घमण्डी अल्लाह

घमण्डी  अल्लाह -उन लोगों  का रास्ता कि जिन पर तूने निआमत की।। और उनका मार्ग मत दिखा कि जिनके ऊपर  तूने ग़ज़ब अर्थात् अत्यन्त क्रोध  की दृष्टि की और न गुमराहों का मार्ग हमको दिखा।। मं0 1। सि0 1। सू0 1। आ0 6।7 समी0- जब मुसलमान लोग पूर्वजन्म और पूर्वकृत पाप-पुण्य नहीं मानते तो किन्हीं पर ‘‘निआमत’’ अर्थात् फ़जल वा दया करने और किन्हीं पर न करने से खुदा पक्षपाती हो जायगा, क्योंकि बिना पाप-पुण्य, सुख-दुःख देना केवल अन्याय की बात है। और बिना कारण किसी पर दया और किसी पर क्रोध दृष्टि करना भी स्वभाव से बहिः है। क्योंकि बिना भलाई-बुराई के’ वह दया अथवा क्रोध नहीं कर सकता और जब उनके पूर्व संचित  पुण्य-पाप ही नहीं, तो किसी पर दया … Continue reading घमण्डी अल्लाह

विज्ञान और खुदा

    विज्ञान और खुदा -चढत़े हैं फरिश्ते और रूह तर्फ़ उसकी वह अज़ाब होगा बीच उस दिन के कि है परिमाण उसका पचास हजा़र वर्ष । जब कि निकलेंगे वर्ष कबरों में से दौडत़े हुए  मानो कि वह बुतों के स्थानों की ओर दौड़ते हैं । म0ं 7। सि0 29। सू0 70। आ0 4। 431 समी0 -यदि पचास हज़ार वर्ष दिन का परिमाण है तो पचास हज़ार वर्ष की रात्रि क्यों नहीं ? यदि उतनी बड़ी रात्रि नहीं है तो उतना बड़ा दिन कभी नहीं हो सकता। क्या पचास हज़ार करोड़ वर्ष तक खुदा फ़रिश्ते और कर्मपत्र वाले खड़े वा बैठे अथवा जागते ही रहेंगे ? यदि ऐसा है तो सब रोगी होकर पुनः मर ही जायेंगे। क्या कबरों … Continue reading विज्ञान और खुदा

स्वामी ध्रुवानन्द

स्वामी ध्रुवानन्द डा. अशोक आर्य गांव पानी जिला मथुरा उतर प्रदेश में आप का जन्म हुआ । आप का नाम धुरेन्द्र था तथा शास्त्री होने पर नाम के साथ शास्त्री लग गया ओर सन १९३९ में राजा उम्मेद सिंह , नरेश शाहपुर ने आप को राजगुरु की उपाधि दी तो आप के नाम के साथ राजगुरु भी जुड गया । इस प्रकार आप का पूरा नाम धुरेन्द्र शास्त्री , राजगुरु बना । स्वामी सर्वदानन्द जी ने अलीगट से पच्चीस किलोमीटर दूर काली नदी के तट पर एक सुरम्य स्थान पर गुरुकुल की स्थापना की । इस स्थन का नाम हर्दुआगंज है । वास्तव में यह हरदुआगंज नामक गांव इस गुरुकुल से मात्र पांच किलोमीटर की दूरी पर है । इस … Continue reading स्वामी ध्रुवानन्द

स्वामी ओमानन्द सरस्वती

स्वामी ओमानन्द सरस्वती – डा. अशोक आर्य स्वामी ओमानन्द सरस्वती जी का जन्म गांव नरेला ( दिल्ली ) में दिनाक चैत्र शुक्ला ८ सम्वत १९६७ विक्रमी तदनुसार ९ जून १९११ इस्वी को हुआ । आप के पिता गांव के धनाट्य थे जिनका नाम कनक सिंह था । माता का नाम नान्ही देवी था । आप का नाम भगवान सिंह रखा गया । आप ने गांव के ही हाई स्कूल में अपनी शिक्शा आरम्भ की । आरम्भिक शिक्शा पूर्ण कर आप दिल्ली के सेंट स्टीफ़ेंस कालेज में उच्च शिक्शा के लिए प्रवेश लिया । यहां से आप ने एफ़ ए की उपाधि की परीक्शा उतीर्ण कर देश के स्वाधीनता आन्दोलन में कूद पडे तथा देश को स्वाधीन कराने के प्रयास में … Continue reading स्वामी ओमानन्द सरस्वती

स्वामी रामेश्वरानन्द सरस्वती

स्वामी रामेश्वरानन्द सरस्वती  -डा. अशोक आर्य स्वामी रामेश्वरानन्द सरस्ती जी आर्य समाज के तेजस्वी संन्यसी थे । आप उच्चकोटि के वक्ता थे तथा उतम विद्वान व विचारक थे । सन १८९० मे आप का जन्म एक क्रष्क परिवार में हुआ । आप आरम्भ से ही मेधावी होने के साथ ही साथ विरक्त व्रति के थे । आप उच्च शिक्शा न पा सके गांव में ही पाट्शाला की साधारण सी शिक्शा प्राप्त की । आरम्भ से ही विरक्ति की धुन के कारण आप शीघ्र ही घर छोड कर चल दिए तथा काशी जा पहुंचे । यहां पर आप ने स्वामी क्रष्णानन्द जी से संन्यास की दीक्शा  ली  । संन्यासी होने पर भी आप कुछ समय पौराणिक विचारों में रहते हुए इस … Continue reading स्वामी रामेश्वरानन्द सरस्वती

पण्डित प्रकाश वीर शास्त्री

-डा. अशोक आर्य आर्य समाज के जो प्रमुख वक्ता हुए, कुशल राजनेता हुए उनमें पं. प्रकाश वीर शास्त्री जी का नाम प्रमुख रुप से लिया जाता है । आप का नाम प्रकाशचन्द्र रखा गया । आप का जन्म गांव रहरा जिला मुरादाबाद , उतर प्रदेश मे हुआ । आप के पिता का नाम श्री दिलीपसिंह त्यागी था , जो आर्य विचारों के थे । उस काल का प्रत्येक आर्य परिवार अपनी सन्तान को गुरुकुल की शिक्शा देना चाहता था । इस कारण आप का प्रवेश भी पिता जी ने गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर में किया ।  इस गुरुकुल में एक अन्य विद्यार्थी भी आप ही के नाम का होने से आप का नाम बदल कर प्रकाशवीर कर दिया गया । इस … Continue reading पण्डित प्रकाश वीर शास्त्री

पं. राजाराम शास्त्री

पं. राजाराम शास्त्री        -डा. अशोक आर्य पंण्डित राजाराम शास्स्त्री जी अपने काल में अनेक शास्त्रों के अति मर्मग्य तथा इन के टीका कार के रुप में सुप्रसिद्ध विद्वान के रुप में जाने गये । आप का जन्म अखण्ड भारत के अविभाजित पंजाब क्शेत्र के गांव किला मिहां सिंह जिला गुजरांवाला मे हुआ , जो अब पाकिसतान में है ।  आप के पिता का नाम पं. सुबा मल था । इन्हीं सुबामल जी के सान्निध्य में ही आपने अपनी आरम्भिक शिक्शा आरम्भ की । आप अति मेधावी थे तथा शीघ्र ही प्राथमीक शिक्शा पूर्ण की ओर छात्रव्रति प्राप्त करने का गौरव पाया किन्तु इन दिनों एक आकस्मिक घटना ने आप के मन में अंग्रेजी शिक्शा प्रणाली के प्रति घ्रणा पैदा … Continue reading पं. राजाराम शास्त्री

आर्य मंतव्य (कृण्वन्तो विश्वम आर्यम)