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मोदी जी का नोटबंदी का निर्णय तथा काले धन के विरुद्ध युद्ध है “हिन्दुत्व वाला एजेंडा”

नमस्ते जी! माननीय प्रधानमंत्री ने जिस प्रकार से काले धन के विरुद्ध युद्ध छेड़ रखा है, उससे ये तो सिद्ध हो ही चुका है कि मोदी जी अपने वचन से नहीं हटते। तथा इससे ये भी सिद्ध हो चुका कि मोदी जी बहुत ही न्यायप्रिय व्यक्ति हैं।

नोटबंदी क्रांतिकारी निर्णय :
काले धन के विरुद्ध युद्ध में बहुत ही निर्णय लिये गये हैं। इसी कड़ी में ५००-१००० के नोटों पर अचानक सर्जिकल स्ट्राइक सबसे नवीनतम तथा आक्रमक निर्णय है। सभी आजकल इसी विषय पर चर्चा कर रहे हैं। लगभग सभी देश-विदेश के अर्थशास्त्रियों इस निर्णय को क्रांतिकारी बताया है। विदेश में भी मोदी जी के इस निर्णय की बहुत सराहना हो रही है।
जिस प्रकार से नोटबदली में कठिनाई होने पर भी पूरे देश की जनता मोदी जी के साथ खड़ी है, इससे ये भी स्पष्ट है कि जनता भी इस निर्णय से प्रसन्न है।

कुछ लोगों को मिर्च लगी :
अपितु कुछ लोगों को ये निर्णय रास नहीं आ रहा। इसमें लगभग सभी विपक्षी दल तथा कुछ सता पक्ष के व्यक्ति भी हैं। सबसे अधिक हानि पाकिस्तान के जाली नोटों के षड्यंत्र को हुई है जिससे आतंकवाद पर लगाम तथा कश्मीर में शांति की आशा बढ़ गयी है।

अनछूए पहलू :
नोटबंदी पर सभी चर्चा तो कर रहे हैं। इसके लाभ भी गिनाए जा रहे हैं। जैसे आतंकवाद में कमी, कश्मीर में शांति स्थापना, भ्रष्टाचार पर लगाम, नकली नोटों का बजार में चलन समाप्ती, गरीब-अमीर के बीच की खाई में कमी आदि अनेक सकारात्मक पहलु।
अपितु इन सभी निर्णयों का एक अनछूए पहलू भी हैं जिसे बहुत कम ही लोग जानते हैं।
बहुत कम लोगों ने ये चिंतन किया होगा कि सभी नेता काले धन के विरुद्ध बोलते तो हैं अपितु केवल नरेंद्र मोदी ने ही इसके विरुद्ध युद्ध का बिगुल क्यों बजाया? क्या कारण है कि इतने प्रधानमंत्रियों में केवल नरेंद्र मोदी ने ही काले धन या गलत तरीके से अर्जित लक्ष्मी के समाप्ति के पथ पर आगे बढ़े? उनके प्रेरणा का श्रोत क्या है?
तो इसका उत्तर है वेद।
अधिकांश लोग चौंक जाएँगे कि यहाँ वेदों की क्या महत्ता?
आइये वेद से ही उत्तर ढूँढते हैं।

अथर्व वेद के ७वें काण्ड के ११५वें सूक्त के प्रथम दो मंत्रों को देखते हैं। इसके ऋषि- अथर्वांगिरा; देवता- सविता, जातवेदा तथा छन्द है अनुष्टुप्

प्र पतेतः पापि लक्ष्मि नश्येतः प्रामुतः पत।
अयस्मयेनाड़्केन द्विषते त्वा सजामसि॥
[ अथर्ववेद | ७ | ११५ | १ ]

अर्थात् अन्याय मार्ग से प्राप्त होने वाला धन हमसे दूर हो। इसका स्थान हमारे शत्रुओं में ही हो।

या मा लक्ष्मीः पतयालूरजुष्टाभिचस्कन्द वन्दनेव वृक्षम्।
अन्यत्रास्मत्सवितस्तामितो धा हिरण्यहस्तो वसु नो रराणः॥
[ अथर्ववेद | ७ | ११५ | २ ]

अर्थात् अन्याय मार्ग से अर्जित धन हमारे शोषण का कारण बनता है। प्रभु उससे हमसे दूर करते हुए, हमारे निवास के लिए आवश्यक पवित्र मार्ग से अर्जित धन को प्राप्त कराएँ।

इन दो मन्त्रों से ही स्पष्ट है कि काले धन के विरुद्ध मोदी जी का युद्ध हिन्दुत्व का प्रतीक है। इन मन्त्रों में काले धन का स्पष्ट निषेध है तथा पवित्र अर्थात् अच्छे तरीके से अर्जित धन को ही प्राप्त करना लिखा है। तथा काले धन और नकली नोट के कारण देश में आतंकवाद, नक्सलवाद, अलगाववाद, जमीन के दाम में वृद्धि आदि न जाने कितने प्रकार के शोषण आम गरीब तथा मध्यमवर्गीय जनता झेल रही थी।
अब यहाँ कुछ लोग ये प्रश्न कर सकते हैं कि अन्याय मार्ग से अर्जित धन शत्रुओं के पास क्यों हो? तो इसका उत्तर है कि भारतवर्ष के शत्रु पाकिस्तान तथा अधिकांश राजनीतिक दल तथा सत्ता पक्ष के कुछ सदस्य भी हैं। अब जाली नोट तथा काला धन पाकिस्तान और उसके भारत में दूत ही रखें। भारत प्रेमियों को नहीं चाहिए।

नोटबंदी से सरकारी कार्यालयों में चलने वाली भ्रष्टाचार की दुकानें भी बंद होने लगी हैं।
भ्रष्टाचार पर रोक लगाना भी राजा का काम है जिसे महर्षि मनु ने विश्व के संविधान मनुस्मृति के सातवें अध्याय में लिखा है।

राज्ञो हि रक्षाधिकृताः परस्वादायिनः शठाः।
भृत्या भवन्ति प्रायेण तेभ्यो रक्षेदिमाः प्रजाः॥
[ मनु | ७ | १२३ ]

क्योंकि राजा के द्वारा प्रजा के (सामाजिक, आर्थिक, न्यायिक, शैक्षिक) रक्षा के लिए नियुक्त कर्मचारी/राजसेवक दूसरों के धन के लालची अर्थात् रिश्वतखोर तथा ठग या धोखा करने वाले हो जाते हैं। ऐसे राजसेवकों से प्रजा की रक्षा करें। अर्थात् ऐसा प्रयत्न करें कि वे प्रजाओं के साथ या राज्य के साथ ऐसा वर्ताव न कर पाएँ।
यहाँ विधि राजा के विवेक के उपर है कि वो कैसे निर्णय लेता है। और निश्चित ही नोटबंदी का निर्णय भ्रष्ट कर्मचारियों को घूस लेने से वंचित करेगा।

इन सभी प्रमाणों से सिद्ध होता है कि मोदी जी का निर्णय राष्ट्रहित में तथा हिन्दू धर्मग्रंथ सम्मत है।
अब नोटबंदी पर विधवा विलाप कर रहे केजरीवाल, राहुल गाँधी, ममता बनर्जी, मायावती आदि राष्ट्र विरोधी तथा हिन्दुत्व विरोधी ही हैं।
इसीलिए तो मैं कहता हूँ कि मोदी पर विश्वास रखो। नोटबंदी का एक लाभ ये भी है कि हिन्दुओं को ईसाई और मुसलमान बनाने वालों को अरब और योरप से चंदा मिलना बंद हो गया है।
यही तो है मोदी जी का हिन्दुत्व वाली एजेंडा। कोई भी विरोधी व्यक्ति इस पहलू पर विचार ही नहीं करेगा और मोदी जी अपने एजेंडे पर आगे बढ़ते जाएँगे।
इतना सब हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुकूल करने के बाद भी

और तुम बोलते हो कि मोदी हिन्दुओं के लिए कुछ करता ही नहीं!

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