इस्लाम में नारी की स्थिति – २ :- कुरान में बीबियाँ बदलने का आदेश

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कुरान में बीबियाँ बदलने का आदेश

कुरान में लिखा है की-

    “अगर तुम्हारा इरादा एक बीबी को बदल कर उसकी जगह दूसरी बीबी करने का हो तो जो तुमने पहिली बीबी को बहुत सामान दे दिया हो तो भी उसमे से कुछ भी न लेना |

   क्या किसी को तौहमत लगा कर जाहिर बेजा बात करके अपना दिया हुआ वापिस लेते हो ?”

(कुरान सुरह निसा आयत २०)

तलाक देकर या बिना तलाक दिए मर्दों को इच्छानुसार आपस में अपनी बीबियाँ बदल लेने का अधिकार कुरान ने इस शर्त पर दिया है की इसे दिया हुआ माल वापिस न लिया जावे |

इस शर्त का पालन करने वाले दो दोस्त आपस में अपनी बीबियाँ ऐसे ही बदल सकते हैं जैसे लोग अपनी बकरी या गाय, भेंस आदि बदल लेते हैं |

हिन्दू समाज में पति-पत्नी का रिश्ता जीवन भर के लिए अटूट होता है, पर इस्लाम में मर्द जब चाहे तब अपनी पुरानी बीबी को अपनी पुराणी जूती की तरह नई नवेली बीबी से बदल सकता है |

इस्लाम में कोई बीबी नहीं जानती की उसका शौहर कब उसे किसी दूसरी नई बीबी से बदल लेवे | इसके लिए तलाक का आसान तरीका इस्लाम में चालु जो है |

 

मर्द सिर्फ तीन बार तलाक ! तलाक !! तलाक !!! औरत को बोल दे और तलाक जायज हो जाता है |

     देखिये:- कुरान में सूरते बकर रुकू २८ में आयत २२८ से २३७ तक तलाक का विधान मौजूद है | उस पर श्री अहमद बशीर साहब ऍम.ए. कामिल, तथा दवीर कामिल मौलवी अपने कुरान के भाष्य में पृष्ठ ५५ पर लिखते हैं की:-

तलाक का यह दस्तूर है की जब कोई मुसलमान मर्द अपनी औरत को तलाक देता है तो कम से कम दो आदमियों के सामने तलाक देता है, और एक महीनें के बाद दूसरी तलाक भी उसी तरह देता है |

    यहाँ तक तो मियाँ बीबी में सुलहनामाँ हो सकता है, परन्तु इसके एक महीने बाद तीसरी तलाक दी जाती है | इस तीसरी तलाक देने के बाद फिर मर्द उस औरत के पास नहीं जा सकता | यह औरत तीन महीना दस दिन बाद दुसरा निकाह गैर आदमी से कर सकती है |

     दुसरे पति के साथ निकाह हो जाने पर अगर दुसरा पति तलाक दे दे तो सिर्फ इस हालत में की वह दुसरे पति के साथ सम्भोग कर चुकी हो अर्थात हमबिस्तर हो चुकी हो, तो तभी अपने पूर्व पति के साथ फिर निकाह कर सकती है |

    परन्तु जब तक किसी दुसरे आदमी के साथ निकाह करके विषयभोग न कर ले (यानी हमबिस्तर न हो ले ) तब तक कदापि अपने पहले खाविन्द अर्थात पति के साथ निकाह नहीं कर सकती |

इस तलाक के विधान में हम केवल यह बात नहीं समझ सके की तीसरी तलाक के बाद औरत को गैर आदमी से निकाह व् सम्भोग कराने के बाद ही उसे तलाक देकर आने के बाद ही पूर्व पति स्वीकार करेगा, बिना गैर आदमी से सम्भोग कराये नहीं करेगा ?

दुसरा शौहर करके उससे कुकर्म कराने पर औरत में ऐसा कौन सा जायका बढ़ जाता है ? मौलवी लोग इसका खुलासा करें तथा इस अजीबोगरीब फिलासफी को ज़रा सबकी भलाई के लिए विस्तार से समझाए |

हमारी निगाह में तो इस रिवाज के मुताबिक़ औरत और भी ज्यादा बेशर्म बनेगी |

कुरान की इस आयत के समर्थन में बुखारी शरीफ में एक कथा दी है, जो हदीस न० ६९२ पृष्ठ ३३१ व् ३३२ पर लिखी है, देखिये-

हजरत आयशा फरमाती हैं की-

        “रफाअकुरती की औरत रसूलल्लाह सलालेहु वलैहिअसल्लम (मुहम्मद साहब) की खिदमत में हाजिर हुई और अर्ज किया की में रफाअ के पास (यानी उसके निकाह में) थी |

   उसने मुझे तीन तलाक दे दी उसके बाद मैंने अब्दुल रहमान बिन जबीर से निकाह कर लिया | परन्तु उसके पास (उसका लिंग) कपडे के फुन्दने की तरह है ! यानी उअसका ऐजातमासुल ढीला और नरम है |

    तब आपने फरमाया ! “क्या तू रफाअ के पास फिर जाना चाहती है ? नहीं ( तू नहीं जा सकती ) जब तक तू अब्दुल रहमान बिन जबीर का शहद न चख ले और वह तेरा शहद न चख ले” |

तिरमिजी शरीफ में भी सफा २२५ हदीस ९८१ में यही कथा दी है बस! फर्क सिर्फ इतना है की –

वहां शहद की जगह “जायका” न चख ले और तेरा शहद वह न चख ले  ये शब्द लिखे है |

आश्चर्य है इस्लाम में ऐसी शर्नाक बात को बीबी आयशा के मुहँ से कहलवाया गया है जिसे कोई भी औरत अपने मुहँ से कहना अथवा बताना पसन्द नहीं कर सकती |

 

624 thoughts on “इस्लाम में नारी की स्थिति – २ :- कुरान में बीबियाँ बदलने का आदेश”

    1. मर्दों को इच्छानुसार आपस में अपनी बीबियाँ बदल लेने का अधिकार कुरान ने इस शर्त पर दिया है की इसे दिया हुआ माल वापिस न लिया जावे |

      ye admin ya writer ka likhna hi uski kutsit mansikta ko darsata hai is par kutsit mansikta vale khush bhi honge

      1. नुजहत नाजनीन खान जी क्या आपने हदीस कुरआन सही से पढ़ी हैं यह जानकारी देना जी | हदीस कुरआन सबसे चर्चा करना शुरू कर दू तो ना जाने आप क्या कर डालो | हदीश में इतनी अश्लीलता है उसके बारे में चर्चा करना सही नहीं लगता मगर आपको इतनी जानकारी दे दू की हदीस में यह लिखा है की यदि दोस्त की बीवी पसंद आ जाए और जिसमानी सम्बन्ध के लिए तलाक दे दो और आपस में बीवी को बदल लो फिर जब मन भर जाए तो तलाक दे दो और पहली वाली बीवी से निकाह कर लो | और बहुत सी बाते हैं जो आपको यहाँ नहीं बोल सकता | इस्लाम में भोजन शराब और सेक्स ये तीन ही बातो पर तो जोर दी जाती है | ४ बीवी रख सकते हो | एक बात बताना औरत ४ शौहर क्यों नहीं रख सकती ? क्या यह औरत के साथ अन्याय नहीं किया गया है इस्लाम में | इस्लाम में औरत को तो बस उपभोग की वस्तु समझी जाती है | हदीस सब से ऐसी ऐसी बात रख सकता हु जिसे यहाँ लिखना या बोलना में शर्म आती है | यहाँ रखना सही नहीं इस कारण अब तक यहाँ उसकी जानकारी नहीं दी | कुछ और बात बोलना हो तो जरुर बतलाना जी | धन्यवाद |

        1. Jo aap me pass hai o aap ke bibi me pass kyo nhi hak to do no ka brabar hair. hdish ka flat matlb my nikalo

          1. Yar ulti baat se baat sahi nahi ho jayegi jo galat hai woh galat hai use sweekar karne mai koi aapati nahi honi chaiye ………….ego khatam kar aur baat maan

        2. Bhai logo internet par islaam ke dusmano ne sab islaam ke khilaf likha he isme koi bhi baate quran se talluk nahi rakh ti.. or rahi baat net par koi bhi kuch to bhi kar sak taa he par quraan ki aayto ko nahi mota sak ta jo hafiz a qurasn ke dilo me he..ye sab islaam ke dusmano ki sajis he logo ka dhoyan bhat kane ke liye.. kiyo ki islaam puri duniya me bahut teji se fail raha he…

          1. @asim khan sahib

            aayaten to khud allah miyan mitata aur lata rahata hai
            baaki ki kasat bakari ne puri kar dee jo kuch kha gayee thee
            aur fir usman khaleefa ne jo alag alag tarh ke quran jala diye the

            Quran men ktinaee aayeten hein ye to kisee ko naheen pata Allama siyuti ko padh leejiye pata chal jayega

            usake bad Khomeni sahib ko padh leejiye wo kahte hein ki takreeban 17000 aayten thee ab batao ye kisne mitayeen

            baaki prof Rajendra ji ka ye lekh padh leejiye : allah ki registered DAK gum”

            http://aryamantavya.in/registered-post-of-allah-misplaced/

            1. Meri himmat nahi ho rahi phir bhi himmat karke likh raha hu .mere bhai badhi hi muhabbat or pyaar or izzat se aapse bata na chahta hu ki aapki jankari bilkul ghalat he .per shayad aap manenge nahi kyunki wo ghalat log jinhone islaam ko bigadne ki koshish me apni zindagi laga rakhi he or aap jese bhai bhi unki jhooti hadees ke jaal me padh gaye he .or rahi baat khumeni ya pro rajender sahab ki to me bhi kai hindu vidhwaan writer ki kitaabe aapko bata sakta hu jise padh kar aapki galatfehmi shayad door ho jaaye per aap padhenge nahi kyunki aapki aankho per nafrat ka chashma laga hua he .or rahi baat quraan ki aayaton ko mitane ki to ye bhi aapki jankaari ki kami he quraan ki aayat to door ek word bhi nahi jalaya umar farooque ne.per aap nahi manenge kyunki hum kisi ki ghalat fehmi to door kar sakte he per agar koi kisi ke dharam ko bura kehne ko hi apni aastha bana le to uska koi ilaaj nahi .per me aapse bahut impress hua hu yaqeen janiye . because aap agar islaam me burai nikaal rahe he to zaroor aapne study kiya hoga per afsos he mujhe apni Qom pe he ki aap tak sahi jankari nahi pahunchai .me tamam muslim ki taraf se aapse maafi chahta hu or allah se dua karta hu ki jese kuch ghalat logon ke bahkawe me aaker aap islaam ko bura samajh rahe he usi tarah allah kisi sahi aadmi ko aap tak pahuncha de jo aapko sahi jankari de .or aapka ye sab bolna mujhe ghalat nahi laga kyunki har insaan tak malik ka pegham pahunchana her achche insaan ki zimmedari he .or me apni zimmedari nahi nibha saka iske liye mujhe afsos he or me allah se maafi mangta hu .(apka bhai)

              1. Or ek baat me delhi se hu agar aap mujhse milna pasand kare to mujhe badhi khushi hogi me isliya ye keh raha hu ki shayad aaj ke baad is site pe aane ka moka milega ya nahi isliye mene apna no chor diya he aapka bhai aapke phone ka intezaar karega

              2. Jab aapke hisaab se allah ne hee hamen sahee rasta naheen dikhaya to isamne jimmedari to allah ki hai hamarei nahene

                allah hee doshee hua

          2. Sahi he bhai kisi par dhayan mat do ye sirf bahas kar sakte he aur karte rahenge.Sach kya he ye jankar bhi anjan banenge.Islam ka Rutwa hamesha uncha tha aur rahega InshahALLAH………

            1. इस्लाम का रूतबा अफगानिस्तान बंगलादेश सूडान लीबिया इरान ईराक में दीखता ही भाई 🙂

              1. यार रिशवा तुझे ये चार पांच मुस्लिम मुल्क ही दिखते है। इस्लामिक मुल्क 52 है कम से कम 40 मुल्क मे तो बहुत शांति है जैसे दुबई मलेशिया इंडोनेशिया बुर्नई और हिन्दुस्तानी मुस्लिम भी बहुत नरम है

                1. जनाब जो मुस्लिम बाहुल्य देश हैं वहाँ के यही हालत हैं
                  हिन्दुस्तान में भी जहाँ मुस्लिम बाहुल्य इलाके हैं कश्मीर वहाँ के हालात बयान कर ही रहे है कि आप कितने शांतिप्रिय हैं

                2. Or jitne v most dangerous country hai, itne khatarnak ki tourist ko v oha jane se roka jata hai. Ye sare muslim bahutayat des hai. Ap ise youtube par v dekh sakte hai

          3. Sura 33 ayat 37 or 50 me jo likha h. Isko samjhaenge plz.
            Kya allah bahut meharban h apne nabio par ki un par dusre ki bibio ki koi tangi na rahe? Yaha nabi un striyo ko or msrdo ko 1 krna chahenge ya unki bibio se sadi?
            Hindu or bible me to ise vaybhichar kaha hai. Ap kya kahte h ise hmko samjhae plz.

            1. Pehle sahi se quran samje uske bad aakar discuss kijiye. Adhura knowledge hamesa khatarnak hota hai. Quran ek bemishal kitab hai jise padhkar bade bade scientis, astrologist and doctors ne islam accept kiya hai. Uske bad bhi aap agar bolna chahe kuch bhi to you can bad me aap par aur aapki bewakufi ki wajah se aapki family ki family par jo ajab aaye uske liye bhi ready rehna aur baki logo ko nasihat ke liye btana jarur. Aur aap log islam ke bare me discuss karenge jo un bhagvano ko pujte hai jo apni hawas puri karne ke liye hazaro sadiya karte the. Ek se puri hui to dusari dusari se puri hui to tusri and so on.. aap log aurato ki ijjat ke bare me btaoge wah kya din aa gaye 😁 Oh my goodness bhagvan tum logo ka sarjan har uski itni havas thi to aap logo ka to kya puchna.. openly kamsutra ke nam par aslil mandir bnakar logo ko rape ke liye upsana kya ye sikhata hai hindu dharam? India ma rape cases and rape karne walo ke dharam par ekbar research karo to sab pata chal jayega. Bad me yaha par aakar badi badi hakna. Bewakuf, anpad, gawar.. ek aur bat islam puri duniya me fela hai aese hi nai fela, alag alag kad alag alag color aur har tarike se alag log islam follow karte hai. Kabhi mecaa madina ka manjar dekhna tab pata chalega ke islam kya hai. Hindu dharam sirf india me hai aur india ke bahar bhi sirf indian log hi follow karte hai is religion ko. Islam ka knowlwdge batne se atchha hai ke vaid study karo aur logo ko vaid ka knolwdge do. It will better for you and others also.

              1. tanishaa ji….
                Quran ek bemishal kitab hai jise padhkar bade bade scientis, astrologist and doctors ne islam accept kiya hai. Uske bad bhi aap agar bolna chahe kuch bhi to you can ji aapne sahi bola… islaam beshak bemisaal kitaab hai tabhi to aurat ko kheti bola gaya hai…. kya aurat ko usi tarah bechaa jaa sakta hai jaise khet ko ??? magar haa islaam me bahut jagah aurat ko bech bhi di jaati hai… isis ne bhi aurat ko bechaa hai… khet ko rent par di jaati hai kya aapko yaa islaam ke aurat ko bhi rent par diyaa jaa sakta hai ??? khet ko bahut logo me share ki jaati hai kya aurat ko aapko share ki jaa sakti hai ??? aurat ko islaam me ijjajt hi kaha di gayi hai ??? ek mard == 2 auart kya ye nahi hai ??? ek mard== 4 aurat??? jab chaho talak talak bol do?? hadess bolta hai yadi koi aurat pyaar kare to aap usse jabardasti jismmani sambandh bana sakte ho??? jab chahe talak dekar apani biwi ko badal sakti ho …. fir dusari ki biwi se man bhar jaaye to talak dekar apani pahli biwi se nikaah kar lo… ek auart 4 nikaah kyu nahi kar sakti???ek mard 4 aurat se kyu nikaah kar sakta hai ??? aurat ko islaam me saman adhikaar kaha hai??? aap in sab baat ko batlana ji…. kshmaa chahta hu kuch bura bola ho to uske liye… in sabke jawab ke baad aur bhi sawal karunga… ye to bas shuru hai sawal karne ki… aur jo aap upar sawal kiye ho uska bhi jawab denge ham… magar pahle hame islaam ki jaankaari aap jaise gyaani logo se to ho jaaye… aapke jawab ki pratiksha me… dhanywaad

                1. Pehle App apna dimag thik Karo baad me kisi or ko family ki dhamki do. Islam matlab bakwas.
                  Jis dharm K log apne mulk me rehkar apne hi mulk me atankwadi ban jate ase dharm ko mane wale ya accept karne wale bewakuf hai .

                  1. kuch log atanki ho sakte hain
                    kuch logo par jhota iljam laga ho sakta hai
                    no problem…
                    but jitna aatank non muslim log bhi karte hain, usey tum dil & dimag se nahi dekhte

                    jis desh me rah kar, usi desh wasiyo pe jhoote iljam lagana & kannon ka ullanghan karna kya ye apradh-desh droh nahi? lol

                    1. jo bhi ho ji
                      sabse pahla apana naam likhe.. naam chhipane se kuch nahi ho jaata… isse lagta hai ki aapko mat majhab ko batlaane me sharm aati hai….
                      ab aap hame yah jaankaari dena jo bahut kam ko jaankaari hota hai yaha tak media neta vakil tak ko maalum nahi.. ve aise hi ho hangaama karte hain…
                      1) aatankwaad
                      2) ugrawaad
                      3) nakasal waad
                      ye kya hota hai jo upar maine sawal kiya… aur suno sabhi muslim aatankwaadi nahi hote isme koi sandeh nahi magar jo atankwaadi hote hain ve muslim hi kyu hote hain. shukra manao yaha ki dalal media aur gandi rajneta kaa jo votebank ke kaaran aatankwaad ko islam se nahi jodata.. america aur england me to kab kaa yah jaankaari de di gayi ki aatankwaad kaa majhab islam hoti hai. aur yah suno ji…. aur sab desh me kahi bhi yah aaryo aur hindu par iljaam nahi laga hai ki aatankwaad ka majhab hindu dharm hai sanatan dharm hai…
                      mere baato ko gaur se sochna aur jawab dena mere bandhu…

                  1. सनातन धरम में कोई गलत नहीं है | हां मत पंथ इत्यादि में जरुर है गलत

                1. sahil ji
                  kya good tanisha ji…are unka jawab hamne diya uske baat ab tak jawab nahi aaya ..aur jo maine sawal puchha thaa…. hamare comment to parh liye hote ji aur jawab bhi… andhvishwaas aur purvaagrah ho chhodkar comment parhe…

              2. @Tanisha …chal hamare bhagwan ne kai shaidiya ki…but tere mohammad sahab ka kya….?
                Unhone to 6 saal ki aayesha se nikah kiya jab wo 60 k around the….apne bete ki biwi se nikah kiya….yahi character h tere prophet ka…
                jab islam ki foundation hi kisi characterless k uoar khadi hai…fir building to aisi hi hogi na…..
                aur rahi baat islam ki popularity ki wo isliye ki islam allow krta h ki tum aurto k sath jitni xhahe ayyashi kro..janwar ki tarah use kro n fek do….flexibility h..

              3. kia agar muslim aurat dusre se sambhog kartee hai to us ko tilak hota hai aur us ko tesre aadm se sambhog karna padta hai aur sab ko batana psdta hai saboot ke sath laikin hindu dharam mai aisa nahi ya to pati ko pata hi nahi chalta hai ya phir pati maf kar daita hai ya wo dusre ka sath bhagh jatee hai kise dusre mard se jabardasti nahi sambhogh karna padta hai aur aagmi ek se dusre aurat nahi rakh sakta char kaise yah to muslim hi rakh sakta hai chai wo ek ko bhi khush na kar sakee

              4. Jara kam Hanko……tum itni samajhdar aur padhi likhi ho tau narmai k rukh se safai do ya sahi explain karo…..bewakuf vagarah keh k auro ko babal k liye mat uksao……hum sab log shanti chahtey hai……..

            1. marinakhaan ji
              sabse pahli baat yaha koi ladai nahi kar raha.. yaha ham charchaa karte hain… haa kuch muslim jarur fight karte hain kyunki ve gaali galauz karte hain… is kaaran laaanat to momin bandhu ko bole… raam krishn to hamare aadarsh hain…

            2. Give more….ur address no.
              Taaki dus dus launde teri g**nd maare aur mohammad bhi tujh par apne chhinte bheje

              1. कृपया इस तरह की बाते करना आप जैसे लोगो से उम्मीद नहीं की जाती | शालीनता से चर्चा करें |

          1. Abe chootiye 33 hajaar devataon ko hum nahi poojate hain..साला तुम मुसलमान लोग की ना अक्कल घुटने में होती है।। अबे संस्कृत में सनातन धर्म के 33 कोटि के देवता होते हैं।।
            और कोटि का मतलब होता है प्रकार यानी types 33 टाइप्स के देवता होते हैं जो पूज्यनीय होते हैं।।
            जैसे :-सूर्य, चंद्र,अग्नि,वायु,जल, ब्रह्मा ,विष्णु,महेश,
            इत्यादि 33 प्रकार के देवता होते हैं।। जिनकी पूजा तुम सभी को भी करना चाहिए।। और हाँ अगर हमारे देवताओं से इतनी ही नफरत है तो पानी पीना छोड़ दे, धुप लेना तथा सूर्य का फायदा लेना छोड़ दे,आग का उपयोग करना छोड़ दे, हवा लेना छोड़ दे, अरे हम सनातन हिन्दू धर्म से हैं जो इन देवताओं का एहसान मानते हैं और इनकी पूजा करते हैं।। तुम साले यहाँ भी काफ़िर ही हो की सब लेते हमारे देवताओं से हो और उन्ही को गाली देते हो।। आज साबित हुआ।।।।

          1. ji ham koi mat majhab sampraday ko nahi maante … ham to bas saty sanatan vedic dharam ko maante hain… aur dharam sabhi mat majhab ka ek hi hota hai ji….

        3. Bhai Sab Islam me a bhe khagya ke right hand se khyrat do to left hand ko pta na chale.Aap sochege are a Kya bat hai,to Jnab matlab a ke Allah ke rah me kharch Kro to apne aor apne Rab ke alawa kese aor ko pta na chale,ese tarha tlak dene ke bat karna to dur sochna bhe pap hai,Islam me Jo tlak ke shart par gor kre ke tlak de kar dubara use aorat se shade karna chahe to us aorat ke dusre shade ho kar o us mard ke sat rat betai aor tlak ke bad shade karsakta hai ,matlab a ke tlak de ne se pahle mard soche ga aor tlak he nadega,Jo tlak dega mere najar me o namard hai,kuo ke koi mard apne keep ko bhe kse ke sat rat gujarne nhe dega to apne aort ko tlak de ,o sochega bhe nhe.to Jnab a hai Islam aor us ka kanun,

          1. Abdul rashed bhaijaan
            jo hamne bataya ki apni biwi ko dost ki biwi se badalne ke liye talak de do sirf sex ke liye… is tarh ki baate aapke hadees me jaankaari di gayi hai… jab hamne parhaa hai tabhi jaankaari dii.. yadi nahi parha hota to aisa naa bolta.. are hadees me yaha tak bol diya gaya hai ki apane biwi kaa doodh bhi pi sakte ho stan se… bhaijaan thoda hadees parhe…. hadees me hi hai yadi koi aurat aapko pyaar karti ho to uske man se yaa jabardasti aap usse sambandh bana sakte ho…. kripya hadees parhe… aao ved ki aor laute… dhanywaad

        4. यह मर्द को एक तरह की सजा है.. कोई मर्द पसंद नहीं करता कि उसकी बीबी किसी और से सम्भोग करे तलाक को किसी ने पसंद नहीं किया.. तलाक जब कोई मजबूरी हो जब दे वर्ना औरतों से पीछा छुड़ाने के लिए लोग. मार देते.. जैसे बहुत से करते हैं।

          1. saeed bhai jaan
            यह मर्द को एक तरह की सजा है.. कोई मर्द पसंद नहीं करता कि उसकी बीबी किसी और से सम्भोग करे तलाक को किसी ने पसंद नहीं किया.. तलाक जब कोई मजबूरी हो जब दे वर्ना औरतों से पीछा छुड़ाने के लिए लोग. मार देते.. जैसे बहुत से करते हैं।”
            bhai jaan kis tarah ki saza hai.. hadees me likha hai dost ki biwi pasand aa jaaye talak de do aur nikah kar lo fir jab man bhar jaaye talak de do aur purani biwi se nikah kar lo… dusari baat yah ki aapne bola ki yah saza hai … kaisa saza hai ye toek mard ko saza nahiaurat ko saza hai…yadi piccha chhudane ke liye talak dete hai to fir kai baar us aurat se hi nikaah dobaara kyu kar lete hain.. tab wah aurat fir se priya ho jaata hai ? aimplb ki tarah baat kar rahe ho jo usane court me bola thaa….. yah mad ko saza nahi mard ko maza dene waala baat hai halala….

            1. क्या चीजे है वह बतलाना जी | और हां धर्म किसे बोलते हैं यह भी जानकारी देना |
              धन्यवाद

        5. Tujhe islaam ki jaankari nahi he pl.quraan ki galat vyakhya na Karen. Aur pahle Hindu Dharam ka Sahi se study kar Baad me dusre ke Dharam Ko dekhna.

          1. अरे भाई जान
            हम तो सभी मत मजहब के ग्रन्थ को पढ़ते हैं और उसी आधार पर चर्चा करते हैं | हमें यह बतलाना जो प्रमाण दिया है वह प्रमाण को गलत साबीत करे

      2. Jaisa dukano me likha hota hai bika hua maal wapis nahi hoga
        Tum log v likh lo apne darwze par
        Maal bina chude nhi jayegi

        1. दीपक मुखिया जी
          बहुत दुःख होता है जब आप जैसे लोग शालीनता से चर्चा नहीं करते | क्या इस तरह का भाषा का इस्तेमाल करना क्या आपके कोई ग्रन्थ में बतलाया गया है जानकारी देना मेरे भाई | हां यह बात सही है की इस्लाम में कई ऐसी अश्लील बात है | हमें अपनी मर्यादा में रहकर चर्चा करनी चाहिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल आप जैसे लोगो से उम्मीद नहीं की जा सकती | धन्यवाद

          1. Amit Mukhiya , My brother , should have manner way of talking because your expression show your way .So , please , have soft attitude during conversation .

            1. Neo Aryawarati ji
              badi dukh ki baat hai ki aapne naam sahi se nahi parhaa. unkaa naam deepak mukhiya hai …. maine unhe samjhaya hai aur aapane bhi unhe samjhaya uske liye aapko bahut aabhaar.

        2. Mr amit Roy….aap kis trh ka sandesh duniya ko dena chahte h??? Dusro m kmi dhundhna sbsa as an kaam h…,aur ek bat koi v dhrm glat baat nhi sikhlata…glati hmari use samjhne m hoti h….,achha hota ki aap agr dhramo m similarity ki trf dhayan dete bjay differences ki, mai Muslim hu lekin Ram k adarso ko v manta hu aur paigame Islam ko v….agr aap btana hi chahte h to logon ko prem btaye…..nafrat bdha kr aapko kya milega???

          1. pirzada ji
            सन्देश वही देना चाहिए जो सच हो और लोग उस सन्देश को सही समझे और उस सन्देश से लोग सुधार कर सके और अपनी गलती को स्वीकार कर सके | चलो मैं आपको एक उदाहरन देता हु बहुत पहले पौराणिक बंधुओ में सती प्रथा होती थी जिसमे पति के मरने पर पत्नी या तो खुद अग्नि में समाहित होती थी चाहे उसे दवाब देकर अग्नि में समाहित कर दिया जाता था जिसका विरोध किया गया क्यूंकि यह गलत था और विरोध करने के कारण इस तरह की परम्परा बंद हुयी जो कमी है उसकी सुधार की गयी | इसी तरह हमारा भी उद्देश्य है की जिन जिन मत संप्रदाय में जो कमी हो उसकी जानकारी दी जा सके जिससे उसका विरोध हो सके और गलत परमपरा को समाप्त की जा सके | और हम वही गलत परमपरा को समाप्त करने की कोशिश कर रहे हैं सभी मत मजहब से | क्या यह सन्देश देकर लोगो को जागरूक करना गलत है ? यदि इस तरह कमी नहीं दिखाई जाये तो क्या समाज का सुधार की जा सकती है ? फैसला आपकी सोच आपकी | और हां हमारे वैदिक सनातन धर्म में पूरा विश्व को ही कुटुंब समझा जाता है बोला जाता है मनुष्य बनो | सब मिलजुलकर रहो | मगर और सब पुराण कुरआन बाइबिल इत्यादि प्रेम नहीं सिखाती द्वेष सिखाती है जैसे एक उदाहरन दे रहा हु काफ़िरो को मारो कुरआन बोलता है | इस कारण आज isis और कई आतंकवादी संघटन है जो कुरआन का अनुसरण कर दुसरे मत मजहब का क़त्ल करते हैं ? क्यों ना उन आयत को कुरआन से हटा दिया जाए समाज की सुधार के लिए | हमारा मकसद है समाज की बुराई को मिटाना | अब आप हमारा उद्देश्य समझ गए होंगे क्यों हम कमी खोजते हैं ? इसकारण खोजते है जिससे वे अपने मत में सुधार कर सकें | आप अछे इंसान लग रहे हो तो आप भी कोशिश करें अपने मत से कमी को दूर करने की | धन्यवाद |

            1. Mr amit….andhviswaas k khilaf m v hu….aur agr aap kisi v dhrm k chal rhe adhviswas ko dhrm ki roshni m dekhnge to aap paynge, uska dhrm she koi Lena dena nhi, logon ne apne according dhrm ko bna rkha h,, aur jhaan tk ISIS ka Islam she taluk h, to unka Islam she koi taluk nhi h..Islam begunahon ko Marne ki ijajat nhi deta…mai khud ISIS ke khilaf h…kyunki ye Islam ko bdnaam kr rhe h…kuch kattar Muslim isko badhwa de rhe h…Jo ki srasr glat h….Islam m “jehad” sbd k mtlb ko glat trike se in ISIS ne liya h…..filhaal itna jaan lijiye., koi v dhrm manav se prem hi sikhlata h…..aur Jo ish sach ko jaan gya wohi Ram aur Rahim k raste pr hai

              1. Pirzada भाई जान
                मैंने पहले भी आपको बतलाया की आप मुस्लिमो में हटकर हो और इस कारण आपकी बहुत सम्मान करता हु | मगर जो सच हो उसे बतलाना हमारा मकसद है जिससे उन मत मजहब के लोगो को सत्य की जानकारी हो सके और वे अपने मजहब को सुधार कर सके | मैंने आपको एक उदाहरन दिया था सती प्रथा का इस कारण सती प्रथा का समाज से हटा दिया गया | क्या आप लोग हलाला खतना तलाक को समाज से हटा सकते हैं ?? आज मेल पर वात्सप्प पर तलाक दे दिया जाता है क्या यह प्रेम की शिक्षा देती है कुरआन ? मुशरिको को मारो क्या यह कुरआन शिक्षा नहीं देता ? ये गिलमा क्या होता है इसे बतलाने की कोशिश करेंगे ??? हमें इन बुराई को हटाना है समाज से | आज आप यह सोचो की जिसकी निकाह हुयी हो उसकी उम्र मात्र १७ साल की हो और उसे तलाक दे दिया जाना क्या यह सही होता है |आप isis ओसामा बिन लादेन के समर्थक नहीं हो मगर और सब जो है इन सब का समर्थन करते हैं आप जैसे बहुत कम ही मुस्लिम होते हैं इस कारण आप जैसे मुस्लिम का मैं सम्मान करता हु एक बात है जी आप सत्यार्थ प्रकश पढ़े और फिर वेद पढ़े इसके बाद कुरआन पढ़े हदीस पढ़े आपको खुद सत्य की जानकारी हो जायेगी | चलिए मैं कल से साईट पर नहीं आऊंगा तो कल से आपसे संवाद नहीं हो पाएगी कुछ दिनों तक | हां मेरा रोज पोस्ट साईट पर होते रहेगी | आपको जो सुझाब दिया है सत्यार्थ प्रकाश और वेद पढ़े | आप सभी मत मजहब को छोड़कर वैदिक सनातन धर्म को अपना लेंगे | आओ लौट चले वेद की ओर | धन्यवाद आपका |

              2. Sir salute ap mujhe bot ache insan lge scche lge mujhe musalmano se ya Islam se dikkat nhi mujhe hr dhrm ki glt chizo se dikkt h chahe wo mere dhrm ki hi Ku na ho wo ek din nasoor bn jati h unhe bdhne hi nhi Dena chahiye A buyGR possible ho to mai chahungi ki ap jaise ache aur shant log mere Frnd ho

          2. Aap btao makka me kya hai shiv ling usme saaf saaf dikhta hai tum log choomto ho. Le lo tanisha g ko aur talak do. Aur islaam ko apni marzi se apnane wale un aurto ko swaad lena chahte hai khul k sex kr sake apni maa behan ki kuran ek shaitan ki gandi soch hai. Aur kuch nhi. Kuran dharm jb start hua tb 350 log hi isse dharm ko join kr k aagai badhay jaise ek party nanayi jati hai waise agar kuran ya islaam allah k hatho bnayi gayi to kyu ye registan me paida hue aur dushro k desh me jaake rehna pda. Ye log ek animal ki tarah rehtey thay waha koi rule nhi hota jo smjh me aya wahi rule bna liya.

          3. Well said sir ap jaise log ho to insan ka jnm hi safal ho Jaye ,ek zindagi hai Jio aur mine do koi atankwadi na bane Mao b hr dhrm ki respect krti hu but glt AGR apna b hai to glt khti hu

            1. इस्लाम में क्या अच्छा है नेहा जी थोडा जानकारी देना जी |

        3. Ham logou ka kam he hai har kese ke maal ko chodne ka, ese tarha ham jahell log Islam ko badman karate hai,accha sa nam rakhlenese koe musalman nhe ho ta Amal bhe hona chahea.

          1. abdul rashed shahab
            kya jayra vasim ko rape dhamki muslimo ne nahi di thi??? suhana saiyad ko rape karne kaa dhamki nahi di gayi gayi thi??? naahid aafrin naam hai shayad aasam ke singer kaa unpar 46 fatwe dene ki baat galat thi… aisa muslim bandhu karte hain. abhi ek video hamne apane page par post ki thi jisme hindu ladki ko chhedchaad kar rahe the aur us ladki ke pita ne virodh kiya to us pita ko jaan se maar diya gayaa. islaam yahi sab to sikhata hai ji….kaafiro ko maaro… hathyaar ke bal par namaj parhao matlab muslim banao.. thoda quran hadees parhe bhai jaan.. dhanywaad…. ho sakta hai aapke hisaab se vo muslim naa ho magar khud ko ve muslim hi bolte hain….

      3. Lack of knowledge
        Islaam ke khilaaf roz bahut sare log likhte he ye bhai unme se ek he
        women’s right 1400 saal se Islam me he
        Ye aj women right ki baat kar rahe he.
        JO NO.1 hota he sab usi ke pichche padte he. Aur use galat sabit karna chahte he.

        1. जनाब जो गलत होते हैं उसी पर बात की जाती है | औरत को खेत क्यों बोला जाता है | लौंडी क्यों बोला जाता है ? मर्द == २ औरत , मर्द == ४ औरत | फिर कैसा इन्साफ | हलाला क्या है ??? सवाल बहुत है | फिलहाल इतना का जानकारी देना| धन्यवाद

      1. hakim saahab
        sabse pahle hame yah batlana ki kyaa is tarah ki bhashaa bolne kaa aagya quraan hadees me hai kyaa??? kya gussa karna quran me sahi bolaa gaya hai??? kyaa aap quran aur islaam ko follow sahi se kar rahe ho ??? jab nahi kar rahe to sachhe muslim kaise ???? aur bhai jaan isme puri reference ke saath di gayi hai kaun saa hadees me aur kaha kaha aaya hai aisa….post parhe… refernce se check kare.. fir charchaa kare… dhanywaad…

    2. kya aap ne Quran ko para hai?? kise ke bhi bekar post se andaza mat lagao. Aaj puray duniya mein Islam fel raha hai. yeh article likhne wala chutiya hai. Agar Islam mein aurat badalna itna asaan hota to Burkha ka system nahi hota, yeh jhooto se sawdhan raho

      1. PUri duniya men islam fail raha hai 🙂

        aur puri duniya se islam mit bhee raha hai

        allah ke manane wale kaisee maut mare ja rah hien

        Afganistan, Iraq, aadi desho men samne aa rah ahia

        lekin na to allah hee aataa hai n uske farishte

      2. जुबेर जी नमस्ते

        क़ुरान को पढा भी है और समझा भी है, जरूरत यह है कि प्रत्येक मुसलमान क़ुरान को मात्र समझ ले तो यह फैलता हुआ शांति का मजहब चंद दिनों में सिमट जाएगा

        हम मोहम्मद साहब के अनुयायी नही जो मात्र हीरा पहाड़ी की बाते सुन कर किसी झूठ पर भी यकीन कर ले

        हम सत्य के अनुयायी है जो प्रत्येक बात की जांच कर ही प्रस्तुत करते है

        इस्लाम में औरत बदलना तो बहुत आसान है और उसी पर अब सरकार रोक चाहती है जिसका विरोध तथाकथित मानवता प्रेमी शांति का मजहब कर रहा है

        बुरखा का सिस्टम से औरत बदलने का क्या सम्बन्ध मेरे हिसाब से तो यह सबसे शानदार तरीके में एक होना चाहिए औरत बदलने के किसी को बीवी बना लो बुरखा पहना लो पहचान छुप जाएगी

        खैर ये फालतू बहस से उचित तो यह है मियां की आप क़ुरान को मदरसे में गर्दन आगे पीछे कर करके पढ़ने से बेहतर है किसी स्वछंद वातावरण में इसे पढ़िए इसे समझिए शंका कीजिये फिर मौलवी से जवाब मांगिये

        आपको आपकी बात का जवाब अपने आप मिल जाएगा

  1. I am afraid that this view is completely distorted. The instruction to marry more than once was given when the ratio of women increased after most of the men died in wars. This was done in order to avoid the women from roaming about the streets without any support. So the men were instructed to marry them sio that their children might get some legal social status. But the men were strictly instructed not to ignore their previous wives for the sake of new ones. Because there is temptation in the new.

    1. The instruction to marry more than once was given when the ratio of women increased after most of the men died in wars”

      Dear Mona ji

      in that case do u wanna to say that this low of Allah should not be applicable now”

      🙂

      1. respeted arya g namste
        ye eak mauli si teachr hai muslim univesity m
        do char bat esne quran ki padh li to apne ko aalim fazil mankr aapse tark kar baithi enhe pta nhi hai aapke aur arya samj k vidvano k bare mai

        1. respeted arya g namste
          ye eak mamuli si teachr hai muslim univesity m
          do char bat esne quran ki padh li to apne ko aalim fazil mankr aapse tark kar baithi enhe pta nhi hai aapke aur arya samj k vidvano k bare mai,enko simple way mai samjha dijiye

          1. Abe arya ke handwe…9009898841 le ye mera no. He choot ke la kha ka vidhwan laa rha he ….agr islam ko galat sabit kr diya to 1 cror ka inam dunga …
            Khulla challange utha la tere vidvano ko….salo ek chutiye ke piche tum sare chutiye…..

            1. islam ko galat sabhit karne ki kya aawashyakta hai

              usaka hal to aise hee kharaab ho rakha hai

              afganishatan ,
              yaman
              Iraq
              somaniya
              leebiya
              kitane hee desh aise hein

            2. Ale le le le… mera nazayaz beta internet chala rha h
              Fikr mt kr beta tre 1 crore katwe bhaiyon ko kaat ke tre aur teri ma se milne jrur aunga…Teri ma ko mera pyar dena

              1. कृपया मर्यादा में रहे या फिर आगे से आपके कमेंट को शामिल नहीं की जाएगी | शालीनता से चर्चा करें

      2. No. This law is no longer needed now. It needs to be abolished. Truth is relative to time. And with time many a laws become archaic and redundant. This is one such law which should be done away with under present circumstances. Because people now distort its utility for their personal gain. I am never in favour of this practice as it causes a lot of pain to humanity now and does more harm than good.

        1. We completely agree with your comment that Halala concept has “archaic and redundant. This is one such law which should be done away with under present circumstances”

          We congratulate you and appreciate you that u have courage to say that Aaayat 213 of Sura AL Bakara is not required now.
          Knowledge of Allah has redundant

          🙂

          YOur wisdom has judged & u possess that courage what your Maulves doen’t

    2. मोना जी,
      क्या आप हमको ये बताएंगी की ये कानून क्यों आये,
      आखिर औरते के शौहर क्यों युद्ध में मारे जाते थे,

      ये नियम क्यों बना,
      हिन्दू धर्म में भी पुनः विवाह का चलन था,
      परंतु कोई औरत विधवा ही रहना चाहती है,तो उसका भार उसके पति के परिवार और उसके बच्चों पर आता है,

  2. another thing about the talaq. It is the most condemned word in islam, but it is seen as an evil necessity. When two people cannot live in harmony, islam enjoins them to separate so that they may avoid a constant torture for themselves and their children in an unhealty atmosphere of fights. There is no instruction about wife swaping. This is a totally distorted view. The enjoinment to remarry the wife is only after the case of halala, which is when the wife is given talaq, she also has as much right to remarry as the man has. Halal means that in case a man has given talaq to his wife, and realises his mistake and wants to take her back, he can only remarry her after she has been married again to someone else and that person is ready to leave his wife of his own free will. This is another way of saying that remarrying her is impossible. You cannot play with life and emotion of a woman so easily. So this is a kind of punishment to the man for giving her talaq in the first place. And this is also something to discourage such a practice, since it entails such a strict punishment of halala. Therefore men must think and think very carefully before they give talaq, of what would be in store for them if they start playing with this permission.

    1. Dear Mona ji

      You have mentioned that :
      -Halal means that in case a man has given talaq to his wife, and realities his mistake.
      -he can only remarry her after she has been married again to someone else and that person is ready to leave his wife of his own free will.

      As per your comments it was mistake of Husband and further you have quoted that HE has realized his mistake.
      so our point is that if it is mistake of husband why penalty should be imposed on wife.
      why wife has to remarry another person and has to be in physical relationship with third guy.
      why for the mistake of earlier husband he has to live this miserable life.
      and even after for the sake of mistake of earlier husband she has made relationship again she is on the mercy of current husband that until he gives talaq she cannt join
      husband
      .
      we are in consensus with your remark that ” You cannot play with life and emotion of a woman” but punishment should be given to the guilty not to the women,

      looking forward for your views

      You cannot play with life and emotion of a woman so easily. So this is a kind of punishment to the man for giving her talaq in the first place. And this is also something to discourage such a practice, since it entails such a strict punishment of halala. Therefore men must think and think very carefully before they give talaq, of what would be in store for them if they start playing with this

      1. Bhai AGR tm sacche Hindu vote
        …to dusre k dhrm kya yun majak na bnate….phle apna dhrm shi se follow kro….dusre k dhrm m kmi nikalne ki adat chutt jayegi

        1. pirzada जी

          मेरे एक सवाल का जवाब दोगे आप ? क्या २ + २ को जो ५ बतलाते हैं या ३ बतलाते हैं उसे सही जानकारी देना की २ + २ = ४ होते हैं क्या गलत है ?? नहीं ना ?? फिर जब कोई भटका हो उसे सही मार्ग की जानकारी देना गलत है क्या ??? और यह जो जानकारी दी गयी है कुरआन हदीस से ही दी गयी है और जो सही है वही बतलाया गया है और हम सभी मत की बुराई का जानकारी देते हैं जिसमे कोई कमी हो उसकी जानकारी देना गलत नहीं सही होता है वही हम कर रहे हैं |

          1. Mere Bhai…..bhut si chizen glat lgti h jb tk use thik se smjha nhi jay…agr mai aapke religion m fault dekhne lgu, aur aap mere religion m to fir him aapas m bat kr rh jaynge….itna yad rkhiye mahan wo no Jo fasad aur jhagde krwyae….mahan to wo h Jo prem aur aman(peace) ka sandesh de…Ram ne sbri k jhute Ber prem m hi khayye the…prem hi insaan ko prmatma se jodta h

            1. Pirzada भाई जान
              बहुत सी बात गलत लगती है तो उसे कैसे स्वीकार किया जा सकता है यह बात समझ से बाहर है जी हम केवल इस्लाम की ही कमी को नहीं दिखलाते जबकि हम पौराणिक साईं मत कबीर मत मत ब्रह्मकुमारी मत इसाईं मत इत्यादि इत्यादि मत में जो गलत होता है उसे जानकारी देकर यह बतलाना चाहते हैं की आप अपनी गलती कमी को सुधारे और समाज को उन्नत करने में योगदान दें | चलिए जैसे आपने बतलाया राम ने शबरी के बेर खाए इस बात से हम भी सहमत है और इसे स्वीकार करते हैं मगर जब बात रामायण काल की हो रही है तो उसमे जो गलत लग्नेवाली बात है उसे हम अस्वीकार करते हैं जैसे हनुमान जी छलांग लगाया और सूरज को अपने मुख में बचपन में डाल लिया था जो कमी है उसे हम स्वीकार करते हैं और लोगो को बोलते हैं ऐसा नहीं हो सकता क्यूंकि सूर्य के पास कोई भी नहीं जा सकता जो जाएगा जल जाएगा | इसी तरह कुरआन की बात को देखें एक अंगुली चाँद की ओर की तो चाँद के दो टुकडे हो गए | चलो चाँद के दो तुकडे हो गए तो हमें नजर क्यों नहीं आता | भाई जान अंधविश्वास को छोडो और सत्य सनातन वैदिक धर्म की ओर लौटो | वेद की ओर लौटो | पूर्वाग्रह छोडो | हमारा मकसद है समाज में फैली अंधविश्वास को मिटाना और समाज को उन्नत करना | आपको यह जानकर बहुत आश्चर्य होगी की हम सत्य को बतलाने की कोशिश करते हैं और सत्य को बतलाने समय हमें केवल धमकी मिलती है फिर भी अच्छा वही होता है जो सत्य के मार्ग पर चले | अगर यही भगत सिंह चन्द्रसेखर आजाद जी सब धमकी से डर जाते तो आज आजादी नहीं मिलती | उसी तरह हम भी समाज को उन्नत करने के लिए प्रयासरत हैं | आप अच्छे इंसान लगते हो आप भी समाज को सुधारने में योगदान करें | धन्यवाद आपका

          2. Aur m Muslim bhayiyon se v yehi kahunga,aap apna islaam mane PR dusre k dhrm ko bura kehne ka hakk apko kisne diya??. Islam word ka hi mtlb peace h…ye kis trh ka peace faila rhe aap log

            1. Pirzada भाई जान
              आप अच्छे इंसान हो | आपको यह बतला दू की इस्लाम शान्ति का मार्ग नहीं दिखाता है मुझे पूरी तरह याद नहीं आ रहा की यह सुप्रीम कोर्ट था या कोई हाई कोर्ट जिसमे यह स्वीकार किया गया था की इस्लाम की आयते शान्ति नहीं मार काट करने की इजाजत देती है और कुरआन की २५ आयत हैं जिसे कोर्ट ने भी आपतिजनक बताया था शान्ति के मार्ग के लिए | क्यों ना उन आयत को कुरआन से हटा दिया जाए | आप जैसे समाज को प्रेम के मार्ग दिखाने के लिए ऐसा करने में दिक्कत क्या है ??? आप तो प्रेम की बात करते हैं तो उन आयतों को हटाने का प्रयास करे | वैसे आपके भाई बंधू यहाँ गाली गलौज ही करते हैं क्या गाली गलौज करना इस्लाम में सिखाया जाता है जैसे ३ ४ दिन पहले शिबू ने गाली दिया था | हम सत्य की मार्ग पर चल रहे हैं इस कारण इन बातो को नहीं लेते और समाज में निरंतर सुधार का प्रयास करने में लगे हैं | धन्यवाद आपका

            2. आपके ख़्यालात बहुत बेहतरीन हैं।आपका शुक्रिया।

  3. Indeed u.r right. But from how i interpret it, once the woman remarries, it is highly impossible that she will want to leave the second husband who keeps her happy for the sake of one who left her. Which means that this time SHE will refuse to marry the first scoundrel. This time SHE will get the right to decide about her life. And also, it is not likely that another man who bails her out of such a horrible situation will allow the first husband to approach his present wife, who is now HIS ghar ki izzat. So in this way, all the paths to remarry the first wife are nearly closed, no matter how much the scoundrel regrets.

  4. And another thing. The wife does not HAVE TO MARRY any other guy if she does not want to. It is purely HER wish. Talaq is supposed to happen only if there are irreconciliable differences. This rule is only to discourage such a practice in favour of working things out together. I agree that the thought is repulsive. But it is deliberately made repulsive so that people would stop to think twice before giving talaq, knowing about the repulsive consequences. It is like killing poison with poison.

    1. Thanks for being agree with the truth and right approach.

      one this is still need to be think upon- check below line out of the comment:

      “made repulsive so that people would stop to think twice before giving talaq, knowing about the repulsive consequences”

      “Halala” concept in Quran, is against the principle of justice and not punishing the culprit but punishing the women”

  5. gelchodo kbhi tum logo ne quran pdha hai kya …madarchodo sirf likhne me dhyan dete hai jisne likha usse mujhe us madarchod ko me btata hu …sale chutiyo pehle quran pdo madarchodo ..5 aadmiyo pr ek biwi rakhte ho jb shrm nhi aati ..salo jhuto

    1. भाई जान लगता है आपने कुरान पढ़ा और हमने कुरआन नहीं पढ़ा है | आप जैसे ज्ञानी से हम जरुर कुरआन पढ़ना चाहेंगे जी और साथ में हदीस भी आप जैसे ज्ञानी से पढ़ना चाहता हु | भाई जान सबसे पहले मैं आपसे यह जानना चाहता हु की क्या कुरआन में कोई आयत और सुरा है जिसमे यह लिखा गया है की आप गुस्सा करो और मीठे मीठे सब्द(गाली) का इस्तेमाल करो | थोडा हमें कुरआन से सूरा संख्या और आयत संख्या से जानकारी देना भाई जान | क्या आप कुरआन का अनुसरण सही से करते हो क्या ? यदि हां तो हमें बतलाना की मीठे मीठे सब्द का इस्तेमाल करना कहाँ लिखा है बड़ी मेहरबानी होगी जनाब | यदि आप सच्चे मुस्लिम हो तो | आप जैसे ज्ञानी से जानना चाहता हु की कुरआन में कहाँ लिखा है मीठे मीठे सब्द का इस्तेमाल करो

      1. Ye sahab quran ki product hai. 5 baar namaz adaa kartaa hai aur inke zuban kitni gandi dirty hai aur dimaag to 1000 gunaa gandaa hogaa hi. Yeh sab saabit kartaa hai ki Quran padne se aadmi paak nahin hotaa. aur gande vichaar waalaa ho jaataa hai.

      2. Are bhaiya ji itna sareef zamana nahi hai ye sale apni bahan nahi chhodte hai dusre ko updesh dete hai aur mai in chuslamiyon se sirf itna janna hu ye sale chuslami 1400 se pahle kaha the

            1. शुरूआत तो बिजेन्दर कुमार ने की उसके हिन्दु धर्म को तो बुरा नही कहा आपने यही आपका दोगलपन है

            1. यदि शालीनता से चर्चा नहीं करनी तो आप कृपया साईट पर चर्चा ना करे | आपके कमेंट को या और भी जो गाली गलौज करेंगे सभी का कमेंट शामिल नहीं की जायेगी

    2. भाई जान आप जैसे ज्ञानी लोग से यह जानना चाहता हु की क्या आप तौरेत इंजील जुबेर में मिलावट मानते हो या नहीं ? इस बात का हमें जवाब देना | यदि नहीं मिलावट की गयी तो कुरआन को नाजिल क्यों की गयी ? और यदि आपका जवाब होगा हाँ तो यह जान ले जब जुबेर इंजील तौरेत में मिलावट हो सकती है जो की आपके हिसाब से अल्लाह की वाणी थी या है जो आप बोलो तो फिर मानव लिखित महाभारत में मिलावट क्यों नहीं की जा सकती है और उसमे गलत जानकारी दी जा सकती है की ५ से विवाह करो यह महाभारत में मिलावट कर दी गयी है | दूसरी बात आप यह जानकारी देना की कितने औरत है जिसके 5 पति हैं इतिहास में खोजकर बतलाना या अभी भी कोई हो तो बतलाना | भाई जान हमें यह भी बतलाना की यदि इस्लाम शान्ति सिखाता है तो फिर मीठे मीठे सब्द का इस्तेमाल आप जैसे लोग कैसे कर सकते हैं थोडा हमें जानकारी देना जी || एक बात और बतलाना जैसे 1 पुरुष 4 औरत से निकाह कर सकता है तो कुरआन यह क्यों नहीं बोलता की एक औरत भी 4 पुरुष से निकाह कर सकती है | क्यूंकि औरत को इस्लाम में और कुरआन में बस उपभोग की वस्तु ही समझते हो और औरत की स्थिति जानवर से भी बद्दतर बनाकर रखा है आप लोगो ने | हम आप जैसे ज्ञानी से जरुर मार्गदर्शन की उम्मीद करते हैं |

    3. अब हमने पढ़ लिया क्या है क़ुरान में धन्यवाद भाई क़ुरानी प्रवचन के लिए

    4. Wo ek case tha aur apk cases hr 1 KO 4 biwi ajtk allowed hai aur ap dusro KO gali dete ho admi rkh skte h aurt ne rkhlia to glt pdh k aaiye Ku aisa hua tb boliye

    1. भाई जान आप अपनी असली औकात पर नज़र आ रहे हो जी | कुरआन में बोला ही गया है मार काट करो जेहाद करो वही कर रहे हो | क्या आप नबी को अनुसरण करते हो ? मुह्मद साहब को एक और रोज कूड़ा शरीर पर फेक देती थी मगर मुह्मद साहब कुछ नहीं बोलते थे कुछ दिन जब वह औरत उनके शरीर पर कूड़ा नहीं फेकी और नज़र नहीं आई तो वे खुद उसके पास गए पूछने की आपको बहुत दिन से देखा नहीं आप ठीक तो हो | मगर वहाँ देखा की वह बीमार थी तब मुहम्द साहब ने उस औरत का इलाज करवाया | ऐसा किसी मुस्लिम ने टीवी चैनल में जानकारी दी थी जिसे मैंने शेयर किया |आप तो खुद मुहम्द साहब और नबी को अनुसरण नहीं कर रहे हो तो सच्चे मुस्लिम कैसे हुए ? कुरआन बोलता है नबी का अनुसरण करो | फिर आप सच्चे मुस्लिम कैसे ? जानकारी देना जी ज्ञानी जी | आपसे मार्गदर्शन चाहूँगा जी | फिर आगे चर्चा करूँगा आपसे |

    2. भाई जान हम आप जैसे ग्यानी लोग से कुरआन जरुर पढ़ना चाहेंगे अच्छा होगा यहाँ पर हमें कुरआन पढ़ाए जिससे बहुत से लोग कुरआन के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे | भाई जान यह भी बतलाना कुरान में किस आयत और सूरा में लिखा गुस्सा करो | गाली दो | थोडा जानकारी देना आप जैसे शांति प्रिय लोग से यह जानकारी लेना चाहता हु | धन्यवाद

          1. रिशवा आर्य कुरान और मुहम्मद साहब के बारे मे इतना झूठ मत बोल नही तो मैने आज गाली नही दी है। तूझे मार तो नही सकती पर गाली जरूर दे सकता है। झूठ पे झूठ लिखकर क्या साबित करना चाहते हो तुम।
            अगर मै भी आपकी तरह झूठ लिख दू धर्म के बिरे मे तो क्या आपको गुस्सा नही आयेगा। मै लिखकर दिखाता हू
            ऋग्वेद मे लिखा है वो इंसान जब तक आर्य य सनातनी नही हो सकता जबतक अपनी मा को ना चोद ले। पृष्ट 56: मंत्र 310
            और अर्थवेद मे त ये भी लिखा है । एक सनातनी को अपनी सगी बहन को चोदना बहुत जरूरी है नही तो वो आर्य नही बन सकता।पृष्ट78:मंत्र 678 / श्लोक 71
            और भी बहुत लिख सकता हू झूठ आपकी तरह मगर आगे नही लिखूगा। क्योकि मेरा धर्म मुझे इजाजत नही देता कि किसी के धर्म को बुरा कहो। इजाजत तो आपका धर्म देता है किसी के धर्म को बुरा मत कहो मगर तुम उसका पालन नही करते।माफ करना

            1. “रिशवा आर्य कुरान और मुहम्मद साहब के बारे मे इतना झूठ मत बोल”

              क्या झूठ बोला है ये तो बताओ

              और आपका धर्म क्या इज़ाज़त देता है या नहीं ये तो आपके कमेंट से पता चल ही रहा है

        1. Nhi likha hai…?
          Lkin tere bhai log to khulle saand gadhe ki gaand jaise gussa krte h
          Ek Minute..
          .
          .
          .
          .
          Aur ha vo tere bhai hi hai na..??##!!!

          1. आप जैसे लोग से यह उम्मीद की जाती ही की शालीनता से चर्चा करें | गाली गलौज या अभद्र भाषा का प्रयोग ना करें | धन्यवाद

    3. Sare anpad hai Nasrullah g ye sab comments krne wale Hindu hmare dharm ke bare me aur hmare Mohammad shaheb k bare me kuchh nhi jante

      1. Islam men auraton ki stithee kya hai ye jag jahir hai
        kitanee bandishen hein
        ye bhee pratyaksh hai

        aapko sata ko sweekarna chahiye yadi hamen kuch galat likha hai wo ham manane ko taiyar hein praman sahit batayen

      2. Ha hum ye bi ni jante ki agar vo tujhe dekh leta to tera kya haal hota
        phir bhi shayad jyada nhi tu baby se begum ho jati

    4. Nasrullah…. chus mera lullah
      Aur ha apni auraton ko v marte ho na tum Khair ab kr hi kya skte ho
      Lund to hai nhi katwe hi rhna h
      Kuch kar nhi skte na isliye marte ho daba kar rkhte ho
      Saale NaMard katwa gaand ke Kattu

      1. अपनी मर्यादा से बाहर ना जाए | आपसे यही उम्मीद की जाती है | तर्क के आधार पर चर्चा करें

  6. अगर इस्लाम धर्म को समझना है तो हदीस और कुरान को सही तरीके से पढो ।
    गलत इल्जाम मत लगाओ ।
    अगर मैं हिंदू धर्म की हिंदी करने पे आ गया तो मनुस्मृति गीता वेद मे भरी हुई सारी गंदगी उजागर कर दूंगा ।
    मुहं छुपाते फिरोगे।

  7. जी भाई जान जरुर हम इस्लाम मजहब को हदीस से समझना चाहेंगे जी | इस्लाम में कैसे औरत को रखा गया जाता है इस बारे में कुरआन हदीस से जरुर सीखना चाहेंगे यदि आप सिखाना चाहोगे भाई जान | आप बेशक गीता वेद मनुस्मृति आदि से चर्चा करे हमें इन्तजार रहेगा जी | फिलहाल यह जानकारी दे दू की कुरआन ही है जहाँ औरत को खेती बोला गया गया है | कुरआन ही है जहाँ यह बोला गया है की औरत की पिटाई करो | कुरआन ही बोलता है 1 मर्द == 2 औरत की गवाही | 1 मर्द == ४ औरत की गवाही | ऐसा तो कई उदाहरन दे सकता हु जी कुरआन से | हदीस की बात यदि बोलना शुरू करू तो फिर आप हमें और फूलो से बारिश करना शुरू कर दोगे | हदीस बोलता है अपनी बीवी का दूध पि सकते हो (मुवत्ता हदीस ) हदीस बोलता है pubic hair साफ़ करो? क्या इस का तरह का बाते कोई भी धार्मिक ग्रन्थ में होनी चाहिए ? इसके अलावा हदीस में बताया गया है की यदि किसी मित्र की बीवी पसंद आ जाए तो तलाक देकर उससे निकाह कर लो फिर जब मन भर जाए तो तलाक देकर अपनी मित्र को उसका बीवी सौंप दो | भाई जान ऐसा कई उदाहरन दिया जा सकता है मगर यहाँ उतना जानकारी देना सही नहीं और ना हमारे पास इतना ही समय है |
    धन्यवाद

    1. अपनी खेती से इंसान बहुत प्यार करता है। इसलिए

      क्या झूठ बोलते हो आप दोस्त की बीवी पंसद कैसे आ सकती है गैर औरतो को देखना इस्लाम मे हराम है।

      भाई साहब आप अगर कुछ अक्ल रखते हो तो आपको मानने पडेगा एक औरत वो सब कुछ नही कर सकती जो एक मर्द कर सकता हो इसलिए।

      1. नफीस भाई जान
        मेरे को मजबूर ना करे वरना इस्लाम की पोल खोल कर दूंगा हदीस से | और वो भी लिंक के साथ | औरत का क्या स्थिति है इस्लाम में | फिर कमलेश तिवारी की तरह हमें भी गाली देना आरम्भ कर डोगे हम हदीस से ही प्रमाण देंगे मुहम्मद साहब सब की वो भी लिंक के साथ | पाकिस्तानी साईट के हदीस से |

        1. मै गलत हदीस को देखते ही बता सकता हू आप भेजोगे तो मेरा जवाब भी पाओगे।

          1. are mere nafees bhai jaan . galat hadees ham nahi dete hain. jise pura momin bandhu swikaar karte hain use aap aswikaar karte ho. yaha tak aapne naam yaha nahees nahi rahul likhaa hai. yahi to jhuth bolne ki shiksha islaam deta hai. al takaiya

  8. एक चोर को सब चोर ही नजर आते हैं।
    मेरे विचार से इंसान को पहले अपने अंदर झांक लेना चाहिए और उन दोषों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।
    क्योंकि जिनके अपने घर शीशे के होते हैंं वे दूसरों के घरों में पत्थर नही मारा करते—

    बलात्कार का आविष्कार balatkar ka avishkar
    देवताओं के साथ साथ भगवान के अवतार भी अनैतिक आचरण करते थे। कई स्थलों पर तो उन का आचरण अनैतिकता की हद से भी आगे अपराधपूर्ण लगता है। इस तरह के कृत्य यदि कोई आज करे तो कानून में उसे दंड देने की व्यवस्था है। भविष्‍यपुराण में उल्लेख आता है कि ब्रह्म्रा, विष्‍णु और महेश ने क्रमशः अपनी पुत्री, माता और बहन को पत्नी बना कर श्रेष्‍ठ पद प्राप्त किया ।
    स्वकीयां च सुतां ब्रह्मा विश्णु देवो मातरम् !
    भगिनीं भगवा´छंभु गृहीत्वा श्रेश्ठतामगात् !!
    – प्रतिसर्ग खं. 4,18,27
    अर्थात ब्रह्मा अपनी लड़की को, विष्‍णु देव अपनी माता को और शंभु अपनी बहन को ग्रहण कर के श्रेष्‍ठ पद को प्राप्‍त हुए ।
    वेद में भी इस का उल्लेख हैः
    पिता दुहितुर्गर्भंमाधात्
    – अथर्व 9,10,12
    अर्थात पिता ने बेटी में गर्भ धारण किया?
    मातुर्दिधिषुमब्रवं स्वसुर्जारः
    श्रृणोतु नः भातेंद्रस्य सखा मम.
    – ऋग्वेद 6,55,5
    अर्थात मैं मां के उपपति को कहता हूं. वह बहन का जार हमारी प्रार्थना को सुने, जो इंद्र का भ्राता है और मेरे मित्र है ।
    ‘‘भागवत’’ के तीसरे स्कंध में ब्रह्मा द्वारा पुत्री को चाहने का स्पष्‍ट उल्लेख आया है इस प्रसंग का अंश इस प्रकार हैः
    वाचं दुहितरं तन्वीं स्वयंभूर्हरती मनः
    अकामा चकमे क्षत्रः सकाम इति नः
    श्रुतम् तमधरम्‍मे कृतमति विलोक्य पितरं सुताः
    मरीचि मुख्या ऋषयो विश्रंभात्प्रत्यबोधयन् नैतत्पूर्वेः
    कृतं त्पद्ये न करिष्‍यंति चापरे !
    – 3,12,28,30
    अर्थात काम से वशीभूत हो कर स्वंयभू ने वाक नाम पुत्री को चाहा, पिता की यह बुद्वि देख कर मरीचि आदि पुत्रों नें समझाया कि ऐसा कर्म न किसी ने किया है, न अब होगा न ही आगे करेंगे।
    अथर्ववेद में तो पिता द्वारा पुत्री में गर्भस्थापित करने का उल्लेख है।
    ‘पिता दुहितुर्गर्भसमाधात्’
    – 9,10,12,
    अर्थात पिता ने पुत्री में गर्भ स्थापित किया.
    धर्मग्रंथों में जिन पात्रों को आदर्श बताया गया है उन में कामुकता की पराकाष्‍ठा देखी जा सकती है। जहां भी सुंदर स्त्री दिखाई दी, उसे प्राप्त करने और भोगने के तानेबाने बुने जाने लगे. ब्रहा्रा के संबंध मे शिवपुराण में उल्लेख आता है कि पार्वती के विवाह में ब्रह्मा पुरोहित बने थे। उन्होंने पार्वती का पांव देखा और इस कदर कामातुर हो उठे कि कर्मकांड करातेकराते ही स्खलित हो गए।

    भागवत में उल्लेख आता है कि शिव की रक्षा के लिए विष्‍णु ने मोहिनी रूप धारण किया तो शिव उसी रूप पर मुग्ध हो गए और उस के पीछे दीवाने होकर भागे।
    भविष्‍यपुराण में आई एक कथा के अनुसार अत्रि ऋशि की पत्नी अनुपम सुंदरी थी। ब्रह्मा , विष्‍णु, महेश तीनों उस के पास गए। ब्रह्मा ने निर्लज्ज हो कर अनुसूया से रतिसुख मांगा और तीनों देवता अश्‍लील हरकतें करने लगे।
    गौतम के वेश में इंद्र द्वारा अहल्या से व्यभिचार की कथा रामायण और ब्रहा वैवर्त पुराण में आती है। अनैतिकता की पराकाष्‍ठा देखिए कि इस का दंड बेचारी निर्दोष अहल्या को भोगना पड़ा था।
    भागवत (9.14) और देवी भागवत में चंद्रमा द्वारा गुरू की पत्नी को अपने पास रखने की कथा आती है गुरू ने अपनी पत्नी बार-बार वापस मांगी तो भी चन्द्रमा ने उसे वापस नहीं लैटाया। लंबे अरसे तक साथ रहने के कारण चंद्रमा से तारा को एक पुत्र भी हुआ जो चन्द्रमा को ही दे दिया गया ।
    देवताओं के गुरू बृहस्पति ने स्वयं अपने भाई की गर्भवती पत्नी से बलात्कार किया देवताओं ने ममता ( बृहस्पति की भावज ) को उस समय काफी बुराभला कहा जब उसने बृहस्पति की मनमानी का प्रतिरोध करना चाहा।
    इन प्रसंगों के सही गलत होने का विवेचन करने की आवशयकता नहीं है। इन का उल्लेख इसी दृष्टि से किया जा रहा है धर्म ग्रन्थों में उल्लेखित पात्रों को किनं मानदडों पर आदर्श सिद्ध किया गया है । उन का समय दूसरों की पत्नी छीनने व व्यभिचार करने में बीतता था तो वे लोगों को नैतिकता का पाठ कब सिखाते थे और कैसे सिखाते थे ।
    इंद्र का तो सारा समय ही स्त्रियों के साथ राग रंग में बीतता था वह जब असुरों से हार जाते तो ब्रह्मा, विष्‍णु, महेश की सहायता से षड्यंत्र रच कर अपना राज्य वापस प्राप्त करते और फिर उन्ही रागरंगों में रम जाते। अप्सराओं के नाच देखना, शराब पीना, और दूसरा कोई व्यक्ति अच्छे काम करता तो उस में विध्न पैदा करना यही इंद्र की जीवनचर्या थी । इस की पुष्ठि करने वाले ढेरों प्रसंग धर्मषास्त्रों में भरे पडे़ हैं।
    महाभारत के तो हर अघ्याय में झूठ, बेईमानी और धूर्तता की ढेरों कहानियां हैं। धर्मराज युधिष्ठिर, जिन के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने जीवन में कभी पाप नही किया, जुआ खेल कर राजपाट हार गए और पत्नी को भी दाव पर लगा बैठे, युधिष्ठिर के इस कृत्य की द्रौपदी और धृतराष्‍ट के ही एक पुत्र विकर्ण ने भर्त्‍सना की थी। ‘‘महाभारत’’ की लड़ाई के लिए कोई एक घटना मूल कारण है तो वह युधिष्ठिर का जुआ खेलना और द्रौपदी को दांव पर लगाना है। इतने बड़े युद्व का कारण धार्मिक भले ही हो, पर नैतिक कहां रह जाता है ?
    दूसरे धर्मावतार भीष्‍म ने एक राजकुमारी अंबा का अपहरण किया तथा न खुद उससे विवाह किया और न ही दूसरी जगह होने दिया । अंबा को इस संताप के कारण आत्महत्या करनी पड़ी ।
    कुंती के चारों पुत्र कर्ण, युघिष्ठिर , भीम और अर्जुन परपुरूषों से उत्पन्न हुए थे । कर्ण तो विवाह से पहले ही जन्म ले चुका था.
    स्वयंवर में द्रौपदी ने अर्जुन के गले में वरमाला डाली थी। किन्तु पांचों भाइयों ने उसके साथ संयुक्त विवाह का निश्‍चय किया। पांचाल नरेश ने इसका विरोध किया तो युधिष्ठिर ने ही जिद की और अपनी बात मनवाई ।
    संपूर्ण धर्म वाड्.मय इस तरह की विसंगतियों से भरा हुआ है इसे कथित धार्मिक युग का प्रतिबिंब भी कह सकते हैं और धर्म का आदर्श भी कह सकते हैं । जिनमें नैतिक गुणों का कोई महत्व नहीं है ।
    इन प्रसंगों से यही सिद्व होता है कि अनैतिकता को तब धर्मगुरूओं की स्वीकृति मिली हुई थी। दानदक्षिणा, पूजापाठ, कर्मकांड, यज्ञ, हवन आदि धार्मिक क्रियाकृत्य करते हुए कैसा भी आचरण किया जाता तो वह सभ्य था । जरूरी इतना भर था कि ब्राह्मणों के स्वार्थ पुरे किये जाते रहें।

  9. अल्तमश जी
    एक चोर को सब चोर ही नजर आते हैं।
    मेरे विचार से इंसान को पहले अपने अंदर झांक लेना चाहिए और उन दोषों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।
    क्योंकि जिनके अपने घर शीशे के होते हैंं वे दूसरों के घरों में पत्थर नही मारा करते—

    जी बिलकुल आपने सही कहा तभी तो आपने दुसरे को चोर समझ रहे हो क्यूंकि आप खुद चोर हो | भाई जान हमने जो अर्टिकल डाले हैं वह आपके हदस कुरआन सबसे प्रमाण के आधार पर दिए जबकि आपने उपर जो रखा है सब गलत जानकारी दी है जी | चलो आप कितने झूठ बोल रहे हो और दुसरे के मत मजहब को गलत बोल रहे हो उसका प्रमाण मैं आपको दे रहा हु | भाई जान हदीस में ही सिखाया गया है अल तकईया | सो आप वही अल तकईया क्र रहे हो | आपने जितने प्रमाण दिए उपर सब गलत है जिसका मैं कुछ सवाल का जवाब दे रहा हु | जवाब देने से पहले मैं यह जानना चाहता हु क्या आप कभी सत्य को स्वीकार नहीं कर सकते ? अरे कितना झूठ बोलोगे जी ? कुरआन हदीस में यही लिखा है झूठ बोलो तभी तो झूठ ऊपर आपने बोला है | चलो आपके कुछ झूठ का पोल खोल करता हु जो आगे के कमेंट में आपको करके दिखाता हु जिससे आपको यह प्रमाणित कर दूंगा की आप कितने झूठे हो और इसकी शिक्षा कुरआन हदीस ही दे सकती है

    1. और आपने कितना बडा झूठ बोला कि कुरान हदीस मे लिखा है झूठ बोलो। कहा लिखा है मुझे बतलाना मगर अपनी तरफ से हदीसे आयत नम्बर मत डालना। हदीस तो ये कहते है वो इंसान काफिर से भी बडा काफिर हो जो झूठ बोलता है। मैने तो आपको झूठा साबित कर दिया।

      1. al takaiya क्या होता है हदीस में देखो भाई जान फिर बात करना | शायद यह बुखारी हदीस या मुस्लिम हदीस में है | यदि मजबूर करोगे तो लिंक शेयर कर दूंगा | फिलहाल मैं नहीं चाहता की लिंक शेयर करू और इस्लाम का हदीस का पोल खोल करू | एक काम करो जिससे आप इस्लाम सिख रहे हो उससे आप यहाँ चर्चा करवाओ | आप खुद चर्चा ना करे | यही अच्छा होगा आपके लिए

        1. लिंक भेजने की कोई जरूरत नही है मैने आपका अल तकिया बलोक पढा हुआ है । झूठ के अलावा एक भी सच्चाई नही है

  10. अल्तमश जी
    आप कितने झूठे हो और यह इस्लाम ही ऐसा सिखाता है जिसका खंडन आपको कर रहा हु | आपने यह लिखा है
    वेद में भी इस का उल्लेख हैः
    पिता दुहितुर्गर्भंमाधात्
    – अथर्व 9,10,12
    अर्थात पिता ने बेटी में गर्भ धारण किया?
    भाई जान अब इसका मैं वेद से अथर्ववेद से जिसका रिफरेन्स दिया उससे आपको कर रहा हु | मैं अथर्ववेद 9.10.12 का लिंक दे रहा हु जिससे यह प्रमाणित हो जाएगा की आप कितने झूठे हो और इसकी सिक्षा कुरआन हदीस ही दे सकती है | चलो जी अथर्ववेद से लिंक दे रहा हु और देखो कितने झूठ बोल रहे हो |
    http://www.onlineved.com/atharva-ved/?language=2&commentrator=5&kand=9&sukt=10&mantra=12

    कृपया लिंक पर जाए और इसका अर्थ को ठीक से पढ़े |
    चलिए दुसरे कमेंट में वेद से जो गलत अर्थ कर डाला है उसका प्रमाण देता हु |

    1. Bhai kya ye bhi galat h jo vedo me diya h

      हिन्दू धर्म नियोग और हिन्दू स्त्री
      नियोग :-
      वेद में नियोग के आधार पर एक स्त्री को ग्यारह तक पति रखने और उन से दस संतान पैदा करने की छूट दी गई है. नियोग किन-किन हालतों में किया जाना चाहिए, इसके बारे में मनु ने इस प्रकार कहा है :
      विवाहिता स्त्री का विवाहित पति यदि धर्म के अर्थ परदेश गया हो तो आठ वर्ष, विद्या और कीर्ति के लिए गया हो तो छ: और धनादि कामना के लिए गया हो तो तीन वर्ष तक बाट देखने के पश्चात् नियोग करके संत्तान उत्पत्ति कर ले. जब विवाहित पति आवे तब नियुक्त छूट जावे.(१) वैसे ही पुरुष के लिए भी नियम है कि पत्नी बंध्या हो तो आठवें (विवाह से आठ वर्ष तक स्त्री को गर्भ न रहे), संतान हो कर मर जावे तो दसवें, कन्याएं ही पैदा करने वाली को ग्यारहवें वर्ष और अप्रिय बोलने वाली को तत्काल छोड़ कर दूसरी स्त्री से नियोग करके संतान पैदा करे. (मनु ९-७-८१)
      अब नियोग के बारे में आदेश देखिये :
      हे पति और देवर को दुःख न देने वाली स्त्री, तू इस गृह आश्रम में पशुओं के लिए शिव कल्याण करने हारी, अच्छे प्रकार धर्म नियम में चलने वाले रूप और सर्व शास्त्र विध्या युक्त उत्तम पुत्र-पौत्रादि से सहित शूरवीर पुत्रों को जनने देवर की कामना करने वाली और सुख देनेहारी पति व देवर को होके इस गृहस्थ-सम्बन्धी अग्निहोत्री को सेवन किया कर. (अथर्व वेद १४-२-१८)
      कुह…………सधसथ आ.(ऋग्वेद १०.१.४०). उदिश्वर…………बभूथ (ऋग्वेद १०.१८.८)हे स्त्री पुरुषो ! जैसे देवर को विधवा और विवाहित स्त्री अपने पति को समान स्थान शय्या में एकत्र हो कर संतान को सब प्रकार से उत्पन्न करती है वैसे तुम दोनों स्त्री पुरुष कहाँ रात्रि और कहाँ दिन में बसे थे कहाँ पदार्थों की प्राप्ति की ? और किस समय कहाँ वास करते थे ? तुम्हारा शयनस्थान कहाँ है ? तथा कौन व किस देश के रहने वाले हो ?इससे यह सिद्ध होता है देश-विदेश में स्त्री पुरुष संग ही में रहे और विवाहित पति के समान नियुक्त पति को ग्रहण करके विधवा स्त्री भी संतान उत्पत्ति कर ले. सोम:……………..मनुष्यज: (ऋग्वेद मं १०,सू.८५, मं ४०)अर्थात : हे स्त्री ! जो पहला विवाहित पति तुझको प्राप्त होता, उसका नाम सुकुमारादी गनयुक्त होने से सोम, जो दूसरा नियोग से प्राप्त होता वह एक स्त्री से सम्भोग करे से गन्धर्व, जो दो के पश्चात तीसरा पति होता है वह अत्युष्ण तायुक्त होने से अग्निसग्यक और जो तेरे चोथे से ले के ग्यारहवें तक नियोग से पति होते वे मनुष्य नाम से कहाते है. इमां……………………………. कृधि ( ऋग्वेद मं.१०,सू.८५ मं.४५) अर्थात : हे वीर्य सिंचन में समर्थ ऐश्वर्य युक्त पुरुष. तू इस विवाहित स्त्री व विधवा स्त्रियों को श्रेष्ठ पुत्र और सौभाग्युक्त कर. इस विवाहित स्त्री में दश पुत्र उतन्न कर और ग्यारहवीं स्त्री को मान. हे स्त्री ! तू भी विवाहित पुरुष से दस संतान उत्पन्न कर और ग्यारहवें पति को समझ.घी लेप कर नियोग करो :- मनु ने नियोग करने वाले के लिए यह नियम भी बनाया : विधवायां……….कथ्चन. (९-६०) अर्थात :- नियोग करने वाले पुरुष को चाहिए की सारे शरीर में घी लेपकर, रात में मौन धारण कर विधवा में एक ही पुत्र करे, दूसरा कभी न करें.
      नियोग में भी जाति-भेद : मनु ने इस सम्बन्ध में कहा है : द्विजों को चाहिए कि विधवा स्त्री का नियोग किसी अन्य जाति के पुरुष से न कराये. दूसरी जाति के पुरुष से नियोग कराने वाले उसके पतिव्रता स्वरूप को सनातन धर्म को नष्ट कर डालते है…!!!

      1. नियोग एक शाश्त्रीय विधि है
        ये किसी पैगम्बर कि पैदाइश जैसी नहीं जो फूंक मारने से अपनी माँ के गर्भ से पैदा हो गया हो

  11. अल्तमश जी
    आपकी शंका इस वेद मंत्र पर थी जिसका भाष्य को लिंक सहित दे रहा हु जिससे आप सत्य को जान सको | आपने यह बोला था जी

    मातुर्दिधिषुमब्रवं स्वसुर्जारः
    श्रृणोतु नः भातेंद्रस्य सखा मम.
    – ऋग्वेद 6,55,5
    अर्थात मैं मां के उपपति को कहता हूं. वह बहन का जार हमारी प्रार्थना को सुने, जो इंद्र का भ्राता है और मेरे मित्र है ।

    चलिए आपने जो गलत बोला है उसका प्रमाण ऋग्वेद से देता हु और देखो जी आपको कैसे इस्लाम झूठ बोलना सिखाता है इससे मैं आपको सिद्ध कर दे रहा हु जी | चलो लिंक पढ़ो जी और देखो ऋग्वेद का गलत भाष्य कैसे कर दिया ऐसा सिख इस्लाम ही दे सकता है ना की सनातन वैदिक धर्म झूठ बोलने को सिखाता है जी | देखो लिंक और सोचो कितना झूठ बोला है आपने |
    http://www.onlineved.com/rig-ved/?language=2&commentrator=5&mandal=6&sukt=55&mantra=5

    लिंक देखो जी और बोलो कितना झूठ बोलना हदीस और कुरआन सिखाता है जिसे आपने सही कर दिया जी |

    इसी तरह आपने उपर जो प्रमाण दिए है सभी गलत दिए हैं और गलत जानकारी दी है आपने | यदि थोडा सा भी शर्म हो तो उपर लिखे हुए बात के लिए माफ़ी मांग लेना जी मगर आप माफ़ी नहीं मांगोगे क्यूंकि आप सत्य स्वीकार नहीं कर सकते और ना इस्लाम अक्ल में दखल लगाने का आदेश देता है | इसका उदाहरन निचे देता हु अगले कमेंट में |

    1. Lekin Nirukta 3.16 ke anusar toh yeh bhai bahen ke sambhog ki baat hai, toh iska matlab tumlogo ka anuvaad ghalat hua. Kya Ved itni ashleel hai ki khud ke Ved ko hi itna badalna padh raha hai sirf uski ashleelta ko chupane ke liye?

      1. वेद में कोई अश्लीलता नहीं है
        वेद ज्ञान है जो मानवमात्र के लिए है
        इश्वर कि व्यवस्था है जो श्रृष्टि के आदि से चला आ रहा है उसमें कोई परिवर्तन नहीं है
        इश्वर बाकी आसमानी कही जाने वाली किताबों कि तरह नहीं है जिसके नियम मानव मात्र के लिए न होकर व्यक्ति विशेष या समुदाय विशेष के लिए हैं और जिनमें परिवर्तन होता रहता है
        वेद मानवता है

        1. क्या सही कहा ??? गलत को सही बोलना आप लोगो से ही कोई सिख सकता है | वेद में कोई भी मिलावट नहीं की जा सकती

  12. अल्तमश जी
    जैसे मैंने आपको बताया ऊपर में की कुरआन हदीस अक्ल में दखल देना नहीं सिखाता उसका प्रमाण आपको देता हु की कैसे कुरआन हदीस यह सिखाता है की अक्ल में दखल मत दो | चलो देखो जी

    कुरआन में ही लिखा है की एक अंगुली चाँद की ओर की तो चाँद के दो टुकडे हो गए | यदि दो चाँद हो गए तो हमें दिखाई क्यों नहीं देता जी ? क्या यह केवल इस्लाम वालो के लिए 2 चाँद दिखाई देता है ? या सिर्फ अरब वालो के लिए ऐसा चमत्कार है थोडा सोचना जी | अब दूसरा उदाहरन देता हु आपको चलो यह बतलाना जी की बिना स्पर्म और ओवुम मिले कोई औरत माँ बन सकती है ? बिना सेक्स किये बिना ओवुम स्पर्म मिले ? फिर मरयम कैसे माँ बन गयी जी ? चलो एक और उदाहरन देता हु कुरआन से आसमान को छत और जमीं को फर्श बनाया ? यदि छत और फर्श बनाया तो फिर घर बनाने और आदमी को छत को क्यों जरूरत पड़ती है ? चलो एक और उदाहरन देता हु कुरआन से एक डंडा पत्थर पर मारा और झरने निकल पड़े ? ये तो बस कुरआन की झलकी दिखाई जी हमने ? इसी तरह औरत को खेत बोला गया है कुरआन में ? भाई कुरआन और हदीस की पोल खोल करना शुरू कर दू वो भी सही प्रमाण देकर तो मालुम नहीं आप नज़र भी नहीं आओगे जी |

    इन सब को आँखे बंदकर मानते हो जिससे यह सिद्द होता है की इस्लाम में अक्ल में दखल देना मना है यह बतलाना की जो प्रमाण या बाते जानकारी दी वह सही है या नहीं ? फिर आगे उसपर चर्चा करेंगे

    आपके जवाब की प्रतीक्षा में |
    धन्यवाद जी

    1. कुरआन में ही लिखा है की एक अंगुली चाँद की ओर की तो चाँद के दो टुकडे हो गए | यदि दो चाँद हो गए तो हमें दिखाई क्यों नहीं देता जी

      Ved mein yeh likha hai ki Surya 7 ghode se prithvi ke chakkar lagata hai, ab yeh ghode kya sirf Aryo ko hi dikhai dete hai kya? kisi aur ko kyun nai dikhai dete?

      अब दूसरा उदाहरन देता हु आपको चलो यह बतलाना जी की बिना स्पर्म और ओवुम मिले कोई औरत माँ बन सकती है ? बिना सेक्स किये बिना ओवुम स्पर्म मिले ? फिर मरयम कैसे माँ बन गयी जी ?

      Theek waisi hi ji jaise Mitra Varuna se Agastya paida hua bina Maa 😀

      चलो एक और उदाहरन देता हु कुरआन से आसमान को छत और जमीं को फर्श बनाया ? यदि छत और फर्श बनाया तो फिर घर बनाने और आदमी को छत को क्यों जरूरत पड़ती है

      Ved mein yeh likha hai ki Prithvi ek khana pakane ki bartan ki tarah hai aur aasman ek dhakkan ki tarah. Agar aisa hai toh chhat ki zarurat kyun padthi hai ji 😀 Ved mein toh yeh bhi likha hai ki Skambh dvara aasman tika hua hai, agar aisa hai toh wo pillar kaha hai aur hume ghar ki chhat ki zarurat kyun padhti hai ji

      चलो एक और उदाहरन देता हु कुरआन से एक डंडा पत्थर पर मारा और झरने निकल पड़े ?

      Theek waise hi na jaise Ved mein Vishwamitra ke kehne par nadiya tham jati hai.

      इसी तरह औरत को खेत बोला गया है कुरआन में ?

      Lagta hai Satyarth Prakash nahi pada, jisme Dayanand ne aurat ko khet kaha hai aur Manu ne bhi.

      Pehle toh apne Ved, Satyarth Prakash vaghera theek se padh uske baad mein dusro ke granth sikhana.

      1. “Ved mein yeh likha hai ki Surya 7 ghode se prithvi ke chakkar lagata ha” – ये आपका निरर्थक अलाप है यदि वेद में ऐसा कुछ नहीं लिखा है . चाँद के टुकड़े आपके रसूल ने किये उसका जवाब न देकर ये झूठा प्रचार करना आपके हताशा को ही प्रदर्शित करता अहि

        “Mitra Varuna se Agastya paida hua bina Maa 😀” फिर झूठ ऐसा कहीं नहीं है . सृस्थी के नियमों के विरुद्ध कुछ नहीं हो सकता . आपका पुनः एक झूठ . मरियम के बिना बाप के माँ बनने के कुरान के दावे का झूठ आपके सामने है जवाब न दे पाने कि मज़बूरी में आप फिर अनर्गल आरोप लगा रहेइएन

        Ved mein yeh likha hai ki Prithvi ek khana pakane k– फिर झूठ वेद में ऐसा कहीं नहीं है आपकी मन घडन्त बाते हैं
        ed mein Vishwamitra ke kehne par nadiya tham jati hai: फिर झूठ वेद में ऐसा कहीं नहीं है आपकी मन घडन्त बाते हैं झरने फूटने कि बात का जवाब न बना तो फिर झूठ बोलना शुरू किया

        सत्य को अपनाओं

          1. प्रमोद जी
            लाहौल विलाकुवता भाई जान | आपने शायद लेख सही से नहीं पढ़ा | यदि यह लेख पढ़ा होता सही से तो इस तरह की बात ना करते |इस तरह की बातें इस्लाम में बताई गयी है जिसे जानकारी दी गयी है |

        1. बस तू ही सच बोलता है बाकी सब तू झूठ। वा रे वा रिशवा आर्य।

    2. हनुमान ने सूरज निगला उसके बारे मे क्या कहोगे।और रही बात गर्भवती बनने की तो उस अल्लाह मे इतनी शक्ति है वो कुछ भी कर सकता है मगर तुम्हारे और महेन्दर पाल जैसे बेवकूफ इस बात को नही मानते । आप के जैसे लोग तो भगवान की तुलना भी इंसान से करते हो। अरे भाई वो पूरी कायनात को बनाने वाला है। तो बिना बिना सेक्स के किसी औरत के पेट मे बच्चा पैदा करना उसके लिए छोटा सा काम । अब महेन्दर की तरह ये मत कहना कि अल्लाह तो दोषी हुआ। अक्ल मे दख्ल तो हिन्दु नही देते।

      1. नफीस भाई जान
        हम आपके इस कथन का भी खंडन करते हैं क्यूंकि हम खुद इस बात को अस्वीकार करते हैं की हनुमान ने सूरज निगला | हम पुराण सब का खुद खंडन करते हैं | और पौराणिक यह मानते हैं की हनुमान ने सूरज निगला क्यूंकि जब एक अंगुली करने से चाँद के दो तुकडे हो सकते हैं तो फिर हनुमान सूरज को क्यों नहीं निगल सकता है | जब बिना सेक्स किये कोई माँ बन सकती है तो पौराणिक हिसाब से हनुमान सूरज क्यों नहीं निगल सकता है | इसी कारण बोलता हु पुराण कुरआन छोडो और वेद की ओर लौट चलो |

  13. अल्तमश जी
    एक बात और बतला दू पुराण सब का हम खुद खंडन करते हैं क्यूंकि पुराण रामायण महाभारत सब में बहुत सी बात मिलावट कर दी गयी है | और जो मिलावट कर दी गयी है उसे हम खुद खंडन करते हैं | वैसे आपने जो पुराण सब का उदाहरन दिया वह भी गलत उदाहरन दिया जी | वैसा कुछ पुराण में भी नहीं लिखा जी जैसा आपने बताया है | वैसे पुराण की बातो का हम खुद खंडन करते हैं | एक बात और यह धयान देना जी आगे से कभी वेद पर गलत प्रमाण मत देना जी | और ना दुसरे मजहब का अपमान करना | यदि ईमान लाने वाले होगे जैसा बोला जाता है की कुरआन में की ईमान लाओ तो आगे से ईमान लाने पर आप इस तरह की गलत बात किसी को नहीं बतलाओगे |
    आ जाओ सत्य सनातन वैदिक धर्म की ओर | इस्लाम की तरह नहीं जिसमे अल तकैया की जाती हो | आओ लौट चलो वेद की ओर | और सत्य को स्वीकार कर लो |
    धन्यवाद जी

    1. अब गलती निकाल दी तो मिलावट हो गयी । होशियारी तो आपसे सीखी आर्य जी

      1. भाई जान क्या गलती निकाल दी | अरे वेद में कभी मिलावट नहीं हो सकता | पुराण कुरआन इत्यादि सब को हम नहीं मानते |

  14. DEAR ALL,

    hamne kahi jagah pada hai ki , bhagwan / allah kaha hai aaj ke din ke hisab se sirf ramayan & quran mein hi uske nishan milate hai,
    magar mein apko ek local area ka sach batata ho aur janana chahta ho ki meri is baat se kya app sehmat hai ,

    1.doctor agar hindu hai , uske pass muslim admi dawa ke liye jhatha hai , (kiya uska use dawa ne dene thik hai).
    2. muslim nai ( hair cutting ) ke pass ek hindu hair catbane jatha hai, (to kiya uske hair na kathna thik hai)
    3. school me hindu & muslim masoom bachon ko padhane ke liye hindu master class me aata hai aur muslim bachon ko bahar khada kar de ye na padhe to kya he thik hai,

    Bhagwan & Allah ko mandir yah masjid mein na dhoondo wo waha nahi milega inshan me dhoondo wahi milagha ,

    thanks & regards
    Kishan Rajput
    sorry for any default

    1. Ishwar ke liye sabhee saman hein

      ishwar ke nam par jo aapne mat ko dusare par thopane ka karya karte hein ya maryda manavata ke vipreet karya karte hein wo apradhee hein

  15. You proved that you are a true follower of Swami Dayanand who taught you to lie to propagate Vedic Dharma.

    तलाक देकर या बिना तलाक दिए मर्दों को इच्छानुसार आपस में अपनी बीबियाँ बदल लेने का अधिकार कुरान ने इस शर्त पर दिया है की इसे दिया हुआ माल वापिस न लिया जावे |

    Where does the verse says that men can exchange wives among themselves as you have stated? It says about changing wives which means divorcing wife and marrying another woman. Arya Samajis adds their own words in Vedas but since when did you guys star putting your own words in other scriptures also?

    (And if ye wish to exchange one wife for another) He says: If you wish to marry a woman and divorce one you are already married to, or marry a woman in addition to the one you are already married to (and ye have given unto one of them a sum of money (however great)) a dowry, (take nothing from it) from the dowry. (Would ye take it) the dowry (by the way of calumny) as an unlawful possession (and open wrong?) a clear transgression.

    So better luck next time

    1. Whether a believing women can marry a non believing man ?
      no she cannt untell she is in system of Islam.
      so where they will get marry? – simple within islam
      so whats wrong in the interpretation .
      Allah in his book has made women a trading commodity.
      which u can sale can transfer .
      pls go back and check ..

  16. काफीर का गंदा दिमाग होता है.और गंदे दिमाग से गंदी बाते निकलती है.

    1. ये तो पुस्तक को पढने से और आचरण से ही पता चलता है कि किसके दिमाग में गंदी बातें भरी हैं

    1. विजय जी

      सूर्य देव जी के ७ घोड़े हैं ऐसा पौराणिक ग्रंथो में लिखा है और उनके आधार पर उनका शरीर भी होता है मगर वेद के आधार पर ऐसी बात नहीं सूर्य देव का कोई शरीर नहीं होता |

    1. आप जो बोल रहे हो सूर्य देव के ७ घोड़े इन्द्रधनुष बन जाते हैं इसे आप ठीक से समझे | सात किरण को ७ घोड़े से तुलना की गयी इंग्लिश में |

  17. First off I would like to say terrific blog! I had a quick question in which I’d like to
    ask if you do not mind. I was curious to find out how you
    center yourself and clear your mind prior to writing.
    I have had a difficult time clearing my thoughts
    in getting my ideas out. I do take pleasure in writing however it just seems like the first 10 to 15 minutes are usually lost simply
    just trying to figure out how to begin. Any ideas or hints?
    Kudos!

    1. लेखक कई प्रकार के होते हैं और उनकी लिखने की शैली अलग अलग होती है फिर आप जिस शैली में लिखना चाहे उसमे लिखे शुरू में कुछ परेशानी आ सकती है आपको | कुछ लेख के बाद आप आप अपने लेख को आसानी से लिख सकेंगे और आपको उतना ज्यादा लेख लिखने में अनुभव होते जाएगा |

    1. प्रमोद जी
      लाहौल विलाकुवता भाई जान | आपने शायद लेख सही से नहीं पढ़ा | यदि यह लेख पढ़ा होता सही से तो इस तरह की बात ना करते |इस तरह की बातें इस्लाम में बताई गयी है जिसे जानकारी दी गयी है |

  18. इस्लाम को आंतकवादी बोलते हो। जापान मे तो अमेरिका ने परमाणु बम गिराया लाखो बेगुनाह मारे गये तो क्या अमेरिका आंतकवादी नही है। प्रथम विश्व युध्द मे करोडो लोग मारे गये इनको मारने मे भी कोई मुस्लिम नही था। तो क्या अब भी मुस्लिम आंतकवादी है। दूसरे विश्व युध्द मे भी लाखो करोडो निर्दोषो की जान गयी इनको मारने मे भी कोई मुस्लिम नही था। तो क्या मुस्लिम अब भी आंतकवादी हुए अगर नही तो फिर तुम इस्लाम को आंतकवादी बोलते कैसे हो। बेशक इस्लाम शान्ति का मज़हब है।और हाॅ कुछ हदीस ज़ईफ होती है।ज़ईफ हदीस उनको कहते है जो ईसाइ और यहूदियो ने गढी है। जैसे मुहम्मद साहब ने 9 साल की लडकी से निकाह किया ये ज़ईफ हदीस है। आयशा की उम्र 19 साल थी। ये उलमाओ ने साबित कर दिया है। क्योकि आयशा की बडी बहन आसमा आयशा से 10 साल बडी थी और आसमा का इंतकाल 100 वर्ष की आयु मे 73 हिज़री को हुआ। 100 मे से 73 घटाओ तो 27 साल हुए।आसमा से आयशा 10 साल छोटी थी तो 27-10=17 साल की हुई आयशा और आप सल्ललाहु अलैही वसल्लम ने आयशा से 2 हिज़री को निकाह किया।अब 17+2=19 साल हुए। इस तरह शादी के वक्त आयशा की उम्र 19 आप सल्ललाहु अलैही वसल्लम की 40 साल थी इन हिन्दुओ का इतिहास द्रोपती ने 5 पांडवो से शादी की क्या ये गलत नही है हम मुसलमान तो 11 औरते से शादी कर सकते है ऐसी औरते जो विधवा हो बेसहारा हो। लेकिन क्या द्रोपती सेक्स की भूखी थी। और शिव की पत्नी पार्वती ने एक लडके को जन्म दिया शिव की गैरमूजदगी मे। पार्वती ने फिर किसकी साथ सेक्स किया ।इसलिए शिव ने उस लडके की गर्दन काट दी क्या भगवान हत्या करता है ।श्री कृष्ण गोपियो नहाते हुए क्यो देखता था और उनके कपडे चुराता था जबकि कृष्ण तो भगवान था क्या भगवान ऐसा गंदा काम कर सकता है । महाभारत मे लिखा है कृष्ण की 16108 बीविया थी तो फिर हम मुस्लिमो एक से अधिक शादी करने पर बुरा कहा जाता । महाभारत युध्द मे जब अर्जुन हथियार डाल देता तो क्यो कृष्ण ये कहते है ऐ अर्जुन क्या तुम नपुंसक हो गये हो लडो अगर तुम लडते लडते मरे तो स्वर्ग को जाओगे और अगर जीत गये तो दुनिया का सुख मिलेगा। तो फिर हम मुस्लिमो को क्यो बुरा कहा जाता है हम जिहाद बुराई के खिलाफ लडते है अत्यचारियो और आक्रमणकारियो के विरूध वो अलग बात है कुछ मुस्लिम जिहाद के नाम पर बेगुनाहो को मारते है और जो ऐसा करते है वे मुस्लिम नही हैक्योकी आल्लाह पाक कुरान मे कहते है एक बेगुनाह का कत्ल सारी इंसानयत का कत्ल है। और सीता की बात करू तो राम तो भगवान थे क्या उनमे इतनी भी शक्ति नही कि वे सीता के अपहरण को रोक सके जब राम भगवान थे तो रावण की नाभि मे अमृत है ये उनको पहले से ही क्यो नही पता था रावण के भाई ने बताया तब पता चला। क्या तुम्हारे भगवान राम को कुछ पता ही नही कैसा भगवान है ये।और सीता को घर से बाहर निकाल दिया गया था तो लव कुश कहा से आये किससे सेक्स किया सीता ने बताओ।और इन्द्र देवता ने साधु का वेश धारण कर अपनी पुत्रवधु का बलात्कार किया फिर भी आप देवता क्यो मानते हो। खुजराहो के मन्दिर मे सेक्सी मानव मूर्तिया है क्या मन्दिर मे सेक्स की शिक्षा दी जाती है मन्दिरो मे नाच गाना डीजे आम है क्या ईश्वर की इबादत की जगह गाने हराम नही है ।राम ने हिरण का शिकार क्यो किया बहुत से हिन्दु कहते है हिरण मे राक्षस था तो क्या आपके राम भगवान मे हिरण और राक्षस को अलग करने की क्षमता नही थी ये कैसा भगवान है।हमे कहते हो जीव हत्या पाप है मै भी मानता हू कुत्ते के बेवजह मारना पाप है ।कीडी मकोडो को मारना पाप है पक्षियो को मारना पाप है। लेकिन ऐसे जानवर जिनका कुरान मे खाना का जिक्र है खा सकते है क्योकि मुर्गे कटडे बकरे नही खाऐगे तो इनकी जनसख्या इतनी हो जायेगी बाढ आ जायेगी इन जानवरो की। सारा जंगल का चारा ये खा जाया करेगे फिर इन्सान के लिए क्या बचेगा। हर घर मे कटडे बकरे होगे। बताओ अगर हर घर मे भैंसे मुर्गे होगे तो दुनिया कैसे चल पाऐगी। आए दिन सिर्फ हिन्दुस्तान मे लाखो मुर्गे और हजारो कटडे काटे जाते है । 70% लोग मांस खाकर पेट भरते है । सब को शाकाहारी भोजन दिया जाये तो महॅगाई कितनी हो जाएगी। समुद्री तट पर 90% लोग मछली खाकर पेट भरते है। समझ मे आया कुछ शाकाहारी भोजन खाने वालो मांस को गलत कहने वाले हिन्दुओ अक्ल का इस्तमाल करो

    1. Hazrat aapki jankari ke liye ” Hazrat aayesah ki Tareekhi Haisiyat”: jo aapke hee ham mazhab Farog kazmi sahab ne likhee hai neeche de raha hun
      shyad aapki Hazrat aayesh ki umra ke prati Ilm ko badhane men sahayat degi

      हज़रत अबू बकर से आप के हुज़्नों मलाल की ये कैफ़ियत देखी न गयी चुनान्चे वो अपनी पांच साला बच्ची आयशा को ले कर एक दिन आं हज़रत (स.अ.व.व) की ख़िदमत में हाज़िर हुए और अर्ज़ किया, या रसूलल्लाह (स.अ.व.व) ये बच्ची हाज़िर है आप इस से दिल बहलायें ताकि आपका ग़म ग़लत हो। इस बच्ची में ख़दीजा की सलाहियत पाई जाती है। (2) अबू बकर की इस हैरत अंगेज़ तजवीज़ पर पैग़म्बर ने सुकूत इख़तियार किया यहां तक कि बच्ची को उन्होंने गोद में उठाया और वापस चले गये। उस के बाद बक़ौले मुअर्रिख़ पैग़म्बर अबू बकर के घर में आने जाने लगे। (3)

      1. हर धर्म की किताब मे लिखा हुआ है झूठ बोलना पाप है फिर भी तुम हिन्दु अपनी तरफ से हदीसे कुरआन की आयते सब झूठ क्यो लिखते है। आयत नम्बर हदीस नम्बर सब अपनी तरफ से झूठ लिख देते हो। शर्म नही आती तुम्हे। कयामत के दिन जब इंसाफ होगा तब तुम्हे झूठा इल्जाम लगाने का पता चल जायेगा । हद होती है हर चीज की। नबी पर झूठा इल्जाम लगाया आपने और आप जैसे लोगो ने काबे पर भी इल्जाम लगा दिया। वो अल्लाह का घर है। वहा पर नमाज पडी जाती है लिंग की पूजा नही होती। और क्या कहते हो तुम हमे काबे की सच्चाई सामने क्यो नही लाते हो। यूटयूब पर हजारो विडियो पडी हुयी है देख लो कोई लिंग विंग नही है वहा। बस जन्नत का एक गोल पत्थर है और हर पत्थर का मतलब लिंग नही होता। बाईचान्स मान लो वहा शिव लिंग है।तो क्या आपके शिव लिंग मे इतनी भी ताकत नही है जो वहा से आजाद हो सके। तुम्हारी गंदी नजरो मे सभी मुस्लिम अच्छे नही है इसलिए सारे मुस्लिमो को शिव मार सके। आप तो कहते हो शिव ने पूरी दुनिया बनाई तो क्या एक छोटा सा काम नही कर सकते।
        इसलिए तो इन लिंग विंग पत्थरो के बूतो मे कोई ताकत नही होती। बकवास है हिन्दु धर्म।

        1. नफीस माली भाई जान
          आप हदीस से हमें बतलाना ये al takaiya क्या होता है |हदीस ही झूठ बोलना सिखाता है भाई जान | कुरआन भी झूठ बोलना सिखाता है नहीं तो यह कैसे संभव है की सूरज दलदल में डूब जाता है | क्या बिना औरत में स्पर्म और ओवुम मिले हुए कोई औरत माँ बन सकती है ? फिर मरयम कैसे माँ बन गयी ? और रही बात आपकी तो यह जानकारी दे दू यहाँ बिना प्रमाण का हदीस कुरआन बाइबिल इत्यादि से नहीं दिया जाता | जब प्रमाण होता है तभी यहाँ लेख डाला जाता है | हमें २ चाँद क्यों नजर नहीं आते भाई जान | झूठ कौन बोल रहा है यह सबको मालुम है | आपको मालुम होना चाहिए हम वेद को मानने वाले हैं और वेद में कहीं मूर्ति पूजा नहीं है फिर शिव लिंग को हम कैसे मानेंगे भाई जान | और हां यह पौराणिक मानते हैं मगर चलो आपको पौराणिक हिसाब से जवाब देने का कोशिश करता हु जवाब देने से पहले आपके कमेंट से ही कुछ सवाल पुछ रहा हु यूटयूब पर हजारो विडियो पडी हुयी है देख लो कोई लिंग विंग नही है वहा। बस जन्नत का एक गोल पत्थर है और हर पत्थर का मतलब लिंग नही होता। जन्नत का पत्थर कैसे आया भाई जान ? जन्नत कहा पर है और अब तक विज्ञान ने या मनुष्य ने क्यों नहीं खोज पाया यह बतलाना मेरे बंधू ? जैसे चाँद मंगल इत्यादि की खोज हो गयी वैसे ही जन्नत की खोज क्यों नहीं हो पायी ? और चलो मान लिया की यह जन्नत का पत्थर है तो कुरआन में कहीं भी बुत पूजा करना नहीं लिखा है फिर आप लोग इस पत्थर को क्यों चुमते हो ? क्या यह एक तरह की बुत पूजा नहीं है जैसे पौराणिक मूर्ति पूजा करते हैं आप उसे चुमते हो वो भी एक तरह की पूजा है | शैतान को भी पत्थर से मारते हो वो भी एक प्रकार की पूजा है जिसे आप स्वीकार नहीं करते हो ? फिलहाल इन सब बात का जवाब देना जी फिर आपको पौराणिक हिसाब से जवाब देने की कोशिश करूँगा वैसे हम खुद पुराण को खंडन करते हैं | अंधविश्वास को छोडो | आपकी जवाब की प्रतीक्षा में | आओ सत्य सनातन वैदिक धर्म की ओर लौटो | वेद की ओर लौटो | धन्यवाद|

          1. हदीस मे लिखा है इन्सान को सिर्फ वहा झूठ बोलना चाहिए जहा अगर दो इन्सानो मे दुश्मनी हो। उनके बीच मे ताकि वे दोस्त बन सके। और अल्लाह पाक कुरान मे कहते है आप सब इन्सान मिलकर भी कुरान के जैसी कोई एक
            आयत नही बना सकते । और सूरज के बारे मे ये नही लिखा कि डूब ही जाता है । दल दल मे डूब जाने का मतलब अंधेरा रात होने से। ये कुरान मे एक किस्सा(वाक्य) है। इसका मतलब ये नही कि ये आप इसे साइंस मे जोड देगे। आपने अधूरी तालीम की है और उसमे से छोटे छोटे शब्द उठा के बदनाम करना चाहते हो जबकि ये बेवकूफी है पूरा पढो समझो और सोचो तब कुछ कहो। मिसाल के तौर पर अगर कुरान या वेद या पुराण मे सेक्स शब्द आता है तो आप लोग क्या करते हो उसी शब्द को उठा लेते हो बदनाम कर देते हो । पूरा श्लोक या आयत नही पडते हो। मतलब ये नही सोचते कि ये कुरान कहना क्या चाह रही है। और रही बात जन्नत खोजनी की तो किसी भी इन्सान इतनी ताकत नही जो जन्नत को खोज निकाल सके।

            1. लगता है बंधू आपको कुरान की भी पूरी समझ नहीं शायद आप भूल गए की रसूल ने पहले कितनी आयतेन लाने को कहा और फिर कैसे बदल दिया

              और क्या कुरान में क्या शैतान का कलाम नहीं है ?
              फरिश्तों के कलाम नहीं हैं
              जब वो हिएँ तो वो भी तो उसके बराबर ही हुए

          1. sana ji

            kya Keep it up nafees each page aaone ??? jise kuch nahi jaankaari use aap bol rahe ho Keep it up nafees each page aaone. dhanya ho ji aap..

  19. हिन्दु धर्म मे शिव भगवान ही नसेडी है तो उसके कावडिया भी नसेडी। जितने त्योहार है हिन्दुओ के सब बकवास।होली को लेलो मानते है भाईचारे का त्योहार होली पर शराब पिलाकर एक दुसरे से दुश्मनी निकाली जाती है।होली से अगले दिन अखबार कम से कम 100 लोगो के मरने की पुष्टि करता है ।अब दीपावली को देखलो कितना प्रदुषण बुड्डे बीमार बुजुर्गो की मोत होती है। पटाखो के प्रदुषण से नयी नयी बीमारिया ऊतपन होती है। गणेशचतुर्थी के दिन पलास्टर ऑफ पेरिस नामक जहरीले मिट्टी से बनी करोडो मूर्तिया गंगा नदियो मे बह दी जाती है। पानी दूषित हो जाता है साथ ही साथ करोडो मछलिया मरती है तब कहा चली जाती है इनकी अक्ल जीव हत्या तो पाप हैहम मुस्लिमो को बोलते है चचेरी मुमेरी फुफेरी मुसेरी बहन से शादी कर लेते हो। इन चूतियाओ से पूछो बहन की परिभाषा क्या होती है मै बताता हू साइंस के अनुसार एक योनि से निकले इन्सान ही भाई बहन हो सकते है और कोई नही। तुम भाई बहन के चक्कर मे रह जाओ इसलिए हिन्दु लडको की शादिया भी नही होती अक्सर । हमारे बनत नाम के गाव मे 300 जाट के लडके रण्डवे है शादी नही होती फिर उनका सेक्स का मन करता है वे फिर लडकियो महिलाओ की साथ बलात्कार करते है ये है हिन्दु धर्म । और सबूत हिन्दुस्तान मे अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा रेप होते है । किसी मुस्लिम मुल्क का नाम दिखा दो या बता दो बता ही नही सकते। तुम्हारे हिन्दुओ लडकियो को कपडे पहनने की तमीज नही फिटिंग के कपडे छोटे कपडे जीन्स टीशर्ट आदि पहननती है ।भाई बाप के सामने भी शर्म नही आती तुमको ऐसे कपडो मे थू ऐसे कपडो मे को देखकर तो सभी इन्सानो की ऑटोमेटिकली नीयत खराब हो जाती है इसलिए हिन्दु और अंग्रेजी लडकियो की साथ बलात्कार होते हे इसके लिए ये लडकिया खुद जिम्मेदार है।।और हिन्दु लडकियो के हाथ मे सरे आम इंटरनेट वाला मोबाइल उसमे इतनी गंदी चीजे थू और लडकियो को पढाते इतने ज्यादा है जो उसकी शादी भी ना हो पढी लिखी को स्वीकार कौन करता है जल्दी से पढने का तो नाम है घरवालो के पैसे बरबाद करती है और लडको की साथ अय्याशी करती है उन बेचारो का टाइम वेस्ट। इन चूतियाओ से पूछो लडकि इतना ज्यादा पढकर क्या करेगी।मर्द उनके जनखे हो जो औरत कमाऐगी मर्द बैठकर खाऐगे।सही कहू तो मर्दो की नौकरिया खराब करती है जहा मर्द 20000 हजार रूपये महीने की माॅग करे वहा लडकिया 2000 मे ही तैय्यार हो जाती हैबहुत हिन्दु गर्व के साथ कहते है कि हमारी गीता मे लिखा है कि ईश्वर कण कण मे विध्मान है ।सब चीजे मे है इसलिए हम पत्थरो को पूजते है और भी बहुत सारी चीजो को पूजते है etc. लेकिन मै कहूगा इनकी ये सोच बिल्कुल गलत है क्योकि अगर कण कण मे भगवान है तो क्या गू गोबर मे भी है आपका भगवान। जबकि भगवान या खुदा तो पाक साफ है तो कण कण मे कहा से विध्मान हुआ भगवान। इसलिए मै आपसे कहना चाहता हू भगवान हर चीज मै नही है बल्कि हर चीज उसकी है और वो एक है इसलिए पूजा पाठ मूर्ति चित्र सब गलत है कुरान अल्लाह की किताब है इसके बताये गये रास्ते पर चलो। सबूत भी है क्योकि कुरान की आयते पढकर हम भूत प्रेत बुरी आत्माओ राक्षसो से छुटकारा पाते है।हमारी मस्जिद मे बहुत हिन्दु आते है ईलाज करवाने के लिए । और मौलवी कुरान की आयते पढकर ही सभी को ठीक करते है । इसलिए कुरान अल्लाह की किताब है । जबकि आप वेदो मंत्रो से दसरो को नुकसान पहुचा सकते है अच्छाई नही कर सकते किसी की और सभी भगत पंडित जादू टोना टोटके के अलावा करते ही क्या है। जबकि कुरान से अच्छाई के अलावा आप किसी के साथ बुरा कर ही नही सकते। इसलिए गैर मुस्लिमो कुरान पर ईमान लाओ।

    1. e sab kalpanik hai

      “सलिए पूजा पाठ मूर्ति चित्र सब गलत है ” ये आपकी बात सत्य है आर्यों का तो धर्म ही तौहीद है आपको भे इसे अपनाना चाहिए और जितनी भी मजारे हैं तोड़ देनी चाहिए .
      साथ ही साथ जो सबसे बड़ी मूर्ति पूजा तो मुहम्मद साहब करते थे ” काबा को चूमना ” वो भी बंद कर देना चाहिए
      और सत्य तौहीद को अपनाना चाहिए
      साथ ही साथ कलमे में से भी मुहम्मद साहब का नाम हटा दें क्योंकि अल्लाह किसी के साथ शरीक नहीं होता

      1. काबे को चूमना का मतलब ये नही कि हमने उसे खुदा समझ के उसी से मांगना शुरू कर दिया। जिस तरह तुम हिन्दु पत्थरो को भगवान समझकर उन्ही से मांगते हो। काबे को चूमना अल्लाह के साथ मुहम्मद साहब का नाम ये तो मोहब्बत का प्रतीक है। और रही बात मजारो की अल्लाह के रसूल ने कहा है कब्रो के पास इसलिए जाया करो ताकि तुम ये सोचो हमे भी एक दिन यहा आना है। इसलिए तुम गुनाह करने बचोगे।और मै मानता हू कुछ मुस्लिम चादर चढाते है। ऐसा करने से मुहम्मद साहब ने खुद मना किया है

        1. नफीस माली भाई जान
          काबे को चूमने का मतलब भी वही होता है भाई जान जो मूर्ति पूजा करने का होता है मगर फर्क इतना है की आप इसे स्वीकार नहीं करते हो की आप बुत पूजा करते हो |जिस तरह से आपको लगता है काबे को चूमना अल्लाह के साथ मुहम्मद साहब का नाम ये तो मोहब्बत का प्रतीक है। उसी प्रकार पौराणिक को भी लगता है की मूर्ति एक प्रतिक है आप जैसे मक्का की ओर नमाज पढ़ते हो उसी तरह वे मूर्ति को प्रतिक समझ कर पूजा करते हैं | फिर आप में और उनमे क्या अंतर है दोनों तो बुत की ही पूजा करते हो मगर आप सत्य को स्वीकार नहीं करोगे क्यूंकि इस्लाम यह नहीं बोलता की अपनी अकल का इस्तेमाल करो यदि अक्ल का इस्तेमाल करते तो कब का आप इस्लाम छोड़कर वैदिक धर्म को अपना लिए होते | आपका अब दूसरा कमेंट का जवाब और रही बात मजारो की अल्लाह के रसूल ने कहा है कब्रो के पास इसलिए जाया करो ताकि तुम ये सोचो हमे भी एक दिन यहा आना है। इसलिए तुम गुनाह करने बचोगे।और मै मानता हू कुछ मुस्लिम चादर चढाते है। ऐसा करने से मुहम्मद साहब ने खुद मना किया है | भाई कहा मुहमद साहब ने मना किया है? इसका प्रमाण देना आप | हां कुरआन में यह मना किया गया है बुत पूजा मत करो फिर भी जैसे मुस्लिम बुत पूजा करते हैं चादर चढ़ाते हैं उसी तरह वेद में मूर्ति पूजा मना है मगर भटके हुए लोग मूर्ति पूजा करते हैं जैसे मुस्लिम लोग चादर चढ़ाते हैं | आओ सत्य की मार्ग पर आओ | वेद की ओर लौटो | सत्य सनातन धर्म को अपनाओ | अंधविश्वास को छोडो | धन्यवाद |

      2. क्या बोलते हो तुम कि ये काल्पनिक है। बेटा ये बाते वर्तमान समय मे वास्तविक है हकीकत है और सच भी है।

        1. नफीस माली भाई जान
          अब आ गए अपनी सही में इस्लाम की रास्ते पर | यही तो इस्लाम सिखाता है | हम प्यार से जवाब देते हैं और आप गाली गलौज करने पर उतर जाते हो ? हमें यह बतलाना की कुरान के किस आयत और सुरा में यह लिखा है की बदतमीजी करो जो आप कर रहे हो ? जब आपको यह नहीं मालुम की आप बड़े हो या मैं फिर आप बेटा कैसे बोल सकते हो ? और यह बेटा दुसरे अर्थ में हैं जी | इस तरह की बदतमीजी करना इस्लाम ही सिखला सकता है | और क्या वर्तमान समय में वास्तविक है हकीकत है और सच है यह भी तो बताओ जिससे की चर्चा की जा सके उस बारे में | सत्य सनातन वैदिक धर्म की ओर लौटो |

        2. कमाल है आप इस्लाम धर्म पर झूठे इल्जाम लगा सकते है । तो क्या मै आपको बेटा भी नही कह सकता। क्योकि हर धर्म की किताब मे लिखा है किसी के धर्म को बुरा ना कहो । मैने तो मजबूर होकर जब हिन्दुओ के गंदे कमेंट पढे तब हिन्दुओ के वर्तमान हालात पर कमेंट किये है। और आप जैसे सभी हिन्दुओ ने तो 1400 साल पहले इस्लाम मे बेबुनियाद कमी निकाली है । इसको बोलते है धर्म के बारे मे कुछ गलत कहना। अगर कुछ लिखने की हिम्मत है तो मुस्लिमो की वर्तमान स्थिति के बारे मे लिखो ताकि हम सुधरो। वैसे मुझे लगता नही इस्लाम मे फिलहाल कुछ भी गलत है। क्योकि इस्लाम तो शुरू से ही शान्ति अमन का सन्देश देता है। क्योकि इस्लाम का दूसरा नाम तो इन्सानियत है

          1. इस्लाम शांति का मज़हब है तो फिर गैर मुस्लिमों को मारने की बात क्यों कही जाती है
            मुहम्मद साहब के ये कार्य किस तरह शांति का सन्देश देते हैं :
            http://aryamantavya.in/islam-shanti-ka-mazhab/

    2. Ohh pls in bato me kuch nahi h ham dharm ke chakkar me ye hi bhul gaye hai ki ham pehle insaan hai jise bhagwan ne khud banaya hai taki ham duniya me pyar se rahe aur apne karmo ko achha rakhe bhagwan god allah kahi nahi hai sirf apne andar hai isliye khud achhe banna sikho aur fir bhagwan krishna ne bhi prem ko hi dharm jaat sab batya hai dwarika dheesh ke jo kapde hai na wo muslman vyakti hi silta hai wo to fark nahi karte fir ham kyu sabse pehle hame khud ki aatma ko saaf aur pavitra rakhna chahiye agar ham khud sahi hai to bhagwan hamare andar hai
      Radhey radhey jii

      1. मोनिका चौहान जी
        यदि आपको यह मालुम होता की धर्म किसे बोलते हैं तो यह आप नहीं बोलती की इंसान बनो | खुद वेद बोलता है मनुर्भव | मनुष्य बनो | और सब जो मत मजहब हैं वे यह बोलते हैं मुस्लिम बनो काफिर को मारो | इसाई बनो | बौध बनो इत्यादि | अरे सनातन धर्म तो यह बोलता है मोनिका जी की पूरा विश्व ही कुटुंब के सामान है फिर जब कुटुंब के समान है तो वे आपस में प्यार करेंगे ही | मगर मत मजहब संप्रदाय ऐसा शिक्षा नहीं देता | आपने बोला की इश्वर अल्लाह और god इत्यादि ये सभी आपको जानकारी दे दू सभी अलग अलग हैं |चलो आप पौराणिक हो तो आपको पौराणिक हिसाब से ही जवाब देने का कोशिश करता हु पुराण में मलेक्ष शब्द क्यों आया है ? मलेक्ष कौन हैं यह आप बतलाना जी | और आपको मालुम होना चाहिए जो पौराणिक हैं वे केवल द्वारकाधीश के कपडे केवल मुसलमानों से नहीं सिलवाते छठ पूजा होता है उसमे भी मुसलमान लोग की सहायता ले लेते हैं | चलो कुछ बात बतलाना जी आप आप पौराणिक हो इस कारण पौराणीक हिसाब से सवाल कर रहा हु आपने कई बार सूना होगा मंदिर में नमाज मुस्लिमो को पढ़ने दिया गया मगर क्या यही मस्जिद में वेद पढ़ने दिया जाता है ? अरे वेद छोड़ दो गीता रामायण इत्यादि पढ़ने दिया जाता है क्या ??? अरे आप पौराणिक हो तो भी सभी से प्रेम करती हो मत मजहब वालो से | मगर दुसरे मत मजहब वाले ऐसे नहीं करते | वेद के आधार पर सभी इश्वर के संतान है चाहे वह मुसलमान हो या इसाई हो या और मत संप्रदाय के हो | सनातन धर्म तो सभी को प्यार से जीना सिखाता है | वे तो सभी को पूरा विश्व को अपना कुटुंब समझते हैं | आपके लिए राधे राधे | धन्यवाद | ॐ |

    3. Inko samjhna ka koi matlb nhi hai .inke dil or dimag siyah kar diye gye hai.quraan ko or muhammed sahab ko kisi k respect ki zarurat nhi . Allah kareem hai quraan ki hifazat Allah khud karte hai .islam padhne or samjhne ki dawat deti hu.

      1. sana ji
        allah ko baar baar khud ki aayat kyu badlana padta hai?? kya allah agyani hai yaa bhulkar hai jo baar baar aayat badal deta hai. aur yah bhi badlana paigambar sahab ki maut kaise huyi ???

  20. अमिति राॅय जी आपने इस्लाम धर्म के नाम पर जो बाते कही है वो असल इस्लाम धर्म की है क्या नही ये देखिये आप जिन बातो को जोर दे कर बोल रहे है औरत के बारेमे इस्लाम क्या कहता है आगर आपको सच मुच समज ना है तो असल किताबोका हावाला दीजिये और एक बात तुम्हे लगता है वौसा मतलब मत निकालीये
    आप जो बात कर रहे है वो सिया लोगे की है सिया लोगो मे मुताबिक कि मुताबिक एक औरत और मर्द जितनी चाहिये लोगोसे हां बिस्तरों कर सकता है लेकिन इस बात को इस्लाम मना करता है
    तकिया कि बात इस्लाम को मजूर नही वो बात भी सिया लोगो की है और किरण कि आयतो को हादिस कि बातो को तोड मरोड कर लिखने कि साजिश आज कल की नही बहोत सालो से इस्लाम को बदनाम करणे के लिये इस्लाम जिहादी है इस्लाम औरतो का हाक नही देता औरतो को बदिस्त बनाकर रखता है चार चार शादियां करता है बच्चे जादा पैदा करता है औरतो को रखेल बनाता है लौडी बनाकर खरीदता है बेचता है यौसी बहुत सारी बाते गलत किताबोका हवाला दे कर बताई जाती है और एक कुराण कि असल रिवायत का हावाला दिया जाता है जो इस वक्त मे इस दौर मे कही गयी बाद के रिवायत का हवाला नही दिया जाता
    लोगो को गुमराह करनेके लिये कभी कभार बुखारी शरीफ सही मुस्लिम शरीफ का हावाला दिया जाता है आपने तरीकेसे तो अगर बहस करनी ही है तो एक एक बात बर बहस हो कभी इधर कभी उधर करने से कुछ समझने नही आता आगर लोगो को गुमराह करना ही मकसद है तो फिर कोइ बात नही लेकिन अगर इस्लाम के अंदर लिखी हुवी बाते यौसा क्यू लिखा है कहा गया है सचमुच समझना है तो एक एक बात पर बहस करे हो सकता है कुछ हमे नही समझा होगा और कुछ तुम्हे नही समझा होगा तो बहस करना है तो एक एक बात पर बहस करेगे फिरसे सुरवात कर सकते है मै आपसे बहस कर सकता हु जीस बात पर आपको येतराज है या शंक है उसे दुर करने की कोशिस करेगे मै कोई सलीम या मौलाना नही एक सोशलवर्कर हु अगर कुछ गलत है तो मै इस बात को मानने वाला हू तो आगर आप चाहते है तो बहस कर सकते है मुझे भी इस्लाम के बारे मे सब कुछ मालूम है या सब कुछ जानता हु यौसा नही पर आपके साथ बात करके मुझे जितनी जानकारी है उसने इजाफा जरूर होगा तो हां दोनो को इस्लाम के बाते मे साही समज मिले और हम इस्लाम को सही तरीकेसे समझे यौसी अल्ला से दीवार मागता हु अल्ला हां दोनो को सही समज सत्ता फरमा आमिन

    1. आसिफ बाबा भाई जान
      सबसे पहले हमें यह बतलाये की धर्म किसे बोलते हैं इस्लाम मजहब क्या है ? थोडा हमें बतलाना | इस्लाम में खुद और के बारे में वैसा बोला गया है जिस कारण हमने प्रमाण दिया है | इस्लाम बोलता है जात पात नहीं फिर ये सिया सुन्नी अहमदिया इत्यादि ये सब क्या है ? क्या सिया खुद को इस्लाम के नहीं मानते ? क्या सुन्नी खुद को इस्लाम के नहीं मानते ? ७२ फिरके क्या है ? फिर इस्लाम क्या है ? सच्चा इस्लाम कौन सा है ? यह हमें बतलाना जी | खुद कुरआन सब में इसकी जानकारी दी गयी है | आप जब चाहे चर्चा करें हम तैयार हैं चर्चा करने को | जब आप चाहे कुरआन हदीस सब से चर्चा करे | और हम तो चाहते हैं कोई ऐसा हो जो हमें इस्लाम के बारे में सही जानकारी दे सके | यहाँ तक आपके इस्लाम के प्रकांड विद्वान् जाकिर तक कुरआन हदीस को मानते हैं और मुस्लिम मौलाना तक कुरआन हदीस को सही मानते हैं | और जो हमने प्रमाण दिया है उन्ही सब से पढ़कर दिया है | आप बोलोगे तो उन साईट से लिंक भी पेश कर दूंगा मगर लिंक पेश करूँगा तो बहुत लोगो को लगेगा की हमने गलत पेश कर दी | अल तकैया कर दोगे आप | चलो आप जिस से चर्चा करना चाहो चर्चा करो हम तैयार है | मुझ जैसे अज्ञानी को इस्लाम के बारे में सही जानकारी देने की कृपा करे | आपके जवाब की प्रतीक्षा मे | धन्यवाद |

    2. आसिफ बाबा भाई जान
      सबसे पहले हमें यह बतलाये की धर्म किसे बोलते हैं इस्लाम मजहब क्या है ? थोडा हमें बतलाना | इस्लाम में खुद और के बारे में वैसा बोला गया है जिस कारण हमने प्रमाण दिया है | इस्लाम बोलता है जात पात नहीं फिर ये सिया सुन्नी अहमदिया इत्यादि ये सब क्या है ? क्या सिया खुद को इस्लाम के नहीं मानते ? क्या सुन्नी खुद को इस्लाम के नहीं मानते ? ७२ फिरके क्या है ? फिर इस्लाम क्या है ? सच्चा इस्लाम कौन सा है ? यह हमें बतलाना जी | खुद कुरआन सब में इसकी जानकारी दी गयी है | आप जब चाहे चर्चा करें हम तैयार हैं चर्चा करने को | जब आप चाहे कुरआन हदीस सब से चर्चा करे | और हम तो चाहते हैं कोई ऐसा हो जो हमें इस्लाम के बारे में सही जानकारी दे सके | यहाँ तक आपके इस्लाम के प्रकांड विद्वान् जाकिर तक कुरआन हदीस को मानते हैं और मुस्लिम मौलाना तक कुरआन हदीस को सही मानते हैं | और जो हमने प्रमाण दिया है उन्ही सब से पढ़कर दिया है | आप बोलोगे तो उन साईट से लिंक भी पेश कर दूंगा मगर लिंक पेश करूँगा तो बहुत लोगो को लगेगा की हमने गलत पेश कर दी | अल तकैया कर दोगे आप | चलो आप जिस से चर्चा करना चाहो चर्चा करो हम तैयार है | मुझ जैसे अज्ञानी को इस्लाम के बारे में सही जानकारी देने की कृपा करे | आपके जवाब की प्रतीक्षा मे |

  21. अमिति राॅय जी आपने इस्लाम धर्म के नाम पर जो बाते कही है वो असल इस्लाम धर्म की है क्या नही ये देखिये आप जिन बातो को जोर दे कर बोल रहे है औरत के बारेमे इस्लाम क्या कहता है आगर आपको सच मुच समज ना है तो असल किताबोका हावाला दीजिये और एक बात तुम्हे लगता है वौसा मतलब मत निकालीये
    आप जो बात कर रहे है वो सिया लोगे की है सिया लोगो मे मुताबिक कि मुताबिक एक औरत और मर्द जितनी चाहिये लोगोसे हां बिस्तरों कर सकता है लेकिन इस बात को इस्लाम मना करता है
    तकिया कि बात इस्लाम को मजूर नही वो बात भी सिया लोगो की है और किरण कि आयतो को हादिस कि बातो को तोड मरोड कर लिखने कि साजिश आज कल की नही बहोत सालो से इस्लाम को बदनाम करणे के लिये इस्लाम जिहादी है इस्लाम औरतो का हाक नही देता औरतो को बदिस्त बनाकर रखता है चार चार शादियां करता है बच्चे जादा पैदा करता है औरतो को रखेल बनाता है लौडी बनाकर खरीदता है बेचता है यौसी बहुत सारी बाते गलत किताबोका हवाला दे कर बताई जाती है और एक कुराण कि असल रिवायत का हावाला दिया जाता है जो इस वक्त मे इस दौर मे कही गयी बाद के रिवायत का हवाला नही दिया जाता
    लोगो को गुमराह करनेके लिये कभी कभार बुखारी शरीफ सही मुस्लिम शरीफ का हावाला दिया जाता है आपने तरीकेसे तो अगर बहस करनी ही है तो एक एक बात बर बहस हो कभी इधर कभी उधर करने से कुछ समझने नही आता आगर लोगो को गुमराह करना ही मकसद है तो फिर कोइ बात नही लेकिन अगर इस्लाम के अंदर लिखी हुवी बाते यौसा क्यू लिखा है कहा गया है सचमुच समझना है तो एक एक बात पर बहस करे हो सकता है कुछ हमे नही समझा होगा और कुछ तुम्हे नही समझा होगा तो बहस करना है तो एक एक बात पर बहस करेगे फिरसे सुरवात कर सकते है मै आपसे बहस कर सकता हु जीस बात पर आपको येतराज है या शंक है उसे दुर करने की कोशिस करेगे मै कोई आलीम या मौलाना नही एक सोशलवर्कर हु अगर कुछ गलत है तो मै इस बात को मानने वाला हू तो आगर आप चाहते है तो बहस कर सकते है मुझे भी इस्लाम के बारे मे सब कुछ मालूम है या सब कुछ जानता हु यौसा नही पर आपके साथ बात करके मुझे जितनी जानकारी है उसने इजाफा जरूर होगा तो हां दोनो को इस्लाम के बाते मे साही समज मिले और हम इस्लाम को सही तरीकेसे समझे यौसी अल्ला से दुवा मागता हु अल्ला हां दोनो को सही समज अत्ता फरमा आमिन

    1. आसिफ बाबा भाई जान
      सबसे पहले हमें यह बतलाये की धर्म किसे बोलते हैं इस्लाम मजहब क्या है ? थोडा हमें बतलाना | इस्लाम में खुद और के बारे में वैसा बोला गया है जिस कारण हमने प्रमाण दिया है | इस्लाम बोलता है जात पात नहीं फिर ये सिया सुन्नी अहमदिया इत्यादि ये सब क्या है ? क्या सिया खुद को इस्लाम के नहीं मानते ? क्या सुन्नी खुद को इस्लाम के नहीं मानते ? ७२ फिरके क्या है ? फिर इस्लाम क्या है ? सच्चा इस्लाम कौन सा है ? यह हमें बतलाना जी | खुद कुरआन सब में इसकी जानकारी दी गयी है | आप जब चाहे चर्चा करें हम तैयार हैं चर्चा करने को | जब आप चाहे कुरआन हदीस सब से चर्चा करे | और हम तो चाहते हैं कोई ऐसा हो जो हमें इस्लाम के बारे में सही जानकारी दे सके | यहाँ तक आपके इस्लाम के प्रकांड विद्वान् जाकिर तक कुरआन हदीस को मानते हैं और मुस्लिम मौलाना तक कुरआन हदीस को सही मानते हैं | और जो हमने प्रमाण दिया है उन्ही सब से पढ़कर दिया है | आप बोलोगे तो उन साईट से लिंक भी पेश कर दूंगा मगर लिंक पेश करूँगा तो बहुत लोगो को लगेगा की हमने गलत पेश कर दी | अल तकैया कर दोगे आप | चलो आप जिस से चर्चा करना चाहो चर्चा करो हम तैयार है | मुझ जैसे अज्ञानी को इस्लाम के बारे में सही जानकारी देने की कृपा करे | आपके जवाब की प्रतीक्षा मे | धन्यवाद |

  22. राम या हनुमान ने राम सेतु पुल बनाया था सीता को बचा के लाने के लीए । जब भगवान थे तो पुल बनाने की क्या जरुरत थी उड की नही जा सकते थे। ये एक किस्म की चूतियापंती है और हिन्दु क्या बोलते है कि सारे भगवान मनुष्य के रुप मे थे इसलिए उड के जाने की ताकत नही थी। ये हिन्दु अपनी ही चट करते है और अपनी ही पट। जब मनुष्य के रुप मे भगवान थे। इसका मतलब ये हुआ वे मनुष्य ही भगवान थे । और भगवान उसे कहते है जो कुछ भी कर सकते है तो फिर वे मनुष्य उड क्यो नही सकते थे क्योकि आप लोग तो उनको एक तरीके से भगवान ही मानते है और ब्रहम्मा ने अपनी पुत्री से सेक्स किया था इसलिए हिन्दु ब्रहम्मा को भगवान मानते हो । ब्रहम्मा भी तो आपके भगवान थे भगवान बल्तकार करता है क्या। ये सब आपकी किताबो मे लिखा है। और राम ने अपनी पत्नी सीता को घर से बाहर निकाला था। तो क्या औरत को यूही कही भी धक्के दिये जा सकते है। कहने को राम भगवान थे औरत की इज्जत आती नही थी। एक बात और फिर ये लव कुस कहा से आये

    1. नफीस माली भाई जान
      कितना झूठ बोलते हो भाई जान कोई भी पौराणिक भी सुनेगा तो बोलेगा की आप कितने झूठे हो और झूठ बोलना शायद इस्लाम ही सिखाता हो | चलो पहले पौराणिक हिसाब से आपको जवाब देने की कोशिश करता हु पौराणिक हिसाब से जावब यह है की राम ने या हनुमान ने सेतु पुल का निर्माण नहीं किया बल्कि नल नील ने सेतु पुल का निर्माण किया | और दूसरी बात राम मनुष्य रूप में थे तो वे इस कारण वह उड़ नहीं सकते थे | उन्हें मनुष्य के रूप में समाज में मानव को मर्यादा के रूप में रहने का जो समाज में आदर्श स्थापित करना जो था | अब आपका दूसरा कमेंट आपने बताया की ब्रह्मा ने अपनी पुत्री से सेक्स किया यह कौन से पुराण में है पौराणिक के ग्रन्थ में यह प्रमाण भी देना | कितना झूठ बोलोगे मेरे भाई जान | इस तरह की झूठ बोलना तो केवल इस्लाम ही सिखलाता है आपके सारे सवाल का जवाब आपको फेसबुक पर हमारे पेज पर राहुल झा आपको जानकारी देंगे आप प्रमाण बताना वे आपको सभी से प्रमाण के साथ जवाब देंगे या फिर और दुसरे सदस्य आपको जवाब देंगे | जिस तरह से कुरआन में एक अंगुली से चाँद के दो तुकडे हो सकते हैं एक डंडा पत्थर पर मारने पर झरने निकल सकते हैं तो यह पौराणिक हिसाब से ऐसा क्यों नहीं हो सकता जी | वैसे हम खुद पुराण इत्यादि का खंडन करते हैं क्यूंकि उसमे बहुत मिलावट कर दी गयी है | जैसे कुरआन में अंधविश्वास है उसी तरह पुराण सब में भी है | आओ अंधविश्वास को त्यागो और वेड की ओर लौटो | सत्य सनातन वैदिक धर्म की ओर लौटो | धन्यवाद |

      1. एक बात बताऊ अमित भाई मैने ये राम के पुल वाली बात अपने हिन्दु दोस्तो से ही सुनी है। मैने आपकी तरह कुछ भी अपनी तरफ से झूठ नही लिखा है। और आपने क्या लिखा कि इस्लाम झूठ बोलना सिखाता है। मै बताता हू इस्लाम क्या सिखाता है।अल्लाह के रसूल ने फरमाया जिस शख्स के अन्दर ये चार चीजे होगी वो मुनाफिक है। मुनाफिक एक तरह से काफिर को बोलते है। नम्बर 1 झूठ बोलने वाला। 2 गाली देना वाला 3 वादा खिलाफी करने वाला 4 अमानत मे खयानत करने वाला। तो फिर अमित जी तुमने ये कैसे कह दिया कि इस्लाम झूठ सिखाता है। लगता है आपने इस्लाम की स्टीडीज अधूरी पडी है। आप इस्लाम की तालीम नफरतो को मजहबी दुश्मनी को पीछे छोडकर तब पडो इन्सानियत की दृष्टि से। और प्लीज request ये है आधे अधूरी आयते( श्लोक) पड कर बाकी हिन्दुओ की तरह गलत मतलब ना निकाले। और अब आप अपनी सफाई मे अपनी बात बडी करने के लिए हक और सही चीज को ना देखते हुए लिखेगे कि मुस्लमान ही झूठ बोलते है गाली देते है। मगर मेरे भाई बेबुनियाद इल्जाम लगाने से कुछ नही होता।

        1. और रही बात चांद के दो टुकडे करने की इसके बारे मुझे मालूम नही पूछ कर बतलाऊगा।
          हनुमान ने सूरज निगला था। अगर मै भी कहू कि हनुमान क्या सूरज निगल सकता है। क्योकि आप तो सभी भगवाने को मनुष्य का रूप कहते हो। मतलब आदमी। तो बताओ आदमी कैसे सूरज निगल सकता है। अब ये मत कहना उन्होने भगवान का रूप धारण कर लिया था। और अगर ऐसा कहोगे तो फिर इस सवाल का भी जवाब चाहिए सीता को लाने के लिए पुल बनाने की क्या जरूरत थी। उड के नही ला सकते थे। हिम्मत है तो जवाब दो।

          1. बंधुवर आपको लगता है वैदक धर्म की समझ नहीं है आपके निम्नलिखत वाक्य इसे प्रदर्शित करंता है :
            “आप तो सभी भगवाने को मनुष्य का रूप कहते हो। मतलब आदमी। तो बताओ आदमी कैसे सूरज निगल सकता है। ”

            वैदिक धर्म न तो अवतारवाद में विश्वास रखता है न ही चमक्त्कारों में
            प्रकृति के नियम अटल हैं उनमें कोई परिवर्तन नहीं होता

            वैदिक धर्म तौहीद को मानता है

        2. बंधू इस्लाम शांति का मजहब है या नहीं ये इतिहास से ही सिध्ध होता है मुहम्मद साहब और उनके अनुयायिओं के व्यवहार इसको प्रदर्शित करते हैं
          उदहारण के लिए :
          नास से रिवायत है कि मुहम्मद साहब ने एक अभियान खैबर की तरफ रवाना किया. हमने सुबह की नमाज अदा की . मुहम्मद साहब और अबु ताल्हा घोड़े पर सवार हो गए. मैं ( अनास ) अबू ताल्हा के पीछे बैठा था. हम खैबर की तंग गलियों में घुस गए .जैसे ही वो निवास स्थान पर पहुंचे जो अल्लाह हु अबकर जोर बोला. खैबर तबाह हो चूका था .हम लोगों के मध्य में थे जिनको पहले सचेत किया जा चूका था. लोग जब दैनिक कर्म के लिए बाहर निकले तो पता चला कि मुहम्मद साहब ने अपनी सेना के साथ कब्ज़ा कर लिया है .मुहम्मद साहब ने कहा की खैबर की भूमि अब हमारे स्वामित्व में है हमने बलपूर्वक इसे ले लिया है . लोग अब युद्ध बंदी थे . हदीस आगे कहती है कि दिह्या मुहम्मद साहब के पास आकर बोला कि अल्लाह के रसूल मुझे बंदियों की लड़कियों में से एक लड़की दे दीजिये. मुहम्मद साहब ने कहा कि जाओ और किसी को भी ले लो . उसने हुयायाय की लड़की साफिया को पसंद किया . एक व्यक्ति ने मुहम्मद साहब के पास आकर कहा की आपने दिह्या को दे दिया वो केवल आपके लिए है . मुहम्मद साहब ने कहा की साफिया को दिह्या के साथ बुलाया जाए . मुहम्मद साहब के साफिया को देखकर कहा कि दिह्या कोई दूसरी लड़की ले लो और मुहम्मद साहब ने साफिया को मुक्त कर उससे निकाह कर कर लिया .

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          अब इसे क्या कहा जाये

  23. OUM..
    NAMASTE…
    NAFEES CHAACHAA, SABSE PAHALE TO AAP EK MANUSHYA BANO…MANUSHYA KE MAANE KYAA HOTI HAI THODI PADH LENAA JI… AUR ACHHE BHAARATIYA BANO, BHAARAT KO PYAAR KARO NAAKI MAKKAA-MADINE KI…APNAA NAAM BHI BHAARATIYA JAISAA RAKHO…APNI POSHAAK BHI BHAARATIYA JAISI PAHNAA KARO…
    PAIDAA HUE BHARAT ME, PALE BADHE PADHE BHARAT ME KHAATE HO BHARAT KI ROTI AUR GUNGAAN KARTE HO ARAB KI ?!!! AAP KO PATAA BHI HAI KI ARAB KI MAANE KYAA HAI? ISLAAM KI SHABD BHI SANSKRIT SE BANAA HAI…
    AAJAAO APNI MOOL VAIDIK RAASTE ME…AAP KI PURKHON KO KIS TARAHA MUSALMAAN BANAAYAA GAYAA JARAA SAMJHO….ACHCHHAA…JI…
    MNAMASTE…

    1. @ इस्लामिक बंधुओं से निवेदन है कि कृपया भाषा का संयम बनाये रखें
      स्वस्थ चर्चा के लिए यह आवश्यक है

        1. जिन्होंने अपशब्दों का प्रयोग किया उनके लिए ही लिखा

        1. किसी एक गलत इंसान की वजह से आप इस्लाम को गलत नही कह सकते । अगर आप ऐसा कहेगे तो आप दुनिया के सबसे बडे बेवकूफ हो

          1. अफगानिस्तान, लीबिया सीरीय , इराक इरान में जो हो रहा है वो प्रत्यक्ष उदारहण हैं जो हो रहा है उसका

          1. sana ji
            hamare liye pura vishwa hi pariwaar ke saman hai. aur ham apane bhatke huye pariwaar ko saty ki aor le jaana chahte hain. example 2+2=5 aisa bahut bolte hain aur ham jaankaari dete hain 2+2=4 hote hain. fir bhi koi ise swikaar kare yaa naa kare. ham apana kartavya kaa paaln kar rahe hain jaankaari dekar. ab jise saty lage ve apanye apani maarg ko nahi to ve soch aapki vichaar aapki.. dhanywaad

  24. आप सभी गैर मुस्लिमो से निवेदन है कि आप (गैर मुस्लिमो मे गलतफैमिया) ये लिंक पढे

      1. अमित जी मैने आपसे पहले भी कहा है और अब भी कहूगा कि अधूरा ज्ञान हानिकारक होता है। ये आपकी काट छाट के ली गयी अधूरी आयते है। जो अपने आप मे बेवकूफी का प्रमाण है। मै बताता हू जिस तरीके से कुरान मे लिखा है कि (नमाज मत पढो ,जब तुम नशे की हालत मे हो।) अब अगर तुम इसमे से सिर्फ ये लाइन उठा लो (नमाज मत पढो) और मुस्लिमो को बदनाम करो। तो इसका मतलब कुरान मे कमी नही आप मे कमी है। और मेरे भाई आप बहुत गलत कर रहे हो कुरान पर आधी अधूरी बाते पढकर इल्जाम लगाये ही जा रहे हो। आप मुस्लिमो को कुछ भी कह सकते हो। मगर कुरान को नही। इसमे आपका ही फायदा है। नही तो अल्लाह के घर मे देर है अंधेर नही। फिर वो दिन भी दूर नही जब तुम पर बहुत सख्त अजाब आयेगा। तुम सोच भी नही सकते। भाई तौबा करो अल्लाह पाक से अभी भी वक्त है। बेसक अल्लाह माफ करने वाले है।

        1. जनाब लगता है यहाँ भी आपका ज्ञान अधुरा है
          कुरान कि आयतें किस तरह शराब बंदी को लेके नाजिल हुयी हैं वो अल्लाह कि कम समझ को ही दर्शाती हैं
          शायद आपको इसका पता नहीं है

            1. में आपसे वही कह रहा हूँ समयानुसार और परिस्तिथि अनुसार अल्लाह मियां/रसूल अपने नियम और कायदे बदलते रहे
              पहले शराब पूरी तरह बंद नहीं थी , फिर नमाज़ के समय बंद हुयी उसके बाद शराब कि कुछ किस्म को बंद करने का पैगाम रसूल ने दिया कि ये अल्लाह ने कहा है
              यदि शराब गलत थी तो पहले ही आदेश दे देना चाहिये था कि पूरी तरह बंद है
              🙂

  25. इस्लाम आ चुका है आपके जीवन में
    एक हिंदू भाई ने घोषित कर दिया कि इस्लाम हिंदू धर्म की छाया प्रति है।
    आज कहना सबके लिए आसान हो गया है। इसीलिए कोई कुछ भी कह सकता है।
    अगर कुछ साधारण सी बातों पर भी विचार कर लिया जाए तो उन्हें अपनी ग़लती आसानी से समझ में आ सकती है और अगर वे न समझें तब भी कम से कम दूसरों की समझ में तो आ ही जाएगी।
    1. हिंदू धर्म की कोई एक सर्वमान्य परिभाषा आज तक तय नहीं है जबकि इस्लाम की परिभाषा तय है।
    2. हिंदू भाई बहनों के लिए कर्तव्य और अकर्तव्य कुछ भी निश्चित नहीं है। एक आदमी अंडा तक नहीं छूता और अघोरी इंसान की लाश खाते हैं जबकि दोनों ही हिंदू हैं।
    जबकि एक मुसलमान के लिए भोजन में हलाल हराम निश्चित है।3. हिंदू मर्द औरत के लिए यह निश्चित नहीं है कि वे अपने शरीर को कितना ढकें ?, एक अपना शरीर ढकता है और दूसरा पूरा नंगा ही घूमता है।
    जबकि मुस्लिम मर्द औरत के लिए यह निश्चित है कि वे अपने शरीर का कितना अंग ढकें ?
    4. हिंदू के लिए उपासना करना अनिवार्य नहीं है बल्कि ईश्वर के अस्तित्व को नकारने के बाद भी लोग हिंदू कहलाते हैं।
    जबकि मुसलमान के लिए इबादत करना अनिवार्य है और ईश्वर का इन्कार करने के बाद उसे वह मुस्लिम नहीं रह जाता।
    5. केरल के हिंदू मंदिरों में आज भी देवदासियां रखी जाती हैं और औरतों द्वारा नाच गाना तो ख़ैर देश भर के हिंदू मंदिरों में होता है। इसे ईश्वर का समीप पहुंचने का माध्यम माना जाता है।
    जबकि मस्जिदों में औरतों का तो क्या मर्दों का भी नाचना गाना गुनाह और हराम है और इसे ईश्वर से दूर करने वाला माना जाता है।6. हिंदू धर्म ब्याज लेने से नहीं रोकता जिसकी वजह से आज ग़रीब किसान मज़दूर लाखों की तादाद में मर रहे हैं।
    जबकि इस्लाम में ब्याज लेना हराम है।
    7. हिंदू धर्म में दान देना अनिवार्य नहीं है। जो देना चाहे, दे और जो न देना चाहे तो वह न दे और कोई चाहे तो दान में विश्वास ही न रखे।
    जबकि इस्लाम में धनवान पर अनिवार्य है कि वह हर साल ज़रूरतमंद ग़रीबों को अपने माल में से 2.5 प्रतिशत ज़कात अनिवार्य रूप से दे। इसके अलावा फ़ितरा आदि देने के लिए भी इस्लाम में व्यवस्था की गई है।
    8. हिंदू धर्म में ‘ब्राह्मणों को दान‘ देने की ज़बर्दस्त प्रेरणा दी गई है।
    जबकि पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह व्यवस्था दी है कि हमारी नस्ल में से किसी को भी सदक़ा-ज़कात मत देना। दूसरे ग़रीबों को देना। हमारे लिए सदक़ा-ज़कात लेना हराम है।9. सनातनी हिंदू हों या आर्य समाजी, दोनों ही मानते हैं कि वेद के अनुसार पति की मौत के बाद विधवा अपना दूसरा विवाह नहीं कर सकती।
    जबकि इस्लाम में विधवा को अपना दूसरा विवाह करने का अधिकार है बल्कि इसे अच्छा समझा गया है कि वह दोबारा विवाह कर ले।
    10. सनातनी हिंदू हों या आर्य समाजी, दोनों ही यज्ञ करने को बहुत बड़ा पुण्य मानते हैं।
    जबकि इस्लाम में यह पाप माना गया है कि आग में खाने पीने की चीज़ें जला दी जाएं। खाने पीने की चीज़ें या तो ख़ुद खाओ या फिर दूसरे ज़रूरतमंदों को दे दो। ऐसा कहा गया है।
    11. सनातनी हिंदू और आर्य समाजी, दोनों ही वर्ण व्यवस्था को मानते हैं और वर्णों की ऊंच नीच और छूत छात को भी मानते हैं।
    जबकि इस्लाम में न वर्ण व्यवस्था है और न ही छूत छात। इस्लाम सब इंसानों को बराबर मानता है और आजकल हिंदुस्तानी क़ानून भी यही कहता है और हिंदू भाई भी इसी इस्लामी विचार को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।12. सनातनी हिंदू और आर्य समाजी, दोनों ही वैदिक धर्म की परंपरा का पालन करते हुए चोटी रखते हैं और जनेऊ पहनते हैं।
    जबकि इस्लाम में न तो चोटी है और न ही जनेऊ
    13. सनातनी हिंदू और आर्य समाजी, दोनों ही वेद के अनुसार 16 संस्कार को मानते हैं, जिनमें एक विवाह भी है। इस संस्कार के अनुसार पत्नी अपने पति के मरने के बाद भी उसी की पत्नी रहती है और उससे बंधी रहती है। पति तो पत्नी का परित्याग कर सकता है लेकिन पत्नी उसे त्याग नहीं सकती।
    जबकि इस्लाम में निकाह एक क़रार है जो पति की मौत से या तलाक़ से टूट जाता है और इसके बाद औरत उस मर्द की पत्नी नहीं रह जाती। वह अपनी मर्ज़ी से अपना विवाह फिर से कर सकती है। इस्लाम में पति तलाक़ दे सकता है तो पत्नी के लिए भी पति से मुक्ति के लिए ख़ुलअ की व्यवस्था की गई है।
    अब हो यह रहा है कि सनातनी और आर्य समाजी, दोनों ही ख़ुद वेद की व्यवस्था से हटकर इस्लामी व्यवस्था को फ़ोलो कर रहे हैं। विधवाओं के पुनर्विवाह वे धड़ल्ले से कर रहे हैं। जब मुसलमानों ने अपने निकाह को विवाह की तरह संस्कार नहीं बनाया तो फिर हिंदू भाई अपने संस्कार को इस्लामी निकाह की तरह क़रार क्यों और किस आधार पर बना रहे हैं ?
    जिस व्यवस्था पर विश्वास है, उस पर चलने के बजाय वे इस्लामी व्यवस्था का अनुकरण क्यों कर रहे हैं ?14. विवाह को संस्कार मानने का नतीजा यह हुआ कि विधवा औरतों को हज़ारों साल तक बड़ी बेरहमी से जलाया जाता रहा। यहां तक कि इस देश में मुसलमान और ईसाई आए और उनके प्रभाव और हस्तक्षेप से हिंदुओं की चेतना जागी कि सती प्रथा के नाम पर विधवा को जलाना धर्म नहीं बल्कि अधर्म है और तब उन्होंने अपने धर्म को उनकी छाया प्रति बना लिया और लगातार बनाते जा रहे हैं।
    15. विवाह की तरह ही गर्भाधान भी एक हिंदू संस्कार है। जब किसी पति को गर्भाधान करना होता है या अपनी पत्नि से किसी अन्य पुरूष का नियोग करवाना होता है तो वह 4 पंडितों को बुलवाता है और वे चारों पंडित पूरे दिन बैठकर वेदमंत्र पढ़ते हैं। उसके घर में खाते पीते हैं। उसके घर में यज्ञ करते हैं। उस यज्ञ से बचे हुए घी को मलकर औरत नहाती है और फिर पूरी बस्ती में घूम घूम कर बड़े बूढ़ों को बताती है कि आज उसके साथ क्या होने वाला है ?
    बड़े बूढ़े अपनी अनुमति और आशीर्वाद देते हैं, तब जाकर पति महाशय या कोई अन्य पुरूष उस औरत के साथ वेद के अनुसार सहवास करता है।

  26. जबकि इस्लाम में गर्भाधान संस्कार ही नहीं है और पत्नि को किसी ग़ैर मर्द के साथ सोने के लिए बाध्य करना बहुत बड़ा जुर्म और गुनाह है।
    मुसलमान पति पत्नी जब चाहे सहवास कर सकते हैं। शोर पुकार मचाकर लोगों को इसकी इत्तिला देना इस्लाम में असभ्यता और पाप है।
    आजकल हिंदू भाई भी इसी रीति से अपनी पत्नियों को गर्भवती कर रहे हैं क्योंकि यही रीति नेचुरल और आसान है।
    धर्म सदा ही नेचुरल और आसान होता है।
    मुश्किल में डालने वाली चीज़ें ख़ुद ही फ़ेल हो जाती हैं। लोग उनका पालन करना चाहें तो भी नहीं कर पाते। शायद ही आजकल कोई गर्भाधान संस्कार करता हो। इस्लामी रीति से पैदा होने के बावजूद इस्लाम पर नुक्ताचीनी करना केवल अहसानफ़रामोशी है। जिसका कारण अज्ञानता है।
    16. सनातनी हिंदू और आर्य समाजी, दोनों के नज़्दीक धर्म यह है कि पत्नि से संभोग तब किया जाए जबकि उससे संतान पैदा करने की इच्छा हो। इसके बिना संभोग करने वाला वासनाजीवी और पतित-पापी माना जाता है।जबकि इस्लाम में इस तरह की कोई पाबंदी नहीं है। इस्लामी व्यवस्था यही है कि पति पत्नी जब चाहें तब आनंद मनाएं। उन्हें आनंदित देखकर ईश्वर प्रसन्न होता है। आजकल हिंदू भाई भी इसी इस्लामी व्यवस्था पर चल रहे हैं।
    18. शंकराचार्य जी के अनुसार हरेक वर्ण और लिंग के लिए वेद को पढ़ने और पढ़ाने की आज़ादी नहीं है।
    जबकि क़ुरआन सबके लिए है। किसी भी रंगो-नस्ल के नर नारी इसे जब चाहें तब पढ़ सकते हैं।
    19. आर्यसमाजी और सनातनी महिलाओं को मासिक धर्म में शास्तों के अनुसार अपवित्र समझते थे,,, इस्‍लाम की शिक्षाओं से प्रेरित होकर उन्‍हें अब उतना अपवित्र नहीं मानते, बल्कि आगे बढकर उनके साथ स्‍कूल आफिस आदि में साथ खाना पीना हाथ मिलाने में कोई बुराई नहीं समझते
    इस्‍लामकि व्‍यवस्‍था में आदम की ब‍ेटियों को इन दिनों सेक्‍स की तकलीफ से बचाने के साथ ही नमाज एवं रोजे में छूट भी मिली है,,, हमें मार्ग दर्शन के लिए उनके साथ उठने बैठने चुमने की हदीसें मौजूद हैं20. इसी के साथ हिंदू धर्म अर्थात वैदिक धर्म में चार आश्रम भी पाए जाते हैं।
    ब्रह्मचर्य आश्रम, गृहस्थ आश्रम, वानप्रस्थ आश्रम, सन्यास आश्रम
    अति संक्षेप में 8वें वर्ष बच्चे का उपनयन संस्कार करके उसे वेद पढ़ने के लिए गुरूकुल भेज दिया जाए और बच्चा 25 वर्ष तक वीर्य की रक्षा करे। इसे ब्रह्मचर्य आश्रम कहते हैं। लेकिन हमारे शहर का संस्कृत महाविद्यालय ख़ाली पड़ा है। शहर के हिंदू उसमें अपने बच्चों को पढ़ने के लिए भेजते ही नहीं जबकि शहर के कॉन्वेंट स्कूल हिंदू बच्चों से भरे हुए हैं। जहां सह शिक्षा होती है और जहां वीर्य रक्षा संभव ही नहीं है, जहां वेद पढ़ाए ही नहीं जाते,
    जहां धर्म नष्ट होता है, हिंदू भाई अपने बच्चों को वहां क्यों भेजते हैं ?
    ख़ैर हमारा कहना यह है कि आजकल हिंदू भाई ब्रह्मचर्य आश्रम का पालन नहीं करते और न ही वे 50 वर्ष का होने पर वानप्रस्थ आश्रम का पालन करते हुए जंगल जाते हैं और सन्यास आश्रम भी नष्ट हो चुका है।आज हिंदू धर्म के चारों आश्रम नष्ट हो चुके हैं और हिंदू भाई अब अपने घरों में आश्रम विहीन वैसे ही रहते हैं जैसे कि मुसलमान रहते हैं क्योंकि इस्लाम में तो ये चारों आश्रम होते ही नहीं।
    ज़रा सोचिए कि अगर इस्लाम हिंदू धर्म की छाया प्रति होता तो उसमें भी वही सब होता जो कि हिंदू धर्म में हज़ारों साल से चला आ रहा है और उन बातों से आज तक हिंदू जनमानस पूरी तरह मुक्ति न पा सका।
    चार आश्रम, 16 संस्कार, विधवा विवाह निषेध, नियोग, वर्ण-व्यवस्था, छूत छात, ब्याज, शूद्र तिरस्कार, देवदासी प्रथा, ईश्वर के मंदिर में नाच गाना, चोटी, जनेऊ और ब्राह्मण को दान आदि जैसी बातें जो कि हिंदू धर्म अर्थात वैदिक धर्म में पाई जाती हैं, उन सबसे इस्लाम आखि़र कैसे बच गया ?
    इन बातों के बिना इस्लाम को हिंदू धर्म की छाया प्रति कैसे कहा जा सकता है ?हक़ीक़त यह है कि इस्लाम किसी अन्य धर्म की छाया प्रति नहीं है बल्कि ख़ुद ही मूल धर्म है और पहले से मौजूद ग्रंथों में धर्म के नाम पर जो भी अच्छी बातें मिलती हैं वे उसके अवषेश और यादगार हैं, जिन्हें देखकर लोग यह पहचान सकते हैं कि इस्लाम सनातन काल है, हमेशा से यही मानव जाति का धर्म है।
    ईश्वर के बहुत से नाम हैं। हरेक ज़बान में उसके नाम बहुत से हैं। उसके बहुत से नामों में से एक नाम ‘अल्लाह‘ है। यह नाम क़ुरआन में भी है और बाइबिल में भी और संस्कृत ग्रंथों में भी।ईश्वर का निज नाम यही है लेकिन उसके निज नाम को ही भुला दिया गया। ईष्वर के नाम को ही नहीं बल्कि यह भी भुला दिया गया कि सब एक ही पिता की संतान हैं। सब बराबर हैं। जन्म से कोई नीच और अछूत है ही नहीं। ऐसा तब हुआ जब आदम और नूह (अ.) को भुला दिया गया जिनका नाम संस्कृत ग्रंथों में जगह जगह आया है। इन्हें यहूदी, ईसाई और मुसलमान सभी पहचानते हैं। हिंदू भाई इन्हें ऋषि कहते हैं और मुसलमान इन्हें नबी कहते हैं। इनके अलावा भी हज़ारों ऋषि-नबी आए और हर ज़माने में आए और हर क़ौम में आए। सबने लोगों को यही बताया कि जिसने तुम्हें पैदा किया है तुम्हारा भला बुरा बस उसी एक के हाथ में है, तुम सब उसी की आज्ञा का पालन करो। ऋषियों और नबियों ने मानव जाति को हरेक काल में एक ही धर्म की शिक्षा दी। । वे सिखाते रहे और लोग भूलते रहे। आखि़रकार पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इस दुनिया में आए और फिर उसी भूले हुए धर्म को याद दिलाया और ऐसे याद दिलाया कि अब किसी के लिए भूलना मुमकिन ही न रहा।
    जब दबंग लोगों ने कमज़ोरों का शोषण करने के लिए धर्म में बहुत सी अन्यायपूर्ण बातें निकाल लीं, तब ईश्वर ने क़ुरआन के रूप में अपनी वाणी का अवतरण पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अन्तःकरण पर किया और पैग़म्बर साहब ने धर्म को उसके वास्तविक रूप में स्थापित कर दिया। जिसे देखकर लोगों ने ऊंच नीच, छूतछात और सती प्रथा जैसी रूढ़ियों को छोड़ दिया। बहुतों ने इस्लाम कहकर इस्लाम का पालन करना आरंभ कर दिया और उनसे भी ज़्यादा वे लोग हैं जिन्होंने इस्लाम के रीति रिवाज तो अपना लिए लेकिन इस्लाम का नाम लिए बग़ैर। इन्होंने इस्लामी उसूलों को अपनाने का एक और तरीक़ा निकाला। इन्होंने यह किया कि इस्लामी उसूलों को इन्होंने अपने ग्रंथों में ढूंढना शुरू किया जो कि मिलने ही थे। अब इन्होंने उन्हें मानना शुरू कर दिया और दिल को समझाया कि हम तो अपने ही धर्म पर चल रहे हैं।
    ये लोग हिंदू धर्म के प्रवक्ता बनकर घूमते हैं। ऐसे लोगों को आप आराम से पहचान सकते हैं। ये वे लोग हैं जिनके सिरों पर आपको न तो चोटी नज़र आएगी और न ही इनके बदन पर जनेऊ और धोती। न तो ये बचपन में ये गुरूकुल गए थे और न ही 50 वर्ष का होने पर ये जंगल जाते हैं। हरेक जाति के आदमी से ये हाथ मिलाते हैं। फिर भी ये ख़ुद को वैदिक धर्म का पालनकर्ता बताते हैं।
    ख़ुद मुसलमान की छाया प्रति बनने की कोशिश कर रहे हैं और कोई इनकी चालाकी को न भांप ले, इसके लिए ये एक इल्ज़ाम इस्लाम पर ही लगा देते हैं कि ‘इस्लाम तो हिंदू धर्म की छायाप्रति है‘
    ये लोग समय के साथ अपने संस्कार और अपने सिद्धांत बदलने लगातार बदलते जा रहे हैं और वह समय अब क़रीब ही है जब ये लोग इस्लाम को मानेंगे और तब उसे इस्लाम कहकर ही मानेंगे।
    तब तक ये लोग यह भी जान चुके होंगे कि ईश्वर का धर्म सदा से एक ही रहा है। ‘
    एक ईश्वर की आज्ञा का पालन करना‘ ही मनुष्य का सनातन धर्म है। अरबी में इसी को इस्लाम कहते हैं। इस्लाम का अर्थ है ‘ईश्वर का आज्ञापालन।‘
    इसके अलावा मनुष्य का धर्म कुछ और हो भी कैसे सकता है ?
    वर्ण व्यवस्था जा चुकी है और इस्लाम आ चुका है।
    जिसे जानना हो, वह जान ले !

  27. बेशक इस्लाम औरत को हुक्म देता है कि वह पर्दे में रहे। दुनिया के सामने अपने जिस्म और खूबसूरती की नुमाइश (प्रदर्शन) न करें सिवाय उसके शौहर (पति) के। क्यों इस्लाम ने सिर्फ औरतों को ही पर्दे में रहने का हुक्म दिया? क्यों सारी पाबंदियां सिर्फ औरतों के लिए ही हैं? क्यों मर्दों के लिए इस्लाम पर्दे का हुक्म नहीं देता? क्यों इस्लाम में मर्दों पर किसी भी तरह की पाबंदी नहीं हैं? लगता हैं इस्लाम एक पुराना और रूढ़िवादी धर्म हैं।कुछ अज्ञानी लोग बिना इस्लाम को पढ़े और समझें इस्लाम पर इस तरह के बेहूदा इल्जाम लगाने से नहीं चूकते। हालांकि इससे इस्लाम को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि इस्लाम का प्रत्येक कानून प्रत्येक कसौटी (criterion) पर खरा उतरता हैं चाहे वो सामाजिक कसौटी (Social criterion) हो, तार्किक कसौटी (logical criterion) हो या फिर वैज्ञानिक कसौटी (Scientific criterion) हो। फिर भी इन बेतुके सवालों के जवाब देने जरूरी हैं ताकि सच्चाई सबके सामने आ सकें।इस्लाम में पर्दे का हुक्म सिर्फ औरतों के लिए ही नहीं बल्कि मर्दों के लिए भी हैं। जैसा कि कुरान ए पाक में लिखा है; “ऐ नबी (मुहम्मद साहब स.अ.व.) कह दो मोमिन (मुसलमान) मर्दों से की अपनी नजरें नीची रखे और अपनी शर्मगाहो (शरीर के खास अंगों) की हिफाजत करें, ये उनके लिए बेहतर हैं” कुरान (24 :30)कुरान की इस आयत के जरिये अल्लाह (ईश्वर) मुसलमान मर्दों को यह हुक्म दे रहा है कि वे अपनी नजरें नीची रखे और अपनी शर्मगाहो (शरीर के खास अंगों) की हिफाजत करें क्योंकि इसी में उनकी भलाई हैं। यहाँ नजरें नीची रखने का सम्बन्ध पर्दे से ही हैं पर कुछ लोगों के मन में यह सवाल उठ सकता हैं कि नजरें नीची रखने से पर्दा कैसे हुआ? तो आइये इस सवाल का जवाब हम विज्ञान से ही पूछ लेते हैं क्योंकि हो सकता हैं कि इस्लाम के तर्क (logics) को कुछ लोग कुबुल ना करे।अमेरिका की एक मशहूर Anthropologist (मानव विज्ञानी) जिसका नाम Helen Fisher हैं पिछले 30 सालों से Rutger University, America में Anthropology (मानव विज्ञान) की professor हैं और Human Behaviour (मानव व्यवहार) पर रिसर्च कर रही हैं और इसी विषय पर कई किताबें भी लिख चुकी हैं। उसने अपने रिसर्च से बताया कि इन्सान के शरीर में कुछ हार्मोन (hormones) होते हैं जैसे Testosterone और Estrogens और दिमाग में कुछ neurotransmitters (रसायन) होते हैं जैसे Dopamine और Serotonin और ये औरतों

    और वह कहती हैं कि जब भी किसी मर्द की नजर किसी औरत पर पड़ती हैं तो ये हार्मोन और रसायन active (सक्रिय) हो जाते हैं और फिर मर्द उस औरत को देखकर उत्तेजित हो जाता हैं। और ऐसा तब होता हैं जब या तो औरत बहुत खूबसूरत (Charming) हो या उसका जिस्म का उभार (Figure) दिखाई देता हो। और ऐसा सिर्फ इन्सानो में ही नहीं बल्कि पक्षियों और जानवरों में भी होता हैं। आपने सुना भी होगा और देखा भी होगा कि जब कोई हाथी पागल हो जाता है तो वह तबाही मचाने लग जाता हैं। लेकिन विज्ञान कहता है कि वह हाथी पागल नहीं होता है वह तो ऐसा इसलिए करता है क्योंकि उसमें Testosterone की मात्रा बहुत बढ़ जाती हैं। (Kohraam.com)

    इसी तरह एक शेर दूसरे शेरों के बच्चों को मार देता है ताकि शेरनी उसकी तरफ (Mating) के लिए आकर्षित हो जाए। और सभी प्रकार के नर जानवर मादा को पाने के लिए एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं। John Hopkins University के वैज्ञानिकों ने पक्षियों के व्यवहार पर रिसर्च किया और मालूम किया कि नर पक्षी गाना गाते हैं मतलब अलग अलग तरह की आवाजें निकालते हैं ताकि वे मादा पक्षियों को आकर्षित कर सकें।
    तो विज्ञान के मुताबिक औरतों (मादाओं) के जिस्म और खूबसूरती को देखकर मर्द (नर) उत्तेजित हो जाते हैं। अगर मर्दों को औरतों की तरफ आकर्षित होने से रोकना है तो औरतें अपनी खूबसूरती व जिस्म को पर्दे में रखें और मर्द भी औरतों को न घुरे तो समाज बहुत सी बुराइयों से बच जाएगा। सामाज के मान मरयादा की रक्षा और उसे बिखरने से बचाने के लिए इस्लाम ने हुक्म दिया है कि महिलाएं अपने आप को पर्दे में रखे और मर्द अपनी नजरें नीची रखे मतलब औरतों को न घुरें। तो यह साबित हो गया कि इस्लाम ने सिर्फ औरतों को ही नहीं बल्कि मर्दों को भी पर्दा करने का हुक्म दिया हैं और इसी में इन्सानो और समाज की भलाई हैं।

  28. इस्लाम की तीन बुनियादी आस्थाएं हैं-
    १. एकेश्वरवाद ( तौहिद )
    इस्लाम की बुनियादी आस्थाओ में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है एक ईश्वर में आस्था ।
    २. ईशदूत वाद ( रिसालत )
    इन्सानो के व्यवहारिक मार्गदर्शन के लिए ईश्वर हर युग में आवश्यकतानुसार संदेशवाहक भेजता रहा जो ईश्वर प्रदत्त ज्ञान की ज्योति द्वारा अपने कार्यक्षेत्र मे मनुष्यो का मार्गदर्शन करते रहे ।
    ३. परलोकवाद ( आख़िरत )
    संसार में मनुष्य अनुत्तरदायी बनाकर नहीं छोड़ा गया है । वह ईश्वर के सामने जवाबदेह है । एक दिन होगा जब मनुष्य के कर्मो की जाँच पड़ताल होगी ।’इस्लाम’ अरबी भाषा का एक शब्द है, जिसका अर्थ है आज्ञापालन, शांति और सुव्यवस्था । पारिभाषिक रूप से इस्लाम एक ईश्वर के आज्ञापालन को कहते है, जिससे शांति और सुव्यवस्था उत्तपन्न होती है
    इस्लाम, कुरआन और हज़रत मुहम्मद ( सल्ल.) के बारे में हमारे समाज में तरह-तरह की गलतफहियां पाई जाती है । कहा जाता है कि इस्लाम की शुरुआत मुहम्मद (सल्ल.) से हुई और कुरआन आपकी वाणी है। सत्य ये है कि इस्लाम ईश्वरीय धर्म है, जो आदम ( मनु ) से पर्ारंभ हुआ ।यह सभी धर्मगुरूओ का धर्म रहा है। मुहम्मद (सल्ल.) पर तो आकर यह धर्म पूर्ण हुआ और हर देश, हर जाति, हर वर्ग और हर समय और हर समाज के लिए यही अंतिम और सम्पूर्ण विधि-व्यवस्था और जीवन-व्यवस्था और जीवन-व्यवस्था हैइस्लाम देश में हिंसा (फसाद) करने की इजाज़त नहीं देता । देखिये अल्लाह का यह आदेश :
    “लोगो को उनकी चीजें कम न दिया करो और मुल्क में फ़साद न करते फिरो ।”
    (क़ुरआन, सूरह -26, आयत -183)”दीने-इस्लाम (इस्लाम धर्म) में ज़बरदस्ती नहीं है ।”
    (क़ुरआन, सूरह -2, आयत – 256)”तुम मोमिन नहीं हो सकते जब तक कि एक दूसरे पर दया न करो” । सहबियों ने कहा कि हममें से प्रत्येक दयाशील है । नबी (सल्ल.) ने कहा, “मेरा आशय यह नहीं है कि तुममे से कोई अपने साथी पर दया करे बल्कि मेरा अभिप्राय सार्वजनिक दयालुता से है।”
    कथन हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) हदीस : तबरानी

    हज़रत मुहम्मद (स.अ.व.) का कथन है कि “सम्पूर्ण सृष्टि अल्लाह का परिवार है, और अल्लाह को सबसे अधिक प्रिय वह व्यक्ति है जो उसके परिवार के साथ अच्छा व्यवहार करे”

  29. Assalamu a’laikum

    ☆ इस्लाम आतंक या आदर्श –
    स्वामी लक्ष्मीशंकराचार्य
    » NonMuslim View About Islam:
    स्वामी लक्ष्मीशंकराचार्य
    #_इस्लाम_आतंक_या_आदर्श –
    यह पुस्तक कानपुर के स्वामी लक्ष्मीशंकराचार्य जी ने लिखी है।
    – इस पुस्तक में स्वामी लक्ष्मी शंकराचार्य ने इस्लाम के अपने अध्ययन को बखूबी पेश किया है। स्वामी लक्ष्मी शंकराचार्य के साथ दिलचस्प वाकिया जुड़ा हुआ है।
    * वे अपनी इस पुस्तक की भूमिका में लिखते हैं- मेरे मन में यह गलत धारणा बन गई थी कि इतिहास में हिन्दु राजाओं और मुस्लिम बादशाहों के बीच जंग में हुई मारकाट तथा आज के दंगों और आतंकवाद का कारण इस्लाम है। मेरा दिमाग भ्रमित हो चुका था।* इस भ्रमित दिमाग से हर आतंकवादी घटना मुझे इस्लाम से जुड़ती दिखाई देने लगी। इस्लाम, इतिहास और आज की घटनाओं को जोड़ते हुए मैंने एक पुस्तक लिख डाली-‘इस्लामिक आंतकवाद का इतिहास’ जिसका अंग्रेजी में भी अनुवाद हुआ।
    *पुस्तक में स्वामी लक्ष्मीशंकराचार्य आगे लिखते हैं –
    जब दुबारा से मैंने सबसे पहले मुहम्मद (सल्ललाहु आलैही वसल्लम) की जीवनी पढ़ी।
    – जीवनी पढऩे के बाद इसी नजरिए से जब मन की शुद्धता के साथ कुरआन मजीद शुरू से अंत तक पढ़ी, तो मुझे कुरआन मजीद के आयतों का सही मतलब और मकसद समझने में आने लगा।
    – सत्य सामने आने के बाद मुझ अपनी भूल का अहसास हुआ कि मैं अनजाने में भ्रमित था और इस कारण ही मैंने अपनी उक्त किताब-‘इस्लामिक आतंकवाद का इतिहास’ में आतंकवाद को इस्लाम से जोड़ा है जिसका मुझे खेद है# लक्ष्मी शंकराचार्य अपनी पुस्तक की भूमिका के अंत में लिखते हैं –
    मैं अल्लाह से,पैगम्बर मुहम्मद (सल्ललल्लाहु अलेह वसल्लम) से और सभी मुस्लिम भाइयों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगता हूं तथा अज्ञानता में लिखे व बोले शब्दों को वापस लेता हूं। सभी जनता से मेरी अपील है कि ‘इस्लामिक आतंकवाद का इतिहास’ पुस्तक में जो लिखा है उसे शून्य समझे।
    – एक सौ दस पेजों की इस पुस्तक-इस्लाम आतंक? या आदर्श में शंकराचार्य ने खास तौर पर कुरआन की उन चौबीस आयतों का जिक्र किया है जिनके गलत मायने निकालकर इन्हें आतंकवाद से जोड़ा जाता है।
    – उन्होंने इन चौबीस आयतों का अच्छा खुलासा करके यह साबित किया है कि किस साजिश के तहत इन आयतों को हिंसा के रूप में दुष्प्रचारित किया जा रहा है।*स्वामी लक्ष्मी शंकराचार्य ने अपनी पुस्तक में मौलाना को लेकर इस तरह के विचार व्यक्त किए हैं:
    – इस्लाम को नजदीक से ना जानने वाले भ्रमित लोगों को लगता है कि मुस्लिम मौलाना, गैर मुस्लिमों से घृणा करने वाले अत्यन्त कठोर लोग होते हैं। लेकिन बाद में जैसा कि मैंने देखा, जाना और उनके बारे में सुना, उससे मुझे इस सच्चाई का पता चला कि मौलाना कहे जाने वाले मुसलमान व्यवहार में सदाचारी होते हैं, अन्य धर्मों के धर्माचार्यों के लिए अपने मन में सम्मान रखते हैं।
    – साथ ही वह मानवता के प्रति दयालु और सवेंदनशील होते हैं। उनमें सन्तों के सभी गुण मैंने देखे। इस्लाम के यह पण्डित आदर के योग्य हैं जो इस्लाम के सिद्धान्तों और नियमों का कठोरता से पालन करते हैं, गुणों का सम्मान करते हैं। वे अति सभ्य और मृदुभाषी होते हैं।ऐसे मुस्लिम धर्माचार्यों के लिए भ्रमवश मैंने भी गलत धारणा बना रखी थी।
    – उन्होंने किताब में ना केवल इस्लाम से जुड़ी गलतफहमियों दूर करने की बेहतर कोशिश की है बल्कि इस्लाम को अच्छे अंदाज में पेश किया है।
    – अब तो स्वामी लक्ष्मीशंकराचार्य देश भर में घूम रहे हैं और लोगों की इस्लाम से जुड़ी गलतफहमियां दूर कर इस्लाम की सही तस्वीर लोगों के सामने पेश कर रहे हैं।
    # स्वामी लक्ष्मीशंकराचार्य जी की विडियो के लिए इन लिंक्स पर जाये –Khurram
    Talib e dua’a

  30. मुस्लमान क़ाबा की पूजा करते है।
    सवाल : —– ज़ब इस्लाम मूर्ती पूजा के विरुद्ध है, तो फिर इसका क्या कारण है, कि मुसलमान अपनी नमाज़ में क़ाबा की और झुकते है, और क़ाबा की पूजा करते है ?
    जवाब : —– ” काबा ” क़िबला है, अर्थात वह दिशा जिधर मुसलमान नमाज़ के समय अपने चेहरे का रुख करते है। यह बात सामने रहनी चाहिए कि यधपि मुसलमान अपनी नमाजो में क़ाबा की और अपना रुख करते है, लेकिन काबा की पूजा नही करते है। मुसलमान एक अल्लाह के सिवा किसी की पूजा (इबादत) नही करते और न ही किसी के सामने झुकते है।
    पवित्र कुरआन में कहा गया है —
    ” हम तुम्हारे चेहरो को आसमान की और उलटते – पलटते देखते है, तो क्या हम तुम्हारे चेहरो को एक क़िब्ले की तरफ न मोड़ दे, जो तुम्हे प्रसन्न कर दे। तुम्हे चाहिए कि तुम जहां कही भी रहो अपने चेहरो को उस पवित्र मस्जिद की तरफ मोड़ लिया करो। ” ( कुरआन 2 : 144 )1 : —– इस्लाम एकता क़ी बुनियादों को मजबूत करने में विश्वास करता है।
    उदहारण के रूप में यदि मुसलमान चाहते है, कि वे नमाज़ पढ़े तो उनके लिए यह भी सम्भव था की उत्तर की और अपना रुख करे और कुछ दक्षिण की ओर। एक मात्र वास्तविक स्वामी की इबादत में मुसलमानो को संघठित करने के लिए यह आदेश दिया की चाहे वे जहा कही भी हो, वे अपने चेहरे एक ही दिशा की और करे अर्थात काबा की और। यदि कुछ मुसलमान काबा के पश्चिम में रहते है, तो उन्हें पूर्व की और रुख करना होगा। इसी प्रकार अगर वे क़ाबा के पूर्व में रह रहे हो तो उन्हें पश्चिम की दिशा में अपने चेहरे का रुख करना होगा।2 : —– ” काबा ” विश्व मानचित्र के ठीक बीच में है।
    सबसे पहले मुसलमानो ने ही दुनिया का भौगोलिक मानचित्र बनाया था। उन्होंने मानचित्र इस प्रकार बनाया कि दक्षिण ऊपर की ओर था और उत्तर नीचे की ओर। ‘काबा’ बीच में था। आगे चलकर पाश्चात्य के मानचित्र रचयिताओं ने दुनिया का जो मानचित्र तैयार किया वह इस प्रकार था कि पहले मानचित्र के मुकाबले में इसका ऊपरी हिस्सा बिलकुल नीचे कि ओर था, अर्थात उत्तर की दिशा ऊपर की ओर, और दक्षिण कि दिशा नीचे कि ओर। इसके बावजूद अल्लाह का शुक्र है, कि क़ाबा दुनिया के मानचित्र में केंद्रीय स्थान में ही रहा।3 : —– ” काबा ” का तवाफ़ ( परिक्रमा ) ईश्वर के एकत्व का प्रतीक है।
    मुसलमान जब मक्का में स्थित मस्जिद – हरम ( प्रतिष्टित मस्जिद ) जाते है, तो वे काबा का तवाफ़ करते है। यह कार्य एक ईश्वर में विश्वास रखने और एक ही ईश्वर की उपासना, इबादत करने का प्रतीकात्मक प्रदर्शन है। क्यूकि जिस तरह हर गोल दायरे का एक केंद्रीय बिंदु होता है, उसी तरह ईश्वर एक ही है, जो पूजनीय है।
    4 : —– हजरत उमर (रजि०) का बयान।
    काबा में लगे हुए ‘ हजरे-अस्वद ‘ (काले पत्थर) से सम्बंधित दूसरे इस्लामी शासक हजरत उमर (रजि०) का एक कथन उल्लेखित है, हदीस की प्रसिद्ध पुस्तक ‘सही बुखारी’ भाग दो, अध्याय हज, पाठ-56, हदीस संख्या – 675 के अनुसार हज़रत उमर (रजि०) ने फ़रमाया —— मुझे मालूम है, कि (हजरे-अस्वद) तुम एक पत्थर हो। न तुम किसी को फायदा पंहुचा सकते हो और न ही नुकसान और मैंने अल्लाह के पैगम्बर ( सल्लल्लाहु अलेह वसल्लम ) को तुम्हे छूते, और चूमते न देखा होता तो में कभी न तो तुम्हे छूता न और न ही चूमता। ”
    5 : —– लोग ‘ काबा ‘ पर चढ़कर अज़ान देते थे।
    अल्लाह के पैगम्बर के ज़माने में तो लोग ‘ काबा ‘ पर चढ़कर अज़ान देते थे। यह बात इतिहास में प्रसिद्ध। अब जो लोग यह आरोप लगते है, कि मुसलमान काबा की उपासना (इबादत) करते है, उनसे पूछना चाहिए की भला बताइये तो सही कि कोन मूर्ती पूजा करने वाला मूर्ती पर चढ़कर खड़ा होता है।

  31. और हमने इसराईलियों को समुद्र पार करा दिया। फिर फ़िरऔन और उसकी सेनाओं ने सरकशी और ज़्यादती के साथ उनका पीछा किया, यहाँ तक कि जब वह डूबने लगा तो पुकार उठा, “मैं ईमान ले आया कि उसके सिव कोई पूज्य-प्रभु नही, जिस पर इसराईल की सन्तान ईमान लाई। अब मैं आज्ञाकारी हूँ।” (90)
    “क्या अब? हालाँकि इससे पहले तुने अवज्ञा की और बिगाड़ पैदा करनेवालों में से था (91)
    “अतः आज हम तेरे शरीर को बचा लेगें, ताकि तू अपने बादवालों के लिए एक निशानी हो जाए। निश्चय ही, बहुत-से लोग हमारी निशानियों के प्रति असावधान ही रहते है।” (92)
    Quran Surah Yunus [10:90-92]
    http://www.quranandscience.com/index.php/quran-science/historical/333-the-preservation-of-pharaoh-s-body
    http://www.arabnews.com/news/443500
    http://en.wikipedia.org/wiki/Maurice_Bucaille

    डॉ मौरिस बुकाय फ्रांस के सबसे बड़े डाक्टर थे, और उनका धर्म ईसाई था ॥
    1898 मे जब मिस्र मे लाल सागर के पास एक कब्रगाह मे एक अति प्राचीन मानव शरीर मिला जो आश्चर्यजनक रूप से हज़ारों साल गुजर जाने के बाद भी सुरक्षित था, सभी को इस मृत शरीर का रहस्य जानने की उत्सुकता रहती थी इसीलिए इस शरीर को 1981 मे चिकित्सकीय खोज के लिए फ्रांस मंगवाया गया और इस शरीर पर डाक्टर मौरिस ने परीक्षण किए
    परीक्षणों से डाक्टर मौरिस ने निष्कर्ष निकाले कि जिस व्यक्ति की ये मृत देह है उसकी मौत समुद्र मे डूबने के कारण हुई थी क्योंकि डाक्टर मौरिस को उस मृत शरीर मे समुद्री नमक का कुछ भाग मिला था, साथ ही ये भी पता चला कि इस व्यक्ति को डूबने के कुछ ही समय बाद पानी से बाहर निकाल लिया गया था …. लेकिन ये बात डाक्टर मौरिस के समक्ष अब भी एक पहेली थी कि आखिर ये शरीर अपनी मौत के हजारो साल बाद भी सड़ गल कर नष्ट क्यों नहीं हुआ ….
    तभी उन्हें अपने एक सहकर्मी से पता चला कि मुस्लिम लोग बिना जांच रिपोर्ट के सामने आए ही ये कह रहे हैं कि ये व्यक्ति समुद्र मे डूब कर मरा था, और ये मृत देह उस फिरऔन की है जिसने अल्लाह के नबी हजरत मूसा अ.स. और उनके अनुयायियों का कत्ले आम कराना चाहा था, क्योंकि फिरऔन की लाश के सदा सुरक्षित रहने और उसके समुद्र मे डूब कर मरने की बात उनकी पवित्र पुस्तक कुरान मे लिखी है जिसपर वो विश्वास करते हैं
    मौरिस को ये सोचकर बहुत हैरत हुई कि इस मृत देह के समुद्र मे डूब कर मरने की जिस बात का पता मैंने बड़ी बड़ी अत्याधुनिक मशीनों की सहायता से लगाया।वो बात मुस्लिमों को पहले से कैसे मालूम चल गई ? और जबकि इस लाश के अपनी मृत्यु के हजारों साल बाद भी नष्ट न होने का पता 1981से महज़ 83 साल पहले चला है, तो उनकी कुरान मे ये बात 1400 साल पहले कैसे लिख ली गई ??
    इस शरीर की मौत के हजारों साल बाद भी इस शरीर के बचे रह जाने का कोई वैज्ञानिक कारण डाक्टर मौरिस या अन्य वैज्ञानिक जब पता न लगा सके तो इसे ईश्वर के चमत्कार के अतिरिक्त और क्या माना जा सकता था ??
    बाइबल के आधार पर भी मृत देह के मिलने की लोकेशन और चिकित्सकीय परीक्षण के आधार पर उस मृत शरीर की लगभग 3000 वर्ष की उम्र होने के कारण मौरिस को ये विश्वास तो हो रहा था कि ये शरीर फिरऔन का ही है, अत: डाक्टर ने फिरऔन के विषय मे अधिक जानने के लिए तौरात शरीफ (बाइबल : ओल्ड टेस्टामेण्ट) का अध्ययन करने का निर्णय किया, इस आयत का डाक्टर मौरिस बुकाय पर कुछ ऐसा असर पड़ा कि उसी वक्त खड़े होकर उन्होने ये ऐलान कर दिया कि- “मैने आज से इस्लाम कुबूल कर लिया, और इस पवित्र कुरान पर विश्वास कर लिया ”
    इसके बाद अपने वतन फ्रान्स वापस जाकर कई साल तक डाक्टर मौरिस कुरान और साइंस पर रिसर्च करते रहे, और फिर उसके बाद कुरआन के साइंसी चमत्कारों के विषय मे ऐसी ऐसी किताबें लिखी जिन्होंने दुनियाभर मे धूम मचा दी थी

  32. अपने आप को एक मुसलमान होने पर गर्व कीजिये.
    बहुत सारे गैर मुस्लिम भाइयो के मुंह से सुनता हु की…ये दिन भर में 5 बार जोर जोर लाऊड स्पीकर में अल्लाह हु अकबर अल्लाह हु अकबर क्यों चिल्लाते हो,क्या अल्लाह को सुनाई नही देता?
    नौजबिल्लाह,अस्तग़फिरुल्लाह…अल्लाह इनकी कमअक्ली के लिए माफ़ करे और हमे भी माफ़ करे क्योंकि हमने ही इन्हें सच बताने की जहमत नही की।
    मेरे प्यारे हिन्दू भाइयो,अज़ान अल्लाह के लिए नही बल्कि अल्लाह के बन्दों के लिए होती है,ताकि बन्दे अज़ान की पुकार सुन के मस्जिदों में आकर नमाज पढ़ सके।
    अल्लाह सुब्हान व तआला तो वो भी जानता है जो तुम्हारे दिलो में है।और रही बात लाऊड स्पीकर की…तो भाइयो पुराने ज़माने में जब लाऊड स्पीकर नही था तो अज़ान ऐसे ही बिना लाऊड स्पीकर से दी जाती थी तो दूर दूर तक अजान की आवाज पहुँच जाती थी कयुकी उस ज़माने में ट्रैफिक की इतनी शोर गुल नही थी,आज अगर बिना लाऊड स्पीकर के अज़ान दी जाये तो अज़ान की आवाज मस्जिद के बाहर भी सुनाई नही देगी…….।
    उम्मीद है आप समझ गए होंगे।
    अब मेरे मुस्लमान भाइयो से दरख्वास्त है की वो ईस पोस्ट को चाहे कॉपी करके,शेयर करके ज्यादा से जयाद हिन्दू भाइयो तक पंहुचा दे ताकि वो इस बड़ी गलतफहमी से निकल सके…..ये हमारी जिम्मेदारी है।
    आपका अपना Tiger Khan /अफज़ल खान
    लाइक &शेयर अपने आप को एक मुसलमान होने पर गर्व कीजिये.
    अपने आप को एक मुसलमान होने पर गर्व कीजिये

  33. कुछ लोग बेकार का एक भ्रम फैलाते रहते हैं कि भारत पर जब मुस्लिमों का शासन था, तो उन्होंने गैर मुस्लिम जनता को बड़े कष्ट दिए, उन की धर्म और संस्क्रति को नष्ट किया, निर्दोष लोगों के कत्ल किए, स्त्रियों की मर्यादा भंग की और भी जाने क्या क्या…..
    लेकिन सच्चाई इसके उलट है ॥ …… एक उदाहरण से समझाता हूँ ॥

    1857 की क्रांति मे एक बात स्पष्ट रूप से सामने आती है कि ये क्रांति भारत की किसान, मजदूर पेशा और आम जनता के अंग्रेजो के प्रति असंतोष से जन्मी , ये जनता अधिकांश हिन्दू थीलेकिन इस हिन्दू जनता के सामने जब स्वतंत्रता संग्राम मे अपना नेता चुनने का प्रश्न आया तो इस जनता ने किसी हिंदू नायक को नही चुना बल्कि मुगल बादशाह को ही अपना नायक बनने के लिए मनाया । इसका सीधा सा अर्थ निकलता है कि वो हिन्दू जनता ब्रिटिश सरकार को हटाकर उसके स्थान पर अपने शासक के रूप मे मुगल राजा को पसंद करती थी

    अगर इस हिन्दू जनता ने मुगलो को हिन्दुओं पर अत्याचार करते देखा होता, या अपने दादा परदादा के मुंह से मुगलो के अत्याचार की कहानी सुनी होती तो ये जनता मुगल बादशाह की बजाय किसी हिन्दू को ही अपना नायक बनाती ।
    अवध के नवाब वाजिद अली शाह से तो उनकी जनता इतना प्यार करती थी, कि जब अंग्रेजो ने नवाब को अपदस्थ कर के कलकत्ता भेजा तो अवध की बहुत सारी हिन्दू मुसलमान जनता कानपुर तक रोते रोते उनके पीछे गई थी1857 की क्रांति मे शामिल अन्य नायको यथा मराठा सरदार नाना साहब और रुहेला सरदार खान बहादुर ने भी मुगल बादशाह को अपना नायक मानते हुए अंग्रेजो से युद्ध लड़े थे

    तो ये मुसलमान शासक जनता पर जुल्म नही करते थे बल्कि जनता के हमदर्द थे, और जनता की हमदर्दी मे इन्होंने अंग्रेजो से लोहा भी लिया था । अब जरा ये भी देख लेते हैं कि अपनी जनता से हमदर्दी और वतन से मुहब्बत का उन मुस्लिम शासकों को क्या ईनाम मिला है

    1857 की क्रांति मे अंग्रेजो के खिलाफ कई मुस्लिम राजाओ और नवाबो ने भारत की जनता के अनुरोध पर बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था, जबकि इसके बरअक्स कई बड़े गैर मुस्लिम शासकों जैसे ग्वालियर, पटियाला और जिन्द आदि के शासकों ने इस क्रांति को कुचलने मे अंग्रेजो का साथ दिया और अपने ही देशवासियो पर गोलियाँ चलवाई थीं

    इससे खुश होकर अंग्रेजो ने गैर मुस्लिम शासकों को बड़ा ईनाम इकराम और ओहदे दिए ….. जबकि मुस्लिम शासकों से सज़ा के तौर पर उनकी सारी जायदाद छीन कर उन को कत्ल कर के उन को दर ब दर कर दिया …….

    आज वतन परस्त बादशाह बहादुर शाह जफर का वन्शज कोलकाता मे चाय बेच करतो रुहेला सरदार खान बहादुर का वन्शज बरेली मे साएकिल के पन्चर जोड़ कर अपना पेट पाल रहा है और अवध नवाब के वन्शज दिल्ली के एक खण्डहर मे सदमाग्रस्त जीवन काट रहे हैं
    जबकि अंग्रेजो की जी हुजूरी करने वालो, और अपने ही वतन की गरीब जनता पर गोलियाँ चलवाने वालों मे से अधिकांश के वन्शज आज भी राजा कहलाते है, ठाठ बाठ की जिन्दगी बिता रहे हैं ।

  34. भारत मे गौ हत्या का कारण :—–

    1 >>> मुस्लिमो द्वारा गयो मॉस खाना ! जो कि सही नही है, क्यूकी भारत मे मुस्लिम भैस का मॉस खाते है. दुनिया मे सब से ज्यादा गायो का मॉस अमेरिकन. यूरोपियन लोग खाते है. क्यूकी वहा भैस नही होती और उनका मुख्य भोजन गायो का मास है.

    2 >>> भारत मे मॉस का निर्यात होता है. जो की गौ हत्या का मुख्य कारण है.

    3 >>> गाये के चमड़े से कई वस्तुए बनती है, इस कारण भी गौ हत्या होती है. और इस चमड़े और हड्डियों के व्यापार मे अधिकतर गैर मुस्लिम लोग है.4 >>> पर गौ हत्या के लिए केवल मुस्लिमो को ही दोष दिया जाता है. क्यूकी कुछ राजनेता लोगो मे नफरत फ़ैलाने के लिए और वोट बैंक के लिए लोगो को आपस मे लड़वाते है.

    गौ हत्या रोकने के उपाए ( निवारण ) …………

    1 >>> भारत मे 99% गाये गैर मुस्लिम लोग पालते है. यह लोग जब गाये बूढी हो जाती है दूध देना बंद कर देती है तो गायो को मॉस कारोबारियों को बेच देते है. इनको ऐसा नही करना चाहिए अगर यह गैर मुस्लिम लोग गायो को कसाइयो, मॉस कारोबारियों को ना बेचे तो गौ हत्या 100% बंद हो जाएगी.2 >>> भारत इस समय एशिया का सबसे बड़ा मॉस निर्यातक देश हो रहा है, सरकार को मॉस निर्यात बंद कर देना चाहिए. इस उपाए से गौ हत्या 100% बंद हो जाएगी.

    3 >>> सरकार को गौ हत्या करने वाले को ही नही बल्कि गायो को कसाइयो, मॉस कारोबारियों को बेचने वालो को दुगनी सजा देनी चाहिए. क्योकि पैसो के लालच मे गैर मुस्लिम लोग गायो को कसाइयो, मॉस कारोबारियों को बेच देते है. और पैसो के लालच मे मुस्लिम और गैर मुस्लिम लोग गायो को मारकर उनके मॉस, हड्डियों, चमड़े का व्यापार करते है. निर्यात करते है. 4 >>> केवल उस गाए को ही मॉस कारोबारियो को बेचा जाता है, जो बूढी हो जाती है, दूध देना बंद कर देती है। और बैलो तथा बछड़ो को मॉस कारोबारियो को बेचा जाता है। गो पालने वाले हिन्दू भाइयो को ऐसा नही करना चाहिए। जब तक गाए दूध देती है तब तक तो वो माता होती है पर दूध देना बंद करते ही वो बोझ बन जाती है, गो पालने वाले हिन्दू भाइयो को ऐसा नही करना चाहिए। और गौ माता की सेवा करनी चाहिए।

    5 >>> हर मुस्लिम गौ रक्षा के लिए हिन्दू भाइयो के साथ है, आप गौ हत्या करने वाले को फासी दो लेकिन गौ माता को चंद पैसो की खातिर कसाइयो, मॉस कारोबारियों को बेचने वालो को भी फासी दो, चाहे वो हिन्दू हो या मुस्लिम

  35. प्रश्न : इस्लाम को शान्ति का धर्म कैसे कहा जा सकता है, जबकि यह तलवार से फैला है?

    उत्तर : कुछ गै़र-मुस्लिम भाइयों की यह आम शिकायत है कि संसार भर में इस्लाम के मानने वालों की संख्या लाखों में भी नहीं होती यदि इस धर्म को बलपूर्वक नहीं फैलाया गया होता। निम्न बिन्दु इस तथ्य को स्पष्ट कर देंगे कि इस्लाम की सत्यता, दर्शन और तर्क ही है जिसके कारण वह पूरे विश्व में तीव्र गति से फैला, न कि तलवार से।

    1. इस्लाम का अर्थ शान्ति है
    इस्लाम मूल शब्द ‘सलाम’ से निकला है जिसका अर्थ है ‘शान्ति’। इसका दूसरा अर्थ है अपनी इच्छाओं को अपने पालनहार ख़ुदा के हवाले कर देना। अतः इस्लाम शान्ति का धर्म है जो सर्वोच्च स्रष्टा अल्लाह के सामने अपनी इच्छाओं को हवाले करने से प्राप्त होती है।2. शान्ति को स्थापित करने के लिए कभी-कभी बल-प्रयोग किया जाता है
    इस संसार का हर इंसान शान्ति एवं सद्भाव के पक्ष में नहीं है। बहुत से इंसान अपने तुच्छ स्वार्थों के लिए शान्ति को भंग करने का प्रयास करते हैं। शान्ति बनाए रखने के लिए कभी-कभी बल-प्रयोग किया जाता है। इसी कारण हम पुलिस रखते हैं जो अपराधियों और असामाजिक तत्वों के विरुद्ध बल का प्रयोग करती है ताकि समाज में शान्ति स्थापित हो सके। इस्लाम शान्ति को बढ़ावा देता है और साथ ही जहाँ कहीं भी अत्याचार और जु़ल्म होते हैं, वह अपने अनुयायियों को इसके विरुद्ध संघर्ष हेतु प्रोत्साहित करता है। अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष में कभी-कभी बल-प्रयोग आवश्यक हो जाता है। इस्लाम में बल का प्रयोग केवल शान्ति और न्याय की स्थापना के लिए ही प्रयोग किया जा सकता है। धर्म-परिवर्तन के लिए तो बल का प्रयोग इस्लाम में निषिद्ध है और कई-कई सदियों के मुस्लिम-शासन का इतिहास कुछ संभावित नगण्य अपवादों (Exceptions) को छोड़कर, बलपूर्वक धर्म-परिवर्तन कराने से ख़ाली है।3. इतिहासकार डीलेसी ओ-लेरी (Delacy O’Leary) के विचार
    इस्लाम तलवार से फैला इस ग़लत विचार का सबसे अच्छा उत्तर प्रसिद्ध इतिहासकार डीलेसी ओ-लेरी के द्वारा दिया गया जिसका वर्णन उन्होंने अपनी पुस्तक ‘इस्लाम ऐट दी क्रोस रोड’ (Islam at the cross road) में किया है—
    ‘‘यह कहना कि कुछ जुनूनी मुसलमानों ने विश्व में फैलकर तलवार द्वारा पराजित क़ौम को मुसलमान बनाया, इतिहास इसे स्पष्ट कर देता है कि यह कोरी बकवास है और उन काल्पनिक कथाओं में से है जिसे इतिहासकारों ने कभी दोहराया है।’’(पृष्ठ-8)4. मुसलमानों ने स्पेन पर 800 वर्ष शासन किया
    मुसलमानों ने स्पेन पर लगभग 800 वर्ष शासन किया और वहाँ उन्होंने कभी किसी को इस्लाम स्वीकार करने के लिए मज़बूर नहीं किया। बाद में ईसाई धार्मिक योद्धा स्पेन आए और उन्होंने मुसलमानों का सफाया कर दिया (सिर्फ़ उन्हें जीवित रहने दिया जो बलपूर्वक ईसाई बनाए जाने पर राज़ी हो गए, यद्यपि ऐसे विधर्मी कम ही हुए।

    5. एक करोड़ चालीस लाख अरब आबादी नसली ईसाई (Coptic Christian) हैं
    अरब में कुछ वर्षों तक ब्रिटिश राज्य रहा और कुछ वर्षों तक फ्रांसीसियों ने शासन किया। बाक़ी लगभग 1300 वर्ष तक मुसलमानों ने शासन किया। आज भी वहाँ एक करोड़ चालीस लाख अरब नसली ईसाई हैं। यदि मुसलमानों ने तलवार का प्रयोग किया होता तो वहाँ एक भी अरब मूल का ईसाई बाक़ी नहीं रहता।6. भारत में 80 प्रतिशत से अधिक गै़र-मुस्लिम
    मुसलमानों ने भारत पर लगभग 1000 वर्ष शासन किया। यदि वे चाहते तो भारत के एक-एक ग़ैर-मुस्लिम को इस्लाम स्वीकार करने पर मज़बूर कर देते क्योंकि इसके लिए उनके पास शक्ति थी। आज 80 प्रतिशत ग़ैर-मुस्लिम भारत में हैं जो इस तथ्य के गवाह हैं कि इस्लाम तलवार से नहीं फैलाया गया।

    7. इन्डोनेशिया और मलेशिया
    इन्डोनेशिया (Indonesia) एक ऐसा देश है जहाँ संसार में सबसे अधिक मुसलमान हैं। मलेशिया (Malaysia) में मुसलमान बहुसंख्यक हैं। यहाँ प्रश्न उठता है कि आखि़र कौन-सी मुसलमान सेना इन्डोनेशिया और मलेशिया र्गईं। इन दोनों देशों में, मध्यवर्तीकाल में मुस्लिम-शासन रहा ही नहीं।8. अफ्ऱीक़ा का पूर्वी तट
    इसी प्रकार इस्लाम तीव्र गति से अफ्रीक़ा के पूर्वी तट पर फैला। फिर कोई यह प्रश्न कर सकता है कि यदि इस्लाम तलवार से फैला तो कौन-सी मुस्लिम सेना अफ्रीक़ा के पूर्वी तट की ओर गई थी?

    9. थॉमस कारलायल
    प्रसिद्ध इतिहासकार ‘थॉमस कारलायल’ (Thomas Carlyle) ने अपनी पुस्तक Heroes and Hero Worship (हीरोज़ एंड हीरो वरशिप) में इस्लाम के प्रसार से संबंधित ग़लत विचार की तरफ़ संकेत करते हुए कहा है—
    ‘‘तलवार!! और ऐसी तलवार तुम कहाँ पाओगे? 3. अमेरिका और यूरोप में इस्लाम सबसे अधिक फैल रहा है
    आज अमेरिका में तीव्र गति से फैलने वाला धर्म इस्लाम है और यूरोप में भी यही धर्म सबसे तेज़ी से फैल रहा है। कौन-सी तलवार पश्चिम को इतनी बड़ी संख्या में इस्लाम स्वीकार करने पर मज़बूर कर रही है?वास्तविकता यह है कि हर नया विचार अपनी प्रारम्भिक स्थिति में सिर्फ़ एक की अल्पसंख्या में होता है अर्थात् केवल एक व्यक्ति के मस्तिष्क में। जहाँ यह अब तक है। पूरे संसार का मात्र एक व्यक्ति इस विचार पर विश्वास करता है अर्थात् केवल एक मनुष्य सारे मनुष्यों के मुक़ाबले में होता है। वह व्यक्ति तलवार लेता है और उसके साथ प्रचार करने का प्रयास करता है, यह उसके लिए कुछ भी प्रभावशाली साबित नहीं होगा। सारे लोगों के विरुद्ध आप अपनी तलवार उठाकर देख लीजिए। कोई वस्तु स्वयं फैलती है जितनी वह फैलने की क्षमता रखती है।’’

    10. ‘धर्म में कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं’
    किस तलवार से इस्लाम फैला? यदि यह तलवार मुसलमान के पास होती तब भी वे इसका प्रयोग इस्लाम के प्रचार के लिए नहीं कर सकते थे। क्योंकि पवित्र क़ुरआन में कहा गया है—
    ‘‘धर्म में कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं है, सत्य, असत्य से साफ़ भिन्न करके प्रस्तुत हो चुका है।’’ (क़ुरआन, 2:256)11. बुद्धि की ‘‘तलवार’’
    यह बुद्धि और मस्तिष्क की तलवार है। यह वह तलवार है जो हृदयों और मस्तिष्कों पर विजय प्राप्त करती है। पवित्र क़ुरआन में है—
    ‘‘लोगों को अल्लाह के मार्ग की तरफ़ बुलाओ, बुद्धिमत्ता और सदुपदेश के साथ, और उनसे वाद-विवाद करो उस तरीके़ से जो सबसे अच्छा और निर्मल हो।’’
    (क़ुरआन, 16:125)

    12. 1934 से 1984 ई॰ तक में संसार के धर्मों में वृद्धि
    रीडर्स डाइजेस्ट के एक लेख अलमेनेक, वार्षिक पुस्तक 1986 ई॰ में संसार के सभी बड़े धर्मों में लगभग पचास वर्षों 1934 से 1984 ई॰ की अवधि में हुई प्रतिशत वृद्धि का आंकलन किया गया था। यह लेख ‘प्लेन ट्रुथ’(Plain Truth) नाम की पत्रिका में भी प्रकाशित हुआ था जिसमें इस्लाम को सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया गया जिसकी वृद्धि 235 प्रतिशत थी और ईसाइयत में मात्र 47 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। यहाँ प्रश्न उठता है कि इस सदी में कौन-सा युद्ध हुआ जिसने, या कौन-कौन से क्रूर मुस्लिम शासक थे जिन्होंने लाखों लोगों का धर्म परिवर्तन करके उन्हें ज़बरदस्ती इस्लाम में दाखि़ल किया।3. अमेरिका और यूरोप में इस्लाम सबसे अधिक फैल रहा है
    आज अमेरिका में तीव्र गति से फैलने वाला धर्म इस्लाम है और यूरोप में भी यही धर्म सबसे तेज़ी से फैल रहा है। कौन-सी तलवार पश्चिम को इतनी बड़ी संख्या में इस्लाम स्वीकार करने पर मज़बूर कर रही है?

  36. इस्लामी धर्मग्रंथों की वे अवधारणाएं जिनकी सबसे ज्यादा गलत व्याख्या की गई.

    किसी भी विचार की व्याख्या देश-काल और परिस्थिति के तहत भिन्न-भिन्न तरीकों से की जा सकती है. धर्म से जुड़े प्रावधानों की व्याख्या तो शायद अनगिनत तरीकों से मनुष्य ने अपने आरंभिक काल से ही की है.

    इस्लामी धर्मग्रंथों में कुछ ऐसी अवधारणाएं हैं जिनकी गलत व्याख्याओं ने इस्लाम के मूल स्वरूप को विकृत किया है. गैरमुसलमानों ने यह काम अपने निहित स्वार्थों को सिद्ध करने के लिए किया तो कुछ मुसलमानों ने अपने गलत कामों को सही ठहराने के लिए इनका सहारा लिया. परिणामस्वरूप इस्लाम को एक हिंसक और कट्टर धर्म के रूप में जाना जाने लगा. इन गलत व्याख्याओं पर विचार करने से पहले इस्लाम शब्द की उत्पत्ति पर एक नजर डालते हैं.इस्लाम शब्द अरबी भाषा के ‘स’ ‘ल’ ‘म’ धातु से बना है और जिसका अकेला और सीधा अर्थ है शांति. ‘स’ ‘ल’ ‘म’ धातु से जिन अन्य शब्दों का निर्माण हुआ है वे हैं इस्लाम, मुस्लिम, सलाम और इसी तरह के और कई शब्द. इस्लाम वह धर्म, वह पद्धति है जो शांति सिखाए, जो तस्लीम (समर्पित) होना सिखाए. शांति के धर्म को मानने वाला यानी मुसलमान. मुसलमान जब भी आपसे मिलेगा तो कहेगा सलामुनअलैकुम यानी ईश्वर आपको शांति प्रदान करे. तो इस्लाम के बारे में एक कुप्रचार तो यहीं खत्म हो जाता है कि इस्लाम तलवार का धर्म है, खूनरेजी है. क्या कोई धर्म जो इस तरह से शांति और सुलह की वकालत करे वह खूनरेजी को जायज ठहरा सकता है? तार्किक तौर पर तो यह परस्परिक विरोधी ही प्रतीत होता है.समस्त धर्मों का मूल एक ही है, यह हर धर्म मानता है. सब धर्म उस मूल की ही आराधना करते हैं. मुसलमान उस मूल स्रोत को अल्लाह या रब्बेल आलमीन के नाम से पूजते हैं. रब्बेल आलमीन के मानी हैं समस्त ब्रह्मांडों और लोकों का स्वामी.

    जब भी इस्लाम की मान्यताओं पर सवाल उठाए जाते हैं तो उनके केंद्र में दो चीजें हुआ करती हैं. एक है जेहाद और दूसरा काफिर, जिनकी गलत व्याख्याओं के परिणामस्वरूप इस्लाम को एक ऐसे धर्म के रूप में चित्रित किया जाता है जो अन्य धर्मों के प्रति सहिष्णु न हो. कुरान पर एक निगाह डालने पर हम यह पाते हैं कि जेहाद का मूल विचार इसके प्रचलित स्वरूप से बहुत भिन्न है. जेहाद: अरबी भाषा का शब्द जेहाद ‘जुह्द’ धातु से बना है जिसका अकेला अर्थ ‘संघर्ष करना’ है. इस धातु से जो शब्द बने हैं वे हैं जेहाद यानी संघर्ष और मुजाहिद यानी संघर्ष करने वाला. माना कि किसी व्यक्ति को तंबाकू, पान मसाला या शराब पीने की आदत है तो उसे समझाने वाला व्यक्ति मुजाहिद यानी संघर्ष करने वाला हुआ. कोई बच्चा यदि कुत्ते, बिल्ली या किसी अन्य प्राणी को अकारण ही मार रहा है और कोई आकर उसे ऐसा करने से रोकता है तो उस व्यक्ति का यह कार्य जेहाद हुआ.दुर्भाग्यवश मीडिया एवं पश्चिमी देशों के इतिहासकारों की अनभिज्ञता या शायद अपने निहित स्वार्थों के तहत जेहाद का अर्थ धर्मयुद्ध बताया गया है. कुरान में युद्ध शुरू करना या युद्ध भड़काना – धर्म नहीं, बल्कि अधर्म है. इसलिए कोई भी युद्ध यदि शुरू किया जाए तो वह धर्मयुद्ध नहीं बल्कि अधार्मिक कार्य है. लेकिन क्या कुरान में युद्ध करने की संपूर्ण मनाही है? ऐसा नहीं है.

    कुरान मात्र इन संदर्भों में ही युद्ध की इजाज़त देता है :
    1. जब मनुष्यों पर अत्याचार हो रहे हों
    2. न्याय के लिए
    3. आत्मरक्षा के लिए
    4. जब शत्रु की ओर से शांति समझौता भंग कर दिया जाएउदाहरणार्थ कुरान के अध्याय 4, आयत 74-75 में उद्धृत है- …क्यों नहीं तुम युद्ध करते जब असहाय पुरुष, महिलाएं और बच्चे ईश्वर से याचना करते हुए कह रहे हों ‘ हे ईश्वर, हमें समाज के अत्याचारियों से निजात दिला. हे ईश्वर, तू ही हमारा स्वामी है.’

    कुरान की इस आयत पर ध्यान देने पर पता चलता है कि अत्याचार चाहे किसी पर भी हो रहा हो, चाहे वे किसी भी धर्म एवं संप्रदाय के हों, यह बात बिल्कुल भी मायने नहीं रखती, बस इंसान होना काफी है. चाहे वे दलित हों या गरीब, असहाय, कमजोर, पुरुष, महिलाएं या बच्चे. वे हिंदू हों, मुसलमान हों, सिख हों, ईसाई हों या यहूदी या बौद्ध. वह बोस्निया का मुसलमान हो या अमेरिका की ढहती हुई इमारत का ईसाई. हिटलर के जहरीले गैस कक्ष में यहूदी हो या कश्मीर का निर्दोष हिंदू या मुसलमान. गुजरात में आठ महीने की गर्भवती मुस्लिम मां हो जिसके अजन्मे बच्चे को आग में भूना जा रहा हो या साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 और एस-7 डिब्बे में कोई हिंदू बिटिया या बेटा. दंगों में जलता हुआ एक सिख बूढ़ा या उड़ीसा में जीप के अंदर जलता हुआ मसीही पादरी क्यों न हो – इनका आर्तनाद सुनकर इनके न्याय के लिए पवित्र कुरान संघर्ष करने की इजाजत देती है. लेकिन युद्ध मात्र आततायी से, किसी अन्य से नहीं. कुरान के अध्याय 2, आयत 190 में कहा गया है :
    तुम सिर्फ ईश्वर की राह पर युद्ध कर सकते हो और सिर्फ उनके खिलाफ जिन्होंने तुम पर आक्रमण किया हो लेकिन मानवीय सीमाओं के भीतर. ईश्वर आततायियों को अप्रिय मानता है.

  37. इस आयत से स्पष्ट है कि युद्ध सिर्फ उनसे किया जाए जिन्होंने तुम पर आक्रमण किया है. उदाहरण के लिए, यदि ‘अ’ ने तुम पर आक्रमण किया है तो ‘अ’ से ही युद्ध किया जाए, न कि उसकी पत्नी, बेटी, बेटा या माता-पिता से. युद्ध सिर्फ़ आक्रमणकारी से.

    जिहाद के ही संदर्भ में कुरान की कुछ आयतें जो कि दुष्प्रचार का माध्यम बनी हैं उनमें कुरान के नौवें अध्याय ‘तौबा’ की 5वीं आयत है जिसे बगैर किसी संदर्भ के प्रस्तुत किया जाता है.

    यह आयत है: जब हराम (वर्जित) महीने बीत जाएं तो मुशरिकों (एक ईश्वर की सत्ता में अन्य को हिस्सेदार बताने वाला) के साथ युद्ध करो, उन्हें पकड़ो, घेरो और उनका वध करो.कुरान में युद्ध शुरू करना या युद्ध भड़काना – धर्म नहीं, बल्कि अधर्म है. इसलिए कोई भी युद्ध यदि शुरू किया जाए तो वह धर्मयुद्ध नहीं बल्कि अधार्मिक कार्य है

    इस आयत को पढ़कर तो सचमुच ऐसा आभास होता है कि कुरान मुसलमानों को युद्ध के लिए उकसाती है. इस आयत पर टिप्पणी करने से पहले यदि कहा जाए कि हिंदुओं के सर्वमान्य ग्रंथ गीता में श्रीकृष्ण अर्जुन को अपने ही गुरुओं, सगे संबंधियों और चचेरे भाइयों का वध करने के लिए प्रेरित करते हैं, तो क्या हमारे मन में इस तरह की शंका नहीं उठेगी कि भगवान का यह वचन जायज नहीं है क्योंकि यह श्लोक हिंसा को प्रोत्साहित करता हुआ प्रतीत होता है. बिना संदर्भों के किसी विचार को बढ़ावा देने वाला अर्ध सत्य किसी भी बड़े झूठ से खतरनाक होता है.इस आयत को उसके संपूर्ण संदर्भ में समझने से पहले हमें इसी अध्याय की चौथी आयत को समझना होगा.

    अध्याय 9 की चौथी आयत उस संदर्भ में कही गई है जब मुस्लिमों के साथ गैरमुस्लिमों का शांति समझौता था. लेकिन गैर मुस्लिमों ने वह समझौता तोड़ दिया और मुस्लिमों के विरुद्ध युद्ध घोषित कर दिया.

    अध्याय 9 आयत 4:
    इल्लालज़ीना आहत्तुम मिनल मुशरिकीन सुम्मा लम यन क़ुसूकुम शैयं व लम यु ज़ाहिरू अलैकुम अहदन् फअतिमू इलैहिम आ़हदाहुम इला मुद्दतिहिम पददं संसीं यु हिब्बुल मुत्तक़ीन.
    इस आयत में पैगंबर को सख्त हिदायत दी गई है कि उन मुशरिकों के साथ शांति से रहना जो तुम्हारे साथ शांति से रहते हैं. और अपने बचाव के लिए उन्हीं के साथ युद्ध करना जिन्होंने तुम्हारे साथ शांति समझौता तोड़ दिया है और अब युद्ध पर आमादा हैं. फिर भी 5वीं आयत में कुछ संयम बरतने के लिए इशारा है, जब वह युद्ध का जवाब वर्जित महीनों के बीत जाने के बाद ही देने की बात करती है. हो सकता है इस दौरान युद्ध पर आमादा शत्रु शायद सदबुद्धि प्राप्त कर लें और शांति फिर से स्थापित हो जाए. लेकिन यदि वह तुम पर फिर भी आक्रमण करे तो तुम अपने बचाव में उस आक्रमण का प्रत्युत्तर दो. यह तो हर धर्म में कहा गया है कि आक्रमणकारी, आततायी के आगे हथियार डाल देना कायरता की निशानी है.श्रीकृष्ण जब अर्जुन को युद्ध पर आमादा कौरवों की सेना दिखाते हैं तो अर्जुन करुणा से वशीभूत होकर हथियार डालने की बात कहता है. जिस पर श्रीकृष्ण उन्हें उपदेश देते हैं कि हे अर्जुन, आततायियों के आगे, आक्रमणकारियों के समक्ष घुटने टेक देने पर इस लोक में तुम्हे अपयश और पाप लगेगा एवं तुम्हें मोक्ष नहीं मिलेगा. (गीता: अध्याय 2 श्लोक 33-34)

    अर्जुन को युद्ध के लिए प्रेरित करने के अनेकों श्लोक गीता में. यदि महाभारत युद्ध के दौरान भी कौरव दल पांडवों के अधिकार उन्हें लौटा देते और शांति स्थापित कर लेते एवं पश्चाताप कर लेते तब कृष्ण अर्जुन को शांति का ही मार्ग चुनने के लिए कहते. कुरान की आयत 5 अध्याय 9 में भी यही कहा गया है कि यदि वे तौबा कर लें, ईश्वर भक्ति करें, दान (जकात) दें तो उनका मार्ग छोड़ दें यानी युद्ध न करें.इस्लाम की एक और संकल्पना जिसे संदर्भहीन तरीके से व्यक्त किया जाता है वह है काफिर. इस शब्द के बारे में इतना कुप्रचार हुआ कि यकायक काफिर और गैरमुस्लिम समानार्थी लगने लगे हैं. काफिर शब्द का मूल अर्थ समझने से पहले इसका शाब्दिक अर्थ समझना जरूरी है.

    काफिर: यह ‘शब्द अरबी के ‘क’ ‘फ’ ‘र’ शब्दों से बना है जिसका सीधे-सीधे अर्थ है, ‘सत्य को छिपाना’. उदाहरणार्थ, यदि मैं अपने हाथ में एक सिक्का लूं और मुट्ठी बंद कर लूं और कहूं कि सिक्का नहीं है तो उस समय मैं सिक्के की सत्यता को छिपाने के लिए ‘काफिर’ हुआ.

    एक उदाहरण कुरान से- ईश्वर के समक्ष मनुष्यों के लिए सबसे अच्छा पेशा किसानी यानी खेतीबाड़ी का है और एक सच्चा किसान उसे बहुत प्यारा है. कुरान में ईश्वर ने कहा कि किसान बीज को धरती में छुपा देता है तो इस संदर्भ में ईश्वर ने किसान को काफिर कहा . क्या ईश्वर अपने ‘प्रिय’ किसान को ‘काफिर’ कहकर दुत्कारेगा! नहीं. किसान ने बीज को धरती में छिपाया इसलिए वह बीज की सत्यता को छिपाने के कारण काफिर कहा गया. इस तरह काफिर का सीधा-सीधा अर्थ हुआ ‘सत्य को छिपाने वाला’ या असत्य को सत्य कहने वाला .

    यह हर हिंदू तथा हिंदू धर्म के जिज्ञासु को अच्छी तरह से मालूम है कि पांडव सत्य के साथ थे और कौरव असत्य के. श्रीकृष्ण सारथी के रूप में सत्य के योद्धा अर्जुन को महाभारत युद्ध में उपदेश देते हैं कि अपने तयेरे (ताऊ का लड़का) भाई दुर्योधन की सेना जो कि असत्य मार्ग पर है उसे नष्ट कर दो. असत्य को सत्य बतलाने वाले यानी ‘काफिर’ – कौरव और उनका साथ देने वाले तुम्हारे दुश्मन हैं.तो कुरान में यदि यह आयत है कि निस्संदेह ‘काफिर’(सत्य को असत्य घोषित करने वाले) तुम्हारे खुले दुश्मन हैं तो यह बुरी बात कैसे है !

    इस्लाम पर एक और लांछन यह लगाया जाता है कि वह दूसरे धर्मों के प्रति सहिष्णु नहीं है. जबकि यह वही धर्म है जो अन्य सभी धर्मों के प्रति समभाव रखने की हिदायत देता है.

    क्या इस्लाम अन्य धर्मों के प्रति असहिष्णु है: कुरान के दूसरे अध्याय की 213वीं आयत कहती है कि ईश्वर ने हर समाज और कौम को पैगंबर व ईश्वरीय किताब दी है. कुरान ईसाइयों और यहूदियों को ‘ अहले किताब’ का खिताब देती है. यानी वे धर्म जिनकी ईश्वरीय किताब है.कुरान के 60 वें अध्याय की 8-9 वीं आयत कहती है कि मुसलमानों को यह आदेश दिया जाता है कि उन गैरमुसलमानों के साथ सज्जनता के साथ और न्यायोचित बर्ताव करें जो उनके साथ मात्र मान्यताओं और आस्थाओं की खातिर बैर न रखते हों. लेकिन जो लोग मुसलमानों की आस्था की खातिर उनसे बैर रखते हों वे मित्रता के काबिल नहीं हैं.
    इस्लाम का मूल संदेश कुरान की इन दो आयतों से अभिव्यक्त होता है:

    1. ला इकराह फिद्दीन (धर्म पर किसी भी तरह जोर जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए)

    2. लकुम दीनकुम वली दीन ( तेरा धर्म तेरे लिए सही, मेरा धर्म मेरे लिए सही. और हम आपस में शांतिपूर्ण बर्ताव करें)

    1. अल्लाह को ईश्वर कहना बंद करें।

      और यदि बहस ही करनी है तो काॅपी पेस्ट न करें।

      1. Mujhe pta lag gaya ki tum such me bewkof ho.kyunki dunya ke 99% log allah iswar khuda god permatma ko ek hi khte hai. Baki ke 1% aapki trah kam dimag ke hai.

        1. mere bhai allah ishwar god yahova me bahut kaa antar hai ji. aur yah koi galat nahi kaha abhishek ji ne. aap yadi sahi se parhoge kuraan bible ved to sab ka arth aapko maalum ho jaayega.

    2. nafees mali -इस्लामी जन्नत v/s औरतेँ
      इस्लाम मेँ जहाँ एक आदमी को मरने के बाद 72
      हूर्रे मिलेगी वहीँ औरतो को क्या मिलेगा ??
      (A)
      “इब्ने उम्र ने कहा कि रसूल ने कहा कि औरतें
      दुनिया की सबसे
      घटिया मखलूक हैं .और्हर तरह से जहन्नम में जाने के
      योग्य हैं “
      बुखारी-जिल्द7 किताब62 हदीस31
      बुखारी-जिल्द7 किताब62 हदीस6
      (B)
      सईदुल खुदरी ने कहा कि ,रसूल ने
      कहा कि सारी औरतें एक बार
      नहीं तीन तीन बार जहन्नम में भेजने के योग्य हैं.
      सही मुस्लिम-किताब3 हदीस826 ,
      सुंनं मसाई-जिल्द2 हदीस1578 पेज342
      (C)
      “इब्ने अब्बास ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि औरतें
      तो जहन्नम
      का ईंधन हैं ,जिन से जहन्नम की आग को तेज
      किया जाएगा .”
      बुखारी-जिल्द7 किताब62 हदीस124
      मुस्लिम-किताब36 हदीस6596
      (D)
      “इमरान बिन हुसैन ने कहा कि रसूल ने
      कहा कि ,जहन्नम को औरतों से
      भर दिया जाएगा .यहां तक कि दूसरों के लिए
      कोई जगह नहीं रहेगी “
      बुखारी-जिल्द4 किताब54 हदीस464
      (E)
      “अब्दुला इब्ने अब्बास ने कहा कि ,रसूल ने
      कहा कि ,अल्लाह
      बिना किसी भेदभाव के
      सारी औरतों को जहन्नम में दाखिल कर
      देगा .जाहे वे कितनी ही नमाजी और परहेजदार
      क्यों न हों “
      बुखारी-जिल्द1 किताब2 हदीस28
      बुखारी-जिल्द2 किताब2 हदीस161
      (F)
      “इब्ने अब्बास ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि मैं
      जहन्नम को औरतों से
      ठसाठस भरवा दूंगा .और देखूंगा कि कोई
      खाली जगह न रहे “
      बुखारी-जिल्द7 किताब62 हदीस125,
      बुखारी-जिल्द6 किताब1 हदीस301,
      मिश्कात-जिल्द4 किताब42 हदीस24
      (G)
      “सईदुल खुदरी ने कहा कि ,रसूल ने
      कहा कि ,अल्लाह ने यह पाहिले से
      ही तय कर लिया है कि ,वह जितनी भी औरतें है
      उन सबको जहन्नम
      की आग में झोंक देगा .ओर इस में किसी भी तरह
      कि शंका नहीं है .”
      बुखारी–जिल्द7 किताब62 हदीस124,
      तिरमिजी-हदीस568 1,
      मिश्कात-जिल्द4 किताब42 हदीस24
      (H)
      “सैईदुल खुदरी ने कहाकि ,रसूल ने कहा कि ,जहन्नम
      में अधिकाँश औरतें
      ही होंगी .और उनको दर्दनाक सजाएं
      दी जायेंगी .सबसे पाहिले छोटे
      छोटे पत्थरों को गर्म किया जाएगा .फिर उन
      पत्थरों को औरतों की छातियों पर रख
      दिया जाएगा .जिस से
      उनकी छातियाँ जल जायेगी .फिर उन गर्म
      पत्थरों को औरतों के आगे
      और पीछे के छेदों (vagina और anus )में
      घुसा दिया जाएगा ,जिस
      से उनको दर्द होगा ,और यह सब मेरे सामने होगा ।
      बुखारी-जिल्द1 किताब22 हदीस28
      (I)
      “रसूल ने कहा कि जहन्नम के चौकीदार होंगे ,और
      अगर कोई औरर
      बाहर निकलनेकी कोशिश करेगी तो उसे वापिस
      जहन्नम में डाल
      दिया जाएगा“
      इब्ने माजा-किताब१ हदीस113
      –अब तो सारी औरतो और लडकियों को इस्लाम छोड़ देना चाहिए-

      1. nafees mali -इस्लामी जन्नत v/s औरतेँ
        इस्लाम मेँ जहाँ एक आदमी को मरने के बाद 72
        हूर्रे मिलेगी वहीँ औरतो को क्या मिलेगा ??
        (A)
        “इब्ने उम्र ने कहा कि रसूल ने कहा कि औरतें
        दुनिया की सबसे
        घटिया मखलूक हैं .और्हर तरह से जहन्नम में जाने के
        योग्य हैं “
        बुखारी-जिल्द7 किताब62 हदीस31
        बुखारी-जिल्द7 किताब62 हदीस6
        (B)
        सईदुल खुदरी ने कहा कि ,रसूल ने
        कहा कि सारी औरतें एक बार
        नहीं तीन तीन बार जहन्नम में भेजने के योग्य हैं.
        सही मुस्लिम-किताब3 हदीस826 ,
        सुंनं मसाई-जिल्द2 हदीस1578 पेज342
        (C)
        “इब्ने अब्बास ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि औरतें
        तो जहन्नम
        का ईंधन हैं ,जिन से जहन्नम की आग को तेज
        किया जाएगा .”
        बुखारी-जिल्द7 किताब62 हदीस124
        मुस्लिम-किताब36 हदीस6596
        (D)
        “इमरान बिन हुसैन ने कहा कि रसूल ने
        कहा कि ,जहन्नम को औरतों से
        भर दिया जाएगा .यहां तक कि दूसरों के लिए
        कोई जगह नहीं रहेगी “
        बुखारी-जिल्द4 किताब54 हदीस464
        (E)
        “अब्दुला इब्ने अब्बास ने कहा कि ,रसूल ने
        कहा कि ,अल्लाह
        बिना किसी भेदभाव के
        सारी औरतों को जहन्नम में दाखिल कर
        देगा .जाहे वे कितनी ही नमाजी और परहेजदार
        क्यों न हों “
        बुखारी-जिल्द1 किताब2 हदीस28
        बुखारी-जिल्द2 किताब2 हदीस161
        (F)
        “इब्ने अब्बास ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि मैं
        जहन्नम को औरतों से
        ठसाठस भरवा दूंगा .और देखूंगा कि कोई
        खाली जगह न रहे “
        बुखारी-जिल्द7 किताब62 हदीस125,
        बुखारी-जिल्द6 किताब1 हदीस301,
        मिश्कात-जिल्द4 किताब42 हदीस24
        (G)
        “सईदुल खुदरी ने कहा कि ,रसूल ने
        कहा कि ,अल्लाह ने यह पाहिले से
        ही तय कर लिया है कि ,वह जितनी भी औरतें है
        उन सबको जहन्नम
        की आग में झोंक देगा .ओर इस में किसी भी तरह
        कि शंका नहीं है .”
        बुखारी–जिल्द7 किताब62 हदीस124,
        तिरमिजी-हदीस568 1,
        मिश्कात-जिल्द4 किताब42 हदीस24
        (H)
        “सैईदुल खुदरी ने कहाकि ,रसूल ने कहा कि ,जहन्नम
        में अधिकाँश औरतें
        ही होंगी .और उनको दर्दनाक सजाएं
        दी जायेंगी .सबसे पाहिले छोटे
        छोटे पत्थरों को गर्म किया जाएगा .फिर उन
        पत्थरों को औरतों की छातियों पर रख
        दिया जाएगा .जिस से
        उनकी छातियाँ जल जायेगी .फिर उन गर्म
        पत्थरों को औरतों के आगे
        और पीछे के छेदों (vagina और anus )में
        घुसा दिया जाएगा ,जिस
        से उनको दर्द होगा ,और यह सब मेरे सामने होगा ।
        बुखारी-जिल्द1 किताब22 हदीस28
        (I)
        “रसूल ने कहा कि जहन्नम के चौकीदार होंगे ,और
        अगर कोई औरर
        बाहर निकलनेकी कोशिश करेगी तो उसे वापिस
        जहन्नम में डाल
        दिया जाएगा“
        इब्ने माजा-किताब१ हदीस113
        –अब तो सारी औरतो और लडकियों को इस्लाम छोड़ देना चाहिए-
        ——-
        हदीस का कामसूत्र
        १ औरत संभोग के पहले अपने नीचे के बाल साफ करें
        बुखारी जिल्द ७ कि ६२हदीस १७५
        २ सदा संभोग के लिये औरत तैयार रहे.जेहादी उनसे कभी भी संभोग कर सकता है.सही मुसलिम किताब ८ ह ३२४०
        ३संभोग जरूरी है .औरत चाहे या नहीं…..सही मु*८हदीस ३२४०
        ४ पत्नी की छाती से दूध चूसना हलाल है….मुवत्ता किताब ३०हदीस२१४
        ५ कुंवारियां संभोग के लिये उत्तम है….बुखारी ७कि६२हदीस ५०४
        ६तुम मासिक के समय भी संभोग करसकते हो..अबू दाऊद किताब१हदीस २७०
        ७रसूल ने कहा कि कुंवारी से मैथुन में खूब आनंद आता है. .मुस*८हदीस ३४५९
        ८आयशा ने कहा कि रसूल मुझसे संभोग के बाद बिन नहाये सो जाते और नमाज पढ़ने चले जाते.अबू दाऊद हदीस ४२
        ९उम्म सलेम ने कहा कि नारी का योनी स्राव पीला और चाटने में तल्ख व तीखा होता है.अबू किताब ३ हदीस ६१०
        १० जेहादी एक रात की शादी कर सकता हा….सही मुसलिम ८हदीस ३२५३
        ये है हदीस जिसके आगे कामसूत्र फेल है.कोई व्यक्ति कृपया आहत न हो.मैं ठेस पहुंचाने को नहीं बल्कि सच बताने को लिख रहा हूं.रृपया तर्क ले खंडन करें.गाली गलौज न करें शंका समाधान करें
        वंदेमातरम

  38. ला इकराह फिद्दीन का सोनूनुजल (सही उच्चारण स्मरण में नहीं आ रहा) बताएँ?

  39. मस्जिद में औरतों पर पाबन्दी क्यों ?

    विश्व के जितने भी बड़े धर्म है , सभी में उनके उपासना ग्रहों में पुरुषों के साथ स्त्रियों प्रवेश करने की अनुमति दी गयी है . जसे मंदिरों में अक्सर हिन्दू पुरुष अपनी पत्नियों और माता बहिनों के साथ पूजा और दर्शन के लिए जाते है . गुरुद्वारों में भी पुरुष -स्त्री साथ ही अरदास करते है . और चर्च में भी ऐसा ही होता है ,लेकिन कभी किसी ने इस बात पर गौर किया है कि पुरषों के साथ औरतें दरगाहों में तो जा सकती हैं ,लेकिन मस्जिदों में उनके प्रवेश पर पाबन्दी क्यों है .जबकि इस्लाम पुरुष और स्त्री की समानता का दावा करता है ‘इस प्रश्न का उत्तर हमें खुद कुरान और हदीसों से मिल जाता है .जिस पर संक्षिप्त में जानकारी दी जारही है .

    1-मस्जिदें आतंकियों का अड्डा हैं
    यदि हम विश्व दुसरे देशों के साथ होने वाली इस्लामी जिहादी आतंकी घटनाओं का विश्लेषण करें तो हमें पता चलेगा की जैसे जैसे आतंकवादी अपनी नयी नयी रणनीति बदलते जाते है ,वैसे वैसे ही मस्जिदों की निर्माण शैली में भी परिवर्तन होता रहता है , यदि आप सौ दो साल पहिले की किसी मस्जिद को देखें पाएंगे कि उसमे चारों तरफ ऊंची दीवार , मीनारें , गुम्बद और बीच में पानी का एक हौज होगा , और एक तरफ मिम्बर होगा जिस पर से इमाम खुतबा देता है .
    लेकिन आजकल जो मस्जिदें बन रही हैं , उनके साथ दुकानें , रहने के लिए सर्व सुविधा युक्त कमरे और तहखानों के साथ भूमिगत सुरंगे भी बनायीं जाती है . जिस से गुप्त रूप से निकल भागने से आसानी हो .ऐसी ही मस्जिदों के तहखानों में हथियार छुपाये जाते हैं , जो दंगों के समय निकालकर प्रयोग किये जाते है . यही नहीं इन्हीं गुप्त सुरंगोंसे आतंकी आसानी से भाग जाते हैं .जबलपुर दंगों में ऐसी मस्जिदों से हथियार बरामद हुए थे. चूँकि मुसलमान जो भी आतंकी कार्यवाही करते हैं उसकी प्रेरणा कुरान से लेते हैं .और उसी की प्रेरणा से मस्जिदों में हथियार भी छुपाते रहते हैं , जैसे कुरान में कहा है ,

    “और लोगों ने मस्जिदें इसलिए बना रखी हैं , कि वहां से लोगों को हानि पहुंचाएं ,और आपस में फूट डालें .और अपने विरोधियों पर घात लगाने की योजनायें बनाने का स्थल बनायें ” सूरा – तौबा 9 :107

  40. 2-औरतें घर में नमाज क्यों पढ़ें
    इसके सिर्फ दो ही कारण हो सकते हैं , एक तो यह की मुहम्मद एक चालाक व्यक्ति था , उसे पता था कि मस्जिदें फसाद जी जड़ होती हैं . और दंगों में अक्सर औरतें ही निशाना बनायीं जाती है . और बलात्कार करना जिहाद का एक प्रमुख हथियार है . मुहम्मद को दर था कि यदि औरतें मस्जिद जाएँगी तो वापसी में खुद मुस्लमान ही उनके साथ बलात्कार कर सकते है , इस लिए उसने यह हदीस सुना दी थी .
    “अब्दल्लाह बिन मसूद ने कहा कि रसूल का आदेश है ,औरतों के यही उचित है कि वह यातो अपने घर के आँगन में नमाज पढ़ें , या घर के इसी एकांत कमरे में नमाज पढ़ा करें ” सुन्नन अबू दाउद-जिल्द 1 किताब 204 हदीस 570

    3-औरतों की बुद्धि अधूरी होती है
    दूसरा कारण यह है कि मुहम्मद की सभी औरतें मुर्ख और अनपढ़ थीं , उसी कि नक़ल करके मुसलमान औरतों को शिक्षा देने के घोर विरोधी है , उनको डर लगा रहता है कि अगर औरतें पढ़ जाएँगी तो इस्लाम कि पोल खुल जाएगी .अक्सर जब औरतें पकड़ी जाती है तो वह जल्दी से राज उगल देती है .इसलिए अक्सर मुसलमान गैर मुस्लिम लड़की को फसाते है
    ” सईदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने कहा है औरतों दर्जा पुरुषों से आधा होता है ,क्योंकि उनकी बुद्धि पुरुषों से आधी होती है “बुखारी -जिल्द 3 किताब 48 हदीस 826

  41. 4-औरतें चुगलखोर होती हैं

    दुनिया के सारे मुसलमान किसी न किसी अपराध में संलग्न रहते हैं . और मस्जिदों के इमाम बुखारी जैसे मुल्ले उनको उकसाते रहते हैं . सब जानते है कि अक्सर औरतें अपने दिल कि बातों को देर तक नहीं छुपा सकती है ,जिस से मुसलमानों को पकडे जाने का खतरा बना रहता है .इसलिए वह औरतों को मस्जिदों में नहीं जाने देते हैं
    “सईदुल खुदरी ने कहा कि एक बार जब रसूल नमाज पढ़ चुके और मुसल्ला उठा कर एक खुतबा ( व्याख्यान ) सुनाया और कहा मैंने आज तक औरतों से अधिक बुद्धि में कमजोर किसी को नहीं देखा . क्योंकि उनके पेटों में कोई बात नहीं पचती है .यानि वह गुप्त बातें उगल देती हैं “बुखारी -जिल्द 2 किताब 24 हदीस 54
    इसी विषय में जकारिया नायक ने बड़ी मक्कारी से कहा है कि केवल भारत में औरतों को मस्जिद में जाने पर पाबन्दी है . और दुसरे इस्लामी देशों में ऐसा नहीं है . लेकिन वास्तविकता तो यह्हाई कि जहाँ मुस्लिम औरतें जिहाद करती हैं उन देशों में औरतें मस्जिद में जा सकती है , और जब भारत में भी मुस्लिम आतंकी औरतों की संख्या अधिक हो जाएगी , यहाँ भी औरतें मस्जिदों में जाने लगेंगी . क्योंकि फिर छुपाने की कोई बात नहीं रहेगी . देखिये विडियो
    Why ain’t Women allowed in Mosques in India? Dr Zakir Naik

    http://www.youtube.com/watch?v=XyyJ7iYh3fw

    कुछ दिन पूर्व हमारे प्रबुद्ध मित्र ने पूछा था कि औरतों को मस्जिदों में प्रवेश करने पर पाबन्दी क्यों है . इसलिए जल्दी में कुरान और हदीस के आधार पर उनके प्रश्न का उत्तर दिया जा रहा है . मुझे पूरा विश्वास है कि इस लेख को पढ़कर सभी लोग स्वीकार करेंगे कि मस्जिदें ही आतंकवादियों की शरणस्थल हैं . और वहीं से जिहाद की शिक्षा दी जाती है .

  42. “Women are crooked like ribs. When you attempt to straighten them out, they crack
    Muhammad has said that women are crooked. One assumes he meant that they are using trickery to get what they want: see Hadith of Bukhari 7.62.113 and 7.62.114:
    Abu Huraira has handed down to us: Allah’s Apostle said , “Woman is like a rib; if you attempt to straighten her out, she cracks. Thus, if you wish to profit from her, do it while she is still crooked.”A man has the right to divorce without giving a reason, whereas a woman can only get a divorce via the courts and provided she can present a dossier with good arguments
    In principle, a man declares three times that he wants to divorce his wife and his wish is fulfilled. The rules for divorce are written in the Quran verses 2.227 to 2.241.
    That a woman cannot get a divorce at her own initiative is evidenced by a Hadith such as 7.63.197 of Bukhari:
    Narrated Ibn ‘Abbas: The wife of Thabit bin Qais came to the Prophet and said, “O Allah’s Apostle! I do not blame Thabit for defects in his character or his religion, but I, being a Muslim, dislike to behave in un-Islamic manner (if I remain with him).” On that Allah’s Apostle said (to her), “Will you give back the garden which your husband has given you (as Mahr)?” She said, “Yes.” Then the Prophet said to Thabit, “O Thabit! Accept your garden, and divorce her once.”
    The following points are striking in the above citation:
    – A woman wanting a divorce must present a reason (a man not), in this case un-Islamic conduct

  43. – When the woman takes the initiative towards divorce, she needs to buy or negotiate her freedom. This proposition is also supported by Quran verse 2.229 that talks of “becoming free”. “…If you are in doubt that they will be able to abide by Allah’s dictates, neither of them shall be culpable of sin in what she gives back in order thereby to be set free…”. The Quran here implicitly holds that marriage for woman means a kind of confinement.
    – In his role of judge, Muhammad orders the man to divorce his wife. Hence, Muhammad himself does not dissolve the marriage. It is rather the husband who does it. In Saudi-Arabia, men that refuse divorce simply don’t show up for the divorce proceedings; as a result, the woman does not “become free”.How many times have you heared the following lie ?
    Women have high status and privileged position in Islam
    Lets have a short look at womens right in Islam and you be the judge if they are priviliges and they put women in high status :
    1-To be declared in the holy books that women are deficient in intelligence and that most of them will go to hell for being ungrateful to their husbands; and that they will make the big majority of the hell’s population? Is that a privilige ?
    2-To share the husband with three other wives and many concubines, sex slaves and captive women which his right hand posses? (you need all the help you can get to compete with the other wives and concubines). Maybe this one is a privilige , No ? How about the next one ?
    3-To be divorced by the husband at the drop of a hat by just his proclaiming 3 times “I divorce you” and women not having the same right to divorce him?
    4- To be disciplined by the husband, by being beaten up by him with scourge (lash) and green sticks? (Unless you are into the kinky stuff and actually enjoy the beatings)..
    5- Being raped and then be stoned to death for reporting it because you need 4 male witnesses to prove your innocence otherwise you yourself get accused of adultery?
    Your only chance of finding 4 male witnesses is that if the attacker was of very low IQ , attacked you in the broad daylight in front of a bunch of degenerate horny men who watched and cheered without trying to stop the rape and are later willing to testify.
    6- Being wrongly accused of adultery by a conniving husband and be stoned for it because he does not need 4 male witnesses if he swears 4 times himself?
    7- Being married at the age of 9 years to a much older man because it is sunna? To submit to him every time he desires you even if he wants it on the back of a camel, if he gets an untimely urge? (Not recommended, you both may fall down from camel’s back during the action and sustain injuries).
    8- To be declared half a person as witness in court or inheriting property?
    9- Being cursed all night by thousands of angels if you refuse him even for a genuine reason? (What a boring job for angels who are assigned to watch your bedroom, always waiting for the action, unless of course they enjoy watching; in that case they have a reason to be disappointed and pissed by your refusal).
    10-To be asked to stay at home by scriptures and only leave home if husband permits; that too fully covered by a tent like garment even if it is scorching hot .
    Have you heared any of above priviliges from muslim appologists ? Nest time when you hear any of the saying that men and women are equal in Islam or better yet , women are in higher status , ask them about a few of the above priviliges.
    And finally ask them : If we ( men and women ) are equal , then lets change our privileges for a few days or years or forever.”

  44. वेद में बड़ी ही शिक्षाप्रद बात कही है , जो उन लोगों पर लागू होती है , जो किसी न किसी कारण से मुसलमान बन गए हैं , वेद मन्त्र है ,
    “अन्धं तमः प्रविशन्ति ये अविद्यामुपासते “यजुर्वेद -40:9 अर्थात ,जो लोग अविद्या (अज्ञान ) की उपासना करते हैं , वह अज्ञान के ऐसे अँधेरे कुएं में गिर जाते हैं ,जिस से निकलना कठिन है .
    यह बात इस्लाम की धर्म परिवर्तन की नीति और तरीके पर बिलकुल लागु होती है , जिसे जानने के बाद हमें स्वीकार करना पड़ेगा कि सचमुच इस्लाम धर्म नहीं बल्कि अज्ञान का एक ऐसा अँधेरा कुंआ है , जिस में गिर जाने पर बाहर निकलने के लिए निडरता और इस्लाम की असलियत को समझना बहुत जरुरी है .क्योंकि आज भारत में जितने भी मुसलमान हैं , उनके पूर्वज इस्लाम के गुणों से प्रभावित होकर नहीं बल्कि मजबूरी में मुसलमान बने थे . या आजकल वह भोली भाली हिन्दू लड़कियां मुस्लमान बन जाती हैं , मक्कार मुस्लिम लड़कों के फरेबी प्रेम जाल में फस जाती है .
    यही नहीं यह भी पता चला है कि सेकुलरिज्म और भाईचारा की आड़ में कुछ ब्लॉगर , लेखक ,और धूर्त इस्लाम के प्रचारक हिंदुओं गुमराह करने में लगे हुए हैं , और वह धर्म परिवर्तन के लिए ऐसे लोग चुनते हैं जिन्हें न तो हिदू गर्न्थों का ज्ञान है और न इस्लाम की दोगली निति का पता है , ऐसे ही लोगों की आँखें खोलने के लिए ही यह लेख दिया जा रहा है
    2-कुरान का पाखण्ड
    जिस तरह से ढोंगी , पाखंडी , धोखेबाज और मक्कार लोगों के अज्ञान का फायदा उठाकर अपनी लुभावनी बातों के जाल में फसा कर ठग लेते हैं , उसी तरह कुरान में कुछ ऎसी आयतें भी देदी गयीं हैं , जिन से इस्लाम का असली खूंखार रूप ढक जाये और अज्ञानी लोग इस्लाम के प्रति आकर्षित हो जाएँ , जिस से उन लोगों का धर्म परिवर्तन करने में आसानी हो जाये , अक्सर चालाक मुल्ले इस्लाम की तारीफ करने के लिए इन्ही आयतों का सहारा लेते हैं ,
    “तुम्हारे लिए तुम्हारा धर्म और हमारे लिए हमारा धर्म ” सूरा -काफिरून 109 :6
    ” कह दो यह ( इस्लाम ) अल्लाह की तरफ से एक सत्य है , अब जो चाहे इसे कबूल कर ले , और जो चाहे इस से इंकार कर दे ”
    सूरा – अल कहफ़ 18 :29
    “धर्म के बारे में किसी पर जबरदस्ती नहीं है ” सूरा – बकरा 2 :256
    कुरान ऎसी आयतें पढ़ कर जो लोग इस्लाम को भी धर्म समझ लेते हैं , वह नहीं जानते कि हाथी की तरह इस्लाम के खाने के और दिखने के दांत अलग है ,और कोई इस्लाम के अंध कूप में में गिर जाये तो बाहर निकलना सरल नहीं है ,क्योंकि इस्लाम ने धर्म परिवर्तन के बारे में दोगली नीति अपना रखी है ,
    3-इस्लाम परित्याग या इरतिदाद
    शरीयत के कानून में इस्लाम का परित्याग करने के लिए अरबी का पारिभाषिक ” इरतिदाद – ارتداد ” इस्तेमाल किया जाता है. जिसका अर्थ अंगरेजी में “Apostasy ” होता है . यह शब्द अरबी की मूल शब्द “रिद्दाह – ردة ” से बना है , जिनके अर्थ ” पलट जाना (relapse ) और वापसी (regress) भी होते हैं . और जो भी मुसलमान इस्लाम छोड़ता है ,और वापस अपने पुराने धर्म में या किसी और धर्म में जाता है , उसे ” मुरतिद -مرتد ” कहा जाता है। और जिस देश में इस्लामी हुकूमत होती है वहाँ मूरतिद को मौत की सजा दी जाती है , और जहाँ इस्लामी कानून नहीं चलता है वहाँ के मुल्ले उस मूर्तिद की हत्या करावा देते है .क्योंकि मुहम्मद ने हदीसों में मुरतिद की हत्या करने का आदेश दिया गया है , जिसका पालन करना हर मुस्लिम का फर्ज माना गया है .
    http://www.thereligionofpeace.com/Quran/012-apostasy.htm
    4-इरतिदाद के चार प्रकार
    इस्लाम को त्यागने यानी ‘इर्तिदाद’ के चार प्रकार बताये गए हैं , जिनके लिए शरीयत में मौत की सजा का विधान है ,
    1.ईमान में इरतिदाद -“रिदाह फिल अक़ायद -الردة في الاعتقاد “( Apostasy in beliefs)
    जैसे किसी को अल्लाह का पुत्र या अवतार मानना और अल्लाह के समान उसकी इबादत करना

  45. .2.शब्दों में इरतिदाद “रिदाह फ़िल कलिमात – الردة في الكلمات ” (Apostasy in words )
    अल्लाह के रसूल की बुराई करना या मजाक उड़ाना .
    3.कामों से इरतिदाद “रिदाह फिल अमल – الردة في العمل ” (Apostasy in action )
    जैसे कुरान को नीचे पटक देना , जलाना या फाड़ना ,रसूल की तस्वीर बनाना मूर्ति पूजा करना ,किसी देवी देवता को प्रणाम करना इत्यादि
    4.विधि में चूक से इर्तिदाद “रिदाह अन तरीक अल सहू – الردة عن طريق السهو ” (Apostasy by omission)
    इसमे चूक से स्वधर्म त्याग करना भी शामिल है , जैसे नमाज छोड़ देना इस्लाम में बताये गए कानून और नियमों का पूरी तरह से पालन नहीं करना . इन सभी बातों के आधार पर मुल्ले मौलवी तय करते हैं कि किसी मुस्लिम ने इर्तिदाद किया है अथवा नहीं ,और उसे ” मुर्तिद ” घोषित करके मौत की सजा देना चाहिए या नहीं . मुस्लिम देशों में वहाँ की अदालतें खुद मूर्तिद को मौत की सजा दे देती हैं . लेकिन भारत में यहाँ के मुफ़्ती और मुल्ले ” मूर्तिद ” की हत्या करने वाले को इनाम देने की घोषणा कर देते हैं ,जिस से इस्लाम के विरुद्ध लिखने और बोलने वाले विदेशों में जाकर बस गए है . जैसे “सलमान रश्दी “और ” तस्लीमा नसरीन “आदि .
    5-इस्लाम की असहिष्णुता
    ” जो लोग चाहते है कि जैसे वह काफिर हैं , तुम भी काफिर हो जाओ , तो तुम ऐसे लोगों को अपना मित्र नहीं बनाना , बल्कि उनको जहाँ पाओ पकड़ो और उनको क़त्ल कर दो ” सूरा -निसा 4 :89
    “और जो लोग तुम्हारे धर्म में बुराई निकालें तो उन से लड़ाई करते रहो ,इस से वह ऐसा करने से बाज आयेंगे “सूरा -तौबा 9 :12
    “और तुम में से जो भी अपना धर्म (इस्लाम ) छोड़ कर फिर से काफिर हो जाये तो समझो उसका किया गया सब कुछ बेकार हो गया , और वह सदा के लिए जहन्नम में रहेगा “सूरा -बकरा 2 :217
    “जिन लोगों ने इस्लाम के बाद फिर से कुफ्र अपनाया तो उनको कुछ नहीं मिलेगा , और अगर वह तौबा कर लें तो उनके लिए अच्छा होगा , फिर भी यदि वह तौबा से मोड़ लें ,तो उनकी कोई मदद नहीं होना चाहिए ” सूरा-तौबा 9 :74
    ” तुम इस्लाम के विरोधी इन गुटों से पूछो ,कि क्या तुम अल्लाह की आयतों और उसके रसूल का मजाक उड़ा रहे हो ? यानि तुमने इस्लाम अपनाने के बाद कुफ्र किया है . इसलिए हैम एक गिरोह को माफ़ भी कर देंगे ,तो दूसरे को यातना देकर ही रहेंगे . क्योंकि ऐसा करना अपराध है ” सूरा -तौबा 9 :66
    6- इस्लाम का अंधा कानून
    इस्लामी देशों में इस्लाम छोड़ कर कोई अन्य धर्म स्वीकार करने पर हमेशा मौत की सजा दी जाती है , या हत्या कर दी जाती है , क्योंकि ,
    शरीयत के कानून के अनुसार यदि कोई स्वस्थ चित्त वाला वयस्क पुरुष या स्त्री अपनी इच्छा से इस्लाम छोड़ कर कोई अन्य धर्म अपना लेता है , तो इस अपराध के लिए उसका खून बहा देना चाहिए, और यदि वहाँ इस्लामी हुकूमत हो तो जज या काजी ,और काबिले का मुखिया उसकी सजा को पूरा करे . क्योंकि रसूल का हुक्म है इस्लाम त्यागने और मुसलमानों की जमात छोड़ने वालों को मौत की सजा देना चाहिए , जैसा इन हादिसों में कहा गया है ,
    (See al-Mawsooâah al-Fiqhiyyah, 22/180. )
    1.”अनस ने कहा कि इब्ने अब्बास ने बताया ,रसूल ने कहा है जो भी व्यक्ति अपना धर्म ( इस्लाम ) बदलेगा उसे मार डालो ”
    ” مَنْ بَدَّلَ دِينَهُ فَاقْتُلُوهُ ”
    ‘Whoever changes his religion, kill him.'”
    सुन्नन नसाई – जिल्द 5 किताब 37 हदीस 4069
    2.अब्दुल्लाह बिन मसूद ने कहा कि रसूल का आदेश है ,जो भी इस्लाम और जमात को छोड़ दे तो उसको क़त्ल कर दो ”
    وَالتَّارِكُ لِدِينِهِ الْمُفَارِقُ لِلْجَمَاعَةِ ” . ”
    “one who leaves his religion and splits from the Jama`ah.should be killed”
    इब्ने माजा – जिल्द 3 किताब 20 हदीस 2534

  46. 7-इस्लाम छोङने की सजा
    सही बुखारी को हदीस की सबसे प्रमाणिक हदीस की किताब माना जाता है , क्योंकि इस्लामी देशों में उसी के आधार पर शरीयत के कानून बनाये गए हैं , इसी किताब में इस्लाम छोड़ कर अन्य धर्म अपनाने वाले को क़त्ल करने का आदेश दिया गया है , नमूने के लिए चार हदीसें दी जा रही हैं ,
    1-इकिरिमा ने बताया कि रसूल का हुक्म है ,यदि कोई मुस्लिम इस्लाम छोड़ देता है ,तो बिना किसी शक के उसको क़त्ल कर दो , और यदिकोई इस्लाम अपनाता है तो उस से कोई सवाल नहीं करो ”
    सही बुखारी – जिल्द 4 किताब 52 हदीस 260
    2-इकिरिमा ने कहा कि रसूल ने कहा है ,जोभी इस्लाम का त्याग करता है , उसे क़त्ल कर दिया करो ”
    सही बुखारी – जिल्द 9 किताब 84 हदीस 57
    3-अबू मूसा ने मुआज को बताया कि एक मुस्लिम ने यहूदी धर्म अपना लिया है . यह सुनते ही मुआज बोला , मैं तब तक शांत नहीं बैठूँगा जब तक उसको क़त्ल नहीं कर देता , क्योंकि रसूल का यही आदेश है ”
    सही बुखारी – जिल्द 9 किताब 89 हदीस 271
    4-रसूल ने कहा कि कुछ ऐसे मुर्ख है , कि इस्लाम उनके गले नीचे नहीं उतरता , और ऐसे ही लोग इस्लाम छोड़ देते है , इसलिए तुम्हें जहाँ भी ऐसे लोग मिलें उनको खोज खोज कर क़त्ल कर दिया करो , क़ियामत के दिन तुम्हे इसका उत्तम इनाम मिलेगा ”
    सही बुखारी – जिल्द 9 किताब 84 हदीस 64
    8-इस्लाम त्यागने पर फतवा
    इस्लाम की पक्षपाती नीति और दादागीरी इस बात से पता चलती है ,कि यदि कोई अपना धर्म त्याग कर इस्लाम काबुल करता है तो कोई आपत्ति नहीं करता ,लेकिन अगर कोई मुस्लिम इस्लाम को त्याग कर अन्य धर्म अपना लेता है ,तो मुल्ले उसे ” मुरतिद ” घोषित करके क़त्ल के योग्य ठहरा देते है . इसके प्रमाण के लिए मिस्र के काहिरा की इस्लामी यूनिवर्सिटी “जामअ तुल अज़हर शरीफ – جامعة الأزهر (الشريف) “के मुफ्ती “अब्दुल्लाह मिशदाद – عبد الله المشد ” ने 23 नवम्बर सन 1978 में उस समय जारी किया था ,जब एक मुस्लिम ने इस्लाम को छोड़ कर ईसाई धर्म अपना लिया था . और कुछ लोगों ने मुफ़्ती से इस्लाम त्यागने की सजा के बारेमे प्रश्न किया था , उसी फतवे के मुख्य अंशों का हिन्दी अनुवाद दिया जा रहा है ,
    सवाल – इस व्यक्ति के बारे में शरीयत का कानून क्या कहता है ? और क्या उसके बच्चे मुसलमान माने जायेगे ? या ईसाई ?
    जवाब -शरीयत के अनुसार इस व्यक्ति ने “इरतिदाद ” किया है . और अगर वह तौबा ( repent ) नहीं करता तो शरई कानून के मुताबिक उसको क़त्ल कर देना चाहिए . जहां तक बच्चों का सवाल है ,तो अभी वह नाबालिग हैं . और यदि बालिग हो जाने पर वह भी तौबा नहीं करते और मुसलमान नहीं बनते तो उनको भी क़त्ल कर देना चाहिए . यही कानून है .
    प्रमाण के लिए उस फतवा की लिंक और इमेज दी जा रही है .
    http://www.councilofexmuslims.com/index.php?topic=24511.0
    http://en.wikipedia.org/…/File:Rechtsgutachten_betr_Apostas…
    9-इस्लाम छोङने वाले
    चूँकि इस्लाम तर्कहीन , निराधार और कपोल कल्पित मान्यताओं पर ही टिका हुआ है , जिसे ईमान के नाम पर मुस्लिम बच्चों पर थोप दिया जाता है , जिस से उनकी सोचने समझने की बुद्धि कुंद हो जाती है और बड़े होकर वह कट्टर जिहादी बन जाते हैं , लेकिन जब भी किसी बुद्धिमान को इस्लाम के भयानक और मानव विरोधी असली रूप का पता चल जाता है ,वह तुरंत इस्लाम के अंधे कुएं से बाहर निकल जाता है . आयुसे ही कुछ सौभाग्य शाली प्रसिद्ध लेखकों ,मानवता वादी का संक्षिप्त परिचय दिया जा रहा है ,
    1-इब्ने वर्राक (ابن وراق )-इनका जन्म पाकिस्तान में हुआ था . यह उनका असली नाम नहीं है , इनके नाम का अर्थ है ” कागज बनाने वाले का बेटा ” क्योंकि उनके पिता कागज बनाते थे . इन्होने इस्लाम की पोल खोलने के लिए कई किताबें और लेख प्रकाशित किये हैं ,इनको दूसरा सलमान रश्दी भी कहा जाता है . इनकी साईट है SecularIslam.org
    2-तस्लीमा नसरीन( তসলিমা নাসরিন ) -इनका जन्म बंगला देश में 25 अगस्त सन 1962 में हुआ था . यह इस्लाम छोड़कर नास्तिक ( Atheist) बन गयी , इनकी किताब “लज्जा “पर मुल्लों ने इनकी हत्या करवाने का फतवा दिया था ,इनकी साईट का पता है ,
    TaslimaNasrin.com

    1. आपने सभी आयते काट छाट के लिखी है। और कुछ आयते अपनी तरफ से लिखी है। जो बिल्कुल गलत है और इस्लाम मे नही है।

  47. 3-अली सीना ( علي سينا )-इनका जन्म ईरान में हुआ था , यह भी इस्लाम से आजाद होकर नास्तिक (Atheist) बन गए और इस्लाम के महान आलोचक और लेखक हैं ,इनकी किताबों और लेखों के कारन इनको कई बार गिरफ्तार भी किया गया था . लेकिन इनके तर्कों और प्रमाणों के सामने मुल्ले निरुत्तर हो गए ,इन की साईट का नाम है , FaithFreedom.org
    4-डॉ ,परवीन दारबी (پروین دارابی )-इनका जन्म ईरान की राजधानी तेहरान में सन 1941 में हुआ था , यह भी इस्लाम को ठुकरा कर नास्तिक बन गई और अमेरिका में बस वहाँगयी महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रयास रत हैं . इन्होने भी कई किताबें और लेख प्रकाशित किये जिन में इस्लाम को बेनकाब किया गया है इनकी साईट है .Homa.org
    I5-नौनी दरवेश ( نوني درويش )-इनका जन्म सन 1949 में मध्य एशिया में हुआ था . इन्होने मिस्र में अमेरिका और मिस्र की तरफ से एक मानव अधिकार रक्षक की तरह काम किया था , इन्होने भी इस्लाम छोड़ कर ईसाई धर्म अपना लिया है . इनकी प्रसिद्ध किताब ” Now They Call Me Infidel ” पर भी फतवा जारी हुआ है ,)-NonieDarwish.com
    6-अनवर शेख -इनका जन्म एक कश्मीरी पंडित के घर हुआ था , जिसे बल पूर्वक मुसलमान बना दिया था इन्होने अरबी फ़ारसी के साथ इस्लाम का अध्यन किया था . लेकिन इस्लाम की हकीकत पता होजाने पर यह हिन्दू बन गए और अपना नाम अनिरुद्ध ज्ञान शिखा रख लिया . इनकी साईट का नाम है
    http://www.islam-watch.org
    इसके आलावा इनके लेख इस साईट http://islamreview.org/anwarshaikh/author.html में और यू ट्यूब में भी हैं जिनका शीर्षक है ,Islam can’t co-exist with other religions” Anwar Shaikh. Part 1/3 ..
    http://www.youtube.com/watch?v=_HNNgKiGyWE
    10-इस्लाम सवालों से डरता है
    जिस तरह से हरेक बड़े से बड़ा अपराधी और भ्रष्ट नेता भी खुद को निर्दोष और साफ सुथरे चरित्र वाला व्यक्ति होने का दावा किया करता है , लेकिन जब निष्पक्ष जाँच की जाती है तो पूछे गए सवालों से घबरा जाता है , क्योंकि सवालों से उसके निर्दोष होने के दावे का भंडा फुट जाने का डर लगता है , इसी तरह इस्लाम भी लोगों से सिर्फ ईमान लाने पर जोर देता है , क्योंकि इस्लाम में अल्लाह ,रसूल और कुरान की सत्यता के बारे में सवाल करना और वाद विवाद करने को गुनाह माना जाता है . इसी लिए मुल्ले मुस्लिम बच्चों को कुरान का व्याकरण सम्मत अर्थ सिखाने की जगह कुरान को तोते की तरह रटने पर बल देते हैं ,क्योंकि मुल्लों को डर लगता है कि कुरान के सही अर्थ जानकर लोग सवाल करेंगे ,और इस्लाम की असलियत पता होने पर इस्लाम छोड़ देंगे , जैसा कि खुद कुरान में लिखा है
    “तुम से पहले भी एक गिरोह ने ऐसे ही सवाल किये थे ,और जब तुम उनके सवालों का जवाब न दे पाए ,तो वह इस्लाम से इंकार वाले हो गए ”
    सूरा -मायदा 5 :102
    और यही कारण है कि जब भी कोई इस्लाम की बेतुकी ,तर्कहीन , अमानवीय ,और अवैज्ञानिक बातों के बारे में सवाल करता है ,या उंगली उठाता है ,तो मुसलमान उत्तर देने या खंडन करने की बजाय लड़ने और दंगे करने पर उतारू हो जाते हैं ,इसलिए सवाल करने वालों से निपटने के लिए कुरान में पहले से ही यह आदेश दे दिया गया है ,कि ,
    “और जब भी तुम्हारा कुफ्र वालों से किसी तरह का सामना हो जाये ,तो तुम उनकी गर्दनें मारना शुरू कर देना ,और इस तरह उनको कुचल देना ”
    सूरा -मुहम्मद 47 :4
    इसीलिए दुनिया भर के सभी मुस्लिम नेता , गुंडे , दादा ,स्मगलर ,डॉन और आतंकवादी कुरान की इसी नीति का पालन करते हैं,जिसे रसूल की सुन्नत माना जाता है . जो देश और हिन्दू धर्म के लिए खतरा है ,हम सिर्फ तर्क से ही इनका मुकाबला करें तो बहुत होगा .जैसे महर्षि दयानंद ने अपनी विश्व प्रसिद्द पुस्तक ” सत्यार्थ प्रकाश ” में इस्लाम का तर्क पूर्ण खंडन करके मुल्ले मौलवियों को निरुत्तर करके सिद्ध कर दिया है कि दुनिया को डराने वाला इस्लाम खुद सबसे बड़ा डरपोक है , जिसमे सत्य का सामना करने की हिम्मत नहीं है . इसलिए यदि सभी हिन्दू सेकुलरिज्म का चक्कर छोड़ कर निडरता से इसलाम की विस्तारवादी और अमानवीय नीतियों का भंडाफोड़ करते रहें तो कोई शंका नहीं कि इस देश से इस्लामी आतंक का सफाया नहीं हो जाये , केवल साहस की जरुरत है ,लोगों को इस्लाम की असलियत के बारेमें सप्रमाण जानकारी देते रहिये यही समय की मांग है ,सिर्फ पाकिस्तान को कोसने से कुछ नहीं होगा , जैसे रात दिन शक्कर -शक्कर जपने से मुंह मीठा नहीं हो सकता .
    (200/166)

  48. nafees mali–हदीसों में मुहम्मद की इच्छा
    सुन्नी मुसलमानों की हदीसों की छः किताबें है . लेकिन मुल्ले इतने चालाक हैं कि जो हदीसें लोगों को दिखने के लिए होती हैं उनका अंगरेजी या दूसरी भाषामे अनुवाद प्रकाशित कर देते है .और जो हदीसें सिर्फ जिहादियों के लिए होती हैं उनको सिर्फ अरबी में रहने देते हैं .यही नहीं एकही हदीस का अरबी में अलग और दूसरी भाषामे अलग नंबर देते हैं , ताकि मूल हदीस का पता नहीं चल सके .ऐसी एक हदीस की किताब का नाम ” सुन्नन अन नसाई سنن النسائي” है जिसके ” किताब अल जिहाद كتاب الجهاد”के अध्याय में ” गजवतुल हिंद غزوة الهند”के सम्बन्ध में जो हदीसें दी गयी हैं , उन मेसे कुछ यहाँ दी जा रही हैं
    1.अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने हमसे वादा किया कि हम हिंदुस्तान पर चढ़ाई करेंगे . और उसे पायमाल कर देंगे .ऐसा अल्लाह ने मुझे निर्देश दिया है .और अगर अल्लाह मुझे वह दिन देखने का समय देगा .तो हम हिंदुस्तान पर हमला जरुर करेंगे .और इस काम के लिए हम अपनी जिंदगी भी कुर्बान कर देंगे .और अगर हम मर जायेंगे तो हमें शहीदों में सबसे ऊँचा दर्जा मिलेगा .और अगर कामयाब हो जायेंगे हिंद की सारी दौलत लेकर वापिस आएंगे . फिर रसूल ने कहा तुम लोग इस बात के गवाह हो .
    الأحاديث عن غزو الهند سنن النسائي

    أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ عُثْمَانَ بْنِ حَكِيمٍ، قَالَ: حَدَّثَنَا زَكَرِيَّا بْنُ عَدِيٍّ، قَالَ: حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَمْرٍو، عَنْ زَيْدِ بْنِ أَبِي أُنَيْسَةَ، عَنْ سَيَّارٍ، ح قَالَ: وَأَنْبَأَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ سَيَّارٍ، عَنْ جَبْرِ بْنِ عَبِيدَةَ، وَقَالَ عُبَيْدُ اللَّهِ: عَنْ جُبَيْرٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: «وَعَدَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ غَزْوَةَ الْهِنْدِ، فَإِنْ أَدْرَكْتُهَا أُنْفِقْ فِيهَا نَفْسِي وَمَالِي، فَإِنْ أُقْتَلْ كُنْتُ مِنْ أَفْضَلِ الشُّهَدَاءِ، وَإِنْ أَرْجِعْ فَأَنَا أَبُو هُرَيْرَةَ الْمُحَرَّرُ

    Sunan An-Nasa’i Book #25 – The Book of Jihad.Chapter 41. Invading India -3175.

  49. 2-रसूल के आजाद किये गए गुलाम . सुबान ने कहा कि रसूल ने कहा एक समय मेरी उम्मत के लोग ( मुसलमान )दो गिरोहों में बंट जायेंगे और हिंदुस्तान पर दौनों तरफ से हमला करेंगे .अल्लाह उनको जहन्नम की आग से बचा लेगा .फिर एग गिरोह हिंदुस्तान को लूटेगा और दूसरा गिरोह दौलत यहाँ पहुंचा देगा ”
    यह हदीस जिन इमामों की किताबों में है उनके नाम इसप्रकार हैं इमाम हम्बल की मुसनद ,इमाम नसाई की सुंनं अल मुजतबा ,इब्ने अबी असीम की किताब अल जिहाद ,इमाम तिबरानी की अल मोजम अल ———ऑस्त्त.इत्यादि—nafees mali–
    3-अबू हुरैरा ने कहा कि रसूल ने कहा है हमारा दल बेशक हिंदुस्तान पर हमला करेगा , और अल्लाह उसे फतह हासिल करेगा . फिर वह दल हिंदुस्तान के हुक्मरानों के गले में जंजीर डाल घसीटेंगे . इस से अल्लाह खुश होगा ”
    यह हदीस नुईम बिन हम्माद ने अपनी हदीस किताब अल फितन ,में और इशक बिन रहूया ने अपनी मुसनद में दर्ज की है
    यहाँ पर दी गयी हदीसें और ऐसी ही दूसरी हदीसें पाकिस्तान में खुले आम और भारत के मदरसों में छुप कर पढाई जाती है .और मुसलमानों को जिहाद के लिए तय्यार किया जाता है .जिस से भारत के प्रति नफ़रत का माहौल पैदा होता है .जैसा कि इस विडियो में दिया है .
    (Annual IJTIMA 2011 Karachi Pakistan on 8th October 2011)

    Pakistan K Baare Mai BASHARAT.wmv

    http://www.youtube.com/watch?v=FrEEn9Aoi9s&feature=related

    भारत में होनेवाली सभी आतंकवादी घटनाओं के पीछे इस्लाम की वह नफ़रत सिखाने वाली हदीसें है , जिनका सभी मुसलमान पालन कर रहे है .हमें यह भी स्वीकार करना होगा कि बिना यहाँ के स्थानीय गद्दारों की मदद के बाहर के आतंकवादी कभी सफल नहीं हो सकते .
    (200/57)

    1. आपने सभी आयते काट छाट के लिखी है। और कुछ आयते अपनी तरफ से लिखी है। जो बिल्कुल गलत है और इस्लाम मे नही है।

  50. nafees mali–बलात्कार :जिहाद का हथियार
    जिहाद दुनिया का सबसे घृणित कार्य और सबसे निंदनीय विचार है .लेकिन इस्लाम में इसे परम पुण्य का काम बताया गया है .जिहाद इस्लाम का अनिवार्य अंग है .मुहम्मद जिहाद से दुनिया को इस्लाम के झंडे के नीचे लाना चाहता था .मुहलामानों ने जिहाद के नाम पर देश के देश बर्बाद कर दिए .हमेशा जिहादियों के निशाने पर औरतें ही रही हैं .क्योंकि औरतें अल्लाह नी नजर में भोग की वस्तु हैं .और बलात्कार जिहाद का प्रमुख हथियार है .मुसलमानों ने औरतों से बलात्कार करके ही अपनी संख्या बढाई थी .मुहम्मद भी बलात्कारी था .मुसलमान यही परम्परा आज भी निभा रहे है .यह रसूल की सुन्नत है ,कुरान के अनुसार मुसलमानों को वही काम करना चाहिए जो मुहम्मद ने किये थे .कुरान में लिख है-

    “जो रसूल की रीति चली आ रही है और तुम उस रीति(सुन्नत )में कोई परवर्तन नहीं पाओगे “सूरा -अल फतह 48 :23

    “यह अल्लाह की रीति है यह तुम्हारे गुजर जाने के बाद भी चलती रहेगी .तुम इसमे कोई बदलाव नहीं पाओगे .सूरा -अहजाब 33 :62
    “तुम यह नहीं पाओगे कि कभी अल्लाह की रीति को बदल दिया हो ,या टाल दिया गया हो .सूरा -फातिर 33 :62

    यही कारण है कि मुसलमान अपनी दुष्टता नही छोड़ना चाहते .जिसे लोग पाप और अपराध मानते हैं ,मुसलमान उसे रसूल की सुन्नत औ अपना धर्म मानते है .और उनको हर तरह के कुकर्म करने पर शर्म की जगह गर्व होता है .बलात्कार भी एक ऐसा काम है .जो जिहादी करते है –

    1 -बलात्कार जिहादी का अधिकार है

    “उकावा ने कहा की रसूल ने कहा कि जिहाद में पकड़ी गई औरतों से बलात्कार करना जिहादिओं का अधिकार है .

    बुखारी -जिल्द 1 किताब 5 हदीस 282

    “रसूल ने कहा कि अगर मुसलमान किसी गैर मुस्लिम औरत के साथ बलात्कार करते हैं ,तो इसमे उनका कोई गुनाह नहीं है .यह तो अल्लाह ने उनको अधिकार दिया है ,औ बलात्कार के समय औरत को मार मी सकते हैं”

    बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 132

    बुखारी -जिल्द 1 किताब 52 हदीस 220

  51. nafees mali–2 -जिहाद में बलात्कार जरूरी है

    सईदुल खुदरी ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि सामूहिक बलात्कार करने से लोगों में इस्लाम की धाक बैठ जाती है .इसलिए जिहाद में बलात्कार करना बहुत जरूरी है .बुखारी जिल्द 6 किताब 60 हदीस 139

    3 -बलात्कार से इस्लाम मजबूत होता है

    “इब्ने औंन ने कहा कि,रसूल ने कहा कि किसी मुसलमान को परेशां करना गुनाह है ,और गैर मुस्लिमों को क़त्ल करना और उनकी औरतों के साथ बलात्कार करना इस्लाम को आगे बढ़ाना है.बुखारी -जिल्द 8 किताब 73 हदीस 70

    “रसूल ने कहा कि मैंने दहशत और बलात्कार से लोगों को डराया ,और इस्लाम को मजबूत किया .बुखारी -जिल्द 4 किताब 85 हदीस 220

    “रसूल ने कहा कि ,अगर काफ़िर इस्लाम कबूल नहीं करते ,तो उनको क़त्ल करो ,लूटो ,और उनकी औरतों से बलात्कार करो .और इस तरह इस्लाम को आगे बढ़ाओ और इस्लाम को मजबूत करो.बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 464

    4 -माल के बदले बलात्कार

    “रसूल ने कहा कि जो भी माले गनीमत मिले ,उस पर तुम्हारा अधिकार होगा .चाहे वह खाने का सामान हो या कुछ और .अगर कुछ नहीं मिले तो दुश्मनों कीऔरतों से बलात्कार करो ,औए दुश्मन को परास्त करो .बुखारी -जिल्द 7 किताब 65 हदीस 286 .

    (नोट -इसी हदीस के अनुसार बंगलादेश के युद्ध में पाकिस्तानी सेना ने बलात्कार किया था )

    5 -बलात्कार का आदेश ‘

    “सैदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने अपने लोगों (जिहादियों )से कहा ,जाओ मुशरिकों पर हमला करो .और उनकी जितनी औरतें मिलें पकड़ लो ,और उनसे बलात्कार करो .इस से मुशरिकों के हौसले पस्त हो जायेंगे .बुखारी -जिल्द 3 किताब 34 हदीस 432

    6 -माँ बेटी से एक साथ बलात्कार

    “आयशा ने कहा कि .रसूल अपने लोगों के साथ मिलकर पकड़ी गई औरतों से सामूहिक बलात्कार करते थे .और उन औरतीं के साथ क्रूरता का व्यवहार करते थे .बुहारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 67

    “सैदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने 61 औरतों से बलात्कार किया था .जिसमे सभी शामिल थे .औरतों में कई ऎसी थीं जो माँ और बेटी थीं हमने माँ के सामने बेटी से औए बेटी के सामने माँ से बलात्कार किया .मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3371 और बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 288

    7 -बलात्कार में जल्दी नहीं करो

    “अ ने कहा कि रसूल ने कहा कि ,पकड़ी गयी औरतो से बलात्कार में जल्दी नहीं करो .और बलात्कार ने जितना लगे पूरा समय लगाओ ”

    बुखारी -जिल्द 2 किताब 23 हदीस 446 .

    अब जो लोग मुसलमानों और मुहम्मद को चरित्रवान और सज्जन बताने का दवा करते हैं ,वे एक बार फिर से विचार करे, इस्लाम में अच्छाई खोजना मल-मूत्र में सुगंध खोजने कि तरह है .आप एक बार मुस्लिम ब्लोगरो द्वारा इस्लाम और मुहम्मद के बारे में लिखी हुई झूठी बातों को पढ़िए फिर दिए तथ्यों पर विचार करके फैसला कीजिये
    अधिक जानकारी के लिए यह अंगेजी ब्लॉग देखें

  52. nafees mali–—-बलात्कार :जिहाद का हथियार
    जिहाद दुनिया का सबसे घृणित कार्य और सबसे निंदनीय विचार है .लेकिन इस्लाम में इसे परम पुण्य का काम बताया गया है .जिहाद इस्लाम का अनिवार्य अंग है .मुहम्मद जिहाद से दुनिया को इस्लाम के झंडे के नीचे लाना चाहता था .मुहलामानों ने जिहाद के नाम पर देश के देश बर्बाद कर दिए .हमेशा जिहादियों के निशाने पर औरतें ही रही हैं .क्योंकि औरतें अल्लाह नी नजर में भोग की वस्तु हैं .और बलात्कार जिहाद का प्रमुख हथियार है .मुसलमानों ने औरतों से बलात्कार करके ही अपनी संख्या बढाई थी .मुहम्मद भी बलात्कारी था .मुसलमान यही परम्परा आज भी निभा रहे है .यह रसूल की सुन्नत है ,कुरान के अनुसार मुसलमानों को वही काम करना चाहिए जो मुहम्मद ने किये थे .कुरान में लिख है-

    “जो रसूल की रीति चली आ रही है और तुम उस रीति(सुन्नत )में कोई परवर्तन नहीं पाओगे “सूरा -अल फतह 48 :23

    “यह अल्लाह की रीति है यह तुम्हारे गुजर जाने के बाद भी चलती रहेगी .तुम इसमे कोई बदलाव नहीं पाओगे .सूरा -अहजाब 33 :62
    “तुम यह नहीं पाओगे कि कभी अल्लाह की रीति को बदल दिया हो ,या टाल दिया गया हो .सूरा -फातिर 33 :62

    यही कारण है कि मुसलमान अपनी दुष्टता नही छोड़ना चाहते .जिसे लोग पाप और अपराध मानते हैं ,मुसलमान उसे रसूल की सुन्नत औ अपना धर्म मानते है .और उनको हर तरह के कुकर्म करने पर शर्म की जगह गर्व होता है .बलात्कार भी एक ऐसा काम है .जो जिहादी करते है –

    1 -बलात्कार जिहादी का अधिकार है

    “उकावा ने कहा की रसूल ने कहा कि जिहाद में पकड़ी गई औरतों से बलात्कार करना जिहादिओं का अधिकार है .

    बुखारी -जिल्द 1 किताब 5 हदीस 282

    “रसूल ने कहा कि अगर मुसलमान किसी गैर मुस्लिम औरत के साथ बलात्कार करते हैं ,तो इसमे उनका कोई गुनाह नहीं है .यह तो अल्लाह ने उनको अधिकार दिया है ,औ बलात्कार के समय औरत को मार मी सकते हैं”

    बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 132

    बुखारी -जिल्द 1 किताब 52 हदीस 220

    2 -जिहाद में बलात्कार जरूरी है

    सईदुल खुदरी ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि सामूहिक बलात्कार करने से लोगों में इस्लाम की धाक बैठ जाती है .इसलिए जिहाद में बलात्कार करना बहुत जरूरी है .

    बुखारी जिल्द 6 किताब 60 हदीस 139

    3 -बलात्कार से इस्लाम मजबूत होता है

    “इब्ने औंन ने कहा कि,रसूल ने कहा कि किसी मुसलमान को परेशां करना गुनाह है ,और गैर मुस्लिमों को क़त्ल करना और उनकी औरतों के साथ बलात्कार करना इस्लाम को आगे बढ़ाना है.बुखारी -जिल्द 8 किताब 73 हदीस 70

    “रसूल ने कहा कि मैंने दहशत और बलात्कार से लोगों को डराया ,और इस्लाम को मजबूत किया .बुखारी -जिल्द 4 किताब 85 हदीस 220

    “रसूल ने कहा कि ,अगर काफ़िर इस्लाम कबूल नहीं करते ,तो उनको क़त्ल करो ,लूटो ,और उनकी औरतों से बलात्कार करो .और इस तरह इस्लाम को आगे बढ़ाओ और इस्लाम को मजबूत करो.बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 464

    4 -माल के बदले बलात्कार

    “रसूल ने कहा कि जो भी माले गनीमत मिले ,उस पर तुम्हारा अधिकार होगा .चाहे वह खाने का सामान हो या कुछ और .अगर कुछ नहीं मिले तो दुश्मनों कीऔरतों से बलात्कार करो ,औए दुश्मन को परास्त करो .बुखारी -जिल्द 7 किताब 65 हदीस 286 .

    (नोट -इसी हदीस के अनुसार बंगलादेश के युद्ध में पाकिस्तानी सेना ने बलात्कार किया था )

    5 -बलात्कार का आदेश ‘

    “सैदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने अपने लोगों (जिहादियों )से कहा ,जाओ मुशरिकों पर हमला करो .और उनकी जितनी औरतें मिलें पकड़ लो ,और उनसे बलात्कार करो .इस से मुशरिकों के हौसले पस्त हो जायेंगे .बुखारी -जिल्द 3 किताब 34 हदीस 432

    6 -माँ बेटी से एक साथ बलात्कार

    “आयशा ने कहा कि .रसूल अपने लोगों के साथ मिलकर पकड़ी गई औरतों से सामूहिक बलात्कार करते थे .और उन औरतीं के साथ क्रूरता का व्यवहार करते थे .बुहारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 67

    “सैदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने 61 औरतों से बलात्कार किया था .जिसमे सभी शामिल थे .औरतों में कई ऎसी थीं जो माँ और बेटी थीं हमने माँ के सामने बेटी से औए बेटी के सामने माँ से बलात्कार किया .मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3371 और बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 288

    7 -बलात्कार में जल्दी नहीं करो

    “अ ने कहा कि रसूल ने कहा कि ,पकड़ी गयी औरतो से बलात्कार में जल्दी नहीं करो .और बलात्कार ने जितना लगे पूरा समय लगाओ ”

    बुखारी -जिल्द 2 किताब 23 हदीस 446 .

    अब जो लोग मुसलमानों और मुहम्मद को चरित्रवान और सज्जन बताने का दवा करते हैं ,वे एक बार फिर से विचार करे, इस्लाम में अच्छाई खोजना मल-मूत्र में सुगंध खोजने कि तरह है .आप एक बार मुस्लिम ब्लोगरो द्वारा इस्लाम और मुहम्मद के बारे में लिखी हुई झूठी बातों को पढ़िए फिर दिए तथ्यों पर विचार करके फैसला कीजिये

  53. nafees mali–सम्भोग जिहाद !
    इस्लाम और जिहाद एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते . यदि इस्लाम शरीर है ,तो जिहाद इसकी आत्मा है . और जिस दिन इस्लाम से जिहाद निकल जायेगा उसी दिन इस्लाम मर जायेगा . इसीलिए इस्लाम को जीवित रखने के लिए मुसलमान किसी न किसी बहाने और किसी न किसी देश में जिहाद करते रहते हैं . इमका एकमात्र उद्देश्य विश्व के सभी धर्मों , संसकृतियों को नष्ट करके इस्लामी हुकूमत कायम करना है . अभी तक तो मुसलमान आतंकवाद का सहरा लेकर जिहाद करते आये थे ,लेकिन इसी साल के अगस्त महीने में जिहाद का एक नया और अविश्वसनीय स्वरूप प्रकट हुआ है ,जो कुरान से प्रेरित होकर बनाया गया है . लोगों ने इसे “सेक्स जिहाद ( Sex Jihad ) का नाम दिया है .चूंकि जिहादियों की मदद करना भी जिहाद माना जाता है ,इसलिए सीरिया में चल रहे युद्ध ( जिहाद ) में जिहादियों की वासना शांत करने के लिए औरतों की जरुरत थी . जिसके लिए अगस्त में बाकायदा एक फ़तवा जारी किया गया था . और उसे पढ़ कर ट्यूनीसिया की औरतें सीरिया पहुँच गयी थी .और जिहादियों के साथ सम्भोग करने के लिए तैयार हो गयीं ,और मुल्लों ने कुरान का हवाला देकर इस निंदनीय कुकर्म को जायज कैसे ठहरा दिया इस लेख में इसी बात को स्पष्ट किया जा रहा है . ताकि लोग इस्लाम् के इस घिनावने असली रूप को देख सकें ,
    1-जिहाद अल्लाह को प्रिय है
    अल्लाह चाहता है कि मुसलमान जिहाद के लिए अपने बाप ,भाई और पत्नियों को भी छोड़ दें ,तभी अल्लाह खुश होगा , जैसा की कुरान में कहा है
    “अल्लाह तो उन्हीं लोगों को अधिक पसंद करता है ,जो अल्लाह की ख़ुशी के लिए पंक्ति बना कर जिहाद करते हैं ” सूरा -अस सफ 61 :4
    ” हे नबी कहदो ,तुम्हें अपने बाप ,भाई , पत्नियाँ और जो माल तुमने कमाया है ,जिन से तुम जितना प्रेम करते हो , और उनके छूट जाने का डर लगा रहता है .लेकिन उसकी तुलना में अल्लाह के रसूल को जिहाद अधिक प्रिय है ” सूरा -तौबा 9 :24

    2-जिहाद में औरतों से सम्भोग
    मुसलमान जितने भी अपराध और कुकर्म करते हैं , सब कुरान से प्रेरित होते हैं , क्योंकि कुरान हरेक कुकर्म को जायज ठहरता है .जिस से अपराधियों की हिम्मत बढ़ जाती है , और “सेक्स जिहाद ” कुरान की इस आयत के आधार पर किया जा रहा है ,

    ” اللَّاتِي هَاجَرْنَ مَعَكَ وَامْرَأَةً مُؤْمِنَةً إِنْ وَهَبَتْ نَفْسَهَا لِلنَّبِيِّ إِنْ أَرَادَ النَّبِيُّ ”
    ” हे नबी हमने तुम्हारे लिए वह सभी ईमान वाली ( मुस्लिम ) औरतें हलाल कर दी हैं ,जो रसूल के उपयोग के लिए खुद को ” हिबा- هِبة ” ( समर्पित ) कर दें ” सूरा -अहजाब 33: 50
    ” and believing woman who offers herself freely use to the Prophet -Sura-ahzab33:50
    नोट -अरबी शब्द हिबा का अर्थ अपनी किसी चीज दूसरों को उपयोग के लिए सौंप देना , हिबा कुछ समय के लिए और हमेशा के लिए भी हो सकता है . हिबा में मिली गयी चीज का जैसे चाहें उपयोग किया जा सकता है . चाहे वह औरत हो या कोई वस्तू

    3-जिहाद्के लिए औरतों का समर्पण
    सामान्यतः एक चरित्रवान ,और शादीशुदा औरत किसी भी दशा में खुद को दूसरे मर्द के हवाले नहीं करेगी , जबकि उस को यह भी पता हो कि उसके साथ सहवास किया जायेगा .लेकिन मुहम्मद साहब ने कुरान में ऐसे नीच काम को भी धार्मिक कार्य बना दिया . जिसका पालन आज भी पालन कर रहे है , इसके पीछे यह कारण है , कि इस्लाम औरत को भोगने की व चीज है .मुहम्मद साहब जब भी जिहाद के लिए जाते थे ,तो अपनी औरतों को घर में बंद कर देते थे , और जिहादियों के साथ नयी औरतें पड़ते रहते थे . और जिहादी नयी औरतों के लालच में अपनी औरतें रसूल के हवाले कर देते थे .खुद को रसूल के हिबा करने के पीछे यह ऐतिहासिक घटना है , हिजरी सन 5 के शव्वाल महीने में मुहम्मद साहब को जब यह पता चला कि मदीना के सभी कबीले के लोग उनके विरुद्ध युद्ध की तयारी कर रहे हैं .और उन्होंने खुद के बचाव के लिये खन्दक भी खोद रखी है . तब मुहम्मद साहब ने खुद आगे बढ़ कर उन पर हमला करने के कूच का हुक्म दे दिया . इसके लिए 1500 तलवारें 300 कवच , 2000 भाले 1500 ढालें जमा कर लीं थी .इस जिहादी लस्कर में जिहादियों की औरतें भी थी . जिहादी तो युद्ध में नयी औरतों के लालच में गए थे . और अपनी औरतें रसूल को हिबा कर गए थे . और रसूल ने उन औरतों के साथ सम्भोग को जायज बना दिया , तभी कुरान की यह आयत नाजिल हुई थी .जिस के अनुसार खुद को जिहाद के लिए अर्पित करने वाली औरतों से सम्भोग करना जायज है .

    4-जिहाद अल निकाह
    अंगरेजी अखबार डेली न्यूज (DailyNews ) दिनांक 20 सितम्बर 2013 में प्रकाशित खबर के अनुसार सीरिया में होने वाले युद्ध ( जिहाद ) में जिहादियों लिए ऐसी औरतों की जरुरत थी , जो जिहादियों के साथ सम्भोग करके उनकी वासना शांत कर सकें , ताकि वह बिना थके जिहाद करते रहे, इसके लिए अगस्त के अंत में एक सुन्नी मुफ़्ती ने फतवा भी जारी कर दिया था . जो ” फारस न्यूज ( FarsNews ) छपा था .इस फतवे की खबर पढ़ते ही ” ट्यूनीसिया ( Tunisia ) की हजारों विवाहित और कुंवारी औरतें सीरिया रवाना हो गईं .और जिहाद के नाम पर जिहादियों के साथ सम्भोग करने के लिए राजी हो गयीं . ट्यूनिसिया के ” आतंरिक मामले के के मंत्री ( Interior Minister )”लत्फी बिन जद्दू – لطفي بن جدو ” ने ट्यूनिसिया की National Constituent Assembly में बड़े गर्व से बताया कि जो औरतें सीरिया गयी है ,उनमे अक्सर ऐसी औरतें हैं ,जो एक दिन में 20 -30 और यहांतक 100 जिहादियों के साथ सम्भोग कर सकती हैं .और जो औरतें गर्भवती हो जाती हैं , उन्हें वापिस भेज दिया जाता है , जिस मुफ़्ती ने इस प्रकार के जिहाद कफतावा दिया था ,उसने इस का नाम ” जिहाद अल निकाह – الجهاد النِّكاح ” का नाम दिया है .सुन्नी उल्रमा के अनुसार यह एक ऐसा पवित्र और वैध काम है ,जिसमे एक औरत कई कई जिहादियों के साथ सम्भोग करके उनकी वासना शांत कराती है .लत्फी बिन जददू ने यह भी बताया कि मार्च से लेकर अब तक छह हजार ( 6000 )औरतें सीरिया जा चुकी हैं ,और कुछ की आयु तो केवल 14 साल ही है .
    http://www.hurriyetdailynews.com/tunisian-women-waging-sex-jihad-in-syria-minister.aspx?pageID=238&nID=54822&NewsCatID=352

    5-सेक्स का फ़तवा
    किसी भी विषय या समस्या के बारे में कुरान के आधार पर जोभी धार्मिक निर्णय किया जाता है ,उसे फतवा कहा जाता है , और मुसलामनों के लिए ऐसे फतवा का पालन करना अनिवार्य हो जाता है . चूँकि इन दिनों सीरिया में जिहाद हो रहा है , जिसमें हजारों जिहादी लगे हुए हैं .और उनकी वासना शांत करने के लिए औरतों की जरुरत थी , इस लिए एक सुन्नी मुफ़्ती ” शेख मुहम्मद अल आरिफी – شيخ محمّد العارفي ” ने इसी साल अगस्त में एक फतवा जारी कर दिया था ,इस फतवा में कहा है कि सीरिया के जिहादियों की कामेच्छा ( sexual desires ) पूरी करने के लिए और शत्रु को मारने उनके निश्चय में मजबूती ( sexual desires and boost their determiation in killing Syrians.
    प्रदान करने के लिए ” सम्भोग विवाह” यानी “अजवाज अल जमाअ -الزواج الجماع ” जरूरी (intercourse marriages )है .फतवा में कहा है ,जो भी औरत इस प्रकार के सेक्स से जिहादियों की मदद करेगी उसे जन्नत का वादा किया जाता है ( He also promised “paradise” for those who marry the militants )

    ” ووعد أيضا “الجنة” بالنسبة لأولئك الذين يتزوجون من المسلحين ”
    यह फतवा कुरान की इस आयत के आधार पर जारी किया गया है ,
    ” जिन लोगों ने अपने मन और शरीर से जिहाद किया तो ऐसे लोगों का दर्जा सबसे ऊंचा माना जाएगा ” सूरा -तौबा 9 :29

    6-जिहाद के लिए योनि संकोचन
    मुसलमान जानते हैं कि भारत में अभी प्रजातंत्र है , और इसमे जनसंख्या का महत्त्व होता है .इसलिए वह लगातार बच्चे पैदा करने में लगे रहते हैं .और लगतार बच्चे पैदा करने से उनकी औरतों योनि इतनी ढीली हो जाती है ,कि उसमे उनका पति अपना सिर घुसा कर अन्दर देख सकता है .और अपनी औरतों की योनि को संकोचित ( Vaginal Shrink ) करवाने के लिए धनवान मुसलमान ” हिम्नोप्लास्टी -hymenoplasty ” नामक ओपरेशन करवा लेते थे .चूंकि सीरिया में सेक्स जिहाद में एक एक औरत दिन में सौ सौ जिहादियों के साथ सम्भोग करा रही है , जिस से उनकी योनि ढीली हो जाती है . और युद्ध के समय ओपरेशन करवाना संभव नहीं था .इसलिए पाकिस्तान की एक दवा कंपनी( Pakistan’s pharmacies ) ने एक क्रीम तैयार की है .जो कराची से सीरिया भेजी जा रही है .पाकिस्तान के अखबार “एक्सप्रेस ट्रिब्यून ( Express Tribune ) में दिनांक20 अगस्त 2013 की खबर के अनुसार कराची में इन दिनों ” योनि संकोचन ( Vaginal Shrink Cream,” ) ले लिए एक क्रीम बिक रही है . जिसे लोग वर्जिन क्रीम ( Virgin Cream” ) भी कह रहे हैं .इसमे उत्पादक ने दावाकिया है कि कितनी भी ढीली योनि हो , इस क्रीम के प्रयोग से 18 साल की कुंवारी लड़की की योनि जैसी सिकुड़ी और सकरी बन जाएगी .इसी अखबार की सह संपादक “हलीमाँ मंसूर “खुद इस क्रीम को देखा , जिसके डिब्बे पर एक हंसती हुई लड़की की तस्वीर है .यह क्रीम दो नामों से बिक रही है 1. B-Virgin’, (the package displaying a youthful girl smiling at white flowers).2 . और दूसरी का नाम 18 Again (Vaginal Shrink Cream,) है . जो शीशी में मिल रही है .इस पर लिखा है ” promise to restore a woman’s virginity. “यह क्रीम बड़ी मात्रा में पाकिस्तान से सीरिया भेजी जा रही है , ताकि संकुचित योनि पाकर जिहादी दिल से जिहाद करते रहें .
    ‘Re-virginising’ in a tube: ‘Purity’ for sale at Pakistani pharmacies

    http://blogs.tribune.com.pk/story/18175/re-virginising-in-a-tube-purity-for-sale-at-pakistani-pharmacies/

    7-सेक्स जिहाद विडिओ
    शेख मुहम्मद अल आरिफी ने टी वी पर जो सेक्स जिहाद का फतवा दिया था , वह यू ट्यूब पर मौजूद है ,इस विडिओ का नाम है , जिहाद अल निकाह -jihad al nikah- جهاد النكاح … فتوى حقيقة او بدعة ”

    http://www.youtube.com/watch?v=2ftO8Zkvl18

    यह लेख पढनेके बावजूद जो लोग इस्लाम को धर्म मानते हैं और मुसलमानों से सदाचारी होने की उम्मीद रखते हैं ,उन्हें अपने दिमाग का इलाज करवा . वास्तव में देश में जितने भी बलात्कार हो रहे हैं , सबके पीछे इसलाम की तालीम है .जिसका भंडाफ़ोड़ करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है .समझ लीजिये इस्लाम का अर्थ शांति नहीं समर्पण ( surrendar ) है . जिहाद का अर्थ परिश्रम करना नहीं आतंक ( terror ) है , कुरबानी का अर्थ त्याग नहीं जीव हत्या ( slaughter ) है .और रहमान का अर्थ दयालु नहीं हत्यारा ( killer ) है .यदि इतना भी समझ लोगे तो इस्लाम को समझ लोगे .

  54. nafees mali–—–2-आतंकवाद की जड़ कुरान ही है ?

    जकारिया नायक जैसे मक्कार कितना भी झूठा प्रचार करें कि कुरान आपसी प्रेम औए शांति का सन्देश देती है . लेकिन कुरान की सभी आयतों विश्लेषण करने पर पता चलता है कि आतंकवाद की जड़ कुरान ही है . कुरान शांति की नहीं अशांति ,शिक्षा देती है .कुरान की नजर में औरतें जहन्नम की ईंधन हैं .और सभी गैर मुस्लिम क़त्ल के योग्य हैं .कुरान शिक्षा , विज्ञानं और तकनीकी को पसंद नहीं करती .संक्षिप्त में इसका विश्लेषण दिया जा रहा है .

    -कुरान की आयतों का विश्लेषण
    1 .काफिरों के विरुद्ध – 52 .9 %
    2 – अल्लाह के बारे में -17 .61 %
    3 .ईमान के बारे में -14 .7 %
    4 .आखिरत के बारे में -11 .8
    5 .छोटे अपराधों के बारे में -3 .4 %
    6.औरतों के अधिकार -3 .0 %

    http://www.amberpawlik.com/RandomStudy1.html

    जैसे लोग जब चावल पकाते हैं ,तो बर्तन से कुछ चावल निकाल कर समझ लेते हैं कि वह पक गए हैं कि नहीं .इसी तरह कुरान की इन कुछ आयातों को पढ़कर लोग कुरान के बारे में सब समझ जायेंगे .इस से बड़ा और क्या झूठ हो सकता है कि मुसलमान ऐसे अल्लाह को रहमान और रहीम कहते हैं .जबकि कुरान में 164 ऐसी आयतें मौजूद हैं जिन में आतंक , हत्या , गैर मुस्लिमों पर अत्याचार , जबरन धर्म परिवर्तन महिलाओं निकृष्ट प्राणी बताने और गुलाम बनाकर खरीदने बेचने की शिक्षा दी गयी है .दी गयी साईट में ऐसी आयातों की पूरी लिस्ट दी गयी है ,

    http://www.answering-islam.org/Quran/Themes/jihad_passages.html#horizontal

    3-जिहादी लक्ष्य सन 2030 ई .
    आज जो जिहादी विचार वाले लोग भारत को इस्लामी देश बनाने की योजना बना रहे हैं , वह भली भांति समझ गए है कि प्रजातंत्र में केवल संख्याबल का महत्व होता है . इसमे घोड़ा और गधा के गुण नहीं संख्या गिनी जाती है , इसलिए एक तरफ तो मुसलमान अपनी संख्या बढ़ाने में लगे रहते हैं ,और दूसरी तरफ खुद को अल्पसंख्यक बता कर रोज नयी नयी सुविधाओं की मांग करते रहते हैं .और सत्ता की लोभी सरकार वोटों की खातिर मुस्लिमों के तुष्टिकरण में लगी रहती है .हद तो जब हो जाती है कि बड़े से बड़े जघन्य अपराधी को या तो माफ़ कर दिया जाता है ,या कम सजा देकर रिहा कर दिया जाता है . और उस अपराधी को फिर से अपराध करने का अवसर दे दिया जाता है . दब्बू और बिकाऊ मीडिया भी उन अपराधियों के नाम नहीं देते .उन्हें डर होता है कि नाम देने से सरकार उन पर सम्प्रदायवादी होने का आरोप लगा दगी .इसीलिए अपराधियों के हौसले बढे हुए हैं . वास्तव में यह अपराध भी जिहाद का एक नया रूप है .
    अब अपराध ( जिहाद ) करने के लिए 18 साल की कम आयु के लड़कों का प्रयोग किया जा रहा है . ताकि कम से कम सजा मिले ,और जल्दी रिहाई हो सके .भारत को इस्लामी देश बनाने की योजना सफल करने के लिए इन जिहादियों ने नयी तरकीब निकाली है कि पहले तो देश में इतने अपराध करो कि देश में अशांति ,अव्यवस्था और अफरातफरी का वातावरण पैदा हो जाये .फिर सीमा पार से उनके भाई जिहादी देश में घुस जाएँ , और उनके साथ सेकुलर भी मिल जायेगे .जिहादियों ने इसके लिए सन 2030 का टारगेट तय किया है ,और अगर यही मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति चलती रही ,और हिन्दू सेकुलर बन कर नामर्द बनते रहे तो ,भारत को सन 2050 तक मुस्लिम देश बनने से कोई नहीं बचा सकेगा .!

  55. nafees mali–—–अय्याशी से मरे जिहादी शहीद हैं !!

    आजकल मुस्लिम नौजवान जिहादियों का अंजाम देखकर भी लव जिहाद कर रहे हैं .और इसे एक धार्मिक कार्य मान रहे हैं .और सोच रहे हैं कि ऐसा करने से उनको मरने के बाद शहीद का दर्जा मिल जायेगा .और वे जन्नत में अय्याशी कर सकेंगे .
    आपने यह प्रसिद्ध कहावत जरुर सुनी होगी “हर्र लगे न फिटकरी ,रंग पक्का हो जाये “यह कहावत इस्लाम में जिहाद सम्बन्धी मान्यताओं पर सटीक उतरती है .इस बात को स्पष्ट करने के लिए हमें कुरान और कुछ प्रमुख हदीसों का हवाला होगा ,जिसे बिन्दुवार दिया गया है .
    1-जिहाद अल्लाह को प्रिय है
    इस्लाम में जिहाद को अनिवार्य ,और अल्लाह की नजर में सबसे प्रिय कार्य बताया गया है .कुरान में कहा है कि,
    “अल्लाह उन लोगों लो प्यार करता है ,जो पंक्ति बनाकर जिहाद करते है “सूरा-अस सफ्फ 61 :4
    “जिहाद करना अल्लाह कि नजर में सबसे प्रिय कार्य है “सूरा -तौबा 9 :24
    आजकल जकारिया नायक जैसे इस्लामी प्रचारक यह कहते हुए नहीं थकते कि ,जिहाद असल में एक संघर्ष (struggle ) है जो धर्म की रक्षा करने ,अपना बचाव करने ,पीड़ितों को उनका अधिकार दिलवाने और शांति स्थापना के लिए किया जाता है .लेकिन जिहाद का असली मकसद कुछ और ही है ,जो यहाँ दिया जा रहा है .
    2-जिहादियों के लिए प्रलोभन
    लोग देश ,धर्म और न्याय की रक्षा के लिए बिना किसी प्रतिफल की इच्छा के अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते है ,यहाँतक अपने प्राणों का बलिदान कर देते है .अगर जिहाद का यही मकसद है तो ,अल्लाह जिहादियों को लालच क्यों देता है .जैसा कुरान और इन हदीसों में है –
    “जितने भी लोग अपनी जान लगाकर जिहाद करेंगे उनके लिए फायदा ही फायदा होगा “सूरा -तौबा 9 :88
    “हे रसूल कहो जो व्यक्ति जिहाद के लिए हथियार खरीदने के लिए एक दिरहम देगा ,तो जीत के बाद उसे एक दिरहम के बदले 70 हजार दीनार दिए जायेंगे ”
    इब्न माजा -किताब 4 हदीस 2761
    “रसूल ने कहा कि जो व्यक्ति जिहाद के लिए बाहर जायेगा तो ,अल्लाह उसके घर कि रक्षा करेगा .और जब वह वापस आयेगा तो उसे लूट का माल और साथ में औरतें भी मिलेंगीं “मुस्लिम -किताब 3 हदीस 4626
    “रसूल ने कहा मैं तुम्हें एक खुशखबरी देता हूँ ,जब मुजाहिद वापिस आएंगे तो उनके लिए बगीचे तैयार मिलेंगे ”
    बुखारी -जिल्द 1 किताब 52 हदीस 48
    “इसी प्रकार ”सर्वोत्तम जिहाद वह है जिसमें घोड़ा और सवार दोनों ही घायल हो जायें।” इब्न माजाह, खं. 4 हदीस 2794,
    3-अय्याशी के लिए जिहाद
    इस्लाम में औरतों को माल (property -booty ) माना जाता है .जिहादी सबसे पहले औरतें ही पकड़ते हैं .ऐसी पकड़ी गयी औरतों को लौंडी कहा जाता है ,या रखैल कहते हैं .इन से सहवास करना कुरान में जायज कहा है .और जब औरत से मन भर जाता था तो उनको बेच देते है ,कुरान की तरह, हदीसों में भी विजित गैर-मुसलमानों के धन, सम्पत्ति व स्त्रियों पर विजेता मुसलमानों का अधिकार होगा.चूंकि जिहादियों को असीमित अय्याशी करने की सुविधा शहीद हो जाने पर जन्नत में ही मिल सकती थी .इसलिए मुसलमानों ने यहीं पर भोग विलास की तरकीब निकाल ली .और पकड़ी गयी औरतों से सहवास जो जायज बना दिया ,यह बार मिर्जा ग़ालिब ने फारसी में लिखा है ,
    “सुखने सादा दिलम रा न फरेबदअय ग़ालिब ,बोसये चंद नकद गंज दिहाने बिमन आर “यानि मेरा दिल उधार बातों से नहीं फिसलता ,मुझे तो किसी सुंदरी का नकद चुम्बन चाहिए “कुरान ने जिहादियों को यही देनेका वादा किया है .इसीलिए जिहाद हो रहा है .सबूत देखिये ,
    “हमने तुम्हें युद्ध में पकड़ी हुई औरतें (लौंडियाँ ) हलाल कर दी हैं ,और अगर ( इस्तेमाल के बाद ) तुम्हें वह पसंद नहीं आयें ,तो तुम दूसरी औरतें बदल सकते हो ”
    सूरा -अहजाब 33 :52
    “अपनी पत्नियों के साथ जो औरतें तुम्हारे कब्जे में हों ,उनके साथ सहवास करने में कोई निंदनीय काम नहीं है “सूरा -मआरिज 70 :30
    इस तरह सिर्फ जिहादी ही अय्याशी नहीं करते हैं ,उनके नाबालिग लडके भी यही करते हैं ,जो इन हदीसों से पता चलता है ,
    “रसूल ने कहा कि क्या तुम नहीं जानते कि अल्लाह ने पकड़ी गयी औरतें काफिरों को अपमानित करने के लिए ही तुम्हारी सेवा में दी है ”
    बुखारी -जिल्द 1 किताब 3 हदीस 803
    “रसूल ने कहा कि तुम्हारा अवयस्क लड़का भी बिस्तर (Bed ) का मालिक है .और वह भी पकड़ी गयी औरतों से अवैध सहवास कर सकता है ”
    बुखारी -जिल्द 1 किताब 8 हदीस 808
    The Prophet said, “The boy is for the owner of the bed and the for the person who commits illegal sexual intercourse.”Hadith-vol bk8. hadith no808 Al-Bukhari
    इसी शिक्षा के कारण छोटे बड़े सभी अय्याशी करने में व्यस्त हो गए .और जन्नत को भूल गए .
    4-जिहाद से अरुचि
    कहावत है कि “जहाँ भोग वहां रोग ” जब जिहादी असीमित अय्याशी करने लगे तो भिभिन्न रोगों में ग्रस्त हो गए .और उचित इलाज न मिलाने से बीमार होगर जिहाद से विमुख हो गए .उसी समय एक सहाबी “अबू उबैदा अम्मार बिन इब्नल जर्राह (583-638)” यौन रोग से ग्रस्त हो गया .जो बाद में मर भी गया था .तो जिहादियों में भय व्याप्त हो गया ,वह अगले जन्म कि इच्छा करने लगे .तब मुहम्मद ने उन लोगों से यह कहा कि ,
    “जो इस दुनिया में मर कर दूसरी दुनिया में फिर से आने कि कमाना रखता है ,उसे अल्लाह रह में जिहाद करते हुए कम से कम दस बार मरना पड़ेगा ”
    बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 72
    “रसूल ने कहा कोई व्यक्ति मर कर दोबारा इस दुनिया में फिर से तब तक नहीं असकता ,जब तक वह अल्लाह कि रह में मर कर जिहादियों में वरीयता प्राप्त नहीं कर लेता “बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 53
    5 -जिहादियों की पाठ्यपुस्तक
    मुहम्मद हर हालत में जिहाद चालू रखना चाहता था .और जब लोग काफी अशक्त हो गए तो मुहमद ने उन लोगों से कहा कि ,
    “जो जिहादी पेट के रोग ,प्लेग ,या यौन रोगों के कारण मर जायेगा ,उसे भी शहीद माना जायेगा और वह भी जन्नत का अधिकारी होगा ,जहाँ उसे सारी सुविधाएँ मिलेंगी “बुखारी -जिल्द 1 किताब 7 हदीस 629
    उस समय मुहम्मद ने जिहादियों का हौसला बढ़ने के लिए कई ऐसी ही हदीसें कही थीं .जिसे बाद में “(ابو زكريا يحي بن يوسف انووي ادّمشقي )इमाम अबू जकारिया याहया बिन यूसुफ अन नववी दमिश्की (1234 -1278 ) ने हिजरी 676 में सीरिया में संकलित किया था .इस हदीस के संकलन का नाम ” रियाज उस्सालिहीनRiyadh as-Saaliheen رياض الصالحين” है .इसीको जिहादियों की पाठ्य पुस्तक (The Gardens of the Righteous ) कहा जाता है .इसमे कुल 19 अध्याय है .और 11 अध्याय के भाग 235 में हदीस संख्या 1353 से लेकर 1357 तक अनेकों रोग से मरने वाले जिहादियोंको शहीद बताया गया है .विषय संख्या 235 की 5 हदीसों का शीर्षक है “martyrdom without fight ” उसी का सारांश हिंदी में दिया जा रहा है (अंगरेजी में पूरी किताब की लिंक दी गयी है )देखिये कुकर्म करके मरने वाले भी शहीद कैसे बन जाते हैं ,और जानत में कैसे घुस जाते हैं
    “अबू हुरैरा नेकहा किरसूल ने कहा कि शहीद पांच कारणों से हो सकते है ,प्लेग से , पेट के रोगों के कारण,अति सहवास के कारण ,मकान बनाते समय मलबे से दब कर और अल्लाह के लिए लड़ते हुए मरने वाले “हदीस -1353
    “अबू हुरैरा ने रसूल से पूछा कि आप हम लोगों में किसको शहीद गिनोगे ,तो रसूल ने कहा ऐसे बहुत ही कम लोग होंगे जो अल्लाह की राह में लड़ कर मर कर शहीद होंगे .कुछ बीमारियों के कारण भी शहीद हो जाते हैं ,जैसे प्लेग से ,तपेदिक से ,यौन रोगों के कारण और पानी में डूब कर मरने वाले भी शहीद माने जायेंगे ”
    हदीस -1354
    बाकी तीन हदीसों ,1355 ,1356 और 1357 में अपनी सम्पति ,अपने परिवार कि रक्षा में मरने वाले को और दुश्मन से लड़ते हुए मर जाने वालों को भी शहीद का दर्जा देकर जन्नत का अधिकारी बताया गया है .इसलिए यह हदीसें अधिक महत्वपूर्ण नहीं हैं .इन सभी प्रमाणों से सिद्ध होता है कि यह बात झूठ है कि जिहादी अल्लाह की राह में बिना किसी लोभ और स्वार्थ के जिहाद करते हैं .और मर जाने पर शहीद कहलाते हैं .जबकि अधिकांश जिहादी अय्याशी करके अनेकों रोग होने से भी मर जाते थे .चूँकि उस समय एड (AIDS ) के बारे में पता नहीं था ,इसलिए यौन रोगों को तपेदिक ,प्लेग या गुर्दे का रोग कहा दिया होगा .आज भी मुस्लिम देशों में ऐसे रोगियों से अस्पताल भरे पड़े हैं .फिर भी इन्हीं हदीसों के कारण मुसलमान अय्याशी को ही जिहाद का रूप समझते हैं .इसका परिणाम सद्दाम हुसैन ,कर्नल गदाफी ,ओसामा बिन लादेन के रूप में दुनिया जानती है .औरतबाजी का बुरा नतीजा होता है .और इसमे शक नहीं कि लवजिहाद कभी यही अंजाम होगा !
    जो व्यक्ति अय्याशी को जिहाद और एड्स से मरने वालों को शहीद मानता है उसका दिमाग ख़राब होगा .

  56. nafees mali–—-बलात्कार :जिहाद का हथियार
    जिहाद दुनिया का सबसे घृणित कार्य और सबसे निंदनीय विचार है .लेकिन इस्लाम में इसे परम पुण्य का काम बताया गया है .जिहाद इस्लाम का अनिवार्य अंग है .मुहम्मद जिहाद से दुनिया को इस्लाम के झंडे के नीचे लाना चाहता था .मुहलामानों ने जिहाद के नाम पर देश के देश बर्बाद कर दिए .हमेशा जिहादियों के निशाने पर औरतें ही रही हैं .क्योंकि औरतें अल्लाह नी नजर में भोग की वस्तु हैं .और बलात्कार जिहाद का प्रमुख हथियार है .मुसलमानों ने औरतों से बलात्कार करके ही अपनी संख्या बढाई थी .मुहम्मद भी बलात्कारी था .मुसलमान यही परम्परा आज भी निभा रहे है .यह रसूल की सुन्नत है ,कुरान के अनुसार मुसलमानों को वही काम करना चाहिए जो मुहम्मद ने किये थे .कुरान में लिख है-

    “जो रसूल की रीति चली आ रही है और तुम उस रीति(सुन्नत )में कोई परवर्तन नहीं पाओगे “सूरा -अल फतह 48 :23

    “यह अल्लाह की रीति है यह तुम्हारे गुजर जाने के बाद भी चलती रहेगी .तुम इसमे कोई बदलाव नहीं पाओगे .सूरा -अहजाब 33 :62
    “तुम यह नहीं पाओगे कि कभी अल्लाह की रीति को बदल दिया हो ,या टाल दिया गया हो .सूरा -फातिर 33 :62

    यही कारण है कि मुसलमान अपनी दुष्टता नही छोड़ना चाहते .जिसे लोग पाप और अपराध मानते हैं ,मुसलमान उसे रसूल की सुन्नत औ अपना धर्म मानते है .और उनको हर तरह के कुकर्म करने पर शर्म की जगह गर्व होता है .बलात्कार भी एक ऐसा काम है .जो जिहादी करते है –

    1 -बलात्कार जिहादी का अधिकार है

    “उकावा ने कहा की रसूल ने कहा कि जिहाद में पकड़ी गई औरतों से बलात्कार करना जिहादिओं का अधिकार है .

    बुखारी -जिल्द 1 किताब 5 हदीस 282

    “रसूल ने कहा कि अगर मुसलमान किसी गैर मुस्लिम औरत के साथ बलात्कार करते हैं ,तो इसमे उनका कोई गुनाह नहीं है .यह तो अल्लाह ने उनको अधिकार दिया है ,औ बलात्कार के समय औरत को मार मी सकते हैं”

    बुखारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 132

    बुखारी -जिल्द 1 किताब 52 हदीस 220

    2 -जिहाद में बलात्कार जरूरी है

    सईदुल खुदरी ने कहा कि ,रसूल ने कहा कि सामूहिक बलात्कार करने से लोगों में इस्लाम की धाक बैठ जाती है .इसलिए जिहाद में बलात्कार करना बहुत जरूरी है .बुखारी जिल्द 6 किताब 60 हदीस 139

    3 -बलात्कार से इस्लाम मजबूत होता है

    “इब्ने औंन ने कहा कि,रसूल ने कहा कि किसी मुसलमान को परेशां करना गुनाह है ,और गैर मुस्लिमों को क़त्ल करना और उनकी औरतों के साथ बलात्कार करना इस्लाम को आगे बढ़ाना है.बुखारी -जिल्द 8 किताब 73 हदीस 70

    “रसूल ने कहा कि मैंने दहशत और बलात्कार से लोगों को डराया ,और इस्लाम को मजबूत किया .बुखारी -जिल्द 4 किताब 85 हदीस 220

    “रसूल ने कहा कि ,अगर काफ़िर इस्लाम कबूल नहीं करते ,तो उनको क़त्ल करो ,लूटो ,और उनकी औरतों से बलात्कार करो .और इस तरह इस्लाम को आगे बढ़ाओ और इस्लाम को मजबूत करो.बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 464

    4 -माल के बदले बलात्कार

    “रसूल ने कहा कि जो भी माले गनीमत मिले ,उस पर तुम्हारा अधिकार होगा .चाहे वह खाने का सामान हो या कुछ और .अगर कुछ नहीं मिले तो दुश्मनों कीऔरतों से बलात्कार करो ,औए दुश्मन को परास्त करो .बुखारी -जिल्द 7 किताब 65 हदीस 286 .

    (नोट -इसी हदीस के अनुसार बंगलादेश के युद्ध में पाकिस्तानी सेना ने बलात्कार किया था )

    5 -बलात्कार का आदेश ‘

    “सैदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने अपने लोगों (जिहादियों )से कहा ,जाओ मुशरिकों पर हमला करो .और उनकी जितनी औरतें मिलें पकड़ लो ,और उनसे बलात्कार करो .इस से मुशरिकों के हौसले पस्त हो जायेंगे .बुखारी -जिल्द 3 किताब 34 हदीस 432

    6 -माँ बेटी से एक साथ बलात्कार

    “आयशा ने कहा कि .रसूल अपने लोगों के साथ मिलकर पकड़ी गई औरतों से सामूहिक बलात्कार करते थे .और उन औरतीं के साथ क्रूरता का व्यवहार करते थे .बुहारी -जिल्द 7 किताब 62 हदीस 67

    “सैदुल खुदरी ने कहा कि रसूल ने 61 औरतों से बलात्कार किया था .जिसमे सभी शामिल थे .औरतों में कई ऎसी थीं जो माँ और बेटी थीं हमने माँ के सामने बेटी से औए बेटी के सामने माँ से बलात्कार किया .मुस्लिम -किताब 8 हदीस 3371 और बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 288

    7 -बलात्कार में जल्दी नहीं करो

    “अ ने कहा कि रसूल ने कहा कि ,पकड़ी गयी औरतो से बलात्कार में जल्दी नहीं करो .और बलात्कार ने जितना लगे पूरा समय लगाओ ”

    बुखारी -जिल्द 2 किताब 23 हदीस 446 .

    अब जो लोग मुसलमानों और मुहम्मद को चरित्रवान और सज्जन बताने का दवा करते हैं ,वे एक बार फिर से विचार करे, इस्लाम में अच्छाई खोजना मल-मूत्र में सुगंध खोजने कि तरह है .आप एक बार मुस्लिम ब्लोगरो द्वारा इस्लाम और मुहम्मद के बारे में लिखी हुई झूठी बातों को पढ़िए फिर दिए तथ्यों पर विचार करके फैसला कीजिये

    1. आपने सभी आयते काट छाट के लिखी है। और कुछ आयते अपनी तरफ से लिखी है। जो बिल्कुल गलत है और इस्लाम मे नही है।

  57. nafees mali—-मुहम्मद ने हत्या करके इस्लाम को फैलाया—
    काबा एक मंदिर था जिसमे अलग अलग देवी देवताओं की पूजा हुआ करती थी और सभी अरब वासी सनातन धर्मं को मानते थे जिनको डरा धमका कर धर्म परिवर्तन कराया गया
    1-सल्लम इब्न अबुल हुकैक ( अबू रफ़ी एक विद्वान् और कवि था . इसने अपनी शायरी में कहा था ऐसा अत्याचारी रसूल नहीं हो सकता .इसलिए मुहम्मद ने इसे मार डाला .(सीरतुल रसूल अल्लाह -पेज 714 -715 )
    2-अल नद्र बिन अल हरीसयह अरब का एक शायर था. जब सन 622 से मुहम्मद ने कुरान की आयतें सुना कर अल्लाह की सजा से डराना शुरू किया तो इसने लोगों से कहा यह मुहम्मद की कल्पना है .बाद में गुस्से होकर मुहम्मद ने उसे 3 मार्च सन 624 को क़त्ल करा दिया .(सीरतुल रसूल अल्लाह -पेज 133 -134 )
    3-इब्ने सुनैना यह एक धनवान व्यापारी और कवि था . और कविता में अपने देवताओं कि तारीफ़ कर के लोगों से अपना धर्म नहीं छोड़ने को कहता था . इसलिए मुहम्मद ने उसकी 8 सितम्बर सन 624 को हत्या कर दी .(सुन्नन अबू दाउद- किताब 19 हदीस 2996 )
    4-अब्द अल्लाह इब्ने साद इब्ने अबी सरह यह अरब का कवि था ,जब वह अपनी दो लड़कयों के साथ काबा देवताओं की स्तुति कर रहा था . तभी मुहम्मद ने हमला कर दिया . वह जब जान बचाने के लिए काबा के परदे के पीछे छुप गया तो भी मुहमद ने उसकी लड़कियों के साथ 9 जनवरी सन 630 को हत्या कर दी .( सीरत रसूल अल्लाह पेज 550 )
    5-अबू आफाक यह अरब के एक कबीले का सरदार और मनात देवी का उपासक था . अरबी का विद्वान् था , इसने कहा था कि मैं कुरान से बढ़िया शायरी कर सकता हूँ .इस लिए मुहम्मद ने 4 अप्रेल सन 624 को इसकी हत्या कर दी (इब्न हिशाम -पेज 675 )
    6-असमा बिन्त मरवानयह एक महिला कवियित्री थी .इसके पति का नाम यजीद बिन जैद था .इसके पांच बच्चे थे .इसने मुहमद के बारे में कविता लिखी थी .उसके कारण लोग मुहमद के विरोधी बन गए .नाराज होकर मुहम्मद ने रात में सोते समय उसे बच्चों सहित 30 मार्च सन 624 को हत्या कर दी .(सीरत रसूल अल्लाह पेज -675 -676

    1. आपने सभी आयते काट छाट के लिखी है। और कुछ आयते अपनी तरफ से लिखी है। जो बिल्कुल गलत है और इस्लाम मे नही है।

  58. कुरआन की 24 आयतें जिनके बारे मैं गलतफहमी फेलाई जाती रही है! के कुरआन गैर मुस्लिमों को मारने या जड-मूल से खत्म कर देने का हुक्म देता है! “आइए देखें सच्चाई क्या है?
    इस्लाम, आतंक हैं या आदर्श? यह जानने के लिए मैं कुरआन मजीद की कुछ आयते दे रहा हूं जिन्हे मैने मौलाना फतह मुहम्मद खां जालन्धरी द्वारा अनुवादित और महमूद एण्ड कम्पनी मरोल, पार्इप लाइन, मुम्बर्इ-59 से प्रकाशित कुरआन मजीद से लिया हैं।

    पाठक इस बात को ध्यान में रखें कि कुरआन मजीद के अनुवाद में यदा-कदा (बड़े ब्रेकिट) शब्दों की व्याख्या के लिए लगाए गए हैं। ये ब्रेकिट लेखक की ओर से हैं।यह बात ध्यान देने योग्य हैं कि कुरआन मजीद का अनुवाद करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना पड़ता हैं कि किसी भी आयत का भावार्थ जरा भी बदलने न पाए, क्योंकि किसी भी कीमत पर यह बदला नही जा सकता। इसी लिए अलग-अलग भाषाओं में अलग-अलग अनुवादकों द्वारा कुरआन मजीद के किए अनुवाद का भाव एक ही रहता हैं। गैर-मुस्लिम भार्इ यदि इस अनुवाद के कठिन शब्दों को न समझ पाएं तो वे मधुर सन्देश संगम, र्इ-20, अबुल-फ़ज्ल इंक्लेव, जामिया नगर, नर्इ दिल्ली-25 द्वारा प्रकाशित और मौलाना मुहम्मद खां द्वारा अनुवादित पवित्र कुरआन का भी सहारा ले सकते हैं।

    कुरआन की शुरूआत ‘बिसमिल्लाहिर्रहमानिर्ररहीम’ से होती हैं, जिसका अर्थ हैं-’शुरू अल्लाह का नाम लेकर, जो बड़ा कृपालु अत्यन्त दयालु हैं।
    ध्यान दें। ऐसा अल्लाह, जो बड़ा कृपालु और अत्यन्त दयालु हैं वह ऐसे फ़रमान कैसे जारी कर सकता हैं, जो किसी को कष्ट पहुंचाने वाले हों अथवा हिंसा या आतंक फैलाने वाले हों? अल्लाह की इसी कृपालुता और दयालुता का पूर्ण प्रभाव अल्लाह के पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) के व्यवहारिक जीवन में देखने को मिलता हैं। कुरआन की आयतों से व पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) की जीवनी से पता चलता हैं कि मुसलमानों को उन काफिरों से लड़ने का आदेश दिया गया जो आक्रमणकारी थे,
    अत्याचारी थे। यह लड़ार्इ अपने बचाव के लिए थी। देखें कुरआन मजीद में अल्लाह के आदेश:-“और (ऐ मुहम्मद उस वक्त को याद करो) जब काफिर लोग तुम्हारे बारे में चाल चल रहे थे कि तुमको कैद कर दें या जान से मार डालें या (वतन से) निकाल दे तो (इधर से) वे चाल चल रहे थे और (उधर) खुदा चाल रहा था और खुदा सबसे बेहतर चाल चलने वाला हैं।” (कुरआन, सूरा-8, आयत -30)

    “ये वे लोग है कि अपने घरो से ना-हक निकाल दिए गए, (उन्होने कुछ कुसूर नही किया)। हां, ये कहते हैं कि हमारा परवरदिगार खुदा हैं और अगर खुदा लोगो को एक-दूसरो से न हटाता रहता तो (राहिबो के) पूजा-घर और (र्इसाइयों के) गिरजे और (यहूदियों की) और (मुसलमान की) मस्जिदें, जिनमें खुदा का बहुत-सा जिक्र किया जाता हैं, गिरार्इ जा चुकी होती। और जो शख्स खुदा की मदद करता करता हैं, खुदा उसकी जरूर मदद करता हैं। बेशक खुदा ताकतवाला और गालिब यानी प्रभुत्वशाली हैं।’’ (कुरआन, सूरा-22, आयत-40
    ‘‘ये क्या कहते हैं कि इसने कुरआन खुद से बना लिया हैं? कह दो कि अगर सच्चे हो तो तुम भी ऐसी दस सूरतें बना लाओं और खुदा के सिवा जिस-जिस को बुला सकते हो, बुला भी लो।’’ (कुरआन, सूरा-11, आयत-13)

    ‘‘(ऐ पैगम्बर !) काफिरों का शहरों मे (शानों-शौकत के साथ) चलना-फिरना तुम्हे धोखा न दें।’’ (कुरआन, सूरा-3, आयत-196)

    ‘‘जिन मुसलमानों से (खामखाह) लड़ार्इ की जाती है, उनको इजाजत हैं (कि वे भी लड़े), क्योकि उन पर जुल्म हो रहा हैं और खुदा (उन की मदद करेगा, वह) यकीनन उनकी मदद पर कुदरत रखता है।’’ (कुरआन, सूरा-22, आयत-39)
    •इस्लाम के बारे में झूठा प्रचार किया जाता है कि कुरआन में अल्लाह के आदेशों के कारण ही मुसलमान लोग गैर-मुसलमानों का जीना हराम कर देते है, जबकि इस्लाम मे कही भी निर्दोषों से लड़ने की इजाजत नही हैं, भले ही वे काफिर या मुशरिक या दुश्मन ही क्यो न हों। विशेष रूप से देखिए अल्लाह के ये आदेश:-

    ‘‘जिन लोगों ने तुमसे दीन (धर्म) के बारे में जंग नही की और न तुम को तुम्हारे घरो से निकाला, उनके साथ भलार्इ और इंसाफ का सुलूक करने से खुदा तुमको मना नही करता। खुदा तो इंसाफ करने वालों को दोस्त रखता हैं। ‘‘ (कुरआन, सूरा-60, आयत-8)
    खुदा उन्ही लोगो के साथ तुमको दोस्ती करने से मना करता हैं, जिन्होने तुम से दीन के बारे मे लड़ार्इ की और तुमको तुम्हारे घरो से निकाला और तुम्हारे निकालने मे औरो की मदद की, तो जो लोग ऐसों से दोस्ती करेंगे, वही जालिम हैं।’’ (कुरआन, सूरा-60, आयत-9)

    •इस्लाम मे दुश्मन के साथ भी ज्यादती करना मना है, देखिए:-
    ‘‘और जो लोग तुमसे लड़ते हैं, तुम भी खुदा की राह मे उनसे लड़ो, मगर ज्यादती (अत्याचार) न करना कि खुदा ज्यादती करने वालो को दोस्त नही रखता।’’(कुरआन, सूरा-2, आयत-190)

    ‘‘ये खुदा की आयते है, जो हम तुमको सेहत के साथ (यानी ठीक-ठीक) पढ़कर सुनाते हैं और अल्लाह अहले-आलम (अर्थात् लोगो) पर जुल्म नही करना चाहता।’’ (कुरआन,सूरा-3, आयत-108)
    •इस्लाम का प्रथम उद्देश्य दुनिया में शान्ति की स्थापना हैं, लड़ार्इ तो अन्तिम विकल्प हैं और यही तो आदर्श धर्म हैं, जो कुरआन की नीचे दी गर्इ इस आयत मे दिखार्इ देता हैं:-
    ‘‘(ऐ पैग़म्बर)! कुफ्फार से कह दो कि अगर वे अपने फेलों (कर्मो) से बाज आ जाएं, तो जो हो चुका, वह उन्हे माफ कर दिया जाएगा और अगर फिर (वही हरकते) करने लगेंगे तो अगले लोगो का (जो) तरीका जारी हो चुका है (वही उनके हक में बरता जाएगा)।’’ (कुरआन, सूरा-8, आयत-38)

    •इस्लाम मे दुश्मनों के साथ भी सच्चा न्याय करने का आदेश, इस्लाम न्याय का सर्वोच्च आदर्श प्रस्तुत करता हैं। इसे नीचे दी गर्इ आयत मे देखिए:- “ऐ र्इमानवालो! खुदा के लिए इंसाफ की गवाही देने के लिए खड़े हो जाया करो और लोगो की दुश्मनी तुमकों इस बात पर तैयार न करे कि इंसाफ छोड़ दो। इंसाफ किया करो कि यही परहेजगारी की बात हैं और खुदा से डरते रहो। कुछ शक नही कि खुदा तुम्हारे तमाम कामों से खबरदार हैं।’’ (कुरआन, सूरा-5, आयत-8)

    •इस्लाम मे किसी निर्दोष की हत्या की इजाजत नही हैं। ऐसा करने वाले की एक ही सजा है, खून के बदले खून। लेकिन यह सजा केवल कातिल को ही मिलनी चाहिए और इसमें ज्यादती मना हैं। इसे ही तो कहते है सच्चा इंसाफ। देखिए नीचे दिया गया अल्लाह का यह आदेश:-‘‘और जिस जानदार का मारना खुदा ने हराम किया हैं, उसे कत्ल न करना मगर जायज तौर पर (यानी शरीअत के फतवे (ओदश) के मुताबिक) और जो शख्स जुल्म से कत्ल किया जाए हमने उसके वारिस को इख्तियार दिया है (कि जालिम कातिल से बदला ले) तो उसको चाहिए कि कत्ल(के किसास) में ज्यादती न करे कि वह मंसूर व फतहयाब हैं।’’ (कुरआन,सूरा-17, आयत-33)

    •इस्लाम देश में हिंसा (फसाद) करने की इजाजत नही देता। देखिए अल्लाह का यह आदेश:-
    ‘‘लोगो को उनकी चीजें कम न दिया करो और मुल्क में फसाद न करते फिरों।’’(कुरआन,सूरा-26, आयत-183)
    •जालिमों को अल्लाह की चेतावनी:-
    “जो लोग खुदा की आयतों (आदेशो) को नही मानते और नबियों (पैगम्बरों) को ना-हक कत्ल करते रहे हैं और जो इंसाफ करने का हुक्म देते हैं, उन्हे भी मार डालते हैं, उनको दु:ख देने वाले अजाब की खुशखबरी सुना दों।’’ (कुरआन, सूरा-3, आयत-21)

    •सत्य के लिए कष्ट सहने वाले, लड़ने-मरने वाले र्इश्वर की कृपा के पात्र होंगे, उसके प्रिय होंगें:- “तो उनके परवरदिगार ने उनकी दुआ कबूल कर ली। (और फरमाया कि) मैं किसी अमल करने वाले के अमल को, मर्द हो या औरत, जाया नही करता। तुम एक दूसरे की जिन्स हो, तो जो लोग मेरे लिए वतन छोड़ गए और अपने घरो से निकाले गए और सताए गए और लड़े और कत्ल किए गए मैं उनके गुनाह दूर कर दूंगा और उनको बहिश्तों में दाखिल करूंगा, जिनके नीचे नहरे बह रही हैं। (यह) खुदा के यहां से बदला हैं और खुदा के यहां अच्छा बदला हैं।’’(कुरआन,सूरा-3,आयत-195)
    •इस्लाम को बदनाम करने के लिए लिख-लिखकर प्रचारित किया गया कि इस्लाम तलवार के बल पर प्रचारित व प्रसारित मजहब है।मक्का सहित सम्पूर्ण अरब व दुनिया के अधिकांश मुसलमान, तलवार, के जोर पर ही मुसलमान बनाए गए थे, इस तरह इस्लाम का प्रसार जोर-जबरदस्ती से हुआ। जबकि इस्लाम में किसी को जोर-जबरदस्ती से मुसलमान बनाने की सख्त मनाही हैं। देखिए कुरआन मजीद में अल्लाह के ये आदेश:-
    “और अगर तुम्हारा परवरदिगार (यानी अल्लाह) चाहता तो जितने लोग जमीन पर हैं, सबके सब र्इमान ले आते । तो क्या तुम लोगो पर जबरदस्ती करना चाहते हो कि वे मोमिन (यानी मुसलमान) हो जाएं।’’(कुरआन,सूरा-10,आयत-99)
    ‘‘(ऐ पैगम्बर! इस्लाम के इन मुंकिरों (काफिरों) से कह दो कि ऐ काफिरों! जिन (बुतों) को तुम पूजते हो, उनको मैं नही पूजता और जिस (खुदा) की मैं इबादत करता हूं, उसकी तुम इबादत नही करते, और (मैं फिर कहता हूं कि) जिनकी तुम पूजा करते हो, उनकी मैं पूजा करने वाला नही हूं। और न तुम उसकी बन्दगी करने वाले (मालूम होते) हो, जिसकी मैं बन्दगी करता हूं। तुम अपने दीन (धर्म) पर, मैं अपने दीन पर।’’ (कुरआन, सूरा-109,आयत-1-6)
    ‘‘ऐ पैगम्बर!अगर ये लोग तुमसे झगड़ने लगे, तो कहना कि मैं और मेरी पैरवी करने वाले तो खुदा के फरमाबरदार (अर्थात आज्ञाकारी) हो चुके और अहले-किताब और अनपढ़ लोगो से कहो कि क्या तुम भी (खुदा के फरमाबरदार बनते और) इस्लाम लाते हो? अगर ये लोग इस्लाम ले आएं तो बेशक हिदायत पा ले और अगर (तुम्हारा कहा) न माने, तो तुम्हारा काम सिर्फ खुदा का पैगाम पहुंचा देना हैं। और खुदा (अपने) बन्दो को देख रहा हैं। (कुरआन, सूरा-3, आयत-20)

    1. वाह ये हुयी ना बात इसको कहते हैं असली कुरआन और असली गीता जिसमे सिर्फ दया और धर्म की बात हो जिसमें इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म हो।। भाई हमे ख़ुशी हुई की कोई मुसलमान सच खुल के और इतने अच्छे से बोला है।। कोई भी पवित्र ग्रंथ गलत नहीं होती है चाहे वो बाइबिल हो कुरआन हो या गीता पवित्र ग्रंथ हमारे आदर्श होते हैं और हमे जीने का सही मार्ग दिखाते हैं।। बस इसका प्रचार गलत ना किया जाए।।
      नफीस जी समझाइये अपने धर्म को जो आपके धर्म को मैला कर रहे हैं।।। आप तो जानते ही होंगे की इस्लाम के नाम पर आज क्या चल रहा है।। नफीस जी गलत मतलब हम नहीं निकालते हैं।। गलत मतलब तो आप के ही लोग निकाल के आपको गुमराह करके आतंकवादी बनाते हैं।। आयतें हमे बताने से ज्यादा उन्हें बताना जरूरी है जो गलत हैं।। और रही बात गीता की तो वो इतनी गूढ़ ग्रन्थ है जिसे इंसान समझ ले तो भगवान बन जाए।।। आपके कुरआन तो अक्सर दुनिया में ही उलझी नजर आती है।। हम तो फिर भी योग और साधना और गीता को मानने वाले लोग हैं।।
      वैसे ये जानकर ख़ुशी हुई की कोई तो कुरान को जानता है।।
      ।।।।।समझाइये अपने धर्म को

  59. कुरआन की 24 आयतें जिनके बारे मैं गलतफहमी फेलाई जाती रही है! के कुरआन गैर मुस्लिमों को मारने या जड-मूल से खत्म कर देने का हुक्म देता है! “आइए देखें सच्चाई क्या है?
    इस्लाम, आतंक हैं या आदर्श? यह जानने के लिए मैं कुरआन मजीद की कुछ आयते दे रहा हूं जिन्हे मैने मौलाना फतह मुहम्मद खां जालन्धरी द्वारा अनुवादित और महमूद एण्ड कम्पनी मरोल, पार्इप लाइन, मुम्बर्इ-59 से प्रकाशित कुरआन मजीद से लिया हैं।

    पाठक इस बात को ध्यान में रखें कि कुरआन मजीद के अनुवाद में यदा-कदा (बड़े ब्रेकिट) शब्दों की व्याख्या के लिए लगाए गए हैं। ये ब्रेकिट लेखक की ओर से हैं।यह बात ध्यान देने योग्य हैं कि कुरआन मजीद का अनुवाद करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना पड़ता हैं कि किसी भी आयत का भावार्थ जरा भी बदलने न पाए, क्योंकि किसी भी कीमत पर यह बदला नही जा सकता। इसी लिए अलग-अलग भाषाओं में अलग-अलग अनुवादकों द्वारा कुरआन मजीद के किए अनुवाद का भाव एक ही रहता हैं। गैर-मुस्लिम भार्इ यदि इस अनुवाद के कठिन शब्दों को न समझ पाएं तो वे मधुर सन्देश संगम, र्इ-20, अबुल-फ़ज्ल इंक्लेव, जामिया नगर, नर्इ दिल्ली-25 द्वारा प्रकाशित और मौलाना मुहम्मद खां द्वारा अनुवादित पवित्र कुरआन का भी सहारा ले सकते हैं।

    कुरआन की शुरूआत ‘बिसमिल्लाहिर्रहमानिर्ररहीम’ से होती हैं, जिसका अर्थ हैं-’शुरू अल्लाह का नाम लेकर, जो बड़ा कृपालु अत्यन्त दयालु हैं।
    ध्यान दें। ऐसा अल्लाह, जो बड़ा कृपालु और अत्यन्त दयालु हैं वह ऐसे फ़रमान कैसे जारी कर सकता हैं, जो किसी को कष्ट पहुंचाने वाले हों अथवा हिंसा या आतंक फैलाने वाले हों? अल्लाह की इसी कृपालुता और दयालुता का पूर्ण प्रभाव अल्लाह के पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) के व्यवहारिक जीवन में देखने को मिलता हैं। कुरआन की आयतों से व पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) की जीवनी से पता चलता हैं कि मुसलमानों को उन काफिरों से लड़ने का आदेश दिया गया जो आक्रमणकारी थे,
    अत्याचारी थे। यह लड़ार्इ अपने बचाव के लिए थी। देखें कुरआन मजीद में अल्लाह के आदेश:-“और (ऐ मुहम्मद उस वक्त को याद करो) जब काफिर लोग तुम्हारे बारे में चाल चल रहे थे कि तुमको कैद कर दें या जान से मार डालें या (वतन से) निकाल दे तो (इधर से) वे चाल चल रहे थे और (उधर) खुदा चाल रहा था और खुदा सबसे बेहतर चाल चलने वाला हैं।” (कुरआन, सूरा-8, आयत -30)

    “ये वे लोग है कि अपने घरो से ना-हक निकाल दिए गए, (उन्होने कुछ कुसूर नही किया)। हां, ये कहते हैं कि हमारा परवरदिगार खुदा हैं और अगर खुदा लोगो को एक-दूसरो से न हटाता रहता तो (राहिबो के) पूजा-घर और (र्इसाइयों के) गिरजे और (यहूदियों की) और (मुसलमान की) मस्जिदें, जिनमें खुदा का बहुत-सा जिक्र किया जाता हैं, गिरार्इ जा चुकी होती। और जो शख्स खुदा की मदद करता करता हैं, खुदा उसकी जरूर मदद करता हैं। बेशक खुदा ताकतवाला और गालिब यानी प्रभुत्वशाली हैं।’’ (कुरआन, सूरा-22, आयत-40
    ‘‘ये क्या कहते हैं कि इसने कुरआन खुद से बना लिया हैं? कह दो कि अगर सच्चे हो तो तुम भी ऐसी दस सूरतें बना लाओं और खुदा के सिवा जिस-जिस को बुला सकते हो, बुला भी लो।’’ (कुरआन, सूरा-11, आयत-13)

    ‘‘(ऐ पैगम्बर !) काफिरों का शहरों मे (शानों-शौकत के साथ) चलना-फिरना तुम्हे धोखा न दें।’’ (कुरआन, सूरा-3, आयत-196)

    ‘‘जिन मुसलमानों से (खामखाह) लड़ार्इ की जाती है, उनको इजाजत हैं (कि वे भी लड़े), क्योकि उन पर जुल्म हो रहा हैं और खुदा (उन की मदद करेगा, वह) यकीनन उनकी मदद पर कुदरत रखता है।’’ (कुरआन, सूरा-22, आयत-39)
    •इस्लाम के बारे में झूठा प्रचार किया जाता है कि कुरआन में अल्लाह के आदेशों के कारण ही मुसलमान लोग गैर-मुसलमानों का जीना हराम कर देते है, जबकि इस्लाम मे कही भी निर्दोषों से लड़ने की इजाजत नही हैं, भले ही वे काफिर या मुशरिक या दुश्मन ही क्यो न हों। विशेष रूप से देखिए अल्लाह के ये आदेश:-

    ‘‘जिन लोगों ने तुमसे दीन (धर्म) के बारे में जंग नही की और न तुम को तुम्हारे घरो से निकाला, उनके साथ भलार्इ और इंसाफ का सुलूक करने से खुदा तुमको मना नही करता। खुदा तो इंसाफ करने वालों को दोस्त रखता हैं। ‘‘ (कुरआन, सूरा-60, आयत-8)
    खुदा उन्ही लोगो के साथ तुमको दोस्ती करने से मना करता हैं, जिन्होने तुम से दीन के बारे मे लड़ार्इ की और तुमको तुम्हारे घरो से निकाला और तुम्हारे निकालने मे औरो की मदद की, तो जो लोग ऐसों से दोस्ती करेंगे, वही जालिम हैं।’’ (कुरआन, सूरा-60, आयत-9)

    •इस्लाम मे दुश्मन के साथ भी ज्यादती करना मना है, देखिए:-
    ‘‘और जो लोग तुमसे लड़ते हैं, तुम भी खुदा की राह मे उनसे लड़ो, मगर ज्यादती (अत्याचार) न करना कि खुदा ज्यादती करने वालो को दोस्त नही रखता।’’(कुरआन, सूरा-2, आयत-190)

    ‘‘ये खुदा की आयते है, जो हम तुमको सेहत के साथ (यानी ठीक-ठीक) पढ़कर सुनाते हैं और अल्लाह अहले-आलम (अर्थात् लोगो) पर जुल्म नही करना चाहता।’’ (कुरआन,सूरा-3, आयत-108)
    •इस्लाम का प्रथम उद्देश्य दुनिया में शान्ति की स्थापना हैं, लड़ार्इ तो अन्तिम विकल्प हैं और यही तो आदर्श धर्म हैं, जो कुरआन की नीचे दी गर्इ इस आयत मे दिखार्इ देता हैं:-
    ‘‘(ऐ पैग़म्बर)! कुफ्फार से कह दो कि अगर वे अपने फेलों (कर्मो) से बाज आ जाएं, तो जो हो चुका, वह उन्हे माफ कर दिया जाएगा और अगर फिर (वही हरकते) करने लगेंगे तो अगले लोगो का (जो) तरीका जारी हो चुका है (वही उनके हक में बरता जाएगा)।’’ (कुरआन, सूरा-8, आयत-38)

    •इस्लाम मे दुश्मनों के साथ भी सच्चा न्याय करने का आदेश, इस्लाम न्याय का सर्वोच्च आदर्श प्रस्तुत करता हैं। इसे नीचे दी गर्इ आयत मे देखिए:- “ऐ र्इमानवालो! खुदा के लिए इंसाफ की गवाही देने के लिए खड़े हो जाया करो और लोगो की दुश्मनी तुमकों इस बात पर तैयार न करे कि इंसाफ छोड़ दो। इंसाफ किया करो कि यही परहेजगारी की बात हैं और खुदा से डरते रहो। कुछ शक नही कि खुदा तुम्हारे तमाम कामों से खबरदार हैं।’’ (कुरआन, सूरा-5, आयत-8)

    •इस्लाम मे किसी निर्दोष की हत्या की इजाजत नही हैं। ऐसा करने वाले की एक ही सजा है, खून के बदले खून। लेकिन यह सजा केवल कातिल को ही मिलनी चाहिए और इसमें ज्यादती मना हैं। इसे ही तो कहते है सच्चा इंसाफ। देखिए नीचे दिया गया अल्लाह का यह आदेश:-‘‘और जिस जानदार का मारना खुदा ने हराम किया हैं, उसे कत्ल न करना मगर जायज तौर पर (यानी शरीअत के फतवे (ओदश) के मुताबिक) और जो शख्स जुल्म से कत्ल किया जाए हमने उसके वारिस को इख्तियार दिया है (कि जालिम कातिल से बदला ले) तो उसको चाहिए कि कत्ल(के किसास) में ज्यादती न करे कि वह मंसूर व फतहयाब हैं।’’ (कुरआन,सूरा-17, आयत-33)

    •इस्लाम देश में हिंसा (फसाद) करने की इजाजत नही देता। देखिए अल्लाह का यह आदेश:-
    ‘‘लोगो को उनकी चीजें कम न दिया करो और मुल्क में फसाद न करते फिरों।’’(कुरआन,सूरा-26, आयत-183)
    •जालिमों को अल्लाह की चेतावनी:-
    “जो लोग खुदा की आयतों (आदेशो) को नही मानते और नबियों (पैगम्बरों) को ना-हक कत्ल करते रहे हैं और जो इंसाफ करने का हुक्म देते हैं, उन्हे भी मार डालते हैं, उनको दु:ख देने वाले अजाब की खुशखबरी सुना दों।’’ (कुरआन, सूरा-3, आयत-21)

    •सत्य के लिए कष्ट सहने वाले, लड़ने-मरने वाले र्इश्वर की कृपा के पात्र होंगे, उसके प्रिय होंगें:- “तो उनके परवरदिगार ने उनकी दुआ कबूल कर ली। (और फरमाया कि) मैं किसी अमल करने वाले के अमल को, मर्द हो या औरत, जाया नही करता। तुम एक दूसरे की जिन्स हो, तो जो लोग मेरे लिए वतन छोड़ गए और अपने घरो से निकाले गए और सताए गए और लड़े और कत्ल किए गए मैं उनके गुनाह दूर कर दूंगा और उनको बहिश्तों में दाखिल करूंगा, जिनके नीचे नहरे बह रही हैं। (यह) खुदा के यहां से बदला हैं और खुदा के यहां अच्छा बदला हैं।’’(कुरआन,सूरा-3,आयत-195)
    •इस्लाम को बदनाम करने के लिए लिख-लिखकर प्रचारित किया गया कि इस्लाम तलवार के बल पर प्रचारित व प्रसारित मजहब है।मक्का सहित सम्पूर्ण अरब व दुनिया के अधिकांश मुसलमान, तलवार, के जोर पर ही मुसलमान बनाए गए थे, इस तरह इस्लाम का प्रसार जोर-जबरदस्ती से हुआ। जबकि इस्लाम में किसी को जोर-जबरदस्ती से मुसलमान बनाने की सख्त मनाही हैं। देखिए कुरआन मजीद में अल्लाह के ये आदेश:-
    “और अगर तुम्हारा परवरदिगार (यानी अल्लाह) चाहता तो जितने लोग जमीन पर हैं, सबके सब र्इमान ले आते । तो क्या तुम लोगो पर जबरदस्ती करना चाहते हो कि वे मोमिन (यानी मुसलमान) हो जाएं।’’(कुरआन,सूरा-10,आयत-99)

    1. कुरआन की शुरूआत ‘बिसमिल्लाहिर्रहमानिर्ररहीम’ से होती हैं, जिसका अर्थ हैं-’शुरू अल्लाह का नाम लेकर, जो बड़ा कृपालु अत्यन्त दयालु हैं।
      ध्यान दें। ऐसा अल्लाह, जो बड़ा कृपालु और अत्यन्त दयालु हैं वह ऐसे फ़रमान कैसे जारी कर सकता हैं, जो किसी को कष्ट पहुंचाने वाले हों अथवा हिंसा या आतंक फैलाने वाले हों? अल्लाह की इसी कृपालुता और दयालुता का पूर्ण प्रभाव अल्लाह के पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) के व्यवहारिक जीवन में देखने को मिलता हैं। कुरआन की आयतों से व पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) की जीवनी से पता चलता हैं कि मुसलमानों को उन काफिरों से लड़ने का आदेश दिया गया जो आक्रमणकारी थे,

      यहाँ कौन आक्रमणकारी है

      मुस्लिम विद्वानो और प्रचारकों के अनुसार इस्लाम शान्ति का सन्देश देता है और इस्लाम का शाब्दिक अर्थ भी शांती ही है . मुहम्मद साहब इस्लाम के आखिरी नबी ( हालांकि नबी होने का दावा मुहम्मद साहब के बाद भी कई लोगों ने किया है ) हैं . और मुहम्मद साहब अल्लाह द्वारा दिए गए शांति के सन्देश के प्रचारक थे . लेकिन इस्लाम की यह शाब्दिक शान्ति व्यावहारिक रूप में कितनी परिवर्तित हो पाई है या केवल एक छलावा है यह एक विचारणीय विषय है .

      किसी भी मत की मान्यताएं उसके इतिहास से प्रदर्शित होती हैं . इस्लाम का मूल मुहम्मद साहब और उनका आचरण है. आइये इस्लामिक इतिहास के इस तथ्य पर नज़र डालते हैं कि क्या वास्तव में मुहम्मद साहब का आचरण शान्ति के प्रचार प्रसार को फलीभूत करने वाला था ?

      सुरा अल सफ्फात ३३ की आयात १७७ :

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      “फिर जब अजाब उनके आँगन में उतरेगा तो उन लोगों को की सजा बड़ी होगी जिन्हें डराया गया था “

      सहीह मुल्सिम की व्याख्या में अब्दुल हामिद सिद्दकी साहब ने कुरान की इस आयत को नीचे दी हुयी हदीस के साथ जोड़ा है :

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      अनास से रिवायत है कि मुहम्मद साहब ने एक अभियान खैबर की तरफ रवाना किया. हमने सुबह की नमाज अदा की . मुहम्मद साहब और अबु ताल्हा घोड़े पर सवार हो गए. मैं ( अनास ) अबू ताल्हा के पीछे बैठा था. हम खैबर की तंग गलियों में घुस गए .जैसे ही वो निवास स्थान पर पहुंचे जो अल्लाह हु अबकर जोर बोला. खैबर तबाह हो चूका था .हम लोगों के मध्य में थे जिनको पहले सचेत किया जा चूका था. लोग जब दैनिक कर्म के लिए बाहर निकले तो पता चला कि मुहम्मद साहब ने अपनी सेना के साथ कब्ज़ा कर लिया है .मुहम्मद साहब ने कहा की खैबर की भूमि अब हमारे स्वामित्व में है हमने बलपूर्वक इसे ले लिया है . लोग अब युद्ध बंदी थे .

      हदीस आगे कहती है कि दिह्या मुहम्मद साहब के पास आकर बोला कि अल्लाह के रसूल मुझे बंदियों की लड़कियों में से एक लड़की दे दीजिये. मुहम्मद साहब ने कहा कि जाओ और किसी को भी ले लो . उसने हुयायाय की लड़की साफिया को पसंद किया .

      एक व्यक्ति ने मुहम्मद साहब के पास आकर कहा की आपने दिह्या को दे दिया वो केवल आपके लिए है . मुहम्मद साहब ने कहा की साफिया को दिह्या के साथ बुलाया जाए . मुहम्मद साहब के साफिया को देखकर कहा कि दिह्या कोई दूसरी लड़की ले लो और मुहम्मद साहब ने साफिया को मुक्त कर उससे निकाह कर कर लिया .

      सहीह मुल्सिम की व्याख्या में अब्दुल हामिद सिद्दकी साहब लिखते हैं कि इस्लाम में युद्ध बंदियों को गुलाम बना के रखा जा सकता है. इन लोगों को फिरोती लेकर मुक्त किया जा सकता है.

      घटना इस प्रकार है कि खैबर के लोगों को मुहम्मद साहब ने उनके द्वारा पोषित दीन अर्थात इस्लाम कबूल करने की राय दी थी और जब उन लोगों ने इस्लाम नहीं कबूला मुहम्मद साहब को आखिरी नबी मानने से इनकार कर दिया तो मुहम्मद साहब अपनी सेना लेकर उनके घरों में घुस गए और खैबर पर कब्ज़ा कर लिया . यह है इस्लाम के संस्थापक का शान्ति का पैगाम.

      उपर्युक्त घटना के निम्न मुख्य पहलू हैं:
      •मुहम्मद साहब ने खैबर के jews को इस्लाम कबूल करने के लिए परामर्श दिया और एक अवधि निर्धारित कर दी .
      •निर्धारित अवधी में इस्लाम न कबूलने पर ये आयात उतार दी गयी की इस्लाम न कबूलने पर अज़ाब उतारा जायेगा (“फिर जब अजाब उनके आँगन में उतरेगा तो उन लोगों को की सजा बड़ी होगी जिन्हें डराया गया था “सुरा अल सफ्फात ३३ की आयात १७७
      •जब खैबर के लोगों ने इस्लाम नहीं कबूला तो उन पर अचानक आक्रमण कर दिया गया और उन्हें संभलने का मौक़ा तक नहीं दिया गया
      •औरतों को बंदी बना लिया गया और लुट के माल के तरह उनको भी बाँट लिया गया .
      •खैबर की सम्पदा लूट ली गयी

      इस्लाम के इतिहास की ये केवल एक घटना है. इतिहास में अनेकों ऐसी घटनायें हैं.

      अपने मत से सहमत न होने पर किसी व्यक्ति या समूह या देश पर आक्रमण कर उसे तबाह कर देना सम्पदा को लूट लेना औरतों को लूट के माल की तरह बाँट लेना और इसको शान्ति का सन्देश करार देना कहाँ तक तर्कसंगत है ?

      पाठक गण विचार करें !

  60. ‘‘कह दो कि ऐ अहले-किताब! जो बात हमारे और तुम्हारे दर्मियान एक ही (मान ली गर्इ) हैं, उसकी तरफ आओं, वह यह कि खुदा के सिवा हम किसी की इबादत (पूजा) न करे और उसके साथ किसी चीज को शरीक (यानी साझी) न बनाएं और हममे से कोर्इ किसी को खुदा के सिवा अपना कारसाज न समझे। अगर ये लोग (इस बात को) न माने तो (उनसे) कह दो कि तुम गवाह रहो कि हम (खुदाके) फरमांबरदार हैं।” (कुरआन,सूरा-3,आयत 64)

    •इस्लाम मे जोर-जबरदस्ती से धर्म-परिवर्तन की मनाही के साथ-साथ इससे भी आगे बढ़कर किसी भी प्रकार की जोर-जबरदस्ती की इजाजत नही है। देखिए अल्लाह का यह आदेश:-
    ‘‘दीने-इस्लाम (इस्लाम धर्म) में जबरदस्ती नही हैं।’’ (कुरआन,सूरा-2,आयत-256)
    •जो बुरे काम करेगा और असत्य नीति अपनाएगा मरने के बाद आने वाले जीवन (आखिरत) मे उसका फल भोगेगा:-
    ‘‘हां, जो बुरे काम करे और उसके गुनाह (हर तरफ से) उसको घेर लें तो ऐसे लोग दोजख (में जाने) वाले हैं। (और) वे हमेशा उसमें (जलते) रहेंगे।’’(कुरआन, सूरा-2,आयत-81)

    •निष्कर्ष:-
    पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) की जीवनी व कुरआन मजीद की इन आयतों को देखने के बाद स्पष्ट हैं कि हजरत मुहम्मद (सल्ल0) की करनी और कुरआन की कथनी मे कही भी आतंकवाद नही हैं। इससे सिद्ध होता हैं कि इस्लाम की अधूरी जानकारी रखने वाली ही अज्ञानता के कारण इस्लाम को आतंकवाद से जोड़ते हैं।

    •इस्लाम ओर कुरआन को बदनाम किए जाने की नीयत से आर्य समाजी छल-कपटियों द्वारा छपवाई गई पैम्फलेट मे लिखी पहले क्रम की आयत हैं:-‘‘फिर, जब हराम के महीने बीत जाएं, तो ‘मुशरिकों’ को जहां कही पाओ कत्ल करो, और पकड़ो, और उन्हे घेरो, और हर घात की जगह उनकी ताक मे बैठो। फिर यदि वे ‘तौबा’ कर ले, नमाज कायम करें और जकात दे, तो उनका मार्ग छोड़ दो। नि:सन्देह अल्लाह बड़ा क्षमाशील और दया करने वाला हैं। (कुरआन,सूरा-9,आयत-5)
    *खुलासा:-
    इस आयत के संदर्भ में-जैसा कि हजरत मुहम्मद (सल्ल0) की जीवनी से स्पष्ट हैं कि मक्का में और मदीना जाने के बाद भी मुशरिक काफिर कुरैश, अल्लाह के रसूल (सल्ल0) के पीछे पड़े हुए थे। वे मुहम्मद (सल्ल0) को और सत्य धर्म इस्लाम को समाप्त करने के लिए हर सम्भव कोशिश करते रहते। काफिर कुरैश ने अल्लाह के रसूल को कभी चैन से बैठने नही दिया। वे उनको सदैव सताते ही रहे। इसके लिए वे सदैव लड़ार्इ की साजिश रचते रहते। अल्लाह के रसूल (सल्ल0) के हिजरत के छठवें साल जीकादा महीने में आप (सल्ल0) सैकड़ो मुसलमानों के साथ हज के लिए मदीना से मक्का रवाना हुए। लेकिन मुनाफिकों (यानी कपटाचारियों) ने इसकी खबर कुरैश को दे दी। कुरैश पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) को घेरने का कोर्इ मौका हाथ से जाने न देते इस बार भी वे घात लगाकर रास्ते मे बैेठ गए। इसकी खबर मुहम्मद (सल्ल0) को लग गर्इ। आपने रास्ता बदल दिया और मक्का के पास हुदैबिया कुएं के पास पड़ाव डाला। कुए के नाम पर ही इस जगह का नाम हुदैबिया था। जब कुरैश को पता चला कि मुहम्मद अपने अनुयायी मुसलमानों के साथ मक्का के पास पहुंच चुके हैं और हुदैबिया पर पड़ाव डाले हुए हैं, तो काफिरो ने कुछ लोगो को आपकी हत्या के लिए हुदैबिया भेजा, लेकिन वे सब हमले से पहले ही मुसलमानों के द्वारा पकड़ लिए गए और अल्लाह के रसूल (सल्ल0) के सामने लाए गए। लेकिन आपने उन्हे गलती का एहसास कराकर माफ कर दिया। इसके बाद हज़रत मुहम्मद (सल्ल0) ने लड़ार्इ-झगड़ा, खून-खराबा टालने के लिए हज़रत उस्मान (रजि0) का कुरैश से बात करने के लिए भेजा। लेकिन कुरैश ने हज़रत उस्मान (रजि0) को कैद कर लिया। इधर हुदैबिया में पड़ाव डाले अल्लाह के रसूल (सल्ल0) को खबर लगी कि हज़रत उस्मान (रजि0) कत्ल कर दिए गए। यह सुनते ही मुसलमान हज़रत उस्मान (रजि0) के कत्ल का बदला लेने के लिए तैयारी करने लगे। जब कुरैश को पता चला कि मुसलमान अब मरने-मारने को तैयार हैं और अब युद्ध निश्चित हैं तो उनसे बातचीत के लिए सुहैल-बिन-अम्र को हजरत मुहम्मद(सल्ल0) के पास हुदैबिया भेजा। सुहैल से मालूम हुआ कि उस्मान (रजि0) का कत्ल नही हुआ है, वे कुरैश की कैद मे हैं। सुहैल ने हज़रत उस्मान (रजि0) का कैद से आजाद करने व युद्ध टालने के लिए कुछ शर्ते पेश की। जो निम्नलिखित हैं:-

    •पहली शर्त थी-इस साल आप सब बिना उमरा (काबा-दर्शन) किए लौट जाएं। अगले साल आएं ,लेकिन तीन दिन बाद चले जाएं।
    •दूसरी शर्त थी-हम कुरैश का कोर्इ आदमी मुसलमान बनकर यदि मदीना आए तो उसे हमे वापस किया जाए। लेकिन यदि कोर्इ मुसलमान मदीना छोड़कर मक्का मे आ जाए, तो हम वापस नही करेंगे।•तीसरी शर्त थी-कोर्इ भी कबीला अपनी मर्जी से कुरैश के साथ या मुसलमानों के साथ शामिल हो सकता हैं।
    •समझौते मे चौथी शर्त थी कि-इन शर्तो को मानने के बाद कुरैश और मुसलमान न एक-दूसरे पर हमला करेंगे और न ही एक-दूसरे के सहयोगी कबीलो पर हमला करेंगे। यह समझौता 10 साल के लिए हुआ, जो हुदैबिया समझौते के नाम से जाना जाता हैं।हालांकि ये शर्ते एक तरफा और अन्यायपूर्ण थी, फिर भी शान्ति और सब्र के दूत मुहम्मद (सल्ल0) ने इन्हे स्वीकार कर लिया, ताकि शान्ति स्थापित हो सके। लेकिन समझौता होने के दो ही साल बाद बनू-बक्र नामक कबीले ने जो मक्का के कुरैश का सहयोगी था, मुसलमानों के सहयोगी कबीलो खुजाआ पर हमला कर दिया। इस हमले मे कुरैश ने बनू-बक्र कबीले का साथ दिया । खुजाआ कबीले के लोग भागकर हज़रत मुहम्मद (सल्ल0) के पास पहुंचे और इस हमले की खबर दी। पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) ने शान्ति के लिए इनता झुककर समझौता किया था, इसके बाद भी कुरैश ने धोखा देकर समझौता तोड़ डाला।
    अब युद्ध एक आवश्यकता थी, धोखा देने वालो को दण्डित करना शान्ति स्थापना के लिए जरूरी था। इसी जरूरत को देखते हुए अल्लाह की ओर से सूरा-9 की आयते अवतरित हुर्इ। इनके अवतरित होने पर नबी सल्ल0 ने सूरा-9 की आयतें सुनाने के लिए हजरत अली (रजि0) को मुशरिकों के पास भेजा। हजरत अली (रजि0) ने जाकर मुशरिकों से यह कहते हुए कि मुसलमानों के लिए अल्लाह का फरमान आ चुका हैं, उनको सूरा-9 की ये आयते सुना दी:-
    ‘‘(ऐ मुसलमानों! अब) खुदा और उसके रसूल की तरफ से मुशरिकों से, जिनसे तुमने अहद (समझौता) कर रखा था, बेजारी (और जंग की तैयारी) हैं।
    तो (मुशरिको! तुम) जमीन मे चार महीने चल फिर लो और जान रखो कि तुम खुदा को आजिज़ न कर सकोगे और यह भी कि खुदा काफिरों को रूसवा करने वाला हैं।
    और हज्जे-अक्बर के दिन खुदा और उसके रसूल की तरफ से लोगो को आगाह किया जाता है कि खुदा मुशरिकों से बेजार है और उसका रसूल भी (उनसे दस्तबरदार हैं)। पस अगर तुम तौबा कर लो, तो तुम्हारे हक में बेहतर हैं और न मानों (और खुदा से मुकाबला करो) तो जान रखो कि तुम खुदा को हरा नही सकोगे और (ऐ पैगम्बर!) काफिरो को दु:ख देने वाले अजाब की खबर सुना दो।’’ (कुरआन,सूरा-9,आयतें-1-3)
    अली (रजि0) ने मुशरिकों से कह दिया कि ‘‘यह अल्लाह का फरमान हैं, अब समझौता टूट चुका हैं और यह तुम्हारे द्वारा तोड़ा गया हैं इसलिए अब इज्जत के चार महीने बीतने के बाद तुमसे जंग (यानी युद्ध) हैं।’’

    •समझौता तोड़कर हमला करने वालों पर जवाबी हमला कर उन्हें कुचल देना मुसलमानों का हक बनता था, वह भी मक्का के उन मुशरिकों के विरूद्ध जो मुसलमानों के लिए सदैव से अत्याचारी व आक्रमणकारी थें। इसी लिए सर्वोच्च न्यायकर्ता अल्लाह ने पांचवीं आयत का फरमान भेजा। इस पांचवी आयत से पहले वाली चौथी आयत हैं:-
    ‘‘अलबत्ता, जिन मुशरिकों के साथ तुमने अहद किया हो, और उन्होने तुम्हारा किसी तरह का कुसूर न किया हो और न तुम्हारे मुकाबले मे किसी की मदद की हो, तो जिस मुद्दत तक उनके साथ अहद किया हो, उसे पूरा करो (कि) खुदा परहेजगारों को दोस्त रखता हैं।’’ (कुरआन,सूरा-9,आयत-4)
    इससे स्पष्ट हैं कि जंग का यह एलान उन मुशरिको के विरूद्ध था जिन्होने युद्ध के लिए उकसाया, मजबूर किया, उन मुशरिकों के विरूद्ध नहीं जिन्होने ऐसा नही किया। युद्ध का यह एलान आत्मरक्षा व धर्मरक्षा के लिए था।
    अत: अन्यायियों, अत्याचारियों द्वारा जबरदस्ती थोपे गए युद्ध से अपने बचाव के लिए किए जाने वाले किसी भी प्रकार के प्रयास को किसी भी तरह झगड़ा कराने वाला नहीं कहा जा सकता। अत्याचारीयों और अन्यायियों से अपनी व अपने धर्म की रक्षा के लिए युद्ध करना और युद्ध के लिए सैनिकों को उत्साहित करना धर्मसम्मत हैं।

    •इस पर्चे छापने और बॉटने वाले लोग क्या नही जानते कि अत्याचारियों और अन्यायियों के विनाश के लिए ही कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। क्या यह उपदेश लड़ार्इ-झगड़ा कराने वाला या घृणा फैलाने वाला है? यदि नही, तो फिर कुरआन के लिए ऐसा क्यो कहा जाता हैं?फिर यह पूरी सूरा उस समय मक्का के अत्याचारी मुशरिकों के विरूद्ध उतारी गर्इ, जो अल्लाह के रसूल के ही भार्इ-बन्धु कुरैश थे। फिर इसे आज के सन्दर्भ मे और हिन्दुओं के लिए क्यों लिया जा रहा हैं? क्या यह हिन्दुओं व अन्य गैर-मुस्लिमों को उकसाने और उनके मन में मुसलमानों के लिए घृणा भरने तथा इस्लाम का बदनाम करने की घृणित साजिश नही हैं?

    •पैम्फलेट मे लिखी दूसरे क्रम की आयत है:
    ‘‘हे ‘र्इमान’ लानेवालो! ‘मुशरिक’ (मूर्तिपूजक) नापाक है।’’ (कुरआन,सूरा-9, आयत-28)
    *खुलासा:-
    लगातार झगड़ा-फसाद, अन्याय-अत्याचार करने वाले अन्यायी, अत्याचारी अपवित्र नही हैं तो और क्या है?

    •पैम्फलेट में लिखी तीसरे क्रम की आयत हैं:-
    ‘‘नि:सन्देह ‘काफिर’ तुम्हारे खुले दुश्मन हैं।’’ (कुरआन, सूरा-4, आयत-101)

    1. •इस्लाम मे जोर-जबरदस्ती से धर्म-परिवर्तन की मनाही के साथ-साथ इससे भी आगे बढ़कर किसी भी प्रकार की जोर-जबरदस्ती की इजाजत नही है। देखिए अल्लाह का यह आदेश:-
      ‘‘दीने-इस्लाम (इस्लाम धर्म) में जबरदस्ती नही हैं।’’ (कुरआन,सूरा-2,आयत-256)
      •जो बुरे काम करेगा और असत्य नीति अपनाएगा मरने के बाद आने वाले जीवन (आखिरत) मे उसका फल भोगेगा:-
      ‘‘हां, जो बुरे काम करे और उसके गुनाह (हर तरफ से) उसको घेर लें तो ऐसे लोग दोजख (में जाने) वाले हैं। (और) वे हमेशा उसमें (जलते) रहेंगे।’’(कुरआन, सूरा-2,आयत-81)

      •निष्कर्ष:-
      पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) की जीवनी व कुरआन मजीद की इन आयतों को देखने के बाद स्पष्ट हैं कि हजरत मुहम्मद (सल्ल0) की करनी और कुरआन की कथनी मे कही भी आतंकवाद नही हैं।

      यदि आपके हिसाब से जबरदस्ती इस्लाम में नहीं है तो ये क्या है

      किसी भी मत की मान्यताएं उसके इतिहास से प्रदर्शित होती हैं . इस्लाम का मूल मुहम्मद साहब और उनका आचरण है. आइये इस्लामिक इतिहास के इस तथ्य पर नज़र डालते हैं कि क्या वास्तव में मुहम्मद साहब का आचरण शान्ति के प्रचार प्रसार को फलीभूत करने वाला था ?

      सुरा अल सफ्फात ३३ की आयात १७७ :

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      “फिर जब अजाब उनके आँगन में उतरेगा तो उन लोगों को की सजा बड़ी होगी जिन्हें डराया गया था “

      सहीह मुल्सिम की व्याख्या में अब्दुल हामिद सिद्दकी साहब ने कुरान की इस आयत को नीचे दी हुयी हदीस के साथ जोड़ा है :

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      अनास से रिवायत है कि मुहम्मद साहब ने एक अभियान खैबर की तरफ रवाना किया. हमने सुबह की नमाज अदा की . मुहम्मद साहब और अबु ताल्हा घोड़े पर सवार हो गए. मैं ( अनास ) अबू ताल्हा के पीछे बैठा था. हम खैबर की तंग गलियों में घुस गए .जैसे ही वो निवास स्थान पर पहुंचे जो अल्लाह हु अबकर जोर बोला. खैबर तबाह हो चूका था .हम लोगों के मध्य में थे जिनको पहले सचेत किया जा चूका था. लोग जब दैनिक कर्म के लिए बाहर निकले तो पता चला कि मुहम्मद साहब ने अपनी सेना के साथ कब्ज़ा कर लिया है .मुहम्मद साहब ने कहा की खैबर की भूमि अब हमारे स्वामित्व में है हमने बलपूर्वक इसे ले लिया है . लोग अब युद्ध बंदी थे .

      हदीस आगे कहती है कि दिह्या मुहम्मद साहब के पास आकर बोला कि अल्लाह के रसूल मुझे बंदियों की लड़कियों में से एक लड़की दे दीजिये. मुहम्मद साहब ने कहा कि जाओ और किसी को भी ले लो . उसने हुयायाय की लड़की साफिया को पसंद किया .

      एक व्यक्ति ने मुहम्मद साहब के पास आकर कहा की आपने दिह्या को दे दिया वो केवल आपके लिए है . मुहम्मद साहब ने कहा की साफिया को दिह्या के साथ बुलाया जाए . मुहम्मद साहब के साफिया को देखकर कहा कि दिह्या कोई दूसरी लड़की ले लो और मुहम्मद साहब ने साफिया को मुक्त कर उससे निकाह कर कर लिया .

      सहीह मुल्सिम की व्याख्या में अब्दुल हामिद सिद्दकी साहब लिखते हैं कि इस्लाम में युद्ध बंदियों को गुलाम बना के रखा जा सकता है. इन लोगों को फिरोती लेकर मुक्त किया जा सकता है.

      घटना इस प्रकार है कि खैबर के लोगों को मुहम्मद साहब ने उनके द्वारा पोषित दीन अर्थात इस्लाम कबूल करने की राय दी थी और जब उन लोगों ने इस्लाम नहीं कबूला मुहम्मद साहब को आखिरी नबी मानने से इनकार कर दिया तो मुहम्मद साहब अपनी सेना लेकर उनके घरों में घुस गए और खैबर पर कब्ज़ा कर लिया . यह है इस्लाम के संस्थापक का शान्ति का पैगाम.

      उपर्युक्त घटना के निम्न मुख्य पहलू हैं:
      •मुहम्मद साहब ने खैबर के jews को इस्लाम कबूल करने के लिए परामर्श दिया और एक अवधि निर्धारित कर दी .
      •निर्धारित अवधी में इस्लाम न कबूलने पर ये आयात उतार दी गयी की इस्लाम न कबूलने पर अज़ाब उतारा जायेगा (“फिर जब अजाब उनके आँगन में उतरेगा तो उन लोगों को की सजा बड़ी होगी जिन्हें डराया गया था “सुरा अल सफ्फात ३३ की आयात १७७
      •जब खैबर के लोगों ने इस्लाम नहीं कबूला तो उन पर अचानक आक्रमण कर दिया गया और उन्हें संभलने का मौक़ा तक नहीं दिया गया
      •औरतों को बंदी बना लिया गया और लुट के माल के तरह उनको भी बाँट लिया गया .
      •खैबर की सम्पदा लूट ली गयी

      इस्लाम के इतिहास की ये केवल एक घटना है. इतिहास में अनेकों ऐसी घटनायें हैं.

  61. इस पूरी आयत से स्पष्ट है कि मक्का व आस-पास के काफिर जो मुसलमानों को सदैव नुकसान पहुंचाना चाहते थे (देखिए हजरत मुहम्मद सल्ल0 की जीवनी), ऐसे दुश्मन काफिरों से सावधान रहने के लिए ही इस 101वीं आयत मे कहा गया हैं ‘‘कि नि:सन्देह ‘काफिर’ तुम्हारे खुले दुश्मन हैं।’’

    इससे अगली 102वीं आयत से यह और स्पष्ट हो जाता हैं जिसमें अल्लाह ने और सावधान रहने का फरमान दिया हैं कि:-
    ‘‘और (ऐ पैगम्बर!) जब तुम उन (मुजाहिदों के लश्कर) में हो और उनको नमाज पढ़ाने लगो, तो चाहिए कि एक जमाअत तुम्हारे साथ हथियारों से लैस होकर खड़ी रहे, जब वे सज्दा कर चुके तो पूरे हो जाएं फिर दूसरी जमाअत, जिसने नमाज नही पड़ी (उनकी जगह आए और होशियार और हथियारों से लैस होकर) तुम्हारे साथ नमाज अदा करें। काफिर इस धात मे हैं कि तुम जरा अपने हथियारों और सामानों से गाफिल हो जाओं तो तुम पर एकबारगी हमला कर देंगे।(कुरआन,सूरा-4, आयत-102)

    पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) की जीवनी व ऊपर लिखे तथ्यों से स्पष्ट है कि मुसलमानों के लिए काफिरों से अपनी व अपने धर्म की रक्षा करने के लिए ऐसा करना आवश्यक था। अत: इस आयत मे झगड़ा कराने, धृणा फैलाने या कपट करने जैसी कोर्इ बात नही हैं, जैसा कि पैम्फलेट मे लिखा गया हैं। जबकि जान-बूझकर कपटपूर्ण ढंग से आयत का मतलब बदलने के लिए आयत के केवल एक अंश को लिखकर और शेष को छिपाकर जनता को बरगलाने, घृणा फैलाने व झगड़ा कराने का कार्य तो वे लोग कर रहे हैं, इसे छापने व पूरे देश मे बांटने का कार्य कर रहे हैं। जनता ऐसे लोगो से सावधान रहे।

    •पैम्फलेट मे लिखी चौथे क्रम की आयत हैं:-
    “हे ‘र्इमान’ लाने वालो! (मुसलमानो!) उन ‘काफिरो’ से लड़ो जो तुम्हारे आस-पास है, और चाहिए कि वे तुममे सख्ती पाएं।’’ (कुरआन,सूरा-9, आयत-123)

    *खुलासा:-
    पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) की जीवनी व ऊपर लिखे जा चुके तथ्यों से स्पष्ट है कि मुसलमानों को काफिरो से अपनी व अपने धर्म की रक्षा करने के लिए ऐसा करना आवश्यक था। इसलिए इस आत्मरक्षा वाली आयत को झगड़ा कराने वाली नही कहा जा सकता।

    •पैम्फलेट में लिखी पांचवे क्रम की आयत हैं:-
    ‘‘जिन लोगो ने हमारी ‘आयतों’ का इन्कार किया, उन्हे हम जल्द अग्नि मे झोंक देंगे। जब उनकी खाले पक जाएंगी तो हम उन्हे दूसरी खालो से बदल देंगे, ताकि वे यातना का रसास्वादन कर ले। नि:सन्देह अल्लाह प्रभुत्वशाली, तत्वदश्राी है।’’ (कुरआन, सूरा-4, आयत-56)

    *खुलासा:-
    यह तो धर्म-विरूद्ध जाने पर दोजख (यानी नरक) में दिया जाने वाला दण्ड हैं। सभी धर्मो मे उस धर्म की मान्यताओं के अनुसार चलने पर स्वर्ग का अकल्पनीय सुख और विरूद्ध जाने पर नरक का भयानक दण्ड हैं । फिर कुरआन में बताए गए नरक (यानी दोजख) के दण्ड के लिए एतराज क्यों? इस मामले में इन पर्चा छापने व बॉंटने वालो को हस्पक्षेप करने का क्या अधिकार हैं?
    या फिर क्या इन महामूर्ख लोगो को नरक मे मानवाधिकारों की चिन्ता सताने लगी हैं?

    •पैम्फलेट मे लिखी छठे क्रम की आयत हैं:-
    ‘‘हे ‘र्इमान’ लाने वालो! (मुसलमानों!) अपने बापो और भार्इयों को अपना मित्र मत बनाओं, यदि वे ‘र्इमान’ की अपेक्षा ‘कुफ्र’ को पसन्द करें। और तुममें से जो कोर्इ उनसे मित्रता का नाता जोड़ेगा, तो ऐसे ही लोग जालिम होंगे।’’ (कुरआन, सूरा-9,आयत-23)

    *खुलासा:-
    पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) जब एकेश्वरवाद का सन्देश दे रहे थे, तब कोर्इ व्यक्ति अल्लाह के रसूल (सल्ल0) द्वारा दिए जा रहे तौहीद (यानी एकेश्वरवाद) के पैगाम पर र्इमान (यानीविश्वास) लाकर मुसलमान बनता और फिर अपने मां-बाप, बहन-भार्इ के पास जाता, तो वे एकेश्वरवाद से उसका विश्वास खत्म कराके फिर से बहुर्इश्वरवादी बना देते। इस कारण एकेश्वरवाद की रक्षा के लिए अल्लाह ने यह आयत उतारी, जिससे एकेश्वरवाद के सत्य को दबाया न जा सके। अत: सत्य की रक्षा के लिए आर्इ इस आयत को झगड़ा कराने वाली या घृणा फैलाने वाली आयत कैसे कहा जा सकता हैं? जो ऐसा कहते हैं, वे अज्ञानी हैं।

    1. “मुसलमानों के लिए काफिरों से अपनी व अपने धर्म की रक्षा करने के लिए ऐसा करना आवश्यक था।”
      तो फिर आज के दिन में कुरान कि इन आयतों का कोई मतलब नहीं रह जाता

      ‘‘हे ‘र्इमान’ लाने वालो! (मुसलमानों!) अपने बापो और भार्इयों को अपना मित्र मत बनाओं, यदि वे ‘र्इमान’ की अपेक्षा ‘कुफ्र’ को पसन्द करें। और तुममें से जो कोर्इ उनसे मित्रता का नाता जोड़ेगा, तो ऐसे ही लोग जालिम होंगे।’’ (कुरआन, सूरा-9,आयत-23)

      *खुलासा:-
      पैगम्बर मुहम्मद (सल्ल0) जब एकेश्वरवाद का सन्देश दे रहे थे, तब कोर्इ व्यक्ति अल्लाह के रसूल (सल्ल0) द्वारा दिए जा रहे तौहीद (यानी एकेश्वरवाद) के पैगाम पर र्इमान (यानीविश्वास) लाकर मुसलमान बनता और फिर अपने मां-बाप, बहन-भार्इ के पास जाता, तो वे एकेश्वरवाद से उसका विश्वास खत्म कराके फिर से बहुर्इश्वरवादी बना देते। इस कारण एकेश्वरवाद की रक्षा के लिए अल्लाह ने यह आयत उतारी, जिससे एकेश्वरवाद के सत्य को दबाया न जा सके। अत: सत्य की रक्षा के लिए आर्इ इस आयत को झगड़ा कराने वाली या घृणा फैलाने वाली आयत कैसे कहा जा सकता हैं? जो ऐसा कहते हैं, वे अज्ञानी हैं।

      तो क्या वह अपने पत्नी को भी इस लिए छोड़ दे कि वो आपकी सनक भरी बातों में विश्वास नहीं रखती

      🙂
      आपकी मानी जाये तो ठीक नहीं तो गलत

  62. पैम्फलेट में लिखी सातवे क्रम की आयत हैं:-
    ‘‘अल्लाह ‘काफिर’ लोगो को मार्ग नही दिखाता।’’ (कुरआन,सूरा-9,आयत-37)

    *खुलासा:-
    आयत का मतलब बदलने के लिए इस आयत को भी जान-बूझकर पूरा नही दिया गया, इसलिए इसका सही मकसद समझ में नही आता। इसे समझने के लिए हम आयत को पूरा दे रहे हैं:-
    ‘‘अम्न के किसी महीने को हटाकर आगे-पीछे कर देना कुफ्र में बढ़ोत्तरी करता हैं। इससे काफिर गुमराही मे पड़े रहते है। एक साल तो उसको हलाल समझ लेते हैं और दूसरे साल हराम, ताकि अदब के महीनों की, जो खुदा ने मुकर्रर किये हैं, गिनती पूरी कर लें और जो खुदा ने मना किया हैं, उसको जायज कर लें। उनके बुरे अमल उनको भले दिखार्इ देते हैं और खुदा काफिर लोगो को हिदायत नही दिया करता।’’ (कुरआन,सूरा-9,आयत-37)

    अदब या अम्न (यानी शान्ति) के चार महीने होते हैं, वे हैं- जीकादा, जिलहिज्जा, मुहर्रम और रजब । इन चार महीनों में लड़ार्इ-झगड़ा नही किया जाता। काफिर कुरैश इन महीनो में से किसी महीने को अपनी जरूरत के हिसाब से जान -बूझकर आगे-पीछे कर लड़ार्इ-झगड़ा करने के लिए मान्यता का उल्लंघन किया करते थे। अनजाने मे भटके हुए को मार्ग दिखाया जा सकता हैं, लेकिन जान-बूझकर भटके हुए को मार्ग र्इश्वर भी नही दिखाता। इसी सन्दर्भ में यह आयत उतरी। इस आयत का लड़ार्इ-झगड़ा कराने या घृणा फैलाने से कोर्इ सम्बन्ध ही नही है।

    •पैम्फलेट मे लिखी आठवें क्रम की आयत हैं:-
    ‘‘हे ‘र्इमान’ लानेवालों! और ‘काफिरों’ को अपना मित्र मत बनाओं। अल्लाह से डरते रहो यदि तुम र्इमानवालों हो।” (कुरआन,सूरा-5,आयत-57)

    *खुलासा:-
    यह आयत भी अधूरी दी गर्इ हैं। आयत के बीच का अंश जान-बूझकर छिपाने की शरारत की गर्इ हैं पूरी आयत ये हैं:-
    ‘‘ऐ र्इमान लाने वालो! जिन लोगो को तुमसे पहले किताबे दी गर्इ थी, उनको और काफिरो को जिन्होने तुम्हारे दीन (धर्म) को हंसी और खेल बना रखा हैं, दोस्त न बनाओं और मोमिन हो तो खुदा से डरते रहो।’’ (कुरआन, सूरा-5, आयत-57)

    आयत को पढ़ने से साफ हैं कि काफिर कुरैश तथा उनके सहयोगी यहूदी और र्इसार्इ जो मुसलमानों के धर्म की हंसी उड़ाया करते थे, उनको दोस्त न बनाने के लिए यह आयत आर्इ। यह लड़ार्इ-झगड़ा के लिए उकसाने वाली या घृणा फैलाने वाली कहां से हैं? इसके विपरीत पाठक स्वंय देखें कि पैम्फलेट में ‘जिन्होने तुम्हारे धर्म को हंसी और खेल बना रखा हैं’ को जान-बूझकर छिपाकर उसका मतलब पूरी तरह बदल देने की साजिश करने वाले क्या चाहते है?

    •पैम्फलेट में लिखी नौवें क्रम की आयत है:-
    ‘‘फिटकारे हुए (गैर-मुस्लिम) जहां कही पाए जाएंगे, पकड़े जाएंगे और बुरी तरह कत्ल किए जाएंगे।’’(कुरआन,सूरा-33,आयत-61)

    *खुलासा:-
    इस आयत का सही मतलब तभी पता चलता है जब इसे इसके पहले वाली 60वीं आयत से जोड़ा जाए।
    ‘‘अगर मुनाफिक (यानी कपटाचारी) और वे लोग जिनके दिलों में मर्ज हैं और जो मदीना (के शहर) मे बुरी-बुरी खबरें उड़ाया करते हैं, (अपने किरदार से) रूकेंगे नही, तो हम तुमको उनके पीछे लगा देंगे, फिर वह तुम्हारे पड़ोस में न रह सकेंगे, मगर थोड़े दिन। (वे भी फिटकारे हुए) जहॉ पाए गए, पकड़े गए और जान से मार डाले गए। (कुरआन, सूरा-33, आयते-60,61)

    उस समय मदीना शहर जहां अल्लाह के रसूल (सल्ल0) का निवास था, कुरैश के हमले का सदैव अन्देशा रहता था। कुछ मुनाफिक (कपटाचारी) और यहूदी तथा र्इसार्इ जो मुसलमानों के पास भी आते और काफिर कुरैश से भी मिले रहते और अफवाहे उड़ाया करते थे। युद्ध जैसे माहौल में जहां हमले का सदैव अन्देशा हो, अफवाह उड़ाने वाले जासूस कितने खतरनाक हो सकते हैं, इसका अन्दाजा किया जा सकता हैं । आज के कानून मे भी ऐसे लोगो की सजा मौत हो सकती हैं। वास्तव मे शान्ति की स्थापना के लिए उनको यही दण्ड उचित हैं। यह न्यायसंगत हैं। अत: इस आयत को झगड़ा कराने वाली कहना दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

    •पैम्फलेट में लिखी दसवें क्रम की आयत हैं:-
    ‘‘(कहा जाएगा:) निश्चय ही तुम और वह जिसे तुम अल्लाह के सिवा पूजते थे ‘जहन्नम’ का र्इंधन हो। तुम अवश्य उसके घाट उतरोगे। (कुरआन, सूरा-21, आयत-98)

    *खुलासा:-
    इस्लाम एकेश्वरवादी मजहब हैं, जिसके अनुसार एक र्इश्वर ‘अल्लाह’ के अलावा किसी दूसरे को पूजना सबसे बड़ा पाप हैं। इस आयत मे इसी पाप के लिए अल्लाह मरने के बाद जहन्नम (यानी नरक) का दण्ड देगा।
    पैम्फलेट मे लिखी पांचवे क्रम की आयत में हम इस विषय मे लिख चुके है। अत: इस आयत को भी झगड़ा कराने वाली आयत कहना न्यायसंगत नही हैं।

    •पैम्फलेट मे लिखि ग्यारहवें क्रम की आयत हैं:-
    ‘‘और उससे बढ़कर जालिम कौन होगा जिसे उसके ‘रब’ की ‘आयतों’ के द्वारा चेताया जाए, और फिर वह उनसे मुंह फेर ले। निश्चय ही हमे ऐसे अपराधियों से बदला

    1. “आयत को पढ़ने से साफ हैं कि काफिर कुरैश तथा उनके सहयोगी यहूदी और र्इसार्इ जो मुसलमानों के धर्म की हंसी उड़ाया करते थे,”
      जब लोग कहते थे कि मुहम्मद कि कवितायेँ कहीं घटिया स्टार कि हैं
      उनकी कवितायें ज्यादा अछसे हैं तो के मुहम्मद ने उन सबको नहीं मरवा दिया
      ये कहाँ का आदर्श आचरण था
      🙂

    2. Janab Amit ji aur Arya ji kya urdu Arabic Persian likhna perhna seekh lene se faqha tafseer mein mahir ho jate hain to agar yeh sahih hai to vidduan ji phir aap ko kalki awtar zarur perhni chahiye jo Banaras ke pandit duara likhi gai hai angrezon ne Banaras ke pandit ki likhi Kitab per ben lagaya tha woh Kitab bhi agar mil jae to zarur addhiyan ker lein shayad aap ko is pandit ka dusra name pata ho hi gaya hoga? Maheelaon ki baat kerne se pahle zara cheer haran per pirkash daal dete maan se vivah kis ka hua tha mama ne kis se sambhog kiya tha ullekh ker dete to sab ka giyan berh jaata batein aur bhi hain lakin mazhab kahta hai tumhein tumhara deen mubarak unhein unka jitna likha hai aap ne majbur kiya ke islam mein dost se biwi badal ne ki baat sureh nisaa mein batladi kamal ka giyan hai aap ka aur waqai bare giyani pahunche hue maharthi log hain aap islam kya janoge abhi geeta puran ka earth nahin jaante agar apna dhirm hi shant man se perhliya hota to ANNAY dhirm per ungli na uthate(2)islam mein Zina yani balatkar mafi yogay nahin rasul samuhik balatkar ki ijazat de rahe hain kahan garh li hain yeh kahaniyan? (3)aurtein masjid mein ja sakti hain unko mana nahin lakin perde ki wajah se aur ibaadat ke tareeqe ki wajah se nahin jatein ALLAH BHAGWAN GOD ISHWAR DAATA KHUDA PERWERDIGar alag brands hain koi pirman?

      1. masoodanakhat bhai jaan
        janab sabse pahle yah samjhe ki ham puraan ko nahi maante…jab puraan ko nahi maante to kalki puraan bhi maanya nahi hai hame… hame kalki pauranik hisaab se bhavishya me avtaar hogaa…. aapke hisaab se yadi kalki ko maante ho to fir islaam ko chhod dena hoga …..aur pauranik ban jaana hoga…
        aapne bolaa Maheelaon ki baat kerne se pahle zara cheer haran per pirkash daal dete maan se vivah kis ka hua tha mama ne kis se sambhog kiya tha ullekh ker dete to sab ka giyan berh bhai jaan ye kaha par hai ki sambhog kiya thoda ullekh kare… thoda jaankaari dein ..ham to reference ke saath jawab dete hain aap bhi waisa hi jawab diya kare refernce ke saath… warna hawa hawai baat naa kare… waise pauranik granth me bahut milawat aa gayi hai…janab ham jo bolte hain pure tathy se bolte hain…
        aapne bola aap islam kya janoge abhi geeta puran ka earth nahin jaante agar apna dhirm hi shant man se perhliya hota to ANNAY dhirm per ungli na uthate(2)islam mein Zina yani balatkar mafi yogay nahin rasul samuhik balatkar ki ijazat de rahe hain kahan garh li hain yeh kahaniyan? (3)aurtein masjid mein ja sakti hain unko mana nahin lakin perde ki wajah se aur ibaadat ke tareeqe ki wajah se nahin jatein
        janab dharm kya hota hia ye batlana… aur aapke islaam me aisa kaha likhaa hai quraan me ho to reference dein… hadees me ho to vo bhi reference dein… praman ke saath charchaa kare to achha hoga… warna bina praman ke yah bhi bol sakta hu ki main hi pichhle janam me paigambar sahab thaa… to kyaa aap use swikaar karoge ???/ aao praman se charchaa kare hawa hawai me baat naa kare…dhanywaad

    3. भाई एक काम करो तुम्हारी कुरआन मुझे पढ़नी है।। और जो मार्किट में कुरान है मेने उसे भी पढ़ी।। क्यों बदल रहे हैं तुम्हारे लोग तुम्हारे पवित्र ग्रंथ को।। तुम्हारे पास जो कुरआन है वो शायद असली हो।। पर अफ़सोस मार्किट में इसके नकली बहुत हैं जो मुसलमानो को गलत संदेश दे रहे हैं।।।
      इसका क्या ??? में फिर कहता हूं गीता तो फिर भी गीता है पर कुरआन को भी जानना चाहूंगा ।। जिससे गलत मत फैलाने वाले उन मुसलमानो को जवाब दे सकू।। क्या मुझे आप असली कुरआन दे सकते हो।। पर अफ़सोस कुरआन को इतना बदल दिया गया है कि वो 70 फ़ीसदी नकली है।।
      एक काहावत है कि अधूरा ज्ञान उस दो धारी तलवार की तरह होती है जो ज्ञान देने और लेने वालों दोनों को काटती है।।
      जो की दुनिया के सामने है।।
      उसी तरह आप की कुरआन ही आपको काट रही है।।
      और समाज में आपको आतंकवादी बना रही है।।।

  63. •पैम्फलेट मे लिखि ग्यारहवें क्रम की आयत हैं:-
    ‘‘और उससे बढ़कर जालिम कौन होगा जिसे उसके ‘रब’ की ‘आयतों’ के द्वारा चेताया जाए, और फिर वह उनसे मुंह फेर ले। निश्चय ही हमे ऐसे अपराधियों से बदला लेना हैं।’’ (कुरआन, सूरा-32, आयत-22)

    *खुलासा:-
    इस आयत में भी इसके पहले लिखी आयत की ही तरह अल्लाह उन लोगो को नरक का दण्ड देगा जो अल्लाह की आयतों को नही मानते। ये परलोक की बाते हैं, अत: इस आयत का सम्बन्ध इस लोक मे लड़ार्इ-झगड़ा कराने या घृणा फैलाने से जोड़ना शरारत पूर्ण हरकत हैं।

    •पैम्फलेट में लिखी बारहवें क्रम की आयत हैं:-
    ‘‘अल्लाह ने तुमसे बहुत-सी ‘गनीमतों’ का वादा किया हैं जो तुम्हारे हाथ आएंगी।’’ (कुरआन, सूरा-48, आयत-20)

    *खुलासा:-
    पहले मैं यह बता दूं कि गनीमत का अर्थ लूट नही बल्कि शत्रु की कब्जा की गर्इ सम्पत्ति होता हैं। उस समय मुसलमानों के अस्तित्व को मिटाने के लिए हमले होते यह हमले की तैयारी हो रही होती। काफिर और उनके सहयोगी यहूदी व र्इसार्इ धन से शक्तिशाली थे। ऐसे शक्तिशाली दुश्मनों से बचाव के लिए उनके विरूद्ध मुसलमानों का हौसला बढ़ाए रखने के लिए अल्लाह की ओर से वायदा हुआ।
    यह युद्ध के नियमों के अनुसार जायज हैं। आज भी शत्रु की कब्जा की गर्इ सम्पत्ति, जो युद्ध के दौरान कब्जे में आती हैं, विजेता की होती हैं।
    अत: इसे झगड़ा कराने वाली या लूट की शिक्षा देने वाली आयत कहना दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

    •पैम्फलेट में लिखी तेरहवें क्रम की आयत हैं:-
    “तो जो कुछ ‘गनीमत’ का माल तुमने हासिल किया हैं, उसे ‘हलाल’ व पाक समझकर खाओं।’’ (कुरआन,सूरा-8, आयत-69)

    *खुलासा:-
    बारहवें क्रम की आयत में दिए हुए तर्क के अनुसार इस आयत का भी सम्बन्ध आत्मरक्षा के लिए किए जाने वाले युद्ध में मिली चल सम्पत्ति से हैं और युद्ध में हौसला बनाए रखने से हैं। इसे भी झगड़ा बढ़ाने वाली या लूट की शिक्षा देने वाली आयत कहना दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

    •पैम्फलेट में लिखी चौदवें क्रम की आयत है:-
    ‘‘हे नबी! ‘काफिरों’ और ‘मुनाफिको’ के साथ जिहाद करो, और उनपर सख्ती करो और उनका ठिकाना ‘जहन्नम’ हैं, और बुरी जगह हैं जहां पहुंचे।’’ (कुरआन,सूरा-66, आयत-9)

    *खुलासा:-
    जैसा कि हम ऊपर बता चुके है कि काफिर कुरैश अन्यायी व अत्याचारी थें और मुनाफिक (यानी कपट करने वाले कपटाचारी) मुसलमानों के हमदर्द बनकर आते, उनकी जासूसी करते हैं और काफिर कुरैश को सारी सूचना पहुंचाते तथा काफिरों के साथ मिलकर अल्लाह के रसूल (सल्ल0) की खिल्ली उड़ाते और मुसलमानों के खिलाफ साजिश रचते। ऐसे अधर्मियों की विरूद्ध लड़ना अधर्म को समाप्त कर धर्म की स्थापना करना हैं। ऐसे ही अत्याचारी कौरवों के लिए कृष्णा ने कहा था:-
    अथ चेत् त्वमिमं धम्र्य संग्रामं न करिष्यसि।
    तत: स्वधर्म कीर्ति च हित्वा पापमपाप्स्यसि।। (गीता:अध्याय 2, श्लोक-33)
    भावार्थ:- ‘‘हे अर्जुन! किन्तु यदि तू इस धर्मयुक्त युद्ध को न करेगा तो अपने धर्म और कीर्ति को खोकर पाप को प्राप्त होगा।’’

    तस्मात्वमुतिष्ठ यशो लभस्व जित्वा शत्रून्भुड्क्ष्व राज्यं समृद्धम्। (गीता: अध्याय 11, श्लोक-33)
    ‘‘इसलिए तू उठ! शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर, यश प्राप्त कर, धन-धान्य से सम्पन्न राज्य को भोग।’’

    पोस्टर या पैम्फलेट छापने व बॉटने वाले श्रीमद्भगवद्गीता के इस आदेश को क्या झगड़ा-लड़ार्इ कराने वाला कहेंगे? यदि नही, तो इन्ही परिस्थितियों में आत्मरक्षा व धर्मरक्षा के लिए अत्याचारियों के विरूद्ध जिहाद (यानी आत्मरक्षा व धर्मरक्षा के लिए युद्ध) करने का फरमान देने वाली आयत को झगड़ा कराने वाली कैसे कह सकते हैं? क्या यह अन्यायपूर्ण नीति नही हैं? आखिर किस उद्देश्य से यह सब किया जा रहा हैं?

    •पैम्फलेट मे लिखी पंद्रहवें क्रम की आयत हैं:-
    “तो अवश्य हम ‘कुफ्र’ करने वालों को यातना का मजा चखाएंगे, और अवश्य ही हम उन्हे सबसे बुरा बदला देंगे उस कर्म का जो वे करते थे।’’ (कुरआन, सूरा-41, आयत-27)

    1. इस आयत में भी इसके पहले लिखी आयत की ही तरह अल्लाह उन लोगो को नरक का दण्ड देगा जो अल्लाह की आयतों को नही मानते।
      जबरदस्ती है क्या अल्लाह कि उसकी बात न मानने पर ये देगा

      और आप साबित करो कि नरक कहाँ है 🙂 और जन्नत कहाँ है

      आपके एक मुसलमान शायर ने ही लिखा है

      ऐसी जन्नत का क्या करे कोई
      जहाँ सदियों पुरानी हरें हो

      🙂

    2. “पहले मैं यह बता दूं कि गनीमत का अर्थ लूट नही बल्कि शत्रु की कब्जा की गर्इ सम्पत्ति होता हैं। उस समय मुसलमानों के अस्तित्व को मिटाने के लिए हमले होते यह हमले की तैयारी हो रही होती। काफिर और उनके सहयोगी यहूदी व र्इसार्इ धन से शक्तिशाली थे। ऐसे शक्तिशाली दुश्मनों से बचाव के लिए उनके विरूद्ध मुसलमानों का हौसला बढ़ाए रखने के लिए अल्लाह की ओर से वायदा हुआ।”

      लूटपाट तो अरब के वाशिंदों का एक रोजगार का साधन था
      और मुहम्मद साहब ने इसे धार्मिक रंग में रंग दिया
      और उसमें अपना और अल्लाह का ५ % हिसा तय कर लिया

      हमें तो मुस्लमान ही किया करते थे

      और कहीं क्यों जाओ आर्यावर्त पर ही अरब से लुटेरे हमले करते ही रहे
      ये तो उनका पेशा था

      🙂

  64. *खुलासा:-
    उस आयत को तो लिखा जिसमें अल्लाह काफिरों को दण्डित करेगा, लेकिन यह दण्ड क्यों मिलेगा? इसकी वजह इस आयत के ठीक पहले वाली आयत (जिसकी यह पूरक आयत हैं) में हैं, उसे ये छिपा गए। अब इन दोनो आयतों को हम एक साथ दे रहे हैं। पाठक स्वयं देखे कि इस्लाम को बदनाम करने की साजिश कैसे रची गर्इ हैं:-
    ‘‘और काफिर कहने लगे कि इस कुरआन को सुना ही न करो और (जब पढ़ने लगे तो) शोर मचा दिया करो, ताकि तुम गालिब रहों। सोे हम भी काफिरों को सख्त अजाब के मजे चखाएंगे, और बुरे अमल की जो वे करते थे, सजा देंगे। (कुरआन, सूरा-41, आयते-26, 27)

    अब यदि कोर्इ अपनी धार्मिक पुस्तक का पाठ करने लगे या नमाज पढ़ने लगे, तो उस समय बाधा पहुचाने के लिए शोर मचा देना क्या दुष्टतापूर्ण कर्म नही हैं? इस बुरे कर्म की सजा देने के लिए र्इश्वर कहता हैं, तो क्या वह झगड़ा कराता हैं?
    मेरी समझ मे नही आ रहा कि पाप कर्मो का फल देने वाली इस आयत में झगड़ा कराना कैसे दिखार्इ दिया?

    •पैम्फलेट में लिखी सौलहवें क्रम की आयत हैं:-
    ‘‘यह बदला है अल्लाह के शत्रुओं का (’जहन्नम’ की) आग। इसी मे उनका सदा घर हैं, इसके बदले कि हमारी ‘आयतों’ का इन्कार करते थे।’’(कुरआन,सूरा-41, आयत-28)

    *खुलासा:-
    यह आयत ऊपर पन्द्रवे क्रम की आयत की पूरक हैं जिसमें काफिरों को मरने के बाद नरक का दण्ड हैं, जो परलोक की बात है। इसका इस लोक में लड़ार्इ-झगड़ा कराने या घृणा फैलाने से कोर्इ सम्बन्ध नही हैं।

    •पैम्फलेट मे लिखी सतरहवें क्रम की आयत हैं:-
    ‘‘नि:सन्देह अल्लाह ने ‘र्इमान’वालों (मुसलमानों) से उनके प्राणों और मालों को इसके बदले में खरीद लिया हैं कि उनके लिए ‘जन्नत’ हैं; वे अल्लाह के मार्ग में लड़ते है तो मारते भी हैं और मारे भी जाते हैं।’’(कुरआन,सूरा-9,आयत-111)

    *खुलासा:-
    गीता में हैं-
    हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्ग जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्।
    तस्मादुत्तिष्ठ् कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चय:।।
    (गीता: अध्याय-2, श्लोक-37)
    भावार्थ:- ‘‘या (तो तू युद्ध में) मारा जाकर स्वर्ग को प्राप्त होगा अथवा (संग्राम में) जीतकर, पृथ्वी का राज्य भोगेगा। इसलिए हे अर्जुन! (तू) युद्ध के लिए निश्चय करके खड़ा हो जा।’’

    गीता का यह आदेश लड़ार्इ-झगड़ा बढ़ाने वाला नही हैं। यह अधर्म को बढ़ाने वाला भी नही हैं, क्योकि यह तो अन्याचारियों का विनाश कर धर्म की स्थापना के लिए किए जाने वाले युद्ध के लिए हैं।
    इन्ही परिस्थितियों में अन्यायी, अत्याचारी मुशरिक-काफिरों को समाप्त करने के लिए ठीक वैसा ही अल्लाह (यानी ईश्वर) का फरमान भी सत्य-धर्म की स्थापना के लिए हैं, आत्मरक्षा के लिए हैं। फिर इसे ही झगड़ा कराने वाला क्यो कहा गया? ऐसा कहने वाले क्या अन्यायपूर्ण नीति नहीं रखतें? जनता को ऐसे लोगो से सावधान हो जाना चाहिए।

    •पैम्फलेट मे लिखी अठ्ठारहवें क्रम की आयत हैं:-
    ‘‘अल्लाह ने इन मुनाफिक (अर्ध मुस्लिम) पुरूषों और मुनाफिक स्त्रियों और ‘काफिरों’ से ‘जहन्नम’ की आग का वादा किया है जिसमें वे सदा रहेंगे। यही उन्हे बस हैं। अल्लाह ने उन्हे लानत की और उनके लिए स्थायी यातना हैं।’’(कुरआन, सूरा-9,आयत-68)

    *खुलासा:-
    सूरा-9 की इस 68वीं आयत के पहले वाली 67वीं आयत को पढ़ने के बाद इस आयत को पढ़े; पहले वाली 67वीं आयत ये हैं:-
    ‘‘मुनाफिक मर्द और मुनाफिक औरतें एक दूसरे के हमजिन्स (यानी एक ही तरह के) हैं, कि बुरे काम करने को कहते और नेक कामों से मना करते और (खर्च करने से) हाथ बन्द किए रहते हैं, उन्होने खुदा को भुला दिया, तो खुदा ने भी उनको भुला दिया। बेशक मुनाफिक ना-फरमान हैं।’’ (कुरआन,सूरा-9,आयत-67)

    स्पष्ट है। मुनाफिक (कपटाचारी) मर्द और औरतें लोगो को अच्छे कामों से रोकते और बुरे काम करने को कहते हैं। अच्छे काम के लिए खोटा सिक्का भी न देते। खुदा (यानी ईश्वर) को कभी याद न करते, उसकी अवज्ञा करते और खुराफात मे लगे रहते। ऐसे पापियों को मरने के बाद कियामत के दिन जहन्नम (यानी नरक) की सजा की चेतावनी देने वाली अल्लाह की यह आयत बुरार्इ पर अच्छार्इ की जीत के लिए उतरी, न कि लड़ार्इ-झगड़ा कराने के लिए।

    1. “अब यदि कोर्इ अपनी धार्मिक पुस्तक का पाठ करने लगे या नमाज पढ़ने लगे, तो उस समय बाधा पहुचाने के लिए शोर मचा देना क्या दुष्टतापूर्ण कर्म नही हैं? ”

      आपके इसी सिद्धांत के ऊपर यदि चला जाये तो क्या किसी को जबरदस्ती आपकी बात न मानने पर हमला करना उनके जवानों को मरना और औरतों को अपनी रखेलों कि तरह रखना क्या कहा जायेगा

      जो मुहम्मद साहब ने किया खैबर के युद्ध में
      🙂

  65. *खुलासा:-
    मक्का के अत्याचारी कुरैश व अल्लाह के रसूल (सल्ल0) के बीच होने वाले युद्ध में कुरैश की संख्या अधिक होती और सत्य के रक्षक मुसलमानों की कम। ऐसी हालत में मुसलमानों का हौसला बढ़ाने व उन्हे युद्ध मे जमाए रखने के लिए अल्लाह की ओर से यह आयत उतरी। यह युद्ध अत्याचारी व आक्रमणकारी काफिरो से था, न कि सभी काफिरों या गैर-मुसलमानों से। अत: यह आयत अन्य धर्मावलत्बियों से झगड़ा कराने का आदेश नही देती। इसके प्रमाण में हम एक आयत दे रहे हैं;-
    ‘‘जिन लोगों (यानी काफिरों) ने तुमसे दीन के बारे में जंग नही की और न तुमको तुम्हारे घरो से निकाला, उनके साथ भलार्इ और इंसाफ का सुलूक करने से खुदा तुमको मना नही करता। खुदा तो इंसाफ करने वालो को दोस्त रखता हैं।’’ (कुरआन,सूरा-60, आयत-8)

    •पैम्फलेट में लिखी बीसवें क्रम की आयत है:-
    ‘‘हे र्इमान लाने वालों (मुसलमानों) तुम ‘यहूदियों’ और र्इसार्इयों’ को मित्र न बनाओं। ये आपस मे एक दूसरे के मित्र हैं। और जो कोर्इ तुममें से उनको मित्र बनाएगा, वह उन्ही मे से होगा। नि:सन्देह अल्लाह जुल्म करने वालों को मार्ग नही दिखाता।’’ (कुरआन, सूरा-5, आयत-51)

    *खुलासा:-
    यहूदी और र्इसार्इ ऊपरी तौर पर मुसलमानों से दोस्ती की बात करते थे लेकिन पीठ पीछे कुरैश की मदद करते और कहते, मुहम्मद से लड़ो, हम तुम्हारे साथ हैं। उनकी इस चाल को नाकाम करने के लिए ही यह आयत उतरी जिसका उद्देश्य मुसलमानों को सावधान करना था, न कि झगड़ा कराना। इसके प्रमाण मे कुरआन मजीद की यह आयत देखें:-
    ‘‘खुदा उन्ही लोगों के साथ तुमको दोस्ती करने से मना करता हैं, जिन्होने तुमसे दीन के बारे मे लड़ार्इ की और तुमको तुम्हारे घरो से निकाला और तुम्हारे निकालने मे औरों की मदद की, तो जो लोग ऐसों से दोस्ती करेंगे, वही जालिम हैं।” (कुरआन, सूरा-60, आयत-9)

    •पैम्फलेट मे लिखी इक्किसवें क्रम की आयत हैं:-
    ‘‘किताबवाले जो न अल्लाह पर ‘र्इमान’ लाते हैं, न अन्तिम दिन पर, न उसे ‘हराम’ करते हैं जिसे अल्लाह और उसके ‘रसूल’ ने हराम ठहराया है, और न सच्चे ‘दीन’ को अपना ‘दीन’ बनाते हैं, उनसे लड़ो यहां तक कि वे अप्रतिष्ठित (अपमानित) होकर अपने हाथों से ‘जिजया’ देने लगें।’’ (कुरआन,सूरा-9,आयत-29)

    *खुलासा:-
    इस्लाम के अनुसार तौरात, जूबूर (Old Testament), इंजील (NewTestament)
    और कुरआन मजीद अल्लाह की भेजी हुर्इ किताबे हैं, इसलिए इन किताबों पर अलग-अलग र्इमान लाने वाले क्रमश: यहूदी, र्इसार्इ और मुसलमान ‘किताब वाले’ या ‘अहले-किताब’ कहलाए। यहां इस आयत मे किताब वाले से मतलब यहूदियों और र्इसाइयों से हैं।
    र्इश्वरीय पुस्तके रहस्यमयी होती हैं इसलिए इस आयत