कुरान समीक्षा : खुदा जमीन पर उतर कर आया

खुदा जमीन पर उतर कर आया खुदा पहले शायद पलंग पर लेटा होगा, फिर उठकर बैठ गया फिर ऊपर से उतर कर नीचे जमीन पर आया। इससे क्या यह स्पष्ट नहीं है कि वह खुदा हाजिर नाजिर अर्थात् सर्वव्यापक नहीं है। वह आसमान में रहता है और सैर करने कभी-कभी जमीन पर चला आता है और फिर वापस चला जाता है? ज् मिर्रतिन फस्तवा………।। (कुरान मजीद पारा २७ सूरा नज्म रूकू १ आयत ६) (खुदा) जो जोरावर है। फिर सीधा बैठा। व हु-व बिल्-उफुकिल्-अअ्……….।। (कुरान मजीद पारा २७ सूरा नज्म रूकू १ आयत ७) और वह आसमान ऊँचे किनारे पर था। सुम्-म दना फ-त-दल्ला……….।। (कुरान मजीद पारा २७ सूरा नज्म रूकू १ आयत ८) फिर वह नजदीक हुआ और करीब … Continue reading कुरान समीक्षा : खुदा जमीन पर उतर कर आया

सृष्टि-प्रसंग में विरोध कहने वालों का समाधान: पण्डित भीमसेन शर्मा

सृष्टिप्रक्रिया में कोई वेदादि ग्रन्थों का परस्पर विरोध कहते हैं उसकी निवृत्ति के लिये सब वचनों का यहां संग्रह तो हो नहीं सकता। और वैसा करने से लेख भी अत्यन्त बढ़ जाना सम्भव है, ऐसा विचार के संक्षेप से लिखते हैं- वेदादिग्रन्थों में कहीं-कहीं सृष्टि आदि विषयों का वर्णन शब्दों के भेद से किया गया है अर्थात् जिस विषय के लिये एक पुस्तक में जैसे शब्द हैं उससे भिन्न द्वितीय पुस्तक में लिखे गये, तब किन्हीं को भ्रम हो जाता है कि इसमें विरोध है। और सब पुस्तकों का लेख एक प्रकार के शब्दों में हो नहीं सकता क्योंकि देश, काल, वस्तु भेद से भेद हो जाता है और अनेक कर्त्ताओं के होने से भी उन-उन की शैली अलग-अलग होती … Continue reading सृष्टि-प्रसंग में विरोध कहने वालों का समाधान: पण्डित भीमसेन शर्मा

सृष्टि-प्रकरण का सामान्य विचार :पण्डित भीमसेन शर्मा

अब क्रमप्राप्त छठे सृष्टि प्रकरण की आलोचना करनी चाहिये। इस प्रकरण में कई अंश विचारने योग्य हैं, जिनमें पहला अंश यह है कि इस मानवधर्मशास्त्र में सृष्टि का वर्णन क्यों होना चाहिये ? क्योंकि इसका नाम धर्मशास्त्र है, सृष्टि का वर्णन करना कोई धर्म नहीं है। और यही बात अन्य महर्षियों ने मनु जी से पूछी सो इस मनुस्मृति के आरम्भ में द्वितीय श्लोक में ही लिखा है कि- ‘हे मनु जी! आप सब ब्राह्मणादि वर्णों और वर्णसटरों के धर्म कहने योग्य वा समर्थ हैं।’१ केवल इसी एक प्रश्न के ऊपर यह सब धर्मशास्त्र बना है अर्थात् यह मनुस्मृति इसी प्रश्न का उत्तररूप है, तो इसमें सृष्टि की उत्पत्ति कहने का काई प्रश्न भी नहीं, ह्लि र इस प्रथमाध्याय में … Continue reading सृष्टि-प्रकरण का सामान्य विचार :पण्डित भीमसेन शर्मा

कुरान समीक्षा : खुदा अपनी पूजा का भूखा है

खुदा अपनी पूजा का भूखा है अपनी पूजा का शौक खुदा को पैदा हुआ तो उसने सभी को अपना चेला क्यों नहीं बनाया और क्यों लोगों को स्वयं गुमराह किया? व क्यों लोगों के पीछे शैतान लगाये ताकि वे गुमराह होवें । अपनी पूजा के शौक से खुदा को क्या लाभ पहुंचता था यह बताया जावे? देखिये कुरान में कहा गया है कि- व माख-लक्तुल्जि-न वल्इन………।। (कुरान मजीद पारा २७ सूरा जारियात रूकू ३ आयत ५६) और मैंने जिन्नों और आदमियों को इसी मतलब से पैदा किया है कि वे हमारी पूजा करें। समीक्षा खुदा को अपनी पूजा कराने का शौक प्रत्यक्ष है। इन्सान को उसकी तरक्की व फायदे तथा पुरूषार्थ के लिये पैदा न करके खुदगरजी से खुदा ने … Continue reading कुरान समीक्षा : खुदा अपनी पूजा का भूखा है

कुरान समीक्षा : खुदा ने आसमानों को अपने बाहुबल से बनाया था

खुदा ने आसमानों को अपने बाहुबल से बनाया था दूनियां बनाने वक्त खुदा ‘कुन’अर्थात् हो जा कहकर सब कुछ बना लेने का अपना बताया नुस्खा क्यों भूल गया तथा खुदा के हाथ कितने लम्बे हैं? क्या पोला आकाश भी बनाया सकता है, जो स्वयं में कुछ भी ने हों? देखिये कुरान में कहा गया है कि- वस्समा-अ बनैनाहा बिऐदिव्-व……….।। (कुरान मजीद पारा २७ सूरा जारियात रूकू ३ आयत ४७) और हमने आसमानों को अपने बाहुबल से बनाया और हम सामर्थ्य वाले हैं। समीक्षा खुदा ने शून्य आकाश (जिसे बनाने की बात कहना भी नादानी है) को अपने हाथों की बड़ी भारी ताकत लगाकर बनाया था। वाकई अरबी खुदा के हाथों में बड़ी ताकत है कि वह शून्य आकाश को भी … Continue reading कुरान समीक्षा : खुदा ने आसमानों को अपने बाहुबल से बनाया था

धर्म के लक्षणों की परस्पर उत्तमता, मध्यमता और निकृष्टता का विचार: पण्डित भीमसेन शर्मा

अब धर्मों की उत्तमता, मध्यमता और निकृष्टता का सापेक्ष होना इस पाँचवें प्रकरण में दिखाते हैं- इससे पूर्व धर्म शब्द का व्याकरण और कोष सम्बन्धी दोनों अर्थ दिखाया गया है। अब धर्म के अवान्तर भेद, उसका स्वरूप और उस धर्म के सहायकारी कहने चाहियें। इसके पीछे धर्मों के उत्तम, मध्यम, निकृष्ट होने में सापेक्षता कहेंगे। इसी मानवधर्मशास्त्र में लिखा है कि ‘सम्पूर्ण वेद धर्म का मूल है’१ इस प्रमाण का आश्रय लेकर वृक्षरूप धर्म का मूल वेद है क्योंकि वेद से ही धर्मरूप वृक्ष उगता है यह विद्वानों का सिद्धान्त है। उस वृक्षरूप धर्म के तीन अवयव या भाग मुख्य हैं। सो ब्राह्मणों या उपनिषदों में ठीक-ठीक कहा है कि ‘धर्म के तीन कांड वा गुद्दे हैं- यज्ञ, अध्ययन और … Continue reading धर्म के लक्षणों की परस्पर उत्तमता, मध्यमता और निकृष्टता का विचार: पण्डित भीमसेन शर्मा

कुरान समीक्षा : खुदा का न थकने का बयान

खुदा का न थकने का बयान बतावें कि खुदा को यह अपने न थकने की झूठी शेखी क्यों बधारनी पडी थी जब कि तौरेत में थककर आराम करना उसने खुद स्वीकार किया था। बतावें कुरान की बात तौरेत के मुकाबिले क्यों न गलत मानी जावे? देखिये कुरान में कहा गया है कि- व ल-कद् ख-लक्-नस्समावाति………।। (कुरान मजीद पारा २६ सूरा काफ रूकू ३ आयत ३८) और हमने आसमानों और जमीन को कुछ उनके उनके बीच में है उसे छः दिन में बनाया और हम जरा भी नहीं थके। समीक्षा ज्यादा काम करने पर खुदा जरूर थक जाता होगा, वह बच नहीं सकता था। देखिये तौरेत में उत्पत्ति २-२ में लिखा है- और परमेश्वर ने अपना काम जिसे वह करता था … Continue reading कुरान समीक्षा : खुदा का न थकने का बयान

आर्य मंतव्य (कृण्वन्तो विश्वम आर्यम)