भस्मासुर बनते सन्त : आचार्य धर्मवीर जी

  भारतीय परपरा में धर्म का सबन्ध शान्ति के साथ है। जहाँ धर्म है वहाँ शान्ति और सुख अनिवार्य है परन्तु आज के वातावरण में धर्म अशान्ति और परस्पर संघर्ष का पर्याय होता जा रहा है। धार्मिक स्थान पर रहने वाले लोगों को साधु, सन्त आदि शदों से पहचाना जाता था। साधु का अर्थ ही अच्छा होता है, संस्कृत भाषा में जो दूसरों के कार्यों को सिद्ध करने में अपने जीवन की सार्थकता समझता है उसे ही साधु कहते हैं। जिसका स्वभाव शान्त है वही सन्त होता है। आजकल इन शदों का अर्थ ही बदल गया है, जो स्वार्थ सिद्ध करने में लगा है वह साधु है, जो अशान्ति फैला रहा है वह सन्त है। जो जनता को मूर्ख बना … Continue reading भस्मासुर बनते सन्त : आचार्य धर्मवीर जी

जिज्ञासा समाधान : आचार्य सोमदेव जी

  जिज्ञासा– अथर्ववेद में निनलिखित दो मन्त्र इस प्रकार से हैं- अष्टाचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या। तस्यां हिरण्ययः कोशः स्वर्गो ज्योतिषावृतः।। तस्मिन् हिरण्यये कोशे त्र्यरे त्रिप्रतिष्ठिते। तस्मिन्यद्यक्षमात्मन्वत्तद्वै ब्रह्मविदो विदुः।। – अथर्ववेद 10/2/31-32 पहले मन्त्र में मनुष्य के शरीर की संरचना का वर्णन किया गया है। संक्षेप में, यह स्पष्ट रूप में कहा गया है कि हमारे शरीर में आठ चक्र हैं। मैं अपने अल्प ज्ञान के आधार पर यही समझता हूँ कि वेद-मन्त्र का संकेत मूलाधार से ब्रह्मरन्ध्र नामक आठ चक्रों पर है। इस शरीर में एक आनन्दमय कोश है जो कि आत्मा का निवास-स्थान है। इस आत्मा में जो परमात्मा विद्यमान है, ब्रह्म-ज्ञानी उसे ही जानने का प्रयास करते हैं। जहाँ तक मैंने वैदिक विद्वानों के मुखारविन्द से सुना है, … Continue reading जिज्ञासा समाधान : आचार्य सोमदेव जी

Vedas For Beginners 7 : What is meant by ghosts and spirits[ Bhuths and pretaas]?

K:  Do bodies like ghosts and spirits exist?  Number of stories is told on ghosts and spirits.  Talismans, threads are tied in an attempt to ward off evils. Mantras are muttered to drive away the spirits. There are exorcists claiming similar action. Is it correct? V:  Really speaking, ghosts and spirits do not exist. What people say on the subject are just imaginary stories. Time has three dimensions, present, past, and future. Bhoot means past i.e., what is elapsed.   A deceased does not exist anymore. He is counted to as belonging to the past (Bhoota). Therefore, Bhoot refers to the person who is dead and gone. There is nothing called pretha (spirit). A dead person is called as pretha ( … Continue reading Vedas For Beginners 7 : What is meant by ghosts and spirits[ Bhuths and pretaas]?

Religious Conversion through Temptation

Dec’2014 secession of parliament is stalled by our concern leader on the issue of religion conversion. Verily our elected members of parliament are our representatives and should be concerned over the issues of general public. It should be addressed in parliament. Religion conversion should not be a matter of temptation or threat. Different Muslim Member of Parliament heard saying that 95% of the Indian Muslims were Hindus. How they become Muslims these are not hidden facts. It was a conversion thru the force and lure which resulted in creating ground for Muslims in Aryavart. Sing of forceful conversion are still found as after passing lot of generations still converted Muslims are carrying their identity of Gotra like Chaudhary Muslim, Malik … Continue reading Religious Conversion through Temptation

आदर्श संन्यासी – स्वामी विवेकानन्द भाग -२ : धर्मवीर जी

दिनांक २३ अक्टूबर २०१४ को रामलीला मैदान, नई दिल्ली में प्रतिवर्ष की भांति आर्यसमाज की ओर से महर्षि दयानन्द बलिदान समारोह मनाया गया। इस अवसर पर भूतपूर्व सेनाध्यक्ष वी.के. सिंह मुख्य अतिथि के रूप में आमन्त्रित थे। उन्होंने श्रद्धाञ्जलि देते हुए जिन वाक्यों का प्रयोग किया वे श्रद्धाञ्जलि कम उनकी अज्ञानता के प्रतीक अधिक थे। वी.के. सिंह ने अपने भाषण में कहा- ‘इस देश के महापुरुषों में पहला स्थान स्वामी विवेकानन्द का है तथा दूसरा स्थान स्वामी दयानन्द का है।’ यह वाक्य वक्ता की अज्ञानता के साथ अशिष्टता का भी द्योतक है। सामान्य रूप से महापुरुषों की तुलना नहीं की जाती। विशेष रूप से जिस मञ्च पर आपको बुलाया गया है, उस मञ्च पर तुलना करने की आवश्यकता पड़े भी … Continue reading आदर्श संन्यासी – स्वामी विवेकानन्द भाग -२ : धर्मवीर जी

Advaitwaad Khandan Series 3 : पण्डित गंगा प्रसाद उपाध्याय

श्री स्वामी शंकराचार्य जी ने वेदान्त दर्षन का जो भाष्य  किया है उसके आरम्भ के भाग को चतुःसूत्री कहते है। क्योंकि यह पहले चार सूत्रों के भाश्य के अन्र्तगत है। इस चतुःसूत्री में भाश्यकार ने अपने मत की मुख्य रूप से रूपरेखा दी है। इसलिये चतुःसूत्री को समस्त षांकर-भाश्य का सार कहना चाहिये। वादराय-कृत चार सूत्रों के षब्दों से तो षांकर-मत का पता नहीं चलता। वे सूत्र ये हैंः- (1) अथातो ब्रह्मजिज्ञासा-अब इसलिये ब्रह्म जानने की इच्छा है। (2) जन्माद्यस्य यतः-ब्रह्म वह है जिससे जगत् का जन्म, स्थिति तथा प्रलय होती है। (3) षास्त्रायोत्विात्-वह ब्रह्म षास्त्र की योनि है अर्थात् वेद ब्रह्म से ही आविर्भूत हुये है। (4) तत्तु समन्वयात्-ब्रह्म-कृत जगत् और ब्रह्म-प्रदत्त वेद में परस्पर समन्वय है। अर्थात् षास्त्र … Continue reading Advaitwaad Khandan Series 3 : पण्डित गंगा प्रसाद उपाध्याय

आर्य मंतव्य (कृण्वन्तो विश्वम आर्यम)