बाइबल की आयत पकड़ कर बैठे हो और उस आयत को भी गलत तरीके से समझ कर बैठ गए। उसे अच्छे से पढ़ो तब समझ आएगा।

  51. परभु येशु मसिह
    लोगो को जिनदगिय | अपनि महिमा दिखने के लिये करता है |
    कयो कि परभु येशु मसिह जिवित है |
    आपको सारे सवलो के जवब परभु येशु हि देसकते है |ऐस नहि कि येशु सिरफ़ मसिहियो कि सुनत है |परभु येशु आपको भि सुनता है |
    आपको भि जभि लगे आप परभु येशु मसिह को पुकरियेन आपको उततर जरुर मिलेनगा |

    परभु परमेशवर आपको अशिश दे |

    1. prabhu yeshu jinda hai to hame dikhai kyu nahi deta ??? yeshu samare sawalo kaa jawab kyu nahi deta ??? kai sawal aise hain jo yesu bhi jawab nahi de paayenge yadi ve jindaa hote… khair aapke hisaab se jinda hai to hame jawab kaa intjaar rahega dekhate hain yeshu kab hamare sawal kaa jawab dete hain

      1. Ye jo vachan aapne diye hai na wo aapne apne dil se diye jiska sahi anuwaad h hi nhi aap whats app kro mujhe or haa aapke ved m se yeshu k baare m btaunga

        1. ji kya vachan galat diye hain thoda batlana… ved me kahaa jesus hai yah bhi praman dena… ham intjaar karenge aapke jawab kaa

    1. parbhu kuch bhi galat kare use satya maan le swikaar kar lein kya mohtrama ??? thoda hame batlana… bible se shuru se hi charchaa karu to aapke bible ke pol khol ho jaayegi… majbur naa karen pol khol karne ko… dhanywaad

  52. हमारे पापों की सजा किसी और को मिले ये नियम तो किसी सच्चे ईश्वर का नहीं हो सकता।
    जो कर्म करेगा उसका फल उसे ही मिलेगा यह अटल सत्य है।
    यीशु बलिदान हुआ ये अलग बात है पर उसके ऐसा करने से सबके पाप धुल गए ऐसा कौन सा ईश्वर आके सबूत दिया है?
    यही तो लालच है कि हम पाप करें और यीशु इसकी सजा खुद सहकर हमे माफ करवा दें। ये तो हमारी गलती है। लोगों इस लालच में न फंसो। तुम्हारे कर्म का फल तुमको ही मिलेगा इसमे कोई दो राय नहीं।
    जो इस लालच में फंसा वो स्वार्थी ही कहलायेगा।
    जय श्री राम

    1. अधूरा ज्ञान अच्छा नहीं होता किसी ने ठीक ही कहा है . ईसा को झूठा कोई साबित नहीं कर सकता बाइबल को बाद में पढ़ना पहले महर्षि वेदवयास का भविष्य पुराण पढ़े।
      18 पुराणो में से एक भविष्य महापुराण में लिखा है
      (प्रतिसर्गपर्व तृतीय खंड )

      स्वेत वस्त्रएक्त्रम् ईश पुत्रम् कुँवारी गर्भसमम् ईसा मसीहा इतिस् मम नाम् प्रतिष्ठनम् :

      1. yadi aapko bhavishy puraan itna hi sahi lag raha hai to fir use kyu nahi apnaa lete… bible ko chhod do fir aap mere bhai…. aur isa aur mahamud ur mohmad kis rup me bhavishy puraan me pesh ki gayi hai yah hame naa batlaaye yadi dikhaa dunga to fir aap yeshu ko maanane se inkaar kar denge,,, aao saty sanatan vedik dharam ki sharan me…yah naa samjho hamare paas bhavishy puraan yaa 18 puraan nahi hai… kisi aur jagah murkh banana bhai jaan…. yaha aapki daal nahi galne waali…

        1. प्रिय भाई यह तो आप कहते हो भविष्यय पुराण में ऐसे पेश किया है वैसे पेश किया है आप लोग खुद ही स्वीकार नहीं करते हो इसमें क्या लिखा है? महर्षि वेदव्यास जी ने तो दर्शा दिया है की मोक्ष यीशु मसीह से ही है । आप लोग खुद ही नही मनना चाहते और मोहम्मद की कुरान में भी यही लिखा है बस कोई स्वीकार नही करना चाहता। और मैं उस यीशु को एक किसी शास्त्र की वजय से नही मानता बल्कि उसको पहचानता हूँ ।

          1. बंधुवर पुराण आर्ष साहित्य नहीं है इसलिए मान्य नहीं है

        2. tumhare kehanae se jo saccha masih hai vo bible nahi chodega…….aur ek bat yadi tum bible ki bhavishyavaniya dikha raha rahe ho to use mano..na……..aur tumge studi ki jarurat hai……pehle aap bhavishya purana..yajurved..samved .. athrv ved…riga ved .. sahi riti se padho….aur samho……..phir post ko dalo

          1. पुराण हम नहीं मानते और रही बात वेदों की तो तुम कहना क्या चाहते हो यह स्पष्ट करों और पूर्वाग्रह त्याग कर स्वाध्याय आप कीजिये आपको अधिक आवश्यकता प्रतीत हो रही है

  53. Are bhaiyo kyo ishwar ke naam pr lad rahe ho kyo apne bhagwan khuda parmeswar athwa dharm ko sabse bda aur sacha aur kisi dusre ke dharm kn neecha dikhane ki knsish karte ho jo log apne aap kn sacha dharmi ishwar ka bhakt mante hai jo log apne ishwar aur dharm ko sacha aur bda mante hai koi in logo se puche ki aaj tak apne kitne garibo ki madad ki hai kitne bhukon ke liye khud bhuka rahkar apna bhojan diya hai kitne jarurat mand logon ke liye apni salery di hai kitne garibon ki jhopdi me ujala kiya hai kitne nange logon ke badan pr kapde pahnaye hai kitne lachar logon ke liye ansu bahye hai agar ye log in sab ka jawab de den tab samjhna ki ye log sache iswar ke upasak hai yo kisi dharm athuwa ishwar ke bare mai mithya sawal krna knha ka iswar dharm hai 1 sawal aap logon ke liye hai 1 aadmi jo din rat subah saam ishwar ka bhajan kr ra hai aur wnhi paapi hai jhagdalu hai dusron ka hak chinne wala hai aur wnhi dusra admi nastik hai aur manusyo ki seva krta hai sab ke sukh dukh mai saath nibhata hai garibo ki madad karta hai to koun swarg jayega kishkn us param samrth wan parmatma ke darshan honge iswar ko janna hai to kisi ek garib ki sache dil se madad kar dena ishwar ke darsan avasya honge jay hind jay bharat om namah sivay mahadev

    1. मानव मात्र कि सेवा करना ही धर्म है
      यही भगवन मनु ने कहा है

  54. इम्मानुएल भाई ने सभी बातों को बहुत अच्छे से समझाया है और यदि कोई न समझे तो उससे बड़ा निर्बुद्धि कौन होगा? और मैंने भाई इम्मानुएल की बाते अभी पढ़ी जो बिलकुल स्पष्ट बताया। और भाई अमित रॉय आपके बार बार बोलने से और थोड़ा सा ज्ञान रखने कोई लाभ नहीं है । ओट बहुत शास्त्रो को Negative पढ़ने से कोई लाभ नहीं है जैसे और चिल्लते है अपने आप को सनातन केहते है सनातन केवल परमात्मा है और उसके अलावा कोई नही । और कोई मनुष्य और कोई धर्म तो बिलकुल भी सनातन नहीं हो सकता वरना हम ईश्वर को भी बेइज्जत करते हैं की हैम ईश्वर से बढे हैं।

  55. Bhaiyo aap sab log ese hi ankh band kar ke bharosa mat karna pahle bible pado fir socho ke kon sahi h kyu ki jo bible me likha h o 100% sahi h o ho bi raha h chaye bible pad ke dekho or bible par sarch kar rahe vegyanik ne bible ko sach bataya h es liye kisi ki bat ka bharosa mat karo or bible pad ke sach jano

    1. HAMANE TO ADHYAYAN KIYA HAI BANDHU
      KRIPYAT YE BATAYEN KI LEKH MEN AAPKO KIS TOPIC PAR AAPATTI HAI AUR USKA KARAN KYA HAI

  56. Bhai ek kaam kr rigved dhang se pad le dhang se bhi nhi to bas pad le…. Vedo mai jinka jikr hai or sacha parmeshwer kon h fir ake baat kriyo….

  57. हमारी संस्कृति और इतिहास की साथ बाहर से आने बाले लोगों कितनी छेड़ – छाठ की यह सब को पता है ।
    धर्म का बिज़्नेस भी उन्होंने हमें गुमराह कर चलाया। फिर धन लूटा ।
    देवदाशि प्रथा उन्होंने अपने एसोआराम के लिए हमारे मंदिर को आगे कर के चलायी ।
    इससे पहाले यही काम युरप में उन्हीं लोगों अपने लोगों को लूट कर चर्च बनाने और ऐसी प्रथा चलाने के लिए किया ।

    सनातन बनो , ह्यूमानिटी , नॉलेज को फ़ेलो करो ।

    इंसान को नहीं , यह एक बिज़्नेस है ।

    आज इंसान या विज्ञान काल को ( टाइम मशीन ) पे काम कर रहा है । दुनिया भर के बिज्ञानिक वेदों में लिखी साइयन्स के बारे शोध कर रहे है ।

    और आप लोगों बाबों या प्रीचर को फ़ेलो कर रहे हो जो संत भी नहीं थे ।

    हिंदुस्तान के संत हर तरह की साइयन्स के ज्ञाता थे और जनता के कल्याण के कार्यरत थे ।

    हिंडूइज़म में मिथॉलजी भी साइयन्स के तहत है ( रावण का काल को पकड़ना , वायु यान , मिसिलेस ……. विष्णु अवतारों को आप डारविन थिरी से मैच करो ) .।

    सोचो , आज बिज्ञान बाइबल या क़ुरान पड़ कर रीसर्च क्यों नहीं कर रहा । आज दुनिया भर के मैथमटिशन स. रमनुजन के लिखी रीसर्च पे काम कर रहे है । जीने देवी सकती थी और ३२ साल बो किया जहाँ अभी बिज्ञान पहुँचा ही नहीं ।

    माना कि बाबाओं / प्रीचर ने उस टाइम के हिसाब से कुछ अच्छी बातें बतायी तो उन को फ़ेलो करो और आगे बड़ी …. आज बादल चुका है । मुसीबत के समय जिस शिप / बोट पर आप ने नदी पार की या कराई । आप लोग तो किनारे पे बैठ कर उस की पूजा करने लगे ।

    वेद और गीता कहेती कर्म करो । सब कर्मों का फल यहीं मिलेगा । इसलिए ख़ुद सत्य मार्ग पे चल कर निर्णय करो

    1. डार्विन सिद्धांत गलत है और यह प्रमाणित भी हो चूका है

      रही बात कुरान की तो जबसे यह भारत में आई है यहाँ यौन शोषण की धटनाये बढ़ी है

  58. Hazrat Esha Alaihislaam, Ibrahim Alaislaam ke hi Khandaan se Talluk rakhte hain, Kyonki Hazrat Mariyam Hazrat Ibrahim Alaihisslaam ke khandaan se thi,
    Arab Culture me Betiyo ko bhi khandaani Izzat di zati hai, Jabki others cultures me daughters ko “Praaye ghar ki”(sasural se wasta) maante hain,
    Aur gyaan arjit kriye mister,

    Sabhi Dharamo ka samman kariye,

    apne aapko shidh karne ke liye kisi ki burai mat kariye, balki apne achchai ko ujagar kariye, (zabardasti wali jhuti gyaan pel kar kisi ki burai mat kariye).

    Kisi ko geeta me bhagwan na mila,
    Kisi ko kuran me imaan na mila,
    Us bande ko rab ya iswar kya milega….
    Jisko insan me insaan na mila.

    Sachcha insan logo ko apni achchai btata hai,
    Kisi burai karne wala insan Kabhi achha nahi ho sakta,

    Vichar badlo mai, mai to kehta hun Aiena badlo, tumeh kuraan me geeta ke updesh milege,
    Geeta me kuraan ke Aayate.
    Bible me tumeh krishna ka roop milegi,
    Yadi nahi badle soch, to sirf failegi gandi raayte.

    1. यह बड़ी बाते सुनने पढने में बहुत अच्छी लगती है परन्तु धरातल पर इस्लाम की वास्तविकता किसी से छुपी नहीं और रही बात “पराये घर की” तो तुम्हारी गलतफहमी है हमारे यहाँ लड़कियों को दोहिति कहा जाता है यानी दो घरों का हित रखने वाली, यानी सबसे अधिक और उच्चा स्थान नारी को दिया जाता है न की उसकी स्वतन्त्रता को छीन कर बुर्के में रखा जाता है

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