वेशों का ईद मुबारक : प्रा राजेन्द्र जिज्ञासु

माननीय सपादक जी, परोपकारी,

सप्रेम नमस्ते।

 

वेशपंथियों ने सार्वदेशिक सभा के भवन के बाहर ‘ईद मुबारक’ के बैनर लगाकर यह प्रमाणित कर दिया है कि उनके मन में क्या है। इनके मन में कुछ भी  हो सकता है परन्तु आर्यसमाज और वैदिक धर्म के प्रति लेशमात्र भी कोई भावना नहीं।

जब नेपाल में सायवादी प्रधानमन्त्री सत्तासीन हुआ तो श्री अग्निवेश ने ब्र. नन्दकिशोर जी से कहा, ‘‘लो नेपाल में मेरा राज हो गया।’’

सत्यार्थप्रकाश के विरुद्ध अमृतसर में जो कुछ कहा, उस समय के दैनिक पत्रों में छपा मिलता है।

समलैङ्गिकता का समर्थन, बिग बॉस में जाकर साधुवेश की शोभा बढ़ाने वाले ने अब याकूब की रक्षा के लिए झण्डा उठा लिया है।

जिन लोगों ने कभी अग्निवेश के अपमान पर रोष प्रकट करते हुए दिल्ली में कभी जलूस निकाला था, उन्हें अब अग्निवेश के नेतृत्व में बकर ईद (गो-मांस वाली ईद) पर नारे लगाते हुए जलूस निकालना चाहिये।

पं. लेखराम, वीर राजपाल, वीर नाथूराम, हुतात्मा श्यामलाल और वीर धर्मप्रकाश वेदप्रकाश के बलिदान पर्व पर तो इन्होंने कभी बैनर लगाया नहीं।

ये लोग ईद, रोजे व क्रिसमिस मनाने में हाजियों से भी आगे-आगे रहेंगे। इस पंथ का जन्म ही आर्य जाति के विनाश के प्रयोजन से हुआ- यह अब सर्वविदित है।

इन्होंने तो कभी अपने दीक्षा-गुरु स्वामी ब्रह्ममुनि जी का भी कभी नाम नहीं लिया।

– राजेन्द्र जिज्ञासु, वेद सदन, अबोहर, पंजाब

One thought on “वेशों का ईद मुबारक : प्रा राजेन्द्र जिज्ञासु”

  1. लेख की सभी बातें पर गम्बीरता से विचार करने व निर्णय करने की आवश्यकता है। यदि कोई व्यक्ति, मैं स्वयं भी, महर्षि दयानंद व वेद की मान्यताओं के विरुद्ध आचरण व व्यव्हार करता है तो आर्य समाज को छोड़ देना चाहिए। समलैंगिकता एवं लिव इन रिलेशनशिप तथा आतंकवाद और साम्यवाद का समर्थन निश्चय ही आर्य समाज विरोधी कार्य है. यह सिद्धांत आर्य समाज के प्रत्येक व्यक्ति पर लागू होता है।

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