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Religious places should have a limit on the loudspeaker’s volume: Gul on Azaan Row

Religious places should have a limit on the loudspeaker’s volume: Gul on Azaan Row

Gul Panag also said that famous and influential people should speak out on such matter.
Gul Panag

 Gul Panag

New Delhi: Reacting to the entire controversy regarding Sonu Nigam’s controversial tweets about ‘forced religiousness,’ actress Gul Panag has said that famous and influential people should speak out on such matter as it can make a difference.

When asked if she supports Nigam’s statement about loudspeakers, she told ANI, “I just want to say that every religious place, whether it is a church, a temple, a mosque or a gurudwara there should be a limit as to how high the volume of the loudspeaker should go, so that people residing near to such places should not get disturbed and this measure should be taken at all the religious places.”

For the unversed, Sonu, who was woken up to the sound of Azaan early in the morning, took social media by storm after terming the practice as ” forced religiousness,” on April 17.

His controversial tweets evoked a mixed response on the Internet and among every genre of people in the nation.

Following the 43-year-old-singer’s controversial tweets against ‘azaan’, the Kolkata-based cleric issued a fatwa against the ‘ Kal Ho Naa Ho’ singer on Tuesday, responding to which he got his head shaved on Wednesday.

source :http://www.deccanchronicle.com/entertainment/bollywood/190417/religious-places-should-have-a-limit-on-the-loudspeakers-volume-gul-on-azaan-row.html

मुक्ति-महर्षि ने कर्म, उपासना, ज्ञान को मुक्ति का मार्ग बताया, जबकि कपिलमुनि ने ज्ञान से मुक्ति मानी है तथा गीता में कर्म और ज्ञान को मुक्ति का मार्ग बताया है। कृपया स्पष्ट करें कि ज्ञान मुक्ति का मार्ग है या कर्म-ज्ञान दोनों।

जिज्ञासा- 

  1. इसी अंक पृष्ठ 33 पर जिज्ञासा-समाधान-103 पर मुक्तिमहर्षि ने कर्म, उपासना, ज्ञान को मुक्ति का मार्ग बताया, जबकि कपिलमुनि ने ज्ञान से मुक्ति मानी है तथा गीता में कर्म और ज्ञान को मुक्ति का मार्ग बताया है। कृपया स्पष्ट करें कि ज्ञान मुक्ति का मार्ग है या कर्म-ज्ञान दोनों।

समाधान-

(ख)मुक्ति दुःखों से छूटने का नाम है। दुःख से पूर्णतः छूटना यथार्थ ज्ञान से ही हो सकता है। कर्म, उपासना से दुःख को दबाया जा सकता है, कम किया जा सकता है, किन्तु सर्वथा नहीं हटाया जा सकता, दुःख को सर्वथा तो ज्ञान से ही हटाया जा सकता है। जिस दिन ज्ञान से दुःख को पूर्णरूप से दूर कर दिया जायेगा, उस दिन मुक्ति की भी अनुभूति होगी।

योगदर्शन के अन्दर दुःख का हेतु अविद्या कहा है- ‘तस्यहेतुरविद्या’

दुःख का कारण अन्य कुछ नहीं कहा। जब दुःख का कारण अविद्या है तो अर्थापत्ति से दुःख के हटने का नियत कारण विद्या ही होगा। इसी बात को महर्षि कपिल ने सांखयदर्शन में कहा है ‘ज्ञानान्मुक्तिः’ज्ञान से मुक्ति होती है, इसी बात को अन्य शास्त्र भी पुष्ट करते हैं।

ज्ञान से ही मुक्ति होती है यह बात भक्ति-मार्गी तथा कर्ममार्गियों को नहीं पचती। उनको लगता है कि यह बात तो विपरीत है। कुछ लोग उपासना को ही प्रधान बनाकर चलते हैं। उनको उपासना ही मुक्ति का मार्ग दिखता है, किन्तु वे यह नहीं जानते कि बिना ज्ञान के परिष्कृत हुए उपासना भी ठीक-ठीक नहीं होने वाली, उपासना का स्तर नहीं बढ़ने वाला। जब तक व्यक्ति के सिद्धान्त परिष्कृत नहीं होंगे, तब तक वह कैसे ठीक-ठीक उपासना कर सकता है। हाँ, अपने आधे-अधूरे ज्ञान के बल पर उपासना करता है और उसी में सन्तुष्ट रहने लगता है तो वह कैसे आगे प्रगति कर सकता है। यदि व्यक्ति ठीक-ठीक उपासना करता है तो उसको ज्ञान के महत्त्व का भी पता लगेगा और वह ज्ञान प्राप्ति के लिए अधिक प्रयत्नशील रहेगा।

ज्ञान का तात्पर्य यहाँ केवल शाबदिक ज्ञान से नहीं है। अपितु यथार्थ ज्ञान, तात्विक ज्ञान से है। जब यथार्थ ज्ञान होता है, तब हमारे अन्दर के क्लेश परेश्वर के सहयोग से क्षीण होने लगते हैं। क्षीण होते-होते सर्वथा नष्ट हो जाते हैं, दग्धबीजभाव को प्राप्त हो जाते हैं, ऐसी अवस्था में मुक्ति होती है।

जैसे भक्तिमार्गी ज्ञान की आवश्यकता नहीं समझते, ऐसे ही कर्ममार्गी भी ज्ञान को आवश्यक नहीं मानते। उनका कथन होता है कि कर्म करते रहो, मुक्ति अपने आप हो जायेगी। उनका यह कहना अधूरी जानकारी का द्योतक है। यथार्थ ज्ञान के बिना शुद्ध-कर्म कैसे होगा? इसलिए ऋषियों की मान्यता के अनुसार ज्ञान से ही मुक्ति होती है। इसका यह तात्पर्य कदापि नहीं कि कर्म और उपासना को छोड़ देना चाहिए। शुद्ध कर्म-उपासना हमारे अन्तःकरण को पवित्र करते हैं। पवित्र अन्तःकरण ज्ञान को ग्रहण करने में अधिक समर्थ होता जाता है। जैसे-जैसे यथार्थ ज्ञान होता जायेगा, वैसे-वैसे साधक मुक्ति की ओर अग्रसर होता चला जायेगा।

गीता के हवाले से जो बात आपने कही है, तो गीता में भी यत्र-तत्र ज्ञान को ही महत्त्व दिया है। कुछ प्रमाण गीता से ही-

न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।

तत्स्वं योगसंसिद्धः कालेनात्मनि विन्दति।।    – 4.38

यथैधांसि समिद्धोऽग्निर्भस्मसात्कुरुतेऽर्जुन।

ज्ञानाग्निः सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरूते तथा।। – 4.37

तस्मादज्ञानसंभूतं हृत्स्थं ज्ञानासिनात्मनः।

छित्त्वैनं संशयं योगमातिष्ठोत्तिष्ठ भारत।।     – 4.42

तेषां ज्ञानी नित्ययुक्त एक भक्तिर्विशिष्यते।

प्रियो हि ज्ञानिनोऽत्यर्थमहं स च मम प्रियः।।   – 7.27

गीता के इन सभी श्लोकों में ज्ञान को श्रेष्ठ कहा है, ज्ञान की महिमा कही है। इसलिए शास्त्र के मत में तो ज्ञान से ही मुक्ति होती है। इसमें न तो कोई ज्ञान के साथ लगकर मुक्ति देने वाला है और न ही ज्ञान का कोई विकल्प है। अस्तु

The Uttarakhand woman further said it was better to convert and adopt Hinduism than to face injustice due to `triple talaq` system.

Triple Talaq: Muslim woman hails PM Narendra Modi, says will embrace Hinduism – Watch

Prime Minister Narendra Modi has dubbed triple talaq a “bad social practice”.

Triple Talaq: Muslim woman hails PM Narendra Modi, says will embrace Hinduism - Watch

Dehradun: Amid raging debate over the issue of triple talaq, a Muslim woman has hailed Prime Minister Narendra Modi’s efforts to bring change for the sufferers of the practice.

The Uttarakhand woman further said it was better to convert and adopt Hinduism than to face injustice due to `triple talaq` system.

Venting her anger and frustration, the woman hailing from Kichha further said when converted to Hindu, men would not be able to divorce them just by uttering the word `talaq` thrice.

Notably, her sister is a victim of triple talaq.

Covered by a hijab, the unnamed Muslim woman said, “What is the use of spending whole life with a man who can at any point of time desert his wife by saying Talaq, Talaq, Talaq? If this injustice happens in old age, where would the victim go?”

“Today, I am young and why would I spend my whole life fearing triple talaq? It is better to embrace Hinduism and marry a Hindu man who would at least not destroy my life by uttering just three words,” she added.

Praising Prime Minister Narendra Modi, she said, “What Modi is doing for the country is very good. What he is doing for women, especially for Muslim women, is very good.”

She also hailed Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath.

Watch the video:

On Sunday, Prime Minister Narendra Modi dubbed triple talaq a “bad social practice”, saying such practices can be ended by social awakening but stressed that the BJP didn’t want a conflict in the society for this.

Meanwhile, the All India Muslim Personal Law Board (AIMPLB) said that those using triple talaq recklessly and without justification should be made to face social boycott.

Earlier this week, Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath called for an end to the practice of triple talaq and invoked the disrobing of Draupadi in the Mahabharata to emphasise his point.

“When I see people silent on the raging issue (of triple talaq), the episode from Mahabharata comes to my mind. Draupadi asked the palace – who is responsible for this situation? Who’s responsible for this crime? Vidura said those responsible are criminals, those who supported this incident are culprits, those who are silent are responsible,” Adityanath said.

Hindu Mahasabha general secretary Dr Pooja Shakun Pandey had last week urged all triple talaq victims to adopt Hinduism if they wanted to lead respectful lives.

source: http://zeenews.india.com/india/triple-talaq-muslim-woman-hails-pm-narendra-modi-says-will-embrace-hinduism-watch-1997422.html

उत्तराखंड की मुस्लिम महिला का बड़ा बयान- ‘ट्रिपल तलाक से बेहतर है हम हिंदू बन जाए’

उत्तराखंड की मुस्लिम महिला का बड़ा बयान- ‘ट्रिपल तलाक से बेहतर है हम हिंदू बन जाए’

उत्तराखंड की मुस्लिम महिला का बड़ा बयान- 'ट्रिपल तलाक से बेहतर है हम हिंदू बन जाए'

 

नई दिल्ली: उत्तराखंड में किच्छा की एक महिला ने ट्रिपल तलाक के खिलाफ बडा बयान दिया है. पीड़ित महिला की बहन ने कहा है कि हम अपना धर्म बदल लेंगे. ट्रिपल तलाक से बेहतर है कि हम हिंदू बन जाए.

वहां कोई भी तीन बार बोलकर तलाक तो नहीं देगा

महिला ने कहा कि वहां कोई भी तीन बार बोलकर तलाक तो नहीं देगा. महिला ने ट्रिपल तलाक को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी सराहना की और कहा कि ट्रिपल तलाक के खिलाफ मोदी और योगी ने आवाज उठाकर अच्छा किया है. मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के लिए अच्छा काम किया है. गौर हो कि सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ 11 मई से तीन तलाक को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करेगी.

तीन तलाक के खिलाफ योगी ने भी उठाई है आवाज

तीन तलाक’ के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आवाज उठाने से मुसलमानों की इस प्रथा पर चल रही बहस के तूल पकड़ने के बीच चंद दिन पहले  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस मुद्दे पर जो चुप हैं, वे इसका पालन करने वालों की तरह ही दोषी हैं. आदित्यनाथ ने तीन तलाक के ज्वलंत मुद्दे पर राजनीतिक वर्ग की चुप्पी पर सवाल उठाया. तीन तलाक पर नेताओं की चुप्पी और महाभारत में द्रौपदी के चीरहरण के बीच तुलना करते हुए योगी ने लखनउ में कहा कि राजनीतिक वर्ग में चुप्पी साधे हुए मौजूद लोगों को अपराध और उसमें साथ देने वालों के साथ कठघरे में खड़ा किए जाने की जरूरत है.

पीएम योगी ने भी तीन तलाक खत्म करने की वकालत की है

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री ने तीन तलाक का विरोध करते हुए इस बात पर जोर दिया था कि मुसलमान महिलाओं का शोषण खत्म होना चाहिए और उन्हें न्याय मिलना चाहिए. हालांकि, मोदी ने इस मुद्दे पर मुस्लिम समुदाय में किसी तरह का ‘टकराव’ पैदा करने की कोशिश के खिलाफ कहा था और इसे सामाजिक जागरूकता के जरिए हल किए जाने का सुझाव दिया था.

source: http://zeenews.india.com/hindi/india/up-uttarakhand/muslim-woman-hailed-pm-modi-and-cm-yogi-on-triple-talaq-issue/324769

सोनू निगम का सिर मुंडवाने का ‘फतवा’, गायक ने पूछा- क्या ये धार्मिक गुंडागर्दी नहीं ?

‘‘अध्यात्मवाद’’ आत्मा क्या है, परमात्मा क्या है, इन दोनों का आपस में समबन्ध क्या है-इस विषय का नाम अध्यात्मवाद है। मैंने किसी जगह पढ़ा था कि अध्यात्म वह स्थिति है, जब बुद्धि आत्मा में स्थित हो जाता है और उस समय जो विचार आता है वह उत्तम ही आता है। कृपया स्पष्ट करें।

– आचार्य सोमदेव1. परोपकारी के अंक जनवरी (द्वितीय) 2016 के पृष्ठ 30 पर ‘‘अध्यात्मवाद’’ आत्मा क्या है, परमात्मा क्या है, इन दोनों का आपस में समबन्ध क्या है-इस विषय का नाम अध्यात्मवाद है।

मैंने किसी जगह पढ़ा था कि अध्यात्म वह स्थिति है, जब बुद्धि आत्मा में स्थित हो जाता है और उस समय जो विचार आता है वह उत्तम ही आता है। कृ पया स्पष्ट करें।

समाधान-(क) आत्मा-परमात्मा को अधिकृत करके उस विषय में विचार करना, उसको आत्मसात करना अध्यात्म है। इस विचार को मानना अध्यात्मवाद है। व्यक्ति जब अपने आत्मा को जानना चाहता है, आत्मा क्या है, इसका स्वरूप क्या है, नाश को प्राप्त होता है या नित्य है, मरने के बाद आत्मा कहाँ जाता है, आत्मा बन्धन में क्यों बंध जाता है, इसका बंधन कैसे छूटेगा आदि-आदि आत्मा विषय में विचारना अध्यात्म ही है। ऐसे ही परमात्मा क्या है, स्वरूप क्या है परमातमा का? परमात्मा करता क्या है, उसको कैसे प्राप्त किया जा सकता है, उसके प्राप्त होने पर क्या अनुभूति होती है आदि विचारना अध्यात्म है। गीता में भी कुछ ऐसा ही कहा है-

अक्षरं परमं ब्रह्म स्वभावोऽध्यात्ममुच्यते। गी. 8.3

अपने मन में छिपे संस्कारों को देखना, अविद्यायुक्त संस्कारों को देखकर दूर करने का प्रयत्न करना, उनसे दुःख और हानि को देखना, अपने मन को उपासना, तप आदि के द्वारा निर्मल बनाना, बनाने का प्रयत्न करना अध्यात्म है। बुद्धि और आत्मा को पृथक् देखना, संसार के विषयों से विरक्त हो अन्तर्मुखी होना यह सब अध्यात्म है। विरक्त हो आत्मा का दर्शन करना, प्रज्ञा बुद्धि को प्राप्त करना, प्राप्त गुणातीत हो ईश्वर-दर्शन करना अध्यात्म है, अध्यात्म की पराकाष्टा है।

आपने जो पढ़ा वह स्थिति आध्यात्मिक व्यक्ति की होती है, हो सकती है। जब व्यक्ति अध्यात्मवाद को अपनाकर चलता है तो उसके अन्दर से श्रेष्ठ विचार उत्पन्न होने लगते हैं। इन्हीं उत्तम विचारों से व्यक्ति अपने जीवन को कल्याण की ओर ले जाता है। श्रेय मार्ग की ओर ले जाता है।

मस्जिदों में होती हैं हिंदू विरोधी बातें, टीवी डिबेट पर चला दिया वीडियो

 

अजान विवाद: विवेक अग्निहोनी का दावा- मस्जिदों में होती हैं हिंदू विरोधी बातें, टीवी डिबेट पर चला दिया वीडियो

सोनू ने ट्वीट करके मस्जिद की अजान की आवाज को लेकर सवाल खड़े किए थे उसके बाद से ही इस मामले ने तुल पकड़ लिया।

 

फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री।

बॉलीवुड के मशहूर सिंगर सोनू निगम ने सोमवार को एक नया विवाद को जन्म दे दिया। सोनू ने ट्वीट करके मस्जिद की अजान की आवाज को लेकर सवाल खड़े किए। इसी मुद्दे पर कई चैनलों पर दिनभर बहस होती रही है। ऐसी ही आजतक में की एक बहस में शामिल फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने आरोप लगया कि मस्जिदों में नमाज के दौरान भड़काऊ भाषण दिए जाते हैं। इसके लिए उन्होंने बकायदा एक वीडियों भी दिखाया जिसमें उनके अनुसार भड़काऊ भाषण दिया जा रहा है। विवेक ने कहा कि मेरे पास ये रिकॉर्डिंग है कि जिसमें  मौलाना साहब बोल रहे हैं कि याकूब को जो फांसी मिली थी वो गलत थी इसलिए हिंदू नेताओं को पकड़ पकड़कर फांसी दी जानी चाहिए। इसके बाद सब लोग चिल्लातें है कि हिंदुओं को फांसी दी जानी चाहिए। जिसके बाद विवेद वो वीडियो प्ले कर देते हैं। इसके जवाब में मौलना रजा कहते हैं कि आप इसपर केस क्यों नहीं करते हैं। इसके बाद दोनों लोग आपस में भिड़ जाते हैं। विवेक सवाल करते हैं हिंदू लीडर्स को मारने की बात मस्जिद में क्यो हो रही हैं। विवेक मशहूर फिल्म निर्देशक हैं और बुद्धा इन ए ट्रेफिक जाम बना चुके हैं।

यह सारा विवाद तब शुरु हुआ कि जब सोमवार सुबह लगभग 5:30 बजे सोनू निगम ने ट्वीट किया कि मैं मुसलमान नहीं हूं लेकिन फिर भी मस्जिद की अजान की आवाज से जगना पड़ता है। सोनू ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर अजान की आवाज पर हमला करते हुए लिखा कि जब मुहम्मद साहब जिंदा थे तब उनके टाइम पर तो बिजली आती नहीं थी..फिर एडिसन के आविष्कार के बाद ऐसे चोंचलों की क्या जरूरत है। सोनू यहीं नहीं रुके उन्होंने तो ये तक कह डाला कि ये सब तो सिर्फ गुंडागर्दी है। सोनू निगम के इन ट्वीट्स के बाद एक के बाद एक लोगों इसके समर्थन और विरोध में आगे आ गए।

 

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.@vivekagnihotri ने जुम्मे की नमाज़ में भड़काऊ भाषण का वीडियो दिखाया. http://bit.ly/at_liveTV