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इस्लाम समीक्षा : जहाँ शैतान करता है कानों में पेशाब

सूर्योदय के बाद उठने का कारण संभवतः रात्रि में देर से सोना या अधिक थकान हो सकता है। अपितु इस्लाम का विज्ञान तो कुछ और ही कहता है। आइये देखते हैं।

सही बुखारी, जिल्द२, किताब २१, हदीस २४५–

अब्दुल्लाह से रिवायत है कि एक बार मुहम्मद साहब को बताया गया कि एक व्यक्ति सुबह तक अर्थात् सूर्योदय के बाद तक सोया रहा और नमाज के लिए नहीं उठा। मुहम्मद साहब ने कहा कि शैतान ने उसके कानों में पेशाब कर दिया था

वाह जी वाह! क्या विज्ञान है अल्लाह तआला का?
वर्तमान युग में अनेकों व्यक्ति चाहे वो मुस्लिम हैं या मुशरिक हैं, सूर्योदय के पश्चात् निद्रा त्यागने के अभ्यस्त हैं। लेकिन आज तक किसी ने ऐसी शिकायत नहीं की और न ही किसी की शैतान के मूत्र त्यागने के कारण निद्रा ही टूटी है।

इसपर कुछ प्रश्नों को उत्तर भी दे दीजिए-

१. ये शैतान कानों में पेशाब क्यों करता है?

२. क्या ये वही शैतान है जो रात भर नाक में रहता है(पिछले पोस्ट को देखिए)?

३. शैतान पेशाब कब करता है? ठीक सूर्योदय होने के बाद क्या? उसे ऐसे ऐक्युरेट टाइमिंग का पता कैसे चलता है?

४. यदि शैतान कानों में पेशाब करता है तो वो बदबू नहीं देता होगा?

५. कानों में प्रायः पेशाब होने के कारण कान खराब नहीं होते होंगे?

६. कानों के eustechean tube का लिंक सीधे pharynx से होता है। अर्थात् शैतान का पेशाब मुँह में भी चला जाता होगा जो पेट में ही अंततः जाता होगा न? तब भी शैतान का पेशाब हलाल हुआ या हराम?

७. सूर्योदय के बाद उठने पर मोमिनों के बिस्तर या तकया भीगता नहीं है?

मूत्र विसर्जन करते समय यदि मोमिन करवट बदल लेवे तो पेशाब कहाँ जाता होगा?

एक मुफ्त का सुझाव : कानों के लिए डायपर्स, पैंपर्स आदि का उपयोग करें और वैज्ञानिक इसके उपयोग को सरल करें।

यदि किसी भी व्यक्ति से, जिसने सूर्योंदय के बाद निद्रा त्याग किया है, से कहा जाये कि शैतान ने आपके कान में मूत्र त्याग किया है तो वह कहने वाले को मानसिक रोगी ही समझेगा। ऐसे में यह मौलानाओं का दायित्व्य बनता है कि वो इस हदीस की वैज्ञानिकता को सिद्ध करें जिससे सभी को इस हदीस की सत्यता का ज्ञान हो सके।

88 thoughts on “इस्लाम समीक्षा : जहाँ शैतान करता है कानों में पेशाब”

  1. OUM…
    ARYAVAR, NAMASTE….
    THODI SI LEKH ME BAHOOT KUCHH BATAA DIYAA AAPNE…AAP KI LEKHAN SHAILI KO NAMAN….!
    CHARAIVETI…..CHARAIVETI….
    DHANYAVAAD
    NAMASTE

  2. राजेन्द्र जिज्ञासु साहब तो क्या बताएंगे अब पहले ये हदीसे हैं कहाँ यह तो बताओ किताब नम्बर से नही नाम से पहचानी जाती हैं जैसे सही बुखारी किताबुतफ्सिर बाब सुरह फातिहा की तफ्सिर हदीस न ये होता हैं सही रेफरेंस तुम ने हदीस ही अपने मन से गढ़ ली है तो रेफरेंस क्या सही दोगे वैसे हमने सुना वेद मे भी आलंकारिक शब्द है यजुर्वेद अध्याय 31 मंत्र1 हजारों हाथ पैर सिर वाला यह मंत्र ईश्वर के लिए क्यों जब तुम्हारे यहाँ आलंकारिक शब्द हो सकते हैं तो बुखारी मे नही हो सकते क्या इंसाफ पुरा करो आलंकारिक शब्द के कारण पहले वेद का त्याग करों शैतान के पेशाब करने का अर्थ नमाज़ से निंद को बेहतर समझना भी हो सकता हैं

    1. ab aapko hadeesen bhee naheen milatee

      chalo yahan se dekh lo reference sahe hai

      person was mentioned before the Prophet (p.b.u.h) and he was told that he had kept on sleeping till morning and had not got up for the prayer. The Prophet (ﷺ) said, “Satan urinated in his ears.”

      حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، قَالَ حَدَّثَنَا مَنْصُورٌ، عَنْ أَبِي وَائِلٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ ذُكِرَ عِنْدَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم رَجُلٌ فَقِيلَ مَا زَالَ نَائِمًا حَتَّى أَصْبَحَ مَا قَامَ إِلَى الصَّلاَةِ‏.‏ فَقَالَ ‏ “‏ بَالَ الشَّيْطَانُ فِي أُذُنِهِ ‏”‏‏.‏

      Reference : Sahih al-Bukhari 1144
      In-book reference : Book 19, Hadith 25
      USC-MSA web (English) reference : Vol. 2, Book 21, Hadith 245
      (deprecated numbering scheme)

  3. सही रेफरेंस दो किताब के नाम सहीत तुमको मुँहतौड़ जवाब देना मेरी जिम्मेदारी और ईमाम बुखारी की मुसनद अल अदद के सही होने की कोई जिम्मेदारी मुसलमानों की नही क्योंकी उसमे सही गलत सब तरह की रिवायतें हैं। मैंने नमाज़ से संबंधित सारी हदीसे बुखारी मे पढ़ी है मुझे यह हदीस कहीं नही मिली किताब 21 मैं भी नही हैं यहाँ तक की 700 साल पुरानी बैरुत की हदीस मे भी नही मिली

    1. 🙂 chalo koi naheen aapko n milee to bhee hamara hee dosh hai
      https://sunnah.com/bukhari/19

      yanan jake dekho lo

      person was mentioned before the Prophet (p.b.u.h) and he was told that he had kept on sleeping till morning and had not got up for the prayer. The Prophet (ﷺ) said, “Satan urinated in his ears.”

      حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، قَالَ حَدَّثَنَا مَنْصُورٌ، عَنْ أَبِي وَائِلٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ ذُكِرَ عِنْدَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم رَجُلٌ فَقِيلَ مَا زَالَ نَائِمًا حَتَّى أَصْبَحَ مَا قَامَ إِلَى الصَّلاَةِ‏.‏ فَقَالَ ‏ “‏ بَالَ الشَّيْطَانُ فِي أُذُنِهِ ‏”‏‏.‏

      Reference : Sahih al-Bukhari 1144
      In-book reference : Book 19, Hadith 25
      USC-MSA web (English) reference : Vol. 2, Book 21, Hadith 245
      (deprecated numbering scheme)

  4. ये हदीस बस यएस की साइट पर ही हैं हम इसे ओरिजनल बुखारी मे खोज रहे है किताब 21 और 19 मे तो यह हदीसें हमे नही मीली हैं अंग्रेजी की वेबसाइट की इंटरनेशनल नम्बरिंग भी मेच नही खा रही हैं न बाब मेच खा रहा हैं खोज जारी है पुरी बुखारी तीन चार बार पढ़ेंगे

    1. मेरे भाई यदि https://sunnah.com/bukhari/19 us कि साईट है तो ये कहा की साईट है http://www.searchtruth.com/book_display.php?book=21&translator=1&start=20 | और us की साईट पर जो बोला गया है वह इंटरनेशनल नंबरिंग से ही की गयी है जिस बारे में आप राहुल झा से हमेशा चर्चा करते हैं और यदि आप उसका प्रमाण स्क्रीनशॉट लेना चाहते हो तो आपको fb पर राहुल झा जी दे देंगे | दुखी की बात यह है की प्रमाण देने पर भी आप उसे स्वीकार नहीं करते | राहुल झा हमारे अच्छे मित्र हैं इस कारण उनसे आप सबके बारे में बात होते रहती है उन्ही के बोलने के कारण आपके कमेंट को जल्द जल्द साईट पर शामिल कर दी जाती है नहीं तो हमारे साईट पर १०० से ऊपर कमेंट है जिसे धीरे धीरे उन सबके जवाब दी जाती है | हमने अब तक २ साईट से यह साबित कर दिया की जो हमने साईट पर डाला है वह प्रमाण के साथ डाला है | आप अब हदीस के आधार पर अल तकईया करते रहे | धन्यवाद | दुसरे सवाल का जवाब रिसभ जी आपको दे देंगे | जवाब मैं भी दे सकता हु दुसरे कमेंट का मगर जवाब वे ही देंगे |

      1. चलों मैं आर्य समाज अपनाता हूँ सचाई देखकर पर एक शर्त हैं।

  5. is hadees ka earth fathul bari jild 4 hadees1076 mein usool hadees samet shetan me kan me peshab karne ka matalab wasvase dalna h taking namazi soya rahe

  6. जवाब — 1- हर भाषा मे कहावते और मुहावरे होते हैं जैसे नाक मे दम करना — अब इसका यह मतलब कोई नही लेता की नाक दबा दी या हक़ीक़त मे नाक मे दम कर दिया ।बल्कि मतलब होता है परेशान करना ।इसी तरह दांत खट्टे करना इस मुहावरे का मतलब यह नही लिया जाता की किसी ने दांत पर निम्बू नीचोड़ दिया और जो इसका यह मतलब लेगा वह बेवकूफ ही कहलायेगा। और आर्य समाजी अकसर ऐसी बेवकूफियां करते रहते हैं ।इसका मतलब करारी टक्कर देना हैं ।वैसे ही इस हदीस का मतलब हकीकत मे कन मे पेशाब करना नही हैं इस क्यों माना जाये 1– हदीस के अल्फ़ाज़ है वो सोता रहा जबकि हकीकत मे पेशाब किया होता शैतान ने तो वह उल्टा गीले पन के कारण उठ जाता 2– यह बात तो 1400 साल पहले भी हर आदमी को पता थी और अगर यह बात हज़रत मुहम्मद अपने मं से गढ़ लेते तो उनको तो उल्टी चिंता होती की अगर ऐसी बेवकूफी भारी बात करूँगा तो मेरी की करायी मेहनत पर पानी फिर जायेगा लेकिन ऐसा न होना साबित करता ह की उस ज़माने के लोग जानते थे की यहां हकीकत मे पेशाब करना नही है बल्कि यहां बात कुछ और हैं ।अब सवाल पैदा होगा वह क्या है तो वह है शैतान ने आदमी को इस महसूस करयकि  अभी रात है सो जा थोड़ी देर बाद उठ जाना और इस वास्वसे से वह सोता रहा

    2– यही बात फतहुल बारी जिल्द 4 हदीस 1076 मे दर्ज़ हैं और उन्होंने आर्य समाज की सोच पर भी टिप्पणी कर दि हैं आज से 1300 साल पहले ही

      1. यही शिकायत तो मेरी भी है सनातनी तो सेकड़ों सालों से वेदों का गलत अर्थ करते आ रहे हैं दयानन्द सरस्वती जी के किसी गुरु किसी वेद विद्वान को भी न सुझा सनातनियों को जवाब देना सुझा तो सिर्फ दयानन्द सरस्वती को वैसे ही मेरा उदाहरण भी ले लो

        1. Sanataniyon ne ved ke arth kahan galat kiye han kuch dasyu manas putra huye unhen hee sujhe ☺️
          Kaan men peshab karne men fanse aapki majburi samjh sakte hein

      2. रीश्वा जी अगर आप वाकई आर्य होते तो आपको दिखता की वेद मे ईश्वर को इससे भी अजीब कहावते सूझ चुकी हैं जिसमेसे एक का उदाहरण नासिर ने भी दिया था ईशवर वेद मे अपनी सर्व व्यापकता यूँ बताता हैं जिसके हज़ारों हाथ हैं हज़ारों आँखें हैं और पैर है यद्दपि दयानंद जी ने इसका अर्थ यह बताया की सारे जीव ईशवर के अंदर हैं जबकि brahmamand मे तो करोड़ों जीव हैं फिर भी वेदिक ईश्वर को ऐसी मूर्ख कहावत सूझी क्या वेदिक ईश्वर को अपनी सर्वव्यापकता बताने के लिए इससे अधिक सुथरा शब्द न मिला था । सवाल किसी पर भी उठाये जा सकते हैं आर्य समाजी कोई तोप नही पर मुसलमान आर्यसमाजियों की तरह नही हैं ।

        1. ऋषी दयानंद के बाद आपको एक नौई दिशा मिली है दो अल्लाह दो क़ुरआन इत्यादि जिल्दें इसकी चीख चीख कर गवाही दे रही हैं

          1. हमने उनका समर्थन किया हम तो आज भी जवाब 1400 साल वाले तरीके से ही देते हैं मैंने सब चेक किया दयानंद जी के बाद सिर्फ कादियानियों ने और सर सैयद खान ने अपनी तअर्ज़ बदली हैं बाकी ने सिर्फ इतना किया कूफ़ी तरीका छोड़ कर हदीस का तरीका अपनाया हैं

            1. तो क्या सर सैयद मुसलमान नहीं
              या कादियानी मुसलमान नहीं ?

    1. नासिर भाई बहोत ही सटीक और ज्ञानवर्धल उत्तर दिया आपने

      1. कहावत है :
        उष्ट्रानी विवाहेषु गीतं गायन्ति गर्दभा
        परस्पर प्रशनशन्ति अहो रूपम अहो ध्वनि
        ऊटों के विवाह में गधे गाना गा रहे हैं और एक दुसरे कि प्रशंशा में कह रहे हैं वाह क्या रूप है वाह क्या ध्वनि है

        आपकी ये प्रशंषा कुछ ऐसी ही प्रतीत होती है

          1. शैतान का कान में पेशाब करना, अल्लाह का धरती को स्थिर करने के लिए उस पर पहाड़ बना देना फरिश्तों का कुत्तों से डर कर भाग जाना
            सूरज का शैतान के सींगों में उगना

            ये कौनसी कहावतें हैं सरफराज

  7. अच्छा तो जरा वेद की कुछ मेरी मजबूरियों का भी निराकरण करना जी यह सिन तानना उनको शोभा देता हैं जिनके ईश्वर ने अपने ग्रंथों मे अलंकारिक शब्दों का प्रयोग न किया हो कुछ शब्दों का कारण हमे भी बताओ क्यों ईशवर ने इनका प्रयोग किया

    1. ईश्वर सर्वज्ञ है उसके सामने क्या मजबूरी।
      वह अल्लाह की तरह नहीं जिसको पहला नबी ही जिसे उम्मत को रास्ता दिखाने के लिए बनाया शैतान का शिकार हो गया

  8. वेदों मे ऐसे ऐसे मंत्र हैं आर्य समाजियों के ही भाष्य के की आपकी आँखे चक्र जायेगी और पर मुझे वाद विवाद मे कोई रूची नही 25 साल खूब किया हैं वाद विवाद एक बात ने आज फिर मेरे 18 साल पुराने दिन याद दिला दिए जब नासिर किशोर थे तब हम भी आपकी तरह उनके जवाब का खंडन न करके इधर उधर की बातें ही करते हैं ।वो नास्तिक होकर भी ईमानदार थे और हम धार्मिक होकर भी ईमानदार न थे आपने उनके इस तर्क का जवाब न दिया की आखिर भाषा मे नाक मे दम करना और दांत खट्टे करना जैसे शब्दों को मान्यता क्यों दी गई हैं आपको पहले उन भाषा शास्त्रियों का खंडन करना होगा जिन्होंने भाषा मे आलंकारिक शब्दों का प्रयोग किया आपके अनुसार यदि वेद प्रथम ही हैं तो अलंकारिक भाषा का जनक तो खुद ईश्वर हुवा आपकी पहली शिकायत तो ईश्वर से होनी चाहिए यदि नही तो मुहम्मद साहेब पर आपत्ति का क्या लाभ मुसलमानो पर तब उंगली उठाना जब वेद मंत्रों से अजीब आलंकारिक मंत्रो को निकाल बाहर कर दो वरना अभाव मे सिद्ध तो यही होगा जवाब असल मे आपके पास हैं नही । शुक्रिया आपका मेरी पुरानी यादें ताज़ा करने का 10 साल नासिर कुरैशी को वेदिक धर्मी बनाने के लिए की गयी बहस को याद करवाने के लिए ।

    1. शैतान का नाक में मूत्र त्याग करना कोई आलंकारिक भाषा नहीं है यदि है तो शैतान का नाक में सोना उसे पानी से बाहर निकालना ये कौनसी आलंकारिक भाषा है । मक्खी के पंखों में रोग प्रतिरोधक होना फरिश्तों का कुत्ते से डरना फरिश्तों का लड़ने आना मक्का की रखवाली करना धरई का गेंद की तरह उछलना और उसे स्थिर करने के लिए पहाड़ रख देना ऐसे बातों से हदीस भारी पड़ी हैं क्या यही अल्लाह का इल्म है जो उसने नाज़िल किया ?

    2. नन्दिता जी (बहन जी/भाई जी यह आप निर्धारित कर लें) तो यह तो आपके स्वाध्याय की ही कमी थी कि आप इधर उधर की बाते करती थी बजाय जवाब देने के

      रही बात नासिर जी को सनातन धर्म में लाने की तो हमारी नीति इस्लाम की तरह जबरदस्ती धर्मांतरण की नही अपितु व्यक्ति को सत्य प्रस्तुत कर उसे समझाने की है

      अब सामने वाला पृवाग्रह से ग्रसित हो तो इसका कोई उपचार है नही

      और आप अपने कमेंट में भावनात्मक जवाब देने के स्थान पर शास्त्रीय कमेंट कर तो ज्यादा बेहतर रहेगा

      ऐसे अपनी जीवनी यहां बताने से लाभ नही कोई जवाब नही देगा

      धन्यवाद

      1. कहावत है :
        उष्ट्रानी विवाहेषु गीतं गायन्ति गर्दभा
        परस्पर प्रशनशन्ति अहो रूपम अहो ध्वनि
        ऊटों के विवाह में गधे गाना गा रहे हैं और एक दुसरे कि प्रशंशा में कह रहे हैं वाह क्या रूप है वाह क्या ध्वनि है

        आपकी ये प्रशंषा कुछ ऐसी ही प्रतीत होती है

      1. कहावत है :
        कहावत है :
        उष्ट्रानी विवाहेषु गीतं गायन्ति गर्दभा
        परस्पर प्रशनशन्ति अहो रूपम अहो ध्वनि
        ऊटों के विवाह में गधे गाना गा रहे हैं और एक दुसरे कि प्रशंशा में कह रहे हैं वाह क्या रूप है वाह क्या ध्वनि है

        आपकी ये प्रशंषा कुछ ऐसी ही प्रतीत होती है

  9. नंदिता जी

    ईशवर वेद मे अपनी सर्व व्यापकता यूँ बताता हैं जिसके हज़ारों हाथ हैं हज़ारों आँखें हैं और पैर है ………..उत्तर ।। ईश्वर के हाथ पैर नही है। ईश्वर ब्रममंड की शक्ति को ब्रम बोलते है और उस्सी ब्रम को ईश्वर गॉड परमात्मा के नाम से लोग पुकारते है।। और उस्सी शक्ति से ब्रममंड चलता है और वो शक्ति हर जगह है। अपने गलत व्याख़्या की है वेदों के मंत्र की

    1. वाह जी मेरी बात से कही आपको लगा मैंने नासिर को जबरन सनातन धर्म मे लेन की कोशिश की हो और आप खुद को देखिए नासिर के इब्न हज़ार वाले जवाब का एक तोड़ भी ढंग से आप लोग अब तक नही दे पाए बस हठ धर्मी पर लगे हो मुझे आपकी तरह हठ धर्मी नही आती सच को स्वीकारना ही धर्म हैं ।इस्लाम मे जबर दस्ती नही इसके लिए 2 आयते काफी होगी 1* सूरह यूनुस 99 क्या तू लॉगऑन को मजबूर करेगा कि वे इस्लाम ले ही आये और 2 सौराह बकर 256 धर्म मार्ग में कोई जबरदस्ती नही ।इधर उधर की बातों के बजाय यह बताओ कि धर्म ग्रंथों में अगर मुहावरे हो सकते हैं तो हदीस में क्यों नही

      1. Nandita ji jis sura bakar ki aayat 256 ki aap bat kar rahe hein wo to Madani aayat hai jab Muhammad sahib ke khud ke follower naheen the to wo shanti ki baten karte hein
        use samay ye aaayat utaree huyee hai lekin Muhammad sahib ki dusari aayton se aur practice ye to Mansukh ho jaatee hia
        ye jo 2 aayaten hein iske bad ki hein

        When the [four] forbidden months are over, wherever you encounter the idolaters kill them, seize them, besiege them, wait for them at every lookout post; but if they turn [to God], maintain the prayer, and pay the prescribed alms, let them go on their way, for God is most forgiving and merciful.

        — Qur’an, 9:5

        Fight those of the People of the Book who do not [truly] believe in God and the Last Day, who do not forbid what God and His Messenger have forbidden, who do not behave according to the rule of justice, until they pay the tax and submit to it.

        — Qur’an, 9:29

        iske atiritk yadi aap Muhammad asahab ke Khaibar par kabja karne ka karan batayenge to aapko ye aayat bhee Mansukh hee nazar aayegi 🙂

  10. वेदों मे ऐसे ऐसे मंत्र हैं आर्य समाजियों के ही भाष्य के की आपकी आँखे चक्र जायेगी और पर मुझे वाद विवाद मे कोई रूची नही 25 साल खूब किया हैं ।।

    उत्तर।
    आप वो मंत्र पेश कर दीजिये देख ते कोनसे मंत्र से मेरा सर चक्र जाता है।।

    वेदों के मंत्र की वोही वयाखया उचित हे जो प्रकुति और विज्ञानं के अनुकूल हो । अन्य नही।।

    1. बहुत सारे मंत्रो को देने का तो मेरे पास समय नही मगर आपको हदीस के शब्द पर आपत्ति है तो नीचे जो मंत्र दे रही हूँ ।उससे संबंधित 3 प्रश्नो के उत्तर बिना इधर उधर की बाते किये हुए दे दीजिए।
      1– इश्वर ने अपनी शक्ति को समझने के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल क्यों किया और ब्रहहमन ग्रंथकारों को कैसे पता लगा की इन मंत्रो मे वास्तविक हाथ पैर का उल्लेख नही हैं ।सबूत दीजिए
      2– यदि ईश्वर को पता था आधुनिक युग में लोग ऐसे शब्दों का अर्थ न समझ पाएंगे तो इनके अर्थों को तत्कालीन ऋषियों से क्यों न साफ करवाया और अगर बाद के भाष्य कारों की माननी ही हैं तो दूसरों के जवाब के खंडन से पहले आप वेद ऋषियों के बाद वाले भाष्यकारों का पहले खण्डन क्यों नही करते
      3- यदि ईशवर निराकार हैं और सर्वयापक हैं तो चारो तरफ हाथ आदि का शब्द क्यों?

      1. ईश्वरीय ज्ञान की निस्सारिता समयाभाव को प्रगट करटी है।
        वेद यहां विषय नहीं अपितु हदीसें हैं लेकिन आपके आक्षेप का जवाब क़ुरआन के विभिन्न सूराओं के आरंभ में आई वो आयतें हैं जिनका अर्थ न किसी को मालूम है न ही मालूम करने की आवश्यकता आलिमों द्वारा कहीं गई है अलिफ़ लाम मीम जैसी इन आयतों के क्या अर्थ हैं यदि मानवमात्र के लिए नहीं तो रखने की क्या आवश्यकता ?

  11. बहुत पहले मैंने अपने ऑरकुट अकाउंट एक पोस्ट ऐसे ही सवाल के जवाब में डाली थी जिसे यहां ओंलिने backup स्टोरेज से पोस्ट कर देती हूँ जवाब देना1– इश्वर ने अपनी शक्ति को समझने के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल क्यों किया और ब्रहहमन ग्रंथकारों को कैसे पता लगा की इन मंत्रो मे वास्तविक हाथ पैर का उल्लेख नही हैं ।सबूत दीजिए
    2– यदि ईश्वर को पता था आधुनिक युग में लोग ऐसे शब्दों का अर्थ न समझ पाएंगे तो इनके अर्थों को तत्कालीन ऋषियों से क्यों न साफ करवाया और अगर बाद के भाष्य कारों की माननी ही हैं तो दूसरों के जवाब के खंडन से पहले आप वेद ऋषियों के बाद वाले भाष्यकारों का पहले खण्डन क्यों नही करते
    3- यदि ईशवर निराकार हैं और सर्वयापक हैं तो चारो तरफ हाथ आदि का शब्द क्यों? मंत्र इस प्रकार हैं। जब ऋग्वेद परमेश्वर को विश्वचक्षाः अर्थात ‘समस्त जगत का दृष्टा परमेश्वर‘ कहता है (देखो मण्डल 10, सूक्त 81, मंत्र 2) तो क्या तुम्हारे ईश्वर की वास्तव में आँखें (चक्षु) हैं? इसी के बाद का मंत्र इस प्रकार है विश्वतश्चक्षुरुत विश्वतोमुखो विश्वतोबाहुरुत विश्वतस्पात् | अर्थात – सब तरफ आखों वाला, सब तरफ मुख वाला, सब तरफ बाहु वाला, सब तरफ पैर वाला (परमेश्वर है) [ ऋग्वेद 10/81/3] अब अगर कोई इनसे पूछे कि क्या तुम्हारे परमेश्वर की आँखें, मुख, बाज़ू और पैर हैं, इसका जवाब अगर आप पूर्व विद्वानों के संदर्भ से दे तो आपको भी मुसलमानो के पूर्व विद्वानों के संदर्भ स्वीकार होने चाहिए ।और यदि नही तो ऐसे अजीब मंत्र आपको अजीब न लगाने का कारण तो इन विद्वानों के भाष्य ही हैं ।कोई ठोस तर्क अब तक मुझे आपके एक जवाब मे नज़र नही आया।

    1. वेद यहां विषय नहीं अपितु हदीसें हैं लेकिन आपके आक्षेप का जवाब क़ुरआन के विभिन्न सूराओं के आरंभ में आई वो आयतें हैं जिनका अर्थ न किसी को मालूम है न ही मालूम करने की आवश्यकता आलिमों द्वारा कहीं गई है अलिफ़ लाम मीम जैसी इन आयतों के क्या अर्थ हैं यदि मानवमात्र के लिए नहीं तो रखने की क्या आवश्यकता ?

    2. नंदिता जी,

      में आपके प्रश्नो पर में थोड़ा प्रकाश डाल रहा हूं।

      1– इश्वर ने अपनी शक्ति को समझने के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल क्यों किया और ब्रहहमन ग्रंथकारों को कैसे पता लगा की इन मंत्रो मे वास्तविक हाथ पैर का उल्लेख नही हैं ।सबूत दीजिए

      उत्तर – इसके लिए आपको संस्कृत की उचित जानकारी होना आवश्यक है। संस्कृत में घोड़े को अश्व कहा जाता है, परन्तु जब वो गुणवाचक संज्ञा होता है तो अश्व का अर्थ गतिशील होता है। जो संस्कृत को ठीक से जानते है वो उसका उत्तर दे सकता है।

      2– यदि ईश्वर को पता था आधुनिक युग में लोग ऐसे शब्दों का अर्थ न समझ पाएंगे तो इनके अर्थों को तत्कालीन ऋषियों से क्यों न साफ करवाया और अगर बाद के भाष्य कारों की माननी ही हैं तो दूसरों के जवाब के खंडन से पहले आप वेद ऋषियों के बाद वाले भाष्यकारों का पहले खण्डन क्यों नही करते

      उत्तर – वेद संस्कृत भाषा और व्याकरण में लिखे गए है, और ये विधानों के सुरक्षा के लिए ऐसे वेद बनाये गए है। तो इसमें किसी ऋषि के हस्तक्षेपण की आवश्यकता ही नहीं थी। जिसे संस्कृत का उचित ज्ञान प्राप्त हुआ वो वेद के अर्थो को समझ सका, जिसे न हुआ वो वेदो का अनर्थ कर गया। वेदो में प्रक्षेपण करना सरल नहीं था इसलिए पाखंडियो ने कृष्ण यजुर्वेद नाम से अलग शाखा बनाई।
      और आर्य समाज हर पाखंडियो का खंडन करता ही है। जिसने वेदो का अनुचित अर्थघटन किया, उसका खंडन करते ही है।

      3- यदि ईशवर निराकार हैं और सर्वयापक हैं तो चारो तरफ हाथ आदि का शब्द क्यों? मंत्र इस प्रकार हैं। जब ऋग्वेद परमेश्वर को विश्वचक्षाः अर्थात ‘समस्त जगत का दृष्टा परमेश्वर‘ कहता है (देखो मण्डल 10, सूक्त 81, मंत्र 2) तो क्या तुम्हारे ईश्वर की वास्तव में आँखें (चक्षु) हैं? इसी के बाद का मंत्र इस प्रकार है विश्वतश्चक्षुरुत विश्वतोमुखो विश्वतोबाहुरुत विश्वतस्पात् | अर्थात – सब तरफ आखों वाला, सब तरफ मुख वाला, सब तरफ बाहु वाला, सब तरफ पैर वाला (परमेश्वर है) [ ऋग्वेद 10/81/3] अब अगर कोई इनसे पूछे कि क्या तुम्हारे परमेश्वर की आँखें, मुख, बाज़ू और पैर हैं, इसका जवाब अगर आप पूर्व विद्वानों के संदर्भ से दे तो आपको भी मुसलमानो के पूर्व विद्वानों के संदर्भ स्वीकार होने चाहिए ।और यदि नही तो ऐसे अजीब मंत्र आपको अजीब न लगाने का कारण तो इन विद्वानों के भाष्य ही हैं ।कोई ठोस तर्क अब तक मुझे आपके एक जवाब मे नज़र नही आया।

      उत्तर – जो बातें तर्कपूर्ण है उसका समर्थन हमेशा होता है, चाहे वो किसी भी मत के द्वारा कही गई हो। और जो तर्कपूर्ण न हो उसका खंडन होता रहता है। कुरान में ऐसी ही बात है की जिस तरफ नज़र करो वहां अल्लाह का मुँह है, और में कहता हूं की ये बहोत ही अच्छी बात है। पर अगर हर तरफ अल्लाह का मुँह है, तो नमाज़ पढ़ने के लिए सिर्फ काबा की तरफ क्यों मुँह किया जाता है?

      – धन्यवाद्

  12. वे हुरूफ़ के खास हैं ।और आम तौर बाद के लोग सूक्त और मंडल का नाम रखते हैं यहाँ अल्लाह ने कुछ खास सूरतों का नाम खुद रख दिया तो आपको क्या आपत्ति हैं क्या हजरत मुहम्मद ने कहा कि इसका अर्थ कोई नही जानता या अल्लाह ने दावा किया यूँ तो वैदिक धर्मियों को भी ईश्वर ने नही बताया कि ईश्वर किस मटेरियल का बना हैं पर फिर भी वो वेद को मानते हैं बस मुसलमानो के सूरतों के नाम के अर्थ जानने की जिद में लगे रहते हैं अरे भई सबको दिखता हैं कि वो सूरतों के नाम भी हैं और हुरूफ़ के खास और कायदा के खास भी हैं ।आप ही ज्यादा अक्ल लगाओ तो आपकी मर्जी

    1. अल्लाह ने कुछ खास सूरतों का नाम खुद रख दिया ???? kya alif laam meem ityadi Suraten hein ? ye naya Ilm diya aapen

      आपको क्या आपत्ति हैं क्या हजरत मुहम्मद ने कहा कि इसका अर्थ कोई नही जानता : aapatti isliye hai ki jab ye awashyak hee naheen tha to dene ka kya arth tha ? Jab isaki aawashyakta usaki ummat ko naheen thee to fir ise dene ki aawshyakta hee kya thee

      1. यह इल्म पहले से ही हैं सुरह का पहला वाक्य उसे मुखातफ ही होता हैं जैसे सुरह फुसिलत को हामीम सज्दा भी कहा जाता हैं और अलीफलाम मीम यह सुरह बकर का मुखातफ इन हुरुफ से अल्लाह ने इसकी शुरुआत की

        1. सुरह का नाम तो अलिफ़ लाम मीम नहीं हो जाता इससे यदि ऐसा है तो बताएं

      2. कौन कहता हैं की उम्मत को आवशयकता नही थी इन हुरुफ का इस्तेमाल भाषा मे अहम किरत के कानुन मे होता हैं महाशय जरुरत हुरुफ के बिना कलमा बन ही नही सकता

        1. हाँ कलमा तो हुरूफों से बना वो ठीक है लेकिन स्वतंत्र रूप से हुरूफों कि क्या आवश्यता है
          जब तक हुरूफ़ किसी लफ्ज को नहीं बयां करते उनका अर्थ क्या है
          मुहम्मद साहब उनसे क्या कहना चाहते थे

  13. उत्तर – वेद संस्कृत भाषा और व्याकरण में लिखे गए है, और ये विधानों के सुरक्षा के लिए ऐसे वेद बनाये गए है। तो इसमें किसी ऋषि के हस्तक्षेपण की आवश्यकता ही नहीं थी। जिसे संस्कृत का उचित ज्ञान प्राप्त हुआ वो वेद के अर्थो को समझ सका, जिसे न हुआ वो वेदो का अनर्थ कर गया। वेदो में प्रक्षेपण करना सरल नहीं था इसलिए पाखंडियो ने कृष्ण यजुर्वेद नाम से अलग शाखा बनाई।
    और आर्य समाज हर पाखंडियो का खंडन करता ही है। जिसने वेदो का अनुचित अर्थघटन किया, उसका खंडन करते ही है।
    जवाब का जवाब — तो जनाब यही बात हदीस के लिए भी कही जा सकती हैं कि लोग मुहावरों के जानकार होते थे तो हज़रत मुहम्मद ने मुहावरे में बात की ताकि सही ज्ञान रखने वाले लोग जान जाए फिर भी आपने हदीस पर सवाल क्यों किया ।और यह कौन सा व्याकरण हैं कि हज़ार हाथ पैर से सर्वव्यापकता समझना बताओ ।

    1. Shaitan ka kan me peshab karna fir use paani se dhona
      kutton se farishton ka darna
      dharti hilateee hai isliye allah milya ka pahadon ko bana dena
      suraj ka seengon par udnaa

      ye kaunse muhaware hein

      jag jao ab to islam men bhee karnti aa rahee hai in hadeeson ko jhutlaane lage hein ab Muhammad sahabe ke kahe ye sabd allah ke wakya naheen rahe

      Pakistan ke ek Varishth lekhak ne to yahant tak kah diya ki yadi ye baten ham radio par sunayen to tamam log Islam chchod jayenge

      http://aryamantavya.in/when-people-will-leave-islam/

      1. कुत्तों से तो कुछ इंसान भी डरते हैं ।फ़रिश्ते डरे तो क्या हैरत की बात हैं सारे फरीश्ते तो नही डरते जिन फरीश्तों को कुत्ते पसंद न हो वो उनके पास नही जाते इसमे इतना उछलने की क्या बात हैं आजकल के डॉक्टर बाईपास कर दे फरीश्ता करे तो हैरत क्यों मुहद्दीस इस्हाक मदनी इस हदीस के बारे मे लिखते है यह सब रसुल के सिने को उस लायक बनाने के लिए था जिसमे अल्लाह की तरफ से वो ताकत दी गई की दौज़क और जन्नत की हैरतंगेज़ मनाज़िर को बर्दाश्त कर सके इसमे नामुमकीन जैसा क्या हैं

        1. नंदिता मोहतरमा जी
          कुत्तो से तो इंसान डरते हैं मगर फ़रिश्ते डरे यह बात समझ से बाहर है क्यूंकि फ़रिश्ते जब एक फूंक से मरयम को गर्भवती कर देता है फिर फ़रिश्ते अपने शक्ति से कुत्ते से हार जाता है यह तो अल्लाह पर दोष लगेगा और अल्लाह की हार होगी |

    2. नन्दिताजी,

      सर्वप्रथम आपके प्रश्न और समस्या का समाधान।

      “तो जनाब यही बात हदीस के लिए भी कही जा सकती हैं कि लोग मुहावरों के जानकार होते थे तो हज़रत मुहम्मद ने मुहावरे में बात की ताकि सही ज्ञान रखने वाले लोग जान जाए फिर भी आपने हदीस पर सवाल क्यों किया ।”
      उत्तर – ये तो आप अपनी बात का ही खंडन कर रही हो। मुस्लिम खुद ही कहते है की कुरान-हदीस सरल ज्ञान ग्रन्थ है, और काम पढ़ा-लिखा भी कुरान-हदीस पढ़ कर समझ सकता है।

      “और यह कौन सा व्याकरण हैं कि हज़ार हाथ पैर से सर्वव्यापकता समझना बताओ।”
      उत्तर – हर धर्म में मान्यता है की ईश्वर कण कण में है। और हर कण का कोई आकर होता ही है। तो यह एक अलंकारिक भाषा है।

      अब में कुछ और बातें रखता हुं यहाँ पर।

      जो योग्य है उसे समजा जा सकता है। जो योग्य नहीं है, उसका तर्क-वितर्क तो होगा ही ना। मुझे बताएँगे की कान में पेशाब करने में कौन सा मुहावरा है?

      अगर में बोलता हुं की “रात को जब लोग सोते है, तब चोरी होने का भय अधिक होता है।”, तो यहाँ पर चोरी होने का भय होना भी मुहावरा हो गया। और ऐसे तो हर बात मुहावरा ही हो गयी ना।
      हर मुहावरे का कोई सन्दर्भ ठहरता है। अगर कोई कहता है की “आज तो बारह बज गए”, तो यहाँ पर समज में आता है की आज का उसका दिन अच्छा नहीं रहा। अगर कोई कहता है “अरे! बारह बज गए”, ये कोई मुहावरा नहीं है।
      मैंने पहले भी कुरान का एक उदहारण दिया था आपको। कुछ और उदहारण देखते है।

      १> ब्याज लेना हराम है।
      – यहाँ पर बताया है की लालच नहीं करना चाहिए। यह अच्छी बात है।

      २> अल्लाह मकर करने वाला है।
      – यहाँ पर कुछ लोग आधा निकल कर बताते है, इसके पहले भी कुछ है। और इसका मतलब यह है की तुम किसीसे धोखा करोगे तो अल्लाह भी तुमसे धोखा करेगा। यह लोगो को गलत काम करने से रोकने के लिए है।

      ३> कुरान एक रात में उतर कर आयी है।
      – इसका अर्थ यह नहीं की कुरान सीढ़ियों से उतर कर दूसरे या तीसरे मजले से निचे आयी। यहाँ पर कहा गया है की कुरान का ज्ञान एक ही रात में मिला था।

      ये सारे अलंकारिक या मुहावरे वाली बातें है। अब ये एक उदहारण देखो।

      “अल्लाह को जो उधार देता है, अल्लाह उसे दुगुना कर के वापस करता है।”
      – ये कोई मुहावरा नहीं है। यहाँ पर बिलकुल ये बताया है अल्लाह को उधार दो। और कोई भी सवाल करेगा की अल्लाह सर्वशक्तिमान हो कर उधार क्यों मांग रहा है।

      शैतान का कान में पेशाब करना ये बात इसलिए बताई गयी होगी की लोग सुबह को उठ कर नमाज़ पढ़े, और ये समझा जा सकता है। पर ये मुहावरे में नहीं नहीं आ सकती। परन्तु अंधश्रद्धा में अवश्य आ सकती है। जैसे बड़े लोग कभी कभी बच्चो को कही जाने से रोकने के लिए डराते है की वहां मत जाओ वहां भुत निकलता है, ठीक वैसी बात है ये।

      – धन्यवाद्

  14. शैतान नाक में मोटर तयाग का कोई आलंकारिक भाषा नही हैं कितनी भाषाएँ आप दिख सकते हो जिनमे उनके बनाने के बाद नए शब्द न जुड़े हो आपको यह तर्क तब सही होता लेकिन अरबी भाषा मे तो एक व्यवस्था ऐसी हैं जिसके तहद मुशबेह शब्द लाये जाते हैं जैसे बपसी तयिरह और चूंकि पेशाब नापाक होता हैं और वसवसे भी नापाक होते हैं इस बिना पर और पेशाब ही ऐसी नापाक चीज़ हैं । देखने मे तो लोहे के कहने चबाने आंखों का तारा होना इसका भी कोई समबद्ध नही पर मुहावरा तो मुहावरा हैं कोई एक चीज़ पूरे वाक्य से मेल खाये टैब भी मुहावरा बन जाये अब हज़ारों हात वाली बात भी कहाँ मेल खाती हैं

    1. 🙂
      ये कौनसी कहावत है जो बुखारी को न सूझी और आपको सूझी ?

  15. वैसे ही जैसे किसी को दांत खट्टे करना और गुदड़ी का लाल ,हाथकंगन को आरसी क्या किसी को सुझी जैसे नाक मे दम किसी को सुझी शब्द का विरोध करने का अधिकार उनका था जिनके दौर मे यह शब्द आया और सबसे बडी गलत कहावत तो ईश्वर के हजार हाथ पैर आँखे बताना हैं गौया ईश्वर ना हुआ आकाश नामी कीड़ा हुआ जिके कई लेंस होते हैं पहले अपने घरों मे झांकों और ईश्वर से पुछो ये अजीब मंत्र उसे क्यों सुझे

    1. 🙂 आपकी मज़बूरी समझ में आ रही है
      जब आपके ही नुमाइंदे लिख रहे हेई कि ये हदीसें ऐसी हैं जिन्हें हम सूना नहीं सकते लोग इस्लाम से चले जायेंगे तो आपकी मज़बूरी समझ आ जाती है

      1. सुना नही सकते महाशय तो ये वेद से ज्यादा नही छपती जिन भाषाओं को मऊसल्मान प्रचलन में लेते हैं खूब छपती हैं पैसा खर्च करके पीडीएफ में भी डाली जाती हैं जिसे हज़ार हाथ पैर बात कर भी शर्म न आई तो हमे क्यों आएगी ईश्वर शर्म न करे तो बाँदा करेगा जी बोलो

        1. शैतान का कान में पेशाब करना, अल्लाह का धरती को स्थिर करने के लिए उस पर पहाड़ बना देना फरिश्तों का कुत्तों से डर कर भाग जाना
          सूरज का शैतान के सींगों में उगना

          ये कौनसी कहावतें हैं

          🙂

      2. इसका जवाब ये लो हमे दयानन्द सरस्वती की मजबुरी समझ आ गई क्युँ ना ऐसे भाष्य करते और असलीयत छुपाते की वेद के ईश्वर राक्षस हैं पब्विग जो दुर भाग जाती

  16. भाई पूरी चर्चा पढ़ी लेकिन आपको भी ये क्लियर करना चाहिए कि वेदो में ऐसे शब्द ईश्वर के लिए क्यो है

    जैसे चारो और मुख वाला लिखा के ईश्वर के लिए पंडित हरिशरण जी के भाष्य में तो आपको भी क्लियर करना होगा कि खुद इतनी बडी गलती कैसे कर सकता है अपने अस्तित्व की व्याख्या में

    अब ऐसे मंत्र को कोई भी पढ़ेगा तो यही समझेगा की क्या पूरे ब्रह्मांड में ईश्वर मुंडियो से भरा पड़ा है ?

    रही बात हमारी संस्कृत जानने की तो भाई हदीस और क़ुरआन भी अरबी भाषा मे है और में जानता हूं कि एक भी आर्य पूरी तरीके से अरबी नही जानता अरे आपके महेंद्र पाल तक को भी ढंग से नही आती लेकिन में आपको अनेको मुसलमान बता दूंगा जिन्हें संस्कृत भाषा बहोत बढ़िया अति है

    तो जनाब आप क्लियर कीजिये पूरे ब्रहम्माण्ड में मुंडियो वाला ईश्वर कहा है और अगर सही उत्तर दे देंगे तो वादा करता हु आपकी बात तुरंत मांन लेंगे जो आपने हदीस के लिए लिखी है

    1. शैतान का कान में पेशाब करना, अल्लाह का धरती को स्थिर करने के लिए उस पर पहाड़ बना देना फरिश्तों का कुत्तों से डर कर भाग जाना
      सूरज का शैतान के सींगों में उगना

      ये कौनसी कहावतें हैं सरफराज

  17. कहावत है :
    उष्ट्रानी विवाहेषु गीतं गायन्ति गर्दभा
    परस्पर प्रशनशन्ति अहो रूपम अहो ध्वनि
    ऊटों के विवाह में गधे गाना गा रहे हैं और एक दुसरे कि प्रशंशा में कह रहे हैं वाह क्या रूप है वाह क्या ध्वनि है

    आपकी ये प्रशंषा कुछ ऐसी ही प्रतीत होती है

    आपने ये शब्द मेरे लिए कहे है लेकिन धन्यवाद कहूंगा क्योकि आपकी इस कॉमेंट को कोई पढ़ेगा और इसका ये अर्थ निकाले की ऊंट के भी होते है और गधे गाना भी गाते है

    तो शायद आप उसे गधा ही कहेंगे

    अब आपने जैसे हदीस का अर्थ दिया है तो गधे और मनुष्य फर्क क्या है खुद ही निर्णय कीजिए

    1. जो अल्लाह ने खरीद लिए हैं और अल्लाह ने जिनके दिलों को बंद कर दिया है वो इसका यही अर्थ निकालेंगे

  18. कहावत है :
    उष्ट्रानी विवाहेषु गीतं गायन्ति गर्दभा
    परस्पर प्रशनशन्ति अहो रूपम अहो ध्वनि
    ऊटों के विवाह में गधे गाना गा रहे हैं और एक दुसरे कि प्रशंशा में कह रहे हैं वाह क्या रूप है वाह क्या ध्वनि है

    आपकी ये प्रशंषा कुछ ऐसी ही प्रतीत होती है

    आपने ये शब्द मेरे लिए कहे है लेकिन धन्यवाद कहूंगा क्योकि आपकी इस कॉमेंट को कोई पढ़ेगा और इसका ये अर्थ निकाले की ऊंट के भी विवाह होते है और गधे गाना भी गाते है

    तो शायद आप उसे गधा ही कहेंगे

    अब आपने जैसे हदीस का अर्थ दिया है तो गधे और मनुष्य में फर्क क्या है खुद ही निर्णय कीजिए

    1. जो अल्लाह ने खरीद लिए हैं और अल्लाह ने जिनके दिलों को बंद कर दिया है वो इसका यही अर्थ निकालेंगे

  19. इधर उधर की बात छोड़कर कहावत का जवाब दे जिस भाई ने यह कहा था की कान मे मुत्र की कहावत ठीक नही तो ऊर्दु मे तो नाक पर गुसा बैठा होने की कहावत हैं जिसे कई हिन्दी कारों ने भी इस्तेमाल किया बोलो कभी गुस्सा नाक मे बैठा रहता हैं क्या मुझे तो तुम लोगों की हालत ही सख्ता लगती हैं जो पोइंट टु पोइंट जवाब देने की हीम्मत तक नही जुटा पा रहेहो

    1. इधर उधर कि बात तो आप कर रहे हो
      कान में पेशाब करना , शैतान का लोगों को बाँध देना , मक्खी के पंखों में एंटी बायोटिक होना , धरती के हिलने पर पहाड़ रखकर उसे स्थिर बना देना ::
      जरा बताओ तो सही अल्लाह मियाँ कि ये कौनसी कहवतें हैं 🙂

  20. 30 October 2016
    Sarfaraz Motaliya
    [06/09, 10:56 p.m.] SARFARAZ MOTALIYA: भाई पूरी चर्चा पढ़ी लेकिन आपको भी ये क्लियर करना चाहिए कि वेदो में ऐसे शब्द ईश्वर के लिए क्यो है
    जैसे चारो और मुख वाला लिखा के ईश्वर के लिए पंडित हरिशरण जी के भाष्य में तो आपको भी क्लियर करना होगा कि खुद इतनी बडी गलती कैसे कर सकता है अपने अस्तित्व की व्याख्या में
    अब ऐसे मंत्र को कोई भी पढ़ेगा तो यही समझेगा की क्या पूरे ब्रह्मांड में ईश्वर मुंडियो से भरा पड़ा है ?
    रही बात हमारी संस्कृत जानने की तो भाई हदीस और क़ुरआन भी अरबी भाषा मे है और में जानता हूं कि एक भी आर्य पूरी तरीके से अरबी नही जानता अरे आपके महेंद्र पाल तक को भी ढंग से नही आती लेकिन में आपको अनेको मुसलमान बता दूंगा जिन्हें संस्कृत भाषा बहोत बढ़िया अति है
    तो जनाब आप क्लियर कीजिये पूरे ब्रहम्माण्ड में मुंडियो वाला ईश्वर कहा है और अगर सही उत्तर दे देंगे तो वादा करता हु आपकी बात तुरंत मांन लेंगे जो आपने हदीस के लिए लिखी है
    REPLY
    [06/09, 11:28 p.m.] SARFARAZ MOTALIYA: कहावत है :
    उष्ट्रानी विवाहेषु गीतं गायन्ति गर्दभा
    परस्पर प्रशनशन्ति अहो रूपम अहो ध्वनि
    ऊटों के विवाह में गधे गाना गा रहे हैं और एक दुसरे कि प्रशंशा में कह रहे हैं वाह क्या रूप है वाह क्या ध्वनि है
    आपकी ये प्रशंषा कुछ ऐसी ही प्रतीत होती है
    आपने ये शब्द मेरे लिए कहे है लेकिन धन्यवाद कहूंगा क्योकि आपकी इस कॉमेंट को कोई पढ़ेगा और इसका ये अर्थ निकाले की ऊंट के भी विवाह होते है और गधे गाना भी गाते है
    तो शायद आप उसे गधा ही कहेंगे
    अब आपने जैसे हदीस का अर्थ दिया है तो गधे और मनुष्य में फर्क क्या है खुद ही निर्णय कीजिए
    3 hours ago · Sent from Messenger
    Sarfaraz Motaliya
    उस आर्य मंतव्य की सांइड पर मैने ये लास्ट में 2 कमेंट डाली है लेकिन अभी तक उन्होंने अप्रूवल नही की है
    2 hours ago · Sent fro
    Inko bhi jawab de ye mere bhai hain sarfaraz

    1. कान में पेशाब करना , शैतान का लोगों को बाँध देना , मक्खी के पंखों में एंटी बायोटिक होना , धरती के हिलने पर पहाड़ रखकर उसे स्थिर बना देना ::
      जरा बताओ तो सही अल्लाह मियाँ कि ये कौनसी कहवतें हैं

      चलो आपकी मान लेते हैं हमने अरबी नहीं आती
      चलो इनको तो आते है आपके मज़हब से ही हैं इनकी ही सुन लो
      अल्लाह मियां कि इल्म पर इनको कितना डर है कि लोग इस्लाम से ही चले जायेंगे यदि ये हदीसें सुनेंगे तो

      http://aryamantavya.in/when-people-will-leave-islam/

      1. भाई आप अपना क्लियर कर दे हम आपकी बात मान लेंगे

        कितनी बार बताए अब हम ?

        1. yaha par hadees ke baare me chaarchaa ho rahi hai bhai jaan…. ved ke baare me fir kabhi risabh ji yaa mere se charchaa hogi aapki.. thoda sanyam rakhe…

    2. धन्यवाद बहन लेकिन मेरी पोस्ट को इन्होंने अप्रूव क्यो नही किया और आपने मेरी पोस्ट डाली तो इन्होंने कैसे अप्रूव कर लिया ?

      1. hamare paas bahut se comment hain..hamare paas samay ki aabhav hoti hai aapke bhi saare comment ko approve kar di jaayegi…thoda intjaar kare aap…waise aapko raahul jhaa/amit ji aapko sarfu bhai bolte hain to ham kya bole aapko sarfu bhai??? …waise aapke comment ki jawab risabh ji hi denge… aap intjaar kare kisi ki comment yaha paending nahi rahti… sabhi ki jawab di jaati hai… thoda jaawab paane kaa intjaar kare

  21. =मुसलमान मानते हैं कि अल्लाह ने फ़रिश्ते के हाथो कुरआन की पहली सूरा लिखित रूप में मुहम्मद को दी थी , लेकिन अनपढ़ होने से वह उसे नहीं पढ़ सके , तो मुसलमान कुरान की वह सूरा पेश क्यों नहीं कर देते जो अल्लाह ने लिख कर भेजी थी , इस से तुरंत पता हो जायेगा कि वह कागज कहाँ बना था ?? ? और अल्लाह की राईटिंग कैसी थी ????वर्ना हम क्यों नहीं माने कि जैसे अल्लाह फर्जी है वैसे ही कुरान भी फर्जी है.
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    =मुसलमान दावा करते हैं कि विश्व में कुरान एकमात्र ऐसी किताब है जो पूर्णतयः सुरक्षित है 1400 साल से अब तक खुछ भी बदलाव नही हुआ है, तो मुस्लमान 1400 साल पुराना कागज़ पत्थर चमड़ा पेश क्यू नही करदेते जिसपे पहली बार क़ुरान की आयते लिखी गयी थी उसको आजकी क़ुरान से मिलाके देखने पे तुरंत पता चल जाएगा क़ुरान में मिलावट हुयी है या नही हुई है और कार्बन डेटिंग से ये भी पता चल जाएगा की वो पत्थर चमड़ा कागज़ कितने साल पुराना है वर्ना हम क्यू नही माने की क़ुरान में मिलावट हो चुकी है.
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    =यदि मोहोमद साहब पड़ना लिखना नही जानते थे तो क़ुरान की आयते पहली बार कागज़ पत्तर चमड़े पे किसने लिखा??? सही लिखा है या गलत इसका क्या प्रमाण है क्योंकि क़ुरान पड़के महूमद साहब बता ही नही सकते थे की वो सही है या गलत।
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    =मुस्लमान बोलते हैं अल्लाह सबसे ऊपर है उसके ऊपर कोई नहीं है वो जो चाहे कर सकता है कुछ भी कर सकता है सारे कानून उसी के बनाये हैं इससे वो जो चाहे जब चाहे तब कर सकता है यदि अल्लाह जो चाहे कर सकता है तो दुनिया मे बहुत बड़ा क्षेत्र उत्तरी ध्रुव -दक्षणी ध्रुव के रूप में भी है जहां 6 महीने दिन और 6 महीने रात होती है वहा 12 घंटे दिन और 12 घंटे रात करवा दे क्या अल्लाह ये कर सकता है ????अगर नही तो हम क्यू नही माने की क़ुरान में असत्य लिखा है।
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    = इस्लाम के मुताबिक यदि 3 दिन/माह का बच्चा अपनी माँ के गर्भ में ही मर जाये जिसका पूरा शारीर ही नही बना हो, तो उसको कयामत के दिन क्या मिलेगा.-जन्नत या जहन्नुम ? और किस आधार पर ??
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    =मरने के बाद जन्नत में पुरुष को 72 हूरी (अप्सराए) मिलेगी…तो स्त्री को क्या मिलेगा……और अगर कोई बच्चा गर्भ में ही मर जाये तो क्या उसे भी हूरें मिलेंगी ? और वह हूरों का क्या करेगा ?
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    = यदि मुसलमानों की तरह ईसाई , यहूदी और हिन्दू मिलकर मुसलमानों के विरुद्ध जिहाद करें , तो क्या मुसलमान इसे धार्मिक कार्य मानेंगे या अपराध ? और क्यों ?
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    =इस्लामी देशों में इस्लाम छोड़ कर कोई अन्य धर्म स्वीकार करने पर हमेशा मौत की सजा क्यू दी जाती है???? और क्या कोई अपने मनपसंद धर्म को नही अपना सकता?????
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    =यदि कोई गैर मुस्लिम (काफ़िर) यदि अच्छे गुणों ,कर्म ,स्वाभाव ,वाला हो तो भी. क्या अल्लाह उसको जहन्नुम की आग में झोक देगा….? और यदि झोंकता है तो क्या ये अन्याय नही हुआ और यदि नही झोंकता है तो इस्लाम कबूलना व्यर्थ नही हुआ??? क्यू कबूले इस्लाम???
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    =मुसलमान कहते है कि इस्लाम पहले से था..सवा लाख नबी अल्लाह ने भेजा था जब इस्लाम पहले से ही था..तब मुहम्मद ने अरब के काबा की मूर्तियों को क्यों तोडा??तब मूर्तिया क्यों बनी थी…?? क्या उस समय मूर्ति पूजा जायज़ थी इस्लाम में?? यदि नही तो कौन नबी अल्लाह से गद्दारी करके मंदिर और मूर्तिया बनवाया था??? जब मूर्ति थी तो हम क्यू माने इस्लाम पहलेसे था. यदि था तो मूर्ति पूजा जायज़ होंगी इस्लाम में, तभी काबा में मुर्तिया बानी थी.
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    =कुरान के अनुसार मुहम्मद सशरीर जन्नत गए थे , और वहां अल्लाह से बात भी की थी , लेकिन जब अल्लाह निराकार है , और उसकी कोई इमेज (छवि) नहीं है तो..मुहम्मद ने अल्लाह को कैसे देखा ??और कैसे पहिचाना कि यह अल्लाह है , या शैतान है ?
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    =क़ुरान के अनुसार अल्लाह ने आदम को अपने दोनों हाथों से बनाया, लेकिन जब अल्लाह निराकार है उसका कोई शारीर नही है तो अल्लाह ने अपने हातो से आदम को कैसे बनाया????और क्या अल्लाह 2 हातो वाला शरीरधारी है????? और अल्लाह ने जानवरो को कैसे बनाया????
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    =मुस्लमान दावा करते है की बाइबिल में मिलावट हो गयी थी इसलिए अल्लाह ने क़ुरान को उतारा है, तो क्या जिसदिन क़ुरान नाज़िल हुयी उस दिन ही बाइबिल में मिलावट हो गयी उससे पहले बाइबिल सही थी????? और क़ुरान के पहले की पुस्तको में ऐसी कोनसी मिलावट और बदलाव हो गए थे जिसको अल्लाह ठीक नही कर पाया??????और क्या अल्लाह के ज्ञान में मिलावट की जा सकती है???? उसके साथ छेड-छाड़ किया जा सकता है???
    .
    = मुसलमानों का दावा है कि जन्नत जाते समय मुहम्मद ने येरूसलम की बैतूल मुक़द्दस नामकी मस्जिद में नमाज पढ़ी थी ,लेकिन वह मुहम्मद के जन्म से पहले ही रोमन लोगों ने नष्ट कर दी थी . मुहम्मद के समय उसका नामो निशान नहीं था , तो मुहम्मद ने उसमे नमाज कैसे पढ़ी थी ? हम मुहम्मद को झूठा क्यों नहीं कहें ?
    .
    =मुस्लमान दावा करते है की हम एक ईश्वर वादी है एक अल्लाह के अलावा किसीको नही मानते , अगर ऐसा है तो,कोई बोले में अल्लाह को मानता हु उसकी इबादत करता हु लेकिन मुहम्मद को नही मानता तो उसे क्या मना जाएगा काफिर या मुस्लमान ???? और क्या बिना , महुम्मद के अल्लाह की इबादत की जा सकती है ?????
    .
    =मुस्लमान बोलते है हम आतंकवाद के विरुद्ध है तो मुल्ले आतंकवादियों को काफ़िर घोषित क्यों नहीं करदेते ???? और आतंकवादियों पे फतवे जरी क्यू नही करते ,और उनको दफ़नाना बंद करके जलाने का आदेश क्यू नही देते???और ऐसा नही करते है तो क्या इस से साबित नहीं होता कि आतंकवाद इस्लाम में जायज़ है????
    .
    =मुस्लमान कहते है अल्लाह ने ये दुनिया 6 दिन में बनाया और 7वे दिन आराम किया अगर ये सच है तो अल्लाह अब क्या कर रहा है? तब से लेके अब तक आराम ही कर रहा है?? और दुनिया बनाने से पहले अल्लाह क्या कर रहा था????
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    =मुस्लमान दावा करते है आखिरी दिन(क़यामत के दिन) अल्लाह काफिरो को जहनुम की आग में झोक देगा , अगर ऐसा है तो बाकि दिन अल्लाह क्या करेगा?? निकम्बा बैठा रहेगा? और जबसे अल्लाह ने दुनिया बनाई तबसे लेके क़यामत तक अल्लाह क्या करेगा???
    .
    =यदि अल्लाह सभी स्थानों पर है तो हज जाने की क्या आवश्यकता है??????और क्या अल्लाह केवल काबा में ही है ?तो सातवे आसमान पे कोनहै????? और क्या आसमान ही में अल्लाह का घर है; पृथिवी में नहीं? तो काबा को अल्लाह का घर क्यों लिखा गया?????
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    =मुस्लमान दावा करते है की पुनर्जन्म नहीं होता, तो जो लोग अभी सुख दुःख प्राप्त कर रहे वो किस कर्मो के आधार पर ? ???जबकि इंसाफ तो केवल क़यामत के दिन होगा। तो अभी कोनसा इंसाफ हो रहा है जो लोग सुख दुःख प्राप्त कर रहे है??? क्या ये तर्कसम्मत है ????
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    =अल्लाह ने अनपढ़ मुहम्मद में ऐसी कौनसी विशेषता देखी . जो उनको अपना रसूल नियुक्त कर दिया ,क्या उस समय पूरे अरब में एकभी ऐसा पढ़ालिखा व्यक्ति नहीं था , जिसे अल्लाह रसूल बना देता , और जब अल्लाह सचमुच सर्वशक्तिमान है , तो अल्लाह मुहम्मद को 63 साल में भी अरबी लिखने या पढने की बुद्धि क्यों नहीं दे पाया ??
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    =जो व्यक्ति अपने जिहादियों की गैंग बना कर जगह जगह लूट करवाता हो , और लूट के माल से बाकायदा अपने लिए पाँचवाँ हिस्सा (20 % ) रख लेता हो , उसे अल्लाह का रसूल कहने की जगह लुटरों का सरदार क्यों न कहें ?
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    =मौहम्मद साहब व उनके बाद के इस्लामी शासकों ने अन्य देशों पर इस्लाम स्वीकार करने जजिया देने या युद्ध का विकल्प रखने के लिए क्यों संदेश भेजा था????
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    =कश्मीर से सारे कश्मीरी पंडितों किसने निकाला है।

  22. नंदिता जी आप मेरे प्रश्नो का उत्तर दीजिये और में आपके देना का प्रयास करूँगा

  23. राहुल जी लो आपके आर्य मंतव्य वालों के जवाब किस्मत से आज दो घंटे फ्री वक्त मिला तो सोचा जवाब ही लिख दुँ वहाँ भी पेस्ट कर दुँगा।
    Task Master
    SEPTEMBER 9, 2017 AT 12:16 PM
    =मुसलमान मानते हैं कि अल्लाह ने फ़रिश्ते के हाथो कुरआन की पहली सूरा लिखित रूप में मुहम्मद को दी थी , लेकिन अनपढ़ होने से वह उसे नहीं पढ़ सके , तो मुसलमान कुरान की वह सूरा पेश क्यों नहीं कर देते जो अल्लाह ने लिख कर भेजी थी , इस से तुरंत पता हो जायेगा कि वह कागज कहाँ बना था ?? ? और अल्लाह की राईटिंग कैसी थी ????वर्ना हम क्यों नहीं माने कि जैसे अल्लाह फर्जी है वैसे ही कुरान भी फर्जी है.
    जवाब
    यह बात किस सही हदीस में हैं और कुरआन की किस आयत मे हैं बल्की यह दावा किसी जईफ हदीस मे भी नही। जिब्राईल ने रसुल को दौहराने के लिए ही कहा था। तो रसुल ने अपनी योग्यता का खुलासा किया किरअत का मतलब जरुरी नही लिखा हुआ पढ़ना ही हो नमाज़ मे कोई लिखा हुआ काग़ज़ नही होता हम बस दौहराते हैं और इसी को किरअत कहते हैं। हजरत मुहम्मद ने जिन्दगी मे कभी पहले इतने वाक्यों की किरअत नही की थी ।उसी कारण कहा माअना कारी अर्थात मैं किरअत नही जानता।
    .
    =मुसलमान दावा करते हैं कि विश्व में कुरान एकमात्र ऐसी किताब है जो पूर्णतयः सुरक्षित है 1400 साल से अब तक खुछ भी बदलाव नही हुआ है, तो मुस्लमान 1400 साल पुराना कागज़ पत्थर चमड़ा पेश क्यू नही करदेते जिसपे पहली बार क़ुरान की आयते लिखी गयी थी उसको आजकी क़ुरान से मिलाके देखने पे तुरंत पता चल जाएगा क़ुरान में मिलावट हुयी है या नही हुई है और कार्बन डेटिंग से ये भी पता चल जाएगा की वो पत्थर चमड़ा कागज़ कितने साल पुराना है वर्ना हम क्यू नही माने की क़ुरान में मिलावट हो चुकी है. बंकीघम पेलेस मे ही चमड़े पर लिखा १४०० साल पुराना कुरआन मौज़ुद हैं और इस्ताम्बुल समेत कई मुस्लिम देशों की लाइब्रेरीयों मे पुराने नुस्खे हैं। आप लोग वेद को एक करोड़ साल पुराना मानते हो करोड छोड़ों एक लाख साल पुराना वेद ही किसी पत्ते पर लिखा हुआ दिखा दो ताकी हम वेद को कमसे कम लाख साल पुराना तो माने।
    .
    =यदि मोहोमद साहब पड़ना लिखना नही जानते थे तो क़ुरान की आयते पहली बार कागज़ पत्तर चमड़े पे किसने लिखा??? सही लिखा है या गलत इसका क्या प्रमाण है क्योंकि क़ुरान पड़के महूमद साहब बता ही नही सकते थे की वो सही है या गलत।
    आपके सामने चुनौती तो वर्तमान कुरान हैं । फिर भी फजाइले कुरआन की हदीस मे सारे कातिबे हदीस का रिकोर्ड दर्ज हैं सही बुखारी, मुस्लीम, मिशकात, इब्न अबी शिबा, मुस्नद अहमद, जैसी कई मोतबर किताबों मे दर्ज हैं आप मुझे एक लाख साल पुराने वेद सिखने वाले किसी का रिकोर्ड सबुत से बताए मैं तो तुरंत हदीस देदुँगा।
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    =मुस्लमान बोलते हैं अल्लाह सबसे ऊपर है उसके ऊपर कोई नहीं है वो जो चाहे कर सकता है कुछ भी कर सकता है सारे कानून उसी के बनाये हैं इससे वो जो चाहे जब चाहे तब कर सकता है यदि अल्लाह जो चाहे कर सकता है तो दुनिया मे बहुत बड़ा क्षेत्र उत्तरी ध्रुव -दक्षणी ध्रुव के रूप में भी है जहां 6 महीने दिन और 6 महीने रात होती है वहा 12 घंटे दिन और 12 घंटे रात करवा दे क्या अल्लाह ये कर सकता है ????अगर नही तो हम क्यू नही माने की क़ुरान में असत्य लिखा है।
    .जवाब
    जनाब मैं तीन किलों को पत्थर उठा सकता हुँ ।और आप मुझे उठा ने का अदेश दे अगर मैं न उठाऊँ तो मुझे मजबुर कौन करेगा आपका ईश्वर सर्वव्यापक हैं मैं अपनी आँखों से उसकी व्यापकता देखाना चाहता हुँ । कृपया आप ईश्वर को मजबुर करोगे ऐसा करने पर ईश्वर कैसा हैं क्या कर सकता हैं क्या यह जानने के लिए ईश्वर को मजबुर करने की ताकत चाहीए ।कर सकना एक अलग चीज़ हैं और करवा लेना दुसरी और जब तक कोई ईश्वर से न करवा ले यह साबित कैसे होगा नही कर सकता लिहाज़ा पहले आप अपने दावे का सबुत दे आपको किस तरह पता लगा ईश्वर सबकुछ नही कर सकता।
    = इस्लाम के मुताबिक यदि 3 दिन/माह का बच्चा अपनी माँ के गर्भ में ही मर जाये जिसका पूरा शारीर ही नही बना हो, तो उसको कयामत के दिन क्या मिलेगा.-जन्नत या जहन्नुम ? और किस आधार पर ??
    .जवाब
    इबादत शब्द अब्द से निकला है जिसका अर्थ हैं मातहत होना जब तक बंदा समझकर भी अल्लाह के खिलाफ न करे उसे जहन्नम नही मिलेगा क्योकी जहन्नम अल्लाह के खिलाफ अमल की सज़ा हैं ।
    =मरने के बाद जन्नत में पुरुष को 72 हूरी (अप्सराए) मिलेगी…तो स्त्री को क्या मिलेगा……और अगर कोई बच्चा गर्भ में ही मर जाये तो क्या उसे भी हूरें मिलेंगी ? और वह हूरों का क्या करेगा ?
    .
    .जवाब
    हुर शब्द अहवार की जमा हैं जिसका अर्थ हैम ऐसे लोग जिनकी आणखों का काला पन अधिक काला और सफेदी अधिक सफेद होगी । तफ्सिर मनसुर मे एक हदीस दर्ज हैं जो सनद मे सही सुरह तूर की आयत 18 से30 की तफ्सिर मे इब्न अब्बास से रिवायत की एक आदमी नबी करीम के पास आया बोला या रसुल्लाह क्या अल्लाह जन्नत मे औरत और मर्द का निकाह कराएगा तो अल्लाह के रसुल ने काहा हाँ मगर वहा पेशाब और पखाना न होगा आपको दुनिया मे बीवी से परहेज़ नही तो जन्नत मे क्यूँ अगर औरत गलत हैं तो आपके ईश्वर को यहाँ भी औरत नही देनी चाहीए थी क्यों दी कृपया समाधान करें।
    72 हुरैं किसी एक आदमी को मिलेंगी यह किस हदीस सही और आयत मे आपने पढ़ा हमे भी रेफरेंस देना।
    = यदि मुसलमानों की तरह ईसाई , यहूदी और हिन्दू मिलकर मुसलमानों के विरुद्ध जिहाद करें , तो क्या मुसलमान इसे धार्मिक कार्य मानेंगे या अपराध ? और क्यों ?
    जवाब
    जेहाद का असल मतलब आप जिहाद फिल इस्लाम किताब मे देख लें जेहाद का कानुन कई आयतों और हदीस पर हैं मगर आप अपना दावा इन दो आयतों पर ही सही साबित कर दो
    सुरह बकर लड़ों उनसे जो तुमसे लडते हैं। और अत्याचार न करो बकर190 सुरह तौबा 5 से 7 जो अमन चाहे उसे महफुज़ जगह पहुँचा दो
    सुरह मुमतिहाना आयत 7 से 9 अल्लाह तुमको उनसे दोस्ती करने से नही रोकता जो तुमसै तुम्हारे धर्म के कारण नही लडे अल्लाह तो उनसे दोस्ती से रोकता हैं जिन्होने तुमको बेघर किया और तुम से पहल की हज्ज ३९
    .
    =इस्लामी देशों में इस्लाम छोड़ कर कोई अन्य धर्म स्वीकार करने पर हमेशा मौत की सजा क्यू दी जाती है???? और क्या कोई अपने मनपसंद धर्म को नही अपना सकता?????
    .कही देखा आपने कितने ही गैर मुस्लीम वहाँ हैं किसको मौत की सज़ा मिली हजरत मुहम्मद के समय ही कुछ लोग लालचमे इस्लाम छोड़ गए हाँ सुब्ह इस्लाम कबुल करे इसलाम को छोड़ कर बिना सबुत झुठ फैलाने वाले को मौत की सज़ा हैं क्योंकी इस्लाम मे फसाद की सज़ा मौत हैं
    जवाब
    =यदि कोई गैर मुस्लिम (काफ़िर) यदि अच्छे गुणों ,कर्म ,स्वाभाव ,वाला हो तो भी. क्या अल्लाह उसको जहन्नुम की आग में झोक देगा….? और यदि झोंकता है तो क्या ये अन्याय नही हुआ और यदि नही झोंकता है तो इस्लाम कबूलना व्यर्थ नही हुआ??? क्यू कबूले इस्लाम???
    जवाब
    कोई कितना ही अच्छा गुण कर्म स्वभाव को अगर वो भारतीय संविधान और कानुन के साथ बग़ावत करे तो क्या उसकी अच्छाई के कारण सजा से उसे बचाया क्यों नही जाता जॉनी लीवर बहुत अच्छे चरित्र का मालीक पर राष्टीय झंठे के अपमान पर उये सजा दी गई पहले आप इस देश मे तो अपने वेदिक धर्म का कानुन लागु करवाए
    अगर आपकी बात सही हैं तो लोगों को वेद अपनाने की सलाह न दे ईश्वर उपासना की सलाह न दे बलकी अच्छे चरित्र की सलाह दे। अगर वे लोग इतने ही अच्छे हैं तो उनको इस्लाम को मानने मे क्या आपत्ती हैं। अमेरीका के लोगों की नज़र सड़क पर चुम्मन चारित्रिक हन न नही वही अफरीकन के यहाँ नन्गा रहना चारित्रीक हनन नही तो वे भी मौक्ष पाने चाहीए वेदों के अनुसार उनके चारित्र पर उनको मौक्ष मिलेगा यह बात साबित करती हैं चरित्र और नेकी को पुरी तरह इंसान पर नही छोड़ा जा सकता इस कारण उनको अल्लाह का संविधान स्वीकार करना चाहीए

    1. क्या मुहम्मद साहब वास्तव में “उम्मी ” थे ?
      अनाथ से इस हिसाब से उम्मी होना तो बनता है लेकिन अनपढ़ थे ये तो नहीं बनता

  24. उम्मी का अर्थ अनाथ नही होता बल्की उम्मी वो हैं जिसे लिपी पढ़ना न आए जो किसी वाक्य को चुँकी उसकी प्रेक्टीस नही दौहरा ना पाए किरअत शब्द दोनों अर्थों मे प्रयोग होता हैं दौहराना या लिपी पढ़ना जिसका सबुत आपको जवाब मे ही दिया जा चुका था।

    1. If MO was illiterate what the below hades refers to :
      Narrated Anas bin Malik:
      Once the Prophet wrote a letter or had an idea of writing a letter. The Prophet was told that they (rulers) would not read letters unless they were sealed. So the Prophet got a silver ring made with “Muhammad Allah’s Apostle” engraved on it. As if I were just observing its white glitter in the hand of the Prophet… (Sahih al-Bukhari, Volume 1, Book 3, Number 65)

      Narrated ‘Ursa:
      The Prophet wrote the (marriage contract) with ‘Aisha while she was six years old and consummated his marriage with her while she was nine years old and she remained with him for nine years (i.e. till his death). (Sahih al-Bukhari, Volume 7, Book 62, Number 88)

      Narrated ‘Ubaidullah bin ‘Abdullah:
      Ibn ‘Abbas said, “When the ailment of the Prophet became worse, he said, ‘Bring for me (writing) paper and I will write for you a statement after which you will not go astray.’ But ‘Umar said, ‘The Prophet is seriously ill, and we have got Allah’s Book with us and that is sufficient for us.’ But the companions of the Prophet differed about this and there was a hue and cry. On that the Prophet said to them, ‘Go away (and leave me alone). It is not right that you should quarrel in front of me.” Ibn ‘Abbas came out saying, “”It was most unfortunate (a great disaster) that Allah’s Apostle was prevented from writing that statement for them because of their disagreement and noise. (Sahih al-Bukhari, Volume 1, Book 3, Number 114)

    1. यदि रसूल अनपढ़ थे तो उनके पढ़ने से संबंधित हदीसें क्या बयान करई हैं

  25. ये दोनों हदीसे तो वह्य के नूजुल को एक अर्सा बितने के बाद की हैं जिसमे इब्नअब्बास सही बुखारी जिल्द १-किताब३-बाब इल्म की फज़ीलत हदीस ११४ इंटरनेशनल नम्बरिंग हदीस किर्तास के नाम से जानी जाती है जो नबी ए अकरम की मौत के ४ दिन पहले की हैं जबकी अल्लाह ने उम्मी अल्लाह के रसुल के वह्य के नुजुल के पहले के लिए ठहराया खुद चमूपति जी चौदहवी का चांदके अपने बाब प्रारंभ ही मिथ्या से मे दुसरे हाशिए मे इरअबिइस्मिका अल्लज़ी खलक को कुरआन की पहली वह्य बताते हैं तो नबी ने चुँकी किसी पाठशाला मे पढाई नही की लिहाज़ा उन्होने अगर उसवक्त कहा हो मा अना कारिउन कोई बड़ी बात नही लेकीन बाद के दौर मे नबी ने यह अल्फाज़ जबकी आपका मक्की दौर गुजर चुका या वह्य के मक्का मे कुछ साल के बादकभी कहा हो की मा अना कारी यानि मैं पढ़ना नही जानता ।उम्मी कहलवाएंगे ही जब अल्लाह ने नबुवत बख्शी तब तक आपने किसी से पढ़ना लिखना तो सिखा नही था। आपके दोस्त का सवाल पहली वह्य की तख्ती दिखाने का था और आप हजरत मुहम्मद के पढ़े लिखे होने का सबुत उनके अन्तिम दौर से लाते होतो यह वैसा ही हैं जैसे कोई कहे चुँकी मैनें अब डॉक्टरी पढ़ ली हैं लिहाज़ा मुझे पैदाईशी डॉक्टर कहो

    1. यही हुआ न कि आप कहते हैं कि आपके रसूल ने झूठ कहा
      इससे तो अल्लाह का पैगाम भी झूठा हो गया क्योंकि रसूल तो जो बोलते हैं अल्लाह की तरफ से ही होता है

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