हदीस : क़र्जे

क़र्जे मुहम्मद मृतक के कर्जों के मामले में बहुत सतर्क थे। मृत व्यक्ति की संपत्ति में से उसके अंतिम संस्कारों के खर्च निकालने के बाद उसके कर्जों की अदायगी सबसे पहले की जाती थी। अगर उसकी संपत्ति कर्जों की अदायगी के लिए काफ़ी न हो तो चंदे से पैसा जुटाया जाता था। किन्तु लड़ाइयां जीतने के बाद मुहम्मद जब धनी हो गये तो कर्ज़ वे अपने पास से चुकता कर देते थे। उन्होंने कहा-”जब अल्लाह ने जीत के दरवाजे मेरे लिए खोल दिये तो उसने कहा कि मैं मोमिनों के अधिक नज़दीक हूं, इसलिए अगर कोई क़र्ज़ छोड़कर मर जाता है तो उसकी अदायगी मेरी ज़िम्मेदारी है और अगर कोई जायदाद छोड़ कर मरे तो वह उसके वारिसों को मिलेगी“ … Continue reading हदीस : क़र्जे

‘आर्यसमाज के नियम’1

‘आर्यसमाज के नियम’1 1904 ई0 में आर्यसमाज टोहाना की स्थापना हुई। शीघ्र ही यह नगर वैदिक धर्मप्रचार का भारत-विज़्यात केन्द्र बन गया। नगर तथा समीपवर्ती ग्रामों में भी शास्त्रार्थ होते रहे। 1908 ई0 में टोहाना में एक भारी शास्त्रार्थ हुआ। पौराणिकों की ओर से पण्डित श्री लक्ष्मीनारायणजी बोले। आर्यसमाज की ओर से पण्डित श्री राजाराम डी0ए0वी0 कालेज, लाहौर के प्राध्यापक ने वैदिक पक्ष रखा। शास्त्रार्थ के प्रधान थे श्री उदमीराम पटवारी। पण्डित राजारामजी ने पूछा ‘‘शास्त्रार्थ किस विषय पर होगा?’’ पं0 लक्ष्मीनारायण जी ने कहा-‘‘आर्यसमाज के नियमों पर।’’ पण्डित राजारामजी ने कहा, हमारे नियम तो आप भी मानते हैं। शास्त्रार्थ तो ऐसे विषय पर ही हो सकता है जिसपर आपका हमसे मतभेद हो। ऐसे चार विषय हैं-(1) मूर्ज़िपूजा (2) मृतक- … Continue reading ‘आर्यसमाज के नियम’1

HADEES : DEATH PENALTY FOR APOSTASY REBELLION

DEATH PENALTY FOR APOSTASY REBELLION One can accept Islam freely, but one cannot give it up with the same freedom.  The punishment for apostasy-for giving up Islam-is death, though not by burning.  �Once a group of men apostatized from Islam.  �Ali burnt them to death.  When Ibn �AbbAs heard about it, he said: If I had been in his place, I would have put them to sword for I have heard the apostle say, Kill an apostate but do not burn him for Fire is Allah�s agency for punishing the sinners� (TirmizI, vol. I, 1357).  Eight men of the tribe of �Ukl became Muslims and emigrated to Medina.  The climate of Medina did not suit them.  Muhammad allowed them �to go to … Continue reading HADEES : DEATH PENALTY FOR APOSTASY REBELLION

तीन तलाक पीड़िता की नाबालिग बेटी ने हिंदू धर्म अपनाने का किया एलान

तीन तलाक पीड़िता की नाबालिग बेटी ने हिंदू धर्म अपनाने का किया एलान सांकेतिक तस्वीर Image Source: File Photo उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन तलाक पीड़िता की एक नाबालिग बेटी ने गुरुवार को हिंदू धर्म अपनाने का ऐलान कर दिया. दरअसल 16 वर्षीया किशोरी का कहना है कि उसकी मां और समाज के अन्य लोग उसकी शादी जबरदस्ती एक 50 साल के अधेड़ से करवाना चाहते हैं. फिलहाल युवती घर से भागकर जय शिवसेना की शरण में चली गई है. राजनगर निवासी किशोरी के मुताबिक वह तलाक और हलाला जैसी कुप्रथा के दर्द से नहीं गुजरना चाहती. इसलिए हिंदू धर्म अपनाने जा रही है. किशोरी का कहना है कि उसने अपनी मां को तलाक के बाद घुट-घुटकर जिते देखा … Continue reading तीन तलाक पीड़िता की नाबालिग बेटी ने हिंदू धर्म अपनाने का किया एलान

हदीस : कानूनी वारिसों के लिए दो-तिहाई

कानूनी वारिसों के लिए दो-तिहाई एक मृत व्यक्ति की जायदाद को मृतक की कई-एक अदायगियां पूरी करने के बाद बांटा जा सकता है, जैसे कि दफ़नाने का खर्च और मृतक के कर्जों की अदायगी। इस्लाम के सिवाय किसी और मज़हब को मानने वाले व्यक्ति को यह हक़ नहीं है कि वह किसी मुसलमान से कोई उत्तराधिकार पाए। इसी प्रकार कोई मुसलमान (किसी) गैर-मुस्लिम का दाय-भाग ग्रहण नहीं कर सकता“ (3928)। विरासत के एक अन्य सिद्धांत के अनुसार “एक मर्द दो औरतों द्वारा पाए जाने वाले भाग के बराबर हैं“ (3933)।   मुहम्मद कहते हैं कि कोई व्यक्ति अपनी जायदाद के सिर्फ़ एक-तिहाई भाग की ही वसीयत कर सकता है। बाकी दो-तिहाई कानूनी वारिसों को मिलना चाहिए। साद बिन अबी वक्कास … Continue reading हदीस : कानूनी वारिसों के लिए दो-तिहाई

ऐसे दिलजले उपदेशक!

ऐसे दिलजले उपदेशक! बहुत पुरानी बात है। देश का विभाजन अभी हुआ ही था। करनाल ज़िला के तंगौड़ ग्राम में आर्यसमाज का उत्सव था। पं0 शान्तिप्रकाशजी शास्त्रार्थ महारथी, पण्डित श्री मुनीश्वरदेवजी आदि कई मूर्धन्य विद्वान् तथा पण्डित श्री तेजभानुजी भजनोपदेशक वहाँ पहुँचे। कुछ ऐसे वातावरण बन गया कि उत्सव सफल होता न दीखा। पण्डित श्री शान्तिप्रकाशजी ने अपनी दूरदर्शिता तथा अनुभव से यह भाँप लिया कि पण्डित श्री ओज़्प्रकाशजी वर्मा के आने से ही उत्सव जम सकता है अन्यथा इतने विद्वानों का आना सब व्यर्थ रहेगा। पण्डित श्री तेजभानुजी को रातों-रात वहाँ से साईकिल पर भेजा गया। पण्डित ओज़्प्रकाशजी वर्मा शाहबाद के आस-पास ही कहीं प्रचार कर रहे थे। पण्डित तेजभानु रात को वहाँ पहुँचे। वर्माजी को साईकल पर बिठाकर … Continue reading ऐसे दिलजले उपदेशक!

HADEES : QASAMAH

QASAMAH The fourteenth book is the �Book of Oaths� (al-qasAmah).  QasAmah literally means �taking an oath,� but in the terminology of the sharI�ah, it is an oath of a particular type and taken under particular conditions.  For example, when a man is found slain, and the identity of his slayer is unknown, fifty persons from the nearest district take an oath that they neither killed the man nor knew who did it.  This establishes their innocence. This was apparently the practice among the pre-Islamic Arabs, and Muhammad adopted it.  Once a Muslim was found slain.  His relatives accused the neighboring Jews.  Muhammad told them: �Let fifty persons among you take oath for leveling the charge of murder against a person among them, and he … Continue reading HADEES : QASAMAH

आर्य मंतव्य (कृण्वन्तो विश्वम आर्यम)