Manu Smriti
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यत्र धर्मो ह्यधर्मेण सत्यं यत्रानृतेन च ।हन्यते प्रेक्षमाणानां हतास्तत्र सभासदः ।।8/14

 
Commentary by : स्वामी दर्शनानंद जी
जहाँ सत्य पर असत्य तथा धर्म पर अधर्म विजयी हो सके और देखने वाले इसका विरोध न कर सकते हों मानों उस सभा के सभासद स्वामी सहित मारे गए हैं।
Commentary by : पण्डित राजवीर शास्त्री जी
जिस सभा में बैठे हुए सभासदों के सामने अधर्म से धर्म और झूठ से सत्य का हनन होता है उस सभा में सब सभासद् मरे से ही हैं । (सं० वि० गृहाश्रम प्र०)
टिप्पणी :
‘‘जिस सभा में अधर्म से धर्म, असत्य से सत्य, सब सभासदों के देखते हुए मारा जाता है, उस सभा में सब मृतक के समान हैं, जानों उनमें कोई भी नहीं जीता ।’’ (स० प्र० षष्ठ समु०)
Commentary by : पण्डित चन्द्रमणि विद्यालंकार
जिस सभा में अधर्म से धर्म व असत्य से सत्य का, सब सभासदों के देखते हुए, खून किया जाता है, मानो वहां सभी सभासद् मृतक-समान मुर्दे व मरे हुए हैं।
 
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