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चलो यहीं रह लेते हैं

चलो यहीं रह लेते हैं

किसी कवि की एक सुन्दर रचना है-

हम मस्तों की है ज़्या हस्ती,

हम आज यहाँ कल वहाँ चले।

मस्ती का आलम साथ चला,

हम धूल उड़ाते जहाँ चले॥

धर्म-दीवाने आर्यवीरों का इतिहास भी कुछ ऐसा ही होता है। पंजाब के हकीम सन्तरामजी राजस्थान आर्यप्रतिनिधि सभा की विनती पर राजस्थान में वेदप्रचार करते हुए भ्रमण कर रहे थे। आप शाहपुरा पहुँचे। वहाँ ज्वर फैला हुआ था। घर-घर में ज्वर घुसा हुआ था। प्रजा बहुत परेशान थी। महाराजा नाहरसिंहजी को पता चला कि पं0 सन्तराम एक सुदक्ष और अनुभवी हकीम हैं। महाराजा ने उनके सामने अपनी तथा प्रजा की परेशानी रखी। वे प्रचार-यात्रा में कुछ ओषधियाँ तो रखा ही करते थे। आपने रोगियों की सेवा आरज़्भ कर दी। ईश्वरकृपा से लोगों को उनकी सेवा से बड़ा लाभ पहुँचा। ज्वर के प्रकोप से अनेक जानें बच गईं। अब महाराजा ने उनसे राज्य में ही रहने का अनुरोध किया। वे मान गये। उन्हें राज्य का हकीम बना दिया गया, फिर उन्हें दीवानी का जज नियुक्त कर दिया गया। अब वे राजस्थान के ही हो गये। वहीं बस गये और फिर वहीं चल बसे।

पाठकवृन्द! कैसा तप-त्याग था उस देवता का। वह गुरदासपुर पंजाब की हरी-भरी धरती के

निवासी थे। इधर भी कोई कम मान न था। पं0 लेखराम जी के साहित्य ने उन्हें आर्य मुसाफ़िर बना दिया। मुसाफ़िर ऐसे बने कि ऋषि मिशन के लिए घर बार ही छोड़ दिया। राजस्थान के लोग आज उनको सर्वथा भूल चुके हैं।

सैफ की बेटी सारा पर मौलानाओं का हल्ला बोल.. बोले हिम्मत कैसे हुई तिलक लगा पूजा करने की जब बुतपरस्ती है हराम.. देव केदारनाथ की थी पूजा

सैफ की बेटी सारा पर मौलानाओं का हल्ला बोल.. बोले हिम्मत कैसे हुई तिलक लगा पूजा करने की जब बुतपरस्ती है हराम.. देव केदारनाथ की थी पूजा

इस्लाम समाज के ठेकेदार उलेमाओं की शरीयत चोटिल हो जाती है महिलाओं की सशक्तिकरण से। इस्लाम हर वक़्त खतरे में ही रहता है। खुदा इतना कमजोर है इनका की एक लड़की के छोटे से क्रिया कलाप से डर जाता है। ठेकेदारों को डर है की उनका दूकान न बंद हो जाये बस इस लिए मजहब के ठेकेदार हमला बोल देते है।

नया ममला सैफ अली खान की बेटी सारा जिन्हे एक उलेमा ने सरेआम माफ़ी मांगने के लिए बोला है। सारा केदारनाथ में विशेष पूजा और अर्चना कर माथे पर तिलक लगाया था। जिसके बाद तस्वीरों पर मुस्लिम मजहब के उलेमाओ ने आवाज उठानी शुरू कर दी है। मुस्लिम ठेकेदारों ने कहा की किसी भी मुस्लिम समाज से जुड़े इंसान का हिन्दुओ के धार्मिक स्थल पर पूजा पाठ और अनुष्ठान करना इस्लाम के  खिलाफ है।

ज्वालापुर के मौलाना आसिफ कुरैशी ने कहा की ये सब इस्लाम कतई बर्दास्त नहीं कर सकता। इसलिए सारा को इस्लामिक उलेमाओ से माफ़ी मांगनी होगी। इस्लाम हर दिन इन छोटी छोटी बातो से खतरे में आ जाता है। इस्लाम इतना कमजोर है की एक बच्ची के पूजा अर्चना से अपना अस्तित्व खतरे में महसूस कर रहा है।

source : http://www.sudarshannews.com/category/national/saifs-daughter-sara-attacked-by-maulanas-5653   

 

नोट :  वेद के आधार पर मूर्ति पूजा करना मना है | हम मूर्ति पूजा का समर्थन नहीं करते हैं |

सचमुच वे बेधड़क थे

सचमुच वे बेधड़क थे

हरियाणा के श्री स्वामी बेधड़क आर्यसमाज के निष्ठावान् सेवक और अद्भुत प्रचारक थे। वे दलित वर्ग में जन्मे थे। शिक्षा पाने का प्रश्न ही नहीं था। आर्यसमाजी बने तो कुछ शिक्षा भी प्राप्त कर ली। कुछ समय सेना में भी रहे थे। आर्यसमाज सिरसा हरियाणा में सेवक के रूप में कार्य करते थे। ईश्वर ने बड़ा मीठा गला दे रखा था। जवानी के दिन थे। खड़तालें बजानी आती थीं। कुछ भजन कण्ठाग्र कर लिये। एक बार सिरसा में श्री स्वामी स्वतन्त्रानन्दजी महाराज का शुभ आगमन हुआ। बेधड़कजी ने कुछ भजन सुनाये। श्री यशवन्तसिंह वर्मा टोहानवी का भजन-

सुनिये दीनों की पुकार दीनानाथ कहानेवाले तथा है आर्यसमाज केवल सबकी भलाई चाहनेवाला।

बड़ी मस्ती से गाया करते थे। स्वामी स्वतन्त्रानन्दजी महाराज गुणियों के पारखी थे। आपने श्री बेधड़क के जोश को देखा, लगन को देखा, धर्मभाव को देखा और संगीत में रुचि तथा योग्यता को देखा। आपने बेधड़कजी को विस्तृत क्षेत्र में आकर धर्मप्रचार करने के लिए प्रोत्साहित किया।

बेधड़कजी उज़रप्रदेश, हरियाणा, पञ्जाब, सिंध, सीमाप्रान्त, बिलोचिस्तान, हिमाचल में प्रचारार्थ दूर-दूर तक गये। हरियाणा प्रान्त में विशेष कार्य किया। वे आठ बार देश के स्वाधीनता संग्राम

में जेल गये। आर्यसमाज के हैदराबाद सत्याग्रह तथा अन्य आन्दोलनों में भी जेल गये। संन्यासी बनकर हैदराबाद दक्षिण तक प्रचारार्थ गये। अपने प्रचार से आपने धूम मचा दी।

बड़े स्वाध्यायशील थे। अपने प्रचार की मुनादी आप ही कर दिया करते थे। किस प्रकार के ऋषिभक्त थे, इसका पता इस बात से लगता है कि एक बार पञ्जाब के मुज़्यमन्त्री प्रतापसिंह कैरों ने उन्हें कांग्रेस के टिकट पर एक सुरक्षित क्षेत्र से हरियाणा में चुनाव लड़ने को कहा। तब हरियाणा राज्य नहीं बना था। काँग्रेस की वह सीट खतरे में थी। बेधड़क ही जीत सकते थे।

स्वामी बेधड़कजी ने विधानसभा का टिकट ठुकरा दिया। आपने कहा ‘‘मैं संन्यासी हूँ। चुनाव तथा दलगत राजनीति मेरे लिए वर्जित है। ऋषि दयानन्द ने तो मुझे दलित से ब्राह्मण तथा संन्यासी तक बना दिया। आर्यसमाज ने मुझे ऊँचा मान देकर पूज्य बनाया है और आप मुझे जातिपाँति के पचड़े में फिर डालना चाहते हैं।’’ पाठकवृन्द! कैसा त्याग है? कैसी पवित्र भावना है? जब वे अपने जीवन के उत्थान की कहानी सुनाया करते थे कि वे कहाँ-से-कहाँ पहुँचे तो वे ऋषि के उपकारों का स्मरण करके भावविभोर होकर पूज्य दादा बस्तीराम का यह गीत गाया करते थे-

‘लहलहाती है खेती दयानन्द की’।

इन पंक्तियों के लेखक ने उन-जैसा दूसरा मिशनरी नहीं देखा। लगनशील, विद्वान् सेवक तो कई देखे हैं, परन्तु वे अपने ढंग के एक ही व्यक्ति थे। बड़े वीर, स्पष्टवादी वक्ता, तपस्वी, त्यागी और परम पुरुषार्थी थे। शरीर टूट गया, परन्तु उन्होंने प्रचार कार्य बन्द नहीं किया। खान-पान और पहरावे में सादा तथा राग-द्वेष से दूर थे। बस, यूँ कहिए कि ऋषि के पक्के और सच्चे शिष्य थे।

पण्डित भोजदज़जी आगरावाले आगे निकल गये

पण्डित भोजदज़जी आगरावाले आगे निकल गये

श्री पण्डित भोजदज़जी आर्यपथिक पश्चिमी पञ्जाब में तहसील कबीरवाला में पटवारी थे। आर्यसमाजी विचारों के कारण पण्डित सालिगरामजी वकील प्रधान मिण्टगुमरी समाज के निकट आ गये।

पण्डित सालिगराम कश्मीरी पण्डित थे। कश्मीरी पण्डित अत्यन्त  रूढ़िवादी होते हैं इसी कारण आप तो डूबे ही हैं साथ ही जाति का, इनकी अदूरदर्शिता तथा अनुदारता से बड़ा अहित हुआ है। आज कश्मीर में मुसलमानों ने (कश्मीरी पण्डित ही तो मुसलमान बने) इन बचे-खुचे कश्मीरी ब्राह्मणों का जीना दूभर कर दिया और अब कोई हिन्दू इस राज में-कश्मीर में रह ही नहीं सकता।

पण्डित सालिगराम बड़े खरे, लगनशील आर्यपुरुष थे। आपने बरादरी की परवाह न करते हुए अपने पौत्र का मुण्डन-संस्कार विशुद्ध वैदिक रीति से करवाया। ऐसे उत्साही आर्यपुरुष ने पण्डित

भोजदज़जी की योग्यता देखकर उन्हें आर्यसमाज के खुले क्षेत्र में आने की प्रेरणा दी। पण्डित भोजदज़ पहले पञ्जाब सभा में उपदेशक रहे फिर आगरा को केन्द्र बनाकर आपने ऐसा सुन्दर, ठोस तथा ऐतिहासिक कार्य किया कि सब देखकर दंग रह गये। आपने मुसाफिर1 पत्रिका भी निकाली। सरकारी नौकरी पर लात मार कर आपने आर्यसमाज की सेवा का कण्टकाकीर्ण मार्ग अपनाया। इस उत्साह के लिए जहाँ पण्डित भोजदज़जी वन्दनीय हैं वहाँ पण्डित सालिगरामजी को हम कैसे भुला सकते हैं जिन्होंने इस रत्न को खोज निकाला, परखा तथा उभारा।

आखिर आ ही गया रोहिंग्या का आतंकी कनेक्शन …म्यंमार फ़ौज ने धर दबोचा छुप कर रह रहा पाकिस्तानी पत्रकार

आखिर आ ही गया रोहिंग्या का आतंकी कनेक्शन …म्यंमार फ़ौज ने धर दबोचा छुप कर रह रहा पाकिस्तानी पत्रकार

पाकिस्तान आतंक का निर्यात करता है। पाकिस्तान उन मुसलमानो को भड़कते है और उनसे आतंकवाद फैलवाते है। अब रोहंगिया मुसलमानो को भी इन्होने आतंकी बनाया और अब इसके सुबूत भी सामने आ रहे है। भारत में रोहंगिया मुसलमान एक साजिस के तहत भेजे गए है। ये कभी भी बम्ब की तरह फट सकते है और ये फट क्या सकते है फट रहे है। फ़रीदाबाद का मामला ले लें और हाल का मामला जयपुर का जहाँ रोहंगिया मुसलमानो ने थाने तक को आग लगा दी। आपको बता दे की रोहंगिया मुसलमनो का आतंकी पाकिस्तान से कनेक्शन साक्ष्य मिले है।

पाकिस्तान चैनल बोल के एंकर आमिर लियाकत जो बेहद आक्रमख ढंग से टीवी पर अपनी बात रखते हैं। आमिर म्यांमार जाकर रोहिंग्या मुसलमानों से चुपके से मिलना चाहते थे। आपको बता दे की म्यांमार गए आमिर को एयरपोर्ट से ही हिरासत में ले लिया गया है। इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को म्यांमार के राजदूत को तलब कर रोहिंग्या मुद्दे पर विरोध दर्ज किया। बयान के अनुसार, “पाकिस्तान ने राजदूत यू विन नैंग को रोहिंग्या पर हो रहे अत्याचार पर ठोस कदम उठाने के लिए कहा।

विदेश मंत्रालय ने तत्काल प्रभाव से रोहिंग्या मुस्लिमों पर हो रहे उत्पीड़न को रोकने की मांग की।” अब पाकिस्तान खुल कर रोहंगिया आतंकियों के साथ खड़े हो गए है जैसा की उनका फितरत है। लाख मना करो साँप अपनी फितरत नहीं बदल सकता। गौरतलब हो की इमाम बुखारी भी रोहंगिया मुसलामानों के पक्ष में खड़े हो गए है।
source http://www.sudarshannews.com/category/international/pakistani-journalist-arrested-in-myanmar-5920

 

वे सूचना मिलते ही पहुँच जाते थे

वे सूचना मिलते ही पहुँच जाते थे

आर्यसमाज की प्रथम पीढ़ी के नेताओं तथा विद्वानों में श्री पण्डित सीतारामजी शास्त्री कविरंजन रावलपिण्डी का नाम उल्लेखनीय है। आप पण्डित गुरुदज़जी विद्यार्थी के साथी-संगियों में से एक थे। अष्टाध्यायी के बड़े पण्डित थे। आपने वर्षों आर्यसमाज के उपदेशक के रूप में आर्य प्रतिनिधि सभा पञ्जाब में कार्य किया। फिर स्वतन्त्र धन्धा करने का विचार आया तो कलकज़ा चले गये। वहाँ भारत प्रसिद्ध वैद्य कविराज विजय रत्नसेन के चरणों में बैठकर कविरंजन की उपाधि प्राप्त करके पहले अमृतसर फिर रावलपिण्डी में औषधालय खोलकर बड़ा नाम कमाया।

आप वेद, शास्त्र, ब्राह्मणग्रन्थों के बड़े मर्मज्ञ विद्वान् थे। अष्टाध्यायी के बड़े प्रचारक थे। यदि कोई कहता कि अष्टाध्यायी का पढ़ना-पढ़ाना अति कठिन है तो उसकी पूरी बात सुनकर उसका

ऐसा युक्तियुक्त उज़र देते कि सुनने वाला सन्तुष्ट हो जाता था।

कविराजजी की कृपा से ही डॉज़्टर केशवदेवजी शास्त्री बन पाये। आपकी प्रेरणा से आर्यसमाज को और भी कई संस्कृतज्ञ प्राप्त हुए। आपने कलकज़ा में अध्ययन करते हुए, वहाँ भी आर्यसमाज

की धूम मचा दी। आपका वहाँ ब्राह्मसमाज के पण्डितों से तथा नेताओं से गहरा सज़्पर्क रहा।

एक समय ऐसा आया कि सारा ब्राह्मसमाज आर्यसमाज में मिलने की सोचने लगा फिर कोई विघ्न पड़ गया। ब्राह्मसमाजियों में आर्यसमाज में विलीन होने का विचार पैदा हुआ तो इसका कारण मुज़्यरूप से कविराज सीतारामजी के प्रयास थे। यह सारी कहानी हम कभी इतिहास प्रेमियों के सामने रखेंगे। सब तथ्य हमने एक लेख में पढ़े थे। वह लेख खोजकर फिर विस्तार से इस विषय पर लिखा जाएगा।

कविराज ने अपनी विद्वज़ा तथा अपनी वैद्यक से आर्यसमाज को बहुत लाभान्वित किया। उन दिनों आर्यसमाज में संस्कृतज्ञ बहुत कम थे। अमृतसर में यह देखा गया कि जब कभी किसी

संस्कार में या किसी समारोह में कविराज जी को बुलाया गया तो आप एकदम सब कार्य छोड़कर अपनी आर्थिक हानि की चिन्ता न करते हुए वहाँ पहुँच जाते। बस, उन्हें आर्यसमाज की सूचना

मिलनी चाहिए। वे शरीर से स्वस्थ थे। जीवन बड़ा नियमबद्ध था।

स्वाध्याय तथा सन्ध्या में प्रमाद करने का प्रश्न ही न था। वे मास्टर आत्माराम अमृतसरी के अभिन्न मित्र थे। वैसे शास्त्रीजी की मित्र-मण्डली बहुत बड़ी थी। उन्हें मित्र बनाने की कला आती

थी।

जिसे आप सोच कर भेज रहे ज्ञान का मंदिर, असल में वो बन चुके हैं उनके यौन शोषण व क़त्ल के अड्डे … पढ़िए मैकाले की साजिश

जिसे आप सोच कर भेज रहे ज्ञान का मंदिर, असल में वो बन चुके हैं उनके यौन शोषण व क़त्ल के अड्डे … पढ़िए मैकाले की साजिश

छोटे मासूम बच्चे जिन्हे बलात्कार और यौन शोषण का मतलब तक नहीं पता, उनके साथ स्कूल में ऐसा कुकर्म किया जा रहा जिस से वे मासूम बच्चे इतने सहम गए है कि स्कूल का नाम सुन कर ही थर-थर कापने लगते है. स्कूल जिसे हिंदुत्व में विद्या का मंदिर भी कहा जाता है आज हिन्दुस्थान में उसकी छवी इतनी बिगाड़ दी गयी है कि माता पिता अपने बच्चो को स्कूल भेजने से पहले लाख बार सोच ने लगे है. वजह है स्कूलों में मासूम बच्चो के साथ यौन शोषण की बढ़ती घटनाये। आकड़ो के अनुसार भारत के ईसाई कान्वेंट स्कूलों में पढ़ाई की आड़ में बच्चों के साथ योन शोषण की घटनाओ में इज़ाफ़ा हुआ है.

जिसमे ताज़ा मामला केरल के कोच्ची के किंग्स डेविड इंटरनेशनल स्कूल का है. जहाँ के प्रिंसिपल फादर बेसिल कुरियाकोस ने 10 साल के मासूम का यौन शोषण किया। बेटे के साथ हुई इस घटिया हरकत का जब माता पिता को पता चला तो उन्होंने 65 वर्षीया पादरी बेसिल कुरियाकोस की शिकायत पुलिस में दर्ज की जिसके बाद पुलिस ने आरोपी फादर बेसिल कुरियाकोस को गिरफ्तार किया। बता दें कि ऐसी घटनाये पहले भी सामने आयी है जिसमे पादरी ने मासूम का शोषण किया हो. इन घटनाओ में आरोपी पादरियों की उम्र 50 साल या उससे उपर रही है.

आकड़ो के अनुसार कान्वेंट स्कूलों में यौन शोषण के मामले सबसे ज्यादा रहे है. कान्वेंट स्कूल ही नहीं बल्कि चर्चो में भी पादरियों द्वारा मासूमो के साथ बलात्कार के मामले भी सामने आते रहते हैं. जहाँ मज़हब के नाम पर ईसाई मज़हब गुरु मासूम का शोषण करते है. जिसमे  सबसे खौफनाक घटना 2014 में केरल के त्रिचूर में सेंट पॉल चर्च की है जहाँ के पादरी राजू कोक्कन को 9 वर्षीय बच्ची के साथ कई बार बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया

एक रिपोर्ट के अनुसार यह देखा गया है कि बिना जांच के ही किसी को भी पादरी का पद दे दिया जाता है जिसके बाद ऐसी घटनाये सामने आती है जिस पर गौर फरमाने की ज़रूरत है. कान्वेंट स्कूल और चर्च के ऐसे मामले भी सामने आये है जहाँ लोगो का जबरन मज़हब परिवर्तन कराया गया. ऐसी घटनाओ के मद्दे नज़र शासित सरकार ने धर्मांतरण कानून भी बनाया है. जिसका जमकर विरोध भी किया गया. विरोध के जरिये इस कानून को हटाने की मांग की गयी. कान्वेंट स्कूल में बच्चो के प्रति बढ़ रहे अपराध एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है जिस पर जल्द ही कोई ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है.

source : http://www.sudarshannews.com/category/national/rise-in-rape-incident-in-convent-schools-and-churches–5884