सूत्र :मणिगमनं सूच्यभिसर्पणमदृष्टकारणम् 5/1/15
सूत्र संख्या :15
व्याख्याकार : स्वामी दर्शनानन्द सरस्वती
अर्थ : जहां पर मणि में क्रिया होती है, या चुम्बक पत्थर के आकर्षण से सुई आदि क्रिया करती हैं, उन सबका अदृष्ट कारण है। जैसे लोहा चुम्बक पत्थर के कारण क्रिया करता है, उस चुम्बक पत्थर में जो आकर्षण शक्ति है वह दृष्टिगत नहीं होती। अदृष्ट का आशय पूर्व जन्म के कर्मों का भी हो सकता है। जीवा के कर्मानुसार का भी चीजे क्रिया करके उनके पास पहुंच सकती है। यद्यपि उनकी क्रिया में कोई और कारण बिना प्रयत्न का भी होता है, परन्तु अधिक ध्यान पूर्वक विचार करने से भोग ही का पता लगता है।
प्रश्न- तीर, पक्षी और अलात चत्र (लगड़ी जलाकर घुमाने से जो ज्योति का चत्र बन जाता है) के नीचे से ऊपर जाने में एक ही क्रिया होती है वा अधिक?