संसार के निरामिषभोजी महापुरुष

संसार के निरामिषभोजी महापुरुष लेखक – स्वामी ओमानंदजी सरस्वती  जगद् गुरु श्री शंकराचार्य (शारदा पीठ, द्वारिका)  यह अत्यन्त दुःख की बात है कि संसार की युवक पीढ़ी और विशेषकर हिन्दू युवक वर्ग पवित्र शाकाहार को छोड़ता जा रहा है और मांसाहार की ओर प्रवृत्त हो रहा है, जो हिन्दुत्व नहीं है । वह मानव का धर्म नहीं है । इसलिये हम सब को सावधान करते हैं और उपदेश देते हैं कि मानवमात्र को विशेष रूप से हिन्दुओं को शपथ लेनी चाहिये, प्रतिज्ञा करनी चाहिये कि हम शुद्ध शाकाहार ही करेंगे और मांस कभी नहीं खायेंगे । इस शपथ को सद्व्यवहार में लाना । श्री जगद् गुरु शंकराचार्य (श्रृंगेरी मठ)  शाकाहार ने केवल शरीर को ही शुद्ध रखता है बल्कि आत्मा … Continue reading संसार के निरामिषभोजी महापुरुष

मांसाहारी वीर नहीं होते

मांसाहारी वीर नहीं होते लेखक – स्वामी ओमानंदजी सरस्वती  न जाने लोग मांस क्यों खाते हैं ! न इसमें स्वाद है और न शक्ति । मांस स्वाभाविक नहीं । मांस में बल नहीं, पुष्टि नहीं । वह स्वास्थ्य का नाशक और रोगों का घर है । मनुष्य मांस को कच्चा और बिना मसाले के खाना पसन्द नहीं करते । पहले-पहल मांस के खाने से उल्टी आ जाती है । डा० लोकेशचन्द्र जी तथा लेखक की रूस की यात्रा में मांस की दुर्गन्ध से कई बार बुरी अवस्था हुई, वमन आते-आते बड़ी कठिनाई से बची । फिर भी लोग इसे खाते हैं । कई लोग तो बड़ी डींग मारते हैं कि मांसाहार बड़ा बल और शक्ति बढ़ाता है । यह भी मिथ्या है … Continue reading मांसाहारी वीर नहीं होते

मांसाहार ही रोगोत्पत्ति का कारण

मांसाहार ही रोगोत्पत्ति का कारण लेखक – स्वामी ओमानंदजी सरस्वती  मांस में यूरिक एसिड नाम का एक विष सबसे अधिक मात्रा में होता है, इसको सभी डाक्टर मानते हैं । मांसाहारी का शरीर उस अधिक विष को भीतर से बाहर निकालने में असमर्थ होता है, इसलिये मनुष्य के शरीर में वह विष (यूरिक एसिड) इकट्ठा होता रहता है । क्योंकि शाकाहारी मनुष्यों की अपेक्षा वह यूरिक एसिड मांसाहारी के शरीर में तीन गुणा अधिक उत्पन्न होता है । यह इकट्ठा हुआ विष अनेक प्रकार के भयंकर रोगों को उत्पन्न करने वाला बनता है । मानचैस्टर के मैडिकल कालिज के प्रोफेसर हॉल ने अनुभव करके निम्नलिखित तालिका भिन्न-भिन्न पदार्थों में यूरिक एसिड के विषय में बनाई है । नाना प्रकार के … Continue reading मांसाहार ही रोगोत्पत्ति का कारण

मनुष्य का आहार क्या है

मनुष्य का आहार क्या है ? सत्त्व, रज और तम की साम्यावस्था का नाम प्रकृति है । भोजन की भी तीन श्रेणियां हैं । प्रत्येक व्यक्ति अपने रुचि वा प्रवृत्ति के अनुसार भोजन करता है । श्रीकृष्ण जी महाराज ने गीता में कहा है – आहारस्त्वपि सर्वस्य त्रिविधो भवति प्रियः सभी मनुष्य अपनी प्रवृत्ति के अनुसार तीन प्रकार के भोजन को प्रिय मानकर भक्षण करते हैं । अर्थात् सात्त्विक वृत्ति के लोग सात्त्विक भोजन को श्रेष्ठ समझते हैं । राजसिक वृत्ति वालों को रजोगुणी भोजन रुचिकर होता है । और तमोगुणी व्यक्ति तामस भोजन की ओर भागते हैं । किन्तु सर्वश्रेष्ठ भोजन सात्त्विक भोजन होता है । सात्त्विक भोजन आयुः – सत्त्व – बलारोग्य – सुख – प्रीति – विवर्धनाः । … Continue reading मनुष्य का आहार क्या है

भारत की बेटी

भारत की बेटी जननी नाम से पवित्र, दूसरा कौनसा है नाम | माँ नाम से निर्मल, कौनसा है दूसरा है नाम || आज की किशोरी ही भविष्य की आधारशिला है | संतान उत्पत्ति की अर्थात श्रेष्ट संतान उत्पत्ति की और राष्ट्र गौरव की, क्यों की जब कोई युवती स्वयं निर्णय लेने लग जाती है अर्थात यह आयु १६ से १८ की होती है और इसी आयु में वह निर्णय लेनी की क्षमता प्राप्त करती है | यही से उसके भावी संतान का भविष्य शुरू हो जाता है | यही संतान उत्पत्ति का विज्ञान है | इतिहास इस बात का साक्षी है – शिवाजी,श्री कृष्ण, श्री राम, प्रलहाद , रावण, पांडव, आदि की | ऐसी हजारो बेटियों ने राष्ट्र रक्षक, राष्ट्र निर्माण, … Continue reading भारत की बेटी

अँग्रेजी भाषा के बारे में भ्रम

‎ *** अँग्रेजी भाषा के बारे में भ्रम *** आज के मैकाले मानसों द्वारा अँग्रेजी के पक्ष में तर्क और उसकी सच्चाई : 1. अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है:: दुनिया में इस समय 204 देश हैं और मात्र 12 देशों में अँग्रेजी बोली, पढ़ी और समझी जाती है। संयुक्त राष्ट संघ जो अमेरिका में है वहां की भाषा अंग्रेजी नहीं है, वहां का सारा काम फ्रेंच में होता है। इन अंग्रेजों की जो बाइबिल है वो भी अंग्रेजी में नहीं थी और ईशा मसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे। ईशा मसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी। अरमेक भाषा की लिपि जो थी वो हमारे बंगला भाषा से मिलती जुलती थी, समय के कालचक्र में वो भाषा विलुप्त हो गयी। … Continue reading अँग्रेजी भाषा के बारे में भ्रम

वेदों में गौ की सुरक्षा

वेदों में गौ की सुरक्षा Vedas AV12.4 AV Sukta12.4 अथर्व वेद 12-4 सूक्त -वशा गौ ,ऋषि- कश्यप: 4.1.0.1 AV 12.4.1 अथर्व 12-4-1 On Donating a cow गौ दान  किस को ददामीत्येव ब्रूयादनु चैनामभुत्सत। वशां  ब्रह्मभ्यो याचद्भ्यस्तत्प्रजावदपत्यवत्‌ || अथर्व 12.4.1 Cows should be given in keeping of learned persons (veterinarians) who have noble temperaments. गौओं को ब्राह्मण वृत्ति के पशु पालन  वैज्ञानिकों के ही दायित्व में देना  चाहिए । 4.1.0.2 AV 12-4-2 Curse of a sick Cow दुःखी गौ का श्राप प्रजया स वि क्रीणीते पशुभिश्चोप दस्यति। य आर्षेयेभ्यो याचभ्दयो देवानां  गां न  दित्सति ।। अथर्व 12-4-2 Those who do not give cows in the keeping of such virtuous persons to bring about improvements in the cows, merely trade and do no service for society. They  suffer from curse of unhappy cows. जो … Continue reading वेदों में गौ की सुरक्षा

आर्य मंतव्य (कृण्वन्तो विश्वम आर्यम)