Category Archives: Islam

तीन तलाक पीड़िता की नाबालिग बेटी ने हिंदू धर्म अपनाने का किया एलान

तीन तलाक पीड़िता की नाबालिग बेटी ने हिंदू धर्म अपनाने का किया एलान

तीन तलाक पीड़िता की नाबालिग बेटी ने हिंदू धर्म अपनाने का किया एलान

सांकेतिक तस्वीर Image Source: File Photo
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन तलाक पीड़िता की एक नाबालिग बेटी ने गुरुवार को हिंदू धर्म अपनाने का ऐलान कर दिया. दरअसल 16 वर्षीया किशोरी का कहना है कि उसकी मां और समाज के अन्य लोग उसकी शादी जबरदस्ती एक 50 साल के अधेड़ से करवाना चाहते हैं.

फिलहाल युवती घर से भागकर जय शिवसेना की शरण में चली गई है. राजनगर निवासी किशोरी के मुताबिक वह तलाक और हलाला जैसी कुप्रथा के दर्द से नहीं गुजरना चाहती. इसलिए हिंदू धर्म अपनाने जा रही है.

किशोरी का कहना है कि उसने अपनी मां को तलाक के बाद घुट-घुटकर जिते देखा है. उसने बताया कि 12 साल पहले उसके पिता ने उसकी मां को तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया. उसके बाद से उसकी मां ने घरों में कामकर उसे पाला. लेकिन अब उसकी मां और समाज के अन्य लोग उसकी जबरदस्ती शादी एक अधेड़ से करवाना चाहते हैं.

किशोरी का कहना है कि वह शादी नहीं करना चाहती. अभी वह पढ़ना चाहती है. इसलिए वह घर से भागकर जय शिवसेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित आर्यन के शरण में आई है.

किशोरी का कहना है कि उस पर 13 साल की उम्र से ही निकाह के लिए दबाव बनाया जा रहा है. परिवार वालों ने अधेड़ से कुछ पैसे भी लिए हैं. लेकिन अब वह हिंदू धर्म अपनाकर अपनी पढ़ाई पूरी करेगी.

गौरतलब है कि यह किशोरी पिछले पांच-छह महीने से जय शिवसेना की शरण में है, लेकिन अभी तक उसका धर्मांतरण नहीं हो पाया है.

source : https://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/ghaziabad-triple-talaq-victim-daughter-announces-to-brass-hinduism-1109024.html

हदीस : कानूनी वारिसों के लिए दो-तिहाई

कानूनी वारिसों के लिए दो-तिहाई

एक मृत व्यक्ति की जायदाद को मृतक की कई-एक अदायगियां पूरी करने के बाद बांटा जा सकता है, जैसे कि दफ़नाने का खर्च और मृतक के कर्जों की अदायगी। इस्लाम के सिवाय किसी और मज़हब को मानने वाले व्यक्ति को यह हक़ नहीं है कि वह किसी मुसलमान से कोई उत्तराधिकार पाए। इसी प्रकार कोई मुसलमान (किसी) गैर-मुस्लिम का दाय-भाग ग्रहण नहीं कर सकता“ (3928)। विरासत के एक अन्य सिद्धांत के अनुसार “एक मर्द दो औरतों द्वारा पाए जाने वाले भाग के बराबर हैं“ (3933)।

 

मुहम्मद कहते हैं कि कोई व्यक्ति अपनी जायदाद के सिर्फ़ एक-तिहाई भाग की ही वसीयत कर सकता है। बाकी दो-तिहाई कानूनी वारिसों को मिलना चाहिए। साद बिन अबी वक्कास से मुहम्मद उनकी मृत्यु-शैय्या पर मिले। साद के सिर्फ एक बेटी थी। उन्होंने जानना चाहा कि क्या वे अपनी जायदाद का दो-तिहाई अथवा आधा सदके (दान) में दे सकते हैं। पैग़म्बर ने जवाब दिया-”एक तिहाई दो और वह बहुत काफी है। अपने वारिसों को धनवान छोड़ना बेहतर है, बजाय इसके कि वे ग़रीब रहें और दूसरों से मांगते फिरें“ (3991)।

author : ram swarup

 

HADEES : QASAMAH

QASAMAH

The fourteenth book is the �Book of Oaths� (al-qasAmah).  QasAmah literally means �taking an oath,� but in the terminology of the sharI�ah, it is an oath of a particular type and taken under particular conditions.  For example, when a man is found slain, and the identity of his slayer is unknown, fifty persons from the nearest district take an oath that they neither killed the man nor knew who did it.  This establishes their innocence.

This was apparently the practice among the pre-Islamic Arabs, and Muhammad adopted it.  Once a Muslim was found slain.  His relatives accused the neighboring Jews.  Muhammad told them: �Let fifty persons among you take oath for leveling the charge of murder against a person among them, and he would be surrendered to you.� They declined to take the oath since they had not witnessed the murder.  Then Muhammad told them that �the Jews will exonerate themselves by fifty of them taking this oath.� They replied: �Allah�s Messenger, how can we accept the oath of unbelieving people?� Then Muhammad paid the bloodwite of one hundred camels for the slain man out of his own funds (4119-4125).

Another hadIs specifically tells us that Allah�s Messenger �retained the practice of QasAma as it was in the pre-Islamic days� (4127).

author : ram swarup

हदीस : वक़्फ

वक़्फ

मुहम्मद वक़्फ अर्थात् सम्पत्ति के एक संग्रह को अल्लाह के लिए समर्पित करने के पक्ष में थे। उमर ने मुहम्मद से कहा-“मुझे खै़बर में जमीन मिली है (पराजित यहूदियों की ज़मीन जो मुहम्मद के साथियों में बांट दी गयी थी)। मैंने इससे ज्यादा कीमती कोई जायदाद कभी प्राप्त नहीं की। अब इसके बारे में क्या करने का हुक्म आप देते हैं ?“ इस पर रसूल-अल्लाह बोले-“अगर तुम चाहो तो तुम इस सम्पत्ति-संग्रह को यथावत रख सकते हो और उसकी उपज को सदके के रूप में दे सकते हो। …… उमर ने उसे गरीबों के लिए, नज़दीकी रिश्तेदारों के लिए, गुलामों की मुक्ति के लिए और अल्लाह के रास्ते में तथा मेहमानों के लिए समर्पित कर दिया“ (4006)।

author : ram swarup

HADEES : Crime and Punishment (QasAmah, QisAs, HadUd)

Crime and Punishment (QasAmah, QisAs, HadUd)

The fourteenth, fifteenth, and sixteenth books all relate to the subject of crime: the forms and categories of crime, the procedure of investigating them, and the punishments resultant from having committed them.

Muslim fiqh (law) divides punishment into three heads: hadd, qisAs, and ta�zIr.  Hadd (pl. HadUd) comprises punishments that are prescribed and defined in the QurAn and the HadIs.  These include stoning to death (rajm) for adultery (zinA); one hundred lashes for fornication (QurAn 24:2-5); eighty lashes for slandering an �honorable� woman (husun), i.e., accusing her of adultery; death for apostatizing from Islam (irtidAd); eighty lashes for drinking wine (shurb); cutting off the right hand for theft (sariqah, QurAn 5:38-39); cutting off of feet and hands for highway robbery; and death by sword or crucifixion for robbery accompanied by murder.

The law also permits qisAs, or retaliation.  It is permitted only in cases where someone has deliberately and unjustly wounded, mutilated, or killed another, and only if the injured and the guilty hold the same status.  As slaves and unbelievers are inferior in status to Muslims, they are not entitled to qisAs according to most Muslim faqIhs (jurists).

In cases of murder, the right of revenge belongs to the victim�s heir.  But the heir can forgo this right and accept the blood-price (diyah) in exchange.  For the death of a woman, only half of the blood-price is due.  The same applies to the death of a Jew or a Christian, but according to one school, only one-third is permissible in such cases.  If a slave is killed, his heirs are not entitled to qisAs and indemnity; but since a slave is a piece of property, his owner must be compensated with his full value.

The Muslim law on crime and punishment is quite complicated.  Though the QurAn gives the broad outline, the HadIsalone provides a living source and image.

author : ram swarup

सैफ की बेटी सारा पर मौलानाओं का हल्ला बोल.. बोले हिम्मत कैसे हुई तिलक लगा पूजा करने की जब बुतपरस्ती है हराम.. देव केदारनाथ की थी पूजा

सैफ की बेटी सारा पर मौलानाओं का हल्ला बोल.. बोले हिम्मत कैसे हुई तिलक लगा पूजा करने की जब बुतपरस्ती है हराम.. देव केदारनाथ की थी पूजा

इस्लाम समाज के ठेकेदार उलेमाओं की शरीयत चोटिल हो जाती है महिलाओं की सशक्तिकरण से। इस्लाम हर वक़्त खतरे में ही रहता है। खुदा इतना कमजोर है इनका की एक लड़की के छोटे से क्रिया कलाप से डर जाता है। ठेकेदारों को डर है की उनका दूकान न बंद हो जाये बस इस लिए मजहब के ठेकेदार हमला बोल देते है।

नया ममला सैफ अली खान की बेटी सारा जिन्हे एक उलेमा ने सरेआम माफ़ी मांगने के लिए बोला है। सारा केदारनाथ में विशेष पूजा और अर्चना कर माथे पर तिलक लगाया था। जिसके बाद तस्वीरों पर मुस्लिम मजहब के उलेमाओ ने आवाज उठानी शुरू कर दी है। मुस्लिम ठेकेदारों ने कहा की किसी भी मुस्लिम समाज से जुड़े इंसान का हिन्दुओ के धार्मिक स्थल पर पूजा पाठ और अनुष्ठान करना इस्लाम के  खिलाफ है।

ज्वालापुर के मौलाना आसिफ कुरैशी ने कहा की ये सब इस्लाम कतई बर्दास्त नहीं कर सकता। इसलिए सारा को इस्लामिक उलेमाओ से माफ़ी मांगनी होगी। इस्लाम हर दिन इन छोटी छोटी बातो से खतरे में आ जाता है। इस्लाम इतना कमजोर है की एक बच्ची के पूजा अर्चना से अपना अस्तित्व खतरे में महसूस कर रहा है।

source : http://www.sudarshannews.com/category/national/saifs-daughter-sara-attacked-by-maulanas-5653   

 

नोट :  वेद के आधार पर मूर्ति पूजा करना मना है | हम मूर्ति पूजा का समर्थन नहीं करते हैं |

हदीस : भेंट-उपहार

भेंट-उपहार

कोई भी चीज जो भेंट या दान में दे दी जाय, वापस नहीं ली जानी चाहिए। उमर ने अल्लाह के रास्ते पर (यानी जिहाद के लिए) एक घोड़ा दान में दे दिया था। उसने देखा कि उसका घोड़ा दान पाने वाले के हाथों पड़ कर क्षीण हो रहा है, क्योंकि वह व्यक्ति बहुत गरीब था। उमर ने उसे वापस खरीदने का विचार किया। मुहम्मद ने उससे कहा कि ”उसे अब वापस मत खरीदो ….. क्योंकि वह जो दान को वापस लेता है, उस कुत्ते की तरह है जो अपनी उलटी निगलता है“ (3950)।

author : ram swarup