Category Archives: हिन्दी

हदीस : पंचकर्म (फितरा)

पंचकर्म (फितरा)

मनुष्य की स्वभाविक क्रियाओं में से इन पांच क्रियाओं के लिए जो इस्लाम में विशेष मानी मानी गई हैं, नौ हदीस है-खतना, पशम की सफाई, नाखून काटना, दांतों की सफाई और मूंछे कतरना।

 

मूंछ और दाढ़ी के बारे में पैगम्बर कहते हैं-”बहुदेववादियों से उल्टा काम करो-मूंछे बारीकी से छांटो और दाढ़ी बढ़ाओ“ (500)। अगली हदीस में ”बहुदेववादियों“ की जगह ”अग्निपूजकों“ को दी गई है। अनुवादक इसका मण्डन प्रस्तुत करते हैं-”इस्लाम ने आस्था और सदाचार के आधार पर एक नया भाईचारा रचा।…… चेहरों की पहचान के लिए मुसलमान को हुक्म दिया गया है कि वे मूंछे छांटें तथा दाढ़ी बढ़ाएं, जिससे कि वे गैर-मुस्लिमों से अलग दिखें जो दाढ़ी साफ रखते हैं और मूंछें बढ़ाते हैं।“ (टि0 471)

author : ram swarup

वे ऐसे धर्मानुरागी थे

वे ऐसे धर्मानुरागी थे

स्यालकोट के लाला गणेशदासजी जब स्वाधीनता संग्राम में कारावास गये तो उन्हें बन्दी के रूप में खाने के लिए जो सरसों का तेल मिलता था, उसे जेल के लोहे के बर्तनों में डालकर रात को

दीपक बनाकर अपनी कालकोठरी में स्वाध्याय किया करते। ‘आर्याभिविनय’ ऋषिकृत पुस्तक का सुन्दर उर्दू अनुवाद पाद टिह्रश्वपणियों सहित इसी दीपक के प्रकाश में जेल में तैयार हुआ। इसे

‘स्वराज्य पथप्रदर्शक’ [प्रथम भाग ही] के नाम से बड़े सुन्दर कागज पर आपने छपवाया था। जिन्होंने कालकोठरी में भी स्वाध्याय, सत्संग, शोध साहित्य-सृजन को अपना परम धर्म जाना, ऐसे धर्मवीरों का जीवन हमारे लिए अनुकरणीय है।

हदीस : दांतों की सफाई (मिसवाक)

दांतों की सफाई (मिसवाक)

मुहम्मद को दंतखोदनी प्रिय थी। ये अक्सर उसका इस्तेमाल करते थे। उन्होंने कहा-”यदि मुसलमानों पर ज्यादा बोझ पड़ने की आशंका न होती तो मैं उन्हें नमाज से पहले हर बार दंतखोदनी इस्तेमाल करने का हुक्म देता“ (487)।

author : ram swarup

 

और लो, यह गोली किसने मारी

 

और लो, यह गोली किसने मारी

अब तो चरित्र का नाश करने के नये-नये साधन निकल आये हैं। कोई समय था जब स्वांगी गाँव-गाँव जाकर अश्लील गाने सुनाकर भद्दे स्वांग बनाकर ग्रामीण युवकों को पथ-भ्रष्ट किया करते थे। ऐसे ही कुछ माने हुए स्वांगी किरठल उज़रप्रदेश में आ गये। उन्हें कई भद्र पुरुषों ने रोका कि आप यहाँ स्वांग न करें। यहाँ हम नहीं चाहते कि हमारे ग्राम के लड़के बिगड़ जाएँ, परन्तु वे न माने। कुछ ऐसे वैसे लोग अपने सहयोगी बना लिये। रात्रि को ग्राम के एक ओर स्वांग रखा गया। बहुत लोग आसपास के ग्रामों से भी आये। जब स्वांग जमने लगा तो एकदम एक गोली की आवाज़ आई। भगदड़ मच गई। स्वांगियों का मुज़्य कलाकार वहीं मञ्च पर गोली लगते ही ढेर हो गया। लाख यत्न किया गया कि पता चल सके कि गोली किसने मारी और कहाँ से किधर से गोली आई है, परन्तु पता नहीं लग सका। ऐसा लगता था कि किसी सधे हुए योद्धा ने यह गोली मारी है।

जानते हैं आप कि यह यौद्धा कौन था? यह रणबांकुरा आर्य-जगत् का सुप्रसिद्ध सेनानी ‘पण्डित जगदेवसिंह सिद्धान्ती’ था। तब सिद्धान्तीजी किरठल गुरुकुल के आचार्य थे। आर्यवीरों ने पाप ताप से लोहा लेते हुए साहसिक कार्य किये हैं। आज तो चरित्र का उपासक यह हमारा देश धन के लोभ में अपना तप-तेज ही खो चुका है।

हदीस : नाक साफ करना

नाक साफ करना

नाक ठीक से साफ की जानी चाहिए। मुहम्मद कहते हैं-”जब तुम नींद से जागो….तीन बार नाक जरूर साफ करो, क्योंकि शैतान नाक के भीतर ही रैनबसेरा करता है“ (462)।

author : ram swarup

उज़रप्रदेश का एक साहसी आर्यवीर

उज़रप्रदेश का एक साहसी आर्यवीर

1942-43 ई0 की घटना है। आर्यसमाज के प्रसिद्ध मिशनरी मधुर गायक श्री शिवनाथजी त्यागी बाबूगढ़ के उत्सव से वापस आ रहे थे कि मार्ग में नहर के किनारे दस शस्त्रधारी मुसलमानों ने आर्य प्रचारकों की इस मण्डली (जिसमें केवल तीन सज्जन थे) पर धावा बोल दिया। बचने का प्रश्न ही न था। मुठभेड़ हुई ही थी कि अकस्मात् मोटर साइकल पर एक आर्य रणबांकुरा जयमलसिंह त्यागी उधर आ निकला। अपने उपदेशकों को विपदा में देखकर उसने बदमाशों को ललकारा, कुछ को नहर में फेंका और शिवनाथजी त्यागी आदि सबको बचाया। ऐसे साहसी धर्मवीरों के नाम व काम पर हमें बहुत गर्व है।

हदीस : प्रक्षालन (वुज़ू)

प्रक्षालन (वुज़ू)

मुहम्मद शारीरिक स्वच्छता की आवश्यकता पर जोर देते हैं। वे अपने अनुयायियों से कहते हैं कि ”सफाई ईमान का आधा हिस्सा है“ (432) और जब तक वे ’वुजू नहीं करते‘ तब तक अशुद्धि की दशा में की गई उनकी प्रार्थना मंजूर नहीं की जाएगी (435)। किन्तु यहां अशुद्धि का अर्थ पूर्णतः कर्म-काण्डपरक है।

 

मुहम्मद अपनी पंथमीमांसा में एकत्ववादी किन्तु प्रक्षालन के मामले में त्रित्ववादी थे। वे प्रक्षालन-कर्म यों करते थे-”वे अपने हाथ तीन बार धोते थे। फिर वे तीन बार कुल्ला करते थे तथा तीन बार नाक साफ करते थे। तदुपरान्त अपना चेहरा तीन बार धोते थे। फिर दाहिनी बांह कुहनियों तक तीन बार धोते थे। फिर उसी तरह तीन बार बांयी बांह धोते थे। फिर अपना सिर पानी से पोंछते थे। फिर दाहिना पांव टखनों तक तीन बार और फिर बांया पैर टखनों तक तीन बार धोते थे।“ मुहम्मद ने कहा-”जो मेरी तरह प्रक्षालन करता है….तथा प्रार्थना के दो रकाह अर्पित करता है…..उसके पहले के सब पापों का प्रायश्चित हो जाता है“ (436)। यह प्रक्षालन विहित बन गया। मुस्लिम मजहबी कानून के अध्येताओं के अनुसार प्रार्थना के लिए किए जाने वाले प्रक्षालनों में यह सर्वांगसम्पूर्ण है। इस विषय पर मुहम्मद के आचार और विचार को बार-बार बतलाने वाली ऊपर बताई गई हदीसों जैसी 21 हदीस और हैं (436-457)।

author : ram swarup