इस्लाम में नारी की स्थिति – १. बहुविवाह प्रथा

संसार में सभी सभ्य जातियों के लोग नारी जाति की रक्षा करना उसका सम्मान करना अपना सर्वोपरि धर्म समझते है | “नारी” पुत्री, बहिन व् माता के रूप में सम्मान की पात्र होती है | विवाहित होने पर अपने पति के साथ गृहस्थ जीवन में पति की जीवनसंगिनी के रूप में जीवन को आनन्द से भरपूर रखने वाली गृहस्थ की चिंताओं से पति को मुक्त रखने वाली, तथा सामाजिक कार्यो में मंत्री के रूप में सलाह देने वाली, सेविका के समान उसकी अनुचरी –माँ के समान प्रेम से उसे भोजन से तृप्त रखने वाली और सृष्टिक्रम को जारी रखने वाली, श्रेष्ठ सन्तान को जन्म देने वाली, उसकी सर्वप्रथम शिक्षिका के रूप में निर्मात्री होती है | हिन्दू धर्म में नारी … Continue reading इस्लाम में नारी की स्थिति – १. बहुविवाह प्रथा

A critique of the beliefs of the Hare Krishna movement (ISKCON) : Dr. Vibhu

The Hare Krishna Movement, which has re-named itself The International Society for Krishna Consciousness (ISKCON), considers itself to be the modern core of Hinduism.  Although Krishna lived over 5000 years ago, ISKCON today follows the teachings of Chaitanya who was born in Bengal in 1486 and who popularized the movement all over India. He is part of a lineage of successive disciples who, variously, taught the worship of Krishna, or the goddess Lakshmi or Rudra (referring to the god Shiva).  Its principal scriptures were The Bhagavad-Geeta (The Song of God) and the Shrimad Bhagavatam (the story of the Personality of Godhead Shri Krishna Bhagavan). Interestingly, ISKCON teaches that Absolute Truth is contained in the Vedas, the oldest scriptures in the world. Other key ISKCON beliefs … Continue reading A critique of the beliefs of the Hare Krishna movement (ISKCON) : Dr. Vibhu

मैक्समुलर के सफ़ेद झूठ…….

जिज्ञासा – समाधान जिज्ञासा –( जिज्ञासु- अनिरुद्ध आर्य, दिल्ली ) कुछ विद्वान वेदों का काल पाश्चात्य विद्वानों के आधार पर २००० या ३००० ईसा पूर्व हि मानते है, क्या यह ठीक है ? और मैक्समुलर ऋग्वेद को दुनिया के पुस्तकालय की सबसे पुरानी पुस्तक मानता है , क्या यह मैक्समुलर की मान्यता ठीक है ? क्या हम आर्यो को भी इसी के अनुसार मानना चाइये | कृपया मार्गदर्शन करे | समाधान – ( समाधान करता – आचार्य सोमदेव,ऋषि उद्यान, अजमेर)  वेदों का काल जब से मानव उत्पति हुई है तभी से है | आज इस काल को महर्षि दयानंद के अनुसार १ अरब ९६ करोड़ ५३ हज़ार ११५ वा वर्ष चल रहा है | पाश्चात्य विद्वानों की, की गयी काल … Continue reading मैक्समुलर के सफ़ेद झूठ…….

भगवान मनु ओर दलित समाज

मित्रो ओम | मै जो लेख लिख रहा हु उससे सम्बंधित अनेक लेख आर्य विद्वान अपने ब्लोगों पर डाल चुके है| कई तरह की पुस्तके भी लिखी जा सकती है | जिसमे सबसे महत्वपूर्ण योगदान सुरेन्द्र कुमार जी का है| जिन्होंने मह्रिषी मनु के कथन को स्पष्ट करने का ओर मनु स्म्रति को शुद्ध करने का प्रसंसिय कार्य किया है| इस सम्बन्ध में आपने जितने भी लेख जैसे मनु और शुद्र,मनु और महिलायें आदि विभिन्न blogger द्वारा लिखे पढ़े होंगे |वे सब इन्ही की किताबो ओर शोधो से लिए गये है |हमारा भी ये लेख इन्ही की किताब से प्रेरित है| मह्रिषी मनु को कई प्राचीन विद्वान ओर ब्राह्मणकार कहते है की मनु के उपदेश औषधि के सामान है लेकिन … Continue reading भगवान मनु ओर दलित समाज

Defiant bikers as horse riders of jihadi Islam

Written by Ram Kumar Ohri, IPS, (Retd.) Jihadi Islam is in fast forward mode. Not only in India, but across the globe. The soldiers of Islam are waging a jihad against the so-called ‘kaffirs’ (read the non-Muslim) from America to the Phillipines via Europe, Middle East and Indian sub-continent. The fast-forward epidemic of rowdy bike-riders have managed to hold the citizens of Delhi for ransom during the last two successive years. There is a method in their madness. They are conveying a warning to the Indian masses (read Hindus) of the coming clash of civilizations. In June 2013 the denizens of Delhi, especially the motorists and pedestrians on Delhi roads had to wade through a harrowing experience of lawlessness throughout … Continue reading Defiant bikers as horse riders of jihadi Islam

वर्ण व्यवस्था

  वर्ण व्यवस्था क्या है ? किन पर्  लागू होती है ?  आज के  परिपेक्ष्य मैं  इस्का क्या लाभ है? समाज मैं सब व्यक्ति सब कार्य समान कुशल्ता से नहीं कर सक्ते हैं .इस्लिये योग्यता के अनुसार व्यवस्था चलाने के लिये भिन्नभिन्न वर्ण के लोग वर्ण व्यवस्था केवल ग्रहस्थ  पर  लागू होती है . ब्रह्म्चारि वंप्रस्थ और सन्यासि वर्ण से बाहर है. ग्रहस्थी में एक वर्ण  की लड़्की को   अपने वर्ण में स्वयम्वर विवाह  का आदेश्  है . सम्पत्ति ग्रहस्थ  के पास रहेगी. अन्य वर्ण ग्रहस्थ  पर आश्रित हैं . हर वर्ण की एक  श्रेणी होती है. उस श्रेणी की व्यवस्था  वे लोग स्वयम  देख्ते  हैं . राजा उस में हस्तक्षेप नहीं करता . आज कल सरकार अंग्रेज़ोन कि … Continue reading वर्ण व्यवस्था

आर्य मंतव्य (कृण्वन्तो विश्वम आर्यम)