श्री महात्मा नारायण स्वामीजी द्वारा लिखित एक घटना

श्री महात्मा नारायण स्वामीजी द्वारा लिखित एक घटना 1935 ई0 में ज़्वेटा (बलोचिस्तान) में एक भीषण भूकज़्प आया था। इसमें सहस्रों व्यक्ति मर गये थे। इस भूकज़्प से कुछ समय पूर्व ज़्वेटा से एक 23 वर्षीय देवी ने श्री महात्मा नारायण स्वामीजी को एक पत्र लिखा। उस देवी को किसी ज्योतिषी ने यह बतलाया था कि वह एक वर्ष के भीतर मर जाएगी। उस देवी ने महात्माजी से यह पूछा था कि ज़्या सचमुच वह एक वर्ष के भीतर मर जाएगी। पत्र पढ़कर महात्माजी के अन्तःकरण में यह ईश्वरीय प्रेरणा हुई कि उसे लिख दूं कि वह नहीं मरेगी। महात्माजी ने दिल्ली से उसे लिख दिया कि वह चिन्ता न करे। भूकज़्प से पूर्व महात्माजी ज़्वेटा गये। वह देवी अपने … Continue reading श्री महात्मा नारायण स्वामीजी द्वारा लिखित एक घटना

hadees : SEXUAL INTERCOURSE ALLOWED DURING RAMZAN

SEXUAL INTERCOURSE ALLOWED DURING RAMZAN The Prophet softens the rigor of the fast somewhat by proclaiming that �eating and drinking in forgetfulness does not break the fast� (2575).  Kissing and embracing too are permissible (2436-2450).  �Aisha, Hafsa, and Salama, Muhammad�s wives, all report that the Prophet used to kiss them and embrace them while fasting.  �Aisha narrates: �The Messenger of Allah kissed one of his wives while he was fasting, and then she [�Aisha] smiled� (2436). The translator elucidates: �It is one of the great favours of Allah upon humanity that He has guided us in every sector of our life through his Prophet Muhammad.  Prior to Islam, the man observing fast separated himself completely from his wives.  Islam did … Continue reading hadees : SEXUAL INTERCOURSE ALLOWED DURING RAMZAN

हदीस : गम्भीरता पक्ष

गम्भीरता पक्ष हदीस-संग्रह के लिए वह असाधारण बात भले ही हो, फिर भी कुछ अहादीसों (2197-2204) में दान का गम्भीरता पक्ष भी उल्लिखित है। जो लोग धन नहीं दे सकते, वे निष्ठा और नेक कामों पर दान दिया करें। ”दो आदमियों के बीच न्यायनिर्णय देना भी एक सदक़ा है। और किसी आदमी को उसकी सवारी पर चढ़ने में मदद देना अथवा सवारी पर बोझ लादने में किसी की मदद करना एक सदका है। और अच्छी बात कहना एक सद़का है। और प्रार्थना की तरफ उठाया गया हर कदम एक सद़का है। और रास्ते से हानिकर चीजें हटा देना एक सदका है“ (2204)।   ऐसी ही सुन्दर एवं समझबूझ से भरी कुछ अन्य हदीस भी हैं। ईश्वर जिनकी रक्षा करता है, … Continue reading हदीस : गम्भीरता पक्ष

hadees : FASTS

FASTS There are many kinds of fasts in Islam, but the fast during the month of RamzAn (Ramadan) is considered the most important.  Enjoined in the QurAn, it is compulsory.  �When there comes the month of RamzAn, the gates of mercy are opened, and the gates of Hell are locked and the devils are chained� (2361). Fasting in the Muslim tradition is rather different from fasting in many other religious traditions.  In Islam, there is no uninterrupted fasting (saum wisal), because Muhammad forbade this practice (2426-2435) �out of mercy� for his Companions (2435).  During fasts eating is prohibited in the daytime but permitted at night.  This has its disciplinary role, but nonetheless there is an attempt to make things easy.  … Continue reading hadees : FASTS

हदीस : दान अपने घर से शुरू हो

दान अपने घर से शुरू हो मुहम्मद के पहले अरब लोगों में बहुत दानशीलता थी। किन्तु कर के रूप में नहीं। मसलन, उन दिनों अरब अपने ऊंटों को हर छठे या सातवें दिन किसी पोखर के किनारे ले जाते थे, वहां उन्हें दुहते थे और दूध जरूरतमन्दों में बांट देते थे (टि0 1329)।   इस उदारता की मुहम्मद ने सराहना की पर उन्होंने सिखाया कि दान अपने घर से शुरू होना चाहिए। यह मुद्दा अहादीस (2183-2195) में मिलता है। जिस क्रम से व्यक्ति को अपनी सम्पदा का व्यय करना चाहिए, वह इस प्रकार है-सर्वप्रथम अपने आप पर, फिर अपनी बीबी और बच्चों पर, फिर रिश्तेदारों और दोस्तों पर, और फिर नेक कामों पर। इसे बुद्धिमत्ता की बात ही कहा जाएगा। … Continue reading हदीस : दान अपने घर से शुरू हो

लोग ज़्या कहेंगे?

लोग ज़्या कहेंगे? 1967 ई0 की बात होगी। बिहार में भयङ्कर दुष्काल पड़ा। देशभर से अकाल-पीड़ितों की सहायता के लिए अन्न भेजा गया। उन दिनों हम परिवार सहित दयानन्द मठ दीनानगर की यात्रा को गये। एक दिन श्री स्वामी सर्वानन्दजी महाराज ने कहा, ‘‘आप पठानकोट आर्यसमाज के सत्संग में हो आवें और केरल में वैदिक धर्म के प्रचार व शुद्धि के लिए उनसे सहयोग करने को कहें।’’ उस वर्ष मठ की भूमि में आलू की खेती अच्छी हुई थी। मोटे व अच्छे आलू तो काम में लाये गये। छोटे रसोई के पास पड़े थे। हम लौटकर आये तो पता चला कि मठ में कुछ ब्रह्मचारियों ने स्वामी श्री सर्वानन्दजी से कहा-‘‘आलुओं का यह ढेर बाहर फेंक दें? इसे ज़्या करना … Continue reading लोग ज़्या कहेंगे?

आर्य मंतव्य (कृण्वन्तो विश्वम आर्यम)