Category Archives: Islam

कुरान समीक्षा : आसमान गिरने से रूका है

आसमान गिरने से रूका है

कुरान का यह वाक्य ‘‘आसमान गिरने से रूका है’’ अज्ञानतापूर्ण न माना जावे जबकि आसमान शून्य है, कोई ठोस पदार्थ नहीं है?

देखिये कुरान में कहा गया है कि-

अ-लम् त-र अन्नल्ला-हं सख्ख-र………..।।

(कुरान मजीद पारा १७ सूरा हज्ज रूकू ९ आयत ६५)

आसमान जमीन पर गिरने से थमा है मगर उसके हुक्म से।

समीक्षा

शून्य आकाश, जमीन पर गिर पड़ेगा यह बात अरबी खुदा की अकल की पोल खेलने को उत्तम प्रमाण है। हम खुदाबन्द की इल्मी लियाकत की तारीफ करते हैं।

कुरान समीक्षा : अल्लाह की मदद करो

अल्लाह की मदद करो

खुदा में इतनी कमजोरी क्यों है कि वह इन्सान की मदद मांगने पर भी मजबूर हो गया? बतावें कि खुदा की किस बात में मदद की जावे?

देखिये कुरान में कहा गया है कि-

अ्ल्लजी-न उख्रिजू मिन् दिया…………।।

(कुरान मजीद पारा १७ सूरा हज्ज रूकू ५ आयत ४०)

… और जो अल्लाह की मदद करेगा अल्लाह अवश्य उसकी मदद करेगा।

समीक्षा

कुरानी अल्लाह भी इन्सान की मदद का मौहताज रहता है यह कुरान ने जाहिर कर दिया है पर उसकी किस मुसीबत में हम लोग मदद करें यह नहीं खेला गया है।

हर मुसलमान का बेचारे अरबी खुदा की मदद अवश्य करनी चाहिये, मुसीबत के दिन किसी पर हमेशा नहीं बने रहने और मदद करने का अहसान हमेशा बना रहता है।

बदले की मदद करना खुदगरजी की मदद है हम खुदा की निःस्वार्थ मदद करेंगे तो हमारा दर्जा खुदा से ऊँचा क्यों नहीं माना जावेगा?

कुरान समीक्षा : आसमान का लपेटना तथा खुदा को सिज्दा करना

आसमान का लपेटना तथा खुदा को सिज्दा करना

जिस वस्तु का कोई अस्तित्व ही नहीं है उसे कैसे लपेटा जा सकता है स्पष्ट करें?

देखिये कुरान में कहा गया है कि-

अ-लम् त-र अन्नल्लाह यस्जुदु…………।।

(कुरान मजीद पारा १७ सूरा हज्ज रूकू १ आयत १८)

जिस दिन हम आसमान को इस तरह लपेटेंगे जैसे तुमान में कागज लपेटते हैं।

समीक्षा

शून्य आकाश को कागज की तरह लपेटने की बात कहने वाला खुदा और और कुरान बनाने वाले विद्या की योग्यता कितनी थी? यह सभी समझ सकते हैं तथा सूरज, चाँद आदि सब खुदा को सिज्दा करते हैं? इसमें कितनी सच्चाई है? यह सर्व विदित है।

कुरान समीक्षा : जमीन आसमान का एक पिण्ड था

जमीन आसमान का एक पिण्ड था

पोला आकाश और ठोस जमीन का पिण्ड कैसे बन सका था साबित करें?

देखिये कुरान में कहा गया है कि-

अ-व-लम् य-रल्लजी-न क-फरू………..।।

(कुरान मजीद पारा १७ सूरा अम्बिया रूकू ३ आयत ३०)

क्या जो लोग इन्कार करने वाले हैं उन्होने नहीं देखा कि आसमान और जमीन और आसमान को अलग-अलग किया और पानी से तमाम जानदार चीजें बनाई तो क्या इस पर भी वे लोग ईमान नहीं लाते।

समीक्षा

क्या पोले आकाश और ठोस जमीन का पिण्ड भी बन सकता है? यह पढ़े लिखे लोग स्वयं सोच सकते हैं।

कुरानी खुदा ने उन दोनों को तोड़ कर जुदा-जुदा भी कर दिया, कैसी बुद्धि विरूद्ध बात है? भाइयों! आखिर इलहाम ही तो है, कोई न कोई तो विलक्षण बात उसमें होनी ही चाहिए।

कुरान समीक्षा : कुरान आसान कर दिया है

कुरान आसान कर दिया है

असल कुरान खुदा के पास किस कठिन भाषा में लिखा हुआ रखा है, यह बताया जावे ?

देखिये कुरान में कहा गया है कि-

फइन्नमा यस्सर्नाहु बिलिसानि – क…….।।

(कुरान मजीद पारा २४ सूरा हामीम अस-सज्दा रूकू ५ आयत ४३)

तो हमने इस (कुरान) को तुम्हारी जुबान में इस गरज से आसान कर दिया है कि तुम उससे परहेजगारों को खुशखबरी सुनाओ, झगड़ालुओं को सजा से डराओ।

समीक्षा

असली कुरान किस कठिन भाषा और कहाँ पर रखा हुआ है? यह भेद खोला जाना चाहिए तथा खुदा ने दुनिया को धोखा देने के लिए यह नकली माल क्यों सप्लाई किया? उस पर चार सौ बीसी का मुकदमा ठोकना चाहिये।

कुरान समीक्षा : पुरानी बातों को ही कुरान में दोहराया गया है

पुरानी बातों को ही कुरान में दोहराया गया है

जबकि पहली किताबों अर्थात् तौरेत, जबूर और इन्जील में दी गई पुरानी बातों को ही कुरान में खुदा ने नकल किया है तो कुरान की कोई इज्जत नहीं रह गई, न उसकी जरूरत पुरानी किताबों के मौजूदा रहते बाकी रह जाती है। तब कुरान क्यों उतारा गया यह बतावे?

देखिये कुरान में कहा गया है कि-

मा युकालु ल-इल्ला मा कद्…………।।

(कुरान मजीद पारा २४ सूरा हामीम अस-सज्दा रूकू ५ आयत ४३)

(ऐ पैगम्बर) तुझसे वही बातें कही जाती है जो तुझसे पहले पैगम्बरों से कही जा चुकी हैं। बेशक तेरा परवर्दिगार क्षमा करने वाला और उसकी सजा दुखदाई है।

समीक्षा

जब कुरान सिर्फ पहले पैग्म्बरों को बताई हुई व उनकी किताबों में लिखी हुई बातों की ही नकल है तो फिर कुरान की विशेषता ही क्या रह जाती है ? नकल से असल किताबें हमेशा ज्यादा महत्व की साबित होती हैं। कुरान की शान इस आयत से कम हो जाती है।

कुरान समीक्षा : जन्नत में सुबह शाम खाना मिलेगा

जन्नत में सुबह शाम खाना मिलेगा

जन्नत में यदि किसी मियाँ को बीच में तीसरी बार भूख लगी तो क्या वह भूखा ही रोता रहेगा या शराब पीकर पेट भरेगा?

देखिये कुरान में कहा गया है कि-

ला यस्मअ्-न फीहा लग-वन्……….।।

(कुरान मजीद पारा १६ सूरा मरियम रूकूम ४ आयत ६२)

और वहाँ उनको खाना सबह शाम मिला करेगा।

समीक्षा

यदि बीच में भूख लगी तो क्या मरेंगे? वाह भई वाह! खुदा की जन्नत भी क्या जन्नत है? वहां तो चाहिए था कि हर चीज हर समय मुहैय्या होती रहे।

कुरान समीक्षा : सूरज के डूबने की जगह कीचड़ का तालाब है

सूरज के डूबने की जगह कीचड़ का तालाब है

दुनिया में सूरज की यह जगह कहां है जिसमें कीचड़ भरी है? इसका दुनिया के मोलवी से खुलासा करके बतावें।

देखिये कुरान में कहा गया है कि-

हत्ता इजा ब-ल ग तग्रिबश्…………….।।

(कुरान मजीद पारा १५ सूरा कहफ रूकू ११ आयत ८६)

यहां तक कि जब (सिकन्दर) सूरज डूबने की जगह पर पहुँचा तो उसको सूरज ऐसा दिखाई दिया कि वह काली कीचड़ के कुण्ड में डूब रहा है और देखा कि उस कुण्ड के करीब एक जाति बसी है।

समीक्षा

सूरज शाम को काली कीचड़ के कुण्ड में डूबता है और उस कुण्ड के किनारे एक जाति भी बसी है, कुरान की इस बात की तारीफ पढ़ने वाले बच्चे खूब करेंगे। आखिर कुरान खुदाई किताब जो है! उसमें ऐसी विलक्षण बातें न मिलेंगी तो और कहाँ मिलेंगी?

कुरान समीक्षा : खुदा ने शैतानों की मदद क्यों नहीं ली?

खुदा ने शैतानों की मदद क्यों नहीं ली?

खुदा ने शैतानों की इस डर से मदद नहीं ली थी कि कहीं वे खुदा को ही गुमराह न कर देवें। बतावें कि खुदा का डर सही था या गलत?

देखिये कुरान में कहा गया है कि-

मा अश्हत्तुहुम् खल्कस्समावाति…………।।

(कुरान मजीद परा १५ सूरा कहफ रूकू ७ आयत ५१)

हमने आसमान और जमीन को पैदा करते समय खुद शैतान के पैदा करते समय भी ‘‘शैतानों’’ को नहीं बुलाया और हम ऐसे न थे कि राह भुलाने वालों को अपना मददगार बनाते।

समीक्षा

कुरान में एक शैतान ‘‘इब्लीस’’ का जिक्र आता है पर यहां ‘‘शैतानों’’ अर्थात बहुत से शैतान होने की बात कही गई है। खुदा ने इसी डर से दुनियां बनाते वक्त शैतानों की मदद नहीं ली थी कि वे कहीं खुदा को भी भुलावे में डाल कर गुमराह न कर देवें? खुदा का डर मुनासिब ही था

हो सकता है सारे शैतान मिलकर खुदा पर हावी हो जाते या खुदा के काम को बिगड़वा देते। खुदा ने बड़ी ही समझदारी से काम लिया था।

कुरान समीक्षा : खुदा का अज्ञानी होना

खुदा का अज्ञानी होना

कुरान की यह आयत क्या यह नहीं प्रगट करती है कि खुदा सब कुछ नहीं जान पाता है, जब तक कि वह खुद जांच न कर ले?

देखिये कुरान में कहा गया है कि-

फ-जरब्ना अला आजानिहिम्………….।।

(कुरान मजीद पारा १५ सूरा कहफ रूकू १ आयत ११)

फिर कई वर्ष के लिए हमने गुफा में उनके कान थपक दिये।

नह्नु नकस्सु अलै-क न-ब अहुम्………..।।

(कुरान मजीद पारा १५ सुरा कहफ रूकू १ आयत १२)

फिर हमने उनको उठाया जाकि हम देख लें कि दो गिरोहों में से किसको ठकरने की अवधि याद है।

समीक्षा

कुरानी खुदा बिना परीक्षा किये लोगों के याद होने की भी बात न जान सका उससे उसकी सर्वज्ञ बनने की शेखी की पोल खुल जाती है।