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मेरी क्रिसमस विवेकानंदी हिन्दुओं!

आज जब ये प्रश्न कहीं भी पूछा जाता है कि हिन्दुओं की प्रेरणा कौन है?

तो एक ही उत्तर आता है स्वामी विवेकानन्द जी और उनकी संस्था यानी स्वामी विवेकानन्द के नक्शे-कदम पर चलने वाली उनकी प्रेरणा, उनके मंतव्यों पर आधारित संस्था रामकृष्ण मिशन

स्वामी विवेकानन्द का योगदान इस देश और वैदिक धर्म के लिए कितना रहा?

यह सवाल आज तक सवाल ही है क्योंकि इसमें उनका योगदान कुछ रहा ही नहीं।

उन्होंने शिकागो में केवल एक भाषण दिया था और उस एक भाषण को इतना बढ़ा चढ़ाकर दिखाया गया जैसे समग्र वैदिक धर्म, समग्र हिन्दू जाति का उस एक भाषण मात्र से ही उद्धार हो गया हो।

वास्तव में कोई स्वामी विवेकानंद को पढ़ ले, उनकी जीवनी, जो स्वयं उन्ही की संस्था से छपी हुई है, पढ़ ले तो विशवास मानिए आप अपनी सोच पर तरस खायेंगे की आपने कैसे इंसान को अपना आइडियल मान लिया था।

वेदों में मांसाहार, ब्राह्मणों द्वारा मांस भक्षण आदि बातों का डंका यदि विदेशों में किसी ने बजाया है तो वो हिन्दुओं के प्रेरणा स्तम्भ विवेकानन्द जी ने ही बजाया है!

मैंने इस क्रिसमस पर कई हिन्दुओं को ईसा और सांता का विरोध करते देखा है।

और दूसरी तरफ वही हिन्दू विवेकानन्द को अपना आदर्श मान रहा है।

भाई ये दोगलापन क्यों??

सोच रहे होंगे की में यह सब क्यों लिख रहा हूँ?

जो हिन्दू विवेकानंद जी को अपना आदर्श मानते है वही दूसरी तरफ ईसा या सांता का विरोध कर रहे है तो आपके लिए खबर है कि

इस क्रिसमस डे पर रामकृष्ण मिशन में हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी क्रिसमस डे मनाया गया है।
और बहुत ही निराले अंदाज में एक बहुत बड़ा हथकंडा अपनाया गया है अवतारवादी हिन्दूत्व संस्कृति में एक नये अवतार ईसा को लाने का।

बाइबिल में जबरदस्ती नव वेदान्त खोजने वाली इस संस्था और इससे जुड़े सभी लोगों का भारत के ईसाईकरण में एक महत्वपूर्ण योगदान रहा था, रहा है और आगे भी रहेगा।

रामकृष्ण मिशन से छपी ईसा पर एक पुस्तक के कुछ चित्र देखें:

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विश्वास मानिए की इतने खुलासे के बाद भी हिन्दू नहीं सम्भलेगा। वो स्वामी दयानंद सरस्वती को अपना आदर्श नहीं मानेगा जिन्होंने वैदिक धर्म की रक्षार्थ अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।

जिनके शिष्यों ने भी इस पथ पर अग्रसर रहते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए ।

इन हिन्दुओं को मांसाहारी विवेकानंद तो प्रिय है परन्तु धर्म रक्षक स्वामी श्रद्धानंद जी के बारे में जानकारी तक नहीं है।
स्वामी विवेकानंद पर कुछ शोध प्रस्तुत है:

1. आदर्श सन्यासी -स्वामी विवेकानन्द : प्रो धर्मवीर

2. आदर्श संन्यासी–स्वामी विवेकानन्द भाग -२ : धर्मवीर जी

3. प्राचीन काल में यज्ञ में पशु बलि विचारधारा को पोषित करते स्वामी विवेकानंद और सत्य

4. स्वामी विवेकानन्द का हिन्दुत्व : स्वामी सत्यप्रकाश सरस्वती की दृष्टि में

खैर हिन्दुओं के आदर्श स्वामी विवेकानंद जी की संस्था जो उनके आदर्शों का ही अनुशरण करती है रामकृष्ण मिशन द्वारा क्रिसमस डे मनाया गया।
ये सूचना स्वयं वेलूर मठ के आधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त हुई है। देखिए वेलूर मठ क्रिसमस डे के कुछ यादगार पल:
CHRISTMAS EVE 2016 : PHOTOS

तो पण्डित लेखराम वैदिक मिशन आपको यानी सभी विवेकानंदी हिन्दुओं को क्रिसमस डे की बधाई देता है। और ईश्वर से प्रार्थना करता है कि दिखते हुए कुएँ में गिर रहे मेरे हिन्दू यानी हमारे भटके सनातनी वैदिक धर्मियों को सद्बुद्धि दें उन्हें सन्मार्ग दिखाए और झूठे धार्मिक लोगों से सतर्क रखे।

इसी के साथ सभी आर्यों के साथ पंडित लेखराम वैदिक मिशन स्वामी श्रद्धानंद बलिदान दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजली अर्पित करता है और ईश्वर से प्रार्थना करता है की हममे ये लगन लगा दो की हर आर्य एक श्रद्धानंद बनकर निकले।

ओ३म्

बाइबिल समीक्षा : युसूफ का पिता कौन?

ईसा का पिता तो कोई नहीं, ऐसा ईसाई स्वयं मानते फिरते हैं, लेकिन यदि बाइबिल पढ़ें तो स्थान स्थान पर ईसा का पिता युसूफ है, जो मरियम का पति था।

लेकिन चौकाने वाला तथ्य यह है, की युसूफ का पिता कौन था ?

मत्ती के अनुसार, युसूफ का पिता याकूब था, लेकिन लूका में ईसा स्वयम कहता है, मेरे (ईसा) पिता युसूफ का पिता एली था।

कहीं देखि है ऐसी विचित्र वंशावली?


16 और याकूब से यूसुफ उत्पन्न हुआ; जो मरियम का पति था जिस से यीशु जो मसीह कहलाता है उत्पन्न हुआ॥

(मत्ती, अध्याय १)


23 जब यीशु आप उपदेश करने लगा, जो लगभग तीस वर्ष की आयु का था और (जैसा समझा जाता था) यूसुफ का पुत्र था; और वह एली का।

(लूका, अध्याय ३)

समीक्षा : क्या युसूफ के दो-दो पिता थे? भला ये कभी संभव है कि दो व्यक्ति के वीर्य से एक पुत्र उत्पन्न हो? ईसाइयों को चाहिए कि इस विषय पर स्पष्टकरें कि युसूफ के दो-दो बाप होने का कारण क्या है?
क्या ये इस्राइली यहोवा का पक्षपात न माना जावे कि यीशु को एक भी बाप न दिया और बदले में युसूफ को दो-दो बापों की सौगात दे दी?
हाँलाकि भारत जैसे संस्कारी देश में दो बाप का औलाद एक बहुत गंदी गाली है। लेकिन यरोप आदि महादेशों में ये कोई नया नहीं कि उन्हें अपने पिता का नाम ना मालूम हो। लगता है ये प्रथा भी बाइबिल से ही आई है।

ईसाईयत समीक्षा : यीशु अच्छा चरवाहा है

ईसाइयों की मान्यता है कि यीशु ईशपुत्र थे। सर्वज्ञानी थे, सबके पापों को छुड़ाने आये थे आदि।
और सभी ईसाई यीशु के इन गुणों का बखान करते ही रहते हैं।
लेकिन आपने बहुत कम ईसाइयों को ये कहते सुना होगा कि यीशु अच्छा चरवाहा है।

जी हाँ! मैं नहीं कह रहा। स्वयं बाइबिल में यीशु ने बोला है।

I am the good shepherd, and the good shepherd gives his life for the sheep.”

[ John 10 | 11 ]

अच्छा चरवाहा मैं हूँ! अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपनी जान दे देता है।”

[ युहन्ना १० | ११ ]

समीक्षा : अब देखिए ये भी कोई ईश्वर होता है क्या? भला ईश्वर चरवाहा बनकर दिनभर धूप में क्यों दौड़े? क्या यीशु को अन्य काम नहीं था जो चरवाही करने लग गया था? और यीशु दिनभर चरवाही करते होंगे तो पैगम्बरी कब करते होंगे, चमत्कार कब करे होंगे?
और जहाँ तक जान देने का प्रश्न है! ये तो पूर्णतः ही असत्य है। क्योंकि बाइबिल वाले स्वयं मानते हैं कि यीशु नहीं मर सकता।
तो फिर यहाँ ये लिखना सिद्ध करता है कि या तो यीशु अच्छा चरवाहा नहीं था या यीशु मर भी सकता है।
अब ये ईसाइयों पर है कि वो यीशु की बात को मानें कि यीशु मर सकता है या अपने मिथ्या का प्रचार करें कि यीशु जीवित है।

ईसाईयत समीक्षा : आकाश खुला और यहोवा का आत्मा कबूतर की तरह नीचे उतरा

ईसाइयों का यहोवा भी बड़ा विचित्र है। कभी वो धरती पर उतर आता है, कभी बहुत पछताता है, तो कभी कुछ।
अब तो हद ही हो गयी। एक बार तो यहोवा का आत्मा कबूतर की तरह नीचे पृथिवी पर उतरा। नहीं विश्वास तो स्वयं प्रमाण देखिए—

And Jesus being baptized, forthwith came out of the water: and lo, the heavens were opened to him: and he saw the Spirit of God descending as a dove, and coming upon him.

[ Matthew 3 | 16 ]

और तब यीशु ने बपतिस्मा ले लिया। जैसे ही वह जल से बाहर निकला, आकाश खुल गया। उसने यहोवा की आत्मा को एक कबूतर की तरह नीचे उतरते और अपने ऊपर आते देखा।

[ मत्ती ३ | १६ ]

समीक्षा : इस प्रसंग को पढ़कर निश्चित ही कुछ प्रश्न उत्पन्न होते हैं। ईसाइयों को चाहिए कि इसका शंका समाधान करें।

१. भला आकाश भी कभी खुल सकता है क्या? आकाश तो अदृश्य है।

२. आकाश खुला और यहोवा की आत्मा नीचे आई से अर्थ स्पष्ट है कि ईसाइयों के अनुसार आकाश के पीछे भी कुछ है जहाँ यहोवा रहता है?

३. अब विचारने की बात है कि यहोवा की आत्मा नीचे क्या करने आया था?

४. यहोवा की आत्मा नीचे आया होगा तो यहोवा मर गया होगा? जो मरा होगा तो सृष्टि कौन चला रहा होगा?

५. आत्मा कबूतर की तरह नीचे आया इसका अर्थ क्या है?

६. क्या निराकार आत्मा कभी कबूतर बन सकता है?

७. कबूतर रूपी आत्मा यीशु के उपर क्या करने आ रहा था?

भला आकाश के खुलने वाली बातें करने वाला तथा जिसकी आत्मा ही कबूतर बनके उड़ जाए, वो परमेश्वर तो नहीं हो सकता। हाँ यहोवा अवश्य हो सकता है।

जब यहोवा बहुत पछताया….

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बाइबिल के यहोवा की एक से एक लीला है। कहने को तो वो सर्वशक्तिमान्, सर्वज्ञादि गुणों से पूर्ण है। अपितु झूठ कितने दिनों तक चलता? आइए विना प्रमाण हम बातें हीं नहीं करते। देखिए प्रमाण—

तौरेत, उत्पत्ति | ६ | ६,७–

और यहोवा पृथिवी पर मनुष्य को बनाने से पछताया, और वह मन में अति खेदित हुआ॥६॥

तब यहोवा ने सोचा, कि मैं मनुष्य को जिसकी मैंने सृष्टि की है पृथिवी के ऊपर से मिटा दूँगा; क्या मनुष्य, क्या पशु, क्या रेंगने वाले जन्तु, क्या आकाश के पक्षी, सबको मिटा दूँगा क्योंकि मैं उनके बनाने से पछताता हूँ॥७॥

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समीक्षा :

१. अब देखिए भला ये कैसा यहोवा है जो अपने काम को स्वयं करके पछताता और दुःखी होता है?

२. यहोवा दुःखी हुआ होगा तो रोया भी होगा? उसे चुप कौन कराता होगा?

३. इतना कमजोर यहोवा किसे चाहिए जो स्वयं दुःखी हो जाए वो मनुष्यों के दुःख को क्या हरेगा?

बाइबिल के यहोवा का भयंकर विज्ञान

जी हाँ इतना विज्ञानं आप सुनकर चौंक जायेंगे –

वैसे तो किसी भी पशु का मांस नहीं खाना चाहिए – क्योंकि ये मनुष्यता नहीं –
फिर भी यहोवा को कुछ अकल आई और उसने कुछ पशुओ को अशुद्ध ठहरा दिया – उन पशुओ में सूअर, शापान आदि के साथ साथ एक जानवर आपने देखा होगा – “खरगोश” – इसके मांस को – यहोवा ने अशुद्ध बताया है –

आइये एक नजर डालिये – की इन पशुओ में क्या ऐसा है जो इनको अशुद्ध बनाता है – और अन्य पशुओ को शुद्ध –

1 फिर यहोवा ने मूसा और हारून से कहा,

2 इस्त्राएलियों से कहो, कि जितने पशु पृथ्वी पर हैं उन सभों में से तुम इन जीवधारियों का मांस खा सकते हो।

3 पशुओं में से जितने चिरे वा फटे खुर के होते हैं और पागुर करते हैं उन्हें खा सकते हो।

4 परन्तु पागुर करने वाले वा फटे खुर वालों में से इन पशुओं को न खाना, अर्थात ऊंट, जो पागुर तो करता है परन्तु चिरे खुर का नहीं होता, इसलिये वह तुम्हारे लिये अशुद्ध ठहरा है।

5 और शापान, जो पागुर तो करता है परन्तु चिरे खुर का नहीं होता, वह भी तुम्हारे लिये अशुद्ध है।

6 और खरहा, जो पागुर तो करता है परन्तु चिरे खुर का नहीं होता, इसलिये वह भी तुम्हारे लिये अशुद्ध है।

7 और सूअर, जो चिरे अर्थात फटे खुर का होता तो है परन्तु पागुर नहीं करता, इसलिये वह तुम्हारे लिये अशुद्ध है।

8 इनके मांस में से कुछ न खाना, और इनकी लोथ को छूना भी नहीं; ये तो तुम्हारे लिये अशुद्ध है॥
(लैव्यव्यवस्था, अध्याय ११)

तो देखा आपने – शुद्ध और अशुद्ध का निराकरण करना – वो भी बाइबिल के यहोवा का तर्कसम्मत विज्ञानं ?

क्या कोई जीव – ईश्वर की नजर में अशुद्ध है ?

फिर बनाया क्यों ?

अब क्या ऐसे को जो अपनी ही बनाई सृष्टि में कुछ पक्षपात करता डोलता है – शुद्ध अशुद्ध का भेद करके – उसे ईश्वर कह सकते हैं –

चलिए इस विषय पर फिर कभी चर्चा करेंगे अभी तो ऊपर की आयत में यहोवा का भयंकर विज्ञानं पढ़िए – हंसी आएगी = की बाइबिल का यहोवा – इतना मुर्ख ?

3 पशुओं में से जितने चिरे वा फटे खुर के होते हैं और पागुर करते हैं उन्हें खा सकते हो।

यानी जो पशु जुगाली करते हो और उनके खुर फटे हो – यानी खुर (hoof) में फटाव हो – अथवा बंटे हो – ये दोनों स्थति होनी चाहिए =

अब देखिये – यहोवा का मंदबुद्धि विज्ञान

6 और खरहा, जो पागुर तो करता है परन्तु चिरे खुर का नहीं होता, इसलिये वह भी तुम्हारे लिये अशुद्ध है।

यहाँ खरगोश को अशुद्ध बताया है – यानी खरगोश जुगाली तो करता है मगर उसके खुर फटे नहीं होते –

किसी भाई ने खरगोश को जुगाली करते देखा ?

खरगोश के खुर फटे होते हैं –

क्या ये नार्मल सी बाते भी बाइबिल के यहोवा को नहीं मालूम ?

हाँ केवल आदम हव्वा से दुनिया के अनेक मनुष्य बनाता है – इतना ही अक्ल है –

वाह जी वाह – क्या विज्ञानं है यहोवा का ?

इतने पर भी मेरे ईसाई मित्र कहते हैं –

बाइबिल में विज्ञानं है –

भाई ऐसे विज्ञानं को आप ही पढ़ो और आप ही बांटो –

हम से न होगा –

हंसो मत भाई – यहोवा को बुरा लग गया – तो क़यामत भेज देगा –

बताओ इतना मंदबुद्धि और कम अक्ल वाला बाइबिल का यहोवा अपने को सर्वज्ञ और ईश्वर कहलवाता है –

मेरे ईसाई मित्रो – इस विज्ञानं पर कुछ बोलना है ?

ज्ञान और विज्ञानं वेद में है – उसे अपनाओ

इस ढोंग को छोडो – धर्म से नाता जोड़ो –

लौटो वेदो की और

नमस्ते

इस्लाम और ईसाइयत का इतिहास एक नज़र में

क्या हजरत आदम और उनकी बेगम हव्वा – कभी थे भी ?????

ये सवाल इसलिए बहुत महत्वपूर्ण है – क्योंकि – ये जानना बहुत जरुरी है इसलिए नहीं कि कोई मनगढंत बात है या सवाल है –

क्या कोई वैज्ञानिक प्रमाण मिला है आज तक जो इनके प्रेम प्रतीक –
अथवा त्याग और बलिदान की मिसाल पेश करे ??

अब कुछ लोग (ईसाई और मुस्लमान) अपने अपने धारणा के हिसाब से बेबुनियाद बात करते हुए कहेंगे की –

ये जो मानव जाती है – ये इन्ही आदम और हव्वा से चली है – जो की “स्वघोषित” अल्लाह मियां अथवा तथाकथित परमेश्वर “यहोवा” ने बनाई थी –

जब बात आती है – भगवान श्री राम और योगेश्वर श्रीकृष्ण आदि की तो इन्हे (ईसाई और मुस्लमान) को ठोस प्रमाण चाहिए –

जबकि – रामसेतु इतना बड़ा प्रमाण – श्री लंका – खुद में एक अकाट्य प्रमाण – फिर भी नहीं मानते –

महाभारत के इतने अवशेष मिले – आज भी कुरुक्षेत्र जाकर आप स्वयं देख सकते हैं – दिल्ली (इंद्रप्रस्थ) पांडवकालीन किला आज भी मौजूद है जिसे पुराना किला के नाम से जाना जाता है।

इतना कुछ है – फिर भी कुछ समूह (ईसाई और मुस्लमान) मूर्खो जैसे वही उवाच करते हैं – प्रमाण लाओ –

आज हम इस समूह (ईसाई और मुस्लमान) से कुछ जवाब मांगते हैं –

1. हज़रत आदम और हव्वा यदि मानवो के प्रथम पूर्वज हैं तो – क्यों औरत आदमी से पैदा नहीं होती ???? ऐसा इसलिए क्योंकि प्रथम औरत (हव्वा) आदम की दाई पसली से निर्मित की गयी – क्या किसी शैतान ने बाइबिल और क़ुरान के तथाकथित अल्लाह का निज़ाम उलट दिया ?? या कोई और शक्ति ने ये चमत्कार कर दिया ??? जिसे आज तक अल्लाह या यहोवा ठीक नहीं कर पाया – यानि की एक पुरुष संतान को उत्पन्न करे न की औरत ???

2. यदि बाइबिल और क़ुरान की ये बात सही है कि यहोवा या अल्लाह ने हव्वा को आदम की पसली से बनाया तो आदम यानि की सभी पुरुषो की एक पसली क्यों नहीं होती ???????? और जो हव्वा को एक पसली से ही पूरा शरीर निर्मित किया तो हव्वा को भी एक ही पसली होनी चाहिए – या यहाँ भी कोई शैतान – यहोवा या अल्लाह पर भारी पड़ गया और यहोवा और अल्लाह की बनाई संरचना में – बड़ा उलटफेर कर दिया जिसे आजतक यहोवा या अल्लाह ने कटाई छटाई का हुक्म देकर अपना बड़प्पन साबित करने की नाकाम कोशिश की ???????

3. यहोवा या अल्लाह ने आदम और हव्वा की संरचना कहा पर की ?? क्या वो स्थान किसी वैज्ञानिक अथवा researcher द्वारा खोज गया ????

4. हज़रत आदम और हव्वा ने ऐसा क्या काम किया जिसकी वजह से उन दोनों को स्वर्ग (अदन का बाग़) से बाहर निकल दिया गया ?? क्या अपने को नंगा जान लेना और जो कुछ बन पाये उससे शरीर को ढांप लेना – क्या गुनाह है ????? क्या जीवन के पेड़ से बुद्धि को जागरूक करने वाला फैला खाना पाप था ????? ये पेड़ किसके लिए स्वर्ग (अदन का बाग़) में बोया गया और किसने बोया ???? क्या खुद यहोवा या अल्लाह को ऐसे पेड़ या फल की आवश्यकता थी या है ??? अगर नहीं तो फिर आदम और हव्वा को खाने से क्यों खुद यहोवा या अल्लाह ने मना किया ??? क्या यहोवा या अल्लाह – हज़रत आदम और हव्वा को नग्न अवस्था में ही रखना चाहते थे ???? या फिर यहोवा या अल्लाह नहीं चाहता था की वो क्या है इस बात को हज़रात आदम या हव्वा जान जाये ????

5. यहोवा या अल्लाह द्वारा बनाया गया – अदन का बाग़ – जहा हजरत आदम और हव्वा रहते थे – जहा से शैतान ने इन दोनों को सच बोलने और यहोवा या अल्लाह के झूठे कथन के कारण बाहर यानि पृथ्वी पर फिकवा मारा – बेचारा यहोवा या अल्लाह – इस शैतान का फिर से कुछ न बिगाड़ पाया – खैर बिगाड़ा या नहीं हमें क्या करना – हम तो जानना चाहते हैं – ये अदन का बाग़ मिला क्या ??????

6. यहोवा या अल्लाह द्वारा – आदम और हव्वा को उनके सच बोलने की सजा देते हुए और अपने लिए उगाये अदन के बाग़ और उस बाग़ की रक्षा करने वाली खडग (तलवार) से आदम और हव्वा को दूर रखने के लिए पृथ्वी पर भेज दिया गया। मेरा सवाल है – किस प्रकार भेजा गया ??? क्या कोई विशेष विमान का प्रबंध किया गया था ???? ये सवाल इसलिए अहम है क्योंकि बाइबिल के अनुसार यहोवा उड़ सकता है – तो क्या उसकी बनाई संरचना – आदम और हव्वा को उस समय “पर” लगाकर धरती की और भेज दिया गया – या कोई अन्य विकल्प था ???

ये कुछ सवाल उठे हैं – जो भी कुछ लोग (ईसाई और मुस्लमान) श्री राम और कृष्ण के अस्तित्व पर सवाल उठाते हैं – अब कुछ ठोस और इतिहास की नज़र में ऐसे अकाट्य प्रमाण लाओ जिससे हज़रत आदम और हव्वा का अस्तित्व साबित हो सके – नहीं तो फ़र्ज़ी आधार पर की गयी मनगढंत कल्पनाओ को खुद ही मानो – और ढोल पीटो – झूठ के पैर नहीं होते – और सत्य कभी हारता नहीं – ध्यान रखना –

वो जरा इन सवालो के तर्कपूर्ण और वैज्ञानिक आधार पर जवाब दे – नहीं तो अपना मुह बंद रखा करे।

नोट : कृपया दिमाग खोलकर और शांतिपूर्ण तरीके से तार्किक चर्चा करे – आपका स्वागत है – गाली गलौच अथवा असभ्य बर्ताव करने पर आप हारे हुए और जानवर घोषित किये जायेंगे।

सहयोग के लिए –

धन्यवाद –