Tag Archives: बनावट की रोकथामः- राजेन्द्र जिज्ञासु

मिलावट, हटावट, बनावट की रोकथामः- राजेन्द्र जिज्ञासु

मिलावट, हटावट, बनावट की रोकथामः-
आर्य समाज के लिये एक-एक श्वास देने वाले रक्त की धार से इस वाटिका को सींचने वाले एक नेता ने सवा सौ वर्ष पहले लिखा था कि कई व्यक्ति ऋषि की विचारधारा के कारण से नहीं, स्वप्रयोजन से आर्य समाज में घुसे। कुछ अपना उल्लू सीधा करके समाज को छोड़ भी गये। ऐसे ही कुछ लोगों ने आर्य समाज के सिद्धान्तों का हनन किया। इसके साहित्य व इतिहास में मिलावट, हटावट व बनावट करते चले गये। आर्य समाज के गौरव व इतिहास को रौंदा गया। इतिहास जो हम चाहें, वैसा लिखा जावे-यह एक घातक खेल है। महात्मा मुंशीराम जी ने लाला लाजपतराय के देश से निष्कासन के समय से लेकर (लाला लाजपतराय के अनुसार) सन् 1915 तक आर्यसमाज के दमन, दलन व सरकार की घुसपैठ से समाज की रक्षा के लिये महात्मा मुंशीराम जी की सेवाओं व शूरता पर गत साठ-सत्तर वर्षों में कोई उत्तम ग्रन्थ आया क्या? यह इतिहास छिपाया व हटाया गया। आचार्य रामदेव जी को डी.ए.वी. कॉलेज से निकाला गया। यह दुष्प्रचार आरभ हो गया कि पढ़ाई बीच में छोड़ी गई। आचार्य जी के बारे में सर्वथा नया इतिहास गढ़ कर परोसा जा रहा है। स्वामी सोमदेव की मृत्यु एक ही बार हुई। उन्हें दूसरी बार फिर मारा गया। लाला लाजपतराय जी को ईश्वर ने तब जन्म दिया, वह इतिहास प्रदूषण वालों को नहीं जँचा, उनको अपनी इच्छा का जन्मदिवस अलाट किया गया। महात्मा हंसराज लिखते हैं कि उन्होंने ऋषि को न देखा, न सुना। प्रदूषणकारों ने महात्मा जी के लाहौर देखने से पहले ही उन्हें लाहौर ऋषि का उपदेश सुना दिया। महाशय कृष्ण जी, नारायण स्वामी जी का नया इतिहास गढ़कर मिलावट कर दी।
ऋषि के जीवन काल में महाराणा सज्जन सिंह जी ने अनाथ कन्याओं की शिक्षा के लिए भारी दान दिया। इतिहास में हटावट करके यह घटना दी गई। हैदराबाद सत्याग्रह जब चरमोत्कर्ष पर था, स्वामी स्वतन्त्रानन्द अड़ गये कि मैं तो जेल जाऊँगा। आर्य नेताओं के सामने यह नया संकट खड़ा हो गया। महाराज को जेल जाने से रोकने के लिए बैठक पर बैठक बुलाई गई। यह इतिहास कहाँ किसने लिखा है? नारायण स्वामी जी का दबाव देकर महाशय कृष्ण जी ने लाहौर में आपरेशन करवाया। महाशय जी के बहुत दबाव देने पर स्वामी स्वतन्त्रानन्द जी ने मुबई ओपरेशन करवाना मान लिया। यह इतिहास कहाँ गया? यह स्वर्णिम इतिहास हटाया गया। क्यों? ऋषि के जीवन काल में कर्नाटक में आर्यसमाज पहुँच गया। यह स्वर्णिम इतिहास हटावट का शिकार हो गया। पं. लेखराम जी का तिल-तिल जलने का इतिहास हटाया गया या नहीं? जिस रमाबाई के कारण सहस्रों स्त्रियाँ धर्मच्युत हुईं, आर्य समाज तड़प उठा, उस रमाबाईके फोटो छपने लगे। वह ऋषि की भक्त और प्रशंसक बना दी गई। यह क्या?