तिथी को शुभ अशुभ मानने वालों से कुछ प्रश्न : Arya Great

तिथी को शुभ अशुभ मानने वालों से कुछ प्रश्न : १. तिथी को शुभ अशुभ मानने का कारण क्या है ? २. तिथि के शुभ अशुभ होने और सफलता असफलता के कारण होने में वेदादि सत्य शाश्त्रों के प्रमाण दीजिये ? ३. तिथी का तथा कर्म सिद्धांत का कैसा सम्बन्ध है ? सविस्तार बताइये। ४ शुभ तिथियों में किये हुए कार्य असफल क्यूँ हो जाते हैं ? ५. यदि किसी ने देश पर आक्रमण किया हो तब शुभ तिथि का क्या अर्थ होगा ? यदी रहेगा अथवा कोई दूसरा बनेगा ? ६. औषधि सेवन में शुभाशुभ तिथी की प्रतीक्षा करें तो तिथि से पूर्व रोगी महाप्रयाण ही करेगा।. ७. शुभकर्मों में तिथी की क्या आवश्यकता है ? ८ अशुभ कार्य … Continue reading तिथी को शुभ अशुभ मानने वालों से कुछ प्रश्न : Arya Great

कुण्डली को सत्य मानने वालों से कुछ प्रश्न : Arya Great

कुण्डली को सत्य मानने वालों से कुछ प्रश्न १. कुण्डली से जीवन के सम्बन्ध में ज्ञान कैसे होगा यह युक्ति से सिद्ध कीजिये ? २. कुंडली का विधान अथवा संकेत किसी वेदशास्त्र में हो तो प्रमाण दीजिये ? ३. कुंडली का कर्म सिद्धांत से क्या सम्बन्ध है सप्रमाण बताइये ? ४ जन्म कुंडली से जीवन का ज्ञान होता है अथवा चन्द्र कुंडली से और क्यों ? यदि दोनों में परस्पर विरोध हो तो किसको मानें और किसको नहीं ? ५. कुंडली के अनुसार मनुष्य की १२० वर्ष ही होती है। प्रत्यक्ष में देखा जाता है कि एक सौ बीस वर्ष से अधिक आयु वाले होते हैं। क्या प्रत्यक्ष भी मित्थ्या है ? ६. पति पत्नी की संतान रेखाएं एक समान … Continue reading कुण्डली को सत्य मानने वालों से कुछ प्रश्न : Arya Great

क्या वर्ण व्यवस्था जन्म आधारित है |

वैदिक युग के पतन के बाद कर्म व्यवहार आधारित वर्ण व्यवस्था का स्थान जन्म आधारित घृणित जाती प्रथा ने ले लिया. जन्म आधारित प्रथा का स्थापन्न होने के वजह से सामाजिक बुराइयां अपने चरम पर पहुँच गयीं और कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था का पूर्णतया  लोप हो गया. महर्षी दयानंदसरस्वती ने अपने अकाट्य तर्कों के आधार पर इस व्यवस्था का पुनर्स्थापन किया। महर्षी दयानंद ने इस बात का पुरजोर आगाज किया कि शुद्र के घर पैदा हुआ बालक अपने कर्मों के आधार पर ब्राहम्ण बन सकता है और ब्राहम्मण के घर उत्पन्न बालक यदी हींन कर्मों में लींन  है तो वह शुद्र कहलाने के योग्य है ब्राहम्मण नहीं।   पौराणिक धर्म ग्रंथों में इसके अनेकों प्रमाण स्थान स्थान पर उपस्थित हैं … Continue reading क्या वर्ण व्यवस्था जन्म आधारित है |

हलाल व हराम – चमूपति

क़ुरान में कुछ आयतें खाने पीने के सम्बन्ध में आई हैं –  इन्नमा हर्र्मा अलैकुमुल मैतता व इदमावलहमलखंजीरे व मा उहिल्लमा बिहीबिगैरिल्लाह – सूरते बकर आयत १७३ वास्तव में तुम्हारे मृतक शरीर का (प्रयोग ) हराम (निषिद्ध )  किया गया है. सुअर  का लहू व गोश्त भी (अवैध ) है और वह भी (निषिद्ध) है जिस पर खुद के सिवाय कोई और (नाम ) पुकारा जाये। इस्लाम के लोग ‘मैतता ‘ का अर्थ करते हैं जो स्व्यम मर जाएँ। शाब्दिक अर्थ तो यह है ‘ जो मर गया हो’ और उस पर अल्लाह मियाँ  का नाम लेने का अर्थ है वध करते हुए अल्लाहो अकबर व बिस्मिल्लाहहिर्रहमानिर्ररहीम पड़ना। इधर दयालु व कृपालु अलह का नाम लेना उधर मूक पशु के … Continue reading हलाल व हराम – चमूपति

आर्य मंतव्य (कृण्वन्तो विश्वम आर्यम)