येशु एक झुटो मसीह हो

ओ३म्.. येशु एक झुटो मसीह हो:- प्रिय मित्रहरु, हामि सबैले जानेकैछौं कि ईसाईहरुले येशुलाई आफ्नो परम उद्धारक र पाप नाशक मान्दछन्। यसैको आधारमा नै उनिहरुले आफ्नो पाप नाश गर्नको लागि येशुलाई मसीह अर्थात् उद्धारक, ईश्वरपुत्र, मनुष्यपुत्र, स्वर्गदाता, शान्तिदूत, आदि आदि अनेक तथाकथित् नाम लिएर पुकार्ने गर्दछन्। यसकै आधारमा येशुलाई पाप नाशक, मुक्तिदाता र स्वर्गदाता सम्झेर अनेकौं हिन्दुहरुलाई आफ्नो सनातन वैदिक मान्यता परित्याग गर्न लगाएर उनलाई स्वर्गको भेडो बन्न विवश गर्दैछन्। येशुको पिछलग्गू बनाइ दिन्छन्। नतीजा यहि हुन्छ कि हिन्दू समाजका अनेकौं नर-नारीहरु आफ्नो वैदिक सनातन मान्यता त्याग गरि मात्र स्वर्गको झुटो लालचमा फसेर येशुको पछी दौडिन्छन्। सोंच्नु पर्ने कुरो छ कि ईसाईहरु जसले यस्तो षड्यंत्र रच्दैछन् की येशु बाट नै पाप मुक्ति हुनेछ र येशुलाई मान्ने मात्र स्वर्गमा प्रवेश गर्नेछ, … Continue reading येशु एक झुटो मसीह हो

ईश्वर कहाँ रहता है ? : आचार्य सोमदेव जी

शंका:- क्या ईश्वर संसार में किसी स्थान विशेष में, किसी काल विशेष में रहता है? क्या ईश्वर किसी जीव विशेष को किसी समुदाय विशेष के कल्याण के लिए और दुष्टों का नाश करने के लिए भेजता है? समाधान- ईश्वर इस संसार के स्थान विशेष वा काल विशेष में नहीं रहता। परमेश्वर संसार के प्रत्येक स्थान में विद्यमान है। जो परमात्मा को एक स्थान विशेष पर मानते हैं, वे बाल बुद्धि के लोग हैं। वेद ने परमेश्वर को सर्वव्यापक कहा है। वेदानुकूल सभी शास्त्रों में भी परमात्मा को सर्वव्यापक कहा गया है। एक स्थान विशेष पर परमेश्वर को कोई सिद्ध नहीं कर सकता , न ही शब्द प्रमाण से और न ही युक्ति तर्क से। हाँ, ईश्वर शब्द प्रमाण और युक्ति … Continue reading ईश्वर कहाँ रहता है ? : आचार्य सोमदेव जी

*राष्ट्रको विनाश कसरि हुन्छ?*

ओ३म्.. “वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः।” (यजुर्वेदः९/२३) (भावार्थ: हामि आफ्नो राष्ट्रको सावधान भएर नेतृत्व गरौँ र विधर्मिहरु तथा देशद्रोहि हरुलाई देशबाट निकालेर बाहिर गरौँ।)   *राष्ट्रको विनाश कसरि हुन्छ?* -(प्रेम आर्य, दोहा-कतार) जब कुनै राष्ट्रको नेताले आफ्नो राजनैतिक स्वार्थको लागि राष्ट्रको हितलाई बलि चढाउँछ । जब व्यक्ति तथा संगठनले आफ्नो स्वार्थलाई राष्ट्रहित भन्दा माथि सम्झन लाग्छन्। जब राजनेताले आफ्ना राजनैतिक प्रतिद्वन्दीको अहित गर्नको लागि छिमेकी शत्रु राष्ट्रका नेताहरु संग सहयोग माग्छन् वा यस्तो इच्छा गर्दछन्। जब नागरिकहरु विदेशी व्यक्ति, सम्प्रदाय, संस्कार, परम्परा, शिक्षा, कानून आदि लाई स्वदेशी व्यक्ति, सम्प्रदाय, धर्म, संस्कार आदि भन्दा श्रेष्ठ मान्न लाग्दछन् अर्थात् ति विदेशीहरुको बौद्धिक तथा मानशिक दास बन्दछन्। जब नेताले विदेशी आक्रान्ताहरुको दुष्टनीति अनुसरण गरेर राष्ट्रका नागरिकहरुलाई जाति, सम्प्रदाय, भाषा आदिका नाउमा विभाजन गरेर आफ्नो … Continue reading *राष्ट्रको विनाश कसरि हुन्छ?*

इस्लाम का चमत्कार (अंधविश्वास) : पं॰ श्री चमूपतिजी एम॰ ए॰

चमत्कार ईमान के दो साधन हैं—एक बुद्धि, दूसरा सीधा विश्वास, प्रकृति की पुस्तक दोनों के लिए खुली है। प्रातःकाल सूर्योदय, सायंकाल सूर्यास्त, दिन व रात्रि का क्रम ऊषा की रंगीनी, बादलों का उड़ना, किसी बदली में से किरणों का छनना, इन्द्रधनुष बन जाना, पर्वतों की गगन चुम्बी चोटियाँ, सागर की असीम गहराई, वहाँ बर्फ के तोदे व दुर्ग, उछलती कूदती लहरों का शोर, बुद्धि देख-देखकर आश्चर्यचकित है। भूमि पर तो चेतन प्राणी हैं ही, वायु व जल में भी एक और ही विराट् संसार बसा हुआ है। विज्ञान के पण्डित नित नए अनुसंधान करके नित नए नियमों का पता लगा रहे हैं और इन नियमों के कारण प्रकृति के ऊपर अधिकार प्राप्त करते जाते हैं। जो घटनाएँ पहले अत्यन्त आश्चर्यजनक … Continue reading इस्लाम का चमत्कार (अंधविश्वास) : पं॰ श्री चमूपतिजी एम॰ ए॰

सच्चे-राम को ईश्वर बताने की झूठी-बैसाखी क्यों?:- – पं. आर्य प्रहलाद गिरि

सीधे-सच्चे हिंदुओं को ईसाई बनाने के लिये कमर कसकर भारत में आये फादर कामिल बुल्के भी अप्रक्षिप्त वाल्मीकि रामायण में मर्यादा पुरुषोत्तम राजा रामचंद्र, सती सीता, महावीर हनुमान, भाई भरतादि के त्यागपूर्ण जीवन-चरित्रों को पढ़ते हैं, तो वेदकालीन प्राचीन भारतीय सभ्यता और संस्कृति का ऐसा उत्कृष्ट सुंदरतम -स्वर्णिम सुखद दृश्य देखतेे ही चिल्ला उठते हैं। जिस तरह सैकड़ों शेक्सपियर भी रामचरितमानस-सा विश्व का सुंदरतम महाकाव्य नहीं रच सकते, उसी तरह राम-सा दिव्य महामानव (देवात्मा, देवदूत, बोधिसत्व-तथागत, तीर्थंकर, पैगंबर, प्रभुपुत्र, फरिश्ता) भी कोई हमें इतिहास के किसी पन्ने पर नहीं दिखला सकता। ऐसा इसलिये भी कि- राम, तुम्हारा चरित्र स्वयं ही काव्य है। कोई कवि बन जाये, सहज संभाव्य है।। -राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त समुद्र को भी बांध देने वाले युगपुरुष हमारे … Continue reading सच्चे-राम को ईश्वर बताने की झूठी-बैसाखी क्यों?:- – पं. आर्य प्रहलाद गिरि

‘ओ३म्’ को बिषयमा संका समाधान-४

ओ३म्.. शंका:६- यो त बोध भैसक्यो कि जति मन्त्र छन्, त्यति नै पटक तिनको अन्तमा ओंकार शब्दको पाठ पनि छ, अब कृपा गरेर यो भन्नु पर्यो कि जब वेद मन्त्रहरुको अर्थ गरिन्छ, तब ओंकारको केहि पनि अर्थ किन गरिदैन ? यसबाट त ‘ओ३म्’ शब्दको प्रयोग निरर्थक नै प्रतीत हुन्छ। समाधान:- ओ३म् शब्दको अन्वय: यसको जुन गूढ तात्पर्य छ त्यो हेरौं । वेदको अन्तिम तात्पर्य त केवल ब्रह्म नै हो, अन्य केहि हैन। यसै गूढ आशयलाई दर्शाउनको लागि प्रत्येक मन्त्रको अन्तमा ’ओ३म्’ शब्दको पाठ हुन्छ। यसै विषयलाई कृष्णद्वैपायन- वेदव्यासले आफ्नो वेदान्त-सूत्रमा भनेकाछन्:- तत्तु समन्वयात् । (वेदान्त-सूत्र ३ । १ । १) (तत्तु) त्यहि ब्रह्म सम्पूर्ण वेदको प्रतिपाद्य विषय हो । अर्थात्, वेदले उसैको गित गाउँछ किनकि (समन्वयात्) जसरि ईश्वरको सम्बन्ध सम्पूर्ण … Continue reading ‘ओ३म्’ को बिषयमा संका समाधान-४

सम्भूत्या अमृतम् अश्नुते: – आचार्य उदयवीर शास्त्री

विद्या-अविद्या और सम्भूति-असम्भूति पदों के माध्यम से यजुर्वेद के ४०वें अध्याय एवं तदनुरूप ईशावास्य उपनिषद् में आध्यात्मिकता का विशद विवेचन हुआ है। १२, १३ मन्त्रों में सम्भूति-असम्भूति अथवा सम्भव-असम्भव पदों का प्रयोग हुआ है, परन्तु १४ मन्त्र में ‘असम्भूति’ पद का प्रयोग न कर, उसके स्थान पर ‘विनाश’ पद का प्रयोग हुआ है। ‘सम्भूति’ का अर्थ है, उत्पन्न हुआ पदार्थ। इसके विपरीत ‘असम्भूति’ का अर्थ है- न उत्पन्न हुआ पदार्थ। अर्थात् समस्त भौतिक-अभौतिक जगत् का मूल उपादान कारण तत्त्व, जो कभी उत्पन्न नहीं होता, न उसका सर्वथा विनाश होता है। पर वह महत्-अहंकार आदि रूप से यथाक्रम परिणत होता रहता है। इस प्रकार उसका यह परिणाम-प्रवाह अनादि अनन्त है। उसी ‘असम्भूति’ शब्द को मन्त्र १४ में ‘विनाश’ पद से कहा। … Continue reading सम्भूत्या अमृतम् अश्नुते: – आचार्य उदयवीर शास्त्री

आर्य मंतव्य (कृण्वन्तो विश्वम आर्यम)