वह प्रभु महान सुपार तथा यग्यशीलों के मित्र है

वह प्रभु महान सुपार तथा यग्यशीलों के मित्र है डा. अशोक आर्य रिग्वेद के प्रथम मण्डल ए सूक्त चार के समबन्ध मेम प[रकाश डालते हुए बताया गया है कि प्रभु सरुपक्रत्नु है । इस प्रभुकी प्रार्थना करते हुए उपदेश किया गया है कि हम सदा यग्योइं को करने वाले बनें , जीवन भर सोम की रक्शा करते रहेम , हम दान देने में आनन्द आ अनुभव करेम , सदा ग्यानियों से ग्यान्प्राप्त करते रहेम , किसी की निन्दा कदापि न करेम , व्यर्थ ए कामों में कभी अपना समय नष्ट न करेम , सदा प्रभु की चर्चा में ही अपना समय लगावें क्योंकि वह प्रभु महान , सुपार तथा यग्य्शीलों के मित्र होते हैं । इन सब बातों का इस सूक्त … Continue reading वह प्रभु महान सुपार तथा यग्यशीलों के मित्र है

कुरान समीक्षा : खुदा ने हलाल को हराम कर दिया

खुदा ने हलाल को हराम कर दिया कुरान पारा २६ सूरे काफ रूकू २ आयत २८ मेंख्खुदा ने घोषण की है ‘‘मेरे यहाँ बात नहीं बदली जाती है।’’ और इस स्थल पर खुदा ने अपना हुक्म बदल डाला था इससे खुदा का झूंठा होना साबित नहीं होता है। खुदा जवान का पाबन्द क्यों नहीं था? देखिये कुरान में कहा गया है कि- फ बि.. जुल्मिम् मिनल्लजी………।। (कुरान मजीद पारा ६ सूरा निसा रूकू २२ आयत १६०) अन्त में यहूदियों की शरारत की वजह से हमने पाक चीजें उनके लिये हलाल थीं उन पर हराम कर दीं और इस वजह से कि वे अक्सर खुदा की राह से लोगों को रोकते थे। समीक्षा अरबी खुदा अपनी बात का भी पक्का नहीं … Continue reading कुरान समीक्षा : खुदा ने हलाल को हराम कर दिया

क्या किसी माता के गर्भस्थ शिशु के शारीरिक अंग में उत्पन्न दोष जैसे- दिल में छेद हो जाना, अन्धता आदि माता-पिता के शारीरिक दोष का परिणाम है अथवा माता, चिकित्सक आदि किसी की त्रुटि का परिणाम है अथवा दोनों है अथवा शिशु के पूर्व जन्म मे किये गये किसी पाप का फल है?

क्या किसी माता के गर्भस्थ शिशु के  शारीरिक अंग में उत्पन्न दोष जैसे- दिल में छेद हो जाना, अन्धता आदि माता-पिता के शारीरिक दोष का परिणाम है अथवा माता, चिकित्सक आदि किसी की त्रुटि का परिणाम है अथवा दोनों है अथवा शिशु के पूर्व जन्म मे किये गये किसी पाप का फल है? समाधान-  इस दूसरे प्रश्न का उत्तर भी उसी प्रकार लिखते हैं, गर्भस्थ शिशु के शारीरिक अंग उत्पन्न दोष का कारण तीनों हो सकते हैं- माता-पिता, चिकित्सक वा बच्चे का कर्म। इन तीनों में उत्पन्न हुए दोष का मुखय कारण उस बच्चे के कर्म हैं। अपने कर्मों के कारण वह जीवात्मा ऐसे दोषयुक्त शरीर को प्राप्त होता है। जन्मान्धता, जन्म से मूक, किसी अन्य अंग में विकार, ये … Continue reading क्या किसी माता के गर्भस्थ शिशु के शारीरिक अंग में उत्पन्न दोष जैसे- दिल में छेद हो जाना, अन्धता आदि माता-पिता के शारीरिक दोष का परिणाम है अथवा माता, चिकित्सक आदि किसी की त्रुटि का परिणाम है अथवा दोनों है अथवा शिशु के पूर्व जन्म मे किये गये किसी पाप का फल है?

भारतीय वर्णव्यवस्था

भारतीय वर्णव्यवस्था प्रो. ज्ञानचन्द्र रावल, यज्ञदेव….. मैकाइबर और कूल आदि समाजशास्त्रियों ने अपने अध्ययन के आधर पर बताया है कि सामाजिक वर्ग विश्व के सभी समाज में किसी न किसी रूप में अवश्य पाये जाते हैं। कहीं पर सामाजिक वर्गों का निर्माण जन्म के आधार पर तो कहीं पर धन के आधर पर। इतना निश्चत है कि सामाजिक वर्ग प्रत्येक समाज में अवश्यमेव पाया जाता है। मनुष्य की प्रवृत्तियों तथा व्यवसायों के आधार पर समाज का विभाजन संसार के सभी देशों में पाया जाता है। इग्लैण्ड के प्रसिद्ध् विद्वान् एच० जी० वैल्स के अनुसार-‘‘मनोवैज्ञानिक प्रवृतियों के आधार पर समाज-विभाजन से समाज का श्रेष्ठ विकास होता है तथा उसकी शक्ति बढ़ती है।’’ किग्सले डविस और मूर के अनुसार-‘‘ समाज अपनी स्थिरता … Continue reading भारतीय वर्णव्यवस्था

कुरान समीक्षा : ईसा को सूली नहीं लगी थी

ईसा को सूली नहीं लगी थी (इन्जील का खण्डन) खुदा ने अपनी किताब ‘‘इन्जील’’ का खण्डन करके गुनाह किया है या अपनी शान बढ़ाई है? यह परस्पर विरोध दोनों किताबों में क्यों है? देखिये कुरान में कहा गया है कि- व कौलिहिम् इन्ना क- तल्नल्-………….।। (कुरान मजीद पारा ६ सूरा निसा रूकू २२ आयत १५७) …..और उनके इस कहने की वजह से कि हमने मरियम के बेटे ईसा-मसीह को जो रसूल थे कत्ल कर डाला, और न तो उन्होंने उनको कत्ल किया और न उनको सूली पर ही चढ़ाया, मगर उनको ऐसा ही मालूम हुआ और वे लोग इस बारे में मतभेद डालते हैं, तो इस मामले में शक में पड़े हैं। उनको इस बात की खबर तो है नहीं … Continue reading कुरान समीक्षा : ईसा को सूली नहीं लगी थी

किसी व्यक्ति का दुर्घटना में अपंग हो जाना मात्र संयोग है अथवा किसी की गलती का परिणाम है अथवा व्यक्ति के पूर्व जन्म के किसी पाप का फल है?

– आचार्य सोमदेव जिज्ञासा – आचार्य जी सादर नमस्ते। विनम्र निवेदन यह है कि जिज्ञासा स्वरूप निम्न सैद्धान्तिक प्रश्न हैं। कृपया लेख पर दृष्टिपात करके निम्न प्रश्नों का समाधान दें। मैं आपका आभारी हूँगा। किसी व्यक्ति का दुर्घटना में अपंग हो जाना मात्र संयोग है अथवा किसी की गलती का परिणाम है अथवा व्यक्ति के पूर्व जन्म के किसी पाप का फल है? समाधान-(क)वैदिक सिद्धान्त के स्पष्ट समझने से ही मनुष्य के ज्ञान की वृद्धि हो सकती है, इससे भिन्न से नहीं। ठीक-ठीक वैदिक सिद्धान्त समझ लेने पर व्यक्ति का जीवन व्यवहार उत्तम होता चला जाता है, जिससे व्यक्ति सन्तोष व शान्ति की अनुभूति करता है। विशुद्ध वैदिक सिद्धान्त हमारे सामने महर्षि दयानन्द ने रखे हैं, जिनका निर्वहन आर्य समाज … Continue reading किसी व्यक्ति का दुर्घटना में अपंग हो जाना मात्र संयोग है अथवा किसी की गलती का परिणाम है अथवा व्यक्ति के पूर्व जन्म के किसी पाप का फल है?

वर्णमीमांसा

वर्णमीमांसा ब्र. यशदेव आर्य….. इस आर्यावर्त्त देवभूमि में रहने वाले सहृदय- नागरिकों एवं विभिन्न धर्मावलम्बियों को यहाँ की प्राचीनतम संस्कृति धार्मिक भावना एवं कर्तव्यों को जान लेना अत्यन्तावश्यक है। क्योंकि प्राचीन समय में वर्णों एवं आश्रमों का वर्गीकरण जिस प्रकार से यथास्थिति को जानकर किया जाता था वैसा आज देखने को नहीं मिलता। अब तो केवल जन्मना वर्णवाद एवं धर्मान्धता का कुप्रचार अधिक दिखाई व सुनाई देता है। वर्तमान काल में आश्रमी जीवन की दुर्गति वर्णव्यवस्था के नाम पर पापाचार सर्वत्र विस्तृत हुआ है, क्योंकि अब की वर्ण व्यवस्था प्राचीन वर्णव्यवस्था से एकदम भिन्न है। इसके सुस्पष्ट प्रमाण धर्मशास्त्रों एवं विभिन्न स्मृतियों में प्रत्यक्ष देखने को मिलते हैं यथा आपस्तम्ब धर्मसूत्र में धर्मचर्य्यया जघन्यो वर्णः पूर्वं पूर्वं वर्णमापद्यते जातिपरिवृतौ ।१.५.१० … Continue reading वर्णमीमांसा

आर्य मंतव्य (कृण्वन्तो विश्वम आर्यम)