HADEES : ON MARRYING A VIRGIN

ON MARRYING A VIRGIN

In other ahAdIs, the Prophet touches upon the excellence of marrying a virgin (3458-3464). JAbir reports: �The Apostle of Allah said: �JAbir, have you married?� I said, �yes.� He said: �A virgin or one previously married?� I said: �with one previously married,� whereupon he said: �Why did you not marry a virgin with whom you could sport?� � (3458), or �who might amuse you and you might amuse her� (3464).

author : ram swarup

पेरियार रचित सच्ची रामायण की पोलखोल भाग-१४

पेरियार रचित सच्ची रामायण की पोलखोल भाग-१४*
*अर्थात् पेरियार द्वारा रामायण पर किये आक्षेपों का मुंहतोड़ जवाब*
*-कार्तिक अय्यर*
नमस्ते मित्रों! पेरियार साहब के खंडन के १४वें भाग में आपका स्वागत है।आगे दशरथ नामक लेख के ६वें बिंदु के आगे जवाब दिया जायेगा।
*आक्षेप-६* राम की मां कौसल्या भी अपने देवी-देवता को मनाया करती थी कि मेरे पुत्र राम को राजगद्दी मिले।
*समीक्षा*- हम चकित हैं कि पेरियार साहब कैसे बेहूदे आक्षेप लगा रहे हैं!श्रीराम की मां देवी कौसल्या काल्पनिक देवी देवताओं से नहीं,परमदेव परमेश्वर की पूजा करती थीं।वे परमदेव परमात्मा से प्रार्थना करती थीं कि श्रीराम राजा बने तो इसमें हर्ज क्या है?कोई भी मां अपने पुत्र का हित ही चाहेगी।केवल मां ही नहीं,अपितु महाराज दशरथ, समस्त प्रजा और राजा आदि सब चाहते थे कि श्रीराम राजा बनें।इसमें भला आक्षेप योग्य कौन सी बात है?आक्षेप तो तब होता जब देवी कौसल्या भरत के अहित के लिये परमात्मा से प्रार्थना करतीं।परंतु उनका चरित्र ऐसा न था।
*आक्षेप ७*- पुरोहितों और पंडितों को सूचना तथा उनके परामर्श के बिना और कैकेयी, भरत,शत्रुघ्न आदि को बिना आमंत्रित किये बिना दशरथ ने राजातिलक का शीघ्र प्रतिबंध कर दिया(अयोध्याकांड अध्याय १)
*समीक्षा*-हे परमेश्वर! ये झूठ-धोखा आखिर कब तक चलेगा?ये धूर्त मिथ्यीवादी कब तक तांडव करते रहेंगे!क्या इन पर तेरे न्याय का डंडा न चलेगा?अवश्य ही चलेगा और ये लोग भागते दिखेंगे।
यदि दशरथ जी ने किसी को आमंत्रित नहीं किया था तो क्या समारोह ऐसे ही आयोजित हो गया?आपने कभी वाल्मीकीय रामायण की सूरत भी देखी है? रामायण में अध्याय नहीं सर्गों का विभाग है। अयोध्या कांड के प्रथम सर्ग को ही पढ़ लेते तो ये आक्षेप न करते।
प्रथम सर्ग में पूरा वर्णन है कि किस तरह महाराज दशरथ ने समस्त मंत्रिमंडल और अनेक राजाओं को राजसभा में आमंत्रित करके श्रीराम के राज्याभिषेक की घोषणा की।लीजिये,अवलोकन कीजिये:-
इत्येवं विविधैस्तैस्तैरन्यपार्थिवदुर्लभैः ।
शिष्टैरपरिमेयैश्च लोके लोकोत्तरैर्गुणैः ॥ ४१ ॥
तं समीक्ष्य महाराजो युक्तं समुदितैः गुणैः ।
निश्चित्य सचिवैः सार्धं यौवराज्यममन्यत ॥ ४२ ॥
इस प्रकार से विचार करके तथा अपने पुत्र श्रीराम इनके नाना प्रकारके विलक्षण, सज्जनोचित, असंख्य और लोकोत्तर गुणों से, जो अन्य राजाओं में दुर्लभ थे, विभूषित देखकर राजा दशरथा मंत्रियों के बराबर सलाह करके उनको युवराज बनाने का निश्चय किया ॥४१-४२॥
दिव्यन्तरिक्षे भूमौ च घोरमुत्पातजं भयम् ।
संचचक्षेऽथ मेधावी शरीरे चात्मनो जराम् ॥ ४३ ॥
बुद्धिमान महाराज दशरथने मंत्रियों को स्वर्ग, अंतरिक्ष तथा भूतल पर दृष्टिगोचर होनेवाले उत्पातोंके घोर भय सूचित किये और आपने शरीर में वृद्धावस्था के आगमन की बात बताई. ॥४३॥
पूर्णचन्द्राननस्याथ शोकापनुदमात्मनः ।
लोके रामस्य बुबुधे सम्प्रियत्वं महात्मनः ॥ ४४ ॥
पूर्ण चंद्रमा के समान मनोहर मुख वाले महात्मा श्रीराम समस्त प्रजा को  प्रिय थे। लोक में उनके सर्वप्रिय थे। राजाके आंतरिक शोक को दूर करनेवाले थे ये बातें राजाने अच्छे से जानी थीं॥४४॥
आत्मनश्च प्रजानां च श्रेयसे च प्रियेण च ।
प्राप्तकालेन धर्मात्मा भक्त्या त्वरितवान् नृपः ॥ ४५ ॥
तब उपयुक्त समय आनेपर धर्मात्मा राजा दशरथने अपने और प्रजाके कल्याण के लिये मंत्रियों को श्रीरामाके राज्याभिषेक के लिये शीघ्र तैयारी करने की आज्ञा दी। इस उतावलेपन के कारण उनके हृदय के प्रेम और प्रजाके अनुराग ही कारण था ॥४५॥
नानानगरवास्तव्यान् पृथग्जानपदानपि ।
समानिनाय मेदिन्यां प्रधानान् पृथिवीपतिः ॥ ४६ ॥
उन भूपालों ने भिन्न भिन्न नगरों में निवास करनेवाले प्रधान- प्रधान पुरूषों को  तथा अन्य जनपदों के सामंत राजाओं को  मंत्रियों के  द्वारा अयोध्या में  बुला लिया॥४६॥
(अयोध्या कांड सर्ग १)
इसके आगे महाराज दशरथ सबको संबोधित करते हैं और स्वयं राज्य त्यागकर श्रीराम के राज्याभिषेक की घोषणा की:-
अनुजातो हि मां सर्वैर्गुणैः श्रेष्ठो ममात्मजः ।
पुरन्दरसमो वीर्ये रामः परपुरञ्जयः ॥ ११ ॥
मेरे पुत्र श्रीराम मुझसे भी  सर्व गुणों में श्रेष्ठ हैं।शत्रुओं के नगरों पर विजय प्राप्त करने वाले श्रीराम बल-पराक्रम में देवराज इंद्र समान हैं ॥११॥
तं चन्द्रमिव पुष्येण युक्तं धर्मभृतां वरम् ।
यौवराज्ये नियोक्तास्मि प्रीतः पुरुषपुङ्‍गवम् ॥ १२ ॥
पुष्य- नक्षत्रसे युक्त चंद्रमाके समान समस्त कार्य साधनमें कुशल तथा धर्मात्माओं में श्रेष्ठ उन पुरुषश्रेष्ठ रामको मैं कल प्रातःकाल पुष्य नक्षत्र में युवराजका पद पर नियुक्त करूंगा॥१२॥
(अयोध्या कांड सर्ग २)
*आक्षेप ८*- आगे अयोध्याकांड अध्याय १४ का संदर्भ देकर लिखा है कि दशरथ ने राम से गुप्त रुप से कहा था कि भारत के लौट आने के पहले राम का राज्याभिषेक हो जाए तो भारत शांतिपूर्वक इसे जो पहले हो चुका है स्वीकार कर लेगा इत्यादि।
*समीक्षा*- बेईमानी की हद कर दी! अयोध्या कांड सर्ग १४ में न तो श्रीराम से राजा दशरथ श्रीराम से आपके लिखी बात कहते हैं न उसमें भरत का जिक्र करते हैं।इस सर्ग में कैकेयी ,जो अपने वचन मान चुकी है,उन्हें मनवाने के लिये कटिबद्ध है।वो कई तरह के कटुवचन कहकर राजा दशरथ को संतप्त करती है।फिर सुमंत्र आकर राजा दशरथ को राम राज्याभिषेक की पूरी तैयार होने का समाचार देते हैं।यहां आपके कपोलकल्पित लेख का कोई निशान नहीं है।हां,यह ठीक है कि इसके पहले राजा दशरथ श्रीराम से कहते हैं कि “यद्यपि भरत धर्मात्मा और बड़े भाई का अनुगामी है,फिर भी मनुष्यों का चित्त प्रायः स्थिर नहीं रहता।इसलिये अपना राज्याभिषेक शीघ्रातिशीघ्र करा लो।”इसका स्पष्टीकरण पहले दे चुके हैं।
*आक्षेप ९*- कैकई ने हठ किया कि उसका पुत्र राजा बनाया जाए और इसकी सुरक्षा का विश्वास दिलाने के लिए राम को वनवास भेज दिया जाए- तो दशरथ उसे मनाने के लिए उसके पैरों पर गिर पड़ा और  उस से प्रार्थना करने लगा कि ” मैं तुम्हारी इच्छानुसार कोई भी तुच्छतम कार्य करने के लिए तैयार हूं- राम को वनवास भेजने का हठ न करो।(अयोध्याकांड सर्ग १२)
*समीक्षा*-  राजा दशरथ ने कैकेयी द्वारा देवासुर संग्राम में अपनी प्राणरक्षा के कारण उसे दो वरदान दिये थे।उसने दो वरदानों द्वारा भरत का राज्याभिषेक तथा श्रीराम का वनवास मांगा।कैकेयी ने समस्त प्रजा,मंत्रिमंडल की मंशा के विरूद्ध श्रीराम का वनवास और भरत का राज्याभिषेक मांगा,ये वरदानों का मूर्खतापूर्ण प्रयेग किया।राजा दशरथ अपने रामराज्याभिषेक की घोषणा के विरुद्ध वरदान देने को राजी नहीं हुये।राजा दशरथ ने कैकेयी को मनाने की बहुत कोशिश की,पर वो नहीं मानी।
अञ्जलिं कुर्मि कैकेयि पादौ चापि स्पृशामि ते ।
शरणं भव रामस्य माधर्मो मामिह स्पृशेत् ॥ ३६ ॥
कैकेयी ! मैं हाथ  जोड़ता हूं और तेरे पैर पड़ता हूं।तू राम को  शरण दे।जिसके कारण  मुझे पाप नहीं लगेगा॥३६॥(अयोध्या कांड सर्ग १२)
यहां राजा दशरथ ने अनुनय-विनय के लिये मुहावरे के रूप में कहा।जैसे कहा जाता है कि,”मैं तेरे हाथ जोड़ता हूं,पैर पड़ता हूं।”पर सत्य में कोई पैर नहीं पकड़ता।वैसा ही यहां समझें।और यदि राजा दशरथ ने कैकेयी के पैर सचमें पड़ भी लिये तो भी कौन सी महाप्रलय आ गई?राजा दशरथ उस समय राजा नही,एक पति थे।यदि वे अपनी पत्नी के पांव भी पड़ ले तो क्या बुरा है?भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी एक-दूसरे के आधे शरीर माने जाते हैं।यदि पति पत्नी के और पत्नी पति के पांव पड़ें तो आपके हर्ज क्या है? एक तो आप जैसे लोग महिला-उत्थान का,स्त्रियों के अधिकारों की बात करते हैं और राजा दशरथ का अपनी पत्नी के पांव पड़ना नामर्दी समझते हैं!हद है  दोगलेपन की!
पूरा लेख पढ़ने के लिये धन्यवाद।यहां तक हमने ९वें बिंदु तक का खंडन किया।आगे १०से १४वें आक्षेपों तक का खंडन किया जायेगा।कृपया अधिकाधिक शेयर करें।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र की जय।
योगेश्वर कृष्ण चंद्र जी की जय।
नोट : इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आर्यमंतव्य  टीम  या पंडित लेखराम वैदिक मिशन  उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है. |

VIDEO : जब मुफ्ती से एंकर ने कहा, ‘मैं फख्र के साथ बोलूंगी वंदे मातरम’

VIDEO : जब मुफ्ती से एंकर ने कहा, ‘मैं फख्र के साथ बोलूंगी वंदे मातरम’

VIDEO : जब मुफ्ती से एंकर ने कहा, 'मैं फख्र के साथ बोलूंगी वंदे मातरम'
बहस के दौरान मुफ्ती एजाज अरशद कासमी ने बोले अपशब्द.

नई दिल्ली : बिहार में नई सरकार बनने के साथ ही नया विवाद जुड़ गया है. दरअसल बिहार के अल्पसंख्यक मंत्री खुर्शीद आलम उर्फ फिरोज अहमद ने ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने को लेकर रविवार को माफी मांगी. खुर्शीद आलम ने ऐसा यह नारा लगाने पर मुस्लिम समुदाय द्वारा धमकी मिलने और अपने खिलाफ एक फतवा जारी होने के बाद किया. इसी मुद्दे पर ZEE NEWS के ‘शो ताल ठोक’ के दौरान बेहद तल्ख बहस हो गई. बहस के दौरान मुफ्ती एजाज अरशद कासमी, सदस्य एआईएमपीएलबी ने मुस्लिम टीवी एंकर रुबिका लियाकत अली को अपशब्द कहे. इस पर रुबिका ने मुफ्ती को सधे हुए अंदाज में जवाब देकर उनकी बोलती बंद कर दी.

बहस में शामिल अंबर जैदी को एआईएमआईएम के तरफ से शामिल प्रवक्ता सैयद आसिम वकार ने अपशब्द कहे इसके जवाब में रुबिका ने ये कह दिया कि ये मदरसा नहीं है. इतना कहते ही मुफ्ती भड़क गए और रुबिका और अंबर पर जमकर व्यक्तिगत हमला करने लगे.  इसके बाद रुबिका ने जोर देकर कहा कि मैं फख्र के साथ वंदे मातरम कहूंगी.

ज़ी न्यूज़ डेस्क

source : http://zeenews.india.com/hindi/india/video-during-the-debate-anchor-said-to-mufti-i-will-speak-with-pride-vande-mataram/334886

तारिक फतेह ने जय श्री राम लिख कर किया ट्वीट, बोले- जाओ जो उखाड़ना है उखाड़ लो

तारिक फतेह ने जय श्री राम लिख कर किया ट्वीट, बोले- जाओ जो उखाड़ना है उखाड़ लो

तारिक फतेह ये ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

तारिक फतेह। फोटो सोर्स- यूट्यूब

बिहार विधानसभा में नीतीश सरकार के अल्पसंख्यक मंत्री खुर्शीद उर्फ फिरोज अहमद द्वारा ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने पर कूब हंगामा मचा। खुर्शीद उर्फ फिरोज अहमद के खिलाफ तो फतवा तक जारी हो गया। जय श्री राम बोलने को लेकर इस्लामी संस्था इमारत-ए-शरिया ने फतवा जारी करते हुए उन्हें इस्लाम से खारिज कर दिया था। हालांकि फिर बाद में सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने के बाद उनके खिलाफ जारी किया गया फतवा वापस ले लिया गया। जय श्री राम बोलने पर मचे इस घमासान के बीच मशहूर मुस्लिम लेखक तारिक फतेह ने ट्वीट करते हुए जय श्री राम लिखा। जय श्री राम लिखने के साथ ही इस पर आपत्ति जताने वाले मुसलमानों को तारिक ने ये भी लिखा कि अब जाओ..जो उखाड़ना है उखाड़ लो। कारिक फतेह का ये ट्वीट उस वक्त आया जब मीडिया में खबर फैली कि इस्लाम से निकालने का फतवा जारी होने के बाद नीतीश सरकार के मंत्री खुर्शीद अहमद ने इसपर माफी मांगी है। तारिक फतेह का ये ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ट्वीट करने के महज चंद घंटों में ही इसे दो दजार से ज्यादा बार रिट्वीट किया जा चुका  है।

Tarek Fatah 

@TarekFatah

“Jai Shree Ram”

Abb jao, Jo ukharna hai, ukhar lo.

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तारिक फतेह के ट्वीट को काफी पसंद किया जा रहा है। बहुत से मुस्लिम यूजर्स तारिक के इस ट्वीट की सराहना करते हुए लिख रहे हैं कि जिन लोगों को मजहब के नाम पर समाज में दीवार खड़ी करनी है वो करते रहें, हमें तो जय श्री राम बोलने में कोई परेशानी नहीं है। हिंदू यूजर्स भी तारिक के इस ट्वीट को सराह रहे हैं।

Tarek Fatah 

 @TarekFatah

“Jai Shree Ram”

Abb jao, Jo ukharna hai, ukhar lo.

A proud Muslim and Pakistani, Jai Shri Ram!
It has cost me nothing to set a smile over several faces!

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“Jai Shree Ram”

Abb jao, Jo ukharna hai, ukhar lo.

ईश्वर अल्लाह तेरे नाम, सबको सन्मति दे भगवान…

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“Jai Shree Ram”

Abb jao, Jo ukharna hai, ukhar lo.

Jai Shree Ram ! Ram is embodiment of righteousness in Hindu Puran. Victory to righteousness means Jai Shree Ram !

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“Jai Shree Ram”

Abb jao, Jo ukharna hai, ukhar lo.

Ram ji apko lambi zindagi de. Jay hind

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कुछ मुस्लिम यूजर्स ऐसे भी हैं जो उर्दू भाषा में नफरत भरी बातें लिख रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ खुद तारिक फतेह ने मोर्चा खोल रखा है। तारिक इस तरह के ट्वीट्स को रिट्वीट कर उनको सबक सिखाने का काम कर रहे हैं।

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Hi @Dhume, here is an example. Perhaps you can tell fellow Indians what this Muslim says about Hindus in Urdu.

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आपको बता दें कि तारिक फतेह मशहूर लेखक और पत्रकार हैं। तारिक मूल रूप से पाकिस्तान के कराची के हैं। तारिक इस्लामी अतिवाद के खिलाफ बोलने और एक उदारवादी इस्लाम के पक्ष को बढ़ावा देने के लिये प्रसिद्ध है |

source :http://www.jansatta.com/trending-news/tarik-fateh-slams-hate-mongers-over-chanting-jai-shri-ram-slogan/390277/

हदीस : गैर-मुसलमानों के लिए काबा बंद

गैर-मुसलमानों के लिए काबा बंद

इस्लाम-पूर्व दिनों में काबा सबके लिए खुला रहता था, चाहे वे अल्लाह के आराधक हों या अल-लात के। पर मुहम्मद द्वारा मक्का-विजय के बाद वह मुसलमानों के सिवाय सब के लिए बंद कर दिया गया। मुहम्मद की ओर से ऐलान किया गया-”इस साल के बाद कोई बहुदेववादी तीर्थयात्रा नहीं कर सकता“ (3125)। यह खुद अल्लाह का हुक्म था। कुरान का कथन है-”ऐ मोमिनो ! वे जो अल्लाह के साथ किसी और को जोड़ते हैं, वे नापाक हैं। और इसीलिए इस साल से लेकर आगे उन्हें पवित्र पूजाघर के पास नहीं जाना चाहिए“ (9/28)1।

 

अधिकांश धर्मपंथ अपने आराध्य देवों के लिए भवन या मंदिर अपनी स्वयं की मेहनत से बनाते हैं। लेकिन इस्लाम अपने आराध्यदेव अल्लाह के लिए दूसरों के मन्दिर हथियाता है। इन दो प्रकार के पूजाघरों में प्रबल अन्तर है। किसी भी सम्यक् आराध्यदेव का सार्थक आवास वही हो सकता है, जो उसके अनुयायियों द्वारा अपने हृदय में भरी प्रीति-भावना से एवं अपने हाथों के परिश्रम से बनाया गया हो। कोई भी अन्य आवास साम्राज्यवादी लिप्सा और विस्तारवाद का ही स्मारक होता है और ऐसा आवास विशुद्ध मानस वालों के आराध्यदेवों द्वारा कभी भी स्वीकार नहीं किया जा सकता।

 

  1. मुहम्मद और बहुदेववादियों के बीच एक समझौता हुआ था कि दोनों में से किसी को भी मंदिर से दूर नहीं रखा जायेगा और पवित्र महीनों में उसमें आने-जाने के लिए एक को दूसरे के हस्तक्षेप का कोई डर नहीं होना चाहिए। पर अल्लाह के पास से ”छूट“ आई और मुहम्मद को उनके पक्ष के इकरार से मुक्त कर दिया गया, “अल्लाह बुतपरस्ती के साथ किए गए इकरार से मुक्त है और इसीलिए उसके रसूल भी मुक्त हैं।“ दूसरों को चार महीने दिये गए कि या तो अपना रास्ता बदलो या मौत का मुकाबला करो। मुसलमानों से कहा गय कि ”जब पवित्र महीने बीत जाएं, तब बुतपरस्तों को जहां पाओ, वहीं कत्ल करो और उन्हें पकड़ लो और घेर लो और उनके लिए प्रत्येक प्रकार की घात लगाओ ….. लो ! अल्लाह माफ करने वाला और दया करने वाला है“ (कुरान 9/5)। मुसलमान सोचते थे कि अगर गैर-मुसलमानों को मक्का-प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई, तो उनके व्यापार पर असर पड़ेगा। अतः मुहम्मद ने ”बाजार बंद होने से जो खोने का तुम्हें डर है, उसके मुआवजे के रूप में, यहूदियों पर एक चुंगी-कर का प्रस्ताव रखा-ऐसा इब्न इसहाक बतलाते हैं (सीरत रसूल अल्लाह, 620)। कुरान की प्रासंगिक आयते हैं-”अगर तुम्हें गरीबी का डर है, तो अल्लाह अपनी कृपा से तुम्हें समृद्ध करेगा। ….. उनके खिलाफ जिन्हें किताब दी गई है, और जो अल्लाह पर यकीन नहीं लाते ….. और जो सच्चे मजहब को स्वीकार नहीं करते, तब तक लड़ो जब कि वे अधीनता स्वीकार करके जजिया न देने लगे और तुच्छ बनकर न रहने लगे“ (9/28, 29)।

author : ram swarup

आर्यसमाजी हूँ

आर्यसमाजी हूँ

जब पण्डित श्री गणपतिजी शर्मा ने कश्मीर के शास्त्रार्थ में पादरी जॉनसन को परास्त किया तो सर्वत्र उनका जयजयकार होने लगा। उस समय शास्त्रार्थ के सभापति स्वयं महाराजा प्रतापसिंह थे।

महाराजा ने प्रेम से पण्डितजी से पूछा-कहो गणपति शर्मा! तुज़्हारे जैसा विद्वान् आर्यसमाजी कैसे हो गया? ज़्या सचमुच तुम आर्यसमाजी हो? ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि सज़्भव है महाराजा ने सोचा हो कि मेरे प्रश्न के उज़र में पण्डितजी कह देंगे कि मैं आर्यसमाजी नहीं हूँ।

पूज्य पण्डितजी पेट-पन्थी पोप नहीं थे। नम्रता से, परन्तु सगर्व बोले, ‘‘हाँ, महाराज! मैं हूँ तो आर्यसमाजी।’’

उस सच्चे ब्राह्मण के यशस्वी, तपस्वी जीवन से प्रभावित होकर ही तो, महाकवि ‘शंकर’ जी ने लिखा था- पैसों के पुजापे पानेवाले को न पूजते हैं, पूज्य न हमारे लंठ लालची लुटेरे हैं।

पोंगा पण्डितों की पण्डिताई के न चाकर हैं, ज्ञानी गणपति की-सी चातुरी के चेरे हैं॥

HADEES : NIGHT SESSIONS

NIGHT SESSIONS

We have one important hadIs which provides another indulgence to the believers and also throws some light on the Prophet�s sexual code.  In order to be impartial, a believer should visit his wives by turn.  But while he is in bed with one of them, he is allowed to have his other wives around.  Anas, one of the servants of Muhammad, reports that �all the wives of the Messenger of Allah used to gather every night in the house of one where he [the Apostle] had to come. . . . It was the night in the house of �Aisha, when Zainab came there.  He [the Holy Prophet] stretched his hand towards her [Zainab], whereupon she [�Aisha] said: it is Zainab.  Allah�s Apostle withdrew his hand.  There was an altercation between the two until their voices became loud.� When the morning prayer was announced, AbU Bakr came to get Muhammad; hearing their voices, he said: �Messenger of Allah, come for prayer, and throw dust in their mouths� (3450).

author : ram swarup