Category Archives: समाज सुधार

मस्जिद में चुपके से हुआ भगाई लड़की का निकाह. पहले हिन्दू संगठन पहुचे, फिर पहुची पुलिस. मौलवी हिरासत में

अगर किसी ने जवानी के जोश में कोई गलती की थी तो एक बुजुर्ग मौलाना हो कर उन्हें दोनों को समझाना था , पर वो तो देने लगे थे बढ़ावा उस कार्य को जो अपराध था , मानवता की नजर में भी और कानून की नजर में भी . लव जिहाद के दायरे में लाने के लिए किसी को भी ना किसी कानून की फ़िक्र है , ना ही किसी प्रकार के नियमों की . वो जैसे भी , जहाँ भी , जिसको भी चाहे शकार बना लेते हैं . ऐसा ही एक मामला एक बुजुर्ग मौलाना और पवित्र कही जाने वाली मस्जिद में चल रहा था जहाँ एक अबोध बालिका का निकाह चुपके से पढ़ाया गया . मौलाना को पता था कि चुपके से केवल अपराध किये जाते हैं और वो ऐसा ही कर रहे थे . चुपके से निकाह रूप अपराध के 3 पहलू थे . हिन्दू संगठन हिन्दू रक्षा दल का पहला आरोप है कि वो बालिका नाबालिग थी और नाबालिग बालिका से विवाह किसी भी प्रकार से सामजिक और कानूनी अपराध है . दूसरा पहलू था कि बालिका दूसरे धर्म की थी इसलिए मौलाना को और जल्दी थी इसे करने की .. तीसरा पहलू था कि ये बालिका तेलंगाना से भगा कर लाई गयी थी जिसके माता पिता का अपनी बेटी को खोज कर बुरा हाल था . उनके आंसू नहीं थम रहे थे अपनी बेटी के इस तरह अचानक गायब हो जाने पर .. मौलाना ये सारा कुकृत्य गाजियाबाद के नंदग्राम इलाके की एक मस्जिद में कराया था जहां एक स्थानीय वर्ग विशेष निवासी ने इनको छुपा कर रखा था . इस पूरे प्रकरण में लिप्त लोगों को जबकि निश्चित रूप से उसे कानून की पूरी जानकारी थी . अपनी नजर चरों तरफ गड़ाए बैठे हिन्दू संघठनो को इस बात की भनक लग गयी ..उसके बाद हिन्दू रक्षा दल नाम के संगठन ने मस्जिद और जिस घर में लड़की को छिपाया गया था उसको घेर लिया और मौलवी के साथ लड़की को छिपा कर रखे स्थानीय को बाहर निकालने लगे. थोड़ी देर में वहां पुलिस आ गयी और मौलाना ,  नाबालिग लड़की को भगा कर लाये अपराधी व् लड़की को हिरासत में ले कर थाने गयी .  हिन्दू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं के अनुसार तेलंगाना से भगा कर लाने के बाद उस नाबालिग लड़की का लगभग 10 दिनों से नई बस्ती नंदग्राम में रख कर शारीरिक शोषण किया जा रहा था. पुलिस के अनुसार विवेचना जारी है . हिन्दू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं का कहना है कि वो इस विषय से जुड़े एक एक लोगों को सज़ा दिलाने तक चुप नहीं बैठेंगे.
source: http://www.sudarshannews.com/category/national/love-jihad-in-ghaziabad-up-1004

जब मुस्लिम महिलाएं शादी बचाने के लिए अजनबी के साथ सोती हैं

जब मुस्लिम महिलाएं शादी बचाने के लिए अजनबी के साथ सोती हैं

 

 

  • जब मुस्लिम महिलाएं शादी बचाने के लिए अजनबी के साथ सोती हैं

    एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मुस्लिम महिलाएं तलाक के बाद अपनी शादी बचाने के लिए मोटी रकम देकर ‘हलाला’ विवाह करती हैं. कुछ मुस्लिमों के द्वारा माने जाने वाले ‘हलाला’ परंपरा में तलाक के बाद महिला अगर पहले पति के पास जाना चाहती है तो उसे किसी दूसरे पुरुष से शादी करनी पड़ती है और फिर उसे तलाक देना होता है.

  • जब मुस्लिम महिलाएं शादी बचाने के लिए अजनबी के साथ सोती हैं

     

    बीबीसी लंदन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल एज में हलाला सर्विस देने के नाम पर कई ऑनलाइन एकाउंट चल रहे हैं. किसी अजनबी के साथ हलाला विवाह करने के लिए महिलाएं से सर्विस एजेंसी पैसे मांगती है और उस शख्स के साथ उसे सोना भी पड़ता है.

  • जब मुस्लिम महिलाएं शादी बचाने के लिए अजनबी के साथ सोती हैं

    हालांकि, काफी मुस्लिम हलाला को गलत मानते हैं. लंदन के इस्लामिक शरिया काउंसिल भी इस परंपरा का कड़ा विरोध करती है.

  • जब मुस्लिम महिलाएं शादी बचाने के लिए अजनबी के साथ सोती हैं

    हालांकि, काफी मुस्लिम हलाला को गलत मानते हैं. लंदन के इस्लामिक शरिया काउंसिल भी इस परंपरा का कड़ा विरोध करती है.

  • जब मुस्लिम महिलाएं शादी बचाने के लिए अजनबी के साथ सोती हैं
     

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि ऑनलाइन एजेंसी सर्विस देने के लिए महिलाओं से 2 लाख रुपए तक चार्ज करते हैं. ऐसी ही एक सर्विस देने वाले शख्स ने यह भी बताया कि एक बार हलाला होने के बाद एक पुरुष महिला को तलाक देने से इनकार करने लगा.

  • जब मुस्लिम महिलाएं शादी बचाने के लिए अजनबी के साथ सोती हैं

    कई बार हलाला के तहत महिलाओं को कई मर्दों के साथ भी सोना पड़ता है. उनका यौन शोषण भी होता है.

  • जब मुस्लिम महिलाएं शादी बचाने के लिए अजनबी के साथ सोती हैं

    लंदन के इस्लामिक शरिया काउंसिल की खोला हसन कहती हैं कि हलाला पाखंड है. यह सिर्फ पैसा बनाने के लिए किया जाता है.

  • जब मुस्लिम महिलाएं शादी बचाने के लिए अजनबी के साथ सोती हैं

    खोला हसन यह भी कहती हैं कि महिलाओं को इससे बचाने के लिए काउंसिलिंग मुहैया कराई जानी चाहिए.

    source:http://aajtak.intoday.in/gallery/muslim-women-sleep-stranger-save-marriage-4-11853.html

video : पण्डित लेखराम वैदिक मिशन द्वारा परोपकारिणी सभा के नेतृत्व निर्देशन में सामाजिक समरसता यज्ञ का आयोजन किया गया

पण्डित लेखराम वैदिक मिशन द्वारा परोपकारिणी सभा के नेतृत्व निर्देशन में  सामाजिक समरसता यज्ञ का आयोजन किया गया जो की अत्यंत सफल रहा इसे सफल बनाने में जिन जिन लोगों की भागीदारी थी हम उनके ऋणी रहेंगे |

बॉलीवुड इस्लामीकरण की ओर और रानी पद्मावती फिल्म की सच्चाई

बॉलीवुड  इस्लामीकरण की ओर  और रानी  पद्मावती फिल्म की सच्चाई

 

किसी भी समाज में जो जीवन में घटित होती  है उसे रुपहले परदे  पर दिखाया जाना  यही  लोगो से उम्मीद रुपहले परदे पर की जाती है  या पुरानी इतिहास को परदे पर दिखाया जाता है जो सच में घटित  हुयी हो |  यह काम पहले रुपहले  परदे  पर की जाती थी और यह  समाज  का  आयना  भी होती थी  और होती है | कई ऐसे फिल्म है जो  सच्ची  जीवन  पर घटित  कहानी को  दिखलाया  गया  है | आज वक्त बदल रहा है और  आज सच को झूठ  और झूठ को सच बतलाने की कोशिश की जा रही है और पुराने इतिहास को भी तोड़ मरोड़कर  दिखलाने की कोशिस की जा  रही है  इसी क्रम में आज  फिलहाल  हम अभी  रुपहले  परदे  पर बन रही  फिल्म  रानी पद्मावती  और  संजय लीला  भंसाली  की फिल्म  रानी पद्मावती  के बारे में चर्चा करेंगे |

रानी पद्मावती और  संजय  भंसाली  की  रानी पद्मावती  फिल्म  के बारे  में आज बहुत  चर्चा  की जा रही है | सब  बोल रहे  हैं  की संजय लीला  भंसाली  ने इतिहास  के साथ  खिलवाड़ करने  की कोशिश की है | क्या वे  इतिहास  के साथ  खिलवाड़  करने  की कोशिश की है  इस पर हम चर्चा बाद  में करेंगे  | चर्चा  करने  से पहले  हमें  यह  जानना चाहिए  की ये आखिर  रानी पद्मावती  हैं कौन ?  रानी पद्मावती  के बारे  में पहले चर्चा  की जाए पहले |

रानी पद्मिनी, चितोड़ की रानी थी। रानी पद्मिनि के साहस और बलिदान की गौरवगाथा इतिहास में अमर है। सिंहल द्वीप  के राजा गंधर्व सेन और रानी चंपावती की बेटी पद्मिनी चितोड़  के राजा रतनसिंह के साथ ब्याही गई थी। रानी पद्मिनी बहुत खूबसूरत थी और उनकी खूबसूरती पर एक दिन दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की बुरी नजर पड़ गई। अलाउद्दीन किसी भी कीमत पर रानी पद्मिनी को हासिल करना चाहता था, इसलिए उसने चित्तौड़ पर हमला कर दिया। रानी पद्मिनी ने आग में कूदकर जान दे दी, लेकिन अपनी आन-बान पर आँच नहीं आने दी। ईस्वी सन् १३०३ में चित्तौड़ के लूटने वाला अलाउद्दीन खिलजी  था जो राजसी सुंदरी रानी पद्मिनी को पाने के लिए लालयित था। श्रुति यह है कि उसने दर्पण में रानी की प्रतिबिंब देखा था और उसके सम्मोहित करने वाले सौंदर्य को देखकर अभिभूत हो गया था। लेकिन कुलीन रानी ने लज्जा को बचाने के लिए जौहर करना बेहतर समझा।

जौहर क्या होता है  अब आप यह जानना  चाहते होंगे जौहर को दुसरे शब्दों में आप सती होना  आप बोल सकते  हैं | ज्यादा  इतिहास  की ओर जाना  सही नहीं | पद्मावती जिन्हें  पद्मिनी के नाम से भी जाना जाता है के बारे में ज्यादा  चर्चा ना करके मुद्दे की बात करते हैं रानी  पद्मावती फिल्म  की ओर चर्चा  की जाए |

 

यह लेख  लिखने से पहले  मैं आपको बतलाना चाहता हु की जब मैंने भी पहली बार यह सुना की रानी पद्मावती की जीवन के इतिहास  के साथ खिलवाड़  करने जा रही है संजय लीला भंसाली  तो  मैं  भी  बहुत गुस्से में था मुझे भी लग रहा था की संजय लीला भंसाली  को करनी सेना ने जो कुछ किया सही किया  और उसका हमें भी समर्थन  करनी चाहिए | इस बारे में मैंने फिल्म इंडस्ट्री के लोगो से बात की क्यूंकि मेरी जान पहचान है उनलोगों से | मैं ये नहीं बोल रहा की बॉलीवुड के फिल्म इंडस्ट्री  से मेरा जान पहचान  है मगर  देश के दुसरे फिल्म इंडस्ट्री के लोगो से जान पहचान है  सही जानकारी नहीं  बतलाना चाहता की साउथ की फिल्म इंडस्ट्री से जान पहचान है या फिर नार्थ की फिल्म इंडस्ट्री  से जान पहचान  क्यूंकि सभी राज्य  में उनकी बोली भाषा के आधार पर फिल्म इंडस्ट्री है  चलिए मुद्दे पर लौटते हैं फिर से | जब उनसे चर्चा की गयी तो  उन्होंने  मेरे को कुछ जानकारी दी  जिसके बाद लगा की जिनसे चर्चा मैंने की है उनकी बात में सच्चाई है | सबसे पहले मेरे मित्र ने जानकारी दी की  वह भी फिल्म में काम करता है  और वह कैमरामैन जिसे फिल्म इंडस्ट्री सिनेमाटोग्राफर  या  डायरेक्टर ऑफ़ फोटोग्राफी भी कहते हैं का काम करते है साथ में फिल्म  का एडिटर भी हैं वो | उन्होंने पहला सवाल किया की फिल्म की स्क्रिप्ट  क्या है  यह बात  सिर्फ डायरेक्टर  और स्क्रिप्ट राइटर  को होता है यहाँ तक फिल्म  में जब शूटिंग होती है  तो फिल्म के स्टाफ  कैमरामैन तक को यह नहीं मालुम होता  की जो शूटिंग की जा रही है वह फिल्म में किस जगह पर ली जायेगी ? फिल्म की क्या स्क्रिप्ट है  यह कैमरामैन तक को  मालुम नहीं होता  ? फिर  इन मीडिया वालो  को और  उस जगह  के करणी सेना  को किसने  फिल्म की जानकारी दे दी | एक बात आपको जानकारी देना चाहता हु केवल  राजनीती  में ही राजनितिक पार्टी राजनीती करते हैं फिल्म इंडस्ट्री में भी राजनीति होती है और यह राजनीति का एक हिस्सा है | मैं जानता  हु क्या राजनीति है इस फिल्म को लेकर मगर यहाँ चर्चा करना सही नहीं |  हां मैं भी बोलता हु यदि  संजय लीला  भंसाली  की फिल्म में कुछ इतिहास के साथ खिलवाड़ करे तो आप उसका विरोध करे  क्यूंकि कोई भी इतिहास के खिलाफ  खिलवाड़  करे  हमें स्वीकार नहीं |  मगर जब तक किसी ने फिल्म नहीं देखि  तो जब उस बारे में कोई जानकारी  नहीं  तो  आवाज़  उठाना  सही नहीं |

अभी फिलहाल  कुछ दिन पहले  रईस फिल्म आई है सोशल मीडिया  पर बोला जा रहा है की  की  यह कहानी गुजरात के एक माफिया अब्दुल लतीफ़ जो हिन्दुओ  को कत्ले आम करता था उस पर फिल्म बनायीं है  और  उसे हीरो  बताया  गया है और यह आजकल फिल्म बहुत हिट हो रही है  पैसे कमा रही  है | इतना  ही नहीं  फिल्म फना  में एक आतंकवादी  की प्रेम कहानी दिखाई गयी है  जिसे भी लोगो ने सराहा | कुछ  साल पहले एक फिल्म आई थी हैदर  जिसमे भारतीय सेना को विल्लेन और एक आतंकवादी को सही बतलाया  गया था | आज चलो कितने फिल्म आती हैं अरे आर्य समाज की भजन की बात को छोड़ दो आप पौराणिक की भी भजन  फिल्म में नहीं आती | बस  इस्लाम की गाने  को ज्यादा  तव्वजो  दी जाती है और हम उन सब की फिल्म  को देखकर  और जो जानकार नहीं है  उनकी बातो में आ जाते हैं  | फिल्म pk को ही देख लो | आज बॉलीवुड इस्लामीकरण की ओर जा रहा है इससे हमारे संस्कृति को हानि होगी | हमें उस तरह की फिल्म का बहिस्कार  करनी चाहिए  मगर  हम लोग  उन फिल्मो को स्वीकार करते है  | आये उस तरह की फिल्म का बहिस्कार  करें शाहरुख सलमान  आमिर की फिल्म का बहिस्कार करें | और जो जो फिल्म इस्लामिकरन  की ओर बॉलीवुड को धकेल रही है उसका विरोध करें और फिर से बॉलीवुड को समाज की आयना  बनाने का प्रयास  करें |

लेख में कुछ त्रुटी लगे  तो उसके लिए क्षमाप्रार्थी हु |

धन्यवाद

आभार : विकिपीडिया

 

 

 

दंगल की जायरा वसीम अभिनेत्री को कश्मीर की अलगाववादियों की धमकी

दंगल की  जायरा वसीम  अभिनेत्री  को  कश्मीर की अलगाववादियों की धमकी

आजकल  सोशल मीडिया में दंगल की बहुत चर्चा हो रही है इतना ही  नहीं बहुत से टीवी सीरियल  में भी दंगल  की बात की जाती है  की दंगल करते हैं इत्यादि इत्यादि | आज यदि भारत में विमुद्रीकरण  होने के कारण  लोग बोल रहे हैं की पैसा बाजार में नहीं है तो फिर  बाजार में दंगल ने ३६० करोड़  से ज्यादा का कारोबार कैसे कर लिया ? यह बात समझ से  बाहर है | लोग आमिर  को एक समाजसेवक के रूप में  देखते हैं | समाज सेवक के रूप में लोगो को नजर आते हैं और सत्यमेव जयते को करके और भी अपने को समाज सेवक के तौर पर  लोगो में अपना दिल  बना लिया है | यह वही  आमिर खान  हैं जिन्हें  पाकिस्तान से प्रेम है  जिस कारण pk जैसे  फिल्मो  में पाकिस्तान की लव जिहाद की बात पर जोर दिया गया था की  पाकिस्तान का  लड़का है  तो क्या दिक्कत है | खैर  हमें इन सब सब बातो पर चर्चा  नहीं करनी है | फिलहाल  अभी दंगल की अभिनेत्री  के बारे में चर्चा करनी है |

सबसे पहले यह जाने की की आखिर  ये  जयरा वासिम कौन हैं और आज सभी उसकी  ओर क्यों संवेदना  प्रकट  कर रहे हैं |  कुछ तो इतना बोल रहे हैं की उन्हें सनातन धर्म में वापसी करनी चाहिए | खैर वे सनातन धर्म में वापसी करें या ना करें  यह उनकी  मर्जी है  इस मामले में हमें कुछ नहीं  बोलना चाहिए | पहले हम जायरा वासिम के बारे में बात करें ये कौन है फिर  दंगल की जायरा वासिम की बात करेंगे |

जायरा वासिम कश्मीरी मुस्लिम लड़की है  जिसकी  उम्र १६ साल की है ऐसा बतलाया जा रहा है मीडिया में |  यह फेसबुक पर बहुत ही बहुत ही जयादा इस्तेमाल करती थी  हो सकता है अब भी करती हो | यह जायरा वासिम फेसबुक पर  रास्त्रगान को नहीं गाने वाली  कई पोस्ट कर चुकी हैं ऐसा सोशल मीडिया में बाते होती रही है | जायरा वासिम  फेसबुक  पर अलगाववादी की कई बार  पोस्ट की तहत  समर्थन कर चुकी  हैं |  जो रास्ट्रगान का तिरस्कार करे  उसे देश द्रोही  ना बोला जाए ? और जब जायरा वासिम  जैसे जो राष्ट्रगान का  विरोध किया है  उसका हम समर्थन कर रहे हैं | राष्ट्रगान का  विरोध करना मतलब देशद्रोही  होना  उस हिसाब से  जायरा वासिम भी देशद्रोही न हुयी  ? वैसे आमिर खान  सलमान खान शारुखखान  इत्यादि  भी  देशद्रोही का  समर्थन करते हैं  पाकिस्तानी का समर्थन  करते हैं  फिर इन्हें देशद्रोही  बोलना कुछ गलत  नहीं होगा ?

 

अब बात करते हैं दंगल की जयरा वासिम की  | क्यों आजकल वे मीडिया में प्रसिद्ध हो  रहे हैं | आपको पहले ही बतलाया  की जयरा  वासिम  दंगल में काम कर चुकी हैं और वे  काश्मीरी  हैं | फिल्म दंगल में काम करने के कारण उसमे  नाचने के कारण आज काश्मीरी अलगाववादी  कई बार  धमकी दे रही हैं गाली दे रही हैं | कश्मीरी अलगाववादी  आज जयरा वासिम को  इस कारण धमकी गाली दे रही हैं क्यूंकि उन्होंने बुरखा क्यों नहीं पहना और क्यों दंगल में काम किया  नाच गान  किया | जबकि खुद जयरा  वासिम अलगाववादी  का समर्थन करनेवाली है | आज इस्लाम के नजर में बुरखा पहनना चाहिए जो नहीं किया इस कारण  उसे आज धमकी  मिल रही है | आज इस्लाम  में अब भी औरत की बुरी हालत है यदि वे  बुरखा ना पहने तो यह प्रमाण  के तौर पर जयरा वासिम है जिसे धमकी दी गयी है | इस्लाम में अब भी औरत की हालत बहुत ख़राब है  यह जयरा वासिम की हालत  पर मालुम चल जाता है |

सत्मेव जयते  इत्यादि में बहुत  खुद को समाजसेवक  बोलनेवाले   क्यों नहीं जायरा वासिम की मदद  करने को अग्रसर  हो रहा है  जो की उसी की फिल्म का कलाकार  थी | आज किरण राव को क्यों कुछ दर्द  नजर  नहीं आ रहा | अखलाख  के समय  पुरस्कार  वापसी करने वाले आज क्यों मौन हैं  ?  आज देश में  उन्हें बुरा नजर नहीं  आ रहा क्या ? आज सारे  सेक्युलर चुप क्यों हैं ?  पश्चिम बंगाल में दंगा हुवा क्यों सलमान  आमिर इत्यादि चुप हैं  | हमारे देश के लोग बस जब मुस्लिम पर कुछ  होता है तो तो पूरा देश में मीडिया हंगामा करने लगती हैं और जब हिन्दू पर होते हैं तब चुप क्यों हो जाते हैं सभी  नेता  अभिनेता  ?  अब क्या देश में असहिस्नुता  नहीं हो रही ? मुस्लिम  मुस्लिम को ही सताता है फिर देश में असहिस्नुता  नजर नहीं आता | मुस्लिम हिन्दू पर  मार पिट करे तब नजर नहीं आता है  असहिस्नुता | जब कभी हिन्दू  मुस्लिम पर करे तब असहिस्नुता नजर आता  है |  यह कैसी  दोहरी मानसिकता है क्या  लोगो को यह समझ  नहीं आता ? आज सलमान  सहरुख  आमिर किरण राव  इत्यादि को असहिस्नुता नजर नहीं आता जाब धोलागढ़  में हवा था | हम इसके बात खतना दिवस  १  जनुवरी का  जश्न  मना रहे थे |

आज पूरा देश जयरा  वासिम की ओर सांत्वना दे रहा है जबकि  वे खुद अलगाववादी  थे | राष्ट्रगान  का तिरस्कार  करनेवाली थी |  फिर भी पूरा देश आज जयरा वासिम के साथ है | उसकी समर्थन में सब आगे  आ रहे हैं | बोल रहे हैं  उनके साथ बहुत  गलत कर रहे  हैं |  बिना जानकारी हुए सभी जायरा वासिम की समर्थन कर रहे हैं |  अब भी आप चाहे  तो समर्थन करें जयरा  वासिम की | मर्जी आपकी विचार आपका |

धन्यवाद |

 

 

 

भारतीय संस्कृति एवं भाषाओं के रक्षार्थ समर्पित हैदराबाद यात्राः एक अनुभव – ब्र. सत्यव्रत

भारतीय संस्कृति एवं भाषाओं के रक्षार्थ समर्पित हैदराबाद यात्राः
एक अनुभव
– ब्र. सत्यव्रत
ऋग्वेदादि सहित सम्पूर्ण वैदिक आर्ष वाङ्मय ने यह प्रमाणित किया है कि प्राचीन विश्व में आर्य सर्वाधिक प्रतिभाशाली और शौर्यवान् थे। उन्होंने एक महान् संस्कृति को जन्म दिया। जिसकी श्रेष्ठता को प्रायः सभी आधुनिक विद्वान् स्वीकारते हैं। सच्चा ज्ञान सदा एक रस होता है, वह काल के बंधन में नहीं बँधता। अतः वैदिक ज्ञान आज की नवीनता से ही नवीन है। इस ज्ञान की हद में ही सृष्टि की सारी बातें हैं। महाप्राण ‘निराला’ के शब्दों में- ‘‘जो लोग कहते हैँ कि वैदिक अथवा प्राचीन शिक्षा द्वारा मनुष्य उतना उन्नत्तमना नहीं हो सकता, जितना अंग्रेजी शिक्षा द्वारा होता है, महर्षि दयानन्द इसके प्रत्यक्ष खण्डन हैं।’’
संस्कृति के निर्माण में भाषा का महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। जब किसी देश की भाषा का ह्रास होता है तो वहाँ की संस्कृति भी प्रभावित होती है, मिट तक जाती है। हमारे सांस्कृतिक जीवन में यहाँ की भाषाओं का विशेष योगदान है। भाषा और संस्कृति का अन्योन्याश्रित संबंध होता है। १८३५ ई. में मैकाले ने अंग्रेजी भाषा के माध्यम से हमारे दश में एक भिन्न संस्कृति को प्रविष्ट कराने का प्रयास किया। इसका उद्देश्य बताते हुये स्वयं मैकाले ने लिखा था-
‘‘……अंग्रेजी पठित वर्ग रंग से भले ही भारतीय दिखेगा, परन्तु आचार-विचार, रहन-सहन, बोल-चाल और दिल-दिमाग से पूरा अंग्रेज बन जायेगा।’’ आजादी की भोरवेला में जब हमारा देश किसी नौनिहाल की तरह लड़खड़ाकर चलने की कोशिश कर रहा था तब भी गुलामी की मानसिकता में पले और दीक्षित हुये हमारे ही कुछ कर्णधारों ने देशभक्तों की भावनाओं का अनादर करते हुये भारतीय भाषाओं को पनपने नहीं दिया और अंग्रेजी को स्वतंत्र भारत में भी ‘साम्राज्ञी’ बनाये रखा। आज अंग्रेजी माध्यम के प्राइवेट स्कूलों की बाढ़ आई हुई है और ऐसे स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाना सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गया है। सैम पित्रोदा के ‘ज्ञान आयोग’ की सिफारिश ने तो हमारे बच्चों को मातृभाषा से लगभग विमुख ही कर दिया । वे संस्कृत हिन्दी क्षेत्रीय भाषाओं और देवनागरी जैसी वैज्ञानिक लिपि से ही न सिर्फ वंचित हुये अपितु इन भाषाओं में विद्यमान उदात्त सांस्कृतिक मूल्यों व ज्ञान से भी दूर हो गये। आज अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त युवकों में जो नई संस्कृति जन्म ले रही है, वह स्वच्छन्द भोगवादी, पश्चिम की नकल और अपनी जड़ से कटी हुई है अधकचरी अंग्रेजी की नाव पर सवार हमारे भावी नागरिक न इस घाट के हैं, न उस घाट के। ऐसे में हमारी उदात्त सांस्कृतिक अस्मिता और विशिष्ट भारतीय पहचान का क्या होगा?
निश्चित रूप से भारतीय जाति की संस्कृति व जीवन मूल्यों को जीवित रखने के लिये, देश वासियों में अखण्ड राष्ट्रीय भावना को परिपुष्ट करने हेतु आज संस्कृत, हिन्दी को तथा भारतीय संस्कृति की धारा को प्रवाहहीन होने से बचाना होगा। हमारी संस्कृति में जो भी सर्वश्रेष्ठ व चिरन्तन सत्य है, प्राचीन ऋषियों से हमें जो दाय प्राप्त हुआ है उसका लाभ हमारे सभी देशवासी व सारी मानव जाति उठा सके इसके लिये तकनीकी स्तर पर एक सार्थक प्रयास करने की आवश्यकता है। यदि यह सुविधा बन जाय कि बिना अंग्रेजी या अन्य कोई भाषा जाने उस भाषा में लिखित ज्ञान-विज्ञान को मशीनी अनुवाद द्वारा कोई भी पढ़ सके तथा कोई भी अपनी बात का विचार का सम्प्रेषण संगणक (कम्प्यूटर) द्वारा अन्य भाषाओं में कर सके तो फिर अंग्रेजी भाषा सीखने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। साथ ही संस्कृत भाषा में लिखित वेद व आर्ष-वाङ्मय के ज्ञान-विज्ञान को हम अनेक भाषाओं में सुलभ करा सकते हैं, जिसका लाभ लेकर अंग्रेजी पठित हमारी नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ जायेगी और उनका यह भ्रम भी दूर हो जायेगा कि हमारे प्राचीन शास्त्रों में कुछ विशेष नहीं है।
इसी परिप्रेक्ष्य में भारतीय संस्कृति व भाषाओं पर आये इस आसन्न संकट के प्रति जागरुकता लाने, इसके समाधान के लिये योजना प्रस्तुत करने, लोगों को इस कार्यक्रम से जोड़ने तथा भाषाई दूरियाँ दूर करने के प्रयत्न करना आवश्यक है। वैज्ञानिक पहले आधारवाली पाणिनीय व्याकरण का उपयोग लेकर और अपने शास्त्रों के महत्त्व को दर्शाने हेतु विचार-मंथन के लिये अन्तर्राष्ट्रीय सूचना तकनीक संस्थान (ढ्ढ ट्रिपल आई.टी.), हैदराबाद में दिनांक ९ मई २०१६ से एक संगोष्ठी (सेमिनार) का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में सहभागिता करने के लिये परोपकारिणी सभा द्वारा संचालित आर्ष गुरुकुल ऋषि उद्यान, अजमेर के वरिष्ठ ब्रह्मचारियों का एक दल आचार्य सत्यजित् जी एवं परोपकारिणी सभा के यशस्वी प्रधान डॉ. धर्मवीर जी के मार्गदर्शन में हैदराबाद के लिये रवाना हुआ। ६ मई २०१६ सायंकाल गुरुकुल से प्रारम्भ हुई यह यात्रा २७ मई प्रातःकाल गुरुकुल में प्रवेश के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। इस यात्रा का अनुभव अत्यन्त ज्ञानवर्द्धक, हर्ष मिश्रित, रोमांचकारी व स्मरणीय घटनाओं से भरपूर है।
गर्मी के बावजूद लगभग ३१ घंटे की एक ओर की हमारी रेल यात्रा उत्साहपूर्वक पूर्ण हुई। सिकन्दराबाद रेल्वे स्टेशन पर रात्रि में एक बजे पहुँचते ही ट्रिपल आई.टी. के वरिष्ठ प्राध्यापक श्री शत्रुञ्जय जी रावत व उनके सेवाभावी सहयोगी अपनी गाड़ियों में बैठाकर हम सबको संस्थान के बाकुल छात्रावास में लाये जहाँ सुव्यवस्थित कमरों में हमारे रहने की व्यवस्था की गई थी। प्रो. शत्रुञ्जय जी हमारे आचार्य सत्यजित् जी के कनिष्ठ भ्राता हैं, जिनका अत्यन्त प्रेम भरा सहयोग एवं आत्मीयता हमें यात्रा समाप्ति तक मिलता रहा जो हमें सदा स्मरणीय रहेगा।
ट्रिपल आई.टी., हैदराबाद सन् १९९८ में स्थापित, अलाभकारी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर आधारित एक ग्रेड-ए स्वायत्तशासी शोध विश्वविद्यालय है-जो दक्षिण एशिया के छह शीर्ष-शोध विश्वविद्यालयों में एक है। इस संस्था का उद्देश्य शोध परक शिक्षा द्वारा समाज व उद्योग में सकारात्मक परिवर्त्तन लाना, नवाचार को प्रोत्साहित करना और मानवीय मूल्यों को पुनर्स्थापित करना है।
शेष भाग अगले अंक में…..

प्रमाण मिलान की परम्परा अखण्ड रखियेः राजेन्द्र जिज्ञासु

प्रमाण मिलान की परम्परा अखण्ड रखियेः-
अन्य मत पंथों के विद्वानों ने महर्षि दयानन्द जी से लेकर पं. शान्तिप्रकाश जी तक जब कभी आर्यों के दिये किसी प्रमाण को चुनौती दी तो मुँह की खाई। अन्य-अन्य मतावलम्बी भी अपने मत के प्रमाणों का अता- पता हमारे शास्त्रार्थ महारथियों से पूछ कर स्वयं को धन्य-धन्य मानते थे। ऐसा क्यों? यह इसलिये कि प्रमाण कण्ठाग्र होने पर भी श्री पं. लेखराम जी स्वामी वेदानन्द जी आदि पुस्तक सामने रखकर मिलान किये बिना प्रमाण नहीं दिया करते थे। ऐसी अनेक घटनायें लेखक को स्मरण हैं। अब तो आपाधापी मची हुई है। अपनी रिसर्च की दुहाई देने वाले पं. धर्मदेव जी, स्वामी स्वतन्त्रानन्द जी, श्री पं. भगवद्दत्त जी की पुस्तकों को सामने रख कुछ लिख देते हैं। उनका नामोल्लेख भी नहीं करते। प्रमाण मिलान का तो प्रश्न ही नहीं। स्वामी वेदानन्द जी ने प्रमाण कण्ठाग्र होने पर भी एक अलभ्य ग्रन्थ उपलब्ध करवाने की इस सेवक को आज्ञा दी थी। यह रहा अपना इतिहास।
एक ग्रन्थ के मुद्रण दोष दूर करने बैठा। प्रायः सब महत्त्वपूर्ण प्रमाणों के पते फिर से मिलाये। बाइबिल के एक प्रमाण के अता-पता पर मुझे शंका हुई। मिलान किया तो मेरी शंका ठीक निकली। घण्टों लगाकर मैंने प्रमाण का ठीक अता-पता खोज निकाला। बात यह पता चली कि ग्रन्थ के पहले संस्करण का प्रूफ़ पढ़ने वाले अधकचरे व्यक्ति ने अता-पता ठीक न समझकर गड़बड़ कर दी। आर्य विद्वानों व लेखकों को पं. लेखराम जी, स्वामी दर्शनानन्द जी, आचार्य उदयवीर और पं. गंगाप्रसाद जी उपाध्याय की लाज रखनी चाहिये। मुद्रण दोष उपाध्याय जी के साहित्य में भी होते रहे। उनकी व्यस्तता इसका एक कारण रही।