कुरान समीक्षा : रोजों में सम्भोग करना जायज किया गया

रोजों में सम्भोग करना जायज किया गया खुदा ने राजों में औरतों से विषय भोग करने पर पहले पाबन्दी क्यों लगाई थी जो उसे बाद में तोड़नी पड़ी? क्या इससे खुदा की अज्ञानता प्रकट नहीं होती है? देखिये कुरान में कहा गया है कि- उहिल-ल लकुम् लैल- तस्सियामिर्र…….।। (कुरान मजीद पारा २ सूरा बकर रूकू २३ आयत १८७) (मुसलमानों) रोजो की रातों में अपनी बीबियों के पास जाना तुम्हारे लिये जायज कर दिया गया है, वह तुम्हारी पोशाक हैं और तुम उनकी पोशाक हो। बस! अब उनके साथ रोजों की रातों में भी हमबिस्तर हो सकते हो। अर्थात् सम्भोग कर सकते हो। समीक्षा इस पर सही बुखारी भाग १ सफा ३०१ हदीस ९११ में निम्न प्रकार वर्णन आता है- वरायः … Continue reading कुरान समीक्षा : रोजों में सम्भोग करना जायज किया गया

मूर्तिपूजा और ऋषि दयानन्द

मूर्तिपूजा और ऋषि दयानन्द पिछले अंक का शेष भाग….. पुराभवं पुरा भवा पुराभवश्च इति पुराणं पुराणी पुराणः। 2. वहाँ ब्राह्मण पुस्तक जो शतपथादिक हैं, उनका ही नाम पुराण है तथा शंकराचार्य जी ने भी शारीरक भाष्य में और उपनिषद् भाष्य में ब्राह्मण और ब्रह्म विद्या का ही पुराण शबद से अर्थ ग्रहण किया है। 3. तीसरा देवालय और चौथा देव पूजा शबद है। देवालय, देवायतन, देवागार तथा देव मन्दिर इत्यादिक सब नाम यज्ञशालाओं के ही हैं। 4. इससे परमेश्वर और वेदों के मन्त्र उनको ही देव और देवता मानना उचित है। अन्य कोई नहीं। (-स्वामी दयानन्द, प्रतिमा पूजन विचार, पृ. 483-485, दयानन्द ग्रन्थमाला) ऋषि दयानन्द के जीवन में मूर्तिपूजा की अवैदिकता और अनौचित्य पर वाद-संवाद, शास्त्रार्थ, भाषण, चर्चा, परिचर्चा तो … Continue reading मूर्तिपूजा और ऋषि दयानन्द

क्या संविधान से ऊपर है सुप्रीम कोर्ट,

क्या संविधान से ऊपर है सुप्रीम कोर्ट, माननीय सुप्रीम कोर्ट?? काहे का माननीय, सुप्रीम कोर्ट की इतना साहस की वो हिन्दुओ एक धार्मिक मामलो में हस्तक्षेप करे संविधान की धारा 25 और 25 ए साफ़ साफ कहती है की सभी धर्मो को अपनी अपनी मान्यताएं मानने का अधिकार है, जैसे मुसलमान को मुहर्रम, सिख तो गुरु उत्सव, ईसाईयों को क्रिसमस का त्यौहार मनाने का अधिकार है वैसे ही हिन्दुओ को भी उनके अपने अधिकार मनाने का पूर्ण अधिकार है, धारा 25 ए के अनुसार इन अधिकारों की रक्षा और इन्हें अमल में लाने का दायित्व न केवल राज्य वर्ण केंद्र सरकार का भी है पर सुप्रीम कोर्ट के मामले में राज्य के साथ केंद्र सरकार भी मुंह में दही जमा … Continue reading क्या संविधान से ऊपर है सुप्रीम कोर्ट,

कुरान समीक्षा : रोजा रखना जरूरी है

रोजा रखना जरूरी है दिन में न खाना और रात में खना इस रिवाज को स्वास्थ्य विज्ञान के आधार पर सही साबित करें। देखिये कुरान में कहा गया है कि- या अय्युहल्लजी-न आमनू कुति-ब…….।। (कुरान मजीद पारा २ सूरा बकर रूकू २३ आयत १८३) ईमान वालों। जिस तरह तुमसे पहले किताब वालों पर रोजा रखना फर्ज (कत्र्तव्य) था। तुम पर भी फर्ज किया गया, ताकि तुम पापों से बचो। समीक्षा रोजा रखने की आज्ञा तौरेत, जबूर और इन्जील नाम की किसी भी पुरानी किताब में नहीं दी गई, यदि कोई मुसलमान मौलवी दिखा सके तो इनाम मिलेगा। इसके अलावा रोजो में दिन भर न खाना और रात में खाना स्वास्थ्य विज्ञान की दृष्टि से भी गलत है। भोजन सूर्य के … Continue reading कुरान समीक्षा : रोजा रखना जरूरी है

कासगंज समाज का ऋणी हूँ :– राजेन्द्र जिज्ञासु

कासगंज समाज का ऋणी हूँ :- आर्यसमाज के एक ऐतिहासिक व श्रेष्ठ पत्र ‘आर्य समाचार’ उर्दू मासिक मेरठ का कोई एक अंक शोध की चिन्ता में घुलने वाले किसी व्यक्ति ने कभी देखा नहीं। इसके बिना कोई भी आर्यसमाज के साहित्य व इतिहास से क्या न्याय करेगा? श्रीराम शर्मा से टक्कर लेते समय मैं घूम-घूम कर इसका सबसे महत्त्वपूर्ण अंक कहीं से खोज लाया। कुछ और भी अंक कहीं से मिल गये। तबसे स्वतः प्रेरणा से इसकी फाईलों की खोज में दूरस्थ नगरों, ग्रामों व कस्बों में गया। कुछ-कुछ सफलता मिलती गई। श्री यशपाल जी, श्री सत्येन्द्र सिंह जी व बुढाना द्वार, आर्य समाज मेरठ के समाज के मन्त्री जी की कृपा व सूझ से कई अंक पाकर मैं तृप्त … Continue reading कासगंज समाज का ऋणी हूँ :– राजेन्द्र जिज्ञासु

ये पिंजरे की नारी

“इस्लाम में नारी” यह शब्द सुनते ही चेहरे पर चिंता की लकीर खींच जाती है और नरक के विचार आने लगते है, “पिंजरे में कैद पंछी” और “इस्लाम में नारी” लगता है ये दोनों वाक्य एक दूजे के पर्याय है महिला आयोग हो या मानवाधिकार आयोग या so called समाजसुधारक आमिर खान हो इन्हें कभी भी इस्लाम की कुरीतियों पर मुहं खोलना याद नहीं आता है परन्तु देखा जाए तो विश्व में यदि कोई मत सम्प्रदाय है जिस पर इन लोगों को वास्तव में मुहं खोलना चाहिए तो वो है “इस्लाम” खैर इस विषय पर जितना लिखते जायेंगे उतना कम लगेगा क्यूंकि इस्लाम में नारी केवल और केवल भोग विलास का साधन है जिस प्रकार हम सनातनी कर्म की प्रधानता … Continue reading ये पिंजरे की नारी

हे प्रभु हमें स्वस्थ्य व बलकारक भोजन दो

ओउम हे प्रभु हमें स्वस्थ्य व बलकारक भोजन दो डा. अशोक आर्य भोजन मानव की ही नहीं प्रत्येक प्राणी की एक एसी आवश्यकता है , जिसके बिना जीवन ही sambhav नहीं | इस लिए प्रत्येक प्राणी का प्रयास होता है कि उसे उतम भोजन प्राप्त हो | एसा भोजन वह उपभोग में लावे कि जिससे उस की न केवल क्षुधा की ही पूर्ति हो अपितु उसका स्वास्थ्य भी उतम हो तथा शरीर में बल भी आवे | अत्यंत स्वादिष्ट ही नहीं अत्यंत पौष्टिक भोजन करने की अभिलाषा प्रत्येक प्राणी अपने में संजोये रहता है | इस समबन्ध में वेद ने भी हमें बड़े सुन्दर शब्दों में प्रेरणा दी है | यजुर्वेद के अध्याय ११ के मन्त्र संख्या ८३ में इस … Continue reading हे प्रभु हमें स्वस्थ्य व बलकारक भोजन दो

आर्य मंतव्य (कृण्वन्तो विश्वम आर्यम)