नित्यं आस्यं शुचि स्त्रीणां शकुनिः फलपातने । प्रस्रवे च शुचिर्वत्सः श्वा मृगग्रहणे शुचिः

यह प्रक्षिप्त श्लोक है और मनु स्मृति का भाग नहीं है .

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