कुरान समीक्षा : जन्नत में दूध-शराब और शहद की नहरें हैं

जन्नत में दूध-शराब और शहद की नहरें हैं

बहिश्त के अन्दर नहरों में दूध ऊँटनी का होगा या बकरी, भेड़ या कुतिया का होगा अर्थात् किस जानवर का होगा? शराब जौ या अंगूर की होगी या महुए की?

शहद चाशनी का होगा या बड़ी शहद की मक्खी का होगा? और उन सबकों तैयार या इकट्ठा कौन करेगा? खुदा या फरिश्ते?

देखिये कुरान में कहा गया है कि-

म- सलुल् जन्नतिल्लती वुअिदल्………….।।

(कुरान मजीद पारा २६ सूरा मुहम्मद रूकू २ आयत १५)

जिस जन्नत (बहिश्त) का वायदा परहेजगारों से किया जाता है, उसकी कैफियत अर्थात् विशेषता यह है कि उसमें ऐसे पानी की नहरें हैं जिसमें बू नहीं और दूध की नहरें हैं जिनका स्वाद नहीं बदला और शराब की नहरें हैं जो पीने वालों को बहुत ही मजेदार मालूम होंगी और साफ शहद की नहरें हैं और उनके लिये वहां हर तरह के मेवे होंगे।

समीक्षा

यह दूध ऊटनी का होगा या भैंसों, गायों या बकरी का होगा? शराब अंगूरी होगी या जौ की बनी होगी? यह नहीं खोला गया। नहरें खेद कर बनाई जाती हैं जबकि नदियां कुदरती तौर पर बनती हैं। यह नहरें खुदा ने खोद कर बनाई थी या किसी और ने नहरों की मिट्टी कीचड़ मिलने से दूध शराब और शहद का जायका किरकिरा जरूर बन जावेगा तब पीने वालों केा उसमें मजा कैसे आवेगा?

कुरानी बहिश्त भी शराबखोरी का अड्डा ही होगा, यह ऊपर की आयत से स्पष्ट हो जाता है।

4 thoughts on “कुरान समीक्षा : जन्नत में दूध-शराब और शहद की नहरें हैं”

  1. मेरे प्यारे भाई , कुरान के अर्थ को अनर्थ मत करो , यह जन्नत वहीं है जो भगवतगीता में स्वर्ग हैं।दुनिया के कोई भी धर्म गलत और असत्य नहीं है बल्कि सभी धर्म सत्य है। धार्मिक सिद्धांतों और अध्यात्मिक सत्य में फर्क होता है, गीता और कुरान समजने के लिए ज्ञान नहीं बल्कि विवेक का होना अति आवश्यक है । अद्भुत और विशाल होते हुए भी गीता ,कुरान और बायबल मूल्यहीन हो गये हैं ,क्योंकि गुरु घनटालों उल्ला मौलवियों और फादर पादरियों उसका गलत मतलब निकाल लिया है।

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