आचार्य्रु रुप प्रभु से हम सुमति पावे

ओउम आचार्य्रु रुप प्रभु से हम सुमति पावे डा. अशोक आर्य हमारा यह प्रभु ,हमारा आचार्य भी है । जिस गुरुकुल में हम ने शिक्षा प्राप्त करना है , उस गुरुकुल के आचार्य परम पिता परमात्मा के हम अन्त:वासी है । अन्त:वासी होने के नाते हम पिता के समीप रहते हुए उत्तम सुमति पाने का लाभार्थी हों । इस भावना को मन्त्र इस प्रकार कह रहा है : – अथा ते अन्तमानां विद्याम सुमतीनाम। मा नोअतिक्य आ गहि ॥ ऋग्वेद १.४.३॥ विगत मन्त्र में पिता ने जीव को निर्देश दिया था कि हे जीव ! तुं अपने जीवन को यज्ञात्मक बना, जीवन में सोम पान कर तथा दान करने में ही अनन्द अनुभव कर । इस मन्त्र में प्रभु के … Continue reading आचार्य्रु रुप प्रभु से हम सुमति पावे

कुरान समीक्षा : अल्लाह की मदद करो

अल्लाह की मदद करो खुदा में इतनी कमजोरी क्यों है कि वह इन्सान की मदद मांगने पर भी मजबूर हो गया? बतावें कि खुदा की किस बात में मदद की जावे? देखिये कुरान में कहा गया है कि- अ्ल्लजी-न उख्रिजू मिन् दिया…………।। (कुरान मजीद पारा १७ सूरा हज्ज रूकू ५ आयत ४०) … और जो अल्लाह की मदद करेगा अल्लाह अवश्य उसकी मदद करेगा। समीक्षा कुरानी अल्लाह भी इन्सान की मदद का मौहताज रहता है यह कुरान ने जाहिर कर दिया है पर उसकी किस मुसीबत में हम लोग मदद करें यह नहीं खेला गया है। हर मुसलमान का बेचारे अरबी खुदा की मदद अवश्य करनी चाहिये, मुसीबत के दिन किसी पर हमेशा नहीं बने रहने और मदद करने का … Continue reading कुरान समीक्षा : अल्लाह की मदद करो

प्रभु दर्शन के लिए सात्विक भोजन आवश्यक

ओ३म प्रभु दर्शन के लिए सात्विक भोजन आवश्यक डा. अशोक आर्य हमारी सदा ही यह इच्छा रही है कि हम उस पिता को , उस प्रभु को प्राप्त करें किन्तु कैसे ? इस निमित्त हम अपनी अन्दर की वासनाओं का नाश करें । वासना विनाश के लिए अपने अन्दर ग्यान का दीप जलाएं । ग्यान का दीप जलाने के लिए सात्विक अन्न का प्रयोग करना आवश्यक है । जब मन वासना रहित होगा , अन्दर ग्यान का प्रकाश होगा तथा जब यह शरीर सात्विक भोजन पर निर्भर होगा तो हम प्रभु को पाने में सफ़ल होंगे । इस तथ्य पर ही यह मन्त्र इस प्रकार प्रकाश डाल रहा है :- इन्द्रा याहि तुतुजान उप ब्रह्माणि हरिव: । सुते दधिष्व नश्चन: … Continue reading प्रभु दर्शन के लिए सात्विक भोजन आवश्यक

कुरान समीक्षा : आसमान का लपेटना तथा खुदा को सिज्दा करना

आसमान का लपेटना तथा खुदा को सिज्दा करना जिस वस्तु का कोई अस्तित्व ही नहीं है उसे कैसे लपेटा जा सकता है स्पष्ट करें? देखिये कुरान में कहा गया है कि- अ-लम् त-र अन्नल्लाह यस्जुदु…………।। (कुरान मजीद पारा १७ सूरा हज्ज रूकू १ आयत १८) जिस दिन हम आसमान को इस तरह लपेटेंगे जैसे तुमान में कागज लपेटते हैं। समीक्षा शून्य आकाश को कागज की तरह लपेटने की बात कहने वाला खुदा और और कुरान बनाने वाले विद्या की योग्यता कितनी थी? यह सभी समझ सकते हैं तथा सूरज, चाँद आदि सब खुदा को सिज्दा करते हैं? इसमें कितनी सच्चाई है? यह सर्व विदित है।

प्रभु प्राप्ति के लिए विद्वान व संयमी से ज्ञान आवश्यक

ओ३म प्रभु प्राप्ति के लिए विद्वान व संयमी से ज्ञान आवश्यक डा अशोक आर्य मानव सदा ही प्रभु की शरण में रहना चाहता है किन्तु वह उपाय नहीं करता जो , प्रभू शरण पाने के अभिलाषी के लिए आवश्यक होते हैं । यदि हम प्रभु की शरण में रहना चाहते हैं तो हमारी प्रत्यएक चेष्टा , प्रत्येक यत्न बुद्धि को पाने के उद्देश्य से होना चाहिये । दूसरे हम सदा ग्यानी ,विद्वान लोगों से प्रेरणा लेते रहें तथा हम सदा उन लोगों के समीप रहें , जो विद्वान हों , संयमी हों , ज्ञानी हों । एसे लोगों के समीप रहते हुये हम उनसे ज्ञान प्राप्त करते रहें । इस बात को ही यह मन्त्र अपने उपदेश में हमें बता … Continue reading प्रभु प्राप्ति के लिए विद्वान व संयमी से ज्ञान आवश्यक

कुरान समीक्षा : खुदा ने शर्मगाह (योनि) तके रूह फूँक दी

खुदा ने शर्मगाह (योनि) तके रूह फूँक दी पवित्रात्मा क्वारी लड़की मरियम की फुर्ज (शर्मगाह) में खुदा ने रूह फूंक कर उसकी पवित्रता भंग करके पाप क्यों किया किया? रूह उसकी नाक में होकर खुदा ने क्यों नहीं फूंकी? फूंक से गर्भ रहना भी साबित करें? देखिये कुरान में कहा गया है कि- वल्लती अह-स-नत् फर्जहा………..।। (कुरान मजीद पारा १७ सूरा अम्बिया रूकू ६ आयत ११) और वह बीबी (मरियम) जिसने अपनी शर्मगाह की यानी सोहबत की जगह की हिफाजत की तो हमने उसमें हाथ डालकर अपनी रूह फूँक दी और हमने उसको उसके बेटे (ईसा) को दूनियाँ जहान के लोगों के लिये निशानी करार दिया। समीक्षा किसी भी ब्रह्यचारिणी पवित्र क्वारी लड़की की शर्मगाह (गुप्तेन्द्रिय) में फूंक मार कर … Continue reading कुरान समीक्षा : खुदा ने शर्मगाह (योनि) तके रूह फूँक दी

सोम रक्षण स परमात्मा का साक्षात्कार

ओ३म सोम रक्षण स परमात्मा का साक्षात्कार डा. अशोक आर्य – सोम की रक्षा से हमारी बुद्धि सूक्षम बनती है , जो गहणतम ज्ञान को भी सरलता से ग्रहण कर सकती है । सोम की रक्षा से ही हमारे हृदय पवित्र होते हैं तथा सोम की रक्षा से ही परमपिता परमात्मा के दर्शन होते हैं तथा उसके प्रकाश का, उसके ज्ञान का साक्षात्कार होता है । इस बात का उपदेश यह मन्त्र इस प्रकार कर रहा है : – इन्द्रा याहि चित्रभानो सुता इमे त्वायव: । अपवीभिस्तना पूतास: ॥ ऋग्वेद १.३.४ ॥ इस मन्त्र में तीन बातों पर प्रकाश डाला गया है : – १. विगत मन्त्र में जिस प्राणसाधना को प्रभु को पाने का मार्ग बताया गया था , … Continue reading सोम रक्षण स परमात्मा का साक्षात्कार

आर्य मंतव्य (कृण्वन्तो विश्वम आर्यम)