मृत्यु के बाद आत्मा दूसरा शरीर कितने दिनों के अन्दर धारण करता है? आचार्य सोमदेव जी परोपकारिणी सभा

प्रश्न हैमृत्यु के बाद आत्मा दूसरा शरीर कितने दिनों के अन्दर धारण करता है? किन-किन योनियों में प्रवेश करता है? क्या मनुष्य की आत्मा पशु-पक्षियों की योनियों में जन्म लेने के बाद फिर लौट के मनुष्य योनियों में बनने का कितना समय लगता है? आत्मा माता-पिता के द्वारा गर्भधारण करने से शरीर धारण करता है यह मालूम है लेकिन आधुनिक पद्धतियों के द्वारा टेस्ट ट्यूब बेबी, सरोगसि पद्धति, गर्भधारण पद्धति, स्पर्म बैंकिंग पद्धति आदि में आत्मा उतने दिनों तक स्टोर किया जाता है क्या? यह सारा विवरण परोपकारी में बताने का कष्ट करें।

– एन. रणवीर, नलगोंडा, तेलंगाना

समाधान १ मृत्यु के  बाद आत्मा कब शरीर धारण करता है, इसका ठीक-ठीक ज्ञान तो परमेश्वर को है। किन्तु जैसा कुछ ज्ञान हमें शास्त्रों से प्राप्त होता है वैसा यहाँ लिखते हैं। बृहदारण्यक-उपनिषद् में मृत्यु व अन्य शरीर धारण करने का वर्णन मिलता है। वर्तमान शरीर को छोड़कर अन्य शरीर प्राप्ति में कितना समय लगता है, इस विषय में उपनिषद् ने कहा-

तद्यथा तृणजलायुका तृणस्यान्तं गत्वाऽन्यमाक्रममाक्रम्यात्मानम्

उपसँ्हरत्येवमेवायमात्मेदं शरीरं निहत्याऽविद्यां गमयित्वाऽन्यमाक्रममाक्रम्य् आत्मानमुपसंहरति।।

– बृ. ४.४.३

जैसे तृण जलायुका (सुंडी=कोई कीड़ा विशेष) तिनके के अन्त पर पहुँच कर, दूसरे तिनके को सहारे के लिए पकड़ लेती है अथवा पकड़ कर अपने आपको खींच लेती है, इसी प्रकार यह आत्मा इस शरीररूपी तिनके को परे फेंक कर अविद्या को दूर कर, दूसरे शरीर रूपी तिनके का सहारा लेकर अपने आपको खींच लेता है। यहाँ उपनिषद् संकेत कर रहा है कि मृत्यु के बाद दूसरा शरीर प्राप्त होने में इतना ही समय लगता है, जितना कि एक कीड़ा एक तिनके से दूसरे तिनके पर जाता है अर्थात् दूसरा शरीर प्राप्त होने में कुछ ही क्षण लगते हैं, कुछ ही क्षणों में आत्मा दूसरे शरीर में प्रवेश कर जाता है। आपने पूछा है- आत्मा कितने दिनों में दूसरा शरीर धारण कर लेता है, यहाँ शास्त्र दिनों की बात नहीं कर रहा कुछ क्षण की ही बात कह रहा है।

मृत्यु के विषय में उपनिषद् ने कुछ विस्तार से बताया है, उसका भी हम यहाँ वर्णन करते हैं-

स यत्रायमात्माऽबल्यं न्येत्यसंमोहमिव न्येत्यथैनमेते प्राणा अभिसमायन्ति स एतास्तेजोमात्राः समभ्याददानो हृदयमेवान्ववक्रामति स यत्रैष चाक्षुषः पुरुषः पराङ् पर्यावर्ततेऽथारूपज्ञो भवति।।

– बृ. उ.४.४.१

अर्थात् जब मनुष्य अन्त समय में निर्बलता से मूर्छित-सा हो जाता है, तब आत्मा की चेतना शक्ति जो समस्त बाहर और भीतर की इन्द्रियों में फैली हुई रहती है, उसे सिकोड़ती हुई हृदय में पहुँचती है, जहाँ वह उसकी समस्त शक्ति इकट्ठी हो जाती है। इन शक्तियों के सिकोड़ लेने का इन्द्रियों पर क्या प्रभाव पड़ता है, इसका वर्णन करते हैं कि जब आँख से वह चेतनामय शक्ति जिसे यहाँ पर चाक्षुष पुरुष कहा है, वह निकल जाती तब आँखें ज्योति रहित हो जाती है और मनुष्य उस मृत्यु समय किसी को देखने अथवा पहचानने में अयोग्य हो जाता है।

एकीभवति न पश्यतीत्याहुरेकी भवति, न जिघ्रतीत्याहुरेकी भवति, न रसयत इत्याहुरेकी भवति, न वदतीत्याहुरेकी भवति, न शृणोतीत्याहुरेकी भवति, न मनुत इत्याहुरेकी भवति, न स्पृशतीत्याहुरेकी भवति, न विजानातीत्याहुस्तस्य हैतस्य हृदयस्याग्रं प्रद्योतते तेन प्रद्योतेनैष आत्मा निष्क्रामति चक्षुष्टो वा मूर्ध्नो वाऽन्येभ्यो वा शरीरदेशेभ्यस्तमुत्क्रामन्तं प्राणोऽनूत्क्रामति प्राणमनूत्क्रामन्तं सर्वे प्राणा अनूत्क्रामन्ति सविज्ञानो भवति, सविज्ञानमेवान्ववक्रामति तं विद्याकर्मणी समन्वारभेते पूर्वप्रज्ञा च।।

– बृ.उ. ४.४.२

अर्थात् जब वह चेतनामय शक्ति आँख, नाक,जिह्वा, वाणी, श्रोत्र, मन और त्वचा आदि से निकलकर आत्मा में समाविष्ट हो जाती है, तो ऐसे मरने वाले व्यक्ति के पास बैठे हुए लोग कहते हैं कि अब वह यह नहीं देखता, नहीं सूँघता इत्यादि। इस प्रकार इन समस्त शक्तियों को लेकर यह जीव हृदय में पहुँचता है और जब हृदय को छोड़ना चाहता है तो आत्मा की ज्योति से हृदय का अग्रभाग प्रकाशित हो उठता है। तब हृदय से भी उस ज्योति चेतना की शक्ति को लेकर, उसके साथ हृदय से निकल जाता है। हृदय से निकलकर वह जीवन शरीर के किस भाग में से निकला करता है, इस सम्बन्ध में कहते है कि वह आँख, मूर्धा अथवा शरीर के अन्य भागों-कान, नाक और मुँह आदि किसी एक स्थान से निकला करता है। इस प्रकार शरीर से निकलने वाले जीव के साथ प्राण और समस्त इन्द्रियाँ भी निकल जाया करती हैं। जीव मरते समय ‘सविज्ञान’ हो जाता है अर्थात् जीवन का सारा खेल इसके सामने आ जाता है। इसप्रकार निकलने वाले जीव के साथ उसका उपार्जित ज्ञान, उसके किये कर्म और पिछले जन्मों के संस्कार, वासना और स्मृति जाया करती है।

इस प्रकार से उपनिषद् ने मृत्यु का वर्णन किया है। अर्थात् जिस शरीर में जीव रह रहा था उस शरीर से पृथक् होना मृत्यु है। उस मृत्यु समय में जीव के साथ उसका सूक्ष्म शरीर भी रहता, सूक्ष्म शरीर भी निकलता है।

आपने पूछा किन-किन योनियों में प्रवेश करता है, इसका उत्तर  है जिन-जिन योनियों के कर्म जीव के साथ होते हैं उन-उन योनियों में जीव जाता है। यह वैदिक सिद्धान्त है, यही सिद्धान्त युक्ति तर्क से भी सिद्ध है। इस वेद, शास्त्र, युक्ति, तर्क से सिद्ध सिद्धान्त को भारत में एक सम्प्रदाय रूप में उभर रहा समूह, जो दिखने में हिन्दू किन्तु आदतों से ईसाई, वेदशास्त्र, इतिहास का घोर शत्रु ब्रह्माकुमारी नाम का संगठन है। वह इस शास्त्र प्रतिपादित सिद्धान्त को न मान यह कहता है कि मनुष्य की आत्मा सदा मनुष्य का ही जन्म लेता है, इसी प्रकार अन्य का आत्मा अन्य शरीर में जन्म लेता है। ये ब्रह्माकुमारी समूह यह कहते हुए पूरे कर्म फल सिद्धान्त को ताक पर रख देता है। यह भूल जाता है कि जिसने घोर पाप कर्म किये हैं वह इन पाप कर्मों का फल इस मनुष्य शरीर में भोग ही नहीं सकता, इन पाप कर्मों को भोगने के लिए जीव को अन्य शरीरों में जाना पड़ता है। वेद कहता है-

असूर्या नाम ते लोका अन्धेन तमसावृताः।

ताँऽस्ते प्रेत्यापि गच्छन्ति ये के चात्महनो जनाः।।

– यजु. ४०.३

इस मन्त्र का भाव यही है कि जो आत्मघाती=घोर पाप कर्म करने वाले जन है वे मरकर घोर अन्धकार युक्त=दुःखयुक्त तिर्यक योनियों को प्राप्त होते हैं। ऐसे-ऐसे वेद के अनेकों मन्त्र हैं जो इस प्रकार के कर्मफल को दर्शाते हैं। किन्तु इन ब्रह्माकुमारी वालों को वेद शास्त्र से कोई लेना-देना नहीं है। ये तो अपनी निराधार काल्पनिक वाग्जाल व भौतिक ऐश्वर्य के द्वारा भोले लोगों को अपने जाल में फँसा अपनी संख्या बढ़ाने में लगे हैं। अस्तु।

61 thoughts on “मृत्यु के बाद आत्मा दूसरा शरीर कितने दिनों के अन्दर धारण करता है? आचार्य सोमदेव जी परोपकारिणी सभा”

  1. lekh bhut sundr hai, prashno ke uttar bilkul shi trike se diye gye hai…….lekh ke liye bhut-bhut dhanyzwad aacharya shri ka…

  2. मैने एक आर्य विद्वान से सुना है कि वेदों के अनुसार शरीर से निकलने के बाद आत्मा अंतरिक्ष में जाता है फिर मेघों में,वर्षा में,मिट्टी में,अन्न में,औषधियों में फिर गर्भ में जाता है इसमें कितना समय लगेगा कोई नहीं जानता परमात्मा के सिवा।आपने जो कहा है वह उपनिषदों के अनुसार है।उन विद्वान का कहना है कि यहाँ वेदों की बात सत्य मानी जाएगी क्योंकि वेद ज्यादा प्रमाणिक हैं ।
    अब आपका क्या कहना है कृपया समाधान करिए,मुझे ई-मेल से।

    1. meri ma ka dehant ho gaya…mai har roj ma k charn chhuta tha…us k bad mujhe kisi bhi bat ka bhay nahi hota tha….ma chale gai..aisa kuch sambhav hai ki mai use mil saku…chahe vo kisi bhi rup me ho..

      1. दीपक जी बड़ा दुख हुआ यह जानकर की आपकी माता जी का देहांत हो गया

        आपकी भावनाएं में समझ सकता हु
        यह तो सम्भव नही की आप उनसे मिल सके यह आप और में जानते है

        आप अपनी माँ को महसूस करने के लिए एक कार्य कर सकते है वह है परोपकार का आप वे सभी परोपकार के कार्य कीजिये जो आपकी माता जी किया करती थी और अपने कार्य में व्यस्त रहिये जिससे आप निराश ना हो कभी

        धन्यवाद

  3. According to YajurVeda Adhyaay-39, 6th Mantra, The soul takes minimum 12 days to get another body. However maximum time of rebirth may differ from person to person.

    [Refer to Maharshi Dayanand’s Bhashya on YajurVeda.]

    VEDA is Swatah Pramaan
    Everything else is Partah Pramaan.

  4. मैने एक आर्य विद्वान से सुना है कि वेदों के अनुसार शरीर से निकलने के बाद आत्मा अंतरिक्ष में जाता है फिर मेघों में,वर्षा में,मिट्टी में,अन्न में,औषधियों में फिर गर्भ में जाता है इसमें कितना समय लगेगा कोई नहीं जानता परमात्मा के सिवा।आपने जो कहा है वह उपनिषदों के अनुसार है।उन विद्वान का कहना है कि यहाँ वेदों की बात सत्य मानी जाएगी क्योंकि वेद ज्यादा प्रमाणिक हैं ।
    अब आपका क्या कहना है कृपया समाधान करिए,मुझे ई-मेल से।

  5. सविता प्रथमे ……….देवा द्वादषे।।
    यजुर्वेद39 मन्त्र 6
    मृत्यु के पश्चात आत्मा बारह दिन वायु अग्नि पृथ्वी वसंत बिजुली आदि उत्तम गुणों को प्राप्त कर कुछ दिन विचरण कर तब दूसरा शरीर धारण करता है।
    शंका समाधान अतिसिघ्र करें।
    नमस्ते जी

  6. It is not logical that a soul takes 12 days to take another body.prove it…….if can’t then it will show that that mantras is wrong and if that mantras is wrong then vedas is not correct and so it is not holy book.But i have confidence that it will be proven by any one ……….thankyou

  7. जब उपनिषद में कुछ सेकण्ड्स में दूसरा जन्म बताया है
    जबकि यजुर्वेद 39:5-7 में 12 दिन का समय दूसरा जन्म में बताया गया है। और वेद स्वतः प्रमाण है।

    फिर आर्य समाज इस झूठे बृहदआरण्यक उपनिषद को मान्यता क्यों देता है। या तो कुछ सेकण्ड्स की बात सही है या 12 दिन की।

    कृपया शंका समाधान बिना गाली गलोच के करे।

    1. Namste ji

      Yahan Asabhya bhasha ka prayog naheen kiya jata

      ved hee swatah pramaan hai
      Arya smaj ved ko hee antim praman manta hai

      1. I have come here as you people give logical answers. so can you prove logically why a soul take 12 days to take another body.what does it does in that 12 days?

        1. Dear

          We do not have right now facility for “Shanka Samadhan” It will be better if you discuss with a prominent Vedic Scholar

          1. O site owner thou must have to prove it in near time by help of pandits.it is important as it raises doubt on correctness of upnishad or vedas.so thee must…….

            1. Dear Sarwesh ji

              Everything written in the Ved is true
              If you are eager to know the truth you may please contact ‘paropkarini Sabha” Ajmer
              Details can be fetched from internet related to Sabha

  8. यजुर्वेद ३९.६ में ऋषि दयानंद १३ वें दिन आत्मा का दुसरा शरीर धारण करना लिखते हैं

  9. जब वेद ही स्वतः प्रमाण है और वेद 12 दिन में पुनः जन्म बताता है

    व्रहदरण्यक उपनिषद में कुछ सेकण्ड्स में दूसरा जन्म बताया है
    जबकि यजुर्वेद 39:5-7 में 12 दिन का समय दूसरा जन्म
    में बताया गया है (ऋषि दयानंद भाष्यअनुसार)

    और वेद स्वतः प्रमाण है।

    फिर आर्य समाज इस झूठे वेद विरुद्ध
    बृहदआरण्यक उपनिषद को
    मान्यता क्यों देता है?

    या तो कुछ सेकण्ड्स की
    बात सही है या 12 दिन की।

    यह सिद्ध हुआ कि 12 दिन की बात सत्य है।

    फिर इस साईट पर इस झूठे लेख का क्या औचित्य है यह समझाने का कष्ट करे।

    इस लेख के लेखक स्वामी सोमदेव जी वेद विरुद्ध उपनिषद को क्यों संदर्भित करते है?

    क्या लेखक सोमदेव स्वयं को ऋषि दयानंद से उच्च कोटि का विद्वान मानता है?

    मेरा सुझाव है कि इस झूठे लेख को इस साईट से हटा दिया जाय।

    और लेखक सोमदेव को चेतावनी दी जाय कि भविष्य में वे थोडा और स्वाध्याय कर उत्तर दे।

    रिश्व आर्य जी

    ओ३म् शांतिः शांतिः शांतिः।

  10. जब वेद ही स्वतः प्रमाण है और वेद 12
    दिन में पुनः जन्म बताता है
    व्रहदरण्यक उपनिषद में कुछ सेकण्ड्स में दूसरा जन्म
    बताया है
    जबकि यजुर्वेद 39:5-7 में 12 दिन का समय दूसरा जन्म
    में बताया गया है (ऋषि दयानंद भाष्यअनुसार)
    और वेद स्वतः प्रमाण है।
    फिर आर्य समाज इस झूठे वेद विरुद्ध
    बृहदआरण्यक उपनिषद को
    मान्यता क्यों देता है?
    या तो कुछ सेकण्ड्स की
    बात सही है या 12 दिन की।
    यह सिद्ध हुआ कि 12 दिन की बात सत्य
    है।
    फिर इस साईट पर इस झूठे लेख का क्या औचित्य है यह
    समझाने का कष्ट करे।
    इस लेख के लेखक स्वामी सोमदेव
    जी वेद विरुद्ध उपनिषद को क्यों संदर्भित करते
    है?
    क्या लेखक सोमदेव स्वयं को ऋषि दयानंद से उच्च कोटि
    का विद्वान मानता है?
    मेरा सुझाव है कि इस झूठे लेख को इस साईट से हटा दिया
    जाय।
    और लेखक सोमदेव को चेतावनी दी
    जाय कि भविष्य में वे थोडा और स्वाध्याय कर उत्तर दे।
    रिश्व आर्य जी
    ओ३म् शांतिः शांतिः शांतिः।

  11. आत्मा की सच्ची घटना मै बताता हूँ।

    मृतयु के बाद आत्मा को 2 यमदूत ले जाते है । इस दौरान उन को उन के कामो को अच्छे इस बुरे सब दीखाया जाता है।
    उस के बाद उनको 12 दिनों तक वापस धरती में क्रिया कर्म पुरा होने तक छोड़ दिया जाता है पुनः उसके पापो की सजा देने के लिए यमलोक ले जाया जाता है अर्थात ।

    अगर किसी मनुस्य की उम्र 80 साल की है और वो 50 में है मृतयु को प्राप्त हो गया तो उस को 30 साल धरती पर ही भटकना पड़ता है

    उसी को हम सब भूत कहते है। वही अतृप्त आत्माए इधर उधर भटकती रहती है।

    मारने के बाद तुरंरत दूसरा सरीर नहीं मिलता हाँ यदि आप की उम्र पूरी हो गई हो तो यमलोक के यमराज आप को नया सरीर दे देंगे ये तो कर्मो पे निर्धारित है।

    जैसे कर्म वैसा सरीर और यदि कर्म बहुत अच्छे किए हो तो मोक्छ यानि परम धाम की प्राप्ति होती ही। जीवन मरण से छुटकारा मिल जाता है।

    पर यदि किसी कारण अकाल मृतयु हुई हो तो उस को यही भटकना पड़ता है।
    पर पूरी सवभविक मऔत हुई तो । यानि आपकी उम्र 80 की निर्धारित है और 80 वर्ष में मौत हो तो आपको तुरंत नई सरीर की परसप्ति कर्मो के आधार पर होगी और यदि बिच में ही मौत हुए तो भटकना होगा भुत बनकर।

    उम्र पूरी होने के बाद ही कुछ होगा।

  12. क्या आज तक किसी व्यक्ति का किसी आत्मा से साक्षात्कार या सम्पकृ हुआ है।

  13. MUJHE GARV HAI JIS DHARTI MAHARSHI DYANAND JAISE RISHI NE NANM LIYE ACHARYA CHANAKYA JAISE ACHARYA AYE OUR ANT TAK AMRIT DE GAYE OUR KHUD JAHAR PIYE KOTI KOTI NAMAN PAWAN KUMAR ROY ARYA

  14. वेड और पुराण दोनों एक ही बात कह रहे हैं| पुराण के श्लोक पर गौर करें, उसमें यही कहा गया है कि “जैसे सूक्ष्म जीव तिनका बदल देता है वैसे ही आत्मा शरीर बदल लेता है| इस कथन का तात्पर्य यह कदापि नहीं लगाना चाहिए कि यह सब कुछ क्षणों में हो जाता होगा | यहाँ वेद की बात प्रभावी लगती है कि इस तिनका बदलने की प्रक्रिया में १३ दिन लगते हैं|

    1. सोमनाथ जी
      वेद और पुराण दोनों एक बात नहीं बोलते हैं | हां वेद की बहुत सी बात को जरुर लिया गया है पुराण में | वेद में जैसे बोला जाता है की मूर्ति पूजा करना मना है मगर पुराण में मूर्ति पूजा करने को बोला गया है | बहुत सी अश्लील बातें भी पुराण में हैं | मैं पुराण का खंडन नहीं करना चाहता | पुराण का खंडन करने लगूंगा तो बहुत से पौराणिक जिन्हें कुछ जानकारी नहीं होते उन्हें दुसरे मत के लोग अपने मत में रूपांतरण करवाने में लग जाते हैं | जाकिर नाईक , ब्र इमरान इत्यादि कई ऐसे हैं जो इसका फायदा उठाते हैं | एक काम करे पुराण की सही जानकारी लेनी हो तो हमारे fb पेज पर सन्देश बॉक्स में सवाल करें आपको जानकारी देने की कोशिश की जायेगी | आओ वेद की ओर लौटें | धन्यवाद |

  15. मेरे पिता जी की रेल दुर्घटना हो गई मुझे इस का कारण जानना है

    1. वैदिक इश्वर कर्म के आधार पर सजा सबको देते हैं | कुछ वैसा कर्म किया गया होगा जिस कारण उनकी रेल दुर्घटना हुयी |

  16. kya aatma hoti hai h
    kyoki duniya tho god ko bhi jhuta manti hai
    saat hi bhoot jesi chijo ko
    tho aap btao ki kya maane?
    ager bhoot na mane tho god ko bhi maanana pdega
    kyo ki seince tho reply de nhi rhi to aap hi btato
    sir ji

    1. संजय जी
      सबसे पहले आप यह जानकारी दें की आपको क्या लगता हैं आत्मा होती है ? परमात्मा होता है ? फिर इस बारे में आपसे चर्चा की जायेगी | आप यह भी बतलाना आप किस मत को मानते हो फिर उसी हिसाब से आपसे चर्चा करने की कोशिश की जायेगी | धन्यवाद |

  17. ब्रह्मकुमारी किस खेत की मूली है??? अरे मूर्खो आधा अधूरा ज्ञान हमेशा दुखदाई होता है जैसे आत्मा कभी मरती नही और दूसरा सरीर धारण करती है तो उससे पहले उसे अपने पिछले जन्म के कर्मो का फल भुगतना पड़ता है उसी के हिसाब से उसे नया शरीर मिलता है अब सरीर बदलना और जिंदगी भर किये हुए अच्छे बुरे कर्मो का फल भुगतना कोई छोटी मोटी प्रक्रिया नही है चूंकि मरने के बाद आत्मा यमलोक में हिसाब पूरा करके फिर से इस संसार (मृत्युलोक) मैं भेज दी जाती है ताकि इस जन्म के पूर्ण हिसाब चुकता करने के बाद ही दूसरी पारी खेली जाये जब घर वाले पिंडदान कर देते है तब आत्मा स्वतः ही मुक्त हो जाती है इस संसार से और फिर वो तुरंत ही अगला जन्म ले लेती है 12 ब्राह्मण इसीलिए किये जाते है क्योंकि ब्राह्मणों और अग्नि ये दो भगवान बिष्नु के मुख है और जब किसी के मृत्यु के उपलक्ष मैं आत्मा को मुक्ति दिलाने हेतु परिवार और बंधु जब 12 ब्राह्मण को पूर्ण संतुष्ट कर देते है तब उस जीवात्मा के लिए ब्राह्मण आशिर्बाद देते है ।। और यजुर्वेद के उस 6 वे श्लोक का मतलब है जब एक कीट किसी एक टहनी के छोर पे पहुच के दूसरी टहनी का छोर पकड़ लेता है इसका मतलब आत्मा के सरीर बदलने से है इस जन्म से मुक्ति पाकर अगले जन्म मैं अब वो मुक्ति अच्छे कर्मो से ही मिलेगी भगवान पर या बेदो और वेदांगों पे सवाल करने से नही ।। महामूर्खों गरुड़ पुराण पढ़ो सब कुछ सार है उसमे भगवान बिष्नु जी ने अपने वाहन गरुड़ को जीवात्मा के मरने के तत्पसचयात बैतरणी नदी और यमलोक फिर मृत्युलोक मैं घूमने की पूरी कथा सुनाई है ज्ञान बढाओ फिर पढ़ो क्या तुम्हें लगता है ऐसे ब्रह्मकुमारी जैसे दल्ले और नल्ले हमारी वैदिक संस्कृति को जिंदा रहने देंगे रे वो तो हम हिन्दू ही है जो हमारे लाखो करोड़ो साल पुराने धर्म ग्रंथो की किसी के बहकावे मैं आके निंदा करते है ईशनिंदा करते है सवाल उठाते है ये विदेशी आक्रांताओ ने हमारे वेदों को नुकसान पहुचाया है

    1. अव तक कितने आदमी /आत्माएँ पुनर जन्म लिए देखे है ? कोही आँकड़ा हो तो बताइएगा जी?

  18. Lekin Mene to or kuch sun rakha hai, jese ki marnouprant GARUD PURAN ka wachak kiya jata hai to usme to kuch hai, jese ki bataya jata hai “marne ke bat manushya ka sharir 10 din tak uske ghar me hi rahata hai” or fir wah kuch chhan me dusre sharir me kese ja sakta h..?

    1. mere bhai
      garud puraan me vaitarni nadi ki bhi jaankaari hai uske baare me kya bolna hai aapko? aur nadi paar karte huye jo samay hota us baare me kyaa jaankaari hai. thoda jaankaari dena aap. waise pauraink hisab se garud puraan tabhi parhaa jaata hai yaa sunaa jaata hai jab kisi uske pariwaar waale yaa pados ke log ki maut huyi ho. aisa maine suna aur dekhaa hai. aur yah jaan le puraan me bahut milawat ki gayi hai . aao satya sanatan vedik dharam ki aor lauten. ved ki aor lauten… pauranik bhi yah yah maante hain ki ved ke saman koi granth nahi . aao ved ko apnaye aur saty ki aor laut chale. dhanywaad.

  19. Atma aur jivan in do tatvo ko milkar jivatma banta hai
    Atma na janm leti hai na hi marti hai
    Jeev janmata marta hai
    Janm lene par aatma shariro me pravesh karti hai aur jivan ki samapti par sharir se
    Nikal jati hai
    Bhotik sharir ko chorkar ya to ye jiva aatma karmvash paida hui kamana anurup dusri yoni me pravesh kar jata hai aur aatma ativahik sharir dharan kar yamlok ki yatra karta hai
    Jese hi jiva ka dusre sharir me janm hota hai us jiva ki aatma us naye sharir ko dharan kar sukh dukh ka bhog karne pravesh karti hai
    Is aatma ko is sharir se khichkar yamdut devalok ke ativahik sharir me pravesh kara kar le jate hai
    Yah sharish bhotik sthul sharir nahi hota
    Isliye ek hi samay par kai sthano me sthit ho sakta hai
    Jab jiva ki sari kamanaye nasht ho jati hai
    Koi accha ya bura karm phal bhog baki nahi rahata
    Jiva ki koi kamana baki nahi rahati tab is aatma ka jiva nasht ho jata hai aur aatma shuddh svarup param tatva me pravesh kar svayam paramatm svarup ho jati hai
    Jese ganga jal ko yadi samudra me le jakar daal diya jaye fir wo ganga jal nahi rahata
    Samudra ka jal aur svayam samudra ho jata hai
    Jab tak jiva acche bure karmo ke phal aur icchavo kamanavo se bandha hai
    Tab tak use vishram kaha use tatkal hi sharir dharan karna hi padata hai
    Lekin iska koi niyam nahi hai ki ek Nishchit samaya par har aatma ko sharir mile
    Jab tak use naya sharir prapt nahi hota aatma devalok ke ativahik sukshm sharir ko dharan kiye rahati hai Jo humare liye adrushya hota hai

  20. Atma agar ek hey tho jitna mare utna janam liye tho awadi kyon badhthi hey. Jara bistar se bataiye.

    1. ved parhe aapko jaankaari ho jaayega… sab bina mehnat ke jaankaari lena chahte hain bhai…. ved parhein apko bahut jaankari ho jaayega

  21. आचार्य जी…..मेरा छोटा भाई जिसकी उम्र 19 थी….वो कहा करता था कि मैं सबसे बहुत दूर चला जाऊंगा….लेकिन 5साल बाद वापस आ जाऊंगा!उसकी कुन्डली में उसकी आयु 86 वर्ष थी…..हमें सबको लगता है वो जरूर आयेगा…..क्योंकि हमारे परिवार में पुनर्जन्म की घटना हो चुकी है….म्रतक 5वर्ष बाद एक बालक के रूप में आ चुके हैं!क्या शास्त्रों में आयु पूरी करने का कोई वर्णन है? वो पुन: हमारे ही घर में ही जन्म ले इसके लिये उपाय हो तो अवश्य बताएं।

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