पृथ्वी के समान माता पिता भी दानी व मृदुभाषी हों

ओउम

पृथ्वी के समान माता पिता भी दानी व मृदुभाषी हों
डा. अशोक आर्य ,
माता पिता सदा संतान का सुख चाहते हैं | संतान का पालन करते हुए कोई भी माता या पिता प्रतिफल की इच्छा नहीं रखता | इतना ही नहीं प्राय: सब माता पिता अपने बच्चों का हट चाहते है तथा उन्स म्र्दुभाषा में ही बात करते हैं | यह माता पिता का यूँ कहा जा सकता है की संतान के लिए एक महान दान है | दुसरे सब्दों में हम कह सकते हैं कि यह माता पिता कि दान कि प्रवृति है | एक प्रकार से बच्चों का पालन अराते हुए जब बिना किसी प्रतिफल कि भावना से बच्चों का भरण पोषण करते हैं , उनकी सब आवस्यकताओं को पूरा करते हैं , उनको सुशिक्षा देने कि न केवल व्यवस्था जी करते हैं अपितु उनकी से ऊँची शिक्षा दिलाने का भी प्रयास करते हैं | सदा उनसे मीठा ही बोलते हैं | इस प्रकार माता पिता के सम्बन्ध में ऋग्वेद के अध्याय ५ मंडल ४३ के मन्त्र २ में इस प्रकार कहा गया है : –
आ सुष्टुति नमसा वर्तायध्ये ,
द्यावा वाजाय पृथ्वी अम्रिघ्रे |
पिता माता मधुवचा: सुहस्ता
भरेभरे नो यशासावविष्टाम || ऋग्वेद ५.४३.२ ||
शब्दार्थ : –
( अहं } मैं (सुष्टुति } उत्तम स्तुति से (नमसा) नमस्ते से (अम्रिध्रे )अजेय (द्यावा पृथ्वी) द्युलोक ओर पृथ्वी (वाजाय) बल या शक्ति हेतु (आ वर्त्यध्ये इच्छामि ) अपनी ओऊ लाने कि इच्छा से (यशसौ } यशस्वी (पिता माता ) पिता माता सम (म्रिधुवचा:) मीठा बोलने वाले (सुहस्ता ) सुन्दर हाथ वाले (भरे भरे ) प्रत्येक संकट मैं (न:) हमारी (अविष्टाम) रक्षा करें |
इस मन्त्र में माता पिता के कर्तव्यों का बड़े ही सुन्दर व सरल ढंग से उल्लेख किया गया है | मन्त्र कहता है कि माता पिता सदा मधुर बोलें , बड़े ही सुन्दर ढंग के दानी बनें, वह यशस्वी हों तथा संकट में पड़े अपनी सन्तान की रक्षा करें | यह माता पिता के मुख्य कर्तव्य इस मन्त्र में बताये गए हैं | |

मन्त्र कहता है कि माता पिता मधुर भाषी हों | मधुर भाषण से हमें अनेक विशेषताओं का ज्ञान होता है | जैसे मधुर भाषण करने वाला सदैव प्रसन्न रहता है | यह मीठा बोलने की विशेषता है कि जो मीठा बोलता है , उसे किसी के विरोध का सामना नहीं करना पड़ता| इसलिए उसे कोई कष्ट होता ही नहीं | जब कष्ट नहीं होता तो वह सदा प्रसन्न ही तो रहेगा | न तो उसे कोई दु:ख होगा तथा न ही उसे कोई तंग करेगा जिससे उसकी प्रसन्नता निरंतर बढती चली जाती है | अत: स्पष्ट है की म्रदुभाशी सदा प्रसन्न रहता है | जब वह मीठा बोलता है तो उसके वचनों से किसी को भी कष्ट नहीं होता अपितु उसके वचनों से सुख ही मिलता है | जिस के द्वारा किसी को सुख मिलता है तो वह निश्चित रूप से उसकी अच्छई कि चर्चा अनेक स्थानों पर करता है | इस प्रकार उसकी ख्याति भी दूर दूर तक फैलाती है | इस का नाम है वशीकरण | अर्थात मीठा बोलने से सब लोग स्वयं ही उस कि और खींचे चले आते हैं | इसा के अतिरिक्त मीठा बोलकर जीतनी सरलता से दुसरे को जीता जा सकता है, जीतनी सरलता से दुसरे को अपने बश में किया जा सकता है , उतनी सरलाता से दुसरे को वश में करने का कोई एनी उपाय नहीं | अत: मीठा बोलने को वशीकरण मन्त्र भी कहा जा सकता है और मीठा बोलने से संतान सुसंतान बनाकर माता पिता का अनुगमन करते हुए माता पिता के सामान ही मृदुभाषी बनेगी |

डा. अशोक आर्य ,मण्डी डबवाली
१०४ – शिप्रा अपार्टमेन्ट ,कोशाम्बी
जिला गाजियाबाद ,उ.प्र.
चल्वार्ता :: ०९७१८५२८०६८

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