हिन्दू शब्द का अर्थ – अरबी – फ़ारसी – लिपियों – व्याख्याकारों के संग्रह से –

हिन्दू शब्द का अर्थ – अरबी – फ़ारसी – लिपियों – व्याख्याकारों के संग्रह से –
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हिन्दू दर मुहावरा फारसियां ब मअने दुज़दो रहज़नों ग़ुलाम मे आयद।
अर्थ – हिन्दू शब्द फ़ारसी भाषा के अनुसार
चोर,
डाकू,
रहजन (मार्ग का लुटेरा)
और
ग़ुलाम (दास, बंदी)
के अर्थो में आता है
सन्दर्भ – ग़यास – ग़यास नामी कोष
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हिन्दू बकसर ग़ुलाम व बन्दह, काफ़िर व तेरा।
अर्थ : हिन्दू का अर्थ ग़ुलाम, कैदी, काफ़िर और तलवार है।
सन्दर्भ – कशफ – कशफ नामी कोष
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चे हिन्दू हिंदुए काफ़िर चे काफ़िर, काफ़िर रहजन।
चे रहज़न रहज़ने ईमान
अर्थ :
हिन्दू क्या है ?
हिन्दू काफ़िर है।
काफ़िर क्या है ?
काफ़िर रहज़न है।
रहज़न क्या है ?
रहज़न ईमान पर डाका मारने वाला है।
(सन्दर्भ – चमन बेनज़ीर)
…………………………….
क्या अभी भी अपने को हिन्दू कहोगे ?
नोट : पोस्ट पर बेतुकी और व्यर्थ चर्चा – तथा भद्दी भद्दी गालियां देने से पूर्व सोच ले की आप स्वयं अपने को “हिन्दू” गर्व से कहकर – खुद ही अपने पर पड़ी गाली को गर्वान्वित करते हो –
कृपया असभ्य चर्चा न करे –
मेरे पास १०० से भी ऊपर प्रमाण हैं – हिन्दू शब्द के अर्थ के – इसलिए कुतर्क करने से अच्छा है – सत्य को जाने –
वेदो में ईश्वर पुत्र “आर्य” हैं – और कुछ नहीं तो कम से कम अपने पुरखो को तो हिन्दू कहकर अपमानित न करे –

32 thoughts on “हिन्दू शब्द का अर्थ – अरबी – फ़ारसी – लिपियों – व्याख्याकारों के संग्रह से –”

  1. OM..
    ARYAVAR, NAMASTE..
    AAPKAA LEKH BAHUT HI ROCHAK AUR VUDDHIVARDHAK HOTE HAIN..
    NAVIN JAANKAARI DETE RAHIYE AAP KAA SAADHUVAAD..
    LEKIN HINDU SHABD TYAGNE SE AUR BAHUT SAMASHYAA UTPANNA HOGI JAISE HINDI, HINDUSTAAN, HIND MAHASHAGAR, AADI ISKAA SAMAADHAAN KIJIEGAA
    DHANYAVAAD..

  2. तन्त्रग्रन्थ, ‘मेरुतन्त्र’ में इसका उल्लेख पाया जाता है। इसका सन्दर्भ निम्नांकित है-
    पंचखाना सप्तमीरा नव साहा महाबला:।
    हिन्दूधर्मप्रलोप्तारो जायन्ते चक्रवर्तिन:।।
    हीनं दूशयत्येव हिन्दुरित्युच्यते प्रिये।
    पूर्वाम्नाये नवशतां षडशीति: प्रकीर्तिता:।।[1]
    उपर्युक्त सन्दर्भ में ‘हिन्दू’ शब्द की जो व्युत्पत्ति दी गई है, वह है ‘हीनं दूषयति स हिन्दू’ अर्थात् जो हीन (हीनता अथवा नीचता) को दूषित समझता (उसका त्याग करता) है, वह हिन्दू है।
    आसिन्धो: सिन्धुपर्यन्ता यस्य भारतभूमिका।
    पितृभू: पृण्यभूश्चैव स वै हिन्दुरिति स्मृत:।।
    अर्थात् “सिन्धु नदी के उदगम स्थान से लेकर सिन्धु (हिन्द महासागर) तक सम्पूर्ण भारत भूमि जिसकी पितृभू (अथवा मातृभूमि) तथा पुण्यभू (पवित्र भूमि) है, वह ‘हिन्दू’ कहलाता है (और उसका धर्म ‘हिन्दुत्व’)।

    1. मेरे बंधू | जो प्रमाणिक ग्रन्थ है उसमे से हमें दिखाए तन्त्रग्रन्थ, ‘मेरुतन्त्र’ इत्यादि को कोई नहीं जानता | बहुत कोई संग्राम पुराण इत्यादि की जानकारी देते हैं बहुत कोई ताओ उपनिषद से कोई अल्लोप्निषद की बात करता है कोई साईं पुराण की बात करता है तो क्या स्वीकार कर लेना चाहिए ? हमें गीता रामायण 18 पुराण उपनिषद जो मान्य है वेद महाभारत इत्यादि में hindu सब्द दिखाए | महाभारत और गीता ५००० पुराना है उसी में चलो hindu सब्द दिखा दें | और सब को मैं प्रमाण में नहीं मान सकता | उनमे hindu सब्द दिखाए आपका जवाब की प्रतीक्षा में | धन्यवाद |

    2. Madan ji aapne sahi kaha in bewkuffo ko farsi kitab parmanik lag raha hai bahut bare bekuf hai acha hoga ki ramayan or mahabharat se v agar dikha sakhe to or acha rhe ga

    3. 22) स्वतंत्रता के बाद किसी ने ‘- शब्द कोश व भारतीय संस्कृति को संभालने की कोशीष ही नहीं की – शब्द कोषों में साफ लिखा है कि -हिन्द -हिंदी -हिन्दू -हिन्दुस्थान आदि फारसी -शब्द है ।
      शब्दकोषों में रामकृष्ण वर्मा 1950 के शब्द कोष के पेज 1193 । डाॅ. हरदेव बाहरी के शब्द संस्करण 2008 के पेज 878-879 देखे।

      हिंदुस्तान -पुं ० [फा ० हिन्दोस्तान ]१.
      भारतवर्ष ।२.दिल्ली से पटने तक का
      भारत का उतरीय और मध्य भाग ।
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      हिन्दू -पुं ० [फा०] [भाव० हिन्दूपन ,हिंदुत्व ]
      भारतीय आर्यों के वर्तमान भारतीय
      वंशज जो वेदों ,स्मृति ,पुराण आदि को
      अपने धर्म-ग्रन्थ मानते हैं |(
      (संसार में सभी जातियों के वंशज उसी जाति के हैं। भारत में आर्यों के वंशज हिन्दू –मुसलमान क्यों?

    4. हिन्दू शब्द फारसी है ,डॉ हरदेव बाहरी ,रामकृष्ण वर्मा आदि के शब्द कोष कहते है
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      हिन्दू शब्द के बारे में >
      फारस में लेखक हमारे लेखक कहते है>
      इस शब्द का तात्पर्य ‘दास’ है और इस्लाम के अनुसार वो सारे लोग जिन्होंने इस्लाम को नहीं अपनाया था उनको दास बना दिया गया।
      आगे ‘काला’ और ‘दास’ संकलन में फारसी और उर्दू भाषा के शब्द कोष यह वर्णन करते है कि यह अर्थहीन और घ्रणित ‘हिन्दू’ शब्द का अर्थ है- फारसी भाषा का शब्दकोष – ल्युजत-ए-किशवारी, लखनऊ 1964, चोर, डाकू, राहजन, गुलाम, दास। उर्दू फिरोजउल लजत-प्रथम भाग पृ. 615, तुर्की चोर, राहजन, लूटेरा: फारसी गुलाम, दास, बारदा (आज्ञाकारी नौकर), शियाकाम (काला) पेज 376 भार्गव शब्द कोष बारवां संकलन 1965 भी देखे)
      परसियन – पंजाबी (डिक्सनरी) शब्द कोश (पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला) भारतीय उपमहाद्वीप के निवासी, डाकू, राहजन, चोर, दास, काला, आलसी।
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      हिन्दू का अर्थ अपमानजनक है, खुद देखो >तत्कालीन मंत्री डॉ नज़माहेपतुल्ला29 अगस्त 2014
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      सभी जातियों के वंशज उसी जाति के हैं। भारत में आर्यों के वंशज हिन्दू –मुसलमान क्यों?
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      हमारे शब्द कोष कहते है
      आर्यों के वंशज हिन्दू,
      आर्यों के वंशज तो आर्य ही होंगे
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      हिन्दू शब्द फारसी है इसका अर्थ फारसी शब्द कोषों में गुलाम ,चोर ,लुटेरा आदि बताया है
      भगवान प्रजापति ,ब्रह्माण्ड गुरु ,
      अधिष्ठाता >प्रकृति शक्ति पीठ ,आर्यावर्त भारत >7737957772

  3. अफ़सोस यही है कि आप जेसे विद्वानों की नज़रों से आठवीं शती से पूर्व का गृन्थ मेरुतंत्र ,भविष्य पुराण, मेदनी कोष,हेमन्त कोषी कोष ,राम कोष,कालिका पुराण, शब्द कल्पद्रुम ,बृहस्पति आगम ,अद्भुत कोष नही गुजरे ।
    इन गृन्थों का उल्लेख इसलिए आवश्यक है कि इनमे ” हिन्दू” शब्द की प्राचीनता की झलक मिलती है ।
    बृहस्पति आगम में भारत की सीमा निर्धारित करते हुए कहा गया है !
    हिमालयं समारस्य यावादिन्दुसरोवरम् !
    तं देव निर्मितं देशं हिदुस्थानं प्रचक्षते !!
    इतिहास वेत्ता यह जानते होंगे जिस समय भारत में बुद्ध हुए उसी समय चीन में महान दार्शनिक कन्फ़्युशियस भी हुए तथा उनसे भी पहले के फारस देश के जरथुष्ट्र को शास्तार्थ में महर्षि व्यास ने पराजित किया था -उनके ही धर्म गृन्थ के 163 वें आयत में लिखा है –
    ” अकनु विर हमने व्यास नाम अज हिन्द आमद दाना कि अकल चुनानेस्त वृं व्यास हिन्दी वलख आमद ,गस्ताशप जरतस्त रख ,ख्वानंद मन मरदे अम हिन्दी निजात व हिन्दुवा जगस्त”
    उपर्युक्त प्रमाण में भारत देश का नाम हिन्दू और हिन्दी शब्द का व्यवहार साहित्य में प्राचीन काल से होता आया है ।
    इसके अतिरिक्त पौराणिक साहित्य एवं तंत्र गृन्थों आदि में भी प्रचुरता से हिन्दू शब्द अनेक स्थलों में विद्यमान है जैसे –
    हिन्दू धर्म प्रलोप्तारो जायन्ते चक्रवर्तिन : !
    हीनं च दुशयत्येव हिन्दूरित्युच्यते प्रिये !!
    ( मेरुतंत्र प्रकाश )
    हिनस्ति तपसा पापान देहिकान् दुष्टमानसान !
    हेतिभिः शत्रु वर्गं च स हिन्दुर भिधीयते !!
    ( पारिजात हरण )
    यवन रैवनिः क्रांता हिन्दवो विन्ध्य्माविशन् !!
    ( शांग्धर पद्दति /कालिका पुराण)
    हीनं दूषयति इति हिन्दू: !! ( शब्द कल्पद्रुम कोष)
    ओंकार मूल मंत्राद्यः पुनर्जन्म दृढ़ाशयः !
    गो भक्तो भारत गुरु हिन्दुर्हिसन दूषकः !!
    ( माधव दिग्विजय )
    हिंसया दूयते यश्च सदाचरण तत्परः !
    वेद गोप्रतिमासेवी स हिन्दूमुख शब्द भाक् !!
    ( वृद्ध स्मृति )
    हिन्दुर्हिंदुश्च हिन्दवः !!
    ( मेदनी कोष )

    1. कहा कहा से नया नया ग्रन्थ की उत्पत्ति कर रहे हैं महाशय ? जैसे मुस्लिम संग्राम पुराण की उद्धरण देते हैं जबकि है ही नहीं पुराण वो बाजार में उसी प्रकार वृद्ध स्नृति सब कहा से ले आये कालिका पुराण कहा से ले आये | किसी ने कुछ लिख दिया उसे हम स्वीकार नहीं करते | ५००० साल पहले महाभारत आया है उसी में hindu सब्द दिखा दें गीता में दिखा दें …. रामायण सब तो लाखो वर्ष पहले की बात है गीता महाभारत में ही दिखा दें या जो 18 प्रमाणिक पुराण है उससे हमें दिखा देना | आपका जवाब की प्रतीक्षा में | धन्यवाद |

    2. आपने जो ग्रंथ बताए हैये प्रमाणित नहीं है >प्रमाणित शास्त्रो में हिन्दू शब्द नहीं है ये झूठे तथ्य देकर आप इस्लाम के भय से ग्रसित है >
      सत्य -सदियों-धूल-पत्थरों से दबा रहकर भी बाहर आ जाता है।
      …………………………………………………………………..
      (1) पूज्य गुरू गोविन्द सिंह, पूज्य छत्रपति शिवाजी महान आदि कई राजा-महाराजाओं महामानवों ने हिन्दूओं को बचाया यह परम सत्य है। परन्तु वो हिन्दू कौन थे? कहां से आये? क्या करते थे? हिन्दू शब्द किस भाषा का है? हिन्दू का शाब्दिक अर्थ क्या है?
      (2) जबकि सत्य यह है कि भारतीय भू-भाग में तो देव-सुर आर्य रहते थे। आर्यो का साम्राज्य था। यह वैदिक सनातन, ऐतिहासिक सत्य हैं। उन आर्यों का क्या हुआ? वो आर्य कहां गये? वो जहां से आये वहां चले गये या यही मर खप गये? या हिन्दूओं ने उन्हें खदेड़ दिया? अब भारतीय भू-भाग पर ‘आर्य संस्कृति’ के आर्य नहीं है। बल्कि ‘आर्य समाज’ नाम की 179 वर्ष पुरानी एक संस्था है जिसके सदस्य स्वयंभू अहंकारी है जो अपने आप को आर्य कहते हैं परन्तु इस्लाम से प्रभावित है तथा हिन्दुत्व का काम करते हैं और जब चाहे तब आर्य संस्कृति-सनातन धर्म के तीर्थ स्थलों व पूजा – पद्धति की निन्दा कर देते है। राम के वंशज पूज्य गुरु नानक देवजी की भी निन्दा की है –
      (3) यह भी ऐतिहासिक सत्य है कि विदेशी, इस्लामी, आक्रांताओं ने भारतीय भू-भाग के आर्यों को, द्रविड़ों को मुसलमान व हिन्दू बनाया।
      (4) यह भी ऐतिहासिक सत्य है जो आर्य कमजोर थे। वे इस्लामी शासकों के अत्याचार सह नहीं सके और उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार किया व मुसलमान बन गये। जो बहादूर शासक थे वे इस्लामी शासकों के हिन्दू बने, नौकर बने यानि गुलाम बने, परन्तु धर्म परिवर्तन नहीं किया।
      (5) यह भी सत्य है कि बचे हुए हिन्दूओं को भी जब इस्लामी शासकों ने मुसलमान बनाने का जबरदस्ती प्रयास किया तो हमारे पूर्वज महामानवों ने हिन्दूओं को बचाया। यानि उस समय वे हिन्दूओं को नहीं बचाते तो आज सभी मुसलमान हो जाते और भारतवर्ष वास्तव में हिन्दुस्तान हो जाता। इसी पर आधारित है ये हमारा सत्य से सत्य की खोज का प्रार्थना पत्र है – कृपया इसे पढ़ने का तो अवश्य ही कष्ट करें।
      (6) ॐ-ईश्वर रचित सृश्टि उत्पति से, ॐ-ईश्वर रचित –
      सतयुग से सनातन के- ईष्वर रचित वेदों व सनातन धर्म के किसी भी प्रमाणित शास्त्र में ‘‘हिदू’’ शब्द नहीं है !

      ———————————————————————————7) ४ -चारों वेदों -में -नहीं है – शब्दहिन्दू’ !!
      १-ऋग्वेद २-यजुर्वेद ३- सामवेद ४- अथर्ववेद
      (8) ४-चारों उपवेदों -में -नहीं है -शब्द ‘हिन्दूू’
      १- आयुर्वेद २- धनुर्वेद ३- गन्धर्ववेद ४-अर्थवेद
      (9) ६ – छ: दर्षन शास्त्रों-में -नहीं है -शब्द ‘हिन्दू ’।
      १-मीमांसा दर्षन – जैमिनी २-साख्य दर्शन – कपिल
      ३-न्याय दर्शन – गौतम ४-विषेशिक -वाद
      ५-योग दर्शन —पतंजलि ६-वेदांत दर्शन —वेदव्यास
      (10) ६- छ -अंग में -में -नहीं है शब्द ‘हिन्दू’!
      १- षिक्षा २- कल्प ३-व्याकरण ४- सिरुक्त ५-छंद ६-ज्योतिश
      (11) ४- चार ब्राह्मण ग्रंथों में नहीं है -शब्दहिन्दू’-!!!
      १ षतपथ ब्राह्मण २ऐतरेय ब्राह्मण ३ ताण्डय ब्राह्मण ४ गोपथ ब्राह्मण
      (12) १०३- उपनिशदों में से- तेरह -का महत्त्व है पर ग्यारह ही ज्यादा महत्त्व रखते है।-बाकी के दो का भी विषेश स्थान है में -नहीं है -शब्द ‘हिन्दू ’-!!!
      १-ईसोपनिषद २-केनोपनिषद ३- कठपनिषद ४-प्रष्नोपनिषद
      ५-मुण्डकोपनिषद ६-एतरेयोपनिशद ७- मांडूक्योपनिशद
      ८- छान्दोग्योपनिषद ९- तैतिरीयोपनिषद १०-वृहदोपनिषद
      ११-मैत्रायणी -आख्योपनिषद १२-श्वेतास्वर १३ कोशीतकि
      (13)गीता – मनुस्मृति को मान्य शास्त्रों में माना हैं -नहीं है -शब्दहिन्दू’!
      (14) वाल्मीकी रामायण में नहीं है शब्द‘हिन्दू’!!!
      (15) महाभारत – तुलसी -रामायण में नहीं है -शब्द ‘हिन्दू ’-!!!
      (16) हमारी देव भाषा संस्कृत व देवनागरी में नहीं है -शब्द ‘हिन्दू ’!!!
      (17) हम यदि पुराणों की बात भी करे तो उसमें भी हिन्दू शब्द नहीं है। परन्तु पुराणों में वैज्ञानिक रहस्य छुपा हुआ है उसको हमने समझा है।
      (18) आप -हम साहित्य, पुस्तकें -उपन्यास -कहानिया में जो लिखेंगे वे आपके- हमारे विचार है – उसको सनातन धर्म आर्य-संस्कृति मान्यता नहीं देती । सही और गलत का फैसला तथाकथित हर किसी के लिखने से नहीं -अपितु हमारे मान्य वेद-उपनिषद आदि से होता है।
      (19) वैसे आप लाला लाजपतराय से बड़े हो तो और बात है -उन्होंने भी १८९८ में कहा था कि -हिन्दू शब्द भारतीय आर्यों को इस्लामिक आक्रंताओ ने जबरदस्ती थोपा है । जिसका अर्थ -गुलाम -चोर आदि ही है । हिन्दू शब्द का अर्थ क्या है?
      उत्तर: हिन्दू का अर्थ है-लाला लाजपत राय ने अपने परिचय में – महर्षि दयानन्द के लाहौर 1898 के परिचय के बारे में कहा: लेखक के अनुसार कुछ लोग कहते है कि हिन्दू है जो कि सिन्धु का बिगड़ा हुआ नाम है लेकिन यह गलत है। परन्तु सिन्धु एक नदी का नाम है। किसी समुदाय का नाम नहीं है । यह सही है कि यह नाम असली आर्यन जाति को दिया गया है जो कि इस क्षेत्र में मुस्लिम आक्रान्ताओं द्वारा अपमानित करने के लिए इस नाम से पुकारी जाती थी। फारस में लेखक हमारे लेखक कहते है इस शब्द का तात्पर्य ‘दास’ है और इस्लाम के अनुसार वो सारे लोग जिन्होंने इस्लाम को नहीं अपनाया था उनको दास बना दिया गया।
      (20)हिन्दू शब्द -९९७ ईं में महमूद गजनवीने पहला डाका डाला था। गजनवी ने २७ डाकेभारत में डाले थे -के साथ व बाद के आक्रान्ताओ ने भारतीय भू -भाग के सनातन आर्यों को- जैनों -बोद्धो को गाजर -मूली की तरह काटा था और हिन्दू / गुलाम, मुसलमान बनाये। ये ही सत्य है ।
      (21) सदियों वर्षों की इस्लामी गुलामी में हमारे पूर्वज अपनी पहचान भूल गए – फिर इंगलिश गुलामी में रहते 2 तो सब कुछ-बदल गया, क्योंकि हिन्दू -मुस्लिम एक्ट अंग्रेजों ने जो बना दिया ।

    3. 8वीं सदी मे ये ग्रंथ होते तो आदि शंकराचार्य ने जब 788 ई -832 ई मे सनातन धर्म का पुनरुद्धार किया था तब ये विवरण आता
      क्यो झूठ बोलकर इस्लाम के भक्त बन रहे हो और अपनी सनातन संस्कृति के साथ गद्दारी कर रहे हो >जब संस्कृत कहती है हमारा शब्द नहीं है ,>हमारे प्रमाणित शास्त्रों मे नहीं है तो फिर ये 17वीं सदी की झूठी पुस्तकों का हवाला देना तो ये ही दर्शाता है >>इस्लाम के अब भी पुजारी हो >
      देखो अकाट्य प्रमाण >इन प्रमाणो का कहीं तोड़ नहीं है >हाँ यदि कोई गद्दार है तो इसे स्वीकार नहीं करेगा >>>>>>>
      हिन्दू शब्द फारसी है ,डॉ हरदेव बाहरी ,रामकृष्ण वर्मा आदि के शब्द कोष कहते है
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      हिन्दू शब्द के बारे में >
      फारस में लेखक हमारे लेखक कहते है>
      इस शब्द का तात्पर्य ‘दास’ है और इस्लाम के अनुसार वो सारे लोग जिन्होंने इस्लाम को नहीं अपनाया था उनको दास बना दिया गया।
      आगे ‘काला’ और ‘दास’ संकलन में फारसी और उर्दू भाषा के शब्द कोष यह वर्णन करते है कि यह अर्थहीन और घ्रणित ‘हिन्दू’ शब्द का अर्थ है- फारसी भाषा का शब्दकोष – ल्युजत-ए-किशवारी, लखनऊ 1964, चोर, डाकू, राहजन, गुलाम, दास। उर्दू फिरोजउल लजत-प्रथम भाग पृ. 615, तुर्की चोर, राहजन, लूटेरा: फारसी गुलाम, दास, बारदा (आज्ञाकारी नौकर), शियाकाम (काला) पेज 376 भार्गव शब्द कोष बारवां संकलन 1965 भी देखे)
      परसियन – पंजाबी (डिक्सनरी) शब्द कोश (पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला) भारतीय उपमहाद्वीप के निवासी, डाकू, राहजन, चोर, दास, काला, आलसी।
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      हिन्दू का अर्थ अपमानजनक है, खुद देखो >तत्कालीन मंत्री डॉ नज़माहेपतुल्ला29 अगस्त 2014
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      सभी जातियों के वंशज उसी जाति के हैं। भारत में आर्यों के वंशज हिन्दू –मुसलमान क्यों?
      ——————————————————————–
      हमारे शब्द कोष कहते है
      आर्यों के वंशज हिन्दू,
      आर्यों के वंशज तो आर्य ही होंगे
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      हिन्दू शब्द फारसी है इसका अर्थ फारसी शब्द कोषों में गुलाम ,चोर ,लुटेरा आदि बताया है
      भगवान प्रजापति ,ब्रह्माण्ड गुरु ,
      अधिष्ठाता >प्रकृति शक्ति पीठ ,आर्यावर्त भारत >7737957772

    4. सत्य वचन ।>>>>>>>
      हिन्दू शब्द फारसी है ,डॉ हरदेव बाहरी ,रामकृष्ण वर्मा आदि के शब्द कोष कहते है
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      हिन्दू शब्द के बारे में >
      फारस में लेखक हमारे लेखक कहते है>
      इस शब्द का तात्पर्य ‘दास’ है और इस्लाम के अनुसार वो सारे लोग जिन्होंने इस्लाम को नहीं अपनाया था उनको दास बना दिया गया।
      आगे ‘काला’ और ‘दास’ संकलन में फारसी और उर्दू भाषा के शब्द कोष यह वर्णन करते है कि यह अर्थहीन और घ्रणित ‘हिन्दू’ शब्द का अर्थ है- फारसी भाषा का शब्दकोष – ल्युजत-ए-किशवारी, लखनऊ 1964, चोर, डाकू, राहजन, गुलाम, दास। उर्दू फिरोजउल लजत-प्रथम भाग पृ. 615, तुर्की चोर, राहजन, लूटेरा: फारसी गुलाम, दास, बारदा (आज्ञाकारी नौकर), शियाकाम (काला) पेज 376 भार्गव शब्द कोष बारवां संकलन 1965 भी देखे)
      परसियन – पंजाबी (डिक्सनरी) शब्द कोश (पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला) भारतीय उपमहाद्वीप के निवासी, डाकू, राहजन, चोर, दास, काला, आलसी।
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      हिन्दू का अर्थ अपमानजनक है, खुद देखो >तत्कालीन मंत्री डॉ नज़माहेपतुल्ला29 अगस्त 2014
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      सभी जातियों के वंशज उसी जाति के हैं। भारत में आर्यों के वंशज हिन्दू –मुसलमान क्यों?
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      हमारे शब्द कोष कहते है
      आर्यों के वंशज हिन्दू,
      आर्यों के वंशज तो आर्य ही होंगे
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      हिन्दू शब्द फारसी है इसका अर्थ फारसी शब्द कोषों में गुलाम ,चोर ,लुटेरा आदि बताया है
      भगवान प्रजापति ,ब्रह्माण्ड गुरु ,
      अधिष्ठाता >प्रकृति शक्ति पीठ ,आर्यावर्त भारत >7737957772

  4. आपको इन मुसलमानों के ग्रंथों का संदर्भ तो प्रमाणिक लगा किंतु अपने ग्रंथ आपके द्वारा नहीं देखे जा सकते अफसोस उसी का है

    1. जनाब हाँ खोजबीन कर ही कुछ लेख डालते हैं १८ पुराण से रामायण गीता महाभारत से ही hindu सब्द दिखा दें जो प्रमाणिक हैं |

  5. मैं तो अबोध बालक हूं, धर्म ज्ञान के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। लेकिन अपनी 23 वर्ष आयु में इतना ही समझ सका हूं कि हिन्दू या आर्य या जो भी हैं वो कई हिस्सों में बांटे हुए प्रतीत होते है जैसे आरएसएस की परिभाषा अलग है इसलिए बहुत बदी जनसंख्या उनका अनुसरण करती हैं, लेकिन दूसरी ओर आर्यसमाज है हिंदुत्व की परिभाषा का कुछ और व्याख्यान करते हैं और इनकी ओर भी बहुत बड़ी जनसंख्या किसी उम्मीद में बेठी है।
    अगर आर्यसमाजी और आरएसएस आपस में तालमेल आज ही बना ले तो भारत की एकता बनीं रहेगी। वरना आपका हमारा और यहां की संसकृति का विनाश निश्चित दिखता है।
    कृपया पूरे जनमानस को सकता पाठ सिखाए, जिससे हम कभी कमजोर ना हों।
    एक भारतीय।🙏

    1. mere bhai aapko kisne bol diya ki rss ki soch ke baare me…. rss aarysamaj kaa samarthn karta hai aur kai baar samarthn me aaya haai …..

    2. आरएसएस और वीएचपी तो हमारी मूल संस्कृति को समाप्त करने लग गई है इनके झंडो में ओउम खोटा है >>>>>>>>>>>>
      आओ सनातन धर्म आर्य संस्कृति की अक्षुण्णता के महायज्ञ में शामिल होवें।
      जब कानूनी दांव-पेंच उलझ जाता है तो संविधान से अन्तिम निर्णय होता है इसी तरह सनातन धर्म संस्कृति का सत्य भी प्रमाणित शास्त्र ही करेगें न कि मनगढ़त किताबें। -भगवान प्रजापति
      हे महामानवों, आर्यावर्त, भारतवर्ष की आर्य संस्कृति सनातन धर्मेव जयते की अक्षुण्णता व व्यापकता के लिए मैं/हम वर्षों से संघर्षरत हैं। हमनें हर प्रकार से, हर क्षेत्र में हमारे साधनों से, गोष्ठियों से व्याख्यानों से, लेखनों से सोशल मीडिया से सरकार को, राजनेताओं को, सामाजिक संगठनों को, जनसाधारण को समझाने का हर सम्भव प्रयास किया है।
      हमने लगभग 30 वर्षों के इस संघर्षरत सफर में स्वअर्जित (खेत व घर) सम्पदा को अधिकांश स्वाहा कर दिया है। क्योंकि चन्दा हमने किया नहीं। चन्दे में कालाधन आने की आशंका रहती है। कालेधन को सत्य से सत्य की खोज के लिए लगाना उचित नहीं समझा। कालेधन से जो आज कार्य कर रहे है उनका परिणाम काला ही है। इसका प्रत्यक्ष परिणाम है
      ही सृष्टि रचियता है उसे वर्णमाला का बड़ा ऊँ अशुद्ध लिखा जाने लगा है।
      चैत्र शुक्ल एकम सृष्टि रचना का दिन है! सनातन धर्म का नवदिवस है। विक्रम संवत का नव दिवस है इनको लुप्त करके हिन्दू धर्म का हिन्दू नव दिवस बताने के पीछे यही बात है कि कोई आकर शक्ति/धन बल से कहे कि तुम्हारे माता-पिता व पूर्वोजों का नाम हम जो बताएं वही है।
      बताओं हिन्दु शब्द कौनसे शास्त्र में है और हिन्दु धर्म का प्रवर्तक कौन है।
      यही नहीं भारत को हिन्दुस्तान व इण्डिया बना दिया। आर्यों को हिन्दू व मुसलमान बना दिया। हस्तिनापुर/इन्द्रप्रस्थ को दिल्ली बना दिया। इन्दू सरोवर को हिन्द सरोवर बना दिया, सब जातियों की पूर्व जाति कुम्हार/प्रजापति को कुमावत बनाया जा रहा है। ओर तो ओर अष्टांग योग की पहचान उछल-कुद को योग बताया जा रहा है। अब बताओ हमारी मूल पहचान क्या है? हम कौन है? हमारे पूर्वजों की संस्कृति क्या है? हमारे पूर्वज कौन हैं? आदि! आदि की पहचान समाप्त करके हमें संस्कृति की जड़ों से काटा जा रहा है।
      अतः हर संभव प्रयास के बाद हमने अब भारत की मुख्य सत्ता कानून की शरण में जाने का निश्चय किया है कि हो सकता है कोई विद्वान आर्य संस्कृति सनातन धर्मेव जयते को समझते हुवे हमारे साथ आ जावें और हमने जो अकाट्य साक्ष्य सत्य से सत्य की खोज से प्राप्त किये हैं उसे समझकर सनातन धर्म संस्कृति की अक्षुण्ण्ता के महायज्ञ में शामिल हो। इसी विश्वास के साथ। एक बात और जो लोग आज चाणक्य को न समझकर राष्ट्रीय मानवीय सनातन धर्म संस्कृति के साथ गद्दारी कर रहे हैं वे आने वाले समय में जयचन्द की तरह सनातन धर्म संस्कृति के इतिहास में होंगे।
      ब्रह्माण्डगुरु भगवान प्रजापति-अधिष्ठाता प्रकृति शक्ति पीठ, खेजड़ा एक्सप्रेस
      (संसार में सभी जातियों के वंशज उसी जाति के हैं। भारत में आर्यों के वंशज हिन्दू –मुसलमान क्यों?कैसे?जानिये!)https://www.facebook.com/photo.php?fbid=797345143759830&set=pcb.797345220426489&type=3

  6. इस्लाम तो हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान का कोई भी अर्थ निकाल सकता है ‘लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हम अपने आप को हिन्दू न कह कर मुस्लिम कहने लगे। हमें पता है हिन्दुत्व क्या है, विश्व जानता है कि हिंदू क्या है और कोन हैं। और यदि इस के पश्चात भी कुछ कुत्ते भौंकते है तो भौंकने दो…..

    1. bhasha ki shaleeltaa aap banaye rakhen?
      yadi aap lekhak ki bat se sahmat nahene hein to tark purn uttar hein

      Hamare kisee bhee granth men Hindu shabd ka varnan naheen hein
      ye Mlecchon ki bhasha ka shabd hai

    2. तो फिर डॉ हरदेव बाहरी का शब्द कोश झूठा है >>देखो शब्द कोश क्या कहते है >,22) स्वतंत्रता के बाद किसी ने ‘- शब्द कोश व भारतीय संस्कृति को संभालने की कोशीष ही नहीं की – शब्द कोषों में साफ लिखा है कि -हिन्द -हिंदी -हिन्दू -हिन्दुस्थान आदि फारसी -शब्द है ।
      शब्दकोषों में रामकृष्ण वर्मा 1950 के शब्द कोष के पेज 1193 । डाॅ. हरदेव बाहरी के शब्द संस्करण 2008 के पेज 878-879 देखे।

      हिंदुस्तान -पुं ० [फा ० हिन्दोस्तान ]१.
      भारतवर्ष ।२.दिल्ली से पटने तक का
      भारत का उतरीय और मध्य भाग ।
      —————————————————————-
      हिन्दू -पुं ० [फा०] [भाव० हिन्दूपन ,हिंदुत्व ]
      भारतीय आर्यों के वर्तमान भारतीय
      वंशज जो वेदों ,स्मृति ,पुराण आदि को
      अपने धर्म-ग्रन्थ मानते हैं |
      ————————————-
      संसार में सभी जातियों के वंशज उसी जाति के हैं। भारत में आर्यों के वंशज हिन्दू –मुसलमान क्यों?
      ——————-
      (22) फारसी -उर्दू शब्द कोशों में हिन्दू का अर्थ बताया है -गुलाम -आज्ञाकारी नौकर-डाकू -चोर -राहजन आदि आदि।
      (23)आगे ‘काला’ और ‘दास’ संकलन में फारसी और उर्दू भाषा के शब्द कोष यह वर्णन करते है । भारत के आर्यों को गुलाम व मुसलमान बना लिया। 1.फारसी भाषा का शब्द कोष – ल्युजत-ए-किषवारी, लखनऊ 1964 में चोर, डाकू, राहजन, गुलाम, दास। 2.उर्दू फिरोजउल लजत-प्रथम भाग पृ. 615, तुर्की में चोर, राहजन, लूटेरा, फारसी गुलाम, दास, बारदा (आज्ञाकारी नौकर),3. षियाकाम में (काला) 4. परसियन – पंजाबी (डिक्सनरी) शब्द कोष (पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला) में भारतीय उपमहाद्वीप के निवासी, डाकू, राहजन, चोर, दास, काला, आलसी। 5. पेज 376 भार्गव शब्द कोष बारवां संकलन 1965 भी देखे)
      (24) हिन्दू न ही हमारा -शब्द है न ही हमारी जाति है न ही हमारा धर्म है । यह सत्य है।

    3. https://www.facebook.com/photo.php?fbid=795476370613374&set=a.122352747925743.23245.100004530542111&type=3 स पोस्ट को अवश्य पढे
      !!!सावचेत हो जाओ !!!
      आर्यावर्त भारत की मूल सनातन धर्म संकृति को गद्दार लुप्त करने का जोरदार षडयंत्र चल रहे है
      आप पवित्र आर्यावर्त भारत भूमि के देववृति के हैं तो आईये आर्यावर्त भारत भूमिकी मूल सनातन धर्म संस्कृति को बचावें> क्योंकि >
      >असुरों ने >विदेशी लुटेरो ,आक्रमणकारियों ने >ब्रह्मांड के रचीयता ,सनातन धर्म के प्रवर्तक > ओउम को अशुद्ध बना दिया >शुद्ध ओउम न तो इंटरनेट पर है न ही कमप्यूटर मे है >
      जो है वे सभी वर्णमाला के बड़े ऊ के रुपक है
      > आर्यावर्त भारत भूमिको >हिंदुस्तान और इंडिया बना दिया
      >हस्तिनापुर/इद्रप्रस्थ को दिल्ली बना दिया
      >इन्दु सरोवरको हिन्द महासागर बना दिया (इन्दु ,यानि चंद्रमा के नाम समुन्द्र मंथन के समय नाम रखा था )
      आर्यावर्त भारत भूमिमे आर्य रहते थे उन्हे हिन्दू -मुसलमान बना दिया
      >सनातन धर्म को हिन्दू धर्म बनाने का प्रयास चल रहा है
      >चैत्र शुक्ल एकम को सृष्टि रचना के दिन को>चैत्र शुक्ल सनातन धर्म केदिन को >चैत्र शुक्ल एकम विक्रम संवत को >>हिन्दू धर्म का हिन्दू दिवस बनाने का असुर पुरजोर कोशीश कर रहें है
      >>>सब जतियों की पूर्वज कुम्हार /प्रजापति जाति को कुमावत बनाने का भी षडयंत्र चल रहा है
      >धार्मिक कृत्यो व(अन्य वाहनो ,दुकानों ,मस्जिदों आदि ) मे स्पीकर रूपी आसुरी कर्कश आवाज से मूल एकाग्रहता पर भारी आघात हो रहा है ,पाप ,रोग बढ़ रहे है >>सबसे बड़ा भयानक खतरा ये है >मानव के साथ पशु पक्षी भी पागलपन की ओर बढ़ रहे है
      >>>जबकि ध्वनि प्रदूषण के कानून मेरी बात को हलके मे ले रखा है जबकि पटाखे स्पीकर खतरनाक ही नहीं बेहद खतरनाक है डीजे तो साक्षात राक्षस है ,डीजे से घर भी कांपते है मनुष्य व बचो ,पशु -पक्षियों की तो हालत ही खराब हो जाती है >>जरा सोचो
      >>मंदिरों के असुर रूपी स्पीकर गीता /भगवान का घोर अपमान कर रहे है >>>
      >किसी भी काल में>>यानि ज्ञान को किसी भी काल में >तप रहित ,भक्ति रहित ,न सुनने वाले को न सुनावे और जो मेरा (ईश )निदक है उसे तो कभी भी न सुनावे !!!
      >>> जब निदक मंदिर ,मस्जिद ,गुरुद्वारे के आगे से निकलता है या धार्मिक कृत्यों के आगे से निकलता है और वहाँ स्पीकर की कर्कस आसुरी शोर को सुनकर गाली बकता है कहता है >अफण्ड कर रहे, आध्यात्मिक लूट कर रहे है आदि आदि अनेक तरह के अभद्र भाषा बोलता हुवा चला जाता है
      >>>सुप्रीम कोर्ट का ध्वनि प्रदूषण के कानून मे जो बताया है उससे भी ज्यादा खतरनाक है ये शोर जो प्राणियों को पागल बना रहा है
      आइये आप सभी मिलकर सनातन धर्म संस्कृति को बचाने के लिए देव बनो और असुर शक्ति को विध्वंस करो !
      क्योंकि गीता मे भगवान कहते है >आसुरी प्रवर्ति के लोग अपने विधान खुद बना लेते है !
      ॐ तत्सत!आर्य संस्कृति सनातन धर्मेव जयते !!!
      >>>>
      >>शुद्ध ओउम नीचे देखे >>इसे हमें इंटरनेट पर व कमप्यूटर में डलवाना है !
      Image may contain: text
      Bhagwan Prajapati Brahmandguru-adhishthata
      August 2 at 4:21pm ·
      इस स्टिकरको shareकरो ,छपवाओऔर बांटो ,
      आर्य संस्कृति सनातन धर्मेव जयते!
      https://www.facebook.com/photo.php?fbid=795476370613374&set=a.122352747925743.23245.100004530542111&type=3

      1. सब जतियों की पूर्वज कुम्हार /प्रजापति जाति को कुमावत बनाने का भी षडयंत्र चल रहा है | इसका क्या मतलब ? थोडा समझाने की कोशिश करना जी | और भी बहुत सी बात है जिसपर चर्चा की जा सकती है

  7. इन को आर्ष-अनार्ष का कुछ ज्ञान ही नहीं । इस लिए इनकी बातों पर ध्यान न दें ।

  8. आपने जो‌ हिन्दु शब्द कि व्याख्या की है उसका लिखित प्रमाण है आपके पास ? है तो इस नंबर पर भेजे 7739328059

    हिन्दु राष्ट्रीयता है इसका मेरे पास लिखित प्रमाण है चाहिए तो अपना नंबर दीजिए मै चित्र के साथ भेजता हूँ।

    1. भाई हमें रामायण गीता महाभारत इत्यादि में लिखा हुवा प्रमाण दे दे की हिन्दू सब्द आता है उसमे | हमारे फेसबुक पेज पर आप इनबॉक्स में प्रमाण के साथ भेज दीजिये आपका इन्तजार रहेगा | फिर हम अशोक आर्य जी से आपका प्रमाण देने को बोलेंगे

  9. Jo log Veda rishi maharishiyon ke pavitra vichaaron ko tyaag kar geir (foreign) baton ko maan lete hain eise logon ke kaaran hi ham gulam bane aur aaj bhi gulami ka prabhav samaj mein dekte hain. jab Ved Upanishad, Ramayana, Mahabharata sabhi pustakon mein Arya naam hai to muslamanon ka diyaa huaa naam kyon svikaar kerein?

  10. गर्व से कहो हम हिन्दू है।
    इन मुल्लो गडुओ का क्या कहना ये तो अपनी बहन को भी बीबी बना लेते है।
    जय जय श्री राम
    हाँ में हिन्दू हु।

    1. किसने मना किया है की खुद को हिन्दू मत बोलो | बोलते जाओ | बस यह ध्यान रखना की हिन्दू सब्द आपके किसी पौराणिक ग्रन्थ में नहीं आया | जिन्होंने हिन्दू नाम दिया उन्ही के नाम को स्वीकार करते हो जो आपकी पूर्वज का क़त्ल किया था | और आप उन्ही की कब्रों पर जाकर पूजा करो |

    2. संसार में सभी जातियों के वंशज उसी जाति के हैं। भारत में आर्यों के वंशज हिन्दू –मुसलमान क्यों?
      22) स्वतंत्रता के बाद किसी ने ‘- शब्द कोश व भारतीय संस्कृति को संभालने की कोशीष ही नहीं की – शब्द कोषों में साफ लिखा है कि -हिन्द -हिंदी -हिन्दू -हिन्दुस्थान आदि फारसी -शब्द है ।
      शब्दकोषों में रामकृष्ण वर्मा 1950 के शब्द कोष के पेज 1193 । डाॅ. हरदेव बाहरी के शब्द संस्करण 2008 के पेज 878-879 देखे।

      हिंदुस्तान -पुं ० [फा ० हिन्दोस्तान ]१.
      भारतवर्ष ।२.दिल्ली से पटने तक का
      भारत का उतरीय और मध्य भाग ।
      —————————————————————–
      हिन्दू -पुं ० [फा०] [भाव० हिन्दूपन ,हिंदुत्व ]
      भारतीय आर्यों के वर्तमान भारतीय
      वंशज जो वेदों ,स्मृति ,पुराण आदि को
      अपने धर्म-ग्रन्थ मानते हैं |(

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