मैंने इस्लाम क्यों छोड़ा………

why i left islam

मैंने इस्लाम क्यों छोड़ा

लेखक :डॉ आनंदसुमन सिंह पूर्व डॉ कुंवर रफत अख़लाक़ 

इस्लामी साम्प्रदाय में मेरी आस्था दृड़ थी | मै बाल्यकाल से ही इस्लामी नियमो का पालन किया करता था | विज्ञानं का विद्यार्थी बनने के पश्चात् अनेक प्रश्नों ने  मुझे इस्लामी नियमो पर चिन्तन करने हेतु बाध्य किया | इस्लामी नियमो में कुरआन या अल्लाहताला या हजरत मुहम्मद पर प्रश्न करना या शंका करना उतना ही अपराध है जितना किसी व्यक्ति के क़त्ल करने पर अपराधी माना जाता है |युवा अवस्था में आने के पश्चात् मेरे मस्तिष्क में सबसे पहला प्रश्न आया की अल्लाहताला रहमान व् रहीम है , न्याय करने वाला है ऐसा मुल्लाजी खुत्बा ( उपदेश ) करते है | फिर क्या कारण है की इस दुनिया में एक गरीब , एक मालदार , एक इन्सान , एक जानवर होते है | यदि अल्लाह का न्याय सबके लिए समान है जैसा कुरआन में वर्णन किया गया है , तब तो सबको एक जैसा होना चाहिए | कोई व्यक्ति जन्म से ही कष्ट भोग रहा है तो कोई आनन्द उठा रहा है |यदि संसार में यही सब है तो फिर अल्लाह न्यायकारी कैसे हुआ ? यह  प्रश्न मैंने अनेक वर्षो तक अपने मित्रो , परिजनों एवं मुल्ला मौलवियों से पूछता रहा किन्तु सभी का समवेत स्वर में एक ही उत्तर था , तुम अल्लाहताला के मामले में अक्ल क्यों लगाते हो ? मौज करो , अभी तो नैजवान हो | यह मेरे प्रश् का उत्तर नहीं था | निरंतर यह विषय मुझे बाध्य करता था और मै निरंतर यह प्रश्न अनेक जानकार लोगो से करता रहता था किन्तु इसका उत्तर मुझे कभी नहीं मिला | उत्तर मिला तो महर्षि दयानंद सरस्वती के पवित्र वैज्ञानिक ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश में | जिसमे महर्षि ने व्यक्ति के अनेक एवं इस इस जन्म में किये गये सुकर्म या दुष्कर्मो को अगले जन्म में भोग का वर्णन किया | यह तर्क संगत था क्योंकि हम बैंक में जब खता खोलते है तो हमे बचत खाते पर नियमित छह माह में ब्याज मिलता है , मूलधन सुरक्षित रहता है , तथा स्थिर निधि पर एक साथ ब्याज मिलता है , उसी प्रकार जीवात्मा सृष्टि की उत्पत्ति के पश्चात् अनेक शरीरो, योनियों में परवेश करता है तथा अपने सुकर्मो और दुष्कर्मो का फल भोगता है |पुनर्जन्म के बिना यह सम्भव नही हो सकता | अतः पुनर्जन्म का मानना आवश्यक है किन्तु मुस्लिम समाज पुनर्जन्म में विश्वास नहीं करता |उनकी मान्यता तो यह है की चौहदवी शताब्दी में संसार मिट जाएगा | कयामत आएगी और फिर मैदानेहश्र में सभी का इंसाफ होगा |किन्तु उस मैदानेहश्र में जो भी हजरत मुहम्मद के ध्वज निचे आ जायेगा , मुहम्मद को अपना रसूल मान लेगा वही इन्सान बख्सा जाएगा | अर्थात उसे अपने कर्मो के फल भुक्त्ने का झंझट नहीं करना पड़ेगा और वह सीधा जन्नत में जावेगा , जो बुद्धिपरक नहीं लगता |क्योंकि एक व्यक्ति के कहने मात्र से यदि सारा खेल चलने लगे तो संसार में अन्य मत मतान्तरो को मानने की आवश्यकता क्यों पड़े ?और सृष्टि का अंत चौहदवी सदी में माना जाता है जबकि चौहदवी शदाब्दी तो समाप्त हो गयी | फिर यह संसार समाप्त क्यों नहीं हुआ ? कयामत क्यों नहीं आई ? क्या मुहम्मद साहब और इस्लाम से पूर्व यह संसार नहीं था ? क्योंकि इस्लाम के उदय को लगभग १५०० वर्ष हुए है संसार तो इससे पूर्व भी था और रहेगा | मेरा दूसरा प्रश्न था की जब एक मुस्लिम पीटीआई एक समय में चार पत्निया रख सकता है तो एक मुस्लिम औरत एक समय में चार पति क्यों नही राख सकती ? इस्लाम में औरत को अधिक अधिकार ही नही है | एक पुरुष के मुकाबले दो स्त्रियों की गवाही ही पूर्ण मानी जाती है | ऐसा क्यों ? आखिर औरत भी तो इंसानी जाती का अंग है | फिर उसे आधा मानना उस पर अत्याचार करना कहाँ की बुद्धिमानी है और कहाँ तक इसे अल्लाह ताला का न्याय माना जा सकता है ?८० साल का बुड्ढा १८ साल की लड़की से विवाह रचाकर इसे इस्लामी नियम मानकर संसार को मजहब के नाम पर मुर्ख बनाये यह कहाँ का न्याय है ?इस प्रश्न का उत्तर भी मुझे सत्यार्थ परकाश से मिला | महर्षि दयानंद ने महर्षि मनु और वेद वाक्यों के आधार पर सिद्ध किया की स्त्री और पुरुष दोनों का समान अधिकार है | एक पत्नी से अधिक तब ही हो सकती है जब कोई विशेष कारण हो (पत्नी बाँझ हो , संतान उत्पन्न न कर सकती हो ) अन्यथा एक पत्नीव्रत होना सव्भाविक गुण होना चाहिए | मनु ने कहा है –

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः  अर्थात जहाँ नारियो का सम्मान होता है वहां देवता वास करते है | तीसरा प्रश्न मेरे मन में था स्वर्ग व् नरक का | इस्लामी बन्धु मानते है की कयामत के बाद फैसला होगा | उसमे अच्छे कर्मो वालों को जन्नत और बुरे कर्मो वालो को दोजख मिलेगा | जन्नत का जो वर्णन है वह इस प्रकार है की वहां सेब , संतरे , शराब , एक व्यक्ति को सत्तर हुरे  तथा चिकने चुपड़े लौंडे मिलेंगे | मै मुल्ला मौलवियों व् मित्रो से पूछता था की बताये , जब एक पुरुष को जन्नत में लडकिय मिलेंगी तो मुस्लिम महिलाओं को क्या मिलेगा ? मेरे इस प्रश्न ने वे चिड़ते थे | चौहदवी सदी तो बीत गयी पर कयामत क्यों नही आई ? क्या अब नहीं आएगी ?अल्लाह के वायदे का क्या हुआ ?इससे क्या यह स्पष्ट नहीं की कुरआन किसी आदमी की लिखी है ?इन सब प्रश्नों से मेरा तात्पर्य किसी का दिल दुखाना नही अपितु केवल अपने मन में उठ रही शंकाओं का समाधान करना था | किन्तु कभी किसी ने मेरे प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया अपितु इन सब से दूर रहकर महज अल्लाह की इबादत में वक्त गुजारने और मौज उड़ाने का रास्ता दिखाया |

चौथा प्रश्न मेरे दिल में था सभ्यता का | मैंने मुस्लिम इतिहास गम्भीरता से अध्ययन किया है | इतिहास साक्षी है की इस्लाम कभी भी वैचारिकता या सवविवेक के कारण नहीं फैला अपितु इस्लाम आरम्भिक काल से अब तक तलवार का बल , भय , बहुपत्नी प्रथा , स्वर्ग का लोभ या धन का मोह आदि ही इस्लाम के विस्तार के कारण बने | इस्लाम की शैशव अवस्था में हजरत मुहम्मद साहब को अनेक युद्ध करने पड़े | स्वंय उनके चाचा अबुलहब ने अंतिम समय तक इस्लाम को नहीं स्वीकार किया क्योंकि वह उसे वैज्ञानिक व् तर्क सम्मत नहीं मानते थे | हजरत मुहम्मद को मक्का से निष्कासित भी होना पड़ा क्योंकि वह अरब की सभ्यता में आमूल परिवर्तन की कल्पना करते थे और अरब वासी अनेक कबीलों में बनते हुए थे | अबराह का लश्कर तो एक बार मक्का में स्थापित भगवान शंकर के विशाल शिवलिंग ( संगे अस्वाद ) को मक्का से ले जाने के लिए आया था किन्तु भीषण युद्ध में अनेको ने अपने प्राण गंवा दिए | यह मक्का शब्द भी संस्कृत के मख अर्थात यज्ञ शब्द का ही बिगड़ा रूप है | इस समय इस विषय पर चर्चा करना हमारा उद्देश्य नहीं है | मुस्लिम इतिहास में एक भी प्रमाण त्याग , समर्पण या सेवा का नही मिलता | वैदिक इतिहास के झरोखे से देखे तो मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम पिता की आज्ञा का पालन करते हुए वन को प्रस्थान करते है किन्तु दूसरी और औरंगजेब अपने पिता को जेल में कैद कर बूंद बूंद पानी के लिए तरसाता है | यह त्याग , समर्पण एवं सेवा का ही प्रतिफल है की विगत दो अरब वर्षो में वैदिक संस्कृति महँ बनी रह स्की |मेरे परिवार के इतिहास के साथ भी एक काला पृष्ठ जुदा है की उन्हें प्रलोभनवश अपना मूल धर्म त्याग कर इस्लाम में जाना पड़ा | मै स्पष्ट शब्दों में कहता हूँ की आपकी पूजा पद्धति कुछ भी हो सकती है , आप किसी भी समुदाय के हो सकते है किन्तु जिस देश में प्ले बड़े है उस देश को तो अपनी माँ ही मानना चाहिए | राष्ट्रभक्ति किसी व्यक्ति का पहला कर्तव्य होना चाहिए , वैदिक धर्म की महानता के अनेक प्रमाण दिए जा सकते है किन्तु यहाँ मेरा उद्देश्य मात्र कुछ विचारों पर लिखना है |क्योंकि विगत छः वर्षो में मेरे सम्मुख यह प्रश्न रहा है की मै हिन्दू क्यों बना ?मै प्रत्येक व्यक्ति को जन्म से हिन्दू ही मानता हूँ क्योंकि कोई मनुष्य बिना माँ के गर्भ के पैदा नहीं हो सकता यहाँ तक की विज्ञानं की पहुँच टेस्ट ट्यूब चाइल्ड को भी माँ के गर्भ में आश्रय लेना पड़ा , तभी उसका पूर्ण विकास सम्भव हो पाया है |अतः माँ के गर्भ में तो प्रत्येक हिन्दू ही होता है जन्म के पश्चात्  मुस्लमानिया कराए बिना मुसलमान और बपतिस्मा कराए बिना इसाई नहीं बना जा सकता |अतः इन क्रियाओं के पूर्व बच्चा काफिर अर्थात हिन्दू होता है अतः संसार का प्रत्येक शिशु हिन्दू है | मूल हम सबका वेद है अर्थात सत्य सनातन वैदिक धर्म | आशा है मेरे मित्र मेरी भावना को समझेंगे ,  मेरा उद्देश्य किसी की भावनाओ को चोट पहुँचाने का नहीं है अपितु केवल अपने विचारों से समाज को अवगत कराना मात्र है | किन्तु यदि फिर भी किसी की भावनाओं को मेरे कारण ठेस लगे तो उन सबसे मै क्षमा – याचना करता हूँ |

336 thoughts on “मैंने इस्लाम क्यों छोड़ा………”

  1. aanand suman ji aapne bahut hi sachi baten kahi hain… insaan ko manansheel chintak hona chahiye ..Islam me khud sochne ke manahi hai..jo soch kar kaam karega Mulla use jeene nahi dete. fatve jaari kar dete hain…..kya kiya jaye…majboori me jeena parta hai

          1. quraan kaa anuwaad parh liya hai bhai jaan ? aap yah bataye kya khashiyat hai kuraan ki ?? aurat ki kheti karo ??? aurat ko laundiya bolo ??? aurat ki pitai karo ??? aur naa jaane kitna jaankaari du kuraan ki aayat ke baare me ????

            1. Islam me auraton ko jitna haq diya gaya hai wo kisi aur dharm me nahi diya gaya hai .aurton ko parade me rahne ka hukm Islam be diya hai. aurton ko izzat Islam be di hai

              1. नूर सबा जी
                यदि हम कुरआन हदीस से जानकारी देने लगे तो फिर आप ना जाने कहाँ चली जाओगी | हम जानकारी नहीं देना चाहते थे तभी संक्षिप्त में जानकारी दी थी | अभी भी हम संक्षिप्त में ही ही जानकारी देंगे जी और हो सकता है आपको कुछ बाते अशलील लगे उसके लिए क्षमाप्रार्थी हु आपसे और इस आर्यमंतव्य साईट के पाठकगन से | चलो कुछ सवाल करता हु आपसे उसके बाद यह जानकारी देना की इस तरह की कुरआन हदीस में नहीं लिखी है |
                १) गवाही देने के समय १ मर्द == २ औरत की गवाही ???
                २) व्यभिचार करते हुए पकडे जाने पर १ मर्द == ४ औरत की गवाही ????
                ३) औरत की पिटाई करना
                ४) अभी एक फतवा आया है और इरान देश है शायद जिसमे यह कानून बनाया गया है की अपनी बेटी से निकाह कर लो |
                ५) बुरखा ना पहनने पर आज देखो जयरा वासिम जिसने दंगल में काम किया उसका क्या हाल कर दिया जयरा वासिम को माफ़ी मांगनी पड़ गयी ??
                ६) दोस्तों की बीवी पसंद आ जाए तो बदल लो ???
                ७ ) सौहर कही बाहर गया हो तो जब वे आये तो जिस्मानी सम्बन्ध बनाने के लिए निचे शर्मगाह के बाल को साफ़ करो |
                ८) जब चाहे तलाक देकर औरत को छोड़ दो ???
                ९) क्या आप मुताह करना चाहोगी ??? कॉन्ट्रैक्ट निकाह ???
                १०) कोई औरत यदि आपसे प्यार करे और वह जिस्मानी समबन्ध ना बनाने दे तो भी आप उसे उसकी बिना मर्जी के जबरदस्ती जिस्मानी सम्बन्ध बना सकते हो |
                ११) यदि औरत का ससुर उससे सम्बन्ध बना ले तो सौहर उसका पुत्र हो जाता है और उसका ससुर उसका पति |

                कितना प्रमाण दू आपको कुरआन हदीस से | ये तो बस थोड़ी जानकारी दी हमने | पूरा जानकारी देने लगा तो ना जाने क्या क्या फतवा लगा देंगे हम पर | ये बस थोड़ी सी जानकारी दे रहा हु की इस्लाम में औरत की क्या स्थिति है | बस औरत उपभोग की वस्तु है | हलाला क्या है |
                आओ सत्य सनातन वैदिक धर्म की ओर | वेद की ओर लौटो | आपको इन सब से पूरी तरह की छुटकारा मिलेगी | मर्जी आपकी सोच आपकी |
                धन्यवाद |

                  1. krishna
                    jo khud yah comment kare [ (1) Jis hindu ki ma chud rahi h wo call kre hm btage kya sach h mere pe charo vad aate h..hinduo ko apke bhagwaan ki ksm h call me my no.8445652745 (2) Randi ke teri ma ki chut….me bhi hindu hu mgr quraan me padega to sb samj me ajyega .jb pta chlega tujhe ki me hindu me nhi muslim me paida hota ] use tameej sikhaane ki jarurt nahi wah to khud pahle tameej sikhe aur fir aaye charchaa karne. pahle yah batao kya yahi sanskaar diyaa pariwaar waalo ne. jo bhi mat majhb ke ho mere bandhu pahle sanskaar sikho fir aanaa dusare ko gyaan dene ke liye. aur isse yah bhi samajh me aa raha hai upar ke comment se ki krishnaa ke pariwaar waale kitne tameej waale honge. pahle khud tameej seekh kar aaye janab. aur rahi baad meri to maine comment me maafi pahle maang leta hu ki aisa nahi bolna chahiye yadi kuch galat bola ho to kshmaaprarthi hu aur fir unke sawal kaa jawab deta hu…. jaao pahle tameej sikh kar aanaa. hamare liye pura viswa hi pariwaar ke saman hai

                    1. Mere ko ek baat samj main nahi aati ki sare bhagvan india me hi kyu paida hua aor hindu sirf india me hi kyu milte hai? Puri duniya me dekhoge to pata chalega ki 3 dharm hi milenge isai yahudi aor muslim.

                    2. वेद का इश्वर एक है वह सर्वत्र है | वह अवतार नहीं लेता | अरे जनाब धर्म किसे बोलते हो यह बतलाना ? पहले सत्य को समझो फिर आगे चर्चा करेंगे | जिस की बात आपने की वह वह धरम नहीं है जनाब ३ की जो बात आपने की

                    3. Kyu bolti bund ho gayi? Me sab samjta hu pehle jabab do india me hi kyu bhagvan peda hua aor vo bi itne sare.tum kabul karlo k islam hi sachcha dharam hai bhai.

                    4. iska jawab puran ke hisaab se di jaa sakti hai aur us hisaab se jawab bhi de sakta hu magar ham ved ki baat kare… ved me avtaar nahi hota hai… hamare fb page par aao puran se bhi jawb aapko mil jaayega… rahul jha jawab de dennge aapko…. yaha par ved se chrcha karo

                    5. Are tumne o.m.g movie aur pk movie nahi usme bataya hai tumhara dharm kitna sachcha hai.aur agar hindu dharam sachcha hota to tu mere har sawal ka jawab deta.ram veg. Tha ya nonveg. Ye bata muje

                    6. If you think u r Rilligion is great then read your vulgar vedas Atharvaved ch 1 V 126 it contain most vulgar shameless conversation where u r Dev king says I wan to have sex with my daughter and holy vedas says u can press boobs of tin age girl (hehehe 😂😂😂😊😊😊)

                    7. ye sab isam men hota hai “Mutta” Hallaa itaydi

                      aur ved ke naam se ye sab bolne wale kabhee ved dekhe bhe hien
                      reference bhee galat diya hua hai

                      ilm wale atharv ved men kand sukt aur mantra hota hai

                1. Chal bhai tu mere kuch swalo k jwab apne ved puran geeta se de de to islam chod dunga aur tera dharam apna lunga aur tu nhi de paya to tujhe islam apnana padega open challenge
                  1 swal ishwar ki paribhsha
                  mai ved ka refrence deta hu
                  Upanishad chandoniya upnisad
                  Path 6 bhag 2 slok 1
                  Ishwar 1 h dusra nhi h
                  Shwetsitaruonisad phat 6 slok 9 .45
                  Bhagwan ki koi aakruti nhi h B geeta pat 6 slok 20 jo paise k piche bhagte h wo galat bhagwan ki pooja krte h
                  Shwetsitarupnisad
                  P4 slok 19us bhag wan ki koi pratima nhi h
                  Yajurved path 40 m 9
                  Andhkar me wo log jo kudrati cheejo ki pooja krte h aur ghor apradh me wo log h jo insan ki bnayi huyi cheejo ki pooja krte h Bhagwat geeta path 10 s 3
                  Mai bhagwan paida nhi hua mujhe koi paida nhi hua aur mera koi pita nhi h
                  Yajurved path 32 mantr 3
                  Us bhagwan ki koi pratima nhi h
                  Regved khand 1 p 164 m 46
                  Satya ek h khuda ek h us ko alag alag nam se pukarte h
                  Yajurved path 40 mtr 8
                  Bhagwan ka koi aakar nhi h
                  Is hisab se koi ek bhagwan ka nam btao jo fit baithta ho
                  Mere aur b swal h ye samjh lo k ye sb se easy swal h

                  1. Abdullah bhai jaan
                    yadi aap purvagrah se grasit nahi honge aur satya ko swikaar karna chahte hain to aapko sab baat ki jaankaari dene ki koshish ki jaayegi… aap hamare fb page par aaye aur apana sawal rakhe aapko satya ki jaankaari dene ki koshish ki jaayegi…hamara fb page hai : https://www.facebook.com/Aryamantavya/

                    ab aapko batla du ki ham puraan ko nahi mante puraan me bahut si ashlilta hai… puran thik waisa hi hai jaisa quran magar haa puraan quraan se achha hai… khair in baato ko chhod dete hain aur charcha karte hain
                    sabse pahle yah aapko jaankaari de du jis prakaar islaam me majar ki pujaa karna mana hai fir bhi log majaar ki pujaa karte hain usi prakaar jo pauranik hain ve murti puja karte hain… is prakar dono hi bhatke huye hain jo murti pujaa karte hain yaa majar ki pujaa karte hain…

                    ab raha aapke sawal to ham pura praman ke saath screenshot ke saath jawab denge aur yadi jawab naa de paaya to bilkul ham islmaa apana lenge… sabse pahle charchaa quraan par karenge fir ved par karenge??? ham ved ko maante hain to aaye ham ved quraan aur hadees se hamare page par charchaa karte hain…

                  2. binyamin patel ne kha islam succha hai apki baat man lete hai but ek baat samjh nhi ati Ki islam succha hai to muslmani Kyu karte ho chote masum baccho ki pet se muslman hi paida hona chahiye

                2. ye sala amit roy iske comments ko pad k lgta h ki ye aik no. ka jahil aur ganwar h…kuch nhi pta ise…bs kuch line padli ya khi se sunli quran ki….Bhai quran ki tika sahit poorn roop se anuwad pado…fir swal karo…abhi bacche ho ap Islam ki knowledge me…

              2. Islaam me agar aurat ko barabar ka haq diya jata to .aurat ko bhi ghar ke baahar rahnaa chahiye saab .aur jab ak mard chhar aurat ko rakh sakta hai to .to aurat ko bho chaar mard rakhana chahiye .ye to tumhre quran me dimaag achha laga liye population badaane ka .jaraa sa bhi common sence nahi hai. Aap logo ko

              3. Mere Bhai m bade pyaar se bat khuga……..mere bhai ap jo quraan serif k talluk ki bat krte h ..ye..ek dhabba h…kuraan sirif m koi ise bat nahi h ….sansaar ki jitni bi granth h …sab Quran.ki.tarif kr rahi h ….jis ..riggveda..yajurveda..saamveda…atharveda…sri madbhagved
                Geeta….and..Ramayana..y
                ..sab..Quran. ki tarif kr rahi h ….or..yadi..yakeen.na.ho.to
                .ye..granth…utha kr.dekh.skte
                Ho…mere Bhai………
                mera Pahla…swaal
                …ap.se.. ap jo khete h ..ki.islam.dharm m ek aadmi
                4..4. Sadiya kr skta h …fir.ek. esteri ..etni sadiya ..kyu nahi kr skti …
                Mera.pahla swaall…
                Sri Krishna ne ..8..saadi..ki Thi…jo Sab se badi rukmani Thi..sri madbhagveda geeta ..utha .lijye..or .dakh..
                Yadi.m.kau.ki.jab aadmi..8..sadiya kr skta h …to.hindu..dharm m 1 ladki..8..sadiya ..qu.nahi..krti…or..Ramayana utha kr dhak sri ram khete h ..ek..sadi..kro ..Krishna khte h …8..sadiya kro …isa .kyu….
                Mera dusra swall….
                Ap khete h ..islam dharm m ..istariyo.ki.ijjat.nahi.istariyo..ka..prdha..h…..to.sunn…
                Yadi..koi paray..istri.se.jina .kre.. to.usko..katll kiya jata h ..ye..istriyo..ki.ijjat.h.taki .koi.istriyo.ki..Taraf…eyes
                Utha..kr.na.dhak ske…y.ladki ki ijjat h…ye..Saudi Arabia..ka..kanoon ..Dakh..le….
                or ye bata ram ne seeta ka ..pardha..krvaya..tha ..ya nahi…ramcharitr.mannas..k.
                andar mojud h ….krvaya.tha…
                …mera tessra swaal…..
                Hindu dharm m khete h sankar bhagvaan or parvti se bada koi nahi… …
                Utha..sivapuran..or…sankar k pita ka name… nanaparkaar….or.parvati.k.
                .pita.ka.naam..Himalaya..or.Mata.Name…Mena……
                To..ye..kya…Sivapuran m …..
                .mera.4.swall….
                Ap kahete h etihaas m orngajeb..ne..apne..pita..shajaha .ko
                .kedd…kiya…ha..kiya..quki…o.kayar..tha..magar…
                bhadssaa akbar.ne.to.na.bedbho ..samje…jhoda bai…se saadi ki ….uta..history.or.dakh…..
                …….
                mera.5.swall ….
                Mere..Bhai..hindu..dharm.ki.jitni.bhi..books…h
                Sari…m.mere.nabi ka names Muhammad.swa…milga…
                Mere.Bhai..pure…sansaar…m.Islam.dharam …Sab. s .accha ..or…sab..s…sacca…dharm.h………or..yadi…apko…abi..koi..
                sakk.ho…to…
                ..prophat.Muhammad..book..pad..le…Sab..pata..chal…jaygaa…………….
                …….namskaar…….

                .

                1. mohd bilal choudhary bhai jaan
                  ji ham bhi bahut pyaar se hi baat karte hain aur apana paksh rakhte hain ji.. aap jaisa hi yadi sabhi pyaar se apna paksh rakhe to yah bahut achha hoga magar aisa nahi hota hai. khair chale aapke comment ke baare me apana paksh aapke paas rakhna chahta hu… aapne sabse pahle yah bola ki quraan sharif me aisa nahi hai jo ki bilkul galat hai… ham bina praman ke koi lekh nahi daalte… khojbin karne ke baad hi kuch lekh daalte hain… yaha aapne ek article hi likh daali… chaliye kuch sawal puchha jaaye unhi se…
                  aapka bolna hai “sansaar ki jitni bi granth h …sab Quran.ki.tarif kr rahi h ….jis ..riggveda..yajurveda..saamveda…atharveda…sri madbhagved
                  Geeta….and..Ramayana..y
                  ..sab..Quran. ki tarif kr rahi h ….or..yadi..yakeen.na.ho.to
                  .ye..granth…utha kr.dekh.skte

                  sabse pahli baat kis kis jagah quraan ki taarif un grantho me ki gayi hai thoda apana praman rakhe apana paksh rakhe jisse hame yah maalum chal sake ki un grantho me quran ki mahimamandit ki gayi hai.. jisse ki ham bhi quraan kaa mahima mandit kar sake….

                  ab aapne pahala sawal kiya hai vo sawal hai “mera Pahla…swaal
                  …ap.se.. ap jo khete h ..ki.islam.dharm m ek aadmi
                  4..4. Sadiya kr skta h …fir.ek. esteri ..etni sadiya ..kyu nahi kr skti …
                  Mera.pahla swaall…
                  Sri Krishna ne ..8..saadi..ki Thi…jo Sab se badi rukmani Thi..sri madbhagveda geeta ..utha .lijye..or .dakh..
                  Yadi.m.kau.ki.jab aadmi..8..sadiya kr skta h …to.hindu..dharm m 1 ladki..8..sadiya ..qu.nahi..krti…or..Ramayana utha kr dhak sri ram khete h ..ek..sadi..kro ..Krishna khte h …8..sadiya kro …isa .kyu…. “

                  bhai jaan jawab sune sri krishna ne kewal 1 shaadi ki thi magar kuch pauranik logo ne ise puraan me yah bol daala ki unhone 16108 shaadi ki thi.. aapne to kewal 8 bataya main to 16100 jyada bol raha hu… puraan me aisa bahut si baat milawat kar di gayi hai… aur yadi puran ke hisaab se hi aapko jaankaari du waise main ved kaa prachaar karta hu puran kaa khandan karta hu to us hisaab se puraan me yah likhaa hai ki shri krishn ne 16108 se shaadi ki aur ve apane sharir ko 16108 bhaag me rupantarit kar liya… aur sabhi kaa kewal ek hi se vivah huwa ek rup dusare aurat ke taraf nahi jaata thaa…. is tarah ki baat hai puraan me ji….aur yadi aap puraan ke hisaab se hi 4 aurat se nikah karna chahte hain to aap apane aap ko 4 bhaag me vibhaajit kar le aur 4 aurat se nikaah kar le… aapko kisane roka hai janab… amin to bolunga aap bhi 16108 aurat se nikaah kare aur apane body ko 16108 ke rup me divaide kar le.. hame koi fark nahi parega … jitna nikaah utni hi part me apane ko vibhajit kare..
                  aur yah kisane bol diya ki aapko bhagwat geeta me krishna ki patni rukmani kaa varnan hai ??? achha kis adhayay aur kaun se shlok me hai yah hame jaankaari dena… yaha koi bhi baat praman ke saath charchaa kare… hawa hawai me naa baat kare..
                  aapke agle swal kaa jawan agle comment me…. warna yah bahut bada ho jaayegaa…

                2. mohd bilal choudhary bhai jaan
                  ab aapka dusara sawal kaa jawab… aapka bolna hai…”Ap khete h ..islam dharm m ..istariyo.ki.ijjat.nahi.istariyo..ka..prdha..h…..to.sunn…
                  Yadi..koi paray..istri.se.jina .kre.. to.usko..katll kiya jata h ..ye..istriyo..ki.ijjat.h.taki .koi.istriyo.ki..Taraf…eyes
                  Utha..kr.na.dhak ske…y.ladki ki ijjat h…ye..Saudi Arabia..ka..kanoon ..Dakh..le….
                  or ye bata ram ne seeta ka ..pardha..krvaya..tha ..ya nahi…ramcharitr.mannas..k.
                  andar mojud h ….krvaya.tha… “

                  aaoka jawab..islaam me kisi aurat ki ijjat kaha hai bhaijaan… aurat ko laundiya bolaa jaata hai aurat ko kheti bolaa jaata hai… aurat ki pitai karo… 1 mard== 2 aurat.. 1 mard== 4 aurat… koi bhi jab chahhe apane dost se apani biwi ko badal sakta hai…bas talak de do aur jab dost ki biwi ke body se man bhar jaaye to talak de do… aur apani pahli biwi se nikah kar lo… apani biwi kaa doodh bhi pi sakte ho… ye to hadees quraan ki baat huyi…
                  ab aaye filhaal jo aurat kaa muslim samaj me isthiti hai… 1) jayra wasim ko gaali aur rape tak ki dhamki mili… muslimo dwara.. 2) suhana saiyad ko bhi rape karne ki dhamki di gayi kyunki wah singer hai aur singer hone ke kaaran usane gaana gaaya thaa… 3) nahid afrin ko dekh lo usane gaana gaaya to 46 fatwe de diye gaye… ab bhi aap bologe uslim samaj me aurat ki ijjajt ki jaati hai… aisa kai case hote rahte hain … islaam me aurat bas upbhog ki vastu hai….
                  aapne bola ramcharitra manas me raam ne parda karwaya… parda karna koi buri baat nahi hai .. magar aap hame yah batlaa sakte ho… kaha par kaun si chaupai me aur adhayay me is tarh kaa varnan hai… kripya praman jarur denaa. bina praman ke main charcha nahi karta…..
                  aage comment me aapke 3 sawal kaa jawab dene ki karta hu….

                3. aapka teesara sawal
                  …mera tessra swaal…..
                  Hindu dharm m khete h sankar bhagvaan or parvti se bada koi nahi… …
                  Utha..sivapuran..or…sankar k pita ka name… nanaparkaar….or.parvati.k.
                  .pita.ka.naam..Himalaya..or.Mata.Name…Mena……
                  To..ye..kya…Sivapuran m …..

                  janab hamne pahle hi bola hai ki ham khud puraan ki khandan karte hain… yadi aap shivpuraan parhenge to usme shiv ke koi pita nahi hai… unhe aadishakti bola gaya hai matlab ve ardhnari aur ardhpurush ke ke hi body the jo baad me shiv ke rup me aaye aur shakti ko… kai rup me ana pada. pahli rup thaa shakti..jab unhone aatmhatya kiya tab dusare rup me parvati ke rup me janam liya… bhai puraan hi parh liya karo .. aur yahi aap vishnu puran parhoge to usme vishnu ko bola gaya hai jaise shivpuraan me…
                  isi kaaran ham puraan ko khandan karte hain.. ham kewal ved ko maante hain…
                  charchaa karne se pahle ved puraan quraan hadess geeta ramayan mahabhart parhe tab charchaa kare.. yaha yah naa samjhe kuch aap apane man se bol doge to yaha swikaar kar liya jaayegaa…
                  aage comment me aapka 4tha sawal kaa jawab…

                4. mohd bilal choudhary. bhai jaan
                  ab aapka 4tha sawal…
                  “mera.4.swall….
                  Ap kahete h etihaas m orngajeb..ne..apne..pita..shajaha .ko
                  .kedd…kiya…ha..kiya..quki…o.kayar..tha..magar…
                  bhadssaa akbar.ne.to.na.bedbho ..samje…jhoda bai…se saadi ki ….uta..history.or.dakh…..
                  …….

                  bhai jaan itihaas ki baat naa kare.. kitna itihaas ke saath milawat ki gayi hai… vishnustambv ko kutubminar bol diya gaya… tejomahalaya shivalaya ko badalkar taajmahal kar diya gaya.. is tarh ki chhed chaad ki gayi hai… aur rahi baat akbar ki to jis itihaas ko mai jaanta hu us itihaas me akbar ne jodhaa bai se vivah nahi ki thi… yah to itihaas ke milawat karnewaale ne itihaas me aisa kar daala…
                  hame itihas naa sikhaye mere manywaar.. itihaas me kitni chhedkhaani ki gayi hai hame maalum hai….

                5. mohd bilal choudhary. bhai jaan
                  ab aapka 5va sawal…
                  “mera.5.swall ….
                  Mere..Bhai..hindu..dharm.ki.jitni.bhi..books…h
                  Sari…m.mere.nabi ka names Muhammad.swa…milga…
                  Mere.Bhai..pure…sansaar…m.Islam.dharam …Sab. s .accha ..or…sab..s…sacca…dharm.h………or..yadi…apko…abi..koi..
                  sakk.ho…to…
                  ..prophat.Muhammad..book..pad..le…Sab..pata..chal…jaygaa…………….
                  …….namskaar…….”

                  mere bhai ham to wahi bol rahe hain jitne granth me muhmad kaa naam aaya hai paigambar sahab kaa hame reference to dein… ham bhi janana chahenge ki kaun kaun se granth me aisa naam aaya hai…
                  janab kisi bhi granth me aisa nahi hai.. yah aapki kori kalpna hai… hamne kai granth parhe hain usme kahi bhi koi naam nahi aaya haai.. aise jhuthe iljaam laganewaale ki kami nahi hai…
                  hame thoda reference ke saath jaankaari dena ji… yaha jhuthi afwaah naa failaye. aur naa hawa hawai ki baat kare….
                  aapke jawab ki intjaar me…
                  dhanywaad.. jawab tabhi dena jab aapke paas praman ho ….

              4. Islam galt nhi hai soch galt hai aur Jis izzat ki baat kar rhe ho ap to Mai apko bata du ki islam me aurat ko baccha paida karne Ki machine samjha jata hai

              1. quran likho yaa kuraan likho matlab samjhane se hai bhai jaan.. aap samjh gaye wahi kaabhi hai bhai jaan. aur purvagrah se grasit hoge to koi baat nahi hai ji …..

              1. हम ने जो जनाब अच्छी तरह से पढ़ लिया है आप ही बताओ कि क्या गलत लिखा है

            2. Randi ke teri ma ki chut….me bhi hindu hu mgr quraan me padega to sb samj me ajyega .jb pta chlega tujhe ki me hindu me nhi muslim me paida hota

              1. krishna
                hamare yah sanskaar nahi ki mithi waani (gaali galauz ) se baat kare aur is comment se saaf maalum ho raha hai ki fake id se hindu yaa aarya bankaar charchaa kar rahe ho… jo jhuthaa ho wah isi tarh ki baat kar saktaa hai . chalo janam lene ke baad us bachhe ko kaan me kalma kyu sunaya jaata hai jab wah janam se muslim hota hai to ??? janab hamne bhi quraan hadees parhi hai aur jawab denaa shuru kar du to najar nahi aaoge. ham par kai fatwe lagaa doge. kai maulvi fatwaa me yah yah bol denge jaise kamlesh tiwaari ki sar kalam kar laane ko bolaa hai usi tarah amit roy kaa sar kar laao 20 laakh kaa inaam diyaa jaayegaa. janab hame majbur naa karo ki kuraan haddess ki un chuye pahlu ko pesh kiyaa jaaye jo yaha kabhi pesh nahi karnaa chahta. sahi bukhaari hadees nikaah chapter parho aur batlaanaa paigambar sahab ki maut kaise huye. hamare liye to aapke maataa bhi mere maata huye aaur aap hamare bhai huye to kya us hisaab se aap jo khud comment kiye ho (Randi ke teri ma ki chut….me bhi hindu hu mgr quraan me padega to sb samj me ajyega .jb pta chlega tujhe ki me hindu me nhi muslim me paida hota ) aap khud wah ban jaate ho kyunki aapki maata bhi hamari maata huyi aur aap hamare bhai huye. is site ke pathakgan se kshmaa prarthi hu yadi kuch galat bolaa ho to. jo bhi ho pahle sanskaar sikho. socho maata ji (aapki maataa) ko aapke hi comment se kitnaa buraa lagegaa ki kis badtameej nalayak ko maine janam de diya waise aapki maata ji bhi hamari maata ji huyi. ek baar fir bolta hu tameej sikh lo aur sanskaar sikh lo mere bhai………. dhanywaad

                1. बहुत सही कहा . संत हृदय नवनीत समाना . फिर कोई भी व्यक्ति पंजीकरण कराके तो पैदा होता नहीँ कि उसे हिन्दू माँ की कोख से पैदा होना है या फिर किसी मुसलमान माँ की कोख से . उस परम शक्ति की मर्जी वो आदमी की कोख देता है या किसी जानवर की .

            3. allah pak ne surah bakra ayat no 223 me aisa kaha hai bilkul kaha per afsos ki apne age nhi pada khair kash ki quran pada hota anyway the meaning is “Auraty apki khetiyaa hai” iska sheeda sa arth hai ki jaisay ap apne khet pe hal chala ker kheti krte hai without any nuksaan to ap unse bhi waisa hi soolook kre unke sath mohabbat k sath rahe na ki torcher kare quran me kaha ki ap unka libaas hai aur apki

              1. mo zeeshaan bhai jaan
                sabse pahle yah aapko batlaa du ki ham jo bolte hain wah praman ke saath bolte hain . khair chalo hamne quran nahi parha hai aapke hisaab se . koi baat nahi . chalo aap hi mujh jaise agyani ko quran parhaa dein badi meharbaani hogi. ab aapne batlaya comment kiya hai ki [allah pak ne surah bakra ayat no 223 me aisa kaha hai bilkul kaha per afsos ki apne age nhi pada khair kash ki quran pada hota anyway the meaning is “Auraty apki khetiyaa hai” iska sheeda sa arth hai ki jaisay ap apne khet pe hal chala ker kheti krte hai without any nuksaan to ap unse bhi waisa hi soolook kre unke sath mohabbat k sath rahe na ki torcher kare quran me kaha ki ap unka libaas hai aur apki
                is comment se ek sawal puchana chahta hu kya aap hame jaankaari denge us sawal kaa ???
                [ “Auraty apki khetiyaa hai” iska sheeda sa arth hai ki jaisay ap apne khet pe hal chala ker kheti krte hai without any nuksaan to ap unse bhi waisa hi soolook kre unke sath mohabbat k sath rahe na ki torcher kare ] jis prakar khet ko dusare kisaan ko bhi bhaada (rent) par de diya jaata hai kya usi prakar aurat ko bhi bhaada (rent) par diyaa jaa sakta hai ??? khet ko bech (sale) kar di jaati hai kya aurat ko bhi sale (bech) di jaa sakti hai ??? khet ko batai ki jaati hai matalab kai ko kheti karne ko de di jaati hai kyaa isi prakaar aurat ko bhi kai logo me share ki jaa sakti hai kyaa ???

                aapke jawab ki pratiksha me….

                1. Amit roy muje ye batake hindu mai nange baave aate hai uski puja kyu karte hai wo to koi bagvan nahi hai? Hindu dharm tumhe yahi sikhata hai nange bave ki puja karo gaay ka peshab pio ye sab a pavitra chij kha pikar tum log kehte ho k hum pavitra hai?

                  1. binyamin patel भाई जान
                    नंगा हिन्दू में नहीं होता यह जैन में होता जनाब | गाय की पेशाब ठीक उसी तरह पि जाती है जैसे आप लोग ऊंट की मूत्र पीते हो | गाय की मूत्र को अमेरिका और कई जगह पेटेंट की गयी है मगर कहा ऊंट की मूत्र को पेटेंट की गयी है थोडा जानकारी देना | कुछ भी बोलने से पहले सोच लिया करो कहीं आपकी झूठ पकड़ी ना जाए | धन्यवाद

                    1. जनाब आपके इनकार कर देने से सत्य झूठ नहीं हो जाता | कई पीते है | आप तो अल तकईया ही करोगे

                    2. Nanga hindu me hi hota hai mere mohlleme hindu rehte hai bhai wo log nange bave me mante hai aor islam me napak chiz khane ka hukum nahi he chare unt ka behab hi kyu na ho apne dimag ki bat na rakhdo pehle achche se jankari lelo.aor ha mene bi suna hai k hindu me gay ko bohat pavitra mante ho apr uska viry ko apne kapar par lagate ho?

                    3. लगे रहो झूठ बोलते रहो | हिन्दू में कोई नंगा बाबा नहीं होता यह जैन में होता है | केवल झूठ बोलते रहो | जनता सब जानती है

              1. mo zeeshaan bhai jaan
                ham koi bebuniyaad iljaam nahi lagate. ham wahi bolte hain jo quraan hadees ityaadi me hota hai. aap ek kaam kare hamare facebook par comment karen jawab di jaayegi aapko hamare reader ke dwara yaa fir hamare dwara yaa rahul jhaa ke dwara. aapko aagle comment me ham apane fb page ka link share karenge kyunki aapne apana email id ki jaankaari di hai. aaye hamare page par reference ke saath aapko jawab dene ki koshish ki jaayegi dhanywaad…

            4. Kyamat ki tarikh ka zikar kahi bi nahi hua hai 1400 sal bad kayamat aayegi vesa kahi bhi likha nahi milega.

              1. क़यामत तो आएगी और उस दिन फैसला होगा कौन जन्नत में जाएगा और कौन दोजख में | कुरान खुद बोलता है कयामत की दिन आयेंगे मगर कब आयेंगे यह तो अल्लाह मिया तक को नहीं मालुम जिसे सब कुछ मालुम होता है यह तो अल्लाह मियां पर दोष नहीं लगेगा ? अल्लाह यदि जानता होता तो अब तक क्यों नहीं बतलाया ?

                1. Allah ko pata hai qayamat kab aayegi magar allah to allah hai wo hame koi date thorina denge. Lekin allah ne hame bohat si nisani batlayi hai qayamat ki.

                  1. अल्लाह को मालुम है तो वह क्यों नहीं जानकारी दिया ? यह अल्लाह पर दोष लगेगा ?

                  1. जबसे सृस्ती आरम्भ हुयी तभी से | धरम किसे बोलते हैं इसे समझो यह इसाई और मुस्लिम की तरह २००० साल और १४०० साल पहले नहीं बनी थी यह तो आरम्भ से है

                    1. Hindu kon tha bhai pehle ye bata aur islam pehle se gai iska saboot hai aadam a.s. jiska zikar tumhe quran aur bible me milega.

                    2. saare sawal kaa jawab satyarth prkash parho.. jawab diyaa jaa sakta hai magar jawab nahi dungaa…. jawab aapko satyarth prakash me mil jaayega

                    3. Javab pata hoto denge na aap samaj gaya tumhe kuchbi nahi pata tum hindu to wo ho jo mante hai ki insan pehle bunder tha.aor bunder vala dharm nastic hai bhai.

                    4. इंसान पहले बन्दर था यह डार्विन का सिद्धान्त है सनातनियों का नही

                      अपना ज्ञान बढ़ाइए भाई

          2. OM..
            MOHSIN BHAI, NAMASTE..
            please once again open your so called divine book [koran] and read following verses carefully then come to discuss right:
            A good moral, moderate Muslim man believes in Pre-Pubescent Child Rape (65:4)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Rape (4.3)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Gang Rape (24:13)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Sex Slavery (4:24)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Torture (22.19-22)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Whipping Adulators (24.2)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Amputation and Crucifixion
            (5:33)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Beheading (8:12, 47:4)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Wife Beating (4:34)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Inferiority of Women (2.228,
            4.11, 4.176)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Women as Sex Objects (2.223)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Mass murder (2:191, 9:5,)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Human sacrifice – Killing kafirs
            (47.4)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Terrorizing kafirs (8.60, 3.151)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Immoral Paradise guaranteeing
            accession to Paradise for Muslim men who kill kafirs or who die in the process of
            trying to kill kafirs (9.111)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Massacre (8.67, 7.4)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Genocide (8.17)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Theft and Robbery (Entire
            Chapter 8 called Booty)
            A good moral, moderate Muslim man believes in all other religions must submit
            to Islam (2.103, 2.286, 3.19, 48.16)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Your children are your enemies
            (9.23, 64.15)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Revenge (5.45)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Hate (5.60, 2.61)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Slavery (2.178)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Extortion (9:29)
            A good moral, moderate Muslim man believes in Lying (3:28, 5:51)

            1. o baba,ye sab ayat aayi har ek waqt har ek karan k hisab se,zaid ka beta senapati bana,zaid kaunt tha? salve ,sab naraz hue,huzur ne kaha k jis din slave duniya chlayega woh asli duniya hogi,abe jisne than li hi ke samnewale ko galat sabit karna uska koi ilaz nahi,aur aap ka apna iman kamzor hai,isliye dusro main aib dhoondhte ho,abe chawanni ki murti bazar se lake bhagwan banate ho,are khud bhagwat gita iss kaam se rokti hai,aap to har ek naththu khaire ko bhagwan banate rehte ho,agar gurde main hai dum to de jawab dr.zakir naik ko.

              1. “abe chawanni ki murti bazar se lake bhagwan banate ho”

                Janaab ham koi bhagwaan naheen banate n hee koi paigamber banate hein

                Patthar pujana unhen chumna kabron par jhukna ye sab aapki fidarat hai vaidik dharmiyon ki nahene

              2. Emran apko sirf ek chota sa kaam karna hai kisi molvi se puchna duniya kaise bani wo bolega Allah ne hukka piya jo dhuaa nikla wo asman ban gya or jo raakh giri wo dharti aisa hota hai kya?allah ne kaha baith kr piya tha? Hukka

                1. bhai sahab pehle aap iske baare me acchi tarahse jaankari le lijiye aur phir bataye aap jaisa bol rehe hai waisa kuch nahi hai shayad aap ku kisine galat jaankari dia hai isliye mujhe aapse guzarish hai keh pehle aap acchi tarah se maalumaat kare aur phir post kare khamkha aap apne aap pe zulm naa kare

                  1. मेरे भाई जान रेफ़रन्स दी गयी है उसे देखो और मिलाओ जिस जिस से दी गयी है उससे आपको सत्य मालुम हो जाएगा यदि आप पूर्वाग्रह से ग्रसित ना हुये तो और अंधविश्वास से ऊपर उठ कर देखा तो

        1. aap jo b h mai bata du aapko k jisne b ye likha h wo ye jaan le k Islam ne ladai kabhi nhi ki h balki Islam se ladai ki gai h.Uski jayez baato ko na maan kr jb kisi baat ki puri jankari na ho to yu galt salt Kuch b nhi kahna chahiye.

          1. Yadi Islam shanti ka majhab hai to fir ye jo Muhamamd sahib ne khaibar men kiya wo kya tha

            अनास से रिवायत है कि मुहम्मद साहब ने एक अभियान खैबर की तरफ रवाना किया. हमने सुबह की नमाज अदा की . मुहम्मद साहब और अबु ताल्हा घोड़े पर सवार हो गए. मैं ( अनास ) अबू ताल्हा के पीछे बैठा था. हम खैबर की तंग गलियों में घुस गए .जैसे ही वो निवास स्थान पर पहुंचे जो अल्लाह हु अबकर जोर बोला. खैबर तबाह हो चूका था .हम लोगों के मध्य में थे जिनको पहले सचेत किया जा चूका था. लोग जब दैनिक कर्म के लिए बाहर निकले तो पता चला कि मुहम्मद साहब ने अपनी सेना के साथ कब्ज़ा कर लिया है .मुहम्मद साहब ने कहा की खैबर की भूमि अब हमारे स्वामित्व में है हमने बलपूर्वक इसे ले लिया है . लोग अब युद्ध बंदी थे .

            हदीस आगे कहती है कि दिह्या मुहम्मद साहब के पास आकर बोला कि अल्लाह के रसूल मुझे बंदियों की लड़कियों में से एक लड़की दे दीजिये. मुहम्मद साहब ने कहा कि जाओ और किसी को भी ले लो . उसने हुयायाय की लड़की साफिया को पसंद किया .

            एक व्यक्ति ने मुहम्मद साहब के पास आकर कहा की आपने दिह्या को दे दिया वो केवल आपके लिए है . मुहम्मद साहब ने कहा की साफिया को दिह्या के साथ बुलाया जाए . मुहम्मद साहब के साफिया को देखकर कहा कि दिह्या कोई दूसरी लड़की ले लो और मुहम्मद साहब ने साफिया को मुक्त कर उससे निकाह कर कर लिया .

            http://aryamantavya.in/islam-shanti-ka-mazhab/

              1. mere bandhu hamare fb page par aao aapko rahul jhaa hadees quraan se praman denge screenshot se. jo yaha di jaati hai wah lekh khoj karne ke baad daali jaati hai. aa jaao rahul jhaa se hadees aur quraan se charchaa kar lenaa yadi satya ko janana ho to. nahi to bhag jaaoge…

              2. इस्लाम के विसतार का मुख्य कारण चार शादियाँ और आसान तलाक, गैर मुसलमानों को लूटो, पीटो, मारो। कोई गुनाह नहीं। क्योंकि तुम यह उनको मुसलमान बनाने के लिए कर रहे हो।

                असभ्य।

          2. अल्लाह कब पैदा हुये?
            मुस्लिम धर्म कब बना?
            लडकियो की कोई इज्जत नही, सिर्फ हवस के लिये?
            इस्लाम याने अशांती, अफगाणिस्तान, पक्स्टन सीरिया उस्के उदाहरण है

    1. Jis hindu ki ma chud rahi h wo call kre hm btage kya sach h mere pe charo vad aate h..hinduo ko apke bhagwaan ki ksm h call me my no.8445652745

      1. aap kya ho kis mat majhab ke ho . kyaa aapke pavitra granth me yahi sikhaya gaya hai. aapki maata pitaa ne yahi sikhaaya hai. aapke maata pitaa yadi aapke comment parh le to khud sharm ke maare bolenge kis jaahil ko janam de diyaa . waise quraan bhi jahil banane ko bolta hai yadi sahi se quraan parhaa hoge to yaad aa jaayegaa aur purvagrah se grasit nahi ho to… aur aap hindu hote to is tarah se badtamiji nahi karte. dhanywaad

      2. OM..
        NAMASTE..!
        LAGTAA HAI YEH ‘KRISHNA’ NAAM DHAARI KANS KE ROOH DHAARI KOI SAITAAN HAI..!? ISKO BACHPAN ME HI DO CHAANTAA LAGAADIYAA HOTAA KISINE TO AISI HARKAT KARNEKI JURRAT SAAYAD NAHIN KARTAA..
        ISLAM KI ASALIYAT YAHAAN DEKHO (KISI AUR KI LEKH SE SOPY):
        मुहम्मद पैगम्बर खुद जन्मजात हिंदु थे और काबा हिंदु मंदिर:
        मुसलमान कहते हैं कि कुराण ईश्वरीय वाणी है तथा यह धर्म अनादि काल से चली आ रही है,परंतुइनकी एक-एक बात आधारहीन तथा तर्कहीन हैं-सबसे पहले तो ये पृथ्वी पर मानव की उत्पत्ति काजो सिद्धान्त देते हैं वो हिंदु धर्म-सिद्धान्त का ही छाया प्रति है. हमारे ग्रंथ के अनुसार ईश्वर ने मनु तथा सतरूपा को पृथ्वी पर सर्व-प्रथम भेजा था.. इसी सिद्धान्त के अनुसार ये भी कहते हैं कि अल्लाह ने सबसे पहले आदम और हौआ को भेजा. ठीक है…पर आदम शब्द संस्कृत शब्द “आदि” से बना है जिसका अर्थ होता है-सबसे पहले.यनि पृथ्वी पर सर्वप्रथम संस्कृत भाषा अस्तित्व में थी..सबभाषाओं की जननी संस्कृत है ये बात तो कट्टर मुस्लिम भी स्वीकार करते हैं..इस प्रकार आदि धर्म-ग्रंथ संस्कृत में होनी चाहिए अरबी या फारसी में नहीं.
        इनका अल्लाह शब्द भी संस्कृत शब्द अल्ला से बना है जिसका अर्थ देवी होता है.एक उपनिषद भीहै “अल्लोपनिषद”. चण्डी,भवानी,दुर्गा,अम्बा,पार्वती आदि देवी को आल्ला से सम्बोधित किया जाताहै.जिस प्रकार हमलोग मंत्रों में “या” शब्द का प्रयोग करते हैं देवियों को पुकारने में जैसे “या देवीसर्वभूतेषु….”, “या वीणा वर ….” वैसे ही मुसलमान भी पुकारते हैं “या अल्लाह”..इससे सिद्ध होता हैकि ये अल्लाह शब्द भी ज्यों का त्यों वही रह गया बस अर्थ बदल दिया गया.
        चूँकि सर्वप्रथम विश्व में सिर्फ संस्कृत ही बोली जाती थी इसलिए धर्म भी एक ही था-

      3. वैदिक धर्म.बाद मेंलोगों ने अपना अलग मत और पंथ बनाना शुरु कर दिया और अपने धर्म(जो वास्तव में सिर्फ मत हैं) को आदि धर्म सिद्ध करने के लिए अपने सिद्धान्त को वैदिक सिद्धान्तों से बिल्कुल भिन्न कर लियाताकि लोगों को ये शक ना हो कि ये वैदिक धर्म से ही निकला नया धर्म है और लोग वैदिक धर्म केबजाय उस नए धर्म को ही अदि धर्म मान ले..चूँकि मुस्लिम धर्म के प्रवर्त्तक बहुत ज्यादा गम्भीर थेअपने धर्म को फैलाने के लिए और ज्यादा डरे हुए थे इसलिए उसने हरेक सिद्धान्त को ही हिंदु धर्मसे अलग कर लिया ताकि सब यही समझें कि मुसलमान धर्म ही आदि धर्म है,हिंदु धर्म नहीं..पर एकपुत्र कितना भी अपनेआप को अपने पिता से अलग करना चाहे वो अलग नहीं कर सकता..अगरउसका डी.एन.ए. टेस्ट किया जाएगा तो पकड़ा ही जाएगा..इतने ज्यादा दिनों तक अरबियों कावैदिक संस्कृति के प्रभाव में रहने के कारण लाख कोशिशों के बाद भी वे सारे प्रमाण नहीं मिटापाए और मिटा भी नही सकते….
        भाषा की दृष्टि से तो अनगिणत प्रमाण हैं यह सिद्ध करने के लिए कि अरब इस्लाम से पहले वैदिकसंस्कृति के प्रभाव में थे.जैसे कुछ उदाहरण-मक्का-मदीना,मक्का संस्कृत शब्द मखः से बना हैजिसका अर्थ अग्नि है तथा मदीना मेदिनी से बना है जिसका अर्थ भूमि है..मक्का मदीना का तात्पर्ययज्य की भूमि है.,ईद संस्कृत शब्द ईड से बना है जिसका अर्थ पूजा होता है.नबी जो नभ से बनाहै..नभी अर्थात आकाशी व्यक्ति.पैगम्बर “प्र-गत-अम्बर” का अपभ्रंश है जिसका अर्थ है आकाश सेचल पड़ा व्यक्ति..
        चलिए अब शब्दों को छोड़कर इनके कुछ रीति-रिवाजों पर ध्यान देते हैं जो वैदिक संस्कृति के हैं–
        ये बकरीद(बकर+ईद) मनाते हैं..बकर को अरबी में गाय कहते हैं यनि बकरीद गाय-पूजा का दिनहै.भले ही मुसलमान इसे गाय को काटकर और खाकर मनाने लगे..
        जिस तरह हिंदु अपने पितरों को श्रद्धा-पूर्वक उन्हें अन्न-जल चढ़ाते हैं वो परम्परा अब तकमुसलमानों में है जिसे वो ईद-उल-फितर कहते हैं..फितर शब्द पितर से बना है.वैदिक समाजएकादशी को शुभ दिन मानते हैं तथा बहुत से लोग उस दिन उपवास भी रखते हैं,ये प्रथा अब भी हैइनलोगों में.ये इस दिन को ग्यारहवीं शरीफ(पवित्र ग्यारहवाँ दिन) कहते हैं,शिव-व्रत जो आगेचलकर शेबे-बरात बन गया,रामध्यान जो रमझान बन गया…इस तरह से अनेक प्रमाण मिलजाएँगे..आइए अब कुछ महत्त्वपूर्ण बिंदुओं पर नजर डालते हैं…
        अरब हमेशा से रेगिस्तानी भूमि नहीं रहा है..कभी वहाँ भी हरे-भरे पेड़-पौधे लहलाते थे,लेकिनइस्लाम की ऐसी आँधी चली कि इसने हरे-भरे रेगिस्तान को मरुस्थल में बदल दिया.इस बात कासबूत ये है कि अरबी घोड़े प्राचीन काल में बहुत प्रसिद्ध थे..

      4. भारतीय इसी देश से घोड़े खरीद करभारत लाया करते थे और भारतीयों का इतना प्रभाव था इस देश पर कि उन्होंने इसका नामकरणभी कर दिया था-अर्ब-स्थान अर्थात घोड़े का देश.अर्ब संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ घोड़ा होता है. {वैसे ज्यादातर देशों का नामकरण भारतीयों ने ही किया है जैसेसिंगापुर,क्वालालामपुर,मलेशिया,ईरान,ईराक,कजाकिस्थान,तजाकिस्थान,आदि..} घोड़े हरे-भरेस्थानों पर ही पल-बढ़कर हृष्ट-पुष्ट हो सकते हैं बालू वाले जगहों पर नहीं..
        इस्लाम की आँधी चलनी शुरु हुई और मुहम्मद के अनुयायियों ने धर्म परिवर्त्तन ना करने वाले हिंदुओंका निर्दयता-पूर्वक काटना शुरु कर दिया..पर उन हिंदुओं की परोपकारिता और अपनों के प्रतिप्यार तो देखिए कि मरने के बाद भी पेट्रोलियम पदार्थों में रुपांतरित होकर इनका अबतक भरण-पोषण कर रहे हैं वर्ना ना जाने क्या होता इनका..!अल्लाह जाने..!
        चूँकि पूरे अरब में सिर्फ हिंदु संस्कृति ही थी इसलिए पूरा अरब मंदिरों से भरा पड़ा था जिसे बाद मेंलूट-लूट कर मस्जिद बना लिया गया जिसमें मुख्य मंदिर काबा है.इस बात का ये एक प्रमाण है किदुनिया में जितने भी मस्जिद हैं उन सबका द्वार काबा की तरफ खुलना चाहिए पर ऐसा नहीं है.येइस बात का सबूत है कि सारे मंदिर लूटे हुए हैं..इन मंदिरों में सबसे प्रमुख मंदिर काबा का हैक्योंकि ये बहुत बड़ा मंदिर था.ये वही जगह है जहाँ भगवान विष्णु का एक पग पड़ा था तीन पगजमीन नापते समय..चूँकि ये मंदिर बहुत बड़ा आस्था का केंद्र था जहाँ भारत से भी काफी मात्रा मेंलोग जाया करते थे..इसलिए इसमें मुहम्मद जी का धनार्जन का स्वार्थ था या भगवान शिव काप्रभाव कि अभी भी उस मंदिर में सारे हिंदु-रीति रिवाजों का पालन होता है तथा शिवलिंग अभी तकविराजमान है वहाँ..यहाँ आने वाले मुसलमान हिंदु ब्राह्मण की तरह सिर के बाल मुड़वाकर बिनासिलाई किया हुआ एक कपड़ा को शरीर पर लपेट कर काबा के प्रांगण में प्रवेश करते हैं औरइसकी सात परिक्रमा करते हैं.यहाँ थोड़ा सा भिन्नता दिखाने के लिए ये लोग वैदिक संस्कृति केविपरीत दिशा में परिक्रमा करते हैं अर्थात हिंदु अगर घड़ी की दिशा में करते हैं तो ये उसके उल्टीदिशा में..पर वैदिक संस्कृति के अनुसार सात ही क्यों.?

      5. और ये सब नियम-कानून सिर्फ इसीमस्जिद में क्यों?ना तो सर का मुण्डन करवाना इनके संस्कार में है और ना ही बिना सिलाई केकपड़े पहनना पर ये दोनो नियम हिंदु के अनिवार्य नियम जरुर हैं.
        चूँकि ये मस्जिद हिंदुओं से लूटकर बनाई गई है इसलिए इनके मन में हमेशा ये डर बना रहता है किकहीं ये सच्चाई प्रकट ना हो जाय और ये मंदिर उनके हाथ से निकल ना जाय इस कारणआवश्यकता से अधिक गुप्तता रखी जाती है इस मस्जिद को लेकर..अगर देखा जाय तो मुसलमानहर जगह हमेशा डर-डर कर ही जीते हैं और ये स्वभाविक भी है क्योंकि इतने ज्यादा गलत कामकरने के बाद डर तो मन में आएगा ही…अगर देखा जाय तो मुसलमान धर्म का अधार ही डर परटिका होता है.हमेशा इन्हें छोटी-छोटी बातों के लिए भयानक नर्क की यातनाओं से डराया जाताहै..अगर कुरान की बातों को ईश्वरीय बातें ना माने तो नरक,अगर तर्क-वितर्क किए तो नर्क अगरश्रद्धा और आदरपूर्वक किसी के सामने सर झुका दिए तो नर्क.पल-पल इन्हें डरा कर रखा जाता हैक्योंकि इस धर्म को बनाने वाला खुद डरा हुआ था कि लोग इसे अपनायेंगे या नहीं और अपना भीलेंगे तो टिकेंगे या नहीं इसलिए लोगों को डरा-डरा कर इस धर्म में लाया जाता है और डरा-डरा करटिकाकर रखा जाता है..जैसे अगर आप मुसलमान नहीं हो तो नर्क जाओगे…

      6. अगर मूर्त्ति-पूजा करलिया तो नर्क चल जाओगे,मुहम्मद को पैगम्बर ना माने तो नर्क;इन सब बातों से डराकर ये लोगों कोअपने धर्म में खींचने का प्रयत्न करते हैं.पहली बार मैंने जब कुरान के सिद्धान्तों को और स्वर्ग-नरककी बातों को सुना था तो मेरी आत्मा काँप गई थी..उस समय मैं दसवीं कक्षा में था और अपनीस्वेच्छा से ही अपने एक विज्यान के शिक्षक से कुरान के बारे में जानने की इच्छा व्यक्त की थी..उसदिन तक मैं इस धर्म को हिंदु धर्म के समान या थोड़ा उपर ही समझता था पर वो सब सुनने के बादमेरी सारी भ्रांति दूर हुई और भगवान को लाख-लाख धन्यवाद दिया कि मुझे उन्होंने हिंदु परिवार मेंजन्म दिया है नहीं पता नहीं मेरे जैसे हरेक बात पर तर्क-वितर्क करने वालों की क्या गति होती…!
        एक तो इस मंदिर को बाहर से एक गिलाफ से पूरी तरह ढककर रखा जाता है ही(बालू की आँधी सेबचाने के लिए) दूसरा अंदर में भी पर्दा लगा दिया गया है.मुसलमान में पर्दा प्रथा किस हद तकहावी है ये देख लिजिए.औरतों को तो पर्दे में रखते ही हैं एकमात्र प्रमुख और विशाल मस्जिद को भीपर्दे में रखते हैं.क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि अगर ये मस्जिद मंदिर के रुप में इस जगह परहोता जहाँ हिंदु पूजा करते तो उसे इस तरह से काले-बुर्के में ढक कर रखा जाता रेत की आँधी सेबचाने के लिए..!! अंदर के दीवार तो ढके हैं ही उपर छत भी कीमती वस्त्रों से ढके हुए हैं.स्पष्ट हैसारे गलत कार्य पर्दे के आढ़ में ही होते हैं क्योंकि खुले में नहीं हो सकते..अब इनके डरने की सीमादेखिए कि काबा के ३५ मील के घेरे में गैर-मुसलमान को प्रवेश नहीं करने दिया जाता है,हरेक हजयात्री को ये सौगन्ध दिलवाई जाती है कि वो हज यात्रा में देखी गई बातों का किसी से उल्लेख नहींकरेगा.वैसे तो सारे यात्रियों को चारदीवारी के बाहर से ही शिवलिंग को छूना तथा चूमना पड़ता है परअगर किसी कारणवश कुछ गिने-चुने मुसलमानों को अंदर जाने की अनुमति मिल भी जाती है तोउसे सौगन्ध दिलवाई जाती है कि अंदर वो जो कुछ भी देखेंगे उसकी जानकारी अन्य को नहीं देंगे..
        कुछ लोग जो जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से किसी प्रकार अंदर चले गए हैं,उनके अनुसारकाबा के प्रवेश-द्वार पर काँच का एक भव्य द्वीपसमूह लगा है जिसके उपर भगवत गीता केश्लोक अंकित हैं.अंदर दीवार पर एक बहुत बड़ा यशोदा तथा बाल-कृष्ण का चित्र बना हुआ है जिसेवे ईसा और उसकी माता समझते हैं.अंदर गाय के घी का एक पवित्र दीप सदा जलता रहता है.येदोनों मुसलमान धर्म के विपरीत कार्य(चित्र और गाय के घी का दिया) यहाँ होते हैं..एक अष्टधातु सेबना दिया का चित्र में यहाँ लगा रहा हूँ जो ब्रिटिश संग्रहालय में अब तक रखी हुई है..ये दीप अरबसे प्राप्त हुआ है जो इस्लाम-पूर्व है.इसी तरह का दीप काबा के अंदर भी अखण्ड दीप्तमान रहता है …..

      7. ये सारे प्रमाण ये बताने के लिए हैं कि क्यों मुस्लिम इतनाडरे रहते हैं इस मंदिर को लेकर..इस मस्जिद के रहस्य कोजानने के लिए कुछ हिंदुओं ने प्रयास किया तो वे क्रूरमुसलमानों के हाथों मार डाले गए और जो कुछ बच करलौट आए वे भी पर्दे के कारण ज्यादा जानकारी प्राप्त नहींकर पाए.अंदर के अगर शिलालेख पढ़ने में सफलता मिलजाती तो ज्यादा स्पष्ट हो जाता.इसकी दीवारें हमेशा ढकीरहने के कारण पता नहीं चल पाता है कि ये किस पत्थर काबना हुआ है पर प्रांगण में जो कुछ इस्लाम-पूर्व अवशेष रहेहैं वो बादामी या केसरिया रंग के हैं..संभव है काबा भीकेसरिया रंग के पत्थर से बना हो..एक बात और ध्यान देनेवाली है कि पत्थर से मंदिर बनते हैं मस्जिद नहीं..भारत मेंपत्थर के बने हुए प्राचीन-कालीन हजारों मंदिर मिलजाएँगे…
        ये तो सिर्फ मस्जिद की बात है पर मुहम्मद साहब खुद एकजन्मजात हिंदु थे ये किसी भी तरह मेरे पल्ले नहीं पड़ रहा है कि अगर वो पैगम्बर अर्थात अल्लाह केभेजे हुए दूत थे तो किसी मुसलमान परिवार में जन्म लेते एक काफिर हिंदु परिवार में क्यों जन्मेवो..?जो अल्लाह मूर्त्ति-पूजक हिंदुओं को अपना दुश्मन समझकर खुले आम कत्ल करने की धमकीदेता है वो अपने सबसे प्यारे पुत्र को किसी मुसलमान घर में जन्म देने के बजाय एक बड़े शिवभक्तके परिवार में कैसे भेज दिए..? इस काबा मंदिर के पुजारी के घर में ही मुहम्मद का जन्म हुआथा..इसी थोड़े से जन्मजात अधिकार और शक्ति का प्रयोग कर इन्होंने इतना बड़ा काम करदिया.मुहम्मद के माता-पिता तो इसे जन्म देते ही चल बसे थे(इतना बड़ा पाप कर लेने के बाद वोजीवित भी कैसे रहते)..मुहम्मद के चाचा ने उसे पाल-पोषकर बड़ा किया परंतु उस चाचा को मारदिया इन्होंने अपना धर्म-परिवर्त्तन ना करने के कारण..अगर इनके माता-पिता जिंदा होते तो उनकाभी यही हश्र हुआ होता..मुहम्मद के चाचा का नाम उमर-बिन-ए-ह्ज्जाम था.ये एक विद्वान कवि तो थेही साथ ही साथ बहुत बड़े शिवभक्त भी थे.इनकी कविता सैर-उल-ओकुल ग्रंथ में है.इस ग्रंथ मेंइस्लाम पूर्व कवियों की महत्त्वपूर्ण तथा पुरस्कृत रचनाएँ संकलित हैं.ये कविता दिल्ली में दिल्ली मार्गपर बने विशाल लक्ष्मी-नारायण मंदिर की पिछली उद्यानवाटिका में यज्यशाला की दीवारों परउत्त्कीर्ण हैं.ये कविता मूलतः अरबी में है.इस कविता से कवि का भारत के प्रति श्रद्धा तथा शिव केप्रति भक्ति का पता चलता है.इस कविता में वे कहते हैं कोई व्यक्ति कितना भी पापी हो अगर वोअपना प्रायश्चित कर ले और शिवभक्ति में तल्लीन हो जाय तो उसका उद्धार हो जाएगा औरभगवान शिव से वो अपने सारे जीवन के बदले सिर्फ एक दिन भारत में निवास करने का अवसर माँगरहे हैं जिससे उन्हें मुक्ति प्राप्त हो सके क्योंकि भारत ही एकमात्र जगह है जहाँ की यात्रा करने सेपुण्य की प्राप्ति होती है तथा संतों से मिलने का अवसर प्राप्त होता है..

      8. देखिए प्राचीन काल में कितनी श्रद्धा थी विदेशियों के मन में भारत के प्रति और आज भारत केमुसलमान भारत से नफरत करते हैं.उन्हें तो ये बात सुनकर भी चिढ़ हो जाएगी कि आदम स्वर्ग सेभारत में ही उतरा था और यहीं पर उसे परमात्मा का दिव्य संदेश मिला था तथा आदम का ज्येष्ठ पुत्र “शिथ” भी भारत में अयोध्या में दफनाया हुआ है.ये सब बातें मुसलमानों के द्वारा ही कही गई है,मैंनहीं कह रहा हूँ..
        और ये “लबी बिन-ए-अख्तब-बिन-ए-तुर्फा” इस तरह का लम्बा-लम्बा नाम भी वैदिक संस्कृति ही हैजो दक्षिणी भारत में अभी भी प्रचलित है जिसमें अपने पिता और पितामह का नाम जोड़ा जाता है..
        कुछ और प्राचीन-कालीन वैदिक अवशेष देखिए… ये हंसवाहिनी सरस्वती माँ की मूर्त्ति है जो अभीलंदन संग्रहालय में है.यह सऊदी अर्बस्थान से ही प्राप्त हुआ था…..

          1. moin ansari bhai jaan
            bhai jaan quran khud bolta hai jahil bano.. aur dusaro ko bol rahe ho ki jahil hai ??? yah batlana ki kaha bola gaya hai gussa karo gaali galauz karo quran me ?? kis sura aur aayat me??? hame jaankaari dena ji… dusari baat yah ki….aap bol rahe ho ki islaam ke baare me koi jaankaari nahi…aap jaankaar hai hame jaankaari dein jisse ki ham gyaan ki prapt kar sake… aapke jawab ki pratiksha me…. dhanywaad…

      9. प्रमाण तो और भी हैं बस लेख को बड़ा होने से बचानेके लिए और सब का उल्लेख नहीं कर रहा हूँ..पर क्याइतने सारे प्रमाण पर्याप्त नहीं हैं यह सिद्ध करने केलिए कि अभी जो भी मुसलमान हैं वो सब हिंदु ही थे जोजबरन या स्वार्थवश मुसलमान बन गए..कुरान में इसबात का वर्णन होना कि “मूर्त्तिपूजक काफिर हैं उनकाकत्ल करो” ये ही सिद्ध करता है कि हिंदु धर्म मुसलमानसे पहले अस्तित्व में थे..हिंदु धर्म में आध्यात्मिक उन्नतिके लिए पूजा का कोई महत्त्व नहीं है,ईश्वर के सामनेझुकना तो बहुत छोटी सी बात है..प्रभु-भक्ति कीशुरुआत भर है ये..पर मुसलमान धर्म में अल्लाह केसामने झुक जाना ही ईश्वर की अराधना का अंत है..यहीसबसे बड़ी बात है.इसलिए ये लोग अल्लाह के अलावेकिसी और के आगे झुकते ही नहीं,अगर झुक गए तोनरक जाना पड़ेगा..क्या इतनी निम्न स्तर की बातेंईश्वरीय वाणी हो सकती है..!.? इनके मुहम्मद साहब मूर्ख थे जिन्हें लिखना-पढ़ना भी नहीं आताथा..अगर अल्लाह ने इन्हें धर्म की स्थापना के लिए भेजा था तो इसे इतनी कम शक्ति के साथ क्योंभेजा जिसे लिखना-पढ़ना भी नहीं आता था..या अगर भेज भी दिए थे तो समय आने पर रातों-रातज्यानी बना देते जैसे हमारे काली दास जी रातों-रात विद्वान बन गए थे(यहाँ तो सिद्ध हो गया किहमारी काली माँ इनके अल्लाह से ज्यादा शक्तिशाली हैं)..एक बात और कि अल्लाह और इनकेबीच भी जिब्राइल नाम का फरिश्ता सम्पर्क-सूत्र के रुप में था.इतने शर्मीले हैं इनके अल्लाह या फिरइनकी तरह ही डरे हुए.!.? वो कोई ईश्वर थे या भूत-पिशाच.?? सबसे महत्त्वपूर्ण बात ये कि अगरअल्लाह को मानव के हित के लिए कोई पैगाम देना ही था तो सीधे एक ग्रंथ ही भिजवा देते जिब्राइलके हाथों जैसे हमें हमारे वेद प्राप्त हुए थे..!ये रुक-रुक कर सोच-सोच कर एक-एक आयत भेजनेका क्या अर्थ है..!.? अल्लाह को पता है कि उनके इस मंदबुद्धि के कारण कितना घोटाला हो गया..! आने वाले कट्टर मुस्लिम शासक अपने स्वार्थ के लिए एक-से-एक कट्टर बात डालते चले गए कुरानमें..एक समानता देखिए हमारे चार वेद की तरह ही इनके भी कुरान में चार धर्म-ग्रंथों का वर्णन हैजो अल्लाह ने इनके रसूलों को दिए हैं..कभी ये कहते हैं कि धर्म अपरिवर्तनीय है वो बदल ही नहींसकता तो फिर ये समय-समय पर धर्मग्रंथ भेजने का क्या मतलब है??अगर उन सब में एक जैसीही बातें लिखी हैं तो वे धर्मग्रंथ हो ही नहीं सकते…जरा विचार करिए कि पहले मनुष्यों की आयुहजारों साल हुआ करती थी वो वर्त्तमान मनुष्य से हर चीज में बढ़कर थे,युग बदलता गया और लोगोंके विचार,परिस्थिति,शक्ति-सामर्थ्य सब कुछ बदलता गया तो ऐसे में भक्ति का तरीका भी बदलनास्वभाविक ही है..राम के युग में लोग राम को जपना शुरु कर दिए,द्वापर युग में
        कृष्ण जी के आने के बाद कृष्ण-भक्ति भी शुरु हो गई.अब कलयुग में चूँकि लोगों की आयु तथाशक्ति कम है तो ईश्वर भी जो पहले हजारों वर्ष की तपस्या से खुश होते थे अब कुछ वर्षों की तपस्यामें ही दर्शन देने लगे..
        धर्म में बदलाव संभव है अगर कोई ये कहे कि ये संभव नहीं है तो वो धर्म हो ही नहीं सकता..
        यहाँ मैं यही कहूँगा कि अगर हिंदु धर्म सजीव है जो हर परिस्थिति में सामंजस्य स्थापित कर सकताहै(पलंग पर पाँव फैलाकर लेट भी सकता है और जमीन पर पाल्थी मारकर बैठ भी सकता है) तोमुस्लिम धर्म उस अकड़े हुए मुर्दे की तरह जिसका शरीर हिल-डुल भी नहीं सकता…हिंदु धर्मसंस्कृति में छोटी से छोटी पूजा में भी विश्व-शांति की कमना की जाती है तो दूसरी तरफ मुसलमान येकामना करते हैं कि पूरी दुनिया में मार-काट मचाकर अशांति फैलानी है और पूरी दुनिया कोमुसलमान बनाना है…
        हिंदु अगर विष में भी अमृत निकालकर उसका उपयोग कर लेते हैं तो मुसलमान अमृत को भी विषबना देते हैं..

      10. मैं लेख का अंत कर रहा हूँ और इन सब बातों को पढ़ने के बाद बताइए कि क्या कुरान ईश्वरीयवाणी हो सकती है और क्या इस्लाम धर्म आदि धर्म हो सकता है…?? ये अफसोस की बात है किकट्टर मुसलमान भी इस बात को जानते तथा मानते हैं कि मुहम्मद के चाचा हिंदु थे फिर भी वो बाँकीबातों से इन्कार करते हैं..
        इस लेख में मैंने अपना सारा ध्यान अरब पर ही केंद्रित रखा इसलिए सिर्फ अरब में वैदिक संस्कृतिके प्रमाण दिए यथार्थतः वैदिक संस्कृति पूरे विश्व में ही फैली हुई थी..इसके प्रमाण के लिए इटली से जो राम-सीता और लक्षमण के चित्र मिले हैं, इसमें इन्हें वन जाते हुए दिखाया जारहा है.सीता माँ के हाथ में शायद तुलसी का पौधा है क्योंकि हिंदु इस पौधे को अपने घर में लगाना बहुत ही शुभ मानते हैं.
        एक कृष्ण के चित्र ग्रीस देश के कारिंथ नगर के संग्रहालय में प्रदर्शित है.कारिंथ नगर एथेंस से ६० कि.मी. दूर है.प्राचीनकाल से ही कारिंथ कृष्ण-भक्ति का केंद्र रहा है.यह भव्य भित्ति चित्र उसी नगर के एक मंदिर से प्राप्त हुआ है .इस नगर का नाम कारिंथ भी कृष्ण का अपभ्रंश शब्द ही लग रहा है..अफसोस की बात ये कि इस चित्र को एक देहाती दृश्यका नाम दिया है यूरोपिय इतिहासकारोंने, ऐसे अनेक प्रमाण अभी भी बिखरे पड़ेहैं संसार में जो यूरोपीय इतिहासकारों कीमूर्खता,द्वेशभावपूर्ण नीति और हमारेहुक्मरानों की लापरवाही के कारण नष्ट होरहे हैं.जरुरत है हमें जगने की और पूरे विश्वमें वैदिक संस्कृति को पुनर्स्थापित करने की OM..

    1. Ooe. Jati bale pehle apne uper dekh tum kisko bhagban kehte ho Raam ko. Aapne raam ko baghbaan kahan se man liya jabki ayodhya balo ne nhi bo slok yaad hai jab raam dhanush todne ke liye taiyar hue to. Bahan ki aurate keh rhi thi he bhagwan ye dhanush inhi ke hath se toot jaye. To us samay konse bhagwan the jabki aur aapne raam ko bhagwan kaise maan liya jabki raam to ek raja ka putr tha aur raam ne seeta ki agni pariksha kyon li agar bo baghwan the to pariksha ki kya jarorat aur baghwan the to unhe rawan ko marne ke liye sena ki kya jaroorat

      Main-aapki geeta ka slok akam bhramma aasti tasya koi pratima na asti

      Bhagwan ki moorti kahan se aagai

      1. “Main-aapki geeta ka slok akam bhramma aasti tasya koi pratima na asti ”

        जनाब आपकी जानकारी के लिए बता दू ” न तस्य प्रतिमा अस्ति यस्य नाम मह्द्यश :” ये गीता का नहीं बल्कि वेद का श्लोक है

        और हम इसे ही मानते हैं
        श्री राम ईश्वर नहीं थे यह भी सत्य है

        लेकिन ” न तस्य प्रतिमा अस्ति यस्य नाम मह्द्यश :” कि बात करने वाले जनाब आप तौहीद पर कब आ रहे हो
        कब काबे को चूमना बंद करोगे

    1. When these muslim brothers don’t have any answers….they start saying you don’t have full knowledge…you have not read koran properly…this is their simple argument….

      1. Hahahahhah right right are jiska swarg bakare ke pair ke khoor me hai wo swarg wahin na khojega aur inke aalllaah surya ko rat ne daldal me dal dete hain tab rat hota hai ..what a rubish shit….no certified answers muslims have…

    2. Gyzz soroo vi…Aise vi 2050 tak sara world 98% Islam ho jayega… Because insan ka knowledge bartee ja raha he,so Insan Islam ke bare me jada jann raha he….Gyzz 1k barr Quran parhke dekho.!
      Uska badd Islam ke bare me bolna.
      “Agar aup ke Knowledge nehi,aup parhai nhi kia hoga to aisa batt karte he.”
      Aise vi.muje ye sab bolke kia faida….kavi Dubai,Saudi Jake dkhnaa…

      I proud to be Islam……
      I respect my Religion..

      1. achc aisa hai to kay Muhammad ne ye jhuth bola tha

        “T]he Messenger of Allah (Mohammed) observed: Verily Islam started as something strange and it would again revert (to its old position) of being strange just as it started, and it would recede between the two mosques just as the serpent crawls back into its hole.” [Sahih Muslim, Book 001, Number 0270.]”

  2. It was narrated that Abu Hurairah said: “The Messenger of Allah said: ‘Allah wills good for a person, He causes him to understand the religion.’”
    (Sunan Ibn e Majah, Book of Sunnah, Hadith no 220, Classified as Sahih By Allama Albani)
    Seeking Knowledge: A Duty
    It was narrated that Anas bin Mâlik said: The Messenger of Allah said “Seeking knowledge is a duty upon every Muslim”. ”
    (Sunan Ibn e Majah, Book of Sunnah, Hadith no 224, Classified as Sahih By Allama Albani)
    Pursuit of Knowledge: Path to Heaven
    It was narrated that Abu Hurairah said: “The Messenger of Allah said: “…Whoever follows a path in pursuit of knowledge, Allah will make easy for him a path to Paradise. No people gather in one of houses of Allah, reciting the Book of Allah and teaching it to one another, but the angels will surround them, tranquility will descend upon them, mercy will envelop them and Allah will mention them to those who are with Him. And whoever is hindered because of his bad deeds, his lineage will be of no avail to him.”
    (Sunan Ibn e Majah, Book of Sunnah, Hadith no 225, Classified as Sahih By Allama Albani)
    Knowledge Seeker: Welcomed by Angels
    It was narrated that Zirr bin Hubaish said: “I went to Safwân bin ‘Assâl Al-Murâdi and he said: What brought you here?’ I said: ‘I am seeking knowledge.’ He said: I heard the Messenger of Allah say: “There is no one who goes out of his house in order to seek knowledge, but the angels lower their wings in approval of his action.”
    (Sunan Ibn e Majah, Book of Sunnah, Hadith no 226, Classified as Sahih By Allama Albani)

  3. नाच ना जाने आँगन टेढ़ा।….तुम को कुछ नहीं पता है,,,कभी मै भी तुम्हारी तरह सोचा करता था।…लेकिन अगर तुमने जानने की कोशिश की होती तो तुम आज ऐसा नहीं कहते….तुम्हे शायद मालुम नहीं…जब कोई कौम खुदा की ना फरमानी करती है तो मिटा दी जाती है।..क्या तुमने फ़िरौन का हश्र नहीं देखा जिसके बारे में अल्लाह ने फरमाया की मै इसकी मौत को मिसाल बना दूंगा ताकि आने वाली पीढियां देखें जो आज भी है। और अगर तुम्हारा रब तुम पर अज़ाब डाले तो कौन रोक पायेगा।

    1. Gufraan Ali saahab aap kee kaun to aisa naheen sochatee fir bhee kyun mitalee ja rahee hai .Siriya, Iraq, Afaganistaan men halaat kya bayan kar rahe hein jara isake baare men to sochiya.

      jab aap Allah miyan ke bataye marg par chal rahe hein fir aisa yun ho raha hai ?

      1. Arya ji yehi to problem hai k aaj ka musalman gafil ho gya hai jo sirf naam ka hi reh gya hai jaise ye aatankwadi hote hai jo jehad k naam par dunia me begunah logo ko mar rahe hai jab k ye islam ka part hi nahi hai aur jo sahi musalman hai unko jawab dene me problem hoti hai tab kyunki log fir nahi samjhte jaise aap abhi bol rahe ho.allah aur uske rasool k batae tarike par chalne wale musalman hai aaj b isi lie dunia tiki hui hai.lekin islam ko failane k lie jo takleefe pehle nabi o ne jheli uski 5 percent b mehnat agar sahi tarike se yani allah aur uske rasool k batae raste par aaj ka musalman chale to aapko aese sawal jawab karne ki jaroorat hi na pade.

        1. शकील साहब ऐसा कैसे हो गया
          अल्लाह ने तो जो ईमान लेके आया उसकी हिफाजत की बात कही फिर भी अल्लाह की कौम ऐसी कैसे हो सकती है
          खैर आपके हिसाब से तो अल्लाह कुछ भी कर सकता है जिसको चाहे गुमराह करे जिसको चाहे रस्ते पर लेके आये
          हो सकता है अपनी कौम को भी बहका कर दोजख में ले जाने का ख्याल बना लिया होगा

          रहा आपका जिहाद की बात तो ये तो इस्लाम के एक मुख्या भाग है
          इस्लाम के पांच सिद्धांत जिनमें जिहाद नहीं है फिर भी जन्नत की गारंटी जिहाद के द्वारा ही मिलाती है
          और आपके रसूल भे इसी रस्ते पर थे मुसलामानों की मान साफिया के साथ जो किया गया और उसकी उम्मत क साथ जो किया गया वो क्या था
          और किस तरह रसूल का वह कार्य आप सही साबित करोगे
          जिहाद इस्लाम का मूल सिद्धांत है
          डिटेल के लिए नीचे दी हुयी लिंक पर जाएँ
          http://aryamantavya.in/islam-shanti-ka-mazhab/

          1. Rishwa arya ji ab tak jo b maene aap k jo statement padhe isse mujhe samjh me aa gaya hai k aap kahi aur galat jagah se information le rahe hai yato aapko wo info samjh me nahi aa rai.allah ne musalman banaya to koi jaroori nahi har muslaman ka iman utna pakka ho jitna k maene aap ko pwhle b ek quote me bataya tha.musalman ka matlab jiska iman mukammal ho us khuda pe aur uske rasool pe musalmano me b bht musalman hai kisi ka belief kuch aur kisi ka kuch aur.lekin wo hi musalman hai iman wala jo allah ek hai aur hajart mohammad unke pyre rasool hai aur aakhirat par iman rakhta ho k dunia k baad ek jindagi hai wo aakhiat ki jaha hamesa hamesa rehna hai to apni aakhirat sudharni hai to dunia me allah aur uske rasool k batae hue raste par chalna hai.aur uske lie allah ne ilm sikhne k lie kha hai kyunki bima ilm k iman mukkamal ho hi nahi sakta aur allah chah le to kisi ko b iman ki daulat ata kar sakta hai.allah ne iman ki hifajat karne ka jimma nahi lia hai.iman mukkamal karme k lie aap ko ilm hasil karna padega us jaat ne koran ki hifajat kayamat tak apne pass rakhi hai k usme jo likha hai wo sanatan satya hai aur hamesa uski hisab se chalna hai.
            Aur jihad ka matlab hota hai k bhatke huo ko sahi raah dikhana ladai mar kat kar k jabardsti islam kabool karqana nahi.koi jabardasti islam kabool kar b le to kya matlab jab tak usko samjh me nahi aae.aap aaka s.a.w akele 1. 1 aadmiyo k pass jate the aur unko samjhate the k aap jo ye kar rahe ho ye galat hai ye boot puja galat hai ye murtiyo ko tm sajda karte ho ye to aap ko jawab tak mahi deti sajda sirf allah ko hai jo ek hai jisne ham sabko banaya hai ye murtiya to hamne banai hai.jo unki baate samjhta to uslam kabool karta jo nahi karta to unko katal karne ki sajish karte aap s.a.w ne kbi kisi ko talwar k bal pe islam nahi kabool karwaya islie jab unse log ladne aate tab wo sabra se kaam lete nahi to fir allah k huqm k mutabik wo jehad karte the unhone bht ladaiya ladi islam kblie aur bht karamate b hui aur aeae islam faila .maen aapko fir bol rha hu aap kuch books le aur unka study kare

            1. “allah ne musalman banaya to koi jaroori nahi har muslaman ka iman utna pakka ho j”

              chalo allah ki is baar bhee ye chuk ho gayee ki Yah kahkar ki shaitaan mujh par imaan laaye huyoen ko naheen bhatkaa payega fir apanee baat se aapke hisaab se palat gaya ki har musalmaan ka imaan pakka nahen hota … chalo achcha hua aapne sweekar kar liye ki Allah ki aayton men is bar bhee chuk ho gayee hai

              “jihad ka matlab hota hai k bhatke huo ko sahi raah dikhana ladai mar kat kar k jabardsti islam kabool karqana nahi”

              ye to aapka kathan hai na to quran isaka samarthan karta hai na hee islam ya rasul ki history ye tark ko saabit karteee hai

              saafiya ke kabeele ko aapke rasul ne 1 saal men islam kabul karne ka samay diya tha
              usase pahle hee unhone us par achanak bina bataye subah ke samay hamlaa kar diya

              wo kya tha ?
              ye kaisa samjhana tha?

              yahee to jihad hai

              1. Rishav arya Bhai agar apko Islam ke bare me Janna he to Quran majeed ka tarjuma Pado Jo language apko ati ho aur mere bhai mazhab PR comment bazi bazi band karo aise comment karo jisse dono dharm walon me mohabbat paida ho .

                1. में पढने के बाद ही कमेंट किया है

                  जहाँ तक है कुछ गलत बिना प्रमाण के नहीं लिखा है
                  फिर भी यदी कहीं गलती है तो आप बता दें गलती स्वीकार करने में कोई दिक्कत नहीं
                  प्रमाण सहित बताएं

    2. Why Allah did not allow Muhammad to pray for his mother?
      The simple answer is; Muhammad could not forgive his mother even after more than half a
      century of her death. God cannot be unjust and God’s unwillingness in this case is just absurd.
      Allah is the ‘puppet’ of Muhammad. Hence Allah says whatever Muhammad wants Him to say.
      Underneath this dramatic Divine rejection there remains the fact that it is impossible for a
      Narcissist to forgive someone particularly his mother. They have overly complicated relationship
      with their parents, mainly with their mothers. For a Narcissist, his parents never die. They live on
      to torment him, to persecute and prosecute him, to put him on constant trial (Vaknin, 1999, p.
      172). Their criticism, mental torture, apathy, other forms of abuse and berating him – all these
      things live long after their physical death. Even after several decades of his mother’s death;
      Muhammad was still tormented because his relationship with his mother was too complicated
      and too bitter.
      So it was not Allah who prevented Muhammad to pray for his mother, but it was Muhammad’s
      own preference, which he skillfully put on Allah. If Allah is really so angry with Muhammad’s
      mother, why He allowed Muhammad to visit her grave? How disgusting it is to think that the
      God is still angry with a woman who is dead for over half a century.
      Muhammad did not really cry for his mother. It was a pretention. The display of outburst of fake
      emotions had specific purpose to obtain certain result. By shedding few drops of crocodile tears
      Muhammad sent a deceitful emotional message to mislead the people around him. Narcissist’s
      parents are narcissistic supply sources. By ignoring his mother in front of others, though long
      after her death, Muhammad’s false self just ‘reinvested’ itself through the look of others. Once
      Muhammad devalued his mother, his own value is increased. But at the same time, Muhammad proved that he was not cruel. By mimicking real emotions artfully, Muhammad made other
      people to believe that he is more human than common. It was his ‘mask of sanity’.

    3. tumhe Sanatan (hindu) Dharm ki jankari nahi hai. isliye arop mat lagao. Sanatan Dharma ke kewal Ved (Rigved, Yajurved, Samved & Atarved) tatha Gita hi Granth hain. Smritiyan aur Puran Sanatan dharm se sambandhit na hokar lekhakon ki samanya rachnayen hain. Inhin mein ku Scince virodhi tatha jati aadi ka ullekh hai. kintu aap unhen Sanatan dharm se na joden.

  4. agr tumhai kuch pata hota to tum is tarah ki post krte hi nhi lekin tumne kabhi islam ki knowledge lena hi nhi chaha or tum baat kr rhai ho us kitab ki
    jisko tum saty book maan rhai ho jise tum पवित्र वैज्ञानिकग्रन्थ maan rhai ho usme kesi vigyan virudh baat hai shayad tumhai pata nhi

    chalo me hi bata deta hu
    to suna usme likha hai ki
    sury yani sun pr insani basti hai or wo bhi ved padte hai ab thumb i batao yaar aisa kese mumkin hai kisi aag ke dahkte hiye gole pr insan kese rah sakta hai or insan hi nhi puri basti rahati hai aisa likha hai

    पवित्र वैज्ञानिकग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश me

    or
    mulahaija farmaye

    or likha bai ki insan ke baal bade hone se uski budhi kam joti hai ab batao ye kesi baat hai lagta hai fir to aaj kal log bade baal rakhte hai usnme to dimag hi nhi hota
    or to fir orte to is lihaz se dimag se hi mahrum rah jayegi

    or suno orate or mard agr kam kam ya barabari ki umr me shadi krti hai to unke desh ki tarraki me rukawat ati hai unki shadi kj umr hoti hai पवित्र वैज्ञानिकग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश ke hisab se 24 orat ki 48 ma d ki ab bataye ye kesi be tuki baat hai mujhe o lagta hai jis wakt ye baat पवित्र वैज्ञानिकग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश me likhi gyi thi tab daya babu ki age 48 hogi to unki ye icbcha hogi ke 24 48 se hadi kre

    lagta hai yefi hoga apki knowledge ke liye baki ke liye
    पवित्र वैज्ञानिकग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश pada

    1. Is antariksh men kahan kahan jeevan hai aur kahan naheen hai iska vishleshan to abhee vaigyanik kar hee rahe hein aur vibhinna vichardharayen janm le rahee hein. to anya grahon par jeevan hai ya naheen ye to aapko tabhee samajh aayega tab vaigyanik satyataa kee jaanch puree kar lenge.

      Leking janab Sharaukh saahab jara ye bataiyen aapkee hadeth Mishakaat men aata hai ki ”

      “Anas repored that Ms of Allah said “ when Allah created the earth it began to toss so he created the mountains and ordered them to be (firm) upon it and they became firm. The angles marveled upon the surface of mountain”

      kya aap isakee satyatha men believe karte hein ki allah miyan ne dharatee banaeyee aur wah uchchalane lagee ?
      aur usake uchchalne ko rokane ke liye allah miyan ne dharatee par pahadon ki rachana kee ?

      1. sarvpratham to is kathan ki satyata siddh kariya?
      2. aur yadee aap pahle kathan ko satya manate hein to isamen Allah miyana ki rachana men hee dosh pragat hota hai kyunki unhen is baat ka aabhas hee anheen tha ki ye boll ki tarah uchchalane lagegee. aur jab wah uchcalane lagee to unhein apanee is dosh purn rachana ko theek karne ke liye us par pahadon ke paiband lagane pade?

      1. theek kaha bhai mangal.. chaand. aadi pr paani mil gya h … Aur b kuchh mulega.. hr Grahan pr jeev baste h be hmari shakl k ho b sakte h ya ni….

    2. The Embarrassment of Satanic Verses
      Traditional Islamic sources admit that Muhammad was at one time inspired by Satan to put some
      verses into the Qur’an.
      When Muhammad first began preaching in Mecca he thought that the Meccans would accept his
      religion. But the Meccans were not receptive to him. This made Muhammad angry and he started
      taunting them for years by insulting their religion and Gods. Meccans refused all dealings with
      him and his followers. Eventually to appease the Meccans, Muhammad recited the following
      Qura’nic verses,
      “Have you then considered the al-Lat and al-Uzza and Manat, the third, the last … these are the
      exalted Gharaniq (a high flying bird) whose intercession is approved” (Q: 53.19-20)
      Al-Lat, al-Uzza and Manat were some of the local idols worshiped in Mecca. Previously
      Muhammad had spoken against them in his monotheist preaching but now he recited that their
      “intercession is approved”. This made the Meccans very pleased and the boycott was lifted
      shortly.
      Soon Muhammad realized that by acknowledging the local idols al-Lat, al-Uzza and Manat he
      had made a terrible blunder. He had undermined his own position that as the sole intermediary
      between Allah and the people and by doing so he made his new religion indistinguishable from
      pagan beliefs and hence redundant. So he retracted and said the two verses acknowledging pagan
      idols were satanic verses i.e., the verses inspired by Lucifer, the Biblical Satan. This is
      Muhammad’s most embarrassing moment.
      Islam crumbled in the wake of the Prophet’s satanic indulgence. Muhammad desperately tried to
      make amends for the satanic verses and recited the following verse.
      “Surely Allah does not forgive setting up partners with Him; and whoever associates anything
      with Allah, he indeed strays off into remote error. They call but upon female deities. They call
      but upon Satan, the persistent rebel!” (Q: 4.116)
      Subsequently, the relevant verses were also modified with the final form what is now in the
      modern Qur’an,
      “Have ye thought upon Al-Lat and Al-‘Uzza. And Manat, the third, the other? Are yours the
      males and His the females? That indeed were an unfair division!” (Q: 53:19-22).
      making up the Qur’an (Sina, 2008, p. 16). Muhammad had to run away from Mecca in shame.
      The shame of defeat was so much that Muhammad and Abu Bakr had to flee through
      window. On their way out of town, both had to hide in a cave for fear the Meccans would find
      them (Winn, 2004. p. 587).
      “When the Messenger decided upon departure, he went to Bakr and the two of them left by a
      window in the back of Abu’s house and went to a cave in Thawr, a mountain below Mecca”.
      (Ishaq: 223)
      “The Messenger came back to Mecca and found that its people were more determined to oppose
      him and to abandon his religion, except for a few weak people who believed in him”. (Tabari:
      VI. 118)
      However, after this blunder Muhammad was more careful not to make the mistake again. He just
      hammered a nail into his own Prophetic coffin.
      Muslims are very uncomfortable with the satanic verses episode and this had been the subject of
      endless and bitter controversy (Walker, 2002, p. 111). But if we have to believe the authentic
      Muslim sources there is no reason to reject this occurrence. This incident was recorded by devout
      Muslims like Al-Wikidi, Al-Zamakshari, Al-Baydawi, Al-Tabari, Ibn Ishaq, Ibn Hisham, Ibn
      Sa’d and Bukhari. It is unthinkable that such a story would have been fabricated by all of them.
      While this event is well documented in Islamic sources, current day Islamic leaders rarely tell
      Muslims or the general public about it.
      We can make three logical conclusions from this satanic verses incident.
      Firstly, a Qur’anic verse can be modified or deleted at a later date.
      Secondly, it casts a shadow over the veracity on Muhammad’s entire claim to be a Prophet.
      Finally, Satan proves that Qur’an is not a miracle. Qur’an challenges “bring a Sura like it”. (Q:
      2.23) and Satan took the challenge and did it.
      Did Muhammad carefully planned a ploy to win the hearts of the Meccans, or was it his
      subconscious that had suggested to him a sure formula which provided a practical road to
      unanimity? I shall look for an answer in subsequent chapters.

    3. Muhammad’s Miracles
      According to Islamic traditional sources Muhammad had performed many miracles. He could
      multiply bread (Bukhari: 5.59.428), produce water for an army for ablution from a small pot
      (Bukhari: 1.4.170, 1.4.194, 1.7.340, 4.56.779, Muslim: 30.5656-9), multiplied dates (Bukhari:
      4.56.780), split the moon in two parts (Bukhari: 4.56.831, 4.56.832, 5.58.208, 5.58.209,
      6.60.388-91). Once he invoked Allah to bless the inhabitants of Medina with rain, and following
      this there was rain for seven days until the valleys flooded (Bukhari. 8.73.115). He visited the
      towns of Jinns and some Jinns converted to Islam (Muslim: 26. 5559). Once he stuck a huge
      solid rock and the rock became like sand (Bukhari: 5.59.427). Once he fought with a big demon
      and subdued him (Bukhari: 1.9.450). When companions of Muhammad departed from him on a
      dark night, they were led by two lights like lamps (Allah’s magic light) lighting the way in front
      of them till they reached their houses (Bukhari: 1.9.454, 4.56.833) and the list goes on.
      The moon-splitting miracle is amazing. When Muhammad called Meccans to accept him as a
      Prophet, the Meccans requested him to show them a miracle. Therefore he showed them the
      splitting of the moon. When the moon was split, a piece of the moon went towards the mountain.
      Afterwards this part remained over the mountain, and the other part went beyond the mountain.
      The two parts of the moon remained apart during the whole lifetime of the Prophet.
      The miracle of the cave is another wonder of Allah which is related to the concerning in hiding
      in the cave of Thawr. The miracle is that none of these things were there when the Prophet and
      his companion entered the cave, and that thereafter, the spider hurried to weave its cobwebs, the
      two pigeons to build their nest and to lay their eggs, and the tree to grow its branches around the
      door. Many biographers of Muhammad like Ibn Hisham and Haykal exclude the story. In the
      same connection, the following verses of the Qur’an were revealed.
      “If you [the people] do not help Muhammad, then know that God Will. For God helped him
      when the unbelievers drove him out, and he and his companion hid in the cave. At that time, the
      Prophet said to his companion, `Grieve not for God is with us.’ It was then that God sent down
      his peace upon him and assisted him with hosts invisible that the word of God might be supreme
      and that of the unbelievers might be repudiated. God is almighty and all wise.” (Q: 9.40)
      “When the unbelievers plotted to imprison you, to kill you or to banish you, God planned on
      your behalf, and He is the best of planners” (Q: 8.30).
      Muhammad was sleeping under a tree, someone took hold of his sword to attack him.
      Muhammad woke up and found him standing upon his head and he had hardly become alert (and
      saw) that the sword was in his hand. The man said, “Who can protect you from me?” Muhammad
      said, “Allah”. The attacker remained standstill and the sword refused to obey him.
      Muhammad’s alleged night journey to heaven (Mi’raj in Arabic) is equally fascinating like
      moon-split. One night while Muhammad was sleeping, the Gabriel woke him up. There was a
      white animal, half mule, half donkey, with wings on its sides with which it propelled its feet,
      putting down each forefoot at the limit of its sight. By seeing an opportunity Muhammad jumped
      on it. Gabriel, Muhammad and this funny looking Divine creature, called al-Buraq cruised to
      heaven by way of Jerusalem. At the Temple in Jerusalem, Muhammad found Abraham, Moses,
      and Jesus, along with a company of Prophets. Muhammad acted as their imam in prayer. Gabriel
      took Muhammad up to each of the heavens till the seventh heaven. Muhammad received royal
      treatment in each of the heavens because he was the messenger of Allah. The night journey is
      firmly embedded in the Islamic consciousness to such a degree that it serves as the foundation of
      Islamic claim to Jerusalem as one of the holy cities of Islam.
      In various Muslim traditional sources (cited Shaikh, 1999, p. 13, 14; Schimmel, 1985, p. 150-51;
      Andrae, 1955, p. 35, Dasti, 1985, p. 2; Mahmud, 1978, p. 39) there are many amazing claims
      about Muhammad, which are as follows,
      1. Muhammad claimed that he was created from a Divine light. Allah first created the light
      of Muhammad, out of which He then proceeded to create everything which constitutes
      this world.
      2. When Muhammad was born, the whole house was filled with light, the stars in the sky
      bowed to such an extent as if they are about to fall on the earth, the angels started singing,
      the idols everywhere fell on their faces, and fire-worshippers in Persia and India noticed
      that their temple-hearth which had been lit for a thousand years, turned ice-cold, a lake of
      Persia was flooded which caused the palace of Khosroes (the king of Persia) to crack.
      3. Muhammad was born circumcised and detached from the umbilical cord and there was
      no pollution on his body at the time of birth as is the case with every human baby.
      4. Muhammad was a Prophet when the body and soul of Adam were still in the making.
      The only purpose of the above stunning claims is to prove that Muhammad was a chosen Prophet
      of Allah before his birth and he was born guided. In fact his Prophethood was established even
      before Adam was created. God made an agreement with all the future Prophets and under this
      agreement all the future Prophets accepted and acknowledged Muhammad as the final Prophet
      and also told their follower to believe in him. It is said that when Amina (Muhammad’s mother)
      was pregnant with Muhammad, she heard a voice tell her, “You are pregnant with the lord of this
      people, and when he is born, say ‘I put him in the care of the One from the evil of every envier’,
      then call him Muhammad”. Sometimes Amina would see a light shining from her belly by which
      she could make out the castles of Syria (Aslan, 2006, 19).
      No doubt, the above miracle claims are great if looked through the spectacle of blind faith. Blind
      faith or blind belief is something felt by the mind, which distinguishes the judgment from the
      frictions of the imagination (Hume, 1992, p. 42).
      But let us see, how they look like through the spectacle of science, reason and logic.
      Refuting the Claims of Muhammad’s Miracles.
      All these miracles were attributed to Muhammad so as to make him look saintly. These are all
      fabrications by his sycophant followers. There are many miracles which were claimed by
      Muhammad himself, which no one but he could verify and many contemporary Muslims doubted
      them because some of these miracles are so ridiculous that they are hardly more than childish
      jokes and Muhammad proved himself to be a laughing stock.
      It is recorded in Qur’an that the pagan Meccans repeatedly asked Muhammad to perform a
      miracle so that they could believe him.
      “They say: ‘We will not believe in you until you make a spring gush from the earth for us, or,
      until you own a garden of palms and vines and cause rivers to gush forth with abundant water in
      them; or, until you cause the sky to fall upon us in pieces, as you have claimed, or, as a surety
      bring Allah with the angels in front; or, until you possess an ornate house of gold, or ascend into
      the heavens; and we will not believe in your ascension until you have brought down for us a
      book which we can read” (Q: 17.90-93).
      So Allah performed a miracle for him, which was witnessed by Meccans. After all Allah’s
      miracles are not jokes. With Allah’s Divine help Muhammad performed the following miracle.
      We don’t know how many Meccans were really impressed by this miracle.
      According to an old tradition (cited Walker, 2002, p. 220), when the Meccans demanded
      Muhammad to prove his Divine mission by making a mountain move, Muhammad replied that
      only Allah has the power to do that. However by repeated demands from Meccans, Muhammad
      Thought of giving it a try. Turning to the direction of Mount Safa, Muhammad commanded it to
      come to him but with much embarrassment to Muhammad, nothing happened. Then Muhammad
      exclaimed,
      “Allah is compassionate! Had it come it would have caused an earthquake or fallen upon us to
      our destruction. I will therefore go to the mountain instead, and thank God for his mercy!!!”
      Surprisingly, when Muslims read this story with the spectacle of faith, they see a miracle in it.
      Then again some Meccans asked Muhammad to send Gabriel or some other angel to them so that
      they can believe Muhammad: “O Muhammad, if an angel had been sent with thee to speak to
      men about thee and to be seen with thee.” By seeing Muhammad in trouble, Allah came for his rescue and replied in a revelation (Q: 6.9) that in order to send an angel, he would have had to
      make him appear as a man and that would have left the nonbelievers back where they have
      started (Spencer, 2006, p. 75). Allah also consoled Muhammad telling him that before him many
      other Prophets were mocked.
      “They say: “Why is not an angel sent down to him?” If we did send down an angel, the matter
      would be settled at once, and no respite would be granted them.” (Q: 6.8).
      “If We had made him an angel, We would have given him the resemblance of a man, and would
      have as such confused them with that in which they are already confused” (Q: 6.9).
      “Other Messengers have been mocked before you. But those who scoffed at them were
      encompassed by that they had mocked” (Q: 6.10).
      “Messengers before thee, indeed, were mocked, but that whereat they mocked surrounded those
      who scoffed at them (Q: 21.41).
      The Meccans again wanted to know why there was no miracle if Allah was so powerful.
      Muhammad was comparing himself to Moses and Jesus. Both of them were visited by angels and
      did miracles. Why Muhammad could not? The Meccans disputed his claims and mocked him
      mercilessly saying his religion was a forgery, a counterfeit as recorded in Qur’an,
      “Or do they say: ‘He has forged it? ‘ Say (to them): ‘Then produce ten forged chapters like it.
      Call, if you are able, upon other than Allah, if what you say is true” (Q: 11.13)
      Throughout the pages of the Qur’an at least twenty times, his clan accused him of being the only
      Prophet who couldn’t do a miracle. Muhammad’s inefficiency in producing even a single miracle
      is well recorded by his biographer, Muhammad Husayn Haykal. In this biography, ‘The Life of
      Muhammad’ published originally 1933; Haykal (1976, chapter 5) wrote that Abu Lahab and Abu
      Sufyan, two noblemen of Quraysh repeatedly asked Muhammad to perform some miracles. They
      asked,
      “Why don’t you change Mount Safa and Mount Marwah into gold? Why don’t you cause the book
      of which you speak so much to fall down from heaven already written? Why don’t you cause
      Gabriel to appear to all of us and speak to us as he spoke to you? Why don’t you resurrect the
      dead and remove these mountains which bound and enclose the city of Makkah? Why don’t you
      cause a water fountain to spring whose water is sweeter than that of Zamzam, knowing how
      badly your town needs the additional water supply?”
      They challenged him to do as much as Moses or Jesus had done. The unbelievers did not stop at
      these demands for miracles. In ridicule, the Meccans asked, “Why doesn’t your God inform you
      of the market prices of the future in order to help you and us in the trade of the morrow?” All
      these questions and demands were answered once and for all by revelation. God commanded
      Muhammad,
      “Say: `I have no power whatever to bring advantage or avoid disadvantage. What God wills, that
      will happen. If it were given me to tell the future I would have used such knowledge to my own advantage. But I am only a man sent to warn you, and a messenger to convey a Divine message
      that you may believe.” (Q: 7.188).
      The fact is that Muhammad never wanted to be a miracle worker simply because he could not
      perform miracle. But he claimed the title of Prophet and accepted the fact that, as Bukhari
      (6.61.504) recorded; every Prophet before him was given miracles because of which people
      believed them.
      The pagan Meccans could not be blamed for troubling Muhammad for demanding at least one
      miracle. From other parts of Arabia, there were many charlatans who claimed to be God’s
      messenger. They had at their disposal magic tricks which they presented as proof of their Divine
      mission. One of them was Musaylima who had a sizable following from his own tribe. He used
      to run up and down the country, showing a flask with a narrow neck, in which he had inserted an
      egg which he had learnt from a Persian juggler. This was his miracle. He also recited rhymed
      sentences that he passed of as verses of a second Qur’an (Warraq, 2000, pp. 145-6). This proves
      how much it was necessary for a man to make some tricks as miracle to promote himself to the
      rank of a Prophet.
      The claims in traditional Islamic sources that Muhammad was a chosen Prophet of Allah before
      his birth and hence he was born guided were fake publicities. The fact is that Muhammad had
      been fathered by an idolater and his mother was a pagan woman. Muhammad received his first
      revelation when he was meditating in a desert cave called Hira at the age of forty. Till that time
      he knew nothing about Qur’an. If he was born guided why he wasted forty years of life and thus
      knowingly neglected Allah’s command?
      In fact, Muhammad was not much religious before he claimed the title of a Prophet. Before he
      immigrated to Medina, he did not even know that Jews and Christians have serious theological
      differences (Armstrong, 2006, p. 15). He assumed that Jews and Christians belong to a single
      faith.
      Obviously, Muhammad had a religion till the age of forty and this could not be anything but the
      faith of his forefather. If he was born-guided, how Allah allowed it? After all Allah is supposed
      to be all-knowing.
      A Hadith from Sahih Muslim is as below,
      “Jabir b. Samura reported Allah’s Messenger as saying, ‘I recognize the stone in Mecca which
      used to pay me salutations before my advent as a Prophet and I recognize that even now’”
      (Muslim: 30. 5654).
      From the above Hadith, it is obvious that Muhammad used to visit the Ka’ba, before his
      Prophethood, when 360 statues were worshiped by different Arab tribes. So, if for worshiping
      the statues, the nonbelievers are roasting in hell, Muhammad is also roasting in hell with them.
      Similarly; the angels started singing and the idols everywhere fell on their faces, and fires of all
      fire-worshippers in Persia and India became cold, a lake flooded which caused a palace to crack
      at the berth of Muhammad are very childlike claims. No historian had ever recorded the songs knew about them in history books. Also, if Muhammad was really such a great miracle worker,
      why he could not perform a single miracle in front of the Meccans?
      Muslims’ claim that Muhammad was born detached from the umbilical cord cannot be true.
      Umbilical cord is the only source of supplying nourishment and an unborn baby cannot stay alive
      in the womb without being attached to it. If this fable was true, Muhammad would have lived
      without food and water after birth, but he did need food and water like everybody else. The story
      of pregnant Amina is equally nonsense. If she had really witnessed any such Divine occurrence,
      she would have taken much care of Muhammad by herself instead of giving him to a nurse
      Halima.
      In sum; there was not a single miracle to prove Muhammad’s claim of Prophethood. There were
      no healings, walking on water, parting seas, raising folks from the dead or feeding multitudes.
      There are no fulfilled Prophecies, like the exacting and detailed predictions that Biblical Prophets
      routinely made to demonstrate their Divine authority. But the most troubling part about our
      absolute reliance on Muhammad’s testimony that he and his Qur’an were divinely inspired is that
      Muhammad’s character was as deficient, and his life was as despicable, as anyone who has ever
      lived.
      These miracles attributed to Muhammad are later additions. The traditions concerning
      Muhammad were written down in Baghdad not before centuries following Muhammad’s death.
      Till that time, they were oral traditions which rested entirely in the memory of those who have
      handed them down. Many myths were invented and added to these oral traditions in an attempt
      to make Muhammad appear Messianic. The Muslim scholars who fabricated those miracles had
      well-defined agendas and they had a practical and selfish reason to do so. By the time
      Muhammad started preaching, Christianity was a well-established religion. The very idea that
      Islam might be a ‘new religion’ was unthinkable to Christians and they took Muslims as
      theological deviants (Fletcher, pp. 17-8). But with time, Islam appeared as a religious rivalry to
      Christianity. So the Muslim scholars tried their best to make Muhammad look as godly as that of
      Jesus, otherwise they would be out of business.
      As a result, since the Gospels proclaimed that Christ was the light of the world, so Muslims
      contrived Allah first created the light of Muhammad, out of which Allah then proceeded to create
      everything which constitutes this world. They even demanded that Muhammad’s body emitted
      luminous waves rendering him visible in thickest darkness. One night this miraculous light
      enabled Aisha to find a needle she has lost. Also, Muhammad produced no shadow (Warraq,
      2000, p. 171). Similarly, the story of pregnant Amina is remarkably similar to the Christian story
      of Mary, who, when pregnant with Jesus, heard the angel of the Lord declare, “You will be with
      child and will give birth to a son, and you are to give him the name Jesus. He will be great and
      will be called the Son of the Most High.” (Luke: 1:31-32). Similarly, the story of Bahira (Bahira,
      a Christian monk, is said to have recognized in Muhammad the signs of a Prophet) was borrowed
      from Jewish scriptures. It resembles the Jewish story of Samuel (1 Samuel 16:1-13). Believing in
      fictitious and historically worthless tales is worse than unknowing the truth.
      There was another reason, those miracles were fabricated. Since everything associated with
      Muhammad was demonic rather than Divine and Qur’an could not stand by its own merit, ‘alive’ and steady going. The bread and butter of the Muslim scholars and clerics come from the
      business of Islam. So Islam should survive. At least, those lies, though ridiculous and childish,
      provided their Prophet with some impression of credibility which was sufficient to attract the
      feebleminded people.
      These Muslim scholars pass the story on to next generation and thereafter. Soon it takes on a life
      of its own and becomes more colorful with time and enters the realm of folklore, myth, and
      legend. Ultimately it is accepted by the mainstream Muslims as authentic. Today, the legend of
      Muhammad appears like a ridiculous collection of absurd fables, and in the worst style.
      According to Kennedy (2007, p. 22); these fables are so contradictory and inconsistent that we
      cannot be certain for anything, even the very existence of Muhammad was questioned.
      According to Qur’an, the only miracle associated with Muhammad was the revelation of the
      Qur’anic Suras themselves. But the satanic verses incident even refuted this Qur’anic claim as
      already discussed earlier. Qur’an is the only religious book which is expected to be read and
      recite in Arabic only. It’s not necessary to understand the meaning of a single word. In Qur’an
      there is a large number of contradictions and inaccuracies, and grammatical, historical, scientific,
      numerical and ethical errors. This book is haphazardly written. There is no chronology, no
      chapters of definite subject/matters. Often the verses are unrelated to other. No chapter deals
      with a particular subject matter. A whole chapter is a mixture of many subjects at random. It is
      utter stupidity to believe that this book is from God.
      Similarly, If Muhammad had been involved in a miracle, or could do one, all he would have had
      to do to silence his critics was to explain the ones that had taken place, or simply summon his
      God’s power to perform one. But no! He failed miserably.

    4. The Psychopathology of Muhammad : –

      In every society and amongst all races, we can find individuals, who because of something in
      their mental set up or their personal history, find it difficult or even impossible to adjust to the
      roles which society expects them to perform. In some cases their behavior brings them into
      violent conflict with their environment. Some of these individuals are very successful in their
      professional lives but they are extremely miserable in their family and social lives. They
      sincerely believe that they are exceptional and hence they are not bound by the norms and rules
      of the society. They are denier of reality. This is such a ‘feeling’ which they cannot even explain,
      and because of this, they utter words and gestures which are quite outside the normal behavioral
      patterns of ordinary people. One of the most common features amongst these people is
      megalomania. Megalomania is a non-clinical word defined as,
      1. A psychopathological condition characterized by delusional fantasies of wealth, power,
      or omnipotence.
      2. An obsession with grandiose or extravagant things or actions.
      Grandiosity and delusions of grandeur have similar meanings to megalomania. It is a symptom
      of mental disorder.
      There are enough references in traditional Islamic sources that Muhammad was a megalomaniac.
      In Islam only belief in Allah is not enough to enter Paradise and Muslims must believe the
      Prophethood of Muhammad also. If Muhammad was only a spokesman of God, why Muslims
      have to praise Muhammad in their daily prayers? Though in Islam Allah is portrayed as all
      powerful, but this is in theory only. In practice, Muhammad is the central figure in Islam and
      Allah is just a piece of decoration. Allah is obliged to throw a person in hell even he is sincerely
      devoted of Him but does not believe in Muhammad’s Prophetic claim. So we can see how
      helpless, the God of Islam is. A logical minded person will doubt about the existence of such a
      God.
      Following quotations from authentic Islamic sources prove that Muhammad lived in a grandiose
      fantasy world and was a denier of reality. Muhammad reinterpreted reality to fit his fantasies.
      “Allah’s Apostle said, ‘Whoever obeys me will enter Paradise, and whoever disobeys me will not
      enter it.’” (Bukhari: 9.92.384)
      “Allah’s Apostle said, ‘Whoever obeys me, obeys Allah, and whoever disobeys me, disobeys
      Allah, and whoever obeys the ruler I appoint, obeys me, and whoever disobeys him, disobeys
      me.’” (Bukhari: 9.89.251)
      “Allah’s Apostle: the Lord of the Muslims, Leader of the Allah Fearing, Messenger of the Lord
      of the Worlds, the Peerless and Unequalled”. (Ishaq: 233)
      “Allah addressed the believers and said, ‘In Allah’s Apostle you have a fine example for anyone
      who hopes to be in the place where Allah is.’” (Ishaq: 467)
      “I heard Allah’s Apostle saying, ‘He who obeys me, obeys Allah, and he who disobeys me,
      disobeys Allah”. (Bukhari: 4.52.203)
      “Those who speak negatively of Allah and His Apostle shall be cursed”. (Q: 33.57)
      “For he who insults you (Muhammad) will be cut off”. (Q: 108.3)
      Though Muhammad placed himself in the position of a humble servant of Allah, we cannot see
      any humbleness in the above words, and, surprisingly, his God tolerated his arrogance. After a
      certain period elapsed, Allah became less important than Muhammad, ‘The living God’. The person of Muhammad stood out above all in front rank and Allah was given a secondary position
      in His capacity as the auxiliary of the Prophet. Allah is no longer the Supreme Being. We can
      have a look at the following Qur’anic verse.
      “Lo! Allah and His angels pray peace to Prophet (Muhammad).O ye who believe also shower
      praises on him and salute him with a worthy salutation” (Q: 33.56)
      The above Qur’anic verse alone is enough to prove that the Allah is a myth and Muhammad was
      a vulgar imposter. Muhammad not only ridiculed and belittled his God, but at the same time also
      represented the entire Divine system as a big joke.
      Muhammad’s this type of behavior is a standard megalomaniac behavior. A person who thinks
      that he is superior to God is a denier of reality. A megalomaniac tells a big enough lie, repeats it
      often enough, and the surrounding people will believe it for the imposter to triumph. A lie if
      repeated enough sometimes believed as truth. Muhammad, like other megalomaniacs was so full
      of himself that he got carried away. Throughout Qur’an, Allah has no authority alone and He is
      so pitifully helpless without His messenger that if we completely erase the name of Allah from
      hundreds of verses throughout the Qur’an and Muslims are asked to believe in, submits to, and
      obey Allah and His Apostle, practically nothing would change. No doubt Muhammad was
      suffering from personality disorder.
      Before we proceed further with the psychopathology of Muhammad, we should understand what
      the terms ‘Personality Disorder’ and specifically ‘Narcissistic Personality Disorder’ exactly
      mean. Then we should see how much these characteristics fit into Muhammad’s strange
      personality profile.

    5. The Narcissistic Delusion of Muhammad
      Obviously, Muhammad was under the delusion that he was the chosen messenger of Allah. With
      this delusion, Muhammad started his new career as a Prophet. He is now no more an
      insignificant merchant of Mecca, but the only spokesman of God on the earth. He is on a Divine
      mission.
      Now if we apply Freud’s theory of id, ego and superego to Muhammad’s strange mental setup to
      identify different important ‘players’ in his mind, our findings will be as below.
      Id (true self) – Muhammad: the weak, neglected, coward, insignificant and illiterate
      merchantman of Mecca who never got a meaningful employment in his life and lived a parasitic
      life with the wealth of his wife.
      Ego (false self) – Prophet Muhammad: the Apostle of Allah, the best of creation, the preferred
      one, an excellent example to mankind, exalted above other Prophets in degrees and mercy to the
      world. He is on a Divine mission to conquer the world for Allah. Superego – Allah: The God, who had authorized Muhammad as a Prophet and takes special care
      for every whimsical demand of his beloved Prophet. Allah is the most Merciful and most
      powerful God. He is the Lord of the worlds. Allah first created the light of Muhammad, out of
      which He then proceeded to create everything which constitutes this world.
      On the day Muhammad had a vivid hallucination in the cave Hira (i.e., received his first
      revelation from God) his false self started realizing its self-importance. He started thinking about
      himself as “special” or privileged. He felt entitled to regular admiration, compliance, or favorable
      treatment from others. From this day his false self started dominating his true self and it
      continued until his true self was actually paralyzed. In sum, he constructed an air-tight cocoon of
      narcissistic enjoyment where he can relax, feel good and feel secure – all because he had
      invented a lie that he was the chosen Prophet of Allah. He mistook his hallucination for real and
      thus believed in his own lie. He successfully deceived himself. However, his psychopathic
      behavior was not noticed by others till the time he got a strong foothold in Medina.
      After the first revelation when Allah was silent for a long time, Muhammad realized that his
      inflated false self could not be preserved and the narcissistic grandiosity ‘balloon’ would be
      punctured, which may ultimately activate his true self. He felt so miserable and insecure that he
      even wanted to commit suicide.
      In the beginning of his Prophetic mission, Muhammad was not sure who should be his God.
      When he received the first revelation in a cave, overnight he changed his rank from a merchantman
      to a Prophet without even knowing from whom he received the Divine instruction. The
      ‘voice’ he had heard in the cave did not tell him about the identity of his God, because it was a
      command hallucination. He started warning the Meccans with dire consequences if they did not
      accept him as a Prophet while he himself was in such a delusion.
      Muhammad tried a few different brands of Allah. But he was disappointed with the response
      from his audience and changed his mind several times. Surprisingly, the real Allah did not come
      forward to remove the delusion from Muhammad’s mind. In the end, Muhammad realized that
      all the Pagans, despite their numerous idols, were wholly devoted to their moon God, Allah,
      because they believed that Allah had the ability to inflict punishment as well as rewards. This is
      the only reason, Muhammad choose the pagan Allah as his God.
      The therapists of NPD call this ‘Narcissistic Delusion’. We should note that Allah did not find
      Muhammad but it was Muhammad who looked for a suitable ‘Allah’ to preach in his name. The
      deception of the malignant Narcissist started from here.

    6. The Development of Muhammad’s Narcissism : –

      The circumstances of Muhammad’s childhood confirm that his family had fallen on harder times.
      Muhammad’s father Abdullah passed away before his son’s birth leaving very little for his wife
      and son and, Amina, mother of Muhammad died when Muhammad was only six years old
      (Geiler & Saleeb, 2002, p. 70). Amina lacked interest in her child and wanted to give her to a
      nurse. But it was difficult for her to get a nurse because she was a poor widow and hence the pay
      was miserable. When infant Muhammad was shown to some women who were looking for
      infants to nurse, one of them is reported (Rodinson, 1980, p.45) to have said, “An orphan! And
      with no money! And what can his mother do?” Ultimately Halima took away the child with much
      unwillingness because she did not get a child from a wealthy family and her family desperately
      needed the extra income even though it was not much. There was a possibility that Halima or her
      family did not treat the infant well due to this.
      However, at the age of five, Halima returned Muhammad to his mother Amina, but again she
      was reluctant to take the child back. One year after reunion, Amina died. So Muhammad was
      neglected not only by his foster mother but by his real mother also. Being orphan in those days
      was a curse. In Qur’an Muhammad recalls those cursed days of his lonesome orphanhood,
      “The Last shall be better for you than the First. Your Lord will give you, and you will be
      satisfied. Did He not find you an orphan and give you shelter? Did He not find you a wanderer 93.4-8)
      Those were clearly Muhammad’s words, but it was put to Allah’s mouth. Allah, the ‘talking doll’
      of Muhammad like a puppet sitting on a ventriloquist’s knee, is expressing His frustration on
      behalf of Muhammad. Here the Narcissist is playing a monodrama in an open theatre where
      everyone has an access; Muhammad remained behind the screen, while Allah took the centre
      stage and echoed Muhammad’s words of frustration.
      But why there was so much neglect? It was not only poverty but something more than that. Often
      the parents of a Narcissist are Narcissists themselves. If the mother is a Narcissist, she may be
      either detached from or overly invested in aspects of her pregnancy. When the child arrives, the
      Narcissist mother may become depressed as the newborn has some demands from the mother.
      This leaves little opportunity for the mother to satisfy her grandiose fantasies. Often the mother
      looks for a way out. She does not hesitate to take advantage of someone else’s offer to shoulder
      some or the entire burden. If there is no way out, she shows extreme carelessness (of course,
      unless others are watching) to the child (Hotchkiss, 2003, p. 49). Islamic traditional sources do
      not tell much about Amina, the mother of Muhammad, hence we are not very sure if Amina was
      a Narcissist herself, but her behavior strongly points out the same. However, it is for certain that
      a discrepancy between Muhammad’ chronological age and the level of his psychological
      functioning formed at his adolescent days which widened with time till his death.
      Those Qur’anic words show how much the memory of his neglected childhood had pained him.
      The psychological scars that left in his mind never healed. Muhammad made his dead mother
      responsible for all these sufferings caused to him. When Muhammad conquered Mecca, about
      fifty years after Amina’s death, he visited his mother’s grave. He told (cited Sina, 2008, p. 11) This is the grave of my mother; the Lord has permitted me to visit it. And I sought leave to pray
      for her, but it was not granted. So I called my mother to remembrance, and the tender memory of
      her overcame me, and I wept.”
      The root cause for development of an inflated false self of Muhammad was due to this faulty
      parenting and traumatic childhood experiences. Like other Narcissists, Muhammad suffered a
      developmental arrest prior to the full emergence of his true self. The first few years of a child is a
      very crucial stage, which may makes or breaks the child. Clinical experience shows that
      childhood trauma and abuse are almost impossible to erase. Modern brain research tends to
      support this sad view but offers some hope. Vaknin (1999, p. 217) wrote,
      “Traumas are inevitable. They are an inseparable part of life. But in early childhood –
      especially in infancy (ages zero to four) they acquire an ominous aura, an evil, irreversible
      meaning. No matter how innocuous the event and the surrounding circumstances the child’s
      vivid imagination is likely to embed it in the frame work of a highly idiosyncratic horror story.”
      During this period, the child struggles hard with a very important developmental task, the
      formation of a healthy, autonomous self. The caregivers and parents are required to be tolerant,
      sympathetic and clear on boundaries of what is good and bad. But for doing this job well, the parents and caregivers first need to have a realistic sense both of themselves and of the child.
      They should also be able to control their own aggressive impulses. If they don’t, the healthy
      mental development of the child is threatened. If Amina was a Narcissist, she created a fertile
      ground for the creation of a future Narcissist. Muhammad remained trapped in the narcissistic
      position like an extension of his mother just as she was of him. His sense of self became
      grandiose and unrealistic while at the same time he remained dependent on approval from others
      for self-esteem.
      Kernberg’s views are much more simple and straightforward. According to him, the narcissistic
      disorder is the child’s defense against a cold and un-empathic parent, usually the mother. This is
      what we see in the case of Muhammad. Amina ignored her child’s separation and individual
      needs in order to mold the child to fit her own uncompromising standards and to serve her own
      emotional needs. Though we cannot say for sure that whether Kohut’s, Kernberg’s or
      Masterson’s views are applicable to Muhammad’s narcissism, but we should remember that in
      all accounts the child emerges into adult life with a history of unsatisfactory relationships with
      others, which was very similar to Muhammad. Though Muhammad gave the impression of a
      sensible and well-balanced man in his adulthood, but in spite of this, undoubtedly, he had a
      conflict-ridden psychological dependence on others.

        1. kasaul ambiya का पीडीऍफ़ हो तो लिंक शेयर करे जिससे सभी उसे पढ़ सके जान सकें | धन्यवाद

          1. Arya ji google par search mare pdf of kassul anmbiya ya free down load of kassul anmbiya .jahatak mujhe pta hai ye book khridni padegi aapko .

        2. इस्लाम के विसतार का मुख्य कारण चार शादियाँ और आसान तलाक, गैर मुसलमानों को लूटो, पीटो, मारो। कोई गुनाह नहीं। क्योंकि तुम यह उनको मुसलमान बनाने के लिए कर रहे हो।

          असभ्य।

    7. tumhe Sanatan (hindu) Dharm ki jankari nahi hai. isliye arop mat lagao. Sanatan Dharma ke kewal Ved (Rigved, Yajurved, Samved & Atarved) tatha Gita hi Granth hain. Smritiyan aur Puran Sanatan dharm se sambandhit na hokar lekhakon ki samanya rachnayen hain. Inhin mein ku Scince virodhi tatha jati aadi ka ullekh hai. kintu aap unhen Sanatan dharm se na joden.

    8. “सूर्य पर इंसान रहते हैं ” यह गलत है। हाँ, सूर्य लोक पर जीवन है ऐसी सनातन धर्म की मानयता है। वेदों में कई लोकों का वर्णन है। किन्तु इसका मतलब यह नहीं है कि सभी लोकों पर इंसान रहते हैं। आध्यात्मिक जीवन भी होता है।

  5. Kyu miya jhut bakte ho esa hindu granth me ni likha h bas unhe devta mante h

    itna aur h surya lok unka ghar jarur bataya gaya h vo bhi swarg me na ki surya me .
    hindu dharm me jo likha h use bigyaan bhi man chuka h ek tumhare na manne aur ghadho ki tarha laine se chalne me ka hoga.tumhe to ek admi kah de sari kaum bahi karti h pr hindu har admi apni budhhi se sochkar chalta h.ram ram

  6. अब देख़ो भाई…हिन्दू धर्म इसलिये सर्व श्रेष्ठ है….क्यूंकि जब तुम्हारे कोई पैदा होने की सोच भी नही रहे थे तब हिन्दू दुनिया रोशन कर रहे थे..जैसे की बाइबल मे कहा गया है की पृथ्वी सपाट है और सूर्य चंद्रमा इसके आसपास घूमते है…….जबकि हिन्दू ओने ये पहले ही बताया था की सूर्य केन्द्रक है तथा सारे ग्रह याने के हमारी सुर्यमाला मे जितने भी ग्रह है (जो दुनिया को कुछ सालो पहले गैलीलियो..कोपरनिकस के माध्यम से पता चला) वो सब सूर्य के सामने घूमते है…इसमे एक बात गौर करने लायक है की उस समय में कोई भी दूरबीन नही थी..

      1. kasaul ambiya का पीडीऍफ़ हो तो लिंक शेयर करे जिससे सभी उसे पढ़ सके जान सकें | धन्यवाद

  7. और हां पृथ्वी गोल है ये भी ग्रंथो मे लिखा गया है,ब्रम्हांड मे अनेक आकाशगंगा अनेक सूर्य..अनेक ग्रह है ,यह भी लिखा गया है.बस ये सभी ज्ञात हुआ साधुओ की तपस्चर्या से..जो की उन्होंने हजारो साल पहले की थी.

    1. और हमारे संत dnyaneshwar रचित dnyaneshwari में 700 years पहले कई ऐसे invention बताये है जो बाद में scintist लोगो ने declare किये .

      1. विज्ञान युगाचा अभिमान धरणार्‍या मंडळींना ज्ञानेश्‍वरीने विज्ञानावर कशी मात केली आहे हे त्यातील काही ओव्यांवरून लक्षात येईल. अलीकडच्या काही शतकांमध्ये जे क्रांतीकारक शोध लागले आहेत, त्यांचे मूळ ज्ञानेश्‍वरीत सापडते.

        सूर्य स्थिर आहे आणि पृथ्वी सूर्याभोवती फिरते हा शोध कोपर्निकसने लावला. त्याचा हा सिद्धांत बायबलविरोधी असल्याने धर्ममार्तंडांनी त्याचा छळ केला. कारण बायबलमध्ये पृथ्वी स्थिर असून सूर्य फिरतो असा उल्लेख आहे (आणि यांना आपण विज्ञाननिष्ठ समजतो). ज्ञानेश्‍वरीने 725 वर्षापूर्वीच सूर्याचे भ्रमण हा भास आहे, हे वैज्ञानिक सत्य मांडले होते.
        “उदय-अस्ताचे प्रमाणे, जैसे न चालता सूर्याचे चालणे, तैसे नैष्कर्म्यत्व जाणे, कर्मींचि असता”.

        सूर्य चालत नसून चालल्यासारखा दिसतो. सूर्याचे न चालता चालणे हा ज्ञानेश्‍वरीतील क्रांतीकारक शोध ठरत नाही काय?

        मानवी जन्माची प्रक्रिया कसल्याही उपकरणाची मदत न घेता ज्ञानेश्‍वर महाराज जेव्हा सांगतात तेव्हा नामांकित डॉक्टरांनाही आश्‍चर्य वाटल्याशिवाय राहात नाही. माऊली लिहितात,

        “शुक्र-शोणिताचा सांधा, मिळता पाचांचा बांधा, वायुतत्व दशधा, एकचि झाले”.

        शुक्र जंतू पुरुषाच्या वीर्यामध्ये असतात व शोणित पेशी स्त्रियांच्या बिजांड कोषात असतात. या शोणित पेशी अतिसूक्ष्मदर्शक यंत्राशिवाय दिसत नाहीत. सूक्ष्मदर्शक यंत्राचा शोध चारशे वर्षांतील आहे. परंतु माऊलींनी कसल्याही सूक्ष्मदर्शकाच्या मदती-शिवाय शोणित पेशींचा उल्लेख केला आहे. माऊली कुठल्या मेडिकल कॉलेजात गेले होते? इथे त्यांच्यातील सर्वज्ञता दिसते.

        पृथ्वी सपाट आहे की गोल या प्रश्‍नावर शास्त्रज्ञांत बराच काळ वाद चालला होता. पृथ्वी गोल आहे हा सिद्धांत आता जगन्मान्य झाला आहे. ज्ञानेश्‍वरीने 725 वर्षापूर्वीच पृथ्वी गोल असल्याचे सांगितले.

        “पृथ्वीये परमाणूंचा उगाणा घ्यावा, तरी हा भूगोलचि काखे सुवावा, तैसा विस्तारू माझा पाहावा, तरी जाणावे माते”

        भूगोल हा शब्दच ज्ञानेश्‍वरीने मराठीला दिला आहे. आणि पृथ्वी गोल असल्याचे निःसंदिग्ध सांगताना परमाणूचाही (Micro-Electron) स्पष्ट उल्लेख केलाय.

        पाण्याच्या घर्षणातून जलविद्युत निर्माण होते. हा विजेचा शोधही शे दिडशे वर्षांपूर्वीचा आहे. परंतु माऊली 725 वर्षांपूर्वीच सांगतात की, पाण्याचे जोरात घर्षण झाले की वीज तयार होते.

        “तया उदकाचेनि आवेशे, प्रगटले तेज लखलखीत दिसे, मग तया विजेमाजी असे, सलील कायी?”.

        सागराच्या पाण्याची वाफ होते, त्याचे ढग बनतात व त्याला थंड हवा लागली की पाऊस पडतो. ही पाऊस पडण्याची प्रक्रिया विज्ञानाने अलिकडे शोधून काढली आहे. परंतु माऊली ज्ञानेश्‍वरीत लिहितात की, सुर्याच्या प्रखर उष्णतेने मी परमात्माच पाणी शोषून घेतो व त्या वाफेचे ढगात रूपांतर करतो व इंद्रदेवतेच्या रूपाने पाऊस पाडतो. ती पावसाचे शास्त्रशुद्ध तंत्र सांगणारी ओवी अशी:

        “मी सूर्याचेनि वेषे, तपे तै हे शोषे, पाठी इंद्र होवोनि वर्षे, मग पुढती भरे”.

        विज्ञानाला सूर्यमालेतील ग्रहांचा शोध लागला आहे. या विश्वाच्या पोकळीतील फक्त एकच सूर्यमाला मानवी बुद्धीला सापडली. अशा अनेक सूर्यमाला या पोकळीत अस्तित्वात आहेत. विश्वाला अनंत हे विशेषण लावले जाते. या विश्वात अनंत ब्रम्हांडे आहेत म्हणून भगवान अनंतकोटी ब्रहांडनायक ठरतात. परंतु माऊलींनी 725 वर्षापूर्वीच सूर्यमालेतील मंगळ या ग्रहाबद्दल लिहिले आहे. विज्ञानाने शोध लावण्यापूर्वीच माऊली मंगळाचे अस्तित्व सांगतात:

        “ना तरी भौमा नाम मंगळ, रोहिणीते म्हणती जळ, तैसा सुखप्रवाद बरळ, विषयांचा”

        किंवा
        “जिये मंगळाचिये अंकुरी, सवेचि अमंगळाची पडे पारी”

        किंवा “ग्रहांमध्ये इंगळ, तयाते म्हणति मंगळ”.

        इतकेच नव्हे, तर नक्षत्रांचेही उल्लेख आहेत. रोहिणीचा वरच्या ओवीत आलाय, तसेच मूळ नक्षत्र:

        “परी जळो ते मूळ-नक्षत्री जैसे”

        किंवा स्वाती नक्षत्र:

        “स्वातीचेनि पाणिये, होती जरी मोतिये, तरी अंगी सुंदराचिये, का शोभति तिये”.

        कॅमेरा आणि पडद्यावर दिसणारा चित्रपट यांचे मूळही ज्ञानेश्‍वरीत सापडते:

        “जेथ हे संसारचित्र उमटे, तो मनरूप पटु फाटे, जैसे सरोवर आटे, मग प्रतिमा नाही”.

        अर्थात संकल्प-विकल्पांमुळे मनाचे चित्र उमटवणारा पडदा फाटून जातो. चित्रपटासाठी पडदा आवश्यक आहेच किंवा सरोवरात पाणी असेल तरच आपली प्रतिमा त्यामध्ये उमटते. ते आटून गेले तर उमटत नाही.

        या सर्व ओव्यांचा आशय लक्षात घेतला तर ज्ञानेश्‍वरीची वैज्ञानिकता ध्यानात येईल. विज्ञानयुगात दिशाभुल झालेल्या युवक-युवतींनी ज्ञानेश्‍वरीची ही शास्त्रीयता लक्षात घेऊन मानवी जीवनाचे यथार्थ दर्शन घडविण्यार्‍या संत वाड़मयाच्या सहवासात यावे. ज्ञानेश्‍वरी, एकनाथी भागवत, तुकारामगाथा व दासबोधाचा मनःपूर्वक ध्यास घ्यावा म्हणजे प्रत्येकाला जीवनाचे अनंतरूप समजेल.

  8. इससे जादा और क्या पुष्टि चाहिए धर्म के बारेमे..
    सुनो हिन्दुओ का नया साल चैत्र होता है…जो की धरती का भी नया साल होता है..वसंत ऋतु मे पतझड़ का मौसम जाकर वसंत ऋतु अति है…यही हमारी संकल्पना है..

  9. रही बात इस्लाम की तो सुनो,,ये कोई धर्म नही है.ये तो एक डाकुओ की टोली थी जिसने दहशत जमाने के लिए ये सब कानून बनाये.और लोगोने दहशत से इसे स्वीकार किया.आज भारत मे जो भी तुम्हारे लोग है उनमेसे 99%लोग मुलतः हिन्दू है जिन्हें औरंगजेब,,जहांगीर…शाहजान…बाबर…हुमायूँ…कुतुबुद्दीन ऐबक….मुहम्मद बिन तुग़लक़ जेसे शासको ने जबरन धर्म परवर्तित किया…जो तुम इतना बक रहे हो इसका बुरा इसलिए नही लगता क्यूंकि तुम भी हमारे हो बस रास्ता भूल गए हो…

    1. Pehle apne dhrm ki jankari karlo. Aap. Shi chal rhe ho ya nhi. Aam. Ki guthli gerenge to. Aam hi ugega papita nhi agar insan marega to bo janwar kaise ban sakta hai socha hai. Kabhi kyon bakwaas ka dhrm ki sunoge to bakwaas hi milega

      1. ” Aam. Ki guthli gerenge to. Aam hi ugega papita nhi”

        yahee apako samajhne ki aawashyakta hai

        aur us par anusaran karne ki bhee

      2. “इंसान मरेगा तो पशु कैसे बनेगा?”
        आत्मा (रूह) समझते हो? वह इंसान में भी होती है और पशु में भी। वही आत्मा विभिन्न शरीर (योनि) धारण करती है।

        इस्लाम कहता है की सब मुर्दे कयामत तक सोये रहेंगे। फिर मौलवी साहब रूहों को कैसे जगा लेते हैं? अल्लाह का कहा कैसे गलत हो गया?

        मदिना अल्लाह का घर है। वहाँ किसी की जान नहीं जाएगी। यह फर्माया गया है। फिर अल्लाह क्यों कभी भगदड़ में, कभी क्रेन गिरने से, मौत क्यों देता है?

  10. सोचलो एक छत्रपति शिवबा जन्म नही लेता तो हमे भी तुम्हारी तरह होना पड़ता..हम कृष्ण भगवान के कृपापात्र है की हमे हिन्दू धर्म का अंश बनाये रखा…जब कभी भी तुम मेरी टिप्पणियॉ पढोगे तो उत्तर जरूर देना तुमसे बात करने मे मुझे बड़ी रूची रहेगी..

      1. शुएब आलम भाई जान
        कुछ ऐसे समूह हैं जहां पर whatsapp पर चर्चा की जा सकती है आपकी अनुमति हो तो मैं अपने मित्र को बोलूँगा वे उन समूह में जुडवाने की कोशिश करेंगे आपको |
        धन्यवाद

  11. संसार मे कष्ट का दुसरा नाम है इस्लाम
    कुरान का अर्थ है दुनिया को विरान करना

  12. Satyartha Prakash mein jo surya aadi mein jeev ki charchaa wahan Vasuwon ke baare mein samjhaayaa gayaa hai. Vasu kya hai? Surya, chandramaa, taare, grah, upagrahon ko vasu kyon kahate hain? Vasu kaa matlab hai sthaan, jagah English mein abode yaa place jahan par kuch rak sakte hain yaa jahan par kuch hotaa hai. Is liye ye sabhi surya, tare, grah, upgrah Vasu hain. Ab baat rahi jeevon ka hona jahan par hawaa, vaayu nahin hai keise sambhav hai? Is samsaar mein jo jeev vaayu ke sahare jitaa hai use aerobic organism kehte hain aur jo binaa hawaa ke jitaa hai use anaerobic kehte hai. Is liye ye mat sochna ki jahan hawaa nahin hai wahan jeev nahin hai. satyartha prakash ke vichaar sahi hai. Aap batayiye ki jinn jo aag se banaaye gaye hain jab aapke paas hote hain ya Masjid mein namaz padte hain to garmi yaa aag kyon nazar nahin aati yaa aap kyoun nahin jalte hain?

  13. भाई आपको इस्लाम की सही जानकारी नहीं मिली जिसकी वजह से आप भटक गये । खैर दोष आपका नहीं है । इसकी असली वजह हमारे दीन के ठेकेदार है जो की असल में शयातीन है उन्होंने अपना काम पूरा नहीं किया जिनकी वजह से आज मुसलमान गुमराह है ।

    1. भविष्य पुराण में इस्लाम के बारे में मुहम्मद के जन्म से भी कई हज़ार वर्ष पहले बता दिया गया था।

      लिंड्गच्छेदी शिखाहीनः श्मश्रुधारी सदूषकः।
      उच्चालापी सर्वभक्षी भविष्यति जनोमम।।25।।
      विना कौलं च पश्वस्तेषां भक्ष्या मतामम।
      मुसलेनैव संस्कारः कुशैरिव भविष्यति ।।26।।
      तस्मान्मुसलवन्तो हि जातयो धर्मदूषकाः।
      इति पैशाचधर्मश्च भविष्यति मया कृतः ।। 27।।
      (भविष्य पुराण पर्व 3, खण्ड 3, अध्याय 1, श्लोक 25, 26, 27)
      5 हज़ार वर्ष पहले भविष्य पुराण में स्पष्ट लिखा है।

      इसका हिंदी अनुवाद: रेगिस्तान की धरती पर एक “पिशाच” जन्म लेगा जिसका नाम महामद होगा, वो एक ऐसे धर्म की नींव रखेगा जिसके कारण मानव जाति त्राहि माम कर उठेगी। वो असुर कुल सभी मानवों को समाप्त करने की चेष्टा करेगा।

      उस धर्म के लोग अपने लिंग के अग्रभाग को जन्म लेते ही काटेंगे, उनकी शिखा (चोटी ) नहीं होगी, वो दाढ़ी रखेंगे पर मूँछ नहीं रखेंगे। वो बहुत शोर करेंगे और मानव जाति को नाश करने की चेष्टा करेंगे। राक्षस जाति को बढ़ावा देंगे एवँ वे अपने को मुसलमान कहेंगे। और ये असुर धर्म कालान्तर में स्वतः समाप्त हो जायेगा।
      ***********************************************************
      यदि यह श्लोक और इसका अनुवाद सत्य है तो मानना पडेगा कि कम से कम आज के संदर्भ में यह बिलकुल फिट बैठता है विशेषकर आई एस, तालिबान और बोको हराम के संदर्भ में ।

      मुझे आश्चर्य है कि इतना महत्वपूर्ण ग्रन्थ जिसने इतने समय पूर्व इतनी स्टीक और स्पष्ट भविष्यवाणियां की हुई है, दुनियां की नजरों से ओझल क्यों रहा है ? जबकि इसके विपरीत नास्त्रादेमस की भविष्यवाणिया जो अस्पष्ट, असत्य व भ्रम में डालने वाली है दुनियां भर में ख्याति पा गई है ।

  14. भाई इस्लाम कोई धर्म नही है और कुरान का अर्थ है दुनिया को विरान करना. मुसलमान तो एक डाकुओ की टोली थी जिसने दहशत जमाने के लिए ये सब कानून बनाये. और लोगो ने दहशत से इसे स्वीकार किया. आज भारत मे जो भी मुसलमान लोग है उनमेसे 99% लोग मुलतः हिन्दू है जिन्हें औरंगजेब , जहांगीर…शाहजान…बाबर…हुमायूँ…कुतुबुद्दीन ऐबक….मुहम्मद बिन तुग़लक़ जेसे शासको ने जबरन धर्म परवर्तित किया…जो तुम इतना बक रहे हो इसका बुरा इसलिए नही लगता क्यूंकि तुम भी हमारे हो बस रास्ता भूल गए हो…

    1. Bhai ye batao dunia me sabse jyada population kiski hai pehle 4 kram me fir baat karte hai.bura manne ki koi jaroorat nahi agar logic se baat karna chaho to logic se karte hai

      1. शकील जी
        एक बात बताओ जी जंगल में शेर की संख्या कितने होती है | दूसरी बात यह की ग्यानी बहुत कम होते हैं मुर्ख ज्यदा होते हैं | पहली बात १० १० बच्चे पैदा कर ४० बच्चे पैदा करना ४ औरत से तो दिन ब दिन जनसँख्या बढ़ेगी ही वैसे यह आपको मालुम होनी चाहिए की अभी दुनिया में सबसे ज्यादा संख्या इसाई की हैं | फिर और कई जगह बन्दुक की नोक पर इस्लाम काबुल करवा रहे हैं | यह बतलाना की इस्लामिंक देशो में यह कानून क्यों नही है की इस्लाम वाले चाहे तो इस्लाम को छोड़ सकते हैं जैसा दुसरे देश में होता है मगर इस्लामिक देशो में आप इस्लाम को नहीं छोड़ सकते हां कोई और मजहब का हो तो वे इस्लाम को अपना सकते हैं | वाह क्या बात है जनाब आपका | थोडा सत्य की जानकारी करो | बहुत से मुस्लिम इस्लाम को त्यागना चाहते हैं मगर उन देशो में वह आज़ादी नहीं जिस कारण वे त्याग नहीं पाते | धन्यवाद

        1. Amit roy ji ham insano ki baat karte hai janvaro ki nahi .allah ne sirf insan banaya hi is lie hai k wo uski banai jindgi ka lutfuthae ba sarte sariat par chal kar isalm ko sahi tarike se samjh kar.ha ye bbat bilkul sahi hai k islam me bhrun hatya ya abortion ko manai hai wo bht hi bada gunah hai kisi masoom ya lachar ki jaan lena lekin islam ne ye nahi kha k aap jitne chaho utne bacche paida karo aese to jisme jan dali us khuda ne to usko jilana ya marna b usi k hath me hai insan se khuda ne ye kha hai k tu ye soch k use mat mar daal k iske lie khana kha se aaega kyunki har baccha uski takdir lekar aata hai aur allah ne har insan ki roji b tai kardi hai wo kisi ko is dunia se uake haq ki kamai k bina nahi uthta wo insan hai jo haram ki kamai k chakkar me apni haq ki kamai b gawa bethta hai to usme allah ki kaha galti hai aur hadith me hai k agr tmko bhukmari ka darr hai to mat paida karo bacche uske lie tarike hai lekin bacche ka katl mat karo.raha sawal world me sabse jyada population cristian ki hai aapne sahi bola to cristian b pagal hai kya jo itne sare log world me isai hai wo to 10 10 bacche nahi paida karte .obama k ya clinton k to 10 bacche nahi hai to wo kom lomdi hai kya.bht nabi aae aur gae kisi ne ye nahi kaha jo maen bol rha hu wo aakhiri baat hai sirf suno aur dhayn rakho lekin isko likho mat kyunki kal k allah ka koi aur nabi aega wo koi aur paigam laega jamane k hisab se wo allah ki taraf se hota hai.tab daur kuch aur tha aaj daur kuch aur hai aaj 10 bacche palne ki takat kisi ki nahi aur islam aur hadith k jankar b aaj bht musalman ho gae hai log opeation nahi karwate to dusre tarike se bacche nahi paida karte aur ha agar allah ne unko diya hai unki capacity hai to wo 1 kya 4 sadi b karte hai aur bacche b paida karte hai.aur raha islamic country ka matlab hai k waha sirf islam k hisab se hi sab kuch hota hai.lekin iska matlab ye nhi k waha koi non miuslim nahi rehta kitni saree islamic country me hamre non mslim bhai jate hai 2 sall 4 sal k visa pe job karte hai kitne to 20 20 sall se job karte hai to kya unko koi mar dalta hai kya sirf aap apna dharam apne ghar tak simit rakho ye ho sakta hai k waha koi mandir na ho lekin aap apne ghar k andar to pani puja kar hi sakte ho.aur agr aap ko islam nahi accha lagta to aap ko kisne roka hai maene to nahi suna kisi islamic country me kisi ko jabran isalm pe chalne ko kha jata hai.bas waha murti puja ya kisi b tareh ka aadambar aap nahi kar sakte.mat mano islam ko chod do wo country aur jha aap apna dharam palna chahte ho waha chale jao.ham to indian s hai ye to binsapradaik desh hai maen to aese musalman bhaiyo ko bolunga k tm agar hindu dharam ya aur koi dharam apna na chate ho to ham muslaman bhai hamre pm se baat krke aap ko sarnagati denge.welcome karenge.aur maen aapko ek baat batana chahunga chriatans k baad dusri sabse badi aabadi dunia me muslim hai tisri boudhha hai jo china me hai jyda aur baki numbers par sab dharam aate hai.maen kise k majhab ka majak nhi uda rha lekin aapko ek baat batata hu boudh dharm k bare me to maen nbht jyda nhi janta lekin christian jinko mante hai god mante hai wo ishu christ hai islam k hisab se ham unko hajrat isa alaihisalam bolte hai jo allah k bheje hue paigambar the aur jitne b paigambar aae usme airf isa alaihisalam hi bina baap k paida hue baki sab ne kisi na kisi se janam lia hai to isalm kisi b paigambar ko khuda nahi manta.hamre aakhiri nabi aap s.a.w b aae 63 saal dunia me rahe aur parda kar gae jaha aaj log hajj padhne jate hai.aur islam itna pakka mjhab hai itna yakin wla majhab hai jisme itne sare nabi hue ,fariste hue jinn hue lekin kisi ne khuda ko nahi dekha lekin us khuda ne apne didar k lie aakhiri nabi aap rasool e paak ko farista bhej kar (jibril alahisalam) ko bheja k jao mere pyare mehboob ko bula k lao maen use sari jannte sari jjhamme aur 8 aasamn ki sher karunga aur apna didar karaunga.to ham aaj k musalman unke ummati hai jinke nabi ne khuda ko apni aankho se dekha hai jannat aur jahnnam ka manjar apni aankho se dekha hai fir dekh k aane k baad aapne apne sahaba yani us samay jis jis ne aap s.a.w ko dekha tha sab ko ye manjar bataya k unhone apni aankho se allah ko dekha aur jannat aur dojhak ka manjar dekha.to gar ye wakiat pe jisko iman nahi yakin nahi wo musalman nahi.fir us insan ki marji wo chahe wo din apnae chahe hindu bane chae baudh ya aur b kuch .ye to aastha aur yakin ki baat hai.

          1. शकील जी
            लाहौल विलाकुवत यह आपने क्या बोल दिया | अल्लाह ने केवल मनुष्य को बनाया जानवरों को नहीं ? यह बात समझ में नहीं आई आई भाई जान | यदि अल्लाहं ने जानवरो को नहीं बनाया तो किसने बनाया ? जब कायनात बनाया तो उस कायनात में जानवर भी आते हैं जी | आप तो खुद अल्लाह पर तोहमत लगा रहे हैं जी यह बात समझ से बाहर है भाई जान ? आप इतना लम्बा लेख लिखोगे जी तो आपको जानकारी दे दू इतना लम्बा जवाब को मैं नहीं पढ़ता जबाव आप छोटे छोटे भाग में दें जिससे उन बातो पर चर्चा की जा सके | दूसरी बात आपने बोला की जो बच्चे आते वह अल्लाह अपनी तक़दीर लेकर आता है तो आप यह बताओ की इस्लाम में पुनर्जन्म मना है तो फिर जो बच्चा १ दिन बाद मर जाता है वह किस कारण कौन सा न्याय के तहत अल्लाह का होता है | हदीस में वैसा क्या उपाय बताया है की जिससे बच्चे को नहीं होने दिया जाए ? यह बोला जाता है इस्लाम में की बच्चे अल्लाह की देंन हैं| फिर बच्चो को रोकना क्या इस्लाम के खिलाफ और अल्लाह के खिलाफ नहीं जी ? आपका बोलना है की इसाई जायदा है तो यह जान जाओ कुछ वर्षो में मुस्लिम ज्यादा हो जायेंगे क्यूंकि वे ज्यादा बच्चे उत्पन्न नहीं करते | क्या बोल रहे हो जनाब आप इस्लामिक देश में कोई मुस्लिम क्यों अपना मजहब नहीं बदल सकता यह बताना जी | इतना लम्बा लेख आगे से मत लिखना जवाब देने में बहुत परेशानी होती है | हमें यह बतलाना बँगला देश पाकिस्तान इत्यादि देश में हिन्दू इसाई की संख्या क्यों हो गयी या बोलो तो नहीं के बराबर ? क्यूंकि वहा बन्दुक की बल पर इस्लाम में कबूल करवाई जाती है | भाई सभी मजहब के लोग सभी जगह जाता है इसका मतलब यह नहीं की केवल एक जगह के एक मजहब के लोग जाते हैं आपकी यह बात भी गलत हो रही है | मैं छोटे छोटे करके जवाब दे रहा हु जिससे सभी को जवाब पढ़ने में आसानी हो |

            1. Roy saab maene kha kha k janvro ko allah ne nahi banaya aap apne hisab se hi quote padte ho aur apne hisab se hi samjh lete ho islam ko samjhana koi chote mote char pach line k quotes likh k aapko koi nahi samjha sakta.aap koran padhiye aur jo koi kitabe maene btai hai wo padhiye.koran me 33 pare hai sari kaynat aur sari dunia ka ilm mil jaega aapko.kassul ambiya pehle padhe.aese net se link share kar k kuch nhi samjhega aapko aur aap mujhe galat hi batate rahoge jo maen aapko batana chah raha lambe quotes me aap usko barabar samjh nhi pa rahe to chotev4 5 line me kya samjh sakoge

              1. शकील भाई जान
                कुरआन में वैसा क्या रखा है जिसे समझना मुश्किल हो भाई जान | यह बात समझ से बाहर है जी | कभी मुस्लिम बंधू बोलते हैं की भारत को माता नहीं बोलूँगा क्यूंकि कुरआन में ऐसा बोलने को मना किया गया है मगर मक्का को सहरो की माँ बोला जाता है ? भाई इतना फर्क क्यों ? दूसरी बात आप लोग बोलते हो की हम बुत की पूजा नहीं करते फिर मक्का की रुख करके क्यों नमाज पढ़ते हो ? क्यों नहीं दूसरी ओर रुख करके पढ़ते हो जी ? शैतान को पत्थर क्यों मारते हो ? नबी को यदि हम पैगम्बर ना माने तो क्या हम अल्लाह को प्राप्त कर सकते हैं ? भाई कुरआन में सूरज दलदल में डूब जाता है | चाँद के दो तुकडे हुए तो २ चाँद हमें नजर क्यों नहीं आता ? क्या २ चाँद सिर्फ अरब वालो को दिखाई देता है ? भाई थोडा अंधविश्वास से बाहर आओ जनाब |सत्य सनातन वैदिक धर्म की ओर लौटो | http://www.onlineved.com से वेद पढ़ो | अंधविश्वास को त्यागो भाई जान | धन्यवाद |

          2. भाई जान इसाई के बाद मुस्लिम और फिर हिन्दू आते हैं फिर नास्तिक आते हैं और फिर बौध आते हैं | भाई कुरआन के हिसाब से यह बताना ईसा के पिता कौन थे ? क्या अल्लाह दोजख में रहता है ? अल्लाह सातवे आसमान पर रहता है | जो मुस्लिम इस्लामिक देश में रहते हैं वह क्यों इस्लाम को छोड़कर दूसरा मजहब अपनए तो क्यों उसे दुसरे देश में जाना चाहए ? भाई बात तो बहुत है सवाल भी बहुत है जिसका जवाब मिलना मुझे नहीं लगता की आसन होगा | आपके एक जवाब का उत्तर समय मिलने पर दूंगा वह भी बहुत बड़ा लेख है | कृपया छोटा छोटा बनाकर जवाब दें | जिससे हमें भी पढ़ने में आसानी हो और दुसरे भी आसानी से पढ़ सकें | आपके जवाब की प्रतीक्षा में |

            1. Short and sweet answer by me first find kassul ambiya book and read it twice thrice .it is availabel in hindi aapke sare sawal k jawab usme mil jaehe hadiya is just only 140.i am not islamic scholar that i can give ur answeres.somwhere i could be wrong due to lack of knoqledge.best thing is study youself and if u satisfied urself than prb solved otherwise i can not satisfy u because i too am learning about islam.thanks

              1. शकील भाईजान
                पहले आप अंधविश्वास को त्यागे और सही तरीके से बिना अंधविश्वास के कुरआन और वेद पढ़े | फिर आपको खुद मालुम हो जाएगा की वेद के अलावा सच्चा ईश्वरीय ज्ञान नहीं | कुरआन हदीस सब तब आपको वेद के सामने मानव लिखित नजर आयेंगे | कृपया बिना अंधविश्वास के वेद और कुरआन पढ़े आपको सत्य का ज्ञान हो जाएगा कौन सही है और कौन गलत | धन्यवाद |

          3. दुश्मन के दूध पीते (छोटा बच्चा) का कत्ल करने का कोई पाप नहीं है।

            महान है ये इस्लाम।
            क्या लिखूं अब?

            1. अगर दया नंद सरस्वती के पुस्तक से आप संतुष्ट है रफत जी तो हम भी उस ब्यक्ति के विचार से सहमत है जिससे इस देश का हर ब्यक्ति चलता है
              डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर।
              (युगपुरुष की 22 प्रतिज्ञाएं)

              – मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई विश्वास नहीं करूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा।
              – मैं राम और कृष्ण, जो भगवान के अवतार माने जाते हैं, में कोई आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा ।
              – मैं गौरी, गणपति और हिन्दुओं के अन्य देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा।
              – मैं भगवान के अवतार में विश्वास नहीं करता हूँ।
              – मैं यह नहीं मानता और न कभी मानूंगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे. मैं इसे पागलपन और झूठा प्रचार-प्रसार मानता हूँ।
              – मैं श्रद्धा (श्राद्ध) में भाग नहीं लूँगा और न ही पिंड-दान दूँगा।
              – मैं बुद्ध के सिद्धांतों और उपदेशों का उल्लंघन करने वाले तरीके से कार्य नहीं करूँगा।
              – मैं ब्राह्मणों द्वारा निष्पादित होने वाले किसी भी समारोह को स्वीकार नहीं करूँगा।
              – मैं मनुष्य की समानता में विश्वास करता हूँ।
              – मैं समानता स्थापित करने का प्रयास करूँगा।
              – मैं बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग का अनुशरण करूँगा।
              – मैं बुद्ध द्वारा निर्धारित परमितों का पालन करूँगा।
              – मैं सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया और प्यार भरी दयालुता रखूँगा तथा उनकी रक्षा करूँगा।
              – मैं चोरी नहीं करूँगा।
              – मैं झूठ नहीं बोलूँगा।
              – मैं कामुक पापों को नहीं करूँगा।
              – मैं शराब, ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों का सेवन नहीं करूँगा।
              – मैं महान आष्टांगिक मार्ग के पालन का प्रयास करूँगा एवं सहानुभूति और प्यार भरी दयालुता का दैनिक जीवन में अभ्यास करूँगा।
              – मैं हिन्दू धर्म का त्याग करता हूँ जो मानवता के लिए हानिकारक है और उन्नति और मानवता के विकास में बाधक है क्योंकि यह असमानता पर आधारित है,

  15. padkar bahut achha laga mai asha kart hua ki adhik se adhik vedik dharma ka prachar karun
    jay ary jay aryavart

  16. are pagal aapne apne sawal ka jwab kis kisse pucha jara unsab ka name to btayen.jab tumne Quran sarif dekha hi nahi to uske bare me kiyo ulti sidhi bat karte ho .
    mari mano to aap muslim ko dusman mante ho ager aisa nahi hai to tum mujhse akar milo sara jwab quran se dunga tumhari ved se milaunga. aur yadi Islam sacha dharm sabid hota hai to tumhe islam qubul kar lena chahiye.mere bhai sahab islam se jalo mat shaba-e-ekram ke bare me jano to samajh me ayega din-e-islam kiya hai.

    1. जनाब नसीम साहब – कुरान के बारे में क्या गलत लिखा है जरा बताएं तो सही.
      इस्लाम सच्चा धर्म है – बहुत अच्छी बात है महोदय लेकिन कृपया ये तो बताएं की धर्म क्या है ?
      धर्म होता क्या है आपकी नज़र में ?

        1. शकील जी
          पहले यह बताये की धर्म किसे बोलते हैं ? मत मजहब किसे कहते है ? इनके क्या क्या लक्ष्ण होते हैं ? थोड़ा जानकारी देने की कोशिश करना जी

          1. Dharm matlab majhab aapka dharam hindu hai mera islam aur kisi ka kuch aur hoga.aur mat majhab jaisa to sayad kuch nhai hota.ha bad majhab jaroor hota hai.bad majhab ka matlab allah aur uske rasool ko na mannewala aur siwae allah k kisi aur ki ibadat karne wala bad majhab hota hai chahe hindu ho chahe musalman.kitne muslaman b bolte hai ( allah rahem kare) kya hamne allah ko dekha hai kya.laksahn wohi hai k jisko allah k hone pe sakh ho aur uske pyare rasool pe iman nahi late wo sab k samne to bolte hai ha ha ham to musalman hai aur iman le aae lekin jab tanha me jate hai to kehte hai ham nahi mnate allah ko hamne thodi dekha hai allah ko.allah ki bheji kitabo par yakin na karna ye sab bad majhab k lakshan hai.

            1. शकील भाई साहब
              धर्म मत मजहब संप्रदाय में बहुत अंतर होता है | धर्म उसे कहते हैं जिसका धारण किया जा सके | धर्म के १० लक्ष्ण होते है | धृति क्षमा इस तरह से १० लक्ष्ण होते हैं जिसका लिंक हम आपको पेश करते हैं उसे आप पढ़ें आपको जानकारी हो जायेगी की धर्म की जरूरत क्यों ? धर्म किसी का कोई नहीं बदल सकता | धर्म का कुछ उदाहरन देता हु जो किसी भी मत मजहब में बदला नहीं जा सकता | जैसे कोई किसी भी मजहब का हो वह अपनी बीवी को माँ नहीं बोल सकता माँ को बहन नहीं कह सकता भाई को पिता नहीं बोल सकता इसे धारण करना ही धर्म कहलाता है | यह मैंने आपको समझाने के लिए उदाहरन दिया |धर्म का परिवर्तन कभी नहीं हो सकता | मत मजहब संप्रदाय हमेशा बदलता रहता है |आये अब थोडा मत मजहब संप्रदाय की जानकारी देता हु | मत मजहब संप्रदाय समय के साथ बदलता रहता है | मत मजहब संप्रदाय किसी एक के द्वारा चलाया जाता है और जो लोग उसे अनुसन करते हैं मत मजहब संप्रदाय कहलाता हैं | जैसे गौतम बुद्ध से पहले बौध मत संप्रदाय इसा से पहले इसाई मत संप्रदाय और पैगम्बर मुहमद साहब के पहले इस्लाम अस्तित्व में नहीं था इन्हें ही मत मजहब संप्रदाय बोला जाता है | अब धर्म की आवश्यकता क्यों और धर्म के लक्ष्ण क्या है उसका लिंक पढ़े | http://aryamantavya.in/dharm-ki-aawashyakta-kyon-shivdev-arya/ |आओ सत्य सनातन वैदिक धर्म की ओर लौट चले | धन्यवाद |

              1. Aapko kisne bola mohmmad sahab k pehle islam astitva me nahi tha.mohmmaad sahab kbpehle kariban 30 paigambar aae unhone b islam ko fialaya aakhiri nabiohmaad sahab aae aur uske baad ab koi nabi nahi aaega kayamat tak.aur mohmmad saab ko sab nabi o ka sardar banaya hai allah ne.isa alahisalm aae to unhone b ye hivkha khuda ek hai uski ibadat karo naki meri ibadat karo.lekin an aujubillah chriatian aapko bhagavan man baithe allah ka beta man baithe aur unko hi pujne lage.maen aapko fir bol raha hu mujhe aarya dharm ki koi jankari nahi lekin apke pass jo b islam ki jankari hai wo ekdum galat aur wo b adhuri hai aap ko jo maene bola wo kitab padhiye aap ko dharm kya hai nabi kaun hai dharm kaise faila aur insanko allah ne kyun banaya.aap ka dharam accha hi hai maen usko galat nahi bol rhalekin aapke pass islam ki bilkul b sahi jankari nahi hai aur aap arguments me lag gae ho.maen aapko islam kabool karne ko nhi bol rha lekin ha mera iman bht pakka hai aur mujhe apne allah aur uske rasool pe yakin hai aakhirat par yakin hai k jindagi sirf ek baar milegi baar baar nahi milegi fir hamare amal k hisab se yato jannat ya to dojkah bas.

                1. “mohmmaad sahab kbpehle kariban 30 paigambar aae u”

                  Shakeel ji likhane se pahel milaan to kar lete quran men kya kaha gaya hai

                  kya kewal 30 ki hee sankhya hai
                  🙂

                2. कयामत का मतलब साफ कर पाएँगे?

                  धरती से जीवन की समाप्ति, या पूरे ब्रह्ममांड का एकावर्ण में लीन हो जाना?

  17. I only want to say Jay shree Ram bas iske aage kuch nahi jitni v daya,prem aadar samman shanti ham me hai kisi aur me nahi

    1. Kya raam bhagvan hai .ha hai to fir shankar ji brahmaji,vishnu ji ,ganpati ji,hanuman ji,ye sab kya hai.aur baki bhagavn me kya hai.daya prem nahi hai .aur jitni raam me daya sakti hai utni dya sakti agar aap me hoti to aap aese hindu best hai dusra best nahi aesa bolte hi nahi.aur puri dunia mesirf ek hi din hota aur wo hindu dharm hota.so dont compare any religion if u like urs the best so what abt others.god is only one always only one.

      1. @Shakeel , Aapko kisane kaha ki bhagwaan alag alag hote hein

        वैदिक धर्म में ईश्वर एक ही है
        तौहीद पर हैं हम लोग

        आशा है आप भी कब्र पूजा और रसूलों को छोड़ कुरान में जो तौहीद की बात कही है उस पर अमल लाओगे

        1. Kabar ki puja ya rasool ki puja jayaj nahi islam me lekin wali aur paigambar k vasile se dua mangi jati hai k ya allah tujhe tere pyare rasool ka wasta ya tere wali ka wasta inke sadke se meri in dua o ko apni bargah me kobool farma aur ya rassol tuje tere ilahi ka wasta meri hajri apni baragh me kabool farama aur mujhe meri paresaniyo se nijat dila.aameen

          1. शकील साहब यदि कब्र पूजा जायज नहीं तो पाकिस्तान से आने वाला हर प्रधानमंत्री अजमेर दरगाह में क्या करने जाता है
            दूसरा यदि यदि पैगम्बर कि पूजा नहीं तो कलमें में क्यों उनका नाम लिया जाता है

            जहाँ तक रहा पैगम्बर के नाम पर दुआ काबुल करने का तो क्या खुदा पैगम्बर का गुलाम है जो उसके नाम से दुआ कबुल करेगा या पैगम्बर उसे बाकी संतानों से ज्यादा प्रिय है
            यदि ऐसा है तो खुदा दोषी हुआ

  18. यदि हिंदू धर्म सत्य होता तो अंबेडकर को बौद्ध धर्म न अपनाना पड़ता । मनुस्मृति मे औरतौ के बारे मे निहायत ही घटिया बाते लिखी गई है ।अंबेडकर ने इस कथित धार्मिक ग्रंथ को जला दिया दिया था ।

    1. शाहनवाज़ जी
      पहली बात यह की हमने शुद्ध मनुस्मृति साईट पर डाली है उसे पढ़े | दूसरी बात मनुस्मृति कोई इस्वरिय ज्ञान नहीं जो उसमे मिलावट नहीं हो सकती | हमने विसुध् मनुस्मृति साईट पर डाल रखा है आप जरुर पढ़े और चर्चा करे | हम तैयार हैं चर्चा करने को | हमारे कोई भी सदस्य जरुर आपको जवाब देंगे चर्चा करेंगे | आंबेडकर ने क्यों बौध अपनाया यह उनकी अपनी सोच है | सत्य को समझना सबके बस की बात नहीं | और यदि इस्लाम इतना ही अच्छा था तो अम्बेडकर ने इस्लाम को क्यों नहीं अपनाया इसे बतलाना | अम्बेडकर के बारे में कोई कमेंट नहीं करना चाहता |धन्यवाद

      1. बौद्ध धर्म भी हिंदु धर्म का अंश है वो भी scientific and spiritual है

    2. भाई अंबेडकर जी ने मैक्समुलर के मिलावटी मनुस्मृति को जलाया था । नाकी आज कि विशुद्ध मनुस्मृति ।

      रही बात धर्म बदलने की तो वो उनकी स्वेच्छा थी । नाकी हिंदू धर्म बुरा है इसकारण ।

      और कभी उनकी किताबे पढलेना वो खुद कहते है हम सब आर्य ही है ।

  19. I have answer for all of your question….I hope you haven’t reach to scholars of Islam …I will answer one of your question here …. Why a woman cannot marry four husband at a time but a man can !!!
    I have so many points in this regard the main point is suppose a woman marry with 4 husband at a time and had sex with four of them in a week and got pregnant can you be able to tell or that woman itself can tell the child belong to whom ??? Or who is the father of child !!!!! Now you will say dna test can prove it but dna test can be done only after certain age …..so in Islam Allah haven’t left any place of confusion for human being …..I can tell you so many other reason also and I am not a scholar in Islam ……think it deeply ….

    If any body want to learn about Islam please read Quran and its meaning ask a scholar and I hope after understanding most of you will bring iman ….if Allah give you Hidayath

    1. Dear, DNA is possible to determine who the biological father of the fetus is while the woman is still pregnant through procedures called chorionic villus sampling or amniocentesis. Choronic villus sampling (CVS) retrieves choronic villus (placental tissue) in either a transcervical or transabdominal manner. Amniocentesis retrieves amniotic fluid by inserting a needle through the pregnant mother’s abdominal wall. These procedures are highly accurate because they are taking a sample directly from the fetus.

      However you have given very funny justification for 4 marriages. 🙂

      looking forward to hear from you

      1. To aap ye chahte ho k har hindu ya muslim mahila ko b 4 mard se sadi karne ki ijajat honi chahiye.mr arya ji islam ne aadmi ko aurat par hakim banaya hai yani auarat aadmi k tabe me rahe naki aurat usko nach nachae.aaj jitne b kanoon bana rai hai sarkar aurto k lie to kya wo sab safe hai kya.kitne rape hote hai har roj india me kuch pta hai india rape me konsi ranking par aata hai.aur jo dahej utpidan kanoon aur rape k kanoon bana rai isme sahi aurato ko to nyay milta hi nahi aur galt aurate uska galat use kar k kitne sidhe sadhe hindu aur muslim mardo ko paresan kar k rakh dia hai.aapko pata hai india me sucide cases aadmiyo k jyada hai na ki aurato ki.agar islam ka kanoon compulsary ho jae india me to i guarantee u ek saal k andar andar rape karne walo ki himmat nahi hogi kisi aurat par nigah dalne ki .islam bht barik hai usko samjhna aapke bas ka nhai.aap science or technology ki baat kar rahe ho.islam ne aesa confusion ka stage hi na aae aur aage taklif na ho waise hi allah ne koran me bata dia hai uske aage koi science nahi kaam karta.

        1. “To aap ye chahte ho k har hindu ya muslim mahila ko b 4 mard se sadi karne ki ijajat honi chahiye”

          ham to ye naheen chahte na hee hamare dharm granth aise kisee karm ka samarthn karte hein ise hamare yahan nikrisht karm samjha jaata hai

          char char auraton se shadi karna , anekon bachhce paida karna , ye kaisa islam hai
          auraton ki khareed farokht karna kya yhee hai aapka imaan .

          Rasul ne Saafiya ke saath jo kiya wo kya tha ?
          kya yahee islaam hai ki usake pati ko usake ghar walon ko markar usako pahle kisee ko de diya jaye fir usase wapas leke usake saath sambandh banane par majbur kar diya jaye

    2. शाह नवाज जी
      सवाल कुछ था जवाब कुछ दिया आपने | और जो जवाब दिया उसका जवाब मैं आपको उसी भाषा में देना चाहता हु | मुझे उस भाषा में जवाब नहीं देना चाहिए फिर भी आपको दे रहा हु | उसके लिए सभी आर्य मंतव्य के मित्रो से क्षमा प्रार्थी हु | चलिए आपने बोला था की एक पुरुष 4 औरत से निकाह कर सकता है जबकि ऐसा औरत नहीं कर सकती क्यूंकि करेगी तो उसे कैसे मालुम चलेगा की वह किसका बच्चा है किस पुरुष का बच्चा है | यही सवाल था ना आपका | जवाब बहुत ही आसन है जी |यदि वह जिस पुरुष से संतान चाहती है उसके साथ बिना निरोध (condom) का जिस्मानी सम्बन्ध बना सकती है और जिससे बच्चे नहीं चाहती उससे निरोध के साथ जिस्मानी सम्बन्ध बनाये इससे उस औरत को मालुम हो जाएगा की यह बच्चा है | बाज़ार में पुरुष और औरत दोनों तरह का निरोध मिलता है | औरत चाहे तो वह औरत वाली निरोध भी इस्तेमाल कर सकती है | उपाय तो ऐसे बहुत से हैं जिससे की औरत यह बतला सकती है की यह बच्चा किसका है | मगर आप यह बोलोगे की बच्चे अल्लाह की देंन है इस कारण औरत को या पुरुष को निरोध का प्रयोग नहीं करना चाहिए | आपको कोई ना कोई तो बहाना चाहिए ना अपने जवाब की बचाव में | यदि आप समझदार हैं तो आगे इस तरह की गलत नजरिया फिर से पेश नहीं करेंगे |
      धन्यवाद

      1. Jab saitan havi hota na bhai sex k dauran aurat ya aadmi ye nhi dekhta k condom pehna hai k nahi yaha kitne pehne hue condom utar jate hai sex me aurat ki nahi chalti k maen usse condom pehnavugi aur use nahi.aur simple si baat socho yaar tm ya maen chahege k hamri behan betiyo k char mard ho.

        1. शकील जी
          क्या बोल रहे हो जनाब ? जब आप सेक्स करते हो मतलब जब इंसान सेक्स करते हैं तो वह इंसान नहीं शैतान सेक्स करता है वाह क्या बात है जी ? एक बात बताना जी क्या आप यह चाहेंगे की आपकी बहन बेटी की सौतन हो और वह अपने अपने प्यार के लिए तरसे ? जिस्मानी सम्बन्ध के लिए तरसे ? उसका प्यार ४ औरतो में विभाजित की जाए ? क्या कोई ऐसा अच्छा माँ बाप कर सकता है ? पैगम्बर साहब की मौत कैसे हुयी थी जी ? और जब कोई सेक्स करता है तो उस समय रजामंदी से होता है तो उस समय कंडोम आसानी से पहना जा सकता है ? खैर मैंने जो सवाल पूछा उसका जवाब देना जी | हां बाल्तकार हो तो वह रजामंदी से नहीं होता | आपके जवाब की प्रतीक्षा में | धन्यवाद |

          1. Amit ji aap meri baat nahi samjh pae sex karte samay insan saitan nahi ban jata lekin saitan waha hamesa maujood rehta hai,saitan ka matlab smajhe aap k nahi.maen samjhata hu mano ek aadmi sex kar rha hai lekin usko saitan ne bhadaka dia k kya pehan rkaha hai ye utar isko sirf uske dimag me ye baat dali aur saitan uske dimag par galib hogaya aur usne condome utar hi diya aur wo same chij 2 re 3 re ya 4 th mard k sath b ho sakti hai.maen aapko ek example batana chahunga k ek viran jagah ho jha par ek khoobsurat ladki ho aur sirf aaap ho aur aap dono rasta bhatak gae aur koi aapko rasta dikhne wla b b nahi to aesi position me wo ladki ya aap kitne din tak paak daman reh sakte ho kya aap wha condom dhundhne nikloge.aap socho ge k nahi ham aesa galat kamm nahi karege lekin waha ek tisra maujood hai wo hai saitan jiaki wajah se galti hona 99.99 percent hai.dekho islam me 4 sadi jayaj hai lekin iska matlab ye nahi k aap aiyashi kvlie sadi kro aapko 4 ko time dena hai 4 ka maintain karna hai aur 4 k sath insaf b karna hai yani agar financially aur physically b fit ho tabhi aap 4 sadi kar sakte ho aaj koi apni ladki aapko aese hi de dega kya.damad agar karodpati hai to maa baap kar dete hai sadi aur jiske pass paisa hai takat hai wo kisi ladki k sath illegal sex na karke usse nikah karle matlab k haram khori mat karo agar takat rakhte ho to nikah kar lo isme aur ek chij hai agar ho sake to apni pehli biwi ka dil na dukhe is tarah usko mana b le not compulsory.ek baat batau aapko hadith me hai k mard kbi budha nahi hota.is lie islam me har ladki aur aurat ko apne sage bhai aur bap k alawa sab se parda karne ko kha hai.mohmmad sahab ki ek saam achanak tabiyat kharab hui t aur wo 1 hafte me parda kar gae the.aap kassul ambiya and haya or pakdamini kitab padhiye aapko sare sawal k jawab mil jaege.sab kuch yaha type nahi kar sakte.aur study k bina aap ko koi kitna b batawga samjh me nahi aaega

            1. शकील भाई जान
              जी मैंने ये नहीं बोला की सेक्स करते हुए आदमीं शैतान हो जाता हो जाता है | मैंने यह बोला की जब आदमी सेक्स करता है तो शैतान उसे कैसे बहका देता है ? वह कैसे हमें बहका देता हैं ? और क्या सेक्स करते समय शैतान देखता रहता है ? यदि वह देखता है और बहकाता है तो यह अल्लाह शैतान को रोकता क्यूँ नहीं ? अल्लाह की मर्जी से सबकुछ होती है | अल्लाह ही शैतान को भी बहकाता है | और दूसरी बात जब शैतान को पत्थर से मारा जाता है तो फिर वह जीवित कैसे हो जाता है ? शैतान का सेक्स करते हुए देखना क्या यह अल्लाह पर दोष नहीं लगेगा ? भाई सेक्स करते समय किसी को शैतान नजर नहीं आता भाई जान ? यह एक अंधविश्वास है भाई जान | अंधविश्वास से निकलो भाई जान | अब आपका दूसरा सवाल का जवाब भाई कोई विराना जगह में कोई सुन्दर लड़की के साथ रहे तो यदि उस लड़की को बहन या माता समझ ले तो कभी हम बहक नहीं सकते और लोग ऐसा करते हैं बहन माता समझते हैं जिससे वे भटक नहीं सकते | मगर इस्लाम में इसके विरुद्ध है जी उसमे यहाँ तक अपने चचेरे ममेरे फुफेरे इत्यादि सभी से निकाह कर सकते हो फिर तो नियत तो ख़राब होना लाजमी है | जैनब कौन थी यह बतलाना जी | इस कारण बोलता हु अन्धविश्वास को छोडो और सत्य सनातन वैदिक धर्म की ओर लौटो | भाई जान हदीस से प्रमाण दूंगा तो आप नजर नहीं आओगे भाई जान | फिर बोलो हदीस स्वीकार नहीं जी | भाई जान हमने प्रमाण माँगा है मगर आप परमान नहीं देते | चलो एक उदाहरन देता हु प्रमाण देता हु उस तरह से प्रमाण दिया करो कुरआन में औरत को खेती बोला गया है तो इसका प्रमाण ऐसे आप दे सकते हो कुरआन सुरा २ आयत २२३ | भाई इसी तरह प्रमाण दिया करे | धन्यवाद |

              1. भाई जान अब आये यह कभी नहीं हो सकता की एक साथ चार से निकाह करो तो सभी को एक जैसा प्यार कर पाओगे | यह कभी नहीं होता जी | दूसरी बात यह की सभी को एक सामान प्यार संभव कैसे मानो सभी को एक समय ही जिस्मानी सम्बन्ध बनाने का मन हो गया तो कैसे ४ को एक साथ संभाल सकते हो | मुझे इस तरह की बात नहीं करनी चाहिए थी मगर आपके सवाल का जवाब देने के कारण ऐसा सवाल करना पड़ा | आपके हिसाब से जो आमिर हो वह निकाह कर सकता है ४ | मगर जो आमिर नहीं होते वह भी निकाह करते हैं फिर ये क्या बात हुयी भाई जान | मुहमद साहब का यदि आपको मौत का लिंक शेयर करू तो आपको यदि अंधभक्त नहीं होगे तो मुहमद साहब को पैगम्बर मानने से इनकार कर दोगे जी आप | यदि आप बोलोगे तो लिंक शेयर कर दूंगा हदीस से | मगर लिंक शेयर करूँगा तो बहुत को मिर्ची लग जायेगी | और आप जो खुद बोलते हो की कुरआन का हिस्सा हदीस है उसे अस्वीकार कर दोगे जी | सत्य सनातन वैदिक धर्म की ओर लौटो | अंधविश्वास को छोडो | धन्यवाद |

                1. Dekho roy ji log koran ko apne hisab se apne lie soch k banle apne fayde k lie to wo hadith nahi ban jati.americans b bht kuch likhte hai google me search maro to pata chalega muhhmad saab k baree me to wo link hadith nahi ban jati.koran allah ki kitab hai wo kbi galat nahi ho sakti aasmani kitab hai naki likhi hui hatho se apni marji se.aur mujhe aap koi link share na kare kyunki mujhe usse koi fark nahi padega sirf mujhe itna samajh me aa gaya hai k kyun itni taklife jheli nabio ne islam ko failane kblie.iman allah chahe uske dil me dal sakta hai lekin jab koi kisi ko sahi rasta batata hai tab b uako samjh me nahi aata wo to fir b nabi the hamari tmhari kya aukat.aapko fir last baar pray karta hu k aap ko sach me ilm lena hai to hindi version kassaul amnbiya kitab padhiye otherwise allah malik hai sab ka.
                  Kbaro pe ja k pooja nahi ki jati aur na sajda kia jta hai waha ham wali allah k darbar me hote hai unki kadambosi karte hai aur unke naam ka fatiha padhte hai aur uae uparbwale ka sadka dete hai unke wasile se upar wale ko kehte hai tere mehboob ki bargah me ye hajiri qubool frama aur inke wasile se meri ye duabkbaool farma.dua to direct khuda se b kar sakte ho lekin ab yaha wasila jood gya to chances b badh gae.jaise ki pm ko milna ho to direct wo nahi bula lega arya ji ko arya ji pehle koi na koi aesa majboot reference dhoondge k pm ko meeting kblie ha bolna pade.aur agar har galat chij ko allah rok lega saitani harqakt ko allah rok lega insan ko jo usne akal di ilm diya uska kya.jab sab kuvch allah hi ko karna tha to wo insan banata hi kyun.sab ko janvar hi nahi bana deta roy ji.allah ne insan banaya to sath me saitan b banaya tabhi to pata chalegabkaun allah ka bnada hai aur kon saitan ki tabedari me lag kar apne hisab se apne fayde kblie kaam karta hai

                  1. koran allah ki kitab hai wo kbi galat nahi ho sakti aasmani kitab hai naki likhi hui hatho se apni marji se- QUraan galat naheen ho saktee to quraan men likhee anekon baton ke jawab aapke paas kyon nahene hein Mariyam ke baina pati ke bachhce ho janm dena ityadi. Srishti niyam ke viruddh anekon baten usamen bhari padee hein unka kya ?
                    kyun itni taklife jheli nabio ne islam ko failane kblie- aapke nabee ne aisa kiya to usaka maksad tha . jo bhee yuddh men luta jataa tha usaka ek hisaa nabee ko milta tha . to hisse ke virdudh jo kasht jhela wo dhan prapti ke liye hee tha

        2. सनातन धर्म के अनुसार पति-पत्नी को सन्तान प्राप्ती के लिए ही सम्भोग करना चाहिए। वह संभोग सर्वश्रेष्ठ है। यह शैतानी काम नहीं है।

  20. bhai main aap ki is bbat se sehmat nahi k aap ne likha k jo log mohammad pbuh k jhande k niche ayenge wo jannat main jayenge aise main wo log jo ki dunya main burai air glat kam karte hain usse v jannat milege aise main allah ka insaf kaise hoga to bhai main btana chahta hun ki jo muslam v dunya main glat kaam krenge wo apni kiye ki sja bhugatne k baad hi jannat main jayenge aur jhan tak baat hai ki aap ne ji bhi mulla ya molvi se islam k bare main janna chaha usne aap k swal ka jwab nhi diya ye baat bilkul jhut hai aisa ho hi nhi sakta k ap kissi alim se swal kro aur wo aap ko jwab na de ye baat bilkul jhut hai

    1. md abdullah ji
      आपका बोलना है मतलब इस्लाम का बोलना यह है की कयामंत के दिन पैगम्बर साहब अल्लाह के सामने गवाही देंगे फिर उस आधार पर लोगो को जन्नत मिलेगा या फिर दोजख मिलेगा | भाई साहब मुझे एक बात आप बताना जी पैगम्बर साहब अभी जिन्दा हैं या उनकी मौत हो गयी ? यदि मौत हो गयी तो वह कब्र में हैं या जन्नत में हैं ? यदि कब्र में हैं या मान लो जन्नत में ही हैं तो क्या वह सभी को देख रहे हैं क्या कौन क्या कर रहा है ? मेरे हिसाब से तो पैगम्बर साहब कब्र में होंगे और उन्हें भी क़यामत के दिन तक का इन्तजार करना होगा | जब वे कब्र में हैं या जन्नत में ही हैं तो वह कैसे देख सकते हैं यह बात समझ से बाहर लगता है मुझे थोडा इस बारे में जानकारी देना जी | यह भी जानकारी देना जी की पैगम्बर साहब की मौत किस अवस्था में कब कैसे हुयी ? जी आप एक काम करें जी आप यहाँ कोई मुल्ला मोलवी से हमारी चर्चा करवाये हमें इस्लाम की जानकारी लेनी है | फिलहाल मुझे नहीं लगता की कोई हमारे सवाल का जवाब दे सकता है चाहे वह इस्लाम जगत के प्रसिद्ध जाकिर नाईक ही क्यों ना हो | यदि हो तो उसे ही बोलना साईट पर आये जवाब दें हमारे सवाल का | स्वागत है इस्लाम जगत के मोलवी मुल्ला का जो हमें इस्लाम की जानकारी दे सके कुरआन हदीस इत्यादि से | हम उनका और आपका इन्तजार करेंगे की आप हमारा मार्ग दर्शन करें | आपके जवाब की प्रतीक्षा में जी | अंधविश्वास को छोडो वैदिक धर्म की ओर लौटो |
      धन्यवाद जी |

  21. aur apka chautha swal k islam talwar k bal pr fayla hai agar ye satye hai to fr china ya america aur europe main sa jang houwa islami lashkar k sath bhai akal hai k nahi jra bhuddhi daurao
    jehalat ki bhi had hoti hai

    1. md abdullah ji
      मुझे फिलहाल अभी कुरआन की वह सूरा और आयत संख्या याद नहीं आ रहा जिसमे यह लिखा है की पहले काफ़िरो को हथ्यार के बल पर नमाज पढ़वाओ फिर आप नमाज पढ़ना | इसका मतलब क्या होता है जी ? दूसरी बात यह की इस्लाम जब अरब में शुरू हुयी तो भारत कैसे आ गयी ? इंडोनेसिया कैसे आ गयी ? ऐसे बहुत से जगह पर कैसे आ गयी ? काश्मीर पहले केवल हिन्दू का जगह था वहां अब मुस्लिम कैसे हो गए ? आपका सवाल करना ही यह मेरे हिसाब से गलत है कोई भी कहीं भीम चला जाता है | अमेरिका में क्या हिन्दू नहीं इसाई नहीं बौध नहीं ? सभी एक जगह से दुसरे जगह पर जाकर रहने लगते हैं और उस जगह के हो जाते हैं क्या अमेरिका में भारतीय नहीं हैं ? भाई साहब सवाल सोच कर किया करें | शायद आपको आपके सवाल का जवाब मिल गया होगा कैसे अमेरिका चीन इत्यादि में इस्लाम या हिन्दू या बौद्ध हो गए हैं | धन्यवाद जी आपका |

      1. Hahaha roy ji aap apni koi nai sureh bana rahe ho kya.roy ji yaha jitne bhi log hai jo islam k bare me itna kuch bol rahe hai maen aapko batau maen muslim hu mujhe lagta hai abhi mujhe bht kuch janna baki hai bht kuch.aur aap ko kisne kha k islam arab se start hua .jab aadam alahisallam ko allah ne mitti se banaya tab alag alag jagh ki mitti fariston se mangwai us mitti me bharat ki mitti b samil hai aur makka madina me to hamre aakhiri nabi aap s.a.w paida hue aur unhone wha islam failaya aaj k 1500 se 1600 saal pehle aur aap ko pta nahi hoga k islam to jab aadam alahiassalam ko jameen pe daal diya gaya tabhi se islam ka failane ka kaam start ho gya tha aur ye jab karodo saal pehle ki baat hai.aap ek kitab kharide agar aap kbhi ajmer jao to khawja sahib k jiyarat karna aur waha bahar aapke hindu bhai o k pass hi kassaul ambiya naam ki kitab milegi wo leke padhna.padhne me koi papp nahi maen b geeta padhta hu.fir aapko jiasa sahi lage wiase aap bol sakte ho kar sakte ho.lekin bina gyan k to maen b bhatakta rahunga.

        1. शकील भाईजान
          जी बिलकुल मुझे इस्लाम के बारे में नहीं मालुम जी | आप हमें थोड़ा मार्गदर्शन करें जी | मेरा सबसे पहला सवाल आपसे यह है जैसा की आपने बोला की आदम को अल्लाह ने मिटटी से बनायीं चलो मान लेते हैं की अल्लाह ने आदम को मिटटी से बनायीं | अप यह बताये की आदम को कौन कौन देश की मिटटी से बनायीं ? और आदम को जिस जिस देश की मिटटी से बनायीं वह कुरआन में अल्लाह ने क्यों नहीं जानकारी दी ? क्या अल्लाह अज्ञानी था जो यह जानकारी नहीं दी ? यह हमें कुरआन की किस सुरा और आयत में लिखा है यह जानकारी देना भाई जान | हमें यह भी बतलाना अल्लाह ने फरिश्तो को किस चीज से बनायीं ? और आदम को कौन सी मिटटी से बनायीं मुल्तानी मिटटी से या काला मिटटी या लाल मिटटी या और दुसरे मिटटी से ? यह कौन से हदीस में किस चैप्टर में कौन सी हदीस संख्या में लिखा है यह भी जानकारी देना ? थोडा प्रमाण से चर्चा हो तो अछि होती है भाई जान | अपने मन से तो कोई कुछ भी बोल सकता है मैं भी यह बोल सकता हु की मैं अल्लाह हु तो मान लोगे ? नहीं मानोगे ना प्रमाण देना कहा ऐसा लिखा है ? अब आपका जवाब से दूसरा सवाल जैसा की आपने बताया की आदम को अल्लाह ने करोडो साल पहले पृथ्वी पर भेजा और अल्लाह ने १५०० से १६०० साल पहले पैगम्बर मुहमद साहब को भेजा इस्लाम को प्रचार करने के लिए ? तो करोडो साल तक इस्लाम का प्रचार करना भूल गया था ? यह कैसा अल्लाह है जो करोडो साल बाद इस्लाम का प्रचार करवाने नबी भेजा तब तक प्रचार करने नहीं भेजना क्या अल्लाह पर दोष नहीं लगेगा ? भाई जान कुरआन हदीस से प्रमाण देना शुरू करू तो मालुम नहीं क्या क्या कर दोगे आप लोग | फिलहाल जो सवाल किया है उसका जवाब देना जी | कुरआन या हदीस से | कुरआन से जवाब दोगे तो अति उत्तम जी | और यदि हदीस से दोगे तो भी चलेगा | फिर यदि कोई सवाल उस जवाब से करने को हुवा तो जरुर सवाक करूँगा | आप हमारा मार्ग दर्शन करें या किसी मोलवी से हमारा मार्ग दर्शन करवाए | आपकी जवाब की पर्तीक्षा में | वैसे सवाल तो बहुत है अभी पूछना आरम्भ ही किया है | धन्यवाद जी | आपके जवाब की प्रतीक्षा में |

          1. Arya ji hadith ka 90 pecent hissa koran se hi hota hai aur kuch hdith ko kitab me aap mohmmad sahab k bole gae words hai jo unhone apni marji se nahi bol diye hai.ye bht deep diacussion hai aadam ko kon kon si mitti se banaya hai ye koran me b hai aur jo kitab maene aapko boli hai kasasul ambiya wo pehle padho kassaul ambiya pehle padho lao aur padho aapki 90 percent confusion door ho jaegi k allah ne kya kia kya nahi kiya kyun kia kaiae kia sab aapko pata chal jaega.sab proof ho jaega kisi se puchne ki jaroorat nahi i padegi,.

            1. शकील भाईजान
              यदि हदीस कुरआन का हिस्सा है तो बोलो जी हम प्रमाण देते हैं हदीस से और कुरआन से फिर यह मत बोलना की हम हदीस कुरआन को नहीं मानते | चलो हदीस से बताओ की पैगम्बर साह्ब की मौत कैसे हुए | किस अवस्था में हुयी | भाई यदि कुरआन हदीस सब से प्रमाण देना शुरू करू तो ना जाने आप लोग कमलेश तिवारी की तरह हमें भी जान से मारने को तैयार हो जाओगे | पहले यह बतलाना की मुहमद साहब की मौत कैसे किस अवस्था में हुयी ? और भाईजान यहाँ जानकारी दोगे इस्लाम की तो लोगो को भी जानकारी होगी जिससे वे सत्य को जान सकेंगे | भाई जान यदि कस्सौल अम्बिया में लिखा है तो उससे पढ़कर जानकारी दो जी | किन किन मिटटी से आदम को बनाया गया जी | और प्रमाण भी देना जी | कुरआन में किस सुरा और आयत में जानकारी दी गयी है किस किस देश की मिटटी से आदम को बनाया गया | यह सब यहाँ जानकारी देना जी | या जो जानकार हैं उन्हें बोलो जानकारी देने जिससे कई लोगो को सत्य की जानकारी हो सके | भाई कुरआन हादेस से ही हम बात करेंगे कुरआन हदीस से बढ़कर है क्या कस्सौल अम्बिया ? यह भी जानकारी देना जी | कुरआन की किस आयत और सुरा में किन किन देश की मिटटी से आदम को बनाया गया है उसका जानकारी देना आप आयत संख्या और सूरा संख्या से जानकारी देकर | हम प्रमाण से ही बात करते हैं और चर्चा करे यही अच्छा होगा | कोई जानकार हो तो उन्हें भी बोलो की आये जवाब दें सत्य का प्रचार करें | धन्यवाद |

          2. Aapke ye sare upar k sawal k jawab kasasul ambiya kitab me mil jaege.koran me b sab kuch hai par better haibki aap upar ki book jaroor kharide aur padhe aapko sahi gyan milega.thanks

            1. शकील भाई जान
              क्या कस्सौल अम्बिया कुरआन हादीस से भी ज्यादा पवित्र पुस्तक है यह जानकारी देना ? जब कुरआन हदीस है तो उससे जानकारी या चर्चा की जाए ना | हाँ आप उस पुस्तक से पढ़कर जवाब देना आपको किसने मना किया है भाई जान | आये उसे पढ़कर यहाँ जानकारी दें जिससे यहाँ कई लोगो को जानकारी हो सके भाई जान | धन्यवाद |

              1. Arya ji sir ek hi kitab nahi hai jo hadith pe hai bht si kitab hai maen aapkobkya kya batau mujhe laga k kassaul nmbiya maene padi hai is lie wo sab se aasan rahega aapke lie samjhna aap pehle padho.ham arguments karne k lie nahi hai.maen b nastik hi tha ek tarike se aur bht dimag wali bate karta tha aur bolta tha lekin mere tmhare bolne se kuch nhai hota allah ne ilm hasil karne k lie kha hai uskke lie koran hai aur bht sari hadith ki kitabe hai aur ilm hasil karne k lie dua b hai allah kehta hai mujhse dua mang maen tujhe raste dikha dunga ya tere dil me wo sahi baat dalunga.wa qul rabbi jidni ilma ye dua hai ilm hasil karne ki

                1. शकील भाईजान
                  यदि आपने कस्सौल अम्बिया पढ़ीं हैं तो जानकारी यहाँ देने में आपको क्या परेशानी हो रही है जो अब तक पढ़ी हैं | भाईजान जो आपने पढ़ी हैं उसके आधार पर जानकारी दो जी जो आपसे सवाल किया है यदि आपने नहीं पढ़ी होती तो आपको यह मालुम नहीं होता आपने पढ़ी हैं तो जानकारी दो जी जिससे लोगो को सत्य की जानकारी हो सके | आप बस यह बोलकर गुमराह कर रहे हो की कस्सौल अम्बिया पढ़ो सब जानकारी मिल जायेगी हमने पढ़ी है | भाईजान आपने जब पढ़ी हैं तो जानकारी दो ना की यह बोलो की उसे पढ़ो | और जो प्रमाण हो उसे भी बताओ जी | केवल बोल देने से नहीं होता जब आपने पढ़ी हैं तो जानकारी देने से डर क्यों रहे हो ? अब तक कई सवाल किये किसी का जवाब नहीं दिया बस घुमा रहे हो उस पुस्तक को पढ़ो | हद हो गयी भाईजान जब जवाब मालुम है तो दो ना जवाब देने से भाग क्यों बोल रहे हो | आपको मैं यह जानकारी दे दूँ मैं भी पौराणिक था फिर जब वेद कुरआन और बाइबिल इत्यादि को पढ़ा तो फिर मैं वेद की शरण में आ गया और सभी पुस्तक को काल्पनिक या मिलावटी मानने लगा | आपको बतलाने में क्या जाता है जब जवाब आपको मालुम है | कहीं यह तो नहीं की कोई जवाब ही नहीं आपके पास | धन्यवाद |

        1. uvals bhai jaan

          ham wahi jaankaari dete hain jo hota hai bina jaankaari ke kuch nahi bolte. yaha jo jaankaari di jaati hai khojbin kar di jaati hai. aur haa comment me jaha confusion hoti hai waha shayad jarur shabd kaa istemaal karta hu. magar jaha confusion naa ho tab shayad nahi pura praman ke aadhaar par jawab di jaati hai. aur hamne jo praman diya hai wah saty di hai.

  22. इस्लाम धर्म Sciene ,नैतिक दृष्ट्रि वाद, समाजवाद, राजनैतिकतावाद,सर्वधर्म समभाव जैसे आदर्शोँ परे है!

  23. अत इसे एक नैतिक तथा सर्वकल्णाकारी धर्म नही माना जा सकता है!
    तथा यह Scince की दृष्टि मेँ कोई धर्म नही है

  24. जबकि सनातन धर्म हमेशा मानव को कल्याणकारी तथा आत्मसंयम दया अहिँसा को प्रमुखता से अपनाने पर जोर

  25. देता रहा है! जबकि इस्लाम मेँ हर तरफ रक्त पात ही होता है!
    अत यह धर्म सच्चे अर्थोँ मेँ धर्म नही दिखता!

  26. सत्यम वद धर्मम चर
    सच बोले लाभ मिले
    अ-सत्यम वद अ-धर्मम चर
    जुठ बोले नुकसान मिले
    धर्म याने कि benifit
    अधर्म याने कि unbenifit
    बुद्धिमान याने अक्कल वाला
    शकशक्ति मान याने ताकत वाला
    हनुमान याने दाढीवाला
    मुस्लीम याने सत्य वाला

    1. जो सत्य जो ग्रहण करने कि शक्ती रखेगा सत्य का प्रयोग कर कुरान को तर्क कि कसौटी अपर कसेगा वो मुसलमान रह ही नहीं सकता

  27. tum muslim bhai log ek baat batawo alla ka janm huwa tha aur huwa tha to kahan or uske mata pitta koun the aur unka koi pic to hoga ki kaise dikte the gora the ya kale the

  28. जनाब आनंद सुमन जी, पहली बात के आपने जिनसे अच्छे बुरे, ऊंच नीच या गरीबी अमीरी का जवाब मांगा वो जाहिल होंगे या तो ये आपका बना बनाया कहानी है।
    मैं कोसिस करूँगा के आपको आपके सवालो का जवाब दे सकूँ लेकिन इससे पहले आपको मेरे सिर्फ एक सवाल का जवाब देना होगा – की जब आप इस्लाम को मान रहे थे और ये सारी कमी नजर आयी और बेशक आपको जिसका जवाब नहीं मिला और आपने अपना मजहब बदल डाला। तो मुझे बताये कि उस मजहब में आपको आपके सवालो का जवाब मिला या फिर शौक हुआ बदलने का और बदल लिए। मतलब के आपको उस धर्म में गरीबी, भुखमरी, ज्यादती, किसी तरह की बुराईआदि तो नही मिला न। और एक बात मैंने जब आपका लेख पढ़ा और इसमें जैसी आपने बातें कही है मुझे लगता है कि आप कोई और किताब की बात कर रहे है। न ही कुरान और न हदीश में ये सारा बात है जैसा आपने कहा। और बाकि चर्चा तो आपके जवाब के बाद हो पायेगी।

    1. मो. सहजान भाई जान
      पहले यह जानकारी दें की आपके हिसाब से धर्म किसे बोलते हैं ? फिर चर्चा की जायेगी जनाब यदि हम हदीस कुरआन से चर्चा करने लगे तो फिर आप बोलोगे लाहौल विलाकुवत यह कुरआन और हदीस हमें मान्य नहीं | भाई जान थोडा हदीस और कुरआन पढ़े और फिर वेद को पढ़े फिर आप उन दोनों की तुलना करें यदि आप पूर्वाग्रह से ग्रस्त ना होंगे तो इस्लाम को छोड़कर सत्य सनातन वैदिक धर्म की ओर लौट जायेंगे जैसे आनंद सुमन जी ने लौटा | आओ वेद की ओर लौटे | धन्यवाद |

  29. bhai apni website ko popular krna aur koi tarika sochlete ………
    Jo insan duniya kamane me laga rahta h,lekin duniya mukaddar me h,,,,,,Allah ko pahchanna h to uski kudrat uski banayi cheezo par gaur kro,…….,,,,….,,
    insan ke sawalo ke jawab use uski hi ankho ke samne use mil jate h use kisi se pochne ki zarurat nhi padhti,bas Allah ke raste me niklna padhega,apni khud tashkeel karo,AGR Allah ko pahchanna h,….,….,….,….,
    khair ye bate to imaan wale ko samajh ayegi…..
    aur rahi baat aap ki kya naam h aapka,aap apna business chalane ke liye kuch aur bhi tarike soch sakte h,,,
    (Allah talabgar ko dete h),,,,,,

    1. ज़ैद आलम भाईजान
      सबसे पहली बात यह की वेबसाइट को पोपुलर नहीं बनाया जा रहा जो सत्य है उसे लोगो तक बतलाने की प्रयास है हमारा | चलो आपके हिसाब से अल्लाह को हम कैसे पहचाने ? थोडा हमें जानकारी देना ? आपका अल्लाह खुद अपने को नहीं पहचान पा रहा है तो हम कैसे पहचाने ? चलो कुछ सवाल रखता हु कुरआन से | आपके हिसाब से कुरआन जो है वह अल्लाह का कलाम है ? चलो यह बात है तो अल्लाह खुद दुसरे अल्लाह का नाम क्यों लेता है ? अल्लाह चाँद तारे इत्यादि की कसम क्यों खाता है ? अल्लाह को क़र्ज़ लेने की क्या जरुरत ? कुरआन में अल्लाह को एक ने तब माना जब पैगम्बर साहब ने उनका पक्ष रखा ? कभी अल्लाह बोलता है की वह बहुत दयावान है तो हमें यह बतलाना अल्लाह जब चाहे किसी को दिल में रोग पैदा कर देता है बिना कारण के और किसी को रोग को बिना कारण के ठीक कर देता है यह कैसे कर सकता है ? सवाल तो बहुत हैं भाई जान | यदि कुरआन हदीस से जानकारी देना शुरू करू तो बहुत से सवाल उत्पन्न होंगे मगर फिलहाल अभी आपसे इतना ही सवाल किया है जब जवाब आएगा तो फिर और सवाल करूँगा | आपके जवाब की इन्तजार में | धन्यवाद

    1. आपकी बात से पूरी तरह सहमत नहीं हु जी | हां यह बात सही है की जो सभी मुस्लिम आतंकवादी नहीं होते मगर जो आतंकवादी होते हैं वे सभी मुस्लिम होते हैं |

  30. इस्लाम को आंतकवादी बोलते हो। जापान मे तो अमेरिका ने परमाणु बम गिराया लाखो बेगुनाह मारे गये तो क्या अमेरिका आंतकवादी नही है। प्रथम विश्व युध्द मे करोडो लोग मारे गये इनको मारने मे भी कोई मुस्लिम नही था। तो क्या अब भी मुस्लिम आंतकवादी है। दूसरे विश्व युध्द मे भी लाखो करोडो निर्दोषो की जान गयी इनको मारने मे भी कोई मुस्लिम नही था। तो क्या मुस्लिम अब भी आंतकवादी हुए अगर नही तो फिर तुम इस्लाम को आंतकवादी बोलते कैसे हो। बेशक इस्लाम शान्ति का मज़हब है।और हाॅ कुछ हदीस ज़ईफ होती है।ज़ईफ हदीस उनको कहते है जो ईसाइ और यहूदियो ने गढी है। जैसे मुहम्मद साहब ने 9 साल की लडकी से निकाह किया ये ज़ईफ हदीस है। आयशा की उम्र 19 साल थी। ये उलमाओ ने साबित कर दिया है। क्योकि आयशा की बडी बहन आसमा आयशा से 10 साल बडी थी और आसमा का इंतकाल 100 वर्ष की आयु मे 73 हिज़री को हुआ। 100 मे से 73 घटाओ तो 27 साल हुए।आसमा से आयशा 10 साल छोटी थी तो 27-10=17 साल की हुई आयशा और आप सल्ललाहु अलैही वसल्लम ने आयशा से 2 हिज़री को निकाह किया।अब 17+2=19 साल हुए। इस तरह शादी के वक्त आयशा की उम्र 19 आप सल्ललाहु अलैही वसल्लम की 40 साल थी इन हिन्दुओ का इतिहास द्रोपती ने 5 पांडवो से शादी की क्या ये गलत नही है हम मुसलमान तो 11 औरते से शादी कर सकते है ऐसी औरते जो विधवा हो बेसहारा हो। लेकिन क्या द्रोपती सेक्स की भूखी थी। और शिव की पत्नी पार्वती ने एक लडके को जन्म दिया शिव की गैरमूजदगी मे। पार्वती ने फिर किसकी साथ सेक्स किया ।इसलिए शिव ने उस लडके की गर्दन काट दी क्या भगवान हत्या करता है ।श्री कृष्ण गोपियो नहाते हुए क्यो देखता था और उनके कपडे चुराता था जबकि कृष्ण तो भगवान था क्या भगवान ऐसा गंदा काम कर सकता है । महाभारत मे लिखा है कृष्ण की 16108 बीविया थी तो फिर हम मुस्लिमो एक से अधिक शादी करने पर बुरा कहा जाता । महाभारत युध्द मे जब अर्जुन हथियार डाल देता तो क्यो कृष्ण ये कहते है ऐ अर्जुन क्या तुम नपुंसक हो गये हो लडो अगर तुम लडते लडते मरे तो स्वर्ग को जाओगे और अगर जीत गये तो दुनिया का सुख मिलेगा। तो फिर हम मुस्लिमो को क्यो बुरा कहा जाता है हम जिहाद बुराई के खिलाफ लडते है अत्यचारियो और आक्रमणकारियो के विरूध वो अलग बात है कुछ मुस्लिम जिहाद के नाम पर बेगुनाहो को मारते है और जो ऐसा करते है वे मुस्लिम नही हैक्योकी आल्लाह पाक कुरान मे कहते है एक बेगुनाह का कत्ल सारी इंसानयत का कत्ल है। और सीता की बात करू तो राम तो भगवान थे क्या उनमे इतनी भी शक्ति नही कि वे सीता के अपहरण को रोक सके जब राम भगवान थे तो रावण की नाभि मे अमृत है ये उनको पहले से ही क्यो नही पता था रावण के भाई ने बताया तब पता चला। क्या तुम्हारे भगवान राम को कुछ पता ही नही कैसा भगवान है ये।और सीता को घर से बाहर निकाल दिया गया था तो लव कुश कहा से आये किससे सेक्स किया सीता ने बताओ।और इन्द्र देवता ने साधु का वेश धारण कर अपनी पुत्रवधु का बलात्कार किया फिर भी आप देवता क्यो मानते हो। खुजराहो के मन्दिर मे सेक्सी मानव मूर्तिया है क्या मन्दिर मे सेक्स की शिक्षा दी जाती है मन्दिरो मे नाच गाना डीजे आम है क्या ईश्वर की इबादत की जगह गाने हराम नही है ।राम ने हिरण का शिकार क्यो किया बहुत से हिन्दु कहते है हिरण मे राक्षस था तो क्या आपके राम भगवान मे हिरण और राक्षस को अलग करने की क्षमता नही थी ये कैसा भगवान है।हमे कहते हो जीव हत्या पाप है मै भी मानता हू कुत्ते के बेवजह मारना पाप है ।कीडी मकोडो को मारना पाप है पक्षियो को मारना पाप है। लेकिन ऐसे जानवर जिनका कुरान मे खाना का जिक्र है खा सकते है क्योकि मुर्गे कटडे बकरे नही खाऐगे तो इनकी जनसख्या इतनी हो जायेगी बाढ आ जायेगी इन जानवरो की। सारा जंगल का चारा ये खा जाया करेगे फिर इन्सान के लिए क्या बचेगा। हर घर मे कटडे बकरे होगे। बताओ अगर हर घर मे भैंसे मुर्गे होगे तो दुनिया कैसे चल पाऐगी। आए दिन सिर्फ हिन्दुस्तान मे लाखो मुर्गे और हजारो कटडे काटे जाते है । 70% लोग मांस खाकर पेट भरते है । सब को शाकाहारी भोजन दिया जाये तो महॅगाई कितनी हो जाएगी। समुद्री तट पर 90% लोग मछली खाकर पेट भरते है। समझ मे आया कुछ शाकाहारी भोजन खाने वालो मांस को गलत कहने वाले हिन्दुओ अक्ल का इस्तमाल करो

    1. Hazrat aapki jankari ke liye ” Hazrat aayesah ki Tareekhi Haisiyat”: jo aapke hee ham mazhab Farog kazmi sahab ne likhee hai neeche de raha hun
      shyad aapki Hazrat aayesh ki umra ke prati Ilm ko badhane men sahayat degi

      हज़रत अबू बकर से आप के हुज़्नों मलाल की ये कैफ़ियत देखी न गयी चुनान्चे वो अपनी पांच साला बच्ची आयशा को ले कर एक दिन आं हज़रत (स.अ.व.व) की ख़िदमत में हाज़िर हुए और अर्ज़ किया, या रसूलल्लाह (स.अ.व.व) ये बच्ची हाज़िर है आप इस से दिल बहलायें ताकि आपका ग़म ग़लत हो। इस बच्ची में ख़दीजा की सलाहियत पाई जाती है। (2) अबू बकर की इस हैरत अंगेज़ तजवीज़ पर पैग़म्बर ने सुकूत इख़तियार किया यहां तक कि बच्ची को उन्होंने गोद में उठाया और वापस चले गये। उस के बाद बक़ौले मुअर्रिख़ पैग़म्बर अबू बकर के घर में आने जाने लगे। (3)

  31. हिन्दु धर्म मे शिव भगवान ही नसेडी है तो उसके कावडिया भी नसेडी। जितने त्योहार है हिन्दुओ के सब बकवास।होली को लेलो मानते है भाईचारे का त्योहार होली पर शराब पिलाकर एक दुसरे से दुश्मनी निकाली जाती है।होली से अगले दिन अखबार कम से कम 100 लोगो के मरने की पुष्टि करता है ।अब दीपावली को देखलो कितना प्रदुषण बुड्डे बीमार बुजुर्गो की मोत होती है। पटाखो के प्रदुषण से नयी नयी बीमारिया ऊतपन होती है। गणेशचतुर्थी के दिन पलास्टर ऑफ पेरिस नामक जहरीले मिट्टी से बनी करोडो मूर्तिया गंगा नदियो मे बह दी जाती है। पानी दूषित हो जाता है साथ ही साथ करोडो मछलिया मरती है तब कहा चली जाती है इनकी अक्ल जीव हत्या तो पाप हैहम मुस्लिमो को बोलते है चचेरी मुमेरी फुफेरी मुसेरी बहन से शादी कर लेते हो। इन चूतियाओ से पूछो बहन की परिभाषा क्या होती है मै बताता हू साइंस के अनुसार एक योनि से निकले इन्सान ही भाई बहन हो सकते है और कोई नही। तुम भाई बहन के चक्कर मे रह जाओ इसलिए हिन्दु लडको की शादिया भी नही होती अक्सर । हमारे बनत नाम के गाव मे 300 जाट के लडके रण्डवे है शादी नही होती फिर उनका सेक्स का मन करता है वे फिर लडकियो महिलाओ की साथ बलात्कार करते है ये है हिन्दु धर्म । और सबूत हिन्दुस्तान मे अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा रेप होते है । किसी मुस्लिम मुल्क का नाम दिखा दो या बता दो बता ही नही सकते। तुम्हारे हिन्दुओ लडकियो को कपडे पहनने की तमीज नही फिटिंग के कपडे छोटे कपडे जीन्स टीशर्ट आदि पहननती है ।भाई बाप के सामने भी शर्म नही आती तुमको ऐसे कपडो मे थू ऐसे कपडो मे को देखकर तो सभी इन्सानो की ऑटोमेटिकली नीयत खराब हो जाती है इसलिए हिन्दु और अंग्रेजी लडकियो की साथ बलात्कार होते हे इसके लिए ये लडकिया खुद जिम्मेदार है।।और हिन्दु लडकियो के हाथ मे सरे आम इंटरनेट वाला मोबाइल उसमे इतनी गंदी चीजे थू और लडकियो को पढाते इतने ज्यादा है जो उसकी शादी भी ना हो पढी लिखी को स्वीकार कौन करता है जल्दी से पढने का तो नाम है घरवालो के पैसे बरबाद करती है और लडको की साथ अय्याशी करती है उन बेचारो का टाइम वेस्ट। इन चूतियाओ से पूछो लडकि इतना ज्यादा पढकर क्या करेगी।मर्द उनके जनखे हो जो औरत कमाऐगी मर्द बैठकर खाऐगे।सही कहू तो मर्दो की नौकरिया खराब करती है जहा मर्द 20000 हजार रूपये महीने की माॅग करे वहा लडकिया 2000 मे ही तैय्यार हो जाती हैबहुत हिन्दु गर्व के साथ कहते है कि हमारी गीता मे लिखा है कि ईश्वर कण कण मे विध्मान है ।सब चीजे मे है इसलिए हम पत्थरो को पूजते है और भी बहुत सारी चीजो को पूजते है etc. लेकिन मै कहूगा इनकी ये सोच बिल्कुल गलत है क्योकि अगर कण कण मे भगवान है तो क्या गू गोबर मे भी है आपका भगवान। जबकि भगवान या खुदा तो पाक साफ है तो कण कण मे कहा से विध्मान हुआ भगवान। इसलिए मै आपसे कहना चाहता हू भगवान हर चीज मै नही है बल्कि हर चीज उसकी है और वो एक है इसलिए पूजा पाठ मूर्ति चित्र सब गलत है कुरान अल्लाह की किताब है इसके बताये गये रास्ते पर चलो। सबूत भी है क्योकि कुरान की आयते पढकर हम भूत प्रेत बुरी आत्माओ राक्षसो से छुटकारा पाते है।हमारी मस्जिद मे बहुत हिन्दु आते है ईलाज करवाने के लिए । और मौलवी कुरान की आयते पढकर ही सभी को ठीक करते है । इसलिए कुरान अल्लाह की किताब है । जबकि आप वेदो मंत्रो से दसरो को नुकसान पहुचा सकते है अच्छाई नही कर सकते किसी की और सभी भगत पंडित जादू टोना टोटके के अलावा करते ही क्या है। जबकि कुरान से अच्छाई के अलावा आप किसी के साथ बुरा कर ही नही सकते। इसलिए गैर मुस्लिमो कुरान पर ईमान लाओ।

    1. e sab kalpanik hai

      “सलिए पूजा पाठ मूर्ति चित्र सब गलत है ” ये आपकी बात सत्य है आर्यों का तो धर्म ही तौहीद है आपको भे इसे अपनाना चाहिए और जितनी भी मजारे हैं तोड़ देनी चाहिए .
      साथ ही साथ जो सबसे बड़ी मूर्ति पूजा तो मुहम्मद साहब करते थे ” काबा को चूमना ” वो भी बंद कर देना चाहिए
      और सत्य तौहीद को अपनाना चाहिए
      साथ ही साथ कलमे में से भी मुहम्मद साहब का नाम हटा दें क्योंकि अल्लाह किसी के साथ शरीक नहीं होता

    2. रामायण या राम चरित्रमानस पढने के बाद ही श्री राम पर टिप्पणी करें।
      लेकिन आप यह नहीं करेंगें। क्योंकि आप डरते हैं ।

  32. अगर हिंदू धर्म बुरा है :-
    (1) तो क्यो
    “नासा-के-वैज्ञानीको”
    ने माना की
    सूरज
    से
    ” ॐ ”
    की आवाज निकलती है?
    (2) क्यो ‘अमेरिका’ ने
    “भारतीय – देशी – गौमुत्र” पर
    4 Patent लिया ,
    व,
    कैंसर और दूसरी बिमारियो के
    लिये दवाईया बना रहा है ?
    जबकी हम
    ” गौमुत्र ”
    का महत्व
    हजारो साल पहले से जानते है,
    (3) क्यो अमेरिका के
    ‘सेटन-हाल-यूनिवर्सिटी’ मे
    “गीता”
    पढाई जा रही है?
    (4) क्यो इस्लामिक देश ‘इंडोनेशिया’. के Aeroplane का नाम
    “भगवान नारायण के वाहन गरुड” के नाम पर “Garuda Indonesia” है, जिसमे garuda का symbol भी है?
    (5) क्यो इंडोनेशिया के
    रुपए पर
    “भगवान गणेश”
    की फोटो है?
    (6) क्यो ‘बराक-ओबामा’ हमेशा अपनी जेब मे
    “हनुमान-जी”
    की फोटो रखते है?
    (7) क्यो आज
    पूरी दुनिया
    “योग-प्राणायाम”
    की दिवानी है?
    (8) क्यो
    “भारतीय-हिंदू-वैज्ञानीको”
    ने
    ‘ हजारो साल पहले ही ‘
    बता दिया की
    धरती गोल है ?

    (9) क्यो जर्मनी के Aeroplane का
    संस्कृत-नाम
    “Luft-hansa”
    है ?

    (10) क्यो हिंदुओ के नाम पर ‘अफगानिस्थान’ के पर्वत का नाम
    “हिंदूकुश” है?
    (11) क्यो हिंदुओ के नाम पर
    हिंदी भाषा,
    हिन्दुस्तान,
    हिंद महासागर
    ये सभी नाम है?
    (12) क्यो ‘वियतनाम देश’ मे
    “Visnu-भगवान” की
    4000-साल पुरानी मूर्ति पाई
    गई?
    (13) क्यो अमेरिकी-वैज्ञानीक
    Haward ने,
    शोध के बाद माना –
    की

    “गायत्री मंत्र मे ” 110000 freq ”

    के कंपन है?

    (14) क्यो ‘बागबत की बडी मस्जिद के इमाम’
    ने
    “सत्यार्थ-प्रकाश”
    पढने के बाद हिंदू-धर्म अपनाकर,
    “महेंद्रपाल आर्य” बनकर,
    हजारो मुस्लिमो को हिंदू बनाया,
    और वो कई-बार
    ‘जाकिर-नाईक’ से
    Debate के लिये कह चुके है,
    मगर जाकिर की हिम्म्त नही हुइ,
    (15) अगर हिंदू-धर्म मे
    “यज्ञ”
    करना
    अंधविश्वास है,
    तो ,
    क्यो ‘भोपाल-गैस-कांड’ मे,
    जो “कुशवाह-परिवार” एकमात्र बचा,
    जो उस समय यज्ञ कर रहा था,
    (16) ‘गोबर-पर-घी जलाने से’
    “१०-लाख-टन आक्सीजन गैस”
    बनती है,

    (17) क्यो “Julia Roberts”
    (American actress and producer)
    ने
    हिंदू-धर्म
    अपनाया और
    वो हर रोज
    “🔔मंदिर🔔”
    जाती है,
    (18)

    अगर 🔔🚩”रामायण” 🚩🔔
    झूठा है,
    तो क्यो दुनियाभर मे केवल
    “राम-सेतू”
    के ही पत्थर आज भी तैरते है?

    (19) अगर “महाभारत” झूठा है,
    तो क्यो भीम के पुत्र ,
    ”घटोत्कच”
    का विशालकाय कंकाल,
    वर्ष 2007 में
    ‘नेशनल-जिओग्राफी’ की टीम ने,
    ‘भारतीय-सेना की सहायता से’
    उत्तर-भारत के इलाके में खोजा?
    (20) क्यो अमेरिका के सैनिकों को,
    अफगानिस्तान (कंधार) की एक
    गुफा में ,
    5000 साल पहले का,
    महाभारत-के-समय-का
    “विमान”
    मिला है?
    ये जानकारिया आप खुद google मे search कर
    सकते है . …..
    Plz aapke sabhi group me send kare plz
    हनुमान चालीसा में एक श्लोक है:-
    जुग (युग) सहस्त्र जोजन (योजन) पर भानु |
    लील्यो ताहि मधुर फल जानू ||
    अर्थात हनुमानजी ने
    एक युग सहस्त्र योजन दूरी पर
    स्थित भानु अर्थात सूर्य को
    मीठा फल समझ के खा लिया था |
    1 युग = 12000 वर्ष
    1 सहस्त्र = 1000
    1 योजन = 8 मील
    युग x सहस्त्र x योजन = पर भानु
    12000 x 1000 x 8 मील = 96000000 मील
    1 मील = 1.6 किमी
    96000000 x 1.6 = 1536000000 किमी
    अर्थात हनुमान चालीसा के अनुसार
    सूर्य पृथ्वी से 1536000000 किमी की दूरी पर है |
    NASA के अनुसार भी सूर्य पृथ्वी से बिलकुल इतनी ही दूरी पर है|
    इससे पता चलता है की हमारा पौराणिक साहित्य कितना सटीक एवं वैज्ञानिक है ,

  33. Dekho koee kisi ke dharm ke naam par kuch bura mat bole .
    1)aap agar degree hasil karna chahte he to apko degree comple karna jaruri he, aap bina degree hasil kiye hame pdhane ajayenge to WO galat hoga apke liye bhi our hamare liye bhi. Isi tarah Allah kya chahte he ,Mohammad s.a.v.sallam kya chahate the ,WO sahi he ya galat ye jaannekeliye aapko apka wakt nikalkar jamaat me niklna chahiye(1years) .tab jaakar aap bata payenge or aapko samajme ayega aapke sawaloka jawab. Aap jamaatse anekebad hamko batana aapko jawab mila ya nahi .

    1. —-मुहम्मद ने हत्या करके इस्लाम को फैलाया—
      काबा एक मंदिर था जिसमे अलग अलग देवी देवताओं की पूजा हुआ करती थी और सभी अरब वासी सनातन धर्मं को मानते थे जिनको डरा धमका कर धर्म परिवर्तन कराया गया
      1-सल्लम इब्न अबुल हुकैक ( अबू रफ़ी एक विद्वान् और कवि था . इसने अपनी शायरी में कहा था ऐसा अत्याचारी रसूल नहीं हो सकता .इसलिए मुहम्मद ने इसे मार डाला .(सीरतुल रसूल अल्लाह -पेज 714 -715 )
      2-अल नद्र बिन अल हरीसयह अरब का एक शायर था. जब सन 622 से मुहम्मद ने कुरान की आयतें सुना कर अल्लाह की सजा से डराना शुरू किया तो इसने लोगों से कहा यह मुहम्मद की कल्पना है .बाद में गुस्से होकर मुहम्मद ने उसे 3 मार्च सन 624 को क़त्ल करा दिया .(सीरतुल रसूल अल्लाह -पेज 133 -134 )
      3-इब्ने सुनैना यह एक धनवान व्यापारी और कवि था . और कविता में अपने देवताओं कि तारीफ़ कर के लोगों से अपना धर्म नहीं छोड़ने को कहता था . इसलिए मुहम्मद ने उसकी 8 सितम्बर सन 624 को हत्या कर दी .(सुन्नन अबू दाउद- किताब 19 हदीस 2996 )
      4-अब्द अल्लाह इब्ने साद इब्ने अबी सरह यह अरब का कवि था ,जब वह अपनी दो लड़कयों के साथ काबा देवताओं की स्तुति कर रहा था . तभी मुहम्मद ने हमला कर दिया . वह जब जान बचाने के लिए काबा के परदे के पीछे छुप गया तो भी मुहमद ने उसकी लड़कियों के साथ 9 जनवरी सन 630 को हत्या कर दी .( सीरत रसूल अल्लाह पेज 550 )
      5-अबू आफाक यह अरब के एक कबीले का सरदार और मनात देवी का उपासक था . अरबी का विद्वान् था , इसने कहा था कि मैं कुरान से बढ़िया शायरी कर सकता हूँ .इस लिए मुहम्मद ने 4 अप्रेल सन 624 को इसकी हत्या कर दी (इब्न हिशाम -पेज 675 )
      6-असमा बिन्त मरवानयह एक महिला कवियित्री थी .इसके पति का नाम यजीद बिन जैद था .इसके पांच बच्चे थे .इसने मुहमद के बारे में कविता लिखी थी .उसके कारण लोग मुहमद के विरोधी बन गए .नाराज होकर मुहम्मद ने रात में सोते समय उसे बच्चों सहित 30 मार्च सन 624 को हत्या कर दी .(सीरत रसूल अल्लाह पेज -675 -676

      1. नफीस जी आप एक बार सत्यार्थ प्रकाश पढ़े फिर किसी आर्य से आकर प्रश्न करना।आपके सरे सवालो के जवाब मिल जायँगे।अगर आपको अपने सवालो के जवाब मिलते ह तो आप भी घर वापसी करोगे।आर्य बनोगे।

        1. मेरे भाई जान
          यहाँ पर कोई गाली गलौज नहीं करता | आप यह बतलाना धरम किसे बोलते हैं मत किसे बोलते हैं | संप्रदाय किसे बोलते हैं | थोडा सत्य की जानकारी ले लेना मेरे भाई जान |

        1. अल्लाह बड़ा दयावान है जिसके दिल में रोग नहीं होता उसके दिल में रोग पैदा कर देता है | जिसे चाहे बिना कारण अपमानित कर दे | वाह क्या बात है | ऐसा अल्लाह है तो अल्लाह को कैसे पहचाने हमें बतलाना |

  34. नफीस जी आप एक बार सत्यार्थ प्रकाश पढ़े फिर किसी आर्य से आकर प्रश्न करना।आपके सरे सवालो के जवाब मिल जायँगे।अगर आपको अपने सवालो के जवाब मिलते ह तो आप भी घर वापसी करोगे।आर्य बनोगे।

  35. Ha ha ha…… Aisi bahut saari kahaaniyaan google aur youtube par hain…. Ke main ne Hindu Dharam kyon chorha….

    Bahut Muhabbat ke saath aapse ek sawaal kya Aapke bhagwaan sirf India ke mein rahne waale hinduon ke bhagwaan hain ya saari Duniya ke bhagwaan hain…… Agar aapke bhagwaan saari duniya ke bhagwaan hain to phir Aapka dharm India se shuru hokar India mein hi kyon simat kar rah gayaa????

    Humein maaloom hai ab aaplog apne dharam par amal karte hue gaaliyaan denge…..

    1. हासन साहब
      पहली बात यह है की वेद के आधार पर इश्वर सर्वत्र है केवल पृथ्वी पर नहीं पूरा ब्रह्माण्ड में इश्वर व्याप्त है यह अल्लाह की तरह नहीं जो सातवे आसमान पर सिंहासन पर बैठा है | और मुहम्मद साहब ने ही स्वीकार किया है की अरब से इस्लाम फैलेगा और अरब में ही इस्लाम सिमट जाएगा | और हां आपको जानकरी दे दू इश्वर और भगवान् में मेरे हिसाब से अंतर होता है | और सुने मेरे भाई जान हम गाली नहीं देते गाली तो आप लोग देंगे | सत्य सनातन वैदिक धरम की ओर लौट जाओ मेरे बंधू |

    1. रेहान खान भाई जान
      आप हमारे फेसबुक पेज पर चर्चा कर सकते हैं या फिर कुछ वात्सप्प समूह में आपको ऐड करवाने की कोशिश करूँगा जहा पर आप हमसे तो चर्चा नहीं कर सकते मगर उन समूह में धर्म सम्बन्धी चर्चा होती है | आप फेसबुक पर हमारे पेज पर भी चर्चा कर सकते हैं |
      धन्यवाद |

  36. Mukul Bhai Dhagatहजरत बाबा ताजुद्दीन औलिया बीसवीं सदी के न केवल चमत्कारिक बाबा थे बल्कि वे साम्प्रदायिक सौहार्द की ऐसी जीती-जागती मिसाल थे कि मुसलमान होते हुए भी लाखों हिंदू उनके मुरीद हैं। हजरत बाबा ताजुद्दीन का जन्म विदर्भ के नागपुर शहर से 15 कि.मी. दूर कामठी गांव में 21 जनवरी, 1861 के रोज हुआ था। उनके पिता सैयद बद्रूद्दीन फौज में सूबेदार थे व उनकी माता मरियम वी मद्रासी पलटन के सूबेदार मेजर शेख मीरांसाहब की पुत्री थीं।
    वे जन्म के समय से ही असाधारण थे। बाबा के पुरखे अरबस्तान के बाशिन्दे थे। इन्हीं में से उनके वालिद काम काज के लिए कामठी आये व नौकरी मिलने पर कामठी में ही बस गये। बाबा जब एक वर्ष के थे तभी उनके पिता का देहान्त हो गया था लेकिन 9 वर्ष की उम्र पूरी होते ही उनकी मां भी चल बसी। नानी ने ही इन्हें पाल पोसकर बड़ा किया व कामठी स्थित मदरसे में तालीम हेतु भेज दिया। उन दिनों कामठी में हजरत अब्दुल्ला शाह नामक पहुंचे हुए फकीर रहते थे। एक दिन जब वे मदरसे में आये और उनकी नजर इस बालक पर पड़ी तो उन्होंने तालीम देने वाले अध्यापक से कहा-’तू इसे क्या पढ़ाता है, ये तो अव्वल (पूर्व जन्म) से ही सब कुछ सीखकर आया है।Ó इतना कहकर शाह फकीर ने अपनी झोली से खुरमा निकाल कर आधा खुद चबाया और बचा हुआ बालक ताजुद्दीन के मुंह में रखकर कहा-कम खाओ, कम सोओ और कम बोलो व कुरान शरीफ पढ़ो। कहते हैं कि खुरमा खाते ही ताजुद्दीन में परिवर्तन आ गया, तीन दिनों तक उनकी आंखों से आंसू बहते रहे व उनकी दीन दुनिया ही बदल गई।
    सांसारिक चीजों में उनकी दिलचस्पी खत्म सी हो गई। जब वे 18 वर्ष के थे तब कामठी में बहने वाली कन्हान नदी में (सन् 1879-80) बाढ़ आ गई, जिससे उनके घर को काफी क्षति पहुंची। सन् 1881 में उनके मामा ने तालीम पूरी होने पर उन्हें नागपुर की रेजीमेंट नं. 13 में भर्ती करवा दिया। फौज में तीन साल बाद उन्हें सागर जाना पड़ा। मद्रासी पलटन के डेरे में पहुंचकर उनकी भेंट वहीं वीरान क्षेत्र में तशरीफ फरमा रहे संत हजरत दाऊद से हुई और वहीं दिन में नौकरी के बाद पूरी रात उनके पास भजन-बंदगी में गुजारने लगे। जब यह बात उनकी नानी को पता लगी कि फौज की नौकरी से जवान नाती गायब रहने लगा है तो वे पता लगाने सागर पहुंची। जब उन्होंने देखा कि ताजुद्दीन खुदा की बंदगी में रातें गुजारता है तो उन्होंने चैन की सांस ली। एक दिन ऐसा आया कि बाबा ताजुद्दीन अपनी अल-मस्त हालत में अपने फौजी अफसर के सामने जा धमके व उनके हाथ में नौकरी से इस्तीफा सौंप दिया और तुरन्त फौजी अहाते से बाहर चले गये। फौज से तुरन्त उनके घर सूचना भेजी गई। नानी ने फिर एक बार सागर आकर देखा तो ताजुद्दीन गली-कूचों की खाक छानते नजर आये। नानी को लगा कि वे पागल हो गए हैं और वे उन्हें पुन: कामठी ले आयी। कामठी में उन्हें डाक्टरों, हकीमों को दिखाया लेकिन वे उस अवस्था को प्राप्त कर चुके थे जहां आत्मा और परमात्मा की एकरूपता नजर आती थी। आम लोगों ने उन्हें पागल समझ लिया व बच्चों के झुण्ड उन पर पत्थर फेंकने लगे पर हुजूर ने कभी गुस्सा व उफ तक नहीं की। वे उल्टा उन पत्थरों को एकत्रित कर लेते थे। यदि कोई व्यक्ति बच्चों को रोकता तो वे उस आदमी से खफा हो जाते थे।
    कामठी में हुजूर ने कई चमत्कार किए, जिससे लोगों को उनकी आध्यात्मिक व रूहानी ताकत का अंदाजा लग गया व बाबा के पास कई दुखी अपना दर्द लेकर आते व उनकी कृपा दृष्टिï से अच्छे होने लगे। दिन ब दिन बाबा के चमत्कारों की बातें दूर-दूर तक फैलने लगीं व कुछ लोगों ने जब उनका नाजायज फायदा उठाने की सोची तो उन्होंने ऐलान कर दिया कि वे अब पागलखाने जायेंगे। उन्होंने अगले दिन कामठी के यूरोपियन क्लब के समक्ष नंगे बदन घूमना शुरू कर दिया तो अंग्रेज औरतों ने गुस्से में आकर पुलिस को बुला लिया जो उन्हें पकड़ कर ले गई जहां 26 अगस्त, 1892 को कामठी के कैन्टोनमेन्ट व जिला मजिस्ट्रेट ने उन्हें पागलखाने भेज दिया।
    पागलखाने में बंद किये जाने के उपरांत भी बाबा ताजुद्दीन शहर की सड़कों व गलियों में घूमते नजर आये व हजारों चमत्कार दिखाये। कई बड़े अफसरों ने भी बाबा को बाहर देखा तो उनके पैरों की जमीन खिसक गई। नागपुर से बड़े फौजी अफसर जब सच्चाई का पता लगाने पहुंचे तो डाक्टर ने कहा वे तो कमरे में बंद हैं। जब वे दोनों कमरे के पास पहुंचे तो देखा कि बाबा सींखचों में बंद व ध्यान की मुद्रा में ठीक वैसे ही बैठे दिखे जैसा कि कामठी बाजार के पेड़ों के नीचे बैठे थे। फौजी अफसर ने जब खेद व्यक्त किया तो बाबा ने कहा, ‘तुम अपना काम करते, हम अपना काम करतेÓ फिर क्या था, हर रविवार को वह अंग्रेज अफसर बाबा के दर्शनार्थ वहां आता। बाद में कामठी में बाबा के चमत्कारों की तो मानो वर्षा होने लगी। उन्होंने गले में साक्षात सांप लपेट कर अपने भक्तों को शिव दर्शन करवा दिये व गिर्ज

    1. “चमत्कारिक बाबा ”

      चमत्कार नाम की कोई वस्तू नहीं होती
      प्रकृति ने नियम विरुद्ध होने से ये ढकोसला ही है
      अनपढ़ लोग ही इनपर विश्वास करते हैं

  37. गिर्जी नामक बीमार वेश्या के मरने पर जब लोग उनसे यह पूछने आये कि बाबा उसे दफनायें या जलायें तो बाबा ने उसके लिए चाय भेजी और कहा उसे पिला दो। मृत गिर्जी ने बाबा के हाथ भेजी चाय पीने के लिए मुंह खोला और चाय पीते ही जी उठी व बाबा के दीदार किये।
    21 सितंबर, 1908 को नागपुर के महाराजा श्रीमंत राजा बहादुर राधोजी राव भौंसले की कोशिशों से बाबा पागलखाने से रिहा होकर राजा के शाही महल शकरदरा के सामने बनी ‘लालकोठी’ में ठहराये गये जहां स्वयं राजा सुबह-शाम उनको हाजरी देते थे व अपना सारा रिसाला, नौकर-चाकर उनकी खिदमत में रहते थे। बाबा हिंदू-मुस्लिम सभी शिष्यों के यहां रहे धीरे-धीरे बाबा की सेहत नासाज होने लगी व 66 वर्ष की उम्र में 18 अगस्त, 1925 को शकरहरा में उनकी आत्मा चोले को छोड़कर चल बसी।
    उनका अंतिम संस्कार ‘ताजबाद’ में किया गया व वहीं उनकी समाधि बनाई गई जो बाबा की पवित्र कब्र के रूप में जानी जाती है। ताजबाद में देशभर से हजारों मुरीद उनके दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन हुजूर के तीनों मुकामातों ताजबाद शरीफ, शकरदरा शरीफ व वाकी शरीफ (तपस्याभूमि) में जाकर उनका फैसला हासिल करते हैं। उस प्रकार अपनी जीवन लीला से हजरत बाबा ताजुद्दीन औलिया ने संसार को रूहानियत की नई रोशनी दी। बाबा की मजार पर प्रतिवर्ष उर्स मनाया जाता है। देश-विदेश के दर्शनाभिलाषी नागपुर आते हैं।

    1. “य पीने के लिए मुंह खोला और चाय पीते ही जी उठी”

      ये सब प्रकृति के नियमों के विरुद्ध होने से गलत है

  38. भाई एक दूसरे के धर्म की बुराई से क्या फायदा आपस में प्रेम बाँटोंं
    बहस करने से निफ़ाक ही फैलता है

  39. मुझे गर्व है की मै मुसलमान पैदा हुवा बोलो अमीन

    1. जब जनम हुए जनाब तब कलमा पढ़कर कान में क्यों सुनाया गया ?? कलमा पढ़ने की जरूरत क्या पड़ी ?? यह जानकारी देना ???

    1. shibu
      क्या आप मुस्लिम हो ?? क्या आप इस्लाम को मानते हो ??? यह बात समझ से बाहर है की खुद को मुस्लिम बोल रहे हो | क्या आप नबी को अनुसरण कर रहे हो ?? सवाल बहुत है जिसका जवाब देना होगा | चलो कुछ सवाल पूछता हु जिसका जवाब देना |
      १) कुरआन के किस सुरा आयत में यह लिखा है मीठी वाणी (Arya teri maa ka bhosda mooh ko bnd kr le bhadu ) ( गाली ) का प्रयोग करो ??? यह जानकारी देना ??? कहाँ कुरआन में ऐसा लिखा है ? यदि हो तो जवाब देना |
      २)इस तरह की संस्कार भी इस्लाम ही दे सकता है जिसमे वे गाली गलौज करे ?? और इस तरह बोलकर यह साबित कर रहे हो की इस्लाम में कोई संस्कार देने की सिख नहीं है | बस काफ़िरो को मारो | औरतो को मारो |
      ३) यह सच है या झूठ मालुम नहीं मगर एक बात नबी की सुनी थी जो यहाँ रख रहा हु | नबी मुहमद साहब रोज एक बूढ़ी औरत के घर होते हुए जाते थे और वह बूढ़ी औरत रोज नबी के शारीर पर कूड़ा दाल देती थी कुछ दिन तक उस औरत के घर से बाहर निकलकर नबी के शरीर पर कूड़ा नहीं फेका तो नबी उसके घर पर गए तो देखा की वह औरत बीमार थी जिसे उन्होंने देखभाल की | आप तो नबी की इन बातो को सिख लिए होते तो गाली गलौज ना करते | नबी तक को अनुसरण नहीं कर रहे हो तो मुस्लिम खुद को कैसे बोल रहे हो |
      ४) आप भारत के हो और आपके पूर्वज भी आर्य थे फिर अपने पूर्वजो को गाली देना कहाँ तक उचित है इस तरह बोलकर आप खुद अपने आप को गाली दे रहे हो |
      ५) यदि कोई व्यक्ति कुछ सामन दे और दूसरा व्यक्ति सामान ना ले तो वह पहला व्यक्ति के पास ही रह जाता है | और ठीक उसी प्रकार हम आपके मीठी वाणी को स्वीकार नहीं कर रहे यदि करते तो इसे कमेंट में शामिल ना करते | अब जब हमने सामिल किया और इसे मीठी वाणी को अस्वीकार कर दिया तो कौन वैसा हुवा यह बतलाने की जरूरत नहीं समझदारो के लिए बतलाने की जरूरत नहीं |
      धन्यवाद

      1. ईसलाम एक सच्चा धम॔ है और अगर कोई मुस्लिम गाली गलोज करता है या झुठ बोलता है तो वह उस व्यक्ति की गलती मानी जाएगी नाकि धम॔ की।

        1. भाई साहब धर्म क्या होता है यह आप बतलाओगे ??? और ये अल तकैया क्या होता है इस्लाम में यह बतलाने की कोशिश करना मेरे भाई जान | जवाब की प्रतीक्षा में | धन्यवाद |

    2. SHIBU,
      AAPKE MAATAA PITAA BHI AAP JAISAA NAALAAYAK AUR BESARM KO JANAM DEKAR BAHUT PACHHTAATE HONGE….AUR AAPKE GURU BHI SHARAM KE MAARE SIR JHUKAATE HUE KAHTE HONGE KI KIS GADHEKO SHIKSHAA DIYAA MAINE..?
      SAAYAD AAPKI GALATI NAHIN HAI YEH, AAPKI PARVARISH KI KAMIYAAN HAI…AAPME ACHCHHE SANSKAAR NAHIN DAALAA GAYAA…AGAR AAPKO CHHOTI UMAR ME HI DO-CHAAR CHAANTAA KISINE LAGAADIYAA HOTAA TO AAJ AISI SARMANAAK HARKAT KARNE KI HIMMAT NAHIN JUTAAPAATE…KHAIR, AAPKI ALLAH AAPKO ACHCHHI BUDDHI DE JO PAHALE SAYAD DENAA BHOLGAYAA….NAHIN TO JALDI IS YONI SE JALDI HI MUKTI DILAAYE…AAMIN….

  40. Asslamalyekum Waramatulahiwabarakatu bade bhai log….

    yahan pr mera koi maksad apko galt sabit krne ka nhi hai yahan bus mera yeh maksad hai ki mai apko haq ki baat btao aur ab samje meri baato ko……

    apne yeh post accha kiya hai but yaa toh apne quran ko sahi se padna nhi aur agar padha hai toh samja nhi kyoki quran mai apke saare jabab hai….

    mai apki tarah apko galt coded nhi kroga mere btya hua ab zarur cheq kreyega…..mai blind cheeze nhi krta….

    sabse badi apki galt family ki Islaam me sawal krna galt hai yaa investigation krna galt hai agar ab aisa sochte hai toh sabse phele apki yeh soch galt hai….
    aur jinn muslaman bhaiyo se ab puccte hai yaa toh unko sahi se knowledge nhi yaa phir wo samjte nhi….

    kyoki quran me Allah ne saaf saaf bhut jagah likha hai….
    [Chapter Number-49 Verse-6]
    Ki koi bhi cheez apke pass aaye ab phele khub takikat kre (Investigation) kre tab khud samje aur dusro ko samjeye

    toh sabse phele apki yeh galt family toh durr ho gae bade bhai….

    then ab apka next question ki Allah bhut reham dil hai insaaf krne wala hai….

    toh dunya me poor & rich peoples kyo hai, kisi ko koi disease aur koi bhut accha….

    aur islaam me punarjanam(Next Birth) nhi maante yeh apse kissne kaha….
    phir me wahi kahoga yaa toh apne quran nhi padha yaa ap sahi se samje nhi…..

    yeh apki dusri galt family ki Islaam punarjanam nhi maanta beshaq Islaam punarjanam ko maanta hai aur iss me koi shaq nhi hm muslims bhai bhi punarjanam maante hai aur jo punarjanam ko nhi maanta wo muslim ho hi nhi sakta…….

    Allah says in quran-
    [Chapter-2 Verse-28]
    [Chapter-67 Verse-2]
    Ki Allah hi hme life deta hai phir hme maarta hai aur phir hme zinda krta hai…(Life After Death)

    but hm musalman akirat pr maante hai ki Allah maarta hai aur akhirat mai zinda krega jiska mtlab punarjanam hai..

    pun mtlab=Next
    Janam mtlab=Birth
    Next Birth….

    iska mtlab mere bade bhai ab sahi se punarjanam ka mtlab nhi samje but dont worry bhai mai hu naa…..

    i coded Hindu Scriptures…
    (sayad apke site pr aaj tk ki kisi Knowledgeble Scholar ne visit nhi kiya becoz mai hr religion ka Scholar hu by heart…..)

    phele baat yeh hai ki Hindu word ek geographical defination hai….

    Hindu kehte hai wo logo ko jo Sindhu Nadi(River) ke pass rhete hai….

    kch historical khete yeh word hindu sabse phele Arabia ne istamal kiya…..
    kch historical yeh bhi khete hai ki yeh word hindu persian ne istamal kiya jb wo hindustan Himalayas ke aur se aaye….

    Jb Hm….
    [Encylopedia of Religion & Edhios Volume.6 Ref.699]
    padte hai toh pta chalta hai ki yeh lafz hindu koi Bharatiya kitaab main maujood nhi tha…
    jb tk muslims hindustan nhi aaye…

    Pandit Jawaharlal Nehru khete hai apni book mai..
    [The Discovery Of India Pages 74-75]
    ki yeh lafz hindu sabse pheli baar ek tantrik me aata hai 8th century me aur sabse phele jo istamal kiya gya wo….
    (Logo ke leye kiya gya tha)
    Dharam ke leye kabhi bhi istamal nhi kiya gya tha…
    Iska istamaal haal hi mai kiya jaa rha hai….

    toh isse hme pta chala ki yeh lafz Hindu Geographical Definiation hai….

    ab hm samjege ki Hinduism ya hindu dharm ke maane kya hai toh yeh lafz hindu hinduism se aata hai aur sabse pheli baar istemaal kiya tha angrezon ne (19th century) mai….

    aur Hinduism yeh lafz istmaal kiya tha iss Bharat desh mai jo log rhete hai unke dharmo ko btane ke leye ek lafz btane ke leye istamaal kiya gya tha Hinduism…..

    Aur jab hm padte hai
    [New Encyclopedia Britannica Vol.20 Ref.581]
    ki yeh lafz hinduism sabse pheli baar istamal kiya tha British Writer ne angreezo ne unn logo ke leye jinka dharam Hindustan mai iss bharat mai jo log rhete hai unke dharmo ko unke believe ko unke religions ko describe krne ke leye ek lafz istamaal kiya gya tha Hinduism…..

    Isleye hindu pandit hindu Hindu scholar yeh khete hai ki yeh lafz hinduism yaa hindu dharam yeh ek galt lafz(word) hai sahi word hona chaye Sanatandharm yaa vedicdharam kyoki wo khete hai ki hm veda mai maante hai aur Swami Vivekananda khete hai hai ki yeh lafz hindu galt istamaal hai, hona chaye vedantist….

    kyoki Swami Vivekananda khete hai ki hme maana chaye veda ko…

    isleye sahi word hai vedantist or vedicdharm yaa sanatandharam….

    toh bade bhai isse pta chala ki sabse ucchi kitaab Veda hai toh hme sabse phele veda pr maana chaye aur amal krna chaye…..

    toh ab hm baat kr rhe the punarjanam ki hm muslims bhai Akhirat ko punarjanam maante hai…..
    Akirat ka hindu dharm mai alag alag thinking hai akirat ke baare mai sabse aam thinking hai cycle of birth-death and rebirth also know as doctrine of rebirth isse hindi mai khete hai punarjanam sanskrit mai khete hai sansara english mai khete hai Transmigration of soul…

    isse khete hai doctrine of rebirth Transmigration of soul and also Reincarnation of Thorey….
    aam hindu samsara mai maante hai aur wo khete hai aur prove dete hai Bhagavad Gita aur Brihadaranyaka Upanishad ka….
    [Bhagavad Gita Ch-2 Shloka-22]
    [Brihadaranyaka Upanishad Part-4 Chapter-4 Mantra-3]
    jiss mai likha hai jiss trike se Insaan apne purane kapde nikalta hai aur nye kapde pehanta jai usse trike se aatma purane jism ko chhod kr nye jism mai jaati hai….

    aam hindu samajta hai samsara ke baare mai ki insaan paida hota hai phir marta hai phir paida hota hai phir marta hai phir paida hota hai phir marta hai yeh cycle hai birth death aur re-birth ki leken iska zikar kahi bhi veda mai nhi hai kahi bhi nhi hai…..

    veda mai punar janam ka zikar hai punar jaham ke maani punar mtlab next agla janm mtlab birth agla janm next birth punar janam ka sahi mtlab hai agla janm jiss pr islaam ko koi aitbaar nhi hm bhi isse maante hai leken wo punar janam nhi jo aam hindu maante hai samsara ke baare mai hm nhi maante cycle of birth….

    aur iska zikar kabhi bhi veda mai nhi hai…..

    ab baat krte hai ved me sabse ucchi kitaab Rigveda ki jisse hme maana chaye kyoki yeh sabse ucchi kitab hai aur iss mai kahi bhi samsara ke baare me zikar nhi hai iss me punarjanam ka zikar hai….

    toh In….
    [Rigveda Book 10 Hymn 16 Mantra 4-5]
    iss mai punarjanam ka zikar hai lekeh yeh cycle-birth death-rebirth ka zikar nhi hai toh jab hm veda padte hai toh hme pta chalta hai ki aur ek zindagi hai aur agar ap iss zindagi mai safal(Success) hoge yoh jaayege Swarg(Heaven) mai swarg ka zikar hai aman ki jagah jiske necche behegi Dhooth(Milk) ki nadiya sahed(Honey) ki nadiya wahan fall(Fruits) hoge aur aman hoga aur agar ap iss dunya mai safalta nhi paate(Unsuccess) hai toh ap jaate hai Nark mai nark ek saza ki jagah hai(Hell) jiska aksar zikar hai veda mai aag(Fire) jaisa…..

    ab bade bhai come to point toh dunya me poor & rich peoples kyo hai, kisi ko koi disease aur koi bhut accha…..

    ab ap yeh toh samaj gye hoge ki yeh life cycle ka zikar kahi bhi veda mai nhi hai…..

    toh ab aisa kyo hota hai ki koi poor toh koi rich kisi ko koi disease toh koi healthy iska jabab quran me hi likha hai bhut jagah bade bhai….

    In quran…..
    [Chapter-2 Verse-155]
    iss me likha hai ki Allah azmate hai apne bando ko jaan o maal se bhook se paiso se unke baccho se…..
    taaki wo test le sake iss life ka isleye kisi ko poor jagah paida krte hai toh kisi ko rich…

    hm samjte hai poor person bechara hai jabki uske leye assan hai jannat(sawrg) mai jaana compare to ek rich person kyoki usse zakat nhi dena hai garibo ko ab maanle wo bhut rich hai aur ussne sirp Rs.1000 diye toh ho sakta hai usse zakat mai 100/10 marks mille yaa phir 50 marks ya yeh bhi ho sakta 0 marks mille toh wahi agar koi poor person garib hai toh uske upar zakat maaf hai aur wo bina kch kre 100/100 millege marks…..

    wahi hijaab assan hai rich person ke leye aur poor person hai leye much difficult….

    aur agar kisi ko koi disease hai toh wo azmate hai unn bacccho ke maa baap ko kyoki aksar log khete hai isko yeh bimari ho gae isse accha baccha hi naa hota aur pta nhi kya kya khete hai…

    toh Allah test leta hai alag alag situation se kyoki agar aisa ho toh hme sukr krna chaye ki atlest Allah ne hme baccha diya ab hm dua aur ilaaj krege agar Allah ne chaha toh theek hoga aur agar nhi toh baccha toh direct heaven(Swarg ya jannat) mai jaaega bina koi prashani ke bus azmaish toh uss bacche ki maa baap ki hue….

    kyoki agar Allah sabko ek jaisa paida krta toh phir test kiss baat ka hota….
    koi bhi insaan jiske pass brain ho ya wo akalmand(Talented) ho toh wo aisa illogical questions nhi pucchega….

    toh based on condition sab kch balance bnaya hai Allah ne…
    isleye Allah khete hai……

    we come this world ones and ones is sufficient to the test….

    toh bade bhai ab samaj aaya apko ki Allah reham dil hai toh aisa kyo krte hai….
    Allah toh reham dil hai hi wo toh test lete hai apne bando ka…..

    aur ab ap quran ko side me kreye ap bus yeh btaye ki ap kitna apne dharm ko kitna maante hai ya follow krte hai apne Scripture ke hisaab se….

    kyoki mere bade bhai i challenged jitna ap apne Scripture ke baare mai jaante nhi usse kahi zada mai jaanta hu aur sirp hindu Scripture nhi aur bhi bhut se Scriptures……

    sabse pehli baat jb purti pooja maana hai toh aplog kyo krte hai…..
    agar ab krte hai toh iska mtlab ap apni hi dharm ko nhi maante yaa apni hi Scripture ko follow nhi krte….

    kyoki mere bade bhai…
    apke Scripture mai…..In
    [Chandogya Upanishad Ch-6 Section-2 Shloka-1]
    [Shvetashvatara Upanishad Ch-6 Shloka-9]
    [Shvetashvatara Upanishad Ch-4 Shloka-19]
    [Bhagvad Gita Ch-7 Shloka-20]
    [Bhagvad Gita Ch-10 Shloka-3]
    [Yajurveda Ch-32 Mantra-3]
    [Yajurveda Ch-40 Mantra-9]
    [Yajurveda Ch-40 Mantra-8]
    [Atharvaveda Book 20 Hym 58 Mnatra 3]
    [Rigveda Book 1 hym 164 Mantra-46]
    [Rigveda Book 10 hym 114 Mantra-3]

    (agar mai pura coded krne laga toh apki site chhoti pad jaaegi)
    toh iss mai likha hai ki purti pooja krna galt hai god ki koi image nhi koi maa nhi koi baap nhi aur koi thinking nhi ki wo kaisa hai….

    ab hm baat krte hai last messenger jinke baare mai apne bhut galt galt coded kiya hai edit krke…..
    mere bade bhai maine kaha naa mai Scholar hu…
    apko zarurat padti hogi coded krne ke leye books yaa internet ki muje sab by heart yaad hai…

    apne jo….
    (Muhammad Salalahualiwaslam)
    ke baare likha hai ki unhone qatl krke islaam falaya hai yeh apne ek aur naasamjo wali baat kri hai phele baat mere bade bhai…
    islaam kabhi bhi attack ke baare mai nhi kheta sirp self defence ke baare mai kheta hai wo bhi tab jb ap musibat mai ho uss halat mai self defence ke leye kaha hai….
    toh jo apne coded kiya hai wo edit krke apne likha hai aur jo sahi sahi coded hai wo apne pura nhi likha ki phele unn pr hamla hua then unhone qatl kiya mere bade bhai wo self defence tha…..
    aur islaam attack ke leye nhi kheta self defence ke leye kheta hai wo bhi tab jb ap pr musibat aaye…..

    aur jb attack maana hai toh mere bade bhai apko apka jabab mill hi gya hoga ki jab attack maana hai toh islaam qatl krke nhi fala….
    yeh baat toh koi mote dimaag se bhi samaj sakta hai i think aur jo unhone kiya wo sirp self defence tha aur jo ap galt coded krte hai wo ap dusro ko nhi balki khud ko bevakof bnate hai Allah ke nasdik…..

    aur yeh toh baat thi self defence ki ab agar mai apke Scriptures ke baare mai btane laga toh phir wahi baat hai naa ki naa hi mere pass itna time hai aur mera maksad sirp haq hi baat krne ka hai…..
    galt sabit krne ka nhi kyoki apke Scriptures mai jo Mahabharata mai attack ke baare mai hai wo btane laga toh problem ho jaaegi…..

    toh itna toh maine samaj liya ki yeh jo ap coded krte hai edit krke wo galt hai ab mai yeh nhi jaanta ki ab jaanpuch kr galt coded krte hai yaa phir ap wo books padte hai jo edited hai kyoki market mai bhut si fake edited books available hai….

    wo toh Allah jaanta hoga ki kaise ap kya krte hai kyoki agar ab jaanpuch kr krte hai toh ap logo ko nhi khud ko bevakof bnate hai….

    aur pta hai mere bade bhai mai sabse izzat se baat krta hu aur sabr se kaam krta hu kyoki yeh Allah ka hukum hai….

    kyoki in Quran Allah says…..
    [Chapter-103 verse 1-3]
    ki Allah khete hai sirp wahi log jannat(Swarg) mai jaaeyege jo sabr kre aur dusro ko haq ki baat bteye jo sahi hai aur dusro ko sabr ki taraf bulaye….

    isleye mere bade bhai
    apke hindu Scriptures mai bhi last messenger (Muhammad Salalahualiwaslam)

    ka zikar hai ki wo last messenger hai….

    [Bhavishya Purana Parv 3 Khand 3 Addyay 3 Shloka 5-8]
    [Bhavishya Purana Parv 3 Khand 3 Addyay 3 Shloka 18-28]
    [Bhavishya Purana Parv 3 Khand 1 Addyay 3 Shloka 21-23 ]
    [Atharvaveda Book 20 Hymn 127 Mantra 1-14]

    Iss mai likha hua hai antim(Last) Rishi aayege jinka naam Narashansa hoga….

    Narashansa mtlab…..
    Nara=Aadmi
    Shansa=Prashansa

    Prashnasa ka mtlab wo jo tareef ke layak ho…

    ab Narashansa ka mtlab wo Aadmi jo tareef ke layak ho jiska (Arbic) mai translation hai Muhammad…..

    Iska mtlab antim rishi(Last Messenger) Muhammad aayege aur hme unhi ke btye hue raaste pr chalna hoga……

    ab baat krte hai…..
    [Atharvaveda Book 20 Hymn 127 Mantra-2]
    iss mai likha hua hai ki antim rishi aayege utt se(Camel se)…..

    ab hm jaante hai ki koi bhi Brahman camel nhi chaleyega kyo….kyoki likha hua hai….
    [Manusmriti Ch-11 Shloka 202]
    ki koi bhi Brahman kabhi bhi utt (Camel) nhi chaleyega…

    toh isse hme pta chala ki wo antim avtar(Last Messenger) Brahman nhi ho sakte…..

    aur iska zikar bhut bhut jagah hai agar ap padte hai…
    [Atharvaveda Book 20 Hymn 21 Mantra 6]
    [Atharvaveda Book 20 Hym 21 Mnatra 7]
    [Rigveda Book 1 Hymn 53 Mantra 9]

    Iss ka zikar samaveda mai bhi kch iss tarah hai ki
    [Samaveda agni Mantra 64]
    iss mai likha hai ki antim rishi maa ka dhood nhi peeyege….

    aur hm jaante hai Muhammad Salalahualiwaslam ne maa ka dhood nhi piya tha….

    ab hm baat krte hai Ahmad ka ahmad ka mtlab wo aadmi jo bagwan ki treef kre khuda ki tareef kre usse khete hai Ahmad aur hme pta hai ki Muhammad Salalahualiwaslam ka dusra naam Ahmad tha….

    aur iski Bhavishyavani bhut jagah hai…
    agar ab padte hai….
    [Samavdea Uthararehika Mantra 1500]
    [Samaveda Indra Ch-2 Mantra 152]
    [Yajurveda Ch-31 Mantra-18]
    [Rigveda Book-8 Hym 6 Mantra 10]
    [Atharvaveda Book 8 Hymn 5 Mantra 16]
    [Atharvaveda Book 20 Hymn 126 Mantra 14]
    [Rigveda Book 1 Hymn 13 Mantra 3]
    [Rigveda Book 1 Hymn 13 Mantra 9]
    [Rigveda Book 1 Hymn 106 Mantra 4]

    Bhut jagah hai mere bade bhai agar mai pura coded krne laga toh apki site overload ho kr crash ho jaaegi….

    toh iss mai likha hai ki yeh last avtar hai(Last Messenger) hai aur jab yeh aayege toh hme inhi ko follow krna hai aur inhi ke upar hai Quran…..

    aur apne jo Aurto ke baare mai likha hai ki unn pr zulm hota hai islaam mai toh apki yeh tisri(3rd) sabse badi galt family hai islaam mai Aurto ka darja bhut upar diya hai mardo se bhi zada agar ab sahi se padhe toh…..

    aur jiss trike se islaam mai Aurto ko parda btya gya hai usse bhut zada sanatandharm mai btya gya hai yaani ki hindu Scriptures mai aur agar mai wo sab btane laga aur coded krne laga toh kaha naa apki site crash ho jaaegi bade bhai ki uss mai kitna hijaab ke baare mai likha hua hai….
    leken chaleye apke leye ek mantra bta deta hu kyoki ab bade bhai hai…
    [Rigveda Book 8 Hymn 33 Mantra 19]
    mai likha hai ki ohhh Aurat Brahman ne tuje Aurat bnaya tu apni nazar necche rak aur apna pura jism dhak(Cover) kr rak kch bhi naa dekhe…

    aur jaisa apne btya ki islaam mai Aurto ko marna btya hai yeh bhi apki galt family me se ek hai islaam kabhi bhi aisa nhi kaha hai…….
    tab kaha hai jb Aurat behayai kre apke saath aur apki baat naa maane aur yeh saari baat apke Scriptures mai kahi zada hai….
    phir wahi baat aa jaati site crash aur kya hai naa mere pass naasamjo ke leye itna time nhi hai bade bhai……

    leken mai yeh bhi jaanta hu ki mai apko kitna bhi samja lo ab iman nhi laaeyege aur naa samjege….

    kyoki Rigveda mai likha hai…
    [Rigveda Book 10 Hymn 71 Mantra 4]
    iss mai likha hua hai wo blind hai wo naa samjte hai aur naa hi dekte hai aur naa sunnte hai aur wo kabhi bhi nhi samjege…..

    kyoki Allah bhi khete hai In quran
    [Chapter 2 Verse-18]
    jo log gumrah hue wo iman kabhi nhi laaeyege wo kabhi bhi nhi samje aur unn pr hmne mohar lagadi hai phir ab chahe koi unko kitna bhi samjale wo nhi samjege….

    apko haq ki baat apne dharmo ke logo ko btani chaye jo apke Scriptures ke hisaab se nhi chal rhe aur naa follow kr rhe hai unko sahu raaste pr apko laana chaye…..

    leken ap yahan ulta ulti sidhe coded krke haq ki baat nhi kr rhe aur logo ko gumrah kr rhe hai….

    mai apki tarah nhi hu mai apne Scriptures ke baare mai dusro ko btata hu apne muslims bhaiyo ko sirp apke dharm mai galt family nhi yahan islaam mai bhi log galt cheeze krte hai jaise mazaar pr jaana jabki mazaar galt hai aur bhi bhut saari galt cheeze krte hai leken mai haq ki baat btata hu naa ki ussre dharmo me guss kr ulta sidha coded….
    leken ap yahi krte hai sayad ap apne Scriptures ko follow nhi krte isleye ap aisa krte hai….

    aur jahan tk baat hai apke Hindu Scriptures ki yaa Christianity Scriptures ki yaa Buddhism Scriptures ki toh….
    According to Quran Allah ne hr century mai ek Allah ki kitaab beji taaki log sahi raaste pr aaye but yeh sab kitaabe sirp uss waqt uss time unn logo ke leye tha….

    Allah ne Quran mai kaha ki yeh Quran sirp muslims ke leye nhi hai yeh whole humanity ke leye hai…..
    aur last messenger (Muhammad Salalahualiwaslam) sirp muslims ke leye nhi balki whole Humanity ke leye hai…..

    Aur yeh baat saare dharmo(Religions) mai hai…..
    Hinduism, Christianity, Judaism, Buddhism, Sikhism etc….
    God ki koi image nhi koi maa baap nhi koi thinking nhi…..
    aur last messenger (Muhammad Salalahualiwaslam) hai……
    ab agar mai apko sab coded krne laga toh naa mere pass time rhega aur apki site overload hokr crash ho jaaegi…..
    ab khud study krege mere bade bhai……

    aur Quran Sciencetifically proved hai for according to Nasa se…..
    aur baaki Scriptures according to Nasa bhut errors aur illogical hai ap bade bhai normal fakes site pr visit mt kreye kyoki mai yahan baat kr rha hu According to Nasa Quran mai 0.001% bhi koi error nhi nikal paaya sab kch logical proved hai…..
    abhi quran 80% mai 100% proved hai…..
    bacche hue 20% naa galt hai aur naa sahi hai but inshallah wo bhi proved hoga ek naa ek din abhi nhi toh 10 years baad warna 50 years warna 500 years baad but hoga ab khud meri baato mai mt aayega ap khud investigation kreye ki apke Scriptures mai kitna error hai aur baaki Scriptures bhi dekye ki kitna error hai…..

    Quran mai Allah ne yeh 1438years phele hi bta diya…

    ki dunya gol he mtlab ki round…

    Allah ne quran me phele hi bta diya ki sun move kr rha he…ruka hua nhi he…..

    Allah ne phele hi big band theory bta di ki yeh universe unhone sirp ek dot ke wispot se bnayi…

    Allah ne yeh phele hi bta diya ki unhone 2 oceans bnaye he ek kadwa aur ek meetha paani ka aur yeh ek dusre se millte nhi…

    Allah ne yeh bhi quran me btaya he ki yeh dunya 6 days
    me bnayi hai unhone….

    Allah ne quran me kaha he ki zammen aur asaam ek tha toh unhone kaha ki alag ho jaao chahe tm chaho yaa naa chaho…toh zammen aur asssmaan alag alag ho gae…

    Allah ne phele hi quran me bta diya ki universe expand (bada) ho rha he…

    Allah ne yeh phele hi bta diya ki sun ki khud ki roosni he aur moon reflect kr rha he…

    Allah ne yeh phlele hi bta diya ki mountain move krte he…
    wo ruke hue nhi he jaisa tm samajte ho…

    Allah ne phele hi quran me bta diya tha ki water cycle ke baare me wo bhi itni details me full method…..

    Allah ne phele hi bta diya tha ki iss dunya ke assmaan me…
    7 assmaan bneye he mtlab ki 7 layers…

    aur yeh baat ap bhi jaante hai ki 30feet upar uddne wala plane 1584 me bna tha yaani 500years phele aur yeh baat allah ne 1438 years phele hi bta diya…

    wo bhi sirp 50feet wala wood ka plane…

    aur Allah ne assam me yeh btaya ki 7 layers he…

    Allah ne btaya ki unhone aise layer bna rakhe jo insaan ko baachti he sun rays se…

    Allah ne sperm ke baare me phele hi fertilizer ka full method bta diya…..
    unhone btaya ki sperm me jo sabse best species hoti he wo fertilize krti he egg ko….

    Allah ne yeh phele h bta diya ki hr jaandar cheez paani mai bni hai…
    jo ki recently Nasa ne proved kiya hai….

    to socheye yeh sab ab ki science jo prove kr rhe he…

    aur allah ne 1438years phele bta diya quran me…

    yahan tk 500yeras phle dunya samjti thi ki dunya falt he….

    wahi 1438 yeras phele allah ne sab bta diya……

    aur yeh jo maine apko abhi btaya wo sayad abhi tk prove ho chuka 50% bhi nhi hoga isse zada Nasa proved kr chuki hai……
    kyoki agar mai sab btane laga toh wahi baat hai naa time hai aur site crash ho jaaegi data overloded…..

    aur abhi wo sab bhi allah bta chuke he jo abbi prove hi nhi hua…
    prove kr rhi he….

    but baaki Scriptures kch cheeze Sciencetifically hai aur zadatar unsciencetifically hai…..
    yeh ap khud chez kr lejeyega….

    ab ap kahege ki agar saari kitaab(Scriptures)
    god ki hai toh phir kaise error ho sakta hai toh mai yeh kahoga ki god ne error nhi kiya wo jo kitaab edit hue hai century to century toh isleye kch cheeze sahi hai Sciencetifically aur zadatar galt saare Scriptures mai accept Quran kyoki quran 1438 years se aisa ka aise hi hai aur quran tabse le kr abhi tk mahfooz hai kyoki iski zimadari Allah ne khud li hai….
    Quran mai Allah khe rhe hai ki Assmani Kitaab Quran ki fizat(Security) mere zimme(Responsibility) hai….
    isleye quran ek aise kitaab jo aaj tk aise hi hai aur tab se 1438 toh millons of logo ko yaad hai by heart………
    isleye naa yeh koi change kr sakta naa kr sakega……

    God(Khuda) ne insaan ko apne ibadat ke leye bnaya hai mere bade bhai aur sabko ek hi maksad ke leye beja hai hm sab alag nhi hai…..

    aur dunya mai sirp ek hi dharm mai jo ki last islaam hai…..

    baaki dharm agar ap khete bhi hai toh wo uss time unn logo uss waqt ke leye tha…..
    leken phir bhi mai kitna bhi kch khelo apko koi farq nhi padega aur naa ab samjege kyoki Allah me bhut jagah kaha hai quran mai jo log gumrah hue unko hm aur gumarah krte hai….

    toh isse pta chala mai kitna bhi samja lo ap nhi samjege…

    aur maine yeh sab apko samjane ke leye nhi likha mere bade bhai logo ko jo ab glat galt edit krke coded kr rhe hai isleye maine yeh post kiya ab ap khege ki mai galt hu ap sahi hai……
    toh iss pr mai yeh kahoga ki ap bhi acche tarah jaante hai ki kon sahi hai aur kon galt baaki Allah dekne aur hisaab lene wala hai aur jahan tk baat hai logo ki toh unnse bhi meri guzarish hai bhaiyo ab zarur iss pr investigation kreyega kyoki bade bhai edit krke coded kr rhe hai……

    aur haan iske baad ab kch bhi likhe kch bhi jabab ho apka mere iss post ke baaf…
    wo naa muje dekna hai naa jaana hai….
    kyoki aise sites pr mai dubara visit nhi krta kabhi kyoki isse koi fayda nhi kyoki wo samjege nhi kabhi bhi……

    aur isleye mai apni knowledge aise jagah barbaad nhi krta jahan log samjate nhi….

    toh dubara toh mai visit krne wala nhi…..
    baaki ab ap samjege toh hai nhi wo bhi muje pta hai…..
    ulta mere iss post ke baad wapis wahi purana wrong wrong coded krke wahi shuru ho jaaege aur khud ko bevakof bnayege….
    but reality bevakof toh ap khud bn rhe hai….
    toh chaleye phir Allah apko sahi rasta dikheye itna toh khe hi sakta hu apke leye bade bhai……
    kyoki reham toh Allah krega nhi unn pr jo gumrah hue….

    aur yeh baat apko abhi pta nhi chalegi balki maarne ke baad (after died) pta chalega bus meri baat yaad rakheyega iss zindagi mai bhi aur iss zindagi ke baad bhi……
    aur haan investigation zarur kreyega jo kch maine btaya besaq investigation krna galt nhi mere bade bhai….hahahahaha
    chalta hu khyal rakna….
    aur haan mai aise sites pr dubara visit nhi krta……

    Allah HafiZzz……

    1. “toh dunya me poor & rich peoples kyo hai, kisi ko koi disease aur koi bhut accha….”

      ye to aapko batana chahiye bicharon ko bina kisee wajah ke allah miyan ne ye saza kyon ki

        1. Insan duniya me ek imtehaan k liye bhej gya h Quran yahi khta h …aur hr insan ka imtehaan alag alag h …Allah ki yahi power h k usne itne log banaye aur sabhi ki story alag alag banai…ek baar jiska imtehaan pura ho gya vo dobara iss duniya me vapas nhi ayega

          1. khan sahab

            jab sabhi ka janam ek baar hota hai to allah ke aadhaar par to???? kisi ko kis aadhaar par janam ke saath maut kar deta hai kis kaaran kisi ko manushy rup me kisi ko jaanwar rup me diya?? kya aisa karna dusare par anyay nahi huwa allah kaa…. allah kis kaaran kisi ko 2 saal me maut kar deta hai kisi ko 2 din me ? yah kaisa nyay allah kaa aur kaisa imtihaan allah kaa….

        1. जनाब आप जन्नत की सैर लेख आप पढ़ो | जन्नत की सैर हो जायेगी आपको | साईट पर खोजे जन्नत कि सैर | धन्यवाद

    2. OM…
      Farhan Khan Bhai, Namaste..
      ITNI GABARGANJ BAATEN KYUN LIKHAA? CHALO EK CHHOTI SI SAWAAL KAA JAWAAF DEDO:-
      ALLAH NE JO IS DUNIYAA RACHI HAI, KIS CHIIJ SE, KAB AUR KYUN RACHI?
      AAP KI SO CALLED AASMAANI KITAAB KI HAWAALE SE BATAANAA JI..
      SURAJ SAAM KO KAHAAN JAATAA HAI AUR SUBHA KAHAAN SE AATAA HAI?
      INSAAN KO BUKHAAR KAISE AATA HAI?
      VIJYAAN AUR TARK SAMMAT TATHAA QURAN KI PRAMAAN SAHIT JAWAAF DENAA JI…
      PRATIKSHAA RAHEGI..
      DHANYAWAAD..

  41. Are bhai agar Allah ne sabko Amir (rich) bana dia hota to fir sansar ka system kaise chalta jab sab Amir hote to hammali kaon Karta, hard work kaon Karta, kheti ka kaam kaon Karta, aaj aap Ki office me Jo clerk hain Jo worker hain wo aap kahan se late . Jab sab ameer hi hote to koi Kisi Ki sunta keya?waise ek bat bolun bhai maine sabhi posts aur comments pdhe duniya Ki koi bhi bat koi bhi cheez kitni bhi sachchi aur achchi ho usme nuks aur aib nikala ja sakta hai aur jiska nazria nukta chini(cavilling)karne wala hota uska kaam hi yahi hota hai lekin Jo akalmand aur samajhdar hota hai wo bina Kisi bhed bhaw k,bina Kisi hatdharmi ke insaf ka nazariya apna kar positive aur negative donon baton ko samne rakh kar Jo achi bat hoti hai wahi leta hai

    1. क्यों अल्लाह सिस्टम चलाने में असमर्थ था क्या ?
      क्या वह ऐसा सिस्टम डिजाईन नहेने कर सकता था ?
      ये तो अल्लाह कि अल्पज्ञता ही हुए
      जैसे वो नियम बदल कर दीखता रहता है 🙂

  42. सभी एक पुस्तक है जिसका नाम the people vs mohammad by jk shiendlin. उसे सभी पढ़े

    1. vishu ji
      filhaal is pustak ke baare me jaankaari nahi is kaaran is baare me koi charchaa nahi kar sakta kyunki is pustak ko nahi parha hai. pdf ho to link dein fir is par charchaa ki jaayegi.

  43. OM..
    NAMASTE.
    The followers of islam, please read this Hadith, is it scientific? justify: –
    Sahih Bukhari
    5.338:
    Narrated Ibn `Abbas: Abu Talha, a companion of Allah’s Apostle and one of those who fought at Badr together with Allah’s Apostle told me that Allah’s Apostle said. “Angels do not enter a house in which there is a dog or a picture” He meant the images of creatures that have souls.
    what kind of beliefs is this?
    I request you, please return to Vedic way..

  44. ऊपर वाली पोस्ट से शुरुआत की और अंत तक सभी कमेंट पढ़ता चला गया सार यह कि सभी के दिमाग में सदियों से धार्मिक कचरा इक्टठा हो रहा है और अब बदबू आपके कमेंस्टस के रूप में निकल रही है
    पहले अपने धर्म को समझै फिर दूसरों के धर्म को फिर सारी बुराईयाँ जानकर इस धार्मिक मूर्खता से दूर हो जाएँ
    जहाँ तक बात अच्छाईयाँ ढूंढने की है तो वो सिर्फ इंसान होकर ढूँढी जा सकतीं है
    हिन्दु और मुसलमान होकर नहीं.

    1. mo zeeshaan bhai jaan
      aap aaye hamare page fb page par aapko refernce ke saath jawab diya jaayega
      http://www.facebook.com/Aryamantavya/
      aap avidence me belve karte ho aur ham bhi waisa hi avidence me believe karte hain. debate karna hai to…
      waise aap jaise gyaniyo se gyan prapt karne ki ikshaa rahega. aapkaa intjaar rahegaa. dhanywaad…..
      aaye waha par rahul jhaa ji se aap debate karein aur bhi kai hain jinse debate kar sakte hai with reference.
      aapka intjaar me ki aap debate karoge…
      dhanywaad…

  45. Bhai lok sab apne dharam shastra khol lo or sbse phle zuban se dharmo ko galat mat bolo dharam ek hai ek narr or ek naari jisey mere prabhu ne bnaya parameshwar uska koi roop nahi a logo ne usko murtio me badal dia a usne hme insaan bnaya or hmne usko jaanwaro ki murtia bnakr poojte a
    Khol lo sb apne apne quran or geeta or sab ved
    Koi b itna bta do kya kisi ne maret huo ko zinda kia siwae jesus k
    Kya kisi ne langdo or andho ko changaa kia sirf jesus ne
    Kya koi god ne aakr apna introduction dia ki mn swarg se aya hu sirf jesus ne
    Kya kisi ne jesus ki tra 2 rotia 5000 aadmio ko khilai
    Kya kisi ne apne dushmano ko maaf kia sirf jesus ne bola jo muje maar re hai inko maaf krta hu ye nahi jaante ye kya krr re a
    Jo marey huo ko zinda kr skta tha wo kch b krr skta tha maar b skta tha
    Kya kisi ne hmare lia jaaan di sbne apne mhlo k lia patnio k lia jaan samrajya k lia ladai ki mgr jaaan nai di
    Kya god ko hathyaaaro ki need hai nahi god ek aaag hai jiske saamne papi khud jal jayega hmari aaqud ni hum god ko bnaye god hmare dil me hai not in gold or soil or trees
    Andhvishwaas se bahr aao bhaioo god ka mandir hum hai isko saaf rkho logo ne dharam abi bnaye a dharam nahi karam sath jaate hai
    Mera prabhi jesus mrne k 3rd day zinda ho gy
    Unho bola gya ki apni nishaani chod k jao unhone bola ki nishani wo chodkr gy hote a jinka astitav mitaya ja sake mn hmesha apke sath hu bs vishwas krna tu mahima dekhega

    1. aapka jusus aapke yahova se bhi bada hai kya ???? yah batlana ji…??? jab yahova ko bhavishy ki gyaan nahi to jesus ko kaise gyaan??? jesus ke bich ke 10 15 saal kaa jivan ki jaankaari bible me kyu nahi??? yah bhi batlana ki jab jesus sab kuch kar sakta thaa to wah apane aap ko shuli par latakne se kyu nahi rok paayaa ???/ aur kisi aur logo ko murkh banana ji ji jesus ne kisi ko jinda kar diya… aisa to puraan me bhi varnan hai… sawal to bahut hain magar abhi itne hi sawal kaa jawab dena ji. baad me aapse aage ki shankaa karunga. aapke sawal ki jawab ki pratiksha me. dhanywaad

  46. frnds mai kahna chahti hu jaisi baate inhone isme likhi h isse kch v zahir nhi hota … Islam me srf sahi or galat ki sikh milti h…. ye islam srf musalmano k liye hi nhi balki sav logo k liye h… agr ap Qur’an ko padhe hote to aisi baate nhi kahte.. Bs guzarish h ap sav ki islam ko glt sabit krne ki koshish na kre …

    1. rukaiya ji…
      aap ek baar bina purvagrah kaa quraan hadees parhe fir aap ved parhe … fir aap khud islaam ko chhodkar sanatan vedic dharam apana lenge… aap chaho to satyarth prakash parh sakti ho….aao saty sanatan vedic dharam ki aor… dhanywaad

    1. raashid raja bhai jaan
      quraan me aurat ko kheti kyu bolaa gaya hai???? kaafiro ko maaro kyu bolaa gaya hai ??? kaafiro ko allah ne tab banaya hi kyu thaa… kahin kahin aurt ko mard==2 aurat aur kahi kahin mard== 4 aurat kyu bola gaya hai hai quraan me. sawal to bahut uth sakte hain quran se… hame majbur naa kare pol khol karne ko… dhanywaad

  47. Muslim brothar

    Aap apne Dharm ki khub tarif karo magar kisi bhi Dharm ko bura mat kaho.

    Farma ne Aalishan ( Hazrat Mohhammad Mustufa sallalaho Alayhi wasallam ).

    I love Islam
    I love muslim
    I love Indiyan.

    1. azim mirja bhai
      islaam me kaha likhaa hai indian se pyaar karo??? islaam to maarkaata ki baat karta hai… aur isi kaaran koi vande matram nahi bolna chahta muslim??? bahut se bharat maata ki jay nahi bolna chahte… iske baare me aapke vichaar ki pratikshaa rahegi… quran khud bolta hai hathyaar ke bal par islaam me kaafiro ko rupantrit karo…..waise aapki baato se lagta hai ki aap ek achhe insaan hain ji…

    1. kya jaankaari milegi bible parhne se ??? plz hame bhi jaankaari dena…. yah jaankaari milegi ki apni beti se sex karo ??? beti apane baap se sex kare??? sasur apane bahu se sex kare ?? aur bahu apane sasur se sex kare ??? khub madura piyo ??? sawal kai bante hain ji bible se magar utna detail me baat nahi karenge

  48. M yakeen k saath kh skta hu ki tum muslmaa nhi ho.. ir agr muslmaan ho to ISLAM KO ache s nhi read kiya…….over hona sb ko hi nuksaan deta h ushi trhe tum bhi apna s over soch rhe ho jis s tumhe sachai or buraau m koi frk nazar nhi aata h.

  49. Sahi mai mai bhi ghoot rha hu muslalman ho ker kyuki

    Hamare quran mai bola gya h ki
    Suhar (pig) haraam hai islam mai
    To allah ne usse sansaar mai banaya hi kyu

    Ager woh chahte to pig nhi banate

    Please tell me ghar wapsi kaise karu
    Please please tell me now

    1. आप अपने सहर के आर्य समाज से संपर्क करे |
      धन्यवाद

  50. Amit Roy sahab Maine aapke sare comments pdhe aap suljhe dimaag k insaan hai aapko knowledge bhut hai apne vedo ki mai ye bta doo ki mujhe Hindu religion se related koi bhi knowledge nhi hai to mai uspr discuss nhi krunga mai bs itna khna chahta hoo ki humare Islam me respect Karna sikhaya gaya hai fir chahe wo koi bhi religion ka ho aur humko ye bhi sikhaya gaya hai ki kisi k bhi Dharam KO bura na kaho sbse achcha vyavhar Karo aur Apne paigambar k btaye hue marg pe chalo aur ibadat Karo ji to mai aapse ye khna chahta hoo ki jess ki aapne pichle comments me bola hai ki aapne Quran nhi padhi hai to mai ye chahta hoo ki aap ek dafa Quran padhe aur use smjhkr dekhe thik usi tarah jse ki aap exam k phle dhyan se books pdhte hai to wha par aapko ye khi nhi milega ki Islam khta hai ki APAs me apni bivi KO badlo agar aap APAs me bivi KO badalne ka matlab halala se le rhe ho to wo alag chiz hai Islam me halala ka asal matlab mai aapko btaya hoo halala tn hota hai jb ek shaohar apni bivi KO talak de chuka ho aur usse dubara shadi Karna chahe to halala anivarya ho jata hai halala isliye rkha gya hai qki Allah rabbiul izzat ne talak ko bhut galat maana hai agar koi insaan frji talak deta hai to halala uske liye ek saza se mam nhi ki uski bivi kisi dusre k sath raat guzare aur halala ka asli rule ye hai ki agar koi talak k baad usi ldki se dubara shadi krenga to halala hoga halala k liye kisi dusre shakhs se uski bivi KO nikah Karna pdega ab aap meri baat prr dhyan dijiyega agar jis shakhs se nikah kiya gya hai wo mar Jaye ya koi aur badi mjburi se use talak Dena PD Jaye tabhi wo ldki apne phle shohar se nikah kr skti hai. Prr present time me real halala rule follow nhi ho RHA hai sb apne fayde k liye apni chla the hai to aap ye btaiye yaha prr Islam galat hai ya usko shi se na manne wale galat hai aap khud smjh jayenge jse ki aapne khud bola ki aapke puraan me kch galat likha hai yani aap khud mangte hai ki aapki holy book hi wrong hai prr mai ye khta hoo ki meri Quran sachchi book hai prr wrong hmlog hai Jo usi thik dhang se follow nhi karte aur aapne bola ki aapke Dharam me pathar ki pooja Karna galat hai fir bhi hoti hai wse hi humare Islam me shirk Karna haraam hai lkn fir bhi mazari log jakr maths tek dete hai to aap btaiye ki galat kon hai Jo murti ki puja krte hai wo ya aapke granth aur Jo mazar prr maths tekte hai wo log ya Islam aur Quran.. Isiliye mai aapse itna khna chahta hoo ki aap Jo bhi bole humko bole Islam ko manner walo KO bole qki hmlog thik tarah se follow kha kr rhe hai lekin Quran aur Islam KO na bole qki is mamle me sb Dharam aur sb Holly books shi hai aur shayad aapke bhi ved me aisa likha hoga ki dusro k religion ki respect Karo…Bhai respect karne aur manne me antar hota hai mai sb religion ki respect karta hoo aur mai aapse ye nhi kh RHA hoo ki aap Muslim bn jai mai bs yeh bta rha hoo ki fault humare religion me nhi hum me hai . okk Bhai namaste

    1. ppepoowoweppowep भाई जान
      कुरान यह सिखाता है काफ़िरो को मारो | क्या यह कोई ग्रन्थ में सिखाना चाहिए | काफिर किसे बोला जाता है इसे बतलाना जी | अपने मजहब के अलावा दुसरे मजहब के लोगो से दोस्ती मत करो | भाई पूर्वाग्रह से और अन्धविश्वास से उपर उठ कर देखो और पढ़ो कुरान और वेद | आप वेद की शरण में आ जाओगे | और एक बात हदीस कुरान से अच्छा पुराण है मगर हमे पूरण भी स्वीकार नहीं क्यूंकि हदीस कुरान बाइबिल की तरह ही पुराण है | आओ वेद की शरण में | आप अछे इंसान हो | आप दोनों को बिना पूर्वाग्रह और अंधविश्वास से ऊपर उठकर देखो आप खुद वेद की शरण में आ जाओगे | एक बार कोशिश करके देखना जी |

      1. Kaafir wo hote hai jo anek khuda ko mante hai..kisi ko v bhagwan maan lete hai..is liye Islam me kaha gya behtar hoga ki tmlog ese log ke sangat me na raho..kyu ki kahi tmhara v imaan ni khrb ho jaye…bhai Islam ko smjhne ki koshis kro.

        1. भाई जान जो केवल एक इश्वर को मानता है और पैगम्बर को नहीं मानता हो ? उसे क्या बोलोगे ? इस बात को बतलाना ?

  51. Aap ne sb glt smjha hai Islam ke bare me jese apka ek sawal tha duniya me sb kast jhel rha..bure log ache se rah rhe to sun ligye allah beshk unko dekh rhe hai unhe is dunya me allah ne freedom diya hai ki wo jo kre unka hisaab dena hai..

    1. भाई जान क्या गलत समझा है इस्लाम के बारे में ? जो भी बोला जाता है वह प्रमाण देकर कुरान हदीस से | फिर गलत कैसे भाई जान

  52. इस बात से समझ जाओ की इस्लाम 1400 साल पहले आया था और सनातन धर्म करोड़ो साल पहले और जन्म से सब हिन्दू ही होते हे जन्म के बाद उसको धर्म का चस्मा पहना दिया जाता हे और उसका माइंड वाश किया जाता हे

  53. hindu bhai aap ka pehla sawaal k aap ne kaha qayamat kaa waqt jaa hoo hain,yeh aap ko kisne kaha,quran me Allah ne bataya hain k yeh raaz hain.dusra sawaal islam me 4 biwiyoo k bare me,yeh aap par depend kartha hain k aap k choice par hyn nirbahar hain,aap ek hyn kar sakte hain,aap ki marji.lekin india me kya aap ne kabhi deakha hain k koi mkuslim char shaadi kiya hain.kya ram k peata dashrath ki 3 biwiya nahi thy kya yeh unfair nahy hain.kya apne amel soname kaa blog padha ilm e moekkilat k bare me.aap quran ka sahy translation padha wo bhy tafseer(detail) k sath.wo bhy ek paedaeshy wali jinka naam imam ahmed raza hain. quran ka naam hain kanjul iman kalamur rehman hain.yeh copy aap hasil kare hindi me.apka sawaal tha aurato k kheaty k bare me.kya jab aurat k sath sex hota hain toh usme beaj padtha hain toh bacha paeda hota hain,kya yeh kheaty jaise beaj bona nahy hain.ek ne leakha dog k bare- jis ghar me dog hote hain uss ghar me farishte nahy aate,iss liye kaha k dog ko dur rakho.kya aap nahy janthe k gumbaje khijra(hara gumbad) ka saya nahy hain,yeh main blog me mere dal dunga.agar aap quran k bare me kehna chahthe hain toh refrence k sath kahiye with verse no and sureh name.kya aap ko0 patha hain k amliya k kitab shabistane raza ya aur kitab ki taqat sey aap kabr me azab kaise kya chal rahan hain deakh sakte hain.aur ek wabsite me wajifa hain jiske jariye aap 7 asmaan deakh sakte hain.aap k ungliyo ka naksha agar deakhe toh Allah ka naam deakhtah hain.yeh allh ka mohar hain,k yeh mera bandha hain,kya aap aese molvi batho me aan gaye joo jyaada nahy janthe.quran-tmhara kabro me se uthna aesa hyn hain jaise humne murda jameen ko barish k jariye hara bhara kar diya..agar aap ko hidden knowledge ki talaash hain toh aap kisi naami sufi se bait hoo jao,aas paas talash karo, har math mano,aur waha unke sath 15 din spend karoo.dil koo chain mileaga..apne sufi sey pucho k mujhhe dil ka chain chahiye phirt deakho aap ki spiritual knowledge.shart yeh hain k apni spiritual knowledge kisi ko mat bataye warna spiritual knowledge band hoo jaega.jab dil me khushiyan dakhil hoo jae toh uski jindagi ameroo sey kamm nahy hoty.tab wo apne rab ko pehchan jaega k wo kitna powerfull hain.bandha(yani main ek) ek sufi hun.agar bandha spiritual knowledge me hoshyaar hai toh kahy bhy moekkil k jariye 5 sec me ek country sey dusrey country,ek gav see dusre gav pal bhar me travel kar saktha hain,woo bhy raat mein.(kisy k saath discuss kiye, yaa raaz khola toh kaam band hoo jaenge.Allah ko raaz pasand hain.hint agar aap Allah ka naam yaa lateefu k bare me jan lenge,moekkil(farishta) k bare me jaan lenge toh aap chand din me crorepaty hoojaengey.lekin islam me daulath, ko importence nahy hain, isiliye, aap poors ki madath karenge.isiliye .toh daulath nahy poors only.a mokil can travel in air from one place to another with in 5sec.

  54. hindu bhai aap ka pehla sawaal k aap ne kaha qayamat kaa waqt hoo chuka hain(past) hain,yeh aap ko kisne kaha,quran me Allah ne bataya hain k yeh raaz hain.dusra sawaal islam me 4 biwiyoo k bare me,yeh aap par depend kartha hain k aap k choice par hyn nirbahar hain,aap ek hyn kar sakte hain,aap ki marji.lekin india me kya aap ne kabhi deakha hain k koi mkuslim char shaadi kiya hain.kya ram k peata dashrath ki 3 biwiya nahi thy kya yeh unfair nahy hain.kya apne amel soname kaa blog padha ilm e moekkilat k bare me.aap quran ka sahy translation padha wo bhy tafseer(detail) k sath.wo bhy ek paedaeshy wali jinka naam imam ahmed raza hain. quran ka naam hain kanjul iman kalamur rehman hain.yeh copy aap hasil kare hindi me.apka sawaal tha aurato k kheaty k bare me.kya jab aurat k sath sex hota hain toh usme beaj padtha hain toh bacha paeda hota hain,kya yeh kheaty jaise beaj bona nahy hain.ek ne leakha dog k bare- jis ghar me dog hote hain uss ghar me farishte nahy aate,iss liye kaha k dog ko dur rakho.kya aap nahy janthe k gumbaje khijra(hara gumbad) ka saya nahy hain,yeh main blog me mere dal dunga.agar aap quran k bare me kehna chahthe hain toh refrence k sath kahiye with verse no and sureh name.kya aap ko0 patha hain k amliya k kitab shabistane raza ya aur kitab ki taqat sey aap kabr me azab kaise kya chal rahan hain deakh sakte hain.aur ek wabsite me wajifa hain jiske jariye aap 7 asmaan deakh sakte hain.aap k ungliyo ka naksha agar deakhe toh Allah ka naam deakhtah hain.yeh allh ka mohar hain,k yeh mera bandha hain,kya aap aese molvi batho me aan gaye joo jyaada nahy janthe.quran-tmhara kabro me se uthna aesa hyn hain jaise humne murda jameen ko barish k jariye hara bhara kar diya..agar aap ko hidden knowledge ki talaash hain toh aap kisi naami sufi se bait hoo jao,aas paas talash karo, har math mano,aur waha unke sath 15 din spend karoo.dil koo chain mileaga..apne sufi sey pucho k mujhhe dil ka chain chahiye phirt deakho aap ki spiritual knowledge.shart yeh hain k apni spiritual knowledge kisi ko mat bataye warna spiritual knowledge band hoo jaega.jab dil me khushiyan dakhil hoo jae toh uski jindagi ameroo sey kamm nahy hoty.tab wo apne rab ko pehchan jaega k wo kitna powerfull hain.bandha(yani main ek) ek sufi hun.agar bandha spiritual knowledge me hoshyaar hai toh kahy bhy moekkil k jariye 5 sec me ek country sey dusrey country,ek gav see dusre gav pal bhar me travel kar saktha hain,woo bhy raat mein.(kisy k saath discuss kiye, yaa raaz khola toh kaam band hoo jaenge.Allah ko raaz pasand hain.hint agar aap Allah ka naam yaa lateefu k bare me jan lenge,moekkil(farishta) k bare me jaan lenge toh aap chand din me crorepaty hoojaengey.lekin islam me daulath, ko importence nahy hain, isiliye, aap poors ki madath karenge.isiliye .toh daulath nahy poors only.a mokil can travel in air from one place to another with in 5sec.

    1. bade hee ajeeb baat hai ki aap allah par vishwas karte hein
      allah to ktabon ko apnee kah kar unho hee badalta raha hai

      antim kitab kah kar usaki hee ayaton ko hee nirast karta rahta hai

  55. ek garib ek maldar ek insan ek janwar.ans.kyunki allah ka naam fashioner hain toh har tarah ki makhlukh paeda ki hai ,agar anaaj paeda nahy karthya toh tumhara paet kaise bhartha?koi aadmi janm sey hyn kasht bhograha hain ,koi anand utha rahan hain.ans-kya aap chahthe hain k aapko baith k khilaye, agar jawani me mehnat karoge thoanand bhy mileaga.arm dushkarm k bare me.punar janm.ans-kya aap ko accha lage ga k punar janm me aap pig the,yaa gadha,YAA BANDAR.quran- ek hyn bar aoge aur tumhare karm farishta, likhta rehta hain.chaudhvi shatabdi me sansar mitt jaega(kahan likhan hain.apko proof nahy mileaga.)ek aadmiu char patni rakh sakta hain toh aurath kyu nahy-ans agar ek biwi ko baccha ho jae toh keh sakty hain k yeh tera baap hain.wahi agar ek aurath k chyar aadmiu hoo toh wo kiss koo kaheagi k tera baap kaun hain..ek purush k muqable doo auratho ki gawaie kyu.ans-agar ek aurath bhul jae toh dusri gawaie de sakte hain.80 saal kaa buddha 18 saal ki ladkians- kaha likhan hain-proof nahy milega..jannath me muslim mahilao ko kya mileaga.woo sattar hazaar huuro ki rani banayi jaengi,kyA YEH KAM NAHY.aap ko kisne kaha 14 sadi me allah qayamath ka wada kiya hain.talwar k bakl par.jannath k loabh se.ANS-agar samne wala jung karne aye toh aap jang nahy karenge.bandukh k badle badukh.Quran.agar quran aad mi kaa leakha hain toh uss jaise ek ayat(sentence laa k deakhao,agar naa laa sako toh yeh samajh lo k yeh allah k ilm sey najil hui hai-QURAN)..sirf abu lahab inkari hua badme pura hashmi pariwar islam laya,dada abu talib bhy sirf, ek bewakuf ki wajah sey aap islam kabool nahy karooge.AAP BILAAL KO NAHY JANTHE.aurangjaeb ek muslim raja tha jo bewakuf tha,aap akbar aur shahjan ko kyu yaad nahy karte.

    1. Akbar kaunsaa theek tha
      wo bhee islma ko manta tha

      Aurangjeb ke bhai ke bare men aapka kya kahta hai aapka

  56. Ab suno jo bhaiya poochh rahe the ki sabhi bhagwan ka avtaar india me hi kyon hua tha bhai kabhi Rome ,Greece , Egypt, libia, ki histoary pado unme tumhe pata chalega ki ishwar india ke alaba aur bhi jagah avtarit hue the.
    Aur rahi baat bhagwan Ram ki to rawan ko yeh bardan tha ki use kebal vahi manushy maar sakta hai jo agni baan chala sakta ho agar bhagwan apni maryada tod dete to kabhi v rawan ko nahi maar paate.

    Aur ma seeta ki pariksha lene ke peechhe ek hi uddheshya tha ki bhavishya me koi v unke charitra par ungli na utha sake.

    Aur kuchh poochhna ho to mujhe email kare me aapko santusht karunga my email : bhoopendra6equj5@gmail.com

  57. Mujhe koi muslim bhai ek baat batayega ki aapka koi v massanger aurat kyon nahi hui. Jab ki hindu dharm me bahut se deviyon ka varnan hai aur unhe bahut se adhikaar hai jaise wo gyan, shakti aur dhan ki svamini hai. Aur kai rakshason ko mara hai. Koi pegambar aurat kyon nahi hui. ???????

  58. Hahahahah….. Sab bewkoof 😉 aapas me lad rahe faltu me. Itni chhoti c simple c Baat h samajh lo sirf insaan bheja upar wale ne. Dharm or jaatiyaan sab insaan ki Bnai hui h. Quran, geeta upar se likh kr nhi i. Aapas me ladne se ek dusre k dharm ki burai na karke aap khud theek Raho, Achcha karo, bura hone se roko, ek ho kar raho. Aapka pehla dharm insaniyat hai. Insaan ban k aaye ho, aapas me lad kar kutta-billi mat bano plz. Respect karo thodi. 🙂

  59. इन कुँवर रफत साहब का ईमेल मिलेगा इस्लाम पर इनसे जरा चर्चा करनी है वैसे तो मेरे नाम से समाजियों के भूत भागते हैं ।मैं कभी नास्तिक था विज्ञान का जबरदस्त फैन मैने आर्य समाज के सिद्धांतो को तब भी पढ़ा मगर नकार दिया कुछ सच्चाई मिली ही नही।

    1. सनातन धर्म में जिसे सच्चाई नही मिली उसे कही ओर से क्या मिला होगा समझ सकता हु

      सवाल बताओ क्या है बाकी बाते कोई मतलब की नही

  60. ‘ब्रह्मा’ ने किया था अपनी ही पुत्री ‘सरस्वती’ से विवाह
    ————————————————————–
    हिन्दू धर्म के दो ग्रंथों ‘सरस्वती पुराण’ और ‘मत्स्य पुराण’ में सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा का अपनी ही बेटी सरस्वती से विवाह करने का प्रसंग है जिसके फलस्वरूप इस धरती के प्रथम मानव ‘मनु’ का जन्म हुआ। लेकिन ब्रह्मा ने अपनी ही पुत्री से विवाह जैसा निन्दनीय काम क्यों किया इसका जवाब जानने के लिए पढ़ते है पुराणों में वर्णित कथा। ‘सरस्वती पुराण’ और ‘मत्स्य पुराण’ में वर्णित कथाओं में कुछ भिन्नता है, इसलिए हम आपको दोनों कथाओं से अवगत करा रहे है।
    सरस्वती पुराण में वर्णित कथा-
    ———————————————————
    सरस्वती पुराण के अनुसार सृष्टि की रचना करते समय ब्रह्मा ने सीधे अपने वीर्य से सरस्वती को जन्म दिया था। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि सरस्वती की कोई मां नहीं केवल पिता, ब्रह्मा थे।
    सरस्वती को विद्या की देवी कहा जाता है, लेकिन विद्या की यह देवी बेहद खूबसूरत और आकर्षक थीं कि स्वयं ब्रह्मा भी सरस्वती के आकर्षण से खुद को बचाकर नहीं रख पाए और उन्हें अपनी अर्धांगिनी बनाने पर विचार करने लगे।
    सरस्वती ने अपने पिता की इस मनोभावना को भांपकर उनसे बचने के लिए चारो दिशाओं में छिपने का प्रयत्न किया लेकिन उनका हर प्रयत्न बेकार साबित हुआ। इसलिए विवश होकर उन्हें अपने पिता के साथ विवाह करना पड़ा।
    ब्रह्मा और सरस्वती करीब 100 वर्षों तक एक जंगल में पति-पत्नी की तरह रहे। इन दोनों का एक पुत्र भी हुआ जिसका नाम रखा गया था स्वयंभु मनु।
    मत्स्य पुराण में वर्णित कथा-
    ———————————————
    इसके उलट मत्स्य पुराण के अनुसार ब्रह्मा के पांच सिर थे। कहा जाता है जब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की तो वह इस समस्त ब्रह्मांड में अकेले थे। ऐसे में उन्होंने अपने मुख से सरस्वती, सान्ध्य, ब्राह्मी को उत्पन्न किया।
    ब्रह्मा अपनी ही बनाई हुई रचना, सरवस्ती के प्रति आकर्षित होने लगे और लगातार उन पर अपनी दृष्टि डाले रखते थे। ब्रह्मा की दृष्टि से बचने के लिए सरस्वती चारो दिशाओं में छिपती रहीं लेकिन वह उनसे नहीं बच पाईं।
    इसलिय सरस्वती आकाश में जाकर छिप गईं लेकिन अपने पांचवें सिर से ब्रह्मा ने उन्हें आकाश में भी खोज निकाला और उनसे सृष्टि की रचना में सहयोग करने का निवेदन किया।
    सरस्वती से विवाह करने के पश्चात सर्वप्रथम मनु का जन्म हुआ। ब्रह्मा और सरस्वती की यह संतान मनु को पृथ्वी पर जन्म लेने वाला पहला मानव कहा जाता है। इसके अलावा मनु को वेदों, सनातन धर्म और संस्कृत समेत समस्त भाषाओं का जनक भी कहा जाता है।
    ==================================

    1. aisa lagta hai ye kisee musalman ne puran likha hoga jo usmen aisee baten likhee hein

      ham in granthon ko naheen mante

  61. महान हिंदू धर्म जहाँ देवी- देवताओं का चरित्रा ऐसा हो.

    इससे पहले पोस्ट किया था की भगवान ने ही अपनी पुत्री विवाह किया था वही किस प्रकार भगवान इंद्रा अपनी वासना मिटाने की लिए एक विवाहित स्त्री से अपना मूह काला किया.
    बात तब की है जब श्रिष्टि के विकास में रत थे ब्रह्मा, उसी समय उन्होंने अपनी मानस पुत्री अहिल्या की रचना थी जिसको ये वार था की वो ताउम्र सोलह वर्ष की युवती ही रहेगी. ऐसे इंद्र और देवता उसे अपना बनाने केलिए तड़पने लगे, तब ब्रह्मा ने एक स्पर्धा रखी जिसमे गौतम ऋषि जीते और उनका विवाह अहिल्या से हुआ.
    लेकिन इंद्र की वासना शांत न हुई वो इस टाक में रहता था की कब अहिल्या का अंगीकार करूँ और अपनी शरीर की आग को बुझौ, ऐसे में उसे एक दिन मौका मिला. गौतम ऋषि सुबह ब्रह्म मुहूर्त में मुर्गे की बांग पे उठते नदी में स्नान करते और फिर अपने दैनिक कर्मो में लगते थे.
    इसी गतिविधि को समझ कर इंद्र ने रात में दो बजे ही मुर्गा बांग दी और गौतम ऋषि नदी में स्नान करने निकल गए, तब इंद्र ने अपनी माया से गौतम का रूप धरा और अहिल्या से जम के अपना मुंह काला किया. इंद्र इतना मस्त हो गया की उसे समय का आभास न रहा पर जब मुर्गे ने बांग दी तो वो भगा, लेकिन उसे जाते समय अपने ही रूप में गौतम ने देख लिया और पूरी बात समझ गए.
    उन्होंने अपनी पत्नी अहिल्या को इंद्र को न पहचानने के लिए पत्थर की चट्टान बनने का श्राप दिया .

    अब आप मुझे बताएँ इसमें अहिल्या की क्या ग़लती थी, इंद्रा मारे मज़ा और .श्राप पाए अहिल्या. ये है हिंदू धर्म में औरतों की दशा.

    1. aisa lagta hai ye kisee musalman ne puran likha hoga jo usmen aisee baten likhee hein

      ham in granthon ko naheen mante

  62. तुम्हारे मनाने और न मानने से कुछ नही होगा
    क्यो की हिन्दू ध की सभी धर्म ग्रंथ किसी ब्यक्ति द्वारा लिखी गई है जो केवल लालपनिक और मनोरंजनयुक्त है लेकिन क़ुरआन आसमानी है जो किसी इंसान के द्वारा नही लिखा गया है

    1. quran aasmani hai

      kaun leke aaya tha quran ko aasman se

      quran men khud itane parivaartan ho gaye hein

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