भगवान आर्यों को पहली लगन लगा दे | रचयिता पं.स्त्यपाल पथिक

 

 

 

 

Lekhram

भगवान आर्यों को पहली लगन लगा दे |

वैदिक धर्म की खातिर मिटना इन्हें सिखा दे ||

फिर राम कृष्ण निकलें घर-घर गली-गली से |

अर्जुन व कर्ण जैसे योद्धा रणस्थली से ||

भीष्म से ब्रह्मचारी और भीम महाबली से |

गौतम कणाद जैमिनी ऋषिवर पतंजलि से ||

फिर से कोई दयानंद जैसा ऋषि दिखा दे |

भगवान आर्यों को पहली लगन लगा दे ||

ऐसे हों लाल पैदा खेलें जो गोलियों से |

भूमि को तृप्त करदें श्रद्धा की झोलियों से ||

गूंजे यह देश मेरा शेरो की बोलियों से |

बिस्मिल गुरु भगत सिंह वीरों की टोलियों से ||

इन को वतन की खातिर फांसी पे भी हँसा दे |

भगवान आर्यों को पहली लगन लगा दे ||

कोई लेखराम जैसा गुरुदत्त सा आज होवे |

कोई श्रद्धानन्द होवे कोई हंसराज होवे ||

बढती बीमारियों का फिर से इलाज होवे |

नेतृत्व जिनका पाकर उन्नत समाज होवे ||

बेधड़क लाजपत सा फिर से पथिक बना दे |

भगवान आर्यों को पहली लगन लगा दे ||

वैदिक धर्म की खातिर मिटना इन्हें सिखा दे ||

भगवान आर्यों को पहली लगन लगा दे |

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4 thoughts on “भगवान आर्यों को पहली लगन लगा दे | रचयिता पं.स्त्यपाल पथिक”

  1. I am a big fan of pandit satyapal pathik since childhood. All his bhajans have some message to the society.

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