Muta in Islam (इस्लाम में “मुता” की विचित्र प्रथा)

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 इस्लाम में “मुता” नाम से एक प्रथा चालू है | किसी भी स्त्री को थोड़े समय के लिए कुछ घंटों या दिनों के लिए बीबी बना लेना और उससे विषयभोग करना तथा फिर सम्बन्ध विच्छेद करके त्याग देना “मुता” कहलाता है |

    यह इस्लाम का मजहबी रिवाज है | अय्याशी के लिए मुता करने पर औरत उस मर्द से अपनी मेहर (विवाह की ठहरौनी की रकम) या (फीस) मांगने की भी हकदार नहीं होती है |

   यदि मुता के दिनों वा घंटों में विषयभोग करने से उस स्त्री को गर्भ रह जावे तो उसकी उस मर्द पर कोई जिम्मेवारी नहीं होती है | कोई भी औरत कितने ही मर्दों से मुता करा सकती है या एक मर्द कितनी ही औरतों से मुता कर सकता है, उसकी कोई हद (सीमा) इस्लाम में निश्चित नहीं है | इससे स्पष्ट है की-

………………………………..“इस्लाम में नारी का महत्व केवल पुरुष की पाशविक वासनाओं की पूर्ति करना मात्र है” |

   आश्चर्य है की जिस इस्लाम मजहब में मुता जैसी गन्दी प्रथा चालु है | उस पर भी वह संयम-सदाचार तथा नारी के सम्मान की इस्लाम में दुहाई देने का दुःसाहस करता है ?

   इस्लामी साहित्य में कुछ विचित्र सी बातें लिखी हुई मिलती हैं जिन्हें देखकर यह प्रकट होता है की-

………………………………………………………………………….”संयम नाम की चीज इस्लाम में कभी भी नहीं रही है”|

एक स्थान पर लिखा है की-

…….“रसूलअल्लाह (हजरत मुहम्मद साहब) अपनी सभी औरतों से मैथुन कर चुकने के बाद स्नान किया करते थे” |

 

                                                         (इब्ने मआजा फिबाब छापा निजामी, दिल्ली)

    हजरत आयशा ने कहा-

   “जब दो खतने मिल जावें तो स्नान फर्ज हो जाता है | मैंने और हजरत ने ऐसा करने के बाद ही स्नान किया है” |                                                            (इब्ने मआजा फीबाब गुस्ले सफा ४५)

   हजरत आयशा ने कहा की-

“रसूलअल्लाह रोजा रख कर मेरा मुँह चुमते और मेरे साथ मैथुन करते थे परन्तु वह अपनी गुप्तेन्द्रिय पर तुमसे ज्यादा काबू रखते थे” |

                                                                                 (बुखारी शरीफ)

उपरोक्त बातें इस्लाम में विषय भोग की अत्याधिकता की धोतक हैं | पर आश्चर्य यह है की एक नारी के मुँह से यह बातें कही हुई इस्लामी साहित्य में लिखी हुई मिलती हैं |

   नारी स्वभावतः लज्जाशील होती है ऐसी संकोच की बातों को आयशा बेगम ने कहा होगा, यह विशवास के योग्य नहीं लगती | और यह सत्य है तो यह एक नारी के लिए भारतीय दृष्टि से निर्लज्जता की पराकाष्ठा ही कही जायेगी |

   कोई भी संसार की नारी चाहे वह किसी भी स्थिति की क्यों न हो परन्तु वह ऐसी बातें कह ही नहीं सकती है |

   हाँ ! इस्लाम की बात दूसरी है, आप आगे दो एक प्रमाण और भी देखिये-

      “आयशा रजीउल्लाह से रवायत है की नबी सलेअल्लाहु वलैहि- असल्लम (हजरत मौहम्मद साहब) के साथ आपकी किसी बीबी ने एतकाफ किया और वह बहालत इस्तहाजा (मासिक धर्म) से थी, खून देखती थी तो कभी खून की वजह से वह नीचे तश्तरी रख लेती थी” |

                                                          (बुखारी शरीफ भाग १ सफा ७७ हदीस २११)

आयशा रजीउल्लाहू से रवायत है-

    में और नबी सलेल्लाहू वलैहि असल्लम (मौहम्मद साहब) एक बर्तन में वजू करते थे, दोनों नापाक होते थे, और आप मुझे हुक्म देते थे पस ! में इजार पहिनती (महीने से) थी, और आप मुझसे मुवाशिरत करते थे और में हैजवाली (महीने से) होती थी और आप अपना सर मेरी तरफ कर देते थे, में बहालत एतकाफ और में उसको धोती थी, हालांकि में बहालत हैज (मासिक धर्म) से होती थी |

                                                            (बुखारी शरीफ न० २०८ भाग १ सफा ७६)

   यह प्रमाण इस्लाम में नारी की स्थिति का सही दिग्दर्शन कराते हैं | यह बातें मुस्लिम नारियों को अपनी स्थिति के बारे में विचार करने योग्य हैं |

इस्लाम में नारी को बहिन मानने वाला तथा रिश्ते में भाई ही जब उसे अपनी बीबी बना लेता है तो फिर नारी की वहां क्या प्रतिष्ठा है ? आज जो तुम्हारी बहिन है कल वही तुम्हारी बीबी बन जायेगी |

   जो आज तुम्हारा भाई है कल वह तुम्हारा दूल्हा भाई बन जावेगा, बहिन की लड़की बुआ की लड़की भाई की बेटी चचा की बेटी अपने ही घर में अपने ही घर के भाई की बीबी बना दी जाती है |

   इस्लाम में औरत को गुलाम से भी बदतर  समझा जाता हैं | वह घर में कैदी की तरह रहती है | बुरके में बंद रहते हुए खुली हवा को भी तरसती रहती है |

   मुस्लिम औरतों के इस काले घूँघट का नाम भी ऊटपटांग ही है |  भाइयों ! यह कपड़ा है तो “सर का” ! नाम रखा है “बुर का” !! इस विचित्र भाषा को बोलने में भी शर्म महसूस होती है | (बिहार बंगाल या पूर्वी उतर प्रदेश के निवासी इस भाषा का अर्थ अधिक अच्छी तरह जानते है)
        आजीवन साथी के रूप में वस्तुतः नर और नारी का पवित्र सम्बन्ध क्षेत्र व बीज का है | नारी क्षेत्र है तो नर बीजाधानकर्ता है |

   संतानोत्पति का कर्तव्य दोनों पर आयद (लागू) होता है | गृहस्थ जीवन से आनन्द में रहते हुए वंश परम्परा को जारी रखना, अपने भावी जीवन व वृधावस्था के लिए सुख का आधार संतान को जन्म देना, उसे अपना उतराधिकारी बनाना उसे सुशिक्षा द्वारा देश व समाज के लिए योग्य नाग्तिक बनाना यह सभी गृहस्थों के उतरदायित्व होते हैं |

  इसीलिए प्रत्येक माता-पिटा अपनी संतान की इच्छा रखते हैं | बालक को गोद में खिलाने, उसे प्यार करने, उसे सुखी कर स्वयं सुख अनुभव करने की इच्छा सभी की होती है |

    जिनके संतान नहीं होती है वह उसके अभाव को अत्याधिक अनुभव करते व जीवन भर परेशान रहते हैं | उनके निधन के पश्चात उनकी सम्पति की दुर्दशा होती है तथा वृधावस्था में वे सेवा सहायता के लिए दुःखी पाए जाते हैं यह सब लोक में प्रायः नित्य देखा जाता है |

   लोक में विचारकों व समाज के लिए उन्नतिकारक नियम बनाने वालों के द्वारा अपने अपने समाजों के लिए सभी प्रकार की हालतों पर विचार करके शुभकालिक व आपतिकालिक अवस्थाओं के लिए अपने अपने देश की परिस्थितियों के अनुसार व्यवस्थाएं बनाई गई हैं जो उनके धर्म ग्रंथों में संग्रहित हैं और उनके समाज उनके द्वारा बनाए गए नियमों के द्वारा संचालित होते रहे हैं |

 आपतिकालिक परिस्थितियों में वे स्थितियां भी है जिनमें पति में दोष होने के कारण संतान पैदा नहीं होती है | पति वृद्ध होने से संतानोत्पति में शक्तिहीन हो, पुरुष में इन्द्रिय सम्बन्धी ऐसे दोष हों की वह इस विषय में असमर्थ हो उसमें वीर्याणु ही न हों या पति की मृत्यु हो जावे और संतान न हो, पति अपनी पत्नी को छोड़ कर परदेस चला जावे और लौट कर ही न आवे |

  पत्नी ही बाँझ ही, उसके शारीर में रोग या प्राकर्तिक बनावट का दैवी दिश जन्मना हो ऐसी विषम परिस्थितियों में यदि पति दूसरी शादी करे ओ गृहकलह को आमंत्रित करना होगा |

   यदि किसी को गोद लेंगे तो उनका उस बालक में तथा बालक का उनमें उतना ममत्व नहीं होगा जितना अपने अंश के साथ होता है |

    ऐसी दशा में भारत के अन्दर नियोजित संतान की व्यवस्था मिलती है उसमें परिवार की सम्पति भी अन्य कुलों में नहीं जाती है, वंश परम्परा भी सुरक्षित रहती है और संतानहीन पुरुष वा संतानहीन स्त्री का जीवन भी संतान मिलने से सदा आनन्दित बना रहता है |

   विधवा पत्नी के दूसरी शादी दूसरी जगह कर लेने पर पूर्व पति की सम्पति दुसरे कुल में चले जाने का भय  बना रहता है तथा पुरुष के वृद्ध माता पिता उस अवस्था में सेवा आदि से भी वंचित हो जाते हैं व् कुल का विनाश हो जाता है |

   कुरान ने भी स्त्री को “खेती” (क्षेत्र) की संज्ञा दी है किन्तु उसमें अप्राकर्तिक (गुदा मैथुन) व्यभिचार का पूत लगा देने से उसे भ्रष्ट कर दिया है, देखिये जैसा की लिखा भी है की-

……………………………………………………………..“तुम्हारी बीबियाँ तुम्हारी खेती हैं जाओ जहाँ से चाहो उनके पास”

  देखिये लखनऊ का छपा कुराने मजीद, शाह अब्दुल कादरी का तजुर्मा

                                                       (कुरान पारा २ सुरह बकर रुकू २८ आयत २२३)

 

28 thoughts on “Muta in Islam (इस्लाम में “मुता” की विचित्र प्रथा)”

  1. हराम के पिल्ले ।इस्लाम के बारे मे कुछ भी बोलने से पहले अपने गिरेबान मे झांक के देख ।हिंदू मजहब सबसे गंदा मजहब है।ब्रह्मा ने अपनी पुत्री को हवस का शिकार बनाया था । अपनी पुत्री सरस्वती से विवाह रचाया ।मत्स्य पुराण मे वर्णित है । भगवान् चंद्र ने अपने भाई दक्ष की 27 पुत्रियों से विवाह किया। भगवान इंद्र ने गौतम ऋषि की पत्नि से छल पूर्वक बलात्कार किया । पतिव्रता नारी तुलसी से बलात्कार किया। अभी और भी बहुत कुछ है ।लेकिन अगर समझदार होगे तो आगे ऐसी कोई बात नही करोगे।

    1. शाहनवाज़ भाई जान
      सलाम भाई जान
      धन्यवाद भाई जान (हराम के पिल्लै ) फूलो से वर्षा करने के लिए | ऐसा फूलो से बारिश करना तो शांतिप्रिय मजहब (इस्लाम ) ही बारिश कर सकता है | आखिर इस्लाम (कुरआन ) ही ऐसा शान्ति की शिक्षा दे सकता है मधुर वाणी से जो आपने बारिश की है उसका आपको तहे दिल से धन्यवाद जी |भाई जान धर्म मजहब संप्रदाय क्या होता है इसके बारे में जानकारी देना जी | दूसरी बात भाई आप खुद देख रहे होगे की हम पुराण का खंडन करते हैं | हम वेद का अनुसरण करते हैं | आप सुने भाई जान पुराण रामायण महाभारत इत्यादि में बहुत सी मिलावट कर दी गयी है | जैसे आपके तौरेत इंजील जुबेर में | आप इन्हें अल्लाह की वाणी मानते हैं | हम रामायण पुराण महाभारत इत्यादि सब को इतिहास मानते हैं |फिर बात की जायेगी कौन सा मजहब अच्छा है या बुरा है |अब सुने जी आप भाई जान | पहले आप यह बताओ की कुरआन की किस आयत सूरा में मीठे वाणी से बारिश करने को कहा गया है | क्या आप इस्लाम को सही से अनुसरण कर रहे हैं ? यदि हां तो कुरआन की वह आयत बताओ जी जिसमे गुस्सा करने और गाली देने को बोला गया है | थोडा हमें जानकारी देना जी | पुराण में बहुत मिलावट कर दी गयी है जिसका हम खंडन करते हैं | हम सिर्फ एक इश्वर को मानते हैं | आप जो ब्रह्मा चन्द्र इत्यादि जी की बात कर रहे हो वह कोई इश्वर नहीं जी | उन्हें भगवान् की श्रेणी में रखा जा सकता है मगर आप यह भी बताना की भगवान् किसे बोलते हैं | हम पुराण को नहीं मानते हैं जी | भगवान् और इश्वर में बहुत अंतर होता है भाई जान | चर्चा आगे की जायेगी | आपसे कुछ सवाल किया है उसे बतलाना जी | फिर हम आगे चर्चा करेंगे |
      धन्यवाद

      1. Amit Roy ji ….sub sey pahley to Aap ko Peyaar Bhara Namus Khar Hum Aap ke sabhi Bato ka tahy Dil sey Is taqbaal kartey ha Our Hum Bus Aap sey itna kahna chahey gey ki …..Bus Aap ye samujh leye ki Pacho Ougleya Barabur nahi hoti ha Bake Aap khud samujh Daar ha….
        Aap Ney bahot Nurmta key saat Aapni Baat Rakhy May Aap ki baat sey suntoush ho

      2. बहिनचोद छांदोग्य जैसे महत्वपूर्ण उपनिषद् में सत्यकाम जाबाल की कथा में रंडापे का चरमोत्कर्ष है कि नहीं जो पुरान नहीं है

        1. कृपया भाषा का संयम बनाये रखें और प्रमाण सहित तर्क पूर्ण चर्चा के भागी बनें

    2. CHOR KO CHOR KAHNE SE USKO GUSSA BAHOOT AATI HAI…..SARAB PINE WALEKO SARABI BOLO TO BAHOOT BHADAKTA HAI…AISE HI AAP NE KIYAA SHAHNAWAZ BHAAI,
      GALAT KO GALAT BOLNA AUR SACH KO SWIKAR KARNA BAHOOT HIMMAT KI JARURAT PADTI HAI…AAP ME OH HIMMAT KAHAAN…!
      ISLAM KI SHABD HI SANSKRIT KI ‘ISH’ DHATU SE NIRMIT HAI…MUSALMAN SHABD BHI MAHABHARAT KI ‘MUSAL’ PARV SE SAMBANDHIT HAI…ARAB SHABD BHI SANSKRIT KI HAI…MAKKA AUR MADINA BHI SANSKRIT KI ‘MAKHA’ ‘MEDINI’ SHABD SE JARUR SAMBANDHIT HAI…’EID’ SHABD AUR ‘ALLAH’ SHABD BHI SANSKRIT KI HAI…’DHARM’ KI KOI SHABD ANYA BHASHA ME UPALABDH NAHI HAI…
      YADI ISLAM DHARM HAI AUR KURAN USKI DHARMIK KITAB HAI TO FIR USSE PAHALE KOUN SA DHARM AUR KITABEN THI? JARUR BATANA TO…
      YAH SHRITSHTI RACHNA KITNI SAL KI HAI KURAN KI HAWALE SE BATANA JI…AUR ALLAH KI SWORUP KAISI HAI..? KYA USNE HI YAH SHRISHTI KI HAI..? AGAR KI HAI TO KIS VASHTU[PADARTH/MATERIAL] SE BANAAI?
      YAANI SHRISHTI KI MOOL TATWO KYAA HAI? KRIPAA KARKE QURAN KI PRAMAAN DENAA THIK HAI….
      NAMASTE….
      OUM…

    3. SHAHNAWAZ BHAI, YADI AAP YAM-NIYAM KI PAALAN KAREN TO AAPKI JIVAN DHANYA HOJAAE…
      YAH HAI 5YAMA AUR 5NIYAMA:

      The 5 (यम)Yamas listed by Patañjali in Yogasūtra are:

      A] –Ahiṃsā (अहिंसा): Nonviolence, non-harming other living beings.
      B] –Satya (सत्य): truthfulness, non-falsehood.
      C] –Asteya (अस्तेय): non-stealing.
      D] –Brahmacharya (ब्रह्मचर्य): chastity, marital fidelity or sexual restraint.
      E] –Aparigraha (अपरिग्रहः): non-avarice, non-possessiveness.
      =============================================
      The 5 (नियम) Niyamas listed by Patañjali in Yogasūtra are:

      A] –Śaucha(शौच): purity, clearness of mind, speech and body.
      B] –Santoṣha(सन्तोष): contentment, acceptance of others and of one’s circumstances as they are, optimism for self.
      C] –Tapas(तपस): accepting and not causing pain.
      D] –Svādhyāya(स्वाध्याय): study of self, self-reflection, introspection of self’s thoughts, speeches and actions.
      E] –Īśvarapraṇidhāna(ईश्वरप्रणिधान): contemplation of the Ishvara (God/Supreme Being, True Self, Unchanging Reality).

    4. अबे ।। सही बात लिखी हुयी अब तू अपनी किताब चेक कर ।। और किताब लिखने वाले को गाली दे कि उसने यह क्यों लिखा था। ।

  2. अमिति राॅय जी आपने इस्लाम धर्म के नाम पर जो बाते कही है वो असल इस्लाम धर्म की है क्या नही ये देखिये आप जिन बातो को जोर दे कर बोल रहे है औरत के बारेमे इस्लाम क्या कहता है आगर आपको सच मुच समज ना है तो असल किताबोका हावाला दीजिये और एक बात तुम्हे लगता है वौसा मतलब मत निकालीये
    आप जो बात कर रहे है वो सिया लोगे की है सिया लोगो मे मुताबिक कि मुताबिक एक औरत और मर्द जितनी चाहिये लोगोसे हां बिस्तरों कर सकता है लेकिन इस बात को इस्लाम मना करता है
    तकिया कि बात इस्लाम को मजूर नही वो बात भी सिया लोगो की है और किरण कि आयतो को हादिस कि बातो को तोड मरोड कर लिखने कि साजिश आज कल की नही बहोत सालो से इस्लाम को बदनाम करणे के लिये इस्लाम जिहादी है इस्लाम औरतो का हाक नही देता औरतो को बदिस्त बनाकर रखता है चार चार शादियां करता है बच्चे जादा पैदा करता है औरतो को रखेल बनाता है लौडी बनाकर खरीदता है बेचता है यौसी बहुत सारी बाते गलत किताबोका हवाला दे कर बताई जाती है और एक कुराण कि असल रिवायत का हावाला दिया जाता है जो इस वक्त मे इस दौर मे कही गयी बाद के रिवायत का हवाला नही दिया जाता
    लोगो को गुमराह करनेके लिये कभी कभार बुखारी शरीफ सही मुस्लिम शरीफ का हावाला दिया जाता है आपने तरीकेसे तो अगर बहस करनी ही है तो एक एक बात बर बहस हो कभी इधर कभी उधर करने से कुछ समझने नही आता आगर लोगो को गुमराह करना ही मकसद है तो फिर कोइ बात नही लेकिन अगर इस्लाम के अंदर लिखी हुवी बाते यौसा क्यू लिखा है कहा गया है सचमुच समझना है तो एक एक बात पर बहस करे हो सकता है कुछ हमे नही समझा होगा और कुछ तुम्हे नही समझा होगा तो बहस करना है तो एक एक बात पर बहस करेगे फिरसे सुरवात कर सकते है मै आपसे बहस कर सकता हु जीस बात पर आपको येतराज है या शंक है उसे दुर करने की कोशिस करेगे मै कोई आलीम या मौलाना नही एक सोशलवर्कर हु अगर कुछ गलत है तो मै इस बात को मानने वाला हू तो आगर आप चाहते है तो बहस कर सकते है मुझे भी इस्लाम के बारे मे सब कुछ मालूम है या सब कुछ जानता हु यौसा नही पर आपके साथ बात करके मुझे जितनी जानकारी है उसने इजाफा जरूर होगा तो हां दोनो को इस्लाम के बाते मे साही समज मिले और हम इस्लाम को सही तरीकेसे समझे यौसी अल्ला से दुवा मागता हु अल्ला हां दोनो को सही समज अत्ता फरमा आमिन

    1. आसिफ बाबा भाई जान
      सबसे पहले हमें यह बतलाये की धर्म किसे बोलते हैं इस्लाम मजहब क्या है ? थोडा हमें बतलाना | इस्लाम में खुद और के बारे में वैसा बोला गया है जिस कारण हमने प्रमाण दिया है | इस्लाम बोलता है जात पात नहीं फिर ये सिया सुन्नी अहमदिया इत्यादि ये सब क्या है ? क्या सिया खुद को इस्लाम के नहीं मानते ? क्या सुन्नी खुद को इस्लाम के नहीं मानते ? ७२ फिरके क्या है ? फिर इस्लाम क्या है ? सच्चा इस्लाम कौन सा है ? यह हमें बतलाना जी | खुद कुरआन सब में इसकी जानकारी दी गयी है | आप जब चाहे चर्चा करें हम तैयार हैं चर्चा करने को | जब आप चाहे कुरआन हदीस सब से चर्चा करे | और हम तो चाहते हैं कोई ऐसा हो जो हमें इस्लाम के बारे में सही जानकारी दे सके | यहाँ तक आपके इस्लाम के प्रकांड विद्वान् जाकिर तक कुरआन हदीस को मानते हैं और मुस्लिम मौलाना तक कुरआन हदीस को सही मानते हैं | और जो हमने प्रमाण दिया है उन्ही सब से पढ़कर दिया है | आप बोलोगे तो उन साईट से लिंक भी पेश कर दूंगा मगर लिंक पेश करूँगा तो बहुत लोगो को लगेगा की हमने गलत पेश कर दी | अल तकैया कर दोगे आप | चलो आप जिस से चर्चा करना चाहो चर्चा करो हम तैयार है | मुझ जैसे अज्ञानी को इस्लाम के बारे में सही जानकारी देने की कृपा करे | आपके जवाब की प्रतीक्षा मे | धन्यवाद |

  3. It’s hard to read and write long comments but I would like to tell all the brothers and sist that Islam prohibits any kind of adultery and regarding Mutah ….it was a bad culture which was practised even before Islam and Prophet Muhammad pbuh declared it to be garam or unlawful. Dear brothers and sisters it is a different thing that what people do these days as like you most of the people are ignorant about what Quran says, which is a matter of concern. Islam treats women as diamonds and
    Pearls…. which are to be protected, treated humbly and politely.

    1. मुता होता था अब भी होता है | ट्रेवलिंग निकाह भी होता है आजकल | कुरान के बारे में हमें क्या नहीं मालुम | यह बतलाना की मरयम बिना जिस्मानी सम्बन्ध बनाये कैसे माँ बन गयी ? क्या बिना जिस्मानी सम्बन्ध बनाये कोई माँ बन सकती है जवाब देना कुरान के आधार पर | धन्यवाद |

  4. आसिफ बाबा क्या आप बता सकते है कि ओरिजनल कुरान ए शरीफ कहाँ से मिल सकती है…..क्योंकि मैं चाहता हूं कि हम लोग भी समझ सके कि आखिर सच्चा मुसलमान धर्म क्या है ताकि ये हिन्दू मुस्लिम के बीच फैला वैमनस्य खत्म हो सके….बहुत हो गया एक दूसरे के धर्म पर कीचड़ उछालना क्योंकि अगर कोई हिन्दू मुस्लिम धर्म के बारे मे 10 कन्फ्यूजन वाली बात बोलता है तो उसके प्रतिरोध मे कोई मुस्लिम हिन्दू धर्म के 10 गलत बातो को बोलने लगता है….ये चीज आखिर है क्या भाई लोग….क्या सिद्ध होगा इन बातों से कभी सोचते है हम लोग…..कुछ हासिल नही होगा इन सब बातो से इसलये अच्छा यही होगा कि लोग अपने अपने धर्म को माने और दूसरे के धर्म मे क्या चल रहा है उससे दूर रहे ।

    1. Origional quran kisee bhee musalman ke pas naheen ahi

      wo hai wahee hai

      kuch aayeten bakri kha gayee
      baki jo alag alag quran theen wo jala dee gayee khaleefa uthman ke samay men
      isaliye quran original kisee ke pas naheen ahi

  5. i think mujhe lagta hi ki islam ek swarti dharam hai jiska andaja aap sura 4 ke ayat 15 and 16 ka adhyayan karke samaj pyenge jisme spast likka hai ki agar agar appki patni kisi ke sath badkari kre to app usko maro pito jaroorat padne use kisi kamre me band kardo …. aur jiske sath [any person] wah badkari kre usko bhi maro lekin jab wah islam ko qubul karle to use chod do . iska matlab yah hua ki kisi ka rape appkardo aur islam qubul karlo to appko alllah maaf kar dega ,

  6. Muslim mantavya
    कुछ लोग मुताअ को लेकर इस्लाम को निशाना बनाते है पोस्ट जरूर पढे :-
    आर्यमनतव्या का झूठ देखें
    http://aryamantavya.in/muta-islam-इस्लाम-में-मुता-की-विच/
    मुहम्मद सल्लल्लाहु ने मुताआ को हराम (अवैध ) करार दिया है :-
    दलील :-
    ईमाम जोहरी कहतें हैं कि हम उमर बिन अजीज की मजलिस मे बैठे थे तभी उस मजलिस मे मुताआ का जिक्र चल गया तो रबीअ बिन सबरा नाम के एक व्यक्ति ने कहा : कि मे अपने पिता के बारें मे गवाही देता हूं कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने अंतिम हज्ज के मौके पर इसको मुताअ को एकदम हराम ( अवैध ) घोषित कर दिया था ।
    ( सुनन अबु दाऊद भाग 1 हदीस नंबर 2072 )
    दूसरा सबूत : =
    रबीअ बिन सबरा अपने पिता से रिवायत करतें हैं कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हज्ज के अंतिम अवसर पर महिलाओं से मुताअ करने को हराम ( अवैध ) घोषित कर दिया है ।
    (सुनन अबू दाऊद भाग-1 हदीस नंबर 2073)
    मुताअ किया है ? :-
    मुताह मैरिज एक कांट्रेक्ट मैरिज था जो अरब में इस्लाम पूर्व प्रचलित थी इस विवाह में विवाह एक निश्चित अवधि बाद स्वयंमेव टूट जाएगा ऐसा अनुबंध किया जाता था, जब नबी सल्ल० का अवतरण हुआ, इस्लाम आया, तो धीरे धीरे शराब जुए और मुताहः जैसे अन्यायपूर्ण और खराब रिवाजों को खत्म कर दिया गया,इन रिवाजों को एक झटके में खत्म इसलिये नही किया गया क्योंकि ऐसा करने पर लोग अपनी लत छोड़ नही पाते और बुरे के बुरे रह जाते, तो बजाये इसके इस्लाम ने ये तरीका अपनाया कि लोगों का मस्तिष्क धीरे धीरे भलाई की बातें आत्मसात करता जाए, और फिर जब इन बुरे रिवाजों से उन्हें रोका जाए तो वे आसानी से इन ख़राब बातों को छोड़ दें तो ऐसा विवाह जिसमे विवाह से पहले ही औरत को तलाक देने की बात तय कर दी जाए यानी कॉन्ट्रैक्ट पर शादी की जाए, यही मुताह मैरिज है, और ऐसी शादी इस्लाम मे हराम है, ऐसी शादी के हराम होने का बयान और ऐलान बहुत सी अहादीस मे है, जैसे ,
    सही बुखारी Vol.5/59/527, सही मुस्लिम 8/3259, सही मुस्लिम 8/3260, सही मुस्लिम 8/3262, सही मुस्लिम 8/3263, सही मुस्लिम 8/3264, सही मुस्लिम 8/3265 और अनेक अहादीस जिनमें नबी सल्ल० बार बार फरमाते हैं कि मुताह हराम है.!!
    और मुताह मैरिज के हराम होने की वजह पवित्र कुरान की आयत 4:24 मे अल्लाह का ये हुक्म है कि ”शादी (मर्द और औरत, दोनों की पाक दामनी यानी यौन शुचिता) पाक दामनी की हिफाज़त करने के लिए करो, न कि नाजायज ढंग से जिस्मानी ताल्लुकात बनाने के लिए ”
    यह एक जमाना ए जाहिलीयत मे के निकाह था कि लोग कुछ समय के निकाह कर लेते थे फिर अलग हो जाते थे जब इस्लाम पावर मे या इस्लामी हुकूमत कायम नहीँ हुई थी तो यह गलत प्रथा चलती रही ,
    लेकिन जब इस्लामी हुकूमत आई तो मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फतेह मक्का के अवसर पर इस गलत प्रथा को हमेशा-हमेशा लिए हराम ( अवैध ) घोषित कर दिया ।
    (देखें :- किताबुल निकाह सुनन अबू दाऊद भाग – 1, पेज नंबर 481 ) हलाला भी निकाह मुताअ ही हैं लिहाज़ा वह भी हराम हैं इससे भी औरत पहले वाले शोहर के लिए हलाल नही होती

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