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तीन तलाक पीड़िता की नाबालिग बेटी ने हिंदू धर्म अपनाने का किया एलान

तीन तलाक पीड़िता की नाबालिग बेटी ने हिंदू धर्म अपनाने का किया एलान

तीन तलाक पीड़िता की नाबालिग बेटी ने हिंदू धर्म अपनाने का किया एलान

सांकेतिक तस्वीर Image Source: File Photo
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन तलाक पीड़िता की एक नाबालिग बेटी ने गुरुवार को हिंदू धर्म अपनाने का ऐलान कर दिया. दरअसल 16 वर्षीया किशोरी का कहना है कि उसकी मां और समाज के अन्य लोग उसकी शादी जबरदस्ती एक 50 साल के अधेड़ से करवाना चाहते हैं.

फिलहाल युवती घर से भागकर जय शिवसेना की शरण में चली गई है. राजनगर निवासी किशोरी के मुताबिक वह तलाक और हलाला जैसी कुप्रथा के दर्द से नहीं गुजरना चाहती. इसलिए हिंदू धर्म अपनाने जा रही है.

किशोरी का कहना है कि उसने अपनी मां को तलाक के बाद घुट-घुटकर जिते देखा है. उसने बताया कि 12 साल पहले उसके पिता ने उसकी मां को तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया. उसके बाद से उसकी मां ने घरों में कामकर उसे पाला. लेकिन अब उसकी मां और समाज के अन्य लोग उसकी जबरदस्ती शादी एक अधेड़ से करवाना चाहते हैं.

किशोरी का कहना है कि वह शादी नहीं करना चाहती. अभी वह पढ़ना चाहती है. इसलिए वह घर से भागकर जय शिवसेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित आर्यन के शरण में आई है.

किशोरी का कहना है कि उस पर 13 साल की उम्र से ही निकाह के लिए दबाव बनाया जा रहा है. परिवार वालों ने अधेड़ से कुछ पैसे भी लिए हैं. लेकिन अब वह हिंदू धर्म अपनाकर अपनी पढ़ाई पूरी करेगी.

गौरतलब है कि यह किशोरी पिछले पांच-छह महीने से जय शिवसेना की शरण में है, लेकिन अभी तक उसका धर्मांतरण नहीं हो पाया है.

source : https://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/ghaziabad-triple-talaq-victim-daughter-announces-to-brass-hinduism-1109024.html

क्या है इंस्टैंट ट्रिपल तलाक, जानिए क्या कहता है शरीयत

क्या है इंस्टैंट ट्रिपल तलाक, जानिए क्या कहता है शरीयत

Triple, 3 Talaq Judgement Hindi: तलाक-ए-बिद्दत को कोर्ट में चुनौती दी गई थी। जिस पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार दे दिया गया।

मुस्लिम लॉ के मुताबिक शादी को एक संस्कार के रूप में नहीं देखा जाता है बल्कि एक नागरिक अनुबंध के रूप में देखा जाता है। (Illustration by C R Sasikumar)

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तीन तलाक के मामले पर फैसला सुनाते हुए उसे असंवैधानिक करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को रद्द कर दिया है। साथ ही कहा है कि यह कानून मनमाना है और यह संवैधानिक अधिकारों का हनन करता है। 5 जजों की संविधान पीठ ने बहुमत के साथ यह फैसला दिया है। बता दें, इस्लाम धर्म में शादी के लिए ईसाई और हिंदू धर्म से अलग परंपराएं हैं। मुस्लिम लॉ के मुताबिक शादी को एक संस्कार के रूप में नहीं देखा जाता है बल्कि एक नागरिक अनुबंध के रूप में देखा जाता है। युवक और युवती के कबूल करने के बाद आपसी सहमति के आधार पर दोनों पार्टियों के बीच अनुबंध स्वीकार किया जाता है। ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि इंस्टैंट ट्रिपल तलाक क्या है और इसका शरीयत में क्या जिक्र है।

क्या है इंस्टैंट ट्रिपल तलाक-

तलाक-ए-बिद्दत को कोर्ट में चुनौती दी गई थी। यह तलाक-ए-सुन्नत से बिल्कुल अलग है। ‘तलाक-ए-सुन्नत’ को शादी खत्म करने के सबसे आदर्श तरीका माना जाता है। ‘तलाक-ए-सुन्नत’ के तहत जब पति अपनी पत्नी से एक बार तीन तलाक बोलता है तो उसके बाद भी उसे अपनी तीन महावारी चक्र तक पति के घर में ही रहना होता है। इसे इद्दत का काल कहा जाता है। इन तीन महीने के दौरान पति-पत्नी दोबारा से साथ में आ सकते हैं। अगर वे दोनों साथ आ जाते हैं तो तलाक निरस्त हो जाता है। हालांकि, जब इद्दत का समय निकल जाता है या पति तलाक को निरस्त नहीं करता है तो आखिरी फैसला तलाक ही होगा।

तलाक ए बिद्दत के तहत जब एक व्यक्ति अपनी पत्नी को एक बार में तीन तलाक बोल देता है या फोन, मेल, मैसेज या पत्र के जरिए तील तालक दे देता है तो इसके बाद तुरंत तलाक हो जाता है। इसे निरस्त नहीं किया जा सकता। इसके बाद अगर पति और पत्नी वापस आना चाहते हैं तो उनके लिए एक तरीका बचता है वह है निकाह हलाला। इसके लिए महिला को किसी दूसरे शख्स से शादी करनी होगी और उससे शारीरिक संबंध बनाने होंगे। इसके बाद दूसरे व्यक्ति से भी तलाक ले लेंगी और फिर इद्दत काल की अवधि को गुजारेंगी। इसके बाद वह अपने पहले पति के सात वापस लौट सकती हैं।

 

इस्लाम के जानकार ब्रदर इमरान का कहना है कि जिस तरह से आज के समय तीन तलाक दिए जा रहे हैं, वैसा कुरान में कहीं जिक्र नहीं है। इमरान का वीडियो नीचे दिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति एक ही बार में तीन तलाक बोल देता है तो वह कुरान के खिलाफ है। कुरान में तलाक का जिक्र चेप्टर नंबर दो में आयत नंबर 228 से 242 तक है। इस चेप्टर का नाम है सूरा-ए-तलाक। इसमें अल्लाह कहते हैं कि अगर तुम अपनी पत्नी को तलाक देना चाहते हैं तो जिस पत्नी को आपने तलाक बोला है उसे अपने घर में तीन पीरिएड आने तक रखना होगा। पत्नी तीन महावारी चक्र तक इंतजार करेगी। अगर महिला के पेट में बच्चा है तो वह तब तक अपने पति के घर में रहेगी, जब तक वह बच्चा पैदा ना हो जाए। इस दौरान पत्नी की मर्जी है कि वह अपने पति के आदेश माने या नहीं। लेकिन पति को अपनी पत्नी के सारे खर्चें उठाने होते हैं। इसमें हर एक तरह का खर्च शामिल है। साथ ही इमरान कहा कि पैगंबर कहते हैं कि इन तीन महीनों के दौरान पति और पत्नी दोनों को एक ही बेड पर सोना चाहिए। अगर इस दौरान दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन जाते हैं तो तलाक निरस्त हो जाएगी |

source : http://www.jansatta.com/national/triple-teen-talaq-supreme-court-faisla-3-talaq-judgement-news-in-hindi-what-is-instant-triple-talaq/409306/

तीन तलाक: कुरान कहता है- पति-पत्‍नी अलग सोए, पर र‍िश्‍ता बचाने की हर संभव कोशिश करे

तीन तलाक: कुरान कहता है- पति-पत्‍नी अलग सोए, पर र‍िश्‍ता बचाने की हर संभव कोशिश करे

Triple Talaq, 3 Talaq Hindi: वैसे तो वे खुद ही इसे स्थाई नहीं करना चाहते थे लेकिन उन्होंने इसे पहले वाली प्रथा से थोड़ा सहीं माना था लेकिन तीन तलाक कुरान में भी नहीं है।

उन्‍हें तलाकशुदा जोड़े का उदाहरण देकर तलाक की दुश्‍वारियों का अहसास द‍िलाने की कोश‍िश करें।

सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को खत्‍म कर द‍िया है। इससे जहां मुस्लिम मह‍िलाएं खुश हैं, वहीं ऑल इंड‍िया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और कई मौलव‍ियों को यह फैसला पसंद नहीं आ रहा है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि जिस तरह अयोध्या राम मंदिर केस आस्था का विषय है उसी तरह तीन तलाक का मुद्दा भी आस्था से जुड़ा हुआ है। बोर्ड का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले से दूर रहना चाहिए। राम का जन्म अयोध्या में हुआ था जो कि एक आस्था का विषय है, न कि संवैधानिक नेतिकता और ऐसा ही तीन तलाक के मुद्दे में भी लागू होता है। लेक‍िन, सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंंवैधान‍िक बताते हुए इसे खत्‍म कर द‍िया है और कहा है क‍ि छह महीने में केंद्र सरकार इस बारे में कानून बना ले।

कुरान भी तीन तलाक के ख‍िलाफ है। पूर्व सांसद आर‍िफ मोहम्‍मद खान ने अपने एक लेख में कुरान के हवाले से ल‍िखा है क‍ि इसमें तीन तलाक को ब‍िल्‍कुल प्रश्रय नहीं द‍िया गया है। इसमें कहा गया है क‍ि अगर लगता है पति-पत्‍नी में बन नहीं रही है और र‍िश्‍ता टूटने की कगार पर है तो पत्‍नी को समझाएं। बात नहीं बने तो पत्‍नी से अलग सोएं। उन्‍हें तलाकशुदा जोड़े का उदाहरण देकर तलाक की दुश्‍वारियों का अहसास द‍िलाने की कोश‍िश करें। यह जताने की कोश‍िश करें क‍ि कैसे तलाक से पर‍िवार और बच्‍चों पर असर पड़ेगा। अगर तब भी बात नहीं बनते तो पत‍ि-पत्‍नी के पर‍िवार से एक-एक व्‍यक्‍त‍ि के जर‍िए मध्‍यस्‍थता की व्‍यवस्‍था भी कुरान में बताई गई है (4.34-35)।

तीन तलाक फैसला: पीड़ित की आपबीती- आधी रात पति ने किया था बेघर, किसी मुस्लिम ने नहीं दिया साथ

तीन तलाक फैसला: पीड़ित की आपबीती- आधी रात पति ने किया था बेघर, किसी मुस्लिम ने नहीं दिया साथ

Triple Talaq Judgement Hindi: शहनाज शेख ने 1983 में सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी।

Triple Talaq Judgement Hindi: शहनाज शेख ने 1983 में सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। (Represantional Image)

सुप्रीम कोर्ट ने आज (22 अगस्त, 2017) से तीन तलाक को असंवैधानिक करार देते हुए खत्म कर दिया है। शहनाज शेख ने 1983 में सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। उन्‍हें उनके पति ने आधी रात में तीन तलाक बोल कर बेघर कर दिया था। वह 600 रुपए महीने की नौकरी करती थीं। जीवन काफी मुश्किल भरा था। मुश्किलें और बढ़ गई थीं। लेकिन उन्‍होंने लड़ने का फैसला किया, ताकि उनकी जैसी लाखों मुस्लिम महिलाओं की जिंदगी आसान बन सके। इस लड़ाई में उन्‍हें किसी मुसलमान का साथ नहीं म‍िला। उन्‍होंने ”इंड‍ियन एक्‍सप्रेस” में एक लेख के ज‍र‍िए अपनी आपबीती बयां की थी और बताया था क‍ि वह तीन तलाक के ख‍िलाफ क्‍यों खड़ी हुईं। उन्‍होंने ल‍िखा था-

1983 में मैंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की महिलाओं के साथ भेदभाव के खिलाफ यह याचिका दायर की थी। आधी रात को मेरे पति ने मुझे तलाक देकर घर से बाहर निकाल दिया था। मेरे लिए जीना मुश्किल होता जा रहा था। मैंने एक दफ्तर में बतौर ऑफिस असिस्टेंट काम करना शुरू कर दिया। मेरी तनख्वाह 600 रुपये प्रति महीना थी और मैं किराए पर रह रही थी। मेरे तलाकशुदा पति ने मेरा पता लगा लिया और मुझे धमकाया। मैंने उससे कहा, “तुमने मुझे तलाक दे दिया है, मैं अब कहीं भी रह सकती हूं और अपनी मर्जी से काम कर सकती हूं।” इस बात पर उसने(तलाकशुदा पति) कहा, “तुम मेरी बीवी हो, मैं वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए एक मुकदमा दायर करूंगा” यह बात मेरी मर्जी के खिलाफ थी। मैंने 5 काजी से सलाह-मश्विराह किया लेकिन हर एक ने मुझे अलग-अलग बातें बताईं।

मुझे मालूम ही नहीं था कि कानूनी तौर मैं क्या थी? शादीशुदा या फिर तलाकशुदा? इसके बाद ही मैंने तलाक देने के इस तरीके के खिलाफ और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के खिलाफ याचिका दायर की थी। ऐसा कोर्ट में पहला मामला था। मेरी याचिका से न सिर्फ कट्टरपंथियों को तकलीफ हुई बल्कि उन्हें भी इससे परेशानी हुई जिनसे मैंने सहारे की उम्मीद की थी- वे थे लिबरल्स, उदार लोग! कुछ लोगों ने कहा कि मुझे इस्लाम की जानकारी ही नहीं है और मैं उसके कानून को चुनौती नहीं दे सकती।कई लोगों को लगा कि मैं अपनी नीजि जिंदगी में सिर्फ एक कुंठित महिला बन चुकी थी।

मुंबई स्थित महिलाधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले संस्थान फॉरम अगेंस्ट ओप्रेशन ऑफ विमेन और इंदिरा जयसिंह के वकील मेरी मदद के लिए आगे आए। इन्होंने मेरा केस मुफ्त में लड़ा। जिन्होंने मुझे सहारा दिया, वे गैर मुस्लिम थे। कई मुस्लिम उदारवादियों को लगता है कि बदलाव समाज के अंदर से ही आना चाहिए लेकिन इस बात से पर्सनल लॉ बोर्ड से जुड़े लोगों को परेशानी होती है।

source : http://www.jansatta.com/national/triple-talaq-supreme-court-faisla-teen-3-talaq-judgement-in-hindi/409276/

तीन तलाक फैसला: ट्रिपल तलाक असंवैधानिक करार, छह महीने में केंद्र सरकार को कानून बनाने का आदेश

तीन तलाक फैसला: ट्रिपल तलाक असंवैधानिक करार, छह महीने में केंद्र सरकार को कानून बनाने का आदेश

Triple Talaq Supreme Court Judgement: जस्टिस खेहर ने तीन तलाक पर छह महीने के लिए रोक लगा दी है।

Triple Talaq Supreme Court Judgement: जस्टिस खेहर ने अपना फैसला सुनाया।

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। 3-2 से सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया। साथ ही संसद को छह महीने के अंदर इसपर कानून बनाना होगा। प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने र्गिमयों की छुट्टियों के दौरान छह दिन सुनवाई के बाद 18 मई को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। प्रधान न्यायाधीश खेहर के अलावा, पीठ में न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति यू यू ललित और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। सुनवाई के दौरान, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि वह संभवत: बहुविवाह के मुद्दे पर विचार नहीं करेगी और कहा कि वह केवल इस विषय पर गौर करेगी कि तीन तलाक मुस्लिमों द्वारा ‘‘लागू किये जाने लायक’’ धर्म के मौलिक अधिकार का हिस्सा है या नहीं। पीठ ने तीन तलाक की परंपरा को चुनौती देने वाली मुस्लिम महिलाओं की अलग अलग पांच याचिकाओं सहित सात याचिकाओं पर सुनवाई की थी। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि तीन तलाक की परंपरा असंवैधानिक है।

केंद्र सरकार तीन तलाक के खिलाफ थी। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा भी था कि अगर कोर्ट इस व्यवस्था को खत्म करेगा तो सरकार इसके लिए कोई नई व्यवस्था लाएगी। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद इस केस में अदालत के मददगार की भूमिका में हैं। तीन तलाक का समर्थन कर रहे संगठनों का कहना था कि जैसे राम का अयोध्या में जन्म आस्था का विषय है वैसे ही तीन तलाक भी आस्था का विषय है।

पिछले दिनों तीन तलाक देने के अलग-अलग मामले सामने आए। एक ने बच्चे पर चाय गिरने पर पत्नी को तलाक दे दिया था। एक ने चिठ्ठी लिखकर तलाक दे दिया था। वहीं एक ने फोन पर तलाक दे दिया था। मुसलमानों की तरफ से कहा जाता रहा है कि यह प्रथा 1400 साल पुरानी है और उसको खत्म नहीं किया जाना चाहिए।

source :  http://www.jansatta.com/national/triple-talaq-faisla-teen-3-talaq-supreme-court-judgement-in-hindi-justice-js-khehar-upholds-government-to-make-law/409222/

तीन तलाक पर सुषमा स्वराज के पति ने किया ऐसा ट्वीट, लोग बोले- दिल की गहराइयों में उतर गए आपके शब्द

तीन तलाक पर सुषमा स्वराज के पति ने किया ऐसा ट्वीट, लोग बोले- दिल की गहराइयों में उतर गए आपके शब्द

Triple Talaq Supreme Court Judgement: न्यायमूर्ति खेहर ने अपने फैसले में संसद से इस मामले में कानून बनाने की अपील की। उन्होंने अगले छह माह के लिए तीन तलाक पर रोक लगा दी।

न्यायमूर्ति खेहर ने अपने फैसले में संसद से इस मामले में कानून बनाने की अपील की। उन्होंने अगले छह माह के लिए तीन तलाक पर रोक लगा दी। (Photo: Twitter)

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को ऐतिहासिक फैसला देते हुए तीन तलाक को ‘असंवैधानिक’ व ‘मनमाना’ करार देते हुए कहा कि यह ‘इस्लाम का हिस्सा नहीं’ है। पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने दो के मुकाबले तीन मतों से दिए अपने फैसले में कहा कि तीन तलाक को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त नहीं है। कोर्ट के फैसले के बाद कई मुस्लिमों महिलाओं और नेताओं ने खुशी जाताई है। केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पति ने भी तीन तलाक के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्वीटर के माध्यम से शायराना अंदाज में अपनी बात कही। उनके ट्वीट को पढ़कर कई लोग भावुक भी हो गए। कुछ लोगों ने उनके ट्वीट को दिल को छू जाने वाला भी बताया।

सुषमा स्वराज के पति गवर्नर स्वराज ने लिखा है- ”तलाक तो दे रहे हो नज़र-ए-क़हर के साथ, जवानी भी मेरी लौटा दो मेहर के साथ।” खास बात ये है कि उन्होंने ट्वीट में बॉलीवुड अभिनेत्री मीना कुमारी के तलाक के जिक्र करते हुए ट्वीट किया। कुछ लोगों ने उनके ट्वीट पर अपना रिएक्शन देते हुए मीना कुमारी और उनके शौहर कमाल अमरोही की एडिटिंग फोटो पोस्ट किया है।

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HMP Zindabad @IronyHumour
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The real story behind this dialogue

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#SurgicalStrike 👣 @SurgicalWay
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दिल की गहराइयों में उतर गए आपके शब्द, स्वराज जी.

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unknown @_littel_boy
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हलाला की दुकान के अब बंद होने का समय आगया

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आज तीन तलाक पर पांच जजों की बेंच ने सुनवाई की। दो जज तीन तलाक के पक्ष में थे वहीं तीन इसके खिलाफ। बहुमत के हिसाब से तीन जजों के फैसले को बेंच का फैसला माना गया। सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित ने कहा कि तीन तलाक इस्लाम का मौलिक रूप से हिस्सा नहीं है, यह कानूनी रूप से प्रतिबंधित और इसे शरियत से भी मंजूरी नहीं है। वहीं, प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे.एस. खेहर और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर ने कहा कि तीन तलाक इस्लामिक रीति-रिवाजों का अभिन्न हिस्सा है और इसे संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है।

न्यायमूर्ति खेहर ने अपने फैसले में संसद से इस मामले में कानून बनाने की अपील की। उन्होंने अगले छह माह के लिए तीन तलाक पर रोक लगा दी। साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों से अपील की कि वे अपने मतभेदों को भूलकर इससे संबंधित कानून बनाएं।

इससे पहले ही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि यह एक विचार करने का मुद्दा है कि मुसलमानों में ट्रिपल तलाक जानबूझकर किया जाने वाला मौलिक अधिकार का अभ्यास है, न कि बहुविवाह बनाए जाने वाले अभ्यास का।

source : http://www.jansatta.com/national/sushma-swarajs-husband-tweeted-on-triple-talaq-people-say-your-words-have-fallen-into-the-depths-of-the-heart/409440/

इंस्टैंट ट्रिपल तलाक फैसला: SC ने तीन तलाक को रद्द किया, बताया असंवैधानिक

इंस्टैंट ट्रिपल तलाक फैसला: SC ने तीन तलाक को रद्द किया, बताया असंवैधानिक

Triple Talaq Supreme Court Judgement Live: इंस्टैंट ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के जजों ने फैसला पढ़ना शुरू कर दिया है।

Triple Talaq Supreme Court Judgement: जस्टिस खेहर ने अपना फैसला सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक का असंवैधानिक बताया। साथ ही इसपर छह महीने के भीतर सरकार को कानून बनाना होगा। इस मामले पर पांच जजों की बेंच ने सुनवाई की। दो जज तीन तलाक के पक्ष में थे वहीं तीन इसके खिलाफ। बहुमत के हिसाब से तीन जजों के फैसले को बेंच का फैसला माना गया। बेंच में जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस कुरिएन जोसेफ, आरएफ नरीमन, यूयू ललित और एस अब्दुल नज़ीर शामिल थे। इस केस की सुनवाई 11 मई को शुरु हुई थी। जजों ने इस केस में 18 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख दिया था।

इससे पहले ही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि यह एक विचार करने का मुद्दा है कि मुसलमानों में ट्रिपल तलाक जानबूझकर किया जाने वाला मौलिक अधिकार का अभ्यास है, न कि बहुविवाह बनाए जाने वाले अभ्यास का।

यहां पढ़ें सुप्रीम कोर्ट के तीन तलाक पर फैसले से जुड़े लेटेस्ट अपडेट:

2.20 PM: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर इस फैसले का स्वागत किया।

12.40 PM: शिया मौलवी मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि शिया पर्सनल लॉ बोर्ड 2007 से तीन तलाक के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।

12.20 PM: केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताई।

12.00 PM: फैसला आने के बाद मुस्लिम महिलाएं काफी खुश थीं। जिन महिलाओं ने इसके खिलाफ याचिका डाली हुई थी उन्होंने फैसला का स्वागत किया।

11.40 AM: जस्टिस नरीमन, ललित और कुरियन ने ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक बताया। तीनों ने मिलकर जस्टिस नजीर और चीफ जस्टिस खेहर की बात पर अपनी असहमति जताई।

11.20 AM: संसद को छह महीने के अंदर इसके लिए कानून बनाना होगा।

11.05 AM: तीन जजों ने तीन तलाक के खिलाफ फैसला दिया। तीनों ने इसको असंवैधानिक बताया।

11.00 AM: जस्टिस खेहर ने कहा है कि तीन तलाक की प्रक्रिया पर छह महीने तक रोक रहेगी। इस वक्त में सरकार को नया कानून बनाना होगा।

10.50 AM: जस्टिस खेहर ने अपने फैसले में अपहोल्ड शब्द का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा है कि तीन तलाक बना रहेगा।

10.40 AM: पांचों जज कोर्टरूम पहुंच चुके हैं। कार्यवाही शुरू ही होने वाली है। ऑर्डर की कॉपी जस्टिस खेहर के पास है। वह ही फैसला पढ़कर सुनाएंगे।

10.30 AM: अब से कुछ देर में फैसला आने वाला है।

10.20 AM: पीएम मोदी ने लाल किले से अपने भाषण में भी इसका जिक्र किया था।

10.10 AM: कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद कोर्ट के मददगार की भूमिका में हैं।

10:00 AM: याचिकाकर्ता सायरा बानो ने कहा कि मुझे विश्वास है कि फैसला मेरे हक में होगा। समय बदल रहा है और इस मुद्दे पर निश्चित रूप से कानून बनाया जाएगा।

9:52 AM: सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर पूरे देश कि निगाहें टिकी हैं। अगर कोर्ट ट्रिपल तलाक की प्रथा को बंद करने का फैसला सुनाती है तो इससे देश की कई मुस्लिम महिलाओं को खुशी मिलने वाली है।

9.40 AM: तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 10.30 तक आएगा।

यह मुद्दा 16 अक्टूबर, 2015 में शुरु हुआ था जब सुप्रीम कोर्ट की बेंच द्वारा सीजेआई से कहा गया था कि एक बेंच को सेट किया जाए जो कि यह जांच कर सके कि तलाक के नाम पर मुस्लिम महिलाओं के बीच भेदभाव किया जा रहा है। बेंच ने यह बात उस समय कही थी जब वे हिंदू उत्तराधिकार से जुड़े एक केस की सुनवाई कर रहा था। इसके बाद 5 फरवरी, 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से कहा था कि वे उन याचिकाओं में अपना सहयोग करें जिनमें ट्रिपल तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह जैसी प्रथाओं को चुनौती दी गई है। इसके बाद इस मामले पर कई सुनवाई हुईं जिनमें ट्रिपल तलाक जैसे मुद्दों को लेकर कोर्ट ने भी गंभीरता दिखाई।  केंद्र सरकार ने भी ट्रिपल तलाक कड़ा विरोध करते हुए कोर्ट से कहा कि ऐसी प्रथाओं को पर एक बार जमीनी स्तर पर विचार करने की आवश्यकता है। 16 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इन मुद्दों की सुनवाई के लिए पांच जजों की बेंच का गठन किया था।

source : http://www.jansatta.com/national/live-triple-talaq-teen-3-talaq-supreme-court-judgement-faisla-verdict-live-updates-in-hindi-verdict-to-be-announced-by-supreme-court-shortly-at-10-30-am/409198/